विदेश – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Fri, 21 Feb 2025 14:42:20 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 G20 की चल रही थी मीटिंग, फिर शी जिनपिंग के दूत से चीनी समकक्ष वांग यी से मिले जयशंकर https://samacharpacheesa.com/?p=15441 Fri, 21 Feb 2025 14:42:20 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=15441 विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को जोहान्सबर्ग में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अपनी चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की. जयशंकर इस बैठक में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका में दो दिवसीय यात्रा पर हैं. जयशंकर ने इस बैठक की जानकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ पर साझा की, जिसमें उन्होंने वांग यी से मुलाकात के दौरान ली गई कुछ तस्वीरें पोस्ट की. उन्होंने लिखा, “जोहनसबर्ग में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान इस सुबह चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात करने का अवसर मिला.”

यह मुलाकात भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय मुद्दों और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चल रही कूटनीतिक बातचीत के बीच हुई है. गुरुवार को जी20 सत्र ‘वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति पर चर्चा’ में अपने भाषण में, जयशंकर ने कहा कि जी20 दुनिया की बढ़ती बहुध्रुवीयता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है. उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति को कठिन बताते हुए कहा, “कोविड महामारी, संघर्ष की स्थितियाँ, वित्तीय दबाव, खाद्य सुरक्षा और जलवायु संबंधी चिंताएं, इन सभी का असर वर्तमान वैश्विक स्थिति पर है.”

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं, जिनका अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत-चीन संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और कई अन्य द्विपक्षीय मुद्दे लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं. हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव देखा गया है, खासकर गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद इस मुलाकात का उद्देश्य इन जटिल मुद्दों पर बातचीत और संवाद का रास्ता खोलना हो सकता है.

भारत और चीन दोनों ही एशिया के प्रमुख देश हैं और उनका आपसी सहयोग एशियाई और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस मुलाकात के दौरान, संभवतः व्यापार, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अन्य वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई होगी. यह मुलाकात यह संकेत देती है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और राजनयिक संपर्क लगातार जारी हैं, जिसका उद्देश्य भारत-चीन संबंधों को सुधारने और संवाद को मजबूत करना हो सकता है. इससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक स्थिरता और शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं.

जी20 एक प्रमुख मंच है, जो वैश्विक आर्थिक सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यह दुनिया की बड़ी चुनौतियों का सामना करने में सहायक है. जी20 देशों में शामिल हैं: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, अफ्रीकी संघ और यूरोपीय संघ.

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जेलेंस्की का ट्रंप से उठ गया भरोसा, पुतिन से लेंगे बदला, रूस के खिलाफ मैदान-ए-जंग में उतरेगी यूरोप की सेना! https://samacharpacheesa.com/?p=15262 Sat, 15 Feb 2025 14:49:24 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=15262 रूस और यूक्रेन के बीच जंग खत्म करने की डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश किस रास्ते पर जाएगी? यह कहना थोड़ा मुश्किल लग रहा है क्योंकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में ‘यूरोप की सेना’ बनाने के बारे में बात की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को झूठा-कमजोर कहा. दिलचस्प तो यह है कि 47 वर्षीय यूक्रेनी नेता ने जब अपने यूरोपीय सेना के सपने को जिक्र किया, तो उन्होंने इसमें अमेरिकी भागीदारी को कोई जिक्र नहीं था.

यह तब आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन से युद्ध को जल्दी समाप्त करने के लिए तरीका खोजने का निवेदन किया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही ज़ेलेंस्की और पुतिन दोनों के साथ फोन पर बातचीत की है, जिसमें तीनों शांति समझौते पर सहमत होने की कोशिश कर रहे हैं. तानाशाह पुतिन से उम्मीद की जा रही है कि जब वह अंततः ट्रंप से यूक्रेन शांति वार्ता के लिए मिलेंगे तो वह कई पागल मांगें करेंगे.

ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वह किसी भी शांति समझौते को तब तक स्वीकार नहीं करेंगे जब तक उनके देश को सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती. शनिवार को जर्मनी में बोलते हुए, ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नई योजना का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा, “कई नेताओं ने यूरोप के बारे में बात की है और कहा है कि उसे अपनी खुद की सेना की जरूरत है, एक यूरोप की सेना और मुझे लगता है कि समय आ गया है. यूरोप की सशस्त्र सेनाओं का निर्माण किया जाना चाहिए.”

जेलेंस्की ने कहा, “बिना यूक्रेन की सेना के, यूरोप की सेना रूस को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होगी. केवल हमारी सेना के पास यूरोप में असली, आधुनिक युद्ध का अनुभव है, लेकिन हमारी सेना भी अकेले पर्याप्त नहीं है. हमें आपकी मदद की जरूरत है – हथियार, ट्रेनिंग, प्रतिबंध, पैसों की मदद, राजनीतिक दबाव और एकता.” यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोप को नाटो से अलग एक ऐसी सेना बनाने पर विचार करना चाहिए ताकि “अगर अमेरिका यूरोप को किसी मुद्दे पर ना कह दे जो उसे खतरे में डाल सकता है”.

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400 किलो सोना, $2.5 मिलियन कैश! कनाडा की सबसे बड़ी डकैती, चंडीगढ़ में किराए के घर में रहता मिला संदिग्ध https://samacharpacheesa.com/?p=15245 Sat, 15 Feb 2025 06:48:46 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=15245 कनाडा के सबसे बड़े गोल्ड रॉबरी केस में वॉन्टेड सिमरन प्रीत पनेसर इन दिनों चंडीगढ़ के बाहरी इलाके में रह रहा है. एयर कनाडा के पूर्व मैनेजर, पनेसर (32) के खिलाफ कनाडा में देशव्यापी अरेस्ट वारंट जारी किया गया है. भारतीय और कनाडाई मीडिया की एक साझा जांच रिपोर्ट में पता चला है कि वह अपने परिवार के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘सीबीसी न्यूज़: द फिफ्थ एस्टेट, कनाडा’ ने मिलकर पनेसर के घर का दरवाजा खटखटाया. पता चला कि वह किराए के मकान में अपनी पत्नी प्रीति (पूर्व मिस इंडिया युगांडा, सिंगर और एक्टर) के साथ रह रहा है. माना जाता है कि प्रीति इस डकैती में शामिल नहीं थी. पनेसर की लीगल टीम कनाडा में उनके मामले की पैरवी कर रही है.

कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी गोल्ड रॉबरी

अप्रैल 2023 में हुई इस गोल्ड रॉबरी की कहानी एकदम फिल्मी है. लोकेशन थी, टोरंटो के पियर्सन इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कार्गो टर्मिनल. वहां से 6,600 सोने की छड़ें, जिनका कुल वजन 400 किलोग्राम था और लगभग $2.5 मिलियन की फॉरेन करेंसी, चोरी हो गए थे. यह सोना स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख से आई एक फ्लाइट में आया था और कुछ ही घंटों के भीतर गायब कर दिया गया.

जांच के दौरान 40 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज खंगाली गईं, जिससे यह संकेत मिले कि सोने का एक बड़ा हिस्सा चोरी के तुरंत बाद विदेश भेज दिया गया था, खासतौर पर दुबई और भारत. अब तक, पुलिस को $4,30,000 कैश, $89,000 के छह सोने के कंगन, और गोल्ड स्मेल्टिंग के लिए इस्तेमाल किए गए कास्ट और मोल्ड मिले हैं.

पील रीजनल पुलिस ने इस केस की जांच को ‘प्रोजेक्ट 24 कैरेट’ नाम दिया है. 20 अधिकारी इस केस पर पूरे एक साल से काम कर रहे हैं. अब तक नौ संदिग्ध इस मामले में नामजद किए गए हैं, जिनमें पनेसर और परमपाल सिद्धू (एयर कनाडा का एक अन्य कर्मचारी) शामिल हैं. पुलिस का मानना है कि ये दोनों ‘इनसाइडर’ थे और उन्होंने ही डकैती को अंजाम दिलाने में मदद की. पुलिस ने पनेसर के अलावा अर्सलान चौधरी नाम के एक अन्य संदिग्ध को भी चिन्हित किया है, जो दुबई में छिपा हो सकता है.

पनेसर डकैती के समय ब्रैम्पटन (ओंटारियो) में रह रहा था. रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को उसपर शक होता, उससे पहले उसे कार्गो फैसिलिटी का इंस्पेक्शन कराते और पुलिस को गाइड करते देख गया था. पुलिस को जब तक पनेसर की संदिग्ध भूमिका का पता चला, तब तक वह कनाडा छोड़ चुका था और भारत में बस चुका था.

पनेसर ने भारत में बनाया ठिकाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पनेसर भारत में खुलेआम घूम रहा है. फिलहाल वह अपनी पत्नी के संगीत और एक्टिंग करियर को संभाल रहा है. दूसरी तरफ, कनाडा की अथॉरिटीज लगातार उनके सरेंडर का इंतजार कर रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस की टीम जब उनके घर पहुंची, तो उन्होंने कानूनी कारणों का हवाला देते हुए ‘ऑन रिकॉर्ड’ कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

जून 2024 में खबर आई थी कि पनेसर जल्द ही सरेंडर करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कनाडाई अधिकारियों का कहना है कि वे उसके वकील से लगातार संपर्क में हैं, लेकिन पनेसर भारत में ही रहकर कानून से बचने की कोशिश कर रहा है.

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पाकिस्तान कहां-कहां से भेजता है ड्रोन, कौन है सबसे एक्टिव लॉन्च पैड? BSF की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा https://samacharpacheesa.com/?p=15243 Sat, 15 Feb 2025 06:43:02 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=15243 पाकिस्तान की मक्कारी का कोई जवाब नहीं. उससे अपना घर संभलता नहीं. दूसरे के घर में आग लगाने में आगे रहता है. भारत में ड्रग्स और हथियार सप्लाई करने के लिए पाकिस्तान चाल पर चाल चल रहा है. भारत में ड्रग्स, हथियार और गोला-बारूद से लदे ड्रोन भेजने के लिए पाकिस्तान का लाहौर लॉन्चपैड के रूप में काम करता है. सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ की ड्रोन फोरेंसिक लैब ने पाया है कि सबसे ज्यादा 184 ड्रोन लाहौर से आए हैं. यह शहर सड़क मार्ग से लगभग 33 किलोमीटर दूर है, लेकिन हवाई मार्ग से भारत-पाकिस्तान सीमा के काफी करीब है.

वहीं, नरोवाल से 42 ड्रोन लॉन्च किए गए हैं. यह लाहौर से करीब 100 किलोमीटर दूर है. दूसरे शहरों में ओकारा, बहावलनगर और पाकिस्तान का टोबा टेक सिंह शामिल है. बीएसएफ ने जो डेटा कलेक्ट किया है, उससे पता चला है कि भारत-पाकिस्तान सीमा के पास के शहर अधिक सक्रिय हैं.

बीएसएफ के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि फोरेंसिक जांच में पता चला है कि कुछ ड्रोन पकड़े जाने से पहले कई बार आ जा चुके थे. आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा ड्रोन बीएसएफ (284) ने ही पकड़े हैं. पंजाब पुलिस ने 20, दिल्ली पुलिस ने 2 और मणिपुर पुलिस ने 1 ड्रोन ही पकड़ा है.

पंजाब लैब अब तक काफी संख्या में ड्रोन की जांच कर चुका है. इनमें से ज्यादातर ड्रोन बीएसएफ ने पकड़े हैं, जबकि राज्य पुलिस ने बहुत कम योगदान दिया है. वहीं, दिल्ली फॉरेंसिक लैब को 2022 से 2025 तक कुल 307 ड्रोन मिले हैं.भारत-पाकिस्तान सीमा पर इस साल ड्रोन बरामदगी (257) के अब तक के सबसे बड़े आंकड़े और घुसपैठ की कोशिशों में इजाफे की आशंका को देखते हुए बीएसएफ ने अवैध ड्रोन से निपटने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं. घुसपैठ रोधी भूमिका में अतिरिक्त बटालियन को शामिल किया गया है ताकि जम्मू फ्रंटियर के अंदरूनी इलाकों में मजबूत नियंत्रण बनाए रखा जा सके.

बीएसएफ की तरफ से उठाए गए इस कदम के बारे में जानकारी प्रेस रिलीज में दी गई है. इसमें कहा गया, ‘सीमा की सुरक्षा के लिए नए डिजाइन के फेंस (एनडीएफ) का प्रस्ताव है. बॉर्डर पर बेहतर निगरानी के लिए संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी/ पीटीजेड और बुलेट कैमरे लगाए गए हैं. जम्मू फ्रंटियर के अंदरूनी इलाकों में मजबूत नियंत्रण बनाए रखने के लिए घुसपैठ विरोधी भूमिका में दो अतिरिक्त बटालियन को शामिल किया गया है.’

रिलीज में आगे कहा गया, ‘कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और सर्विलांस ग्रिड लगाकर खाली जगहों को कवर किया जा रहा है. सीमावर्ती क्षेत्र में सभी सहयोगी एजेंसियों के साथ घनिष्ठ संपर्क स्थापित किया गया है और संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं. सुरंग विरोधी अभ्यास कड़ाई से किए जा रहे हैं.’

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आसमान में धमाका, नदी में बिखरीं लाशें और 24 साल बाद मंजर, प्लेन क्रैश पर कैसे बाइडन जिम्मेदार https://samacharpacheesa.com/?p=14656 Fri, 31 Jan 2025 05:45:08 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14656 अमेरिका को प्लेन क्रैश से बड़ा सदमा लगा है. अमेरिका ने दो दशक बाद ऐसा दर्दनाक हादसा देखा है. वाशिंगटन डीसी विमान हादसे में एक भी जान नहीं बची. पोटोमैक नदी में लाशें तैरती दिखीं. अब तक सभी शवों को बरामद कर लिया गया है. पैसेंजर प्लेन और हेलीकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की जान चली गई. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सेना के एक हेलीकॉप्टर और अमेरिकन एयरलाइंस के विमान की टक्कर होने की दुर्घटना के कारण विमान में सवार सभी 67 लोगों की मौत हो गई है.

अब सवाल है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप को इस हादसे की भनक पहले ही हो गई थी? दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने इस हादसे के पीछे बाइडन और उनकी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो बाइडन के डायवर्सिटी कार्यक्रम यानी विविधता पहल पर हवाई सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया. इतना ही नहीं, उन्होंने अमेरिकी सेना के उस हेलीकॉप्टर पायलट पर भी सवाल उठाए जो एक वाणिज्यिक विमान से टकरा गया था.

ट्रंप ने बाइडन को घेरा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अमेरिकन एयरलाइंस के यात्री विमान के बीच हुई दुखद टक्कर पर प्रतिक्रिया देते हुए ओबामा प्रशासन की ओर से लागू की गई विविधता नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है. जांचकर्ताओं ने यात्री विमान से ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया है. घंटों तक नदी में लाशें तैरती रहीं. बचाव दल ने मशक्कत करके शवों को बरामद किया.

ट्रंप ने किसे ठहराया जिम्मेदार
डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्होंने फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन को ऐसे कर्मचारियों की भर्ती के लिए प्रोत्साहित किया, जो गंभीर बौद्धिक अक्षमता, मनोरोग संबंधी समस्याओं और दूसरी मानसिक और शारीरिक समस्याओं से पीड़ित हैं. यह काम विविधता और समावेशन भर्ती पहल के तहत किया गया. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत सुनने और देखने में दिक्कत होने के साथ-साथ लकवा, मिर्गी और बौनेपन से पीड़ित लोगों को भी नौकरी पर रखा गया.

ट्रंप ने नहीं दिया सबूत
हालांकि, ट्रंप ने इस बात का कोई सबूत नहीं दिया कि कथित अयोग्य लोगों को हवाई यातायात नियंत्रण जैसी अहम जिम्मेदारियों वाले पदों पर रखा जा रहा था. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि रीगन नेशनल एयरपोर्ट के हवाई यातायात नियंत्रकों ने कोई गलती की हो.

यह पूछे जाने पर कि वह विविधता पहल को ही क्यों दोष दे रहे हैं तो ट्रंप ने कहा कि क्योंकि मुझमें आम समझ है और दुर्भाग्य से बहुत से लोगों में नहीं है. ट्रंप ने कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हवाई यातायात नियंत्रकों का बहुत अधिक बुद्धिमान होना जरूरी है. उनका प्रतिभाशाली होना ज़रूरी है, उनमें प्राकृतिक रूप से प्रतिभा होनी चाहिए. आप यह काम आम लोगों से नहीं करवा सकते.

ट्रंप ने किसे भला-बुरा कहा
डोनाल्ड ट्रंप ने खास तौर पर पीट बटिगिएग की आलोचना की, जो बाइडेन के परिवहन सचिव थे और 2020 में व्हाइट हाउस के लिए ट्रंप को चुनौती देने वाले दावेदार थे. ट्रंप ने उन्हें  एक आपदा बताया. ट्रंप ने कहा कि अपनी विविधता पहल के साथ उन्होंने इसका सत्यानाश कर दिया. उन्होंने बटिगिएग के बारे में अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया.

 

नदी से शव बरामद
ट्रंप का बयान उस समय आया जब अमेरिकी सेना का ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अमेरिकन एयरलाइंस का यात्री विमान हवा में टकरा गए और दोनों पोटोमैक नदी में गिर गए. अधिकारियों ने बताया कि यात्री विमान और सेना के हेलीकॉप्टर में सवार सभी 67 लोगों को मृत मान लिया गया है. बचावकर्मियों ने पोटोमैक नदी से सभी शव बरामद किए हैं.

2001 के बाद बड़ी तबाही
यह हादसा बुधवार शाम को हुआ था. यह हादसा उस वक्त हुआ जब विचिटा, कंसास से आ रही एक फ्लाइट वाशिंगटन रीगन नेशनल एयरपोर्ट पर उतर रही थी. तभी वह 400 फीट की ऊंचाई पर हेलीकॉप्टर से टकरा गई. यह घटना 2001 के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास में “सबसे घातक विमानन आपदा” मानी जा रही है.

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ईरान ने समंदर में उतारा जासूसी जहाज ZAGROS, इजरायल के हमले कर देगा नाकाम https://samacharpacheesa.com/?p=13990 Wed, 15 Jan 2025 16:11:53 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=13990 ईरान को सबसे बड़ा डर इसी बात का है क‍ि इजरायल उसके परमाणु ठ‍िकानों पर हमला कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो ईरान काफी पीछे चला जाएगा. अपने परमाणु ठ‍िकानों को बचाने के ल‍िए अब ईरान ने जासूसी जहाज ZAGROS को समंदर में उतार द‍िया है. यह टोही जहाज काफी अपग्रेड है और कई खूब‍ियों से लैस है.

ईरानी मीडिया के मुताबिक, यह देश का पहला सिग्‍नल इंटेलिजेंस श‍िप है, ज‍िसे ईरान की नेवी के बेड़े में शामिल क‍िया गया है. इसे ईरान में ही बनाया गया है. यह इलेक्‍ट्रॉनिक सेंसर, इंटरसेप्‍टर और अन्‍य साइबर एंड इंटेल‍िजेंस कैपेबिल‍िटीज से लैस है. जाग्रोस केा तब समंदर में उतारा गया है, जब ईरान की आर्मी ने परमाणु ठ‍िकानों को बचाने के ल‍िए एक बड़ी एक्‍सरसाइज की है. यह म‍िल‍िट्री एक्‍सरसाइज मार्च तक चलनी है. इसका मकसद देश के एटॉमिक सेंटरों नटानज, फोर्डो और खोंडाब की सुरक्षा करना है.

ईरानी नेवी की तीसरी आंख
ईरान के नौसेना प्रमुख एडमिरल शाहराम ईरानी ने कहा, नया जासूसी जहाज समुद्र और महासागरों की गहराई में ईरानी नौसेना की तीसरी आंख होगी. यह दुश्मन की ओर से आने वाले हर खतरे पर नजर रखेगी. ईरान यह मिलि‍ट्री एक्‍सरसाइज ऐसे वक्‍त में कर रहा है, जब अमेर‍िका के नए राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप कुछ ही द‍िनों में शपथ लेने वाले हैं. उन्‍होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखने की बात कही है. ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेर‍िका ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को कैंस‍िल कर द‍िया था.

ट्रंप के आने की आहट से डरा
ट्रंप ने तब ईरान पर कई तरह की पाबंद‍ियां लगा दी थीं. उनके कार्यकाल में ही ईरान के सबसे बड़े आर्मी कमांडर कास‍िम सुलेमानी को अमेर‍िकी सेना ने ड्रोन अटैक में मार ग‍िराया था. इसी महीने अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि जो बाइडन के सामने ईरान के परमाणु ठ‍िकानों को ध्‍वस्‍त करने के विकल्‍प पेश क‍िए गए थे. ईरान कहता रहा है क‍ि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतपूर्ण उद्देश्‍यों के ल‍िए है, वह परमाणु हथ‍ियार नहीं बना रहा है. लेकिन इजरायल-अमेर‍िका यह मानने को तैयार नहीं है.

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एक गलती से कूडे़ में चले गए 6290 करोड़ रुपये, कोर्ट बोला-अब निकाल भी नहीं सकते https://samacharpacheesa.com/?p=13905 Mon, 13 Jan 2025 07:09:00 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=13905 अमीर बनने के लिए कोई दिनरात मेहनत करता है तो किसी की किस्‍मत रातोंरात करोड़पति बना देती है. लेकिन, किस्‍मत और मेहनत के बीच की यह कहानी ऐसे बदनसीब व्‍यक्ति की है जिसके हाथ तो अरबों रुपये लगे, लेकिन एक गलती से सब लुट गया. सोचिए कि जिस चीज की कीमत 6290 करोड़ रुपये हो, अगर एक गलती से वह कूडे़दान में चली जाए तो क्‍या कहेंगे. यह घटना ब्रिटेन के एक व्‍यक्ति के साथ पेश आई है, जो अरबों कमाकर भी सब गवां बैठा.

ब्रिटेन निवासी जेम्‍स हॉवेल्‍स ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्‍होंने साल 2013 में क्रिप्‍टोकरेंसी बिटक्‍वाइन खरीदी थी. तब उसकी वैल्‍यू कुछ भी नहीं थी, लेकिन आज उसकी कीमत 59.8 करोड़ पाउंड (6,290 करोड़ रुपये) हो गई है. जेम्‍स ने बताया कि उनके मित्र की गलती से जिस हार्ड ड्राइव में क्रिप्‍टोकरेंसी की डिटेल थी, वह कूड़े में चली गई और उसे न्‍यूपोर्ट के लैंडफिल में डंप कर दिया गया है. जेम्‍स ने कोर्ट से गुहार लगाई कि वह हार्ड ड्राइव को लैंडफिल से खोज निकालने की छूट दे.

क्‍या बोला हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने बताया कि जेम्‍स की अपील को ठुकरा दिया और उन्‍हें लैंडफिल से हार्ड ड्राइव निकालने की इजाजत नहीं दी. जेम्‍स की इस मांग को भी कोर्ट ने नहीं माना कि क्रिप्‍टोकरेंसी की कीमत बढ़ रही है और उसकी हार्ड ड्राइव को लैंडफिल से खोज निकालने के लिए एक्‍सपर्ट की टीम लगाई जाए. जेम्‍स ने हार्ड ड्राइव मिलने के बाद काउंसिल को उसमें शेयर देने की भी बात कही. न्‍यूपोर्ट काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा कानून के तहत एक बार हार्ड ड्राइव लैंडफिल में पहुंच गई तो फिर यह काउंसिल की प्रॉपर्टी हो गई है. इसके अलावा पर्यावरणीय कानून भी लैंडफिल से किसी चीज को निकालने की इजाजत नहीं देता. लिहाजा कोर्ट ने जेम्‍स की अपील को खारिज कर दिया.

कोर्ट ने क्‍यों खारिज की अपील
हाईकोर्ट के जज केसर केसी ने कहा कि जेम्‍स के पास कानूनी रूप से दावा करने का कोई वैध आधार नहीं है. इतना ही नहीं इस मामले में ट्रायल करने का भी कोई स्‍पष्‍ट आधार नहीं दिखता है. लिहाजा केस को आगे बढ़ाने का भी कोई आधार नहीं दिखता है. बिटक्‍वाइन को साल 2009 में शुरू किया गया था और तब इसकी कोई कीमत नहीं थी, लेकिन बिटक्‍वाइन का भाव 1 लाख डॉलर तक पहुंच गया है. जेम्‍स ने दावा किया है कि जल्‍द ही उनकी करेंसी की कीमत 1 अरब पाउंड तक पहुंच जाएगी.

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एक गलती से कूडे़ में चले गए 6290 करोड़ रुपये, कोर्ट बोला-अब निकाल भी नहीं सकते https://samacharpacheesa.com/?p=13913 Mon, 13 Jan 2025 07:09:00 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=13913 अमीर बनने के लिए कोई दिनरात मेहनत करता है तो किसी की किस्‍मत रातोंरात करोड़पति बना देती है. लेकिन, किस्‍मत और मेहनत के बीच की यह कहानी ऐसे बदनसीब व्‍यक्ति की है जिसके हाथ तो अरबों रुपये लगे, लेकिन एक गलती से सब लुट गया. सोचिए कि जिस चीज की कीमत 6290 करोड़ रुपये हो, अगर एक गलती से वह कूडे़दान में चली जाए तो क्‍या कहेंगे. यह घटना ब्रिटेन के एक व्‍यक्ति के साथ पेश आई है, जो अरबों कमाकर भी सब गवां बैठा.

ब्रिटेन निवासी जेम्‍स हॉवेल्‍स ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्‍होंने साल 2013 में क्रिप्‍टोकरेंसी बिटक्‍वाइन खरीदी थी. तब उसकी वैल्‍यू कुछ भी नहीं थी, लेकिन आज उसकी कीमत 59.8 करोड़ पाउंड (6,290 करोड़ रुपये) हो गई है. जेम्‍स ने बताया कि उनके मित्र की गलती से जिस हार्ड ड्राइव में क्रिप्‍टोकरेंसी की डिटेल थी, वह कूड़े में चली गई और उसे न्‍यूपोर्ट के लैंडफिल में डंप कर दिया गया है. जेम्‍स ने कोर्ट से गुहार लगाई कि वह हार्ड ड्राइव को लैंडफिल से खोज निकालने की छूट दे.

क्‍या बोला हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने बताया कि जेम्‍स की अपील को ठुकरा दिया और उन्‍हें लैंडफिल से हार्ड ड्राइव निकालने की इजाजत नहीं दी. जेम्‍स की इस मांग को भी कोर्ट ने नहीं माना कि क्रिप्‍टोकरेंसी की कीमत बढ़ रही है और उसकी हार्ड ड्राइव को लैंडफिल से खोज निकालने के लिए एक्‍सपर्ट की टीम लगाई जाए. जेम्‍स ने हार्ड ड्राइव मिलने के बाद काउंसिल को उसमें शेयर देने की भी बात कही. न्‍यूपोर्ट काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा कानून के तहत एक बार हार्ड ड्राइव लैंडफिल में पहुंच गई तो फिर यह काउंसिल की प्रॉपर्टी हो गई है. इसके अलावा पर्यावरणीय कानून भी लैंडफिल से किसी चीज को निकालने की इजाजत नहीं देता. लिहाजा कोर्ट ने जेम्‍स की अपील को खारिज कर दिया.

कोर्ट ने क्‍यों खारिज की अपील
हाईकोर्ट के जज केसर केसी ने कहा कि जेम्‍स के पास कानूनी रूप से दावा करने का कोई वैध आधार नहीं है. इतना ही नहीं इस मामले में ट्रायल करने का भी कोई स्‍पष्‍ट आधार नहीं दिखता है. लिहाजा केस को आगे बढ़ाने का भी कोई आधार नहीं दिखता है. बिटक्‍वाइन को साल 2009 में शुरू किया गया था और तब इसकी कोई कीमत नहीं थी, लेकिन बिटक्‍वाइन का भाव 1 लाख डॉलर तक पहुंच गया है. जेम्‍स ने दावा किया है कि जल्‍द ही उनकी करेंसी की कीमत 1 अरब पाउंड तक पहुंच जाएगी.

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बुरा फंसा पाकिस्तान, परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों की रिहाई के बदले TTP ने रखी मांग, फौज और सरकार दोफाड़ https://samacharpacheesa.com/?p=13821 Sat, 11 Jan 2025 05:22:12 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=13821 अफगानिस्तान में तालिबान से पंगा लेकर पाकिस्तान बुरा फंस गया है. दोनों ने एक दूसरे के यहां हमले किए हैं. इनमें कई लोगों की मौत हुई है. इस बीच पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों की रिहाई के बदले में आतंकवादी संगठन टीटीपी ने पाकिस्तान के सामने तीन शर्तें रखी हैं. इसमें सबसे अहम है पकड़े गए अपने साथी उग्रवादियों की रिहाई की मांग. पाकिस्तान प्रशासन में मांगों को लेकर दो धड़े बन गए हैं.

पाकिस्तान सरकार और फौज बेहद परेशान हैं क्योंकि आतंकवादी संगठन तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों की रिहाई के बदले में जो मांगे की है उन्हें लेकर पाकिस्तान प्रशासन में ही दो धड़े बन गए हैं. प्रशासन और फौजी की परेशानी यह भी है कि जिन अधिकारियों को अगवा किया गया है उनके परिजनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है. साथ ही खुफिया एजेंसी को यह शक भी है कि कहीं ये अधिकारी अति संवेदनशील जानकारी तालिबान तक न पहुंचा दें.

टीटीपी पर भी रिहाई का दबाव
उधर, आतंकवादी संगठन टीटीपी पर भी इनकी रिहाई का दबाव बढ़ गया है. क्योंकि अब इस मामले में कई जिरगा भी शामिल हो गए हैं. बड़े और प्रभावशाली लोगों की जमात को जिरगा कहा जाता है. अब आतंकवादी संगठन टीटीपी ने पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों की रिहाई के बदले में तीन मांगें की हैं. इनमें पहली मांग है कि उग्रवादियों के परिवार, जिनमें महिलाएं, बच्चे और रिश्तेदार शामिल हैं, जो सरकारी हिरासत में हैं या लापता हैं, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. दूसरी मांग है कि लक्की मरवत से हिरासत में लिए गए आतंकवादियों को रिहा किया जाए.

तीसरी मांग है कि जिन उग्रवादियों या उनके रिश्तेदारों के घर तोड़े गए हैं उनको मुआवजा दिया जाए. यह आश्वासन दिया जाए कि भविष्य में उग्रवादियों के घर नहीं तोड़े जाने चाहिए और उनके रिश्तेदारों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जायेगा. मांग में यह भी कहा गया है कि जो उग्रवादी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए हैं और वह सुरक्षा बलों के कब्जे में हैं, उन टीटीपी उग्रवादियों के शव उनके परिवारों को लौटाए जाने चाहिए.

पाकिस्तान प्रशासन का एक धड़ा चाहता है कि टीटी की इन मांगों को तत्काल तौर पर आंशिक तरीके से मान लेना चाहिए, जिससे कि परमाणु ऊर्जा के अधिकारियों को रिहा कराया जा सके. क्योंकि यदि जितनी देरी होगी उतना ही अधिकारियों के द्वारा अति संवेदनशील जानकारियां तालिबान तक पहुंच सकती है. दूसरे धड़े का मानना है कि संगठन के खिलाफ सैन्य अभियान और तेज किया जाना चाहिए जिससे घबराकर संगठन अधिकारियों को छोड़ दे.

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बुरा फंसा पाकिस्तान, परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों की रिहाई के बदले TTP ने रखी मांग, फौज और सरकार दोफाड़ https://samacharpacheesa.com/?p=13830 Sat, 11 Jan 2025 05:22:12 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=13830 अफगानिस्तान में तालिबान से पंगा लेकर पाकिस्तान बुरा फंस गया है. दोनों ने एक दूसरे के यहां हमले किए हैं. इनमें कई लोगों की मौत हुई है. इस बीच पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों की रिहाई के बदले में आतंकवादी संगठन टीटीपी ने पाकिस्तान के सामने तीन शर्तें रखी हैं. इसमें सबसे अहम है पकड़े गए अपने साथी उग्रवादियों की रिहाई की मांग. पाकिस्तान प्रशासन में मांगों को लेकर दो धड़े बन गए हैं.

पाकिस्तान सरकार और फौज बेहद परेशान हैं क्योंकि आतंकवादी संगठन तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों की रिहाई के बदले में जो मांगे की है उन्हें लेकर पाकिस्तान प्रशासन में ही दो धड़े बन गए हैं. प्रशासन और फौजी की परेशानी यह भी है कि जिन अधिकारियों को अगवा किया गया है उनके परिजनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है. साथ ही खुफिया एजेंसी को यह शक भी है कि कहीं ये अधिकारी अति संवेदनशील जानकारी तालिबान तक न पहुंचा दें.

टीटीपी पर भी रिहाई का दबाव
उधर, आतंकवादी संगठन टीटीपी पर भी इनकी रिहाई का दबाव बढ़ गया है. क्योंकि अब इस मामले में कई जिरगा भी शामिल हो गए हैं. बड़े और प्रभावशाली लोगों की जमात को जिरगा कहा जाता है. अब आतंकवादी संगठन टीटीपी ने पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों की रिहाई के बदले में तीन मांगें की हैं. इनमें पहली मांग है कि उग्रवादियों के परिवार, जिनमें महिलाएं, बच्चे और रिश्तेदार शामिल हैं, जो सरकारी हिरासत में हैं या लापता हैं, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. दूसरी मांग है कि लक्की मरवत से हिरासत में लिए गए आतंकवादियों को रिहा किया जाए.

तीसरी मांग है कि जिन उग्रवादियों या उनके रिश्तेदारों के घर तोड़े गए हैं उनको मुआवजा दिया जाए. यह आश्वासन दिया जाए कि भविष्य में उग्रवादियों के घर नहीं तोड़े जाने चाहिए और उनके रिश्तेदारों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जायेगा. मांग में यह भी कहा गया है कि जो उग्रवादी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए हैं और वह सुरक्षा बलों के कब्जे में हैं, उन टीटीपी उग्रवादियों के शव उनके परिवारों को लौटाए जाने चाहिए.

पाकिस्तान प्रशासन का एक धड़ा चाहता है कि टीटी की इन मांगों को तत्काल तौर पर आंशिक तरीके से मान लेना चाहिए, जिससे कि परमाणु ऊर्जा के अधिकारियों को रिहा कराया जा सके. क्योंकि यदि जितनी देरी होगी उतना ही अधिकारियों के द्वारा अति संवेदनशील जानकारियां तालिबान तक पहुंच सकती है. दूसरे धड़े का मानना है कि संगठन के खिलाफ सैन्य अभियान और तेज किया जाना चाहिए जिससे घबराकर संगठन अधिकारियों को छोड़ दे.

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