मनी – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Fri, 31 Jan 2025 05:42:35 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 इस बार कितने रुपये का जारी होगा बजट…..किस पर सबसे ज्‍यादा फोकस https://samacharpacheesa.com/?p=14654 Fri, 31 Jan 2025 05:42:35 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14654 वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2025 को भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा बजट जारी करने वाली हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार 50 लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा का बजट जारी होगा, जो पिछले साल से करीब 3 लाख करोड़ रुपये अधिक है. भारत को हमेशा आंख दिखाने वाले पड़ोसी पाकिस्‍तान का बजट इसके मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे की तरह है. पिछले साल पाकिस्‍तान में 5.65 लाख करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था. वित्‍तमंत्री सीतारमण इस बार लगातार 8वां बजट पेश करने जा रही हैं.

वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त सचिव तुहिन कांत पांडेय सहित प्रमुख अधिकारियों के साथ मिलकर 2025-26 के लिए 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट तैयार किया है. इस बार के बजट में उन्हें कई चुनौतियों का समाधान करना होगा, जिसमें आर्थिक वृद्धि में कमी, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और उपभोग मांग में कमी शामिल है. वित्त वर्ष 2024-25 में आर्थिक वृद्धि दर चार साल के निचले स्तर 6.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है. यह 2019 में फैली कोविड महामारी के प्रकोप के बाद से सबसे कम वृद्धि दर है.

किन सेक्‍टर्स पर टीम का फोकस
वित्तमंत्री की टीम में वित्त एवं राजस्व सचिव पांडेय, आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ, व्यय सचिव मनोज गोविल, निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणिश चावला, वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू और मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन शामिल हैं. उनकी टीम के सामने सबसे कठिन काम राजकोषीय स्थिति को छोड़े बिना वृद्धि को बढ़ावा देना होगा. सरकार से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वह विभिन्न चुनौतियों के बावजूद वित्तवर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने के राजकोषीय लक्ष्य पर कायम रहेगी.

वित्‍त मंत्रालय में कितने विभाग
वित्त मंत्रालय में छह विभाग हैं, राजस्व, आर्थिक मामले, व्यय, वित्तीय सेवाएं, दीपम और डीपीई. मंत्रालय में सबसे वरिष्ठ नौकरशाह को वित्त सचिव के रूप में नामित किया जाता है. वित्त और राजस्व सचिव पांडेय अक्टूबर, 2019 से बजट बनाने की प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं, जब वह सचिव के रूप में दीपम में शामिल हुए थे. वह पिछले साल सितंबर में वित्त सचिव बने थे. आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ वित्त मंत्रालय में दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्होंने 2021 से अब तक चार बजट संभाले हैं. उनके विभाग के तहत आने वाला बजट प्रभाग बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया को संचालित करता है.

तीसरा आर्थिक सर्वे पेश करेंगे सीईए
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन आम बजट 2025-26 से एक दिन पहले अपनी तीसरी आर्थिक समीक्षा पेश करेंगे. नागेश्वरन को जनवरी, 2022 में सरकार ने सीईए बनाया गया था. उनकी ओर से जारी आर्थिक सर्वे में पूरे देश की अर्थव्‍यवस्‍था की तस्‍वीर दिखेगी. बजट से पहले सीईए इंडियन इकनॉमी के वास्‍तविक हालात को पेश करेंगे, इससे आम आदमी को भी बजट में की जाने वाली घोषणाओं और उसकी अहमियत को समझना आसान हो जाएगा.

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सोने की कीमतो में रिकॉर्ड बढ़त, चांदी भी हुई मंहगी https://samacharpacheesa.com/?p=14646 Fri, 31 Jan 2025 05:34:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14646 शादी का सीजन अपने चरम पर है. इस वजह से सोने और चांदी की कीमतें भी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं. खासकर सोना हर दिन नए शिखर छू रहा है. आज यानी शुक्रवार को इसकी कीमतें फिर से ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई हैं. कल यानी गुरुवार को भी सोना अपने उच्चतम स्तर पर था. आज इसमें और वृद्धि दर्ज की गई है. जिससे यह अब तक के सबसे महंगे स्तर पर पहुंच गया है.

सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. आज चांदी के दामों में भी इजाफा हुआ है. एक्सपर्ट बताते हैं कि अभी इसकी कीमतें घटने वाले नहीं है. आने वाले दिनों में सोने-चांदी के दामों में उछाल देखने को मिल सकता है.

फिर से ऑल टाइम हाई है सोने की कीमत
गुरुवार के बाद शुक्रवार को फिर से सोने नए स्तर पर पहुंच चुका है. पटना के सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट सोना 82,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर पहुंच चुका है. अगर इसमें जीएसटी जोड़ दिया जाए. इसकी कीमत 84,500 रुपये प्रति 10 ग्राम हो जाती है. यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. 22 कैरेट सोने की कीमत भी लगातार बढ़ रही है और आज यह 76,000 रुपये से बढ़कर 76,200 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है. इसी तरह, 18 कैरेट सोना भी महंगा होकर 63,800 रुपये से बढ़कर 64,000 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है.

चांदी के भी तेवर गरम
चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. शादी के सीजन में इसके दाम भी आसमान छू रहे हैं. पटना के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत आज 91,000 रुपये से बढ़कर 92,000 रुपए प्रति किलो दर्ज की गई है. वहीं, पुराने चांदी के आभूषणों का एक्सचेंज रेट 84,000 रुपये से बढ़कर 85,000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है.

पुराने आभूषणों का एक्सचेंज रेट भी हुआ महंगा
पुराने सोने के आभूषणों की एक्सचेंज रेट में भी बढ़ोतरी हुई है. आज 22 कैरेट पुराने सोने के आभूषणों का एक्सचेंज रेट 74,500 रुपये से बढ़कर 74,700 रुपए प्रति 10 ग्राम है. जबकि 18 कैरेट सोने के पुराने आभूषणों का एक्सचेंज रेट 62,300 रुपये से बढ़कर 62,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है.

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नहीं चलेगी बीमा कंपनियों की मनमानी, इन पॉलिसियों का सालाना 10% से ज्‍यादा नहीं बढ़ा पाएंगी प्रीमियम https://samacharpacheesa.com/?p=14644 Fri, 31 Jan 2025 05:32:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14644 बीमा नियामक इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने सभी जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को तुरंत प्रभाव से दिया है. इस आदेश के तहत कंपनियां सीनियर सिटीज़न (वरिष्ठ नागरिकों) के हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम हर साल 10% से ज़्यादा नहीं बढ़ा पाएंगी. वहीं, अगर 10% से ज़्यादा बढ़ाना है या कोई प्लान बंद करना है तो पहले IRDAI से पूछना पड़ेगा. इस आदेश का मकसद सीनियर सिटीजन को हेल्थ इंश्योरेंस लेने में ज्यादा परेशानी न हो और कंपनियां मनमाने तरीके से प्रीमियम न बढ़ा सकें.

बीमा क्षेत्र के नियामक ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि उसके संज्ञान में आया है कि कुछ स्वास्थ्य बीमा उत्पादों में वरिष्ठ नागरिकों (60 साल और अधिक) के बीमा प्रीमियम दरों में काफी बड़ी वृद्धि की गई है. बीमा प्रीमियम मुख्य रूप से संभावित क्लेम के खर्च और बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसी बेचने और उसे संभालने में लगने वाले खर्च पर आधारित होता है. दावों का खर्च काफी हद तक अस्पतालों द्वारा इलाज/सर्जरी के लिए ली जाने वाली फीस पर निर्भर करता है.

10% से ज्यादा नहीं बढ़ा पाएंगी इंश्योरेंस कंपनी
IRDAI के निर्देशों के मुताबिक कंपनियां सीनियर सिटीजन के हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम हर साल 10% से ज़्यादा नहीं बढ़ा पाएंगी. मान लो की अगर किसी वरिष्‍ठ नागरिक के हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी का सालाना प्रीमियम अभी 5000 रुपये है तो अगले साल कंपनी उसे 5500 रुपये से ज्‍यादा नहीं कर सकती. अगर कंपनियां सीनियर सिटीजन के हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम 10% से ज़्यादा बढ़ाना चाहती है तो उसे इरडा को बताना होगा कि वह ऐसा क्‍यों करना चाहती है. इरडा से मंजूरी मिलने के बाद ही वह प्रीमियम बढा पाएगी.

बनानी होगी अलग व्‍यवस्‍था
इरडा ने सभी बीमा कंपनियों को सीनियर सिटीजन के हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम और शिकायतों को सुनने और सुलझाने के लिए एक अलग व्यवस्था बनाने को कहा है. इस व्यवस्था की जानकारी कंपनी की वेबसाइट पर आसानी से मिलनी चाहिए. IRDAI ने कहा, “सीनियर सिटीजन के फायदे के लिए, नियमों के अनुसार सभी बीमा कंपनियों को उनके हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े क्लेम और शिकायतों के लिए एक अलग चैनल बनाना जरूरी है. इसकी जानकारी बीमा कंपनी की वेबसाइट पर दी जानी चाहिए.”
बीमा धारकों के हित में उठाए गए कदम
IRDAI ने हाल ही में कई सुधार किए हैं, जिससे बीमा धारकों को अधिक अधिकार मिलें और स्वास्थ्य बीमा सभी के लिए आसान और सुलभ बने. इसके साथ ही, बीमा कंपनियों के लिए नए और बेहतर उत्पाद लाने का रास्ता भी खुला है.

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लावारिस पड़े हैं 880 करोड़, कहीं आप भी तो नहीं भूल गए क्‍लेम करना https://samacharpacheesa.com/?p=12980 Sun, 22 Dec 2024 05:15:12 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=12980 बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल 880.93 करोड़ रुपये की परिपक्वता राशि बिना दावा किए पड़ी थी. कुल 3,72,282 पॉलिसीधारकों ने बीमा पॉलिसियां ली, उनका प्रीमियम भी भरा पर मैच्‍योरिटी पर पैसे निकलवाए नहीं. यदि पॉलिसीधारक तीन साल या उससे अधिक समय तक एलआईसी से कोई लाभ प्राप्त नहीं करता है, तो उस राशि को बिना दावा की गई माना जाता है. यदि पैसा 10 साल से अधिक समय तक बिना दावा के रहता है, तो पूरी राशि सरकार के सीनियर सिटिजन वेलफेयर फंड में स्थानांतरित कर दी जाती है. अगर आपको भी लगता है कि आपकी भी कोई एलआईसी पॉलिसी अनक्‍लेम्‍ड पड़ी हो सकती है तो आप ऑनलाइन इस बारे में पता लगा सकते हैं.

अनक्लेम्ड राशि होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि कानूनी विवाद (Litigation), प्रतिस्पर्धी दावे (Rival Claims), पॉलिसीधारकों का संपर्क में न होना, विदेश में निवास करना या पेंशन या वार्षिकी (Annuity) के दावों में देरी होना. एलआईसी लगातार अपने पॉलिसीधारकों तक पहुंचने और अनक्लेम्ड राशियों का निपटारा करने के लिए प्रयास कर रही है. इसके लिए वह जागरूकता अभियानों और डिजिटल माध्यमों का सहारा ले रही है.

ऐसे चेक करें पॉलिसी स्‍टेटस

  • एलआईसी की वेबसाइट https://licindia.in/home पर जाएं.
  • होमपेज पर, ग्राहक सेवा (Customer Service) पर क्लिक करें.
  • पॉलिसीधारकों की बिना दावा राशि (Unclaimed Amounts of Policyholders) का विकल्प चुनें.
  • आवश्यक विवरण दर्ज करें जैसे पॉलिसी नंबर, नाम, जन्म तिथि और पैन कार्ड नंबर.
  • जानकारी सबमिट करें.
  • आपके सामने पॉलिसी की पूरी जानकारी आ जाएगी.

ऐसे करें दावा

  • दावा फॉर्म प्राप्त करें: क्‍लेम फार्म किसी भी एलआईसी कार्यालय से लें या आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करें.
  • आवश्यक दस्तावेज इकट्ठा करें: जैसे पॉलिसी दस्तावेज, प्रीमियम रसीदें, और यदि लागू हो, तो मृत्यु प्रमाण पत्र.
  • फार्म जमा कराएं : भरे हुए फॉर्म और दस्तावेजों को एलआईसी कार्यालय में जमा करें.
  • समीक्षा के बाद मिलेगी राशि : एलआईसी आपके दावे की समीक्षा करेगा और यदि स्वीकृत हुआ, तो बिना दावा राशि आपको जारी कर दी जाएगी.

समय-समय पर जांचते रहें स्थित
अगर आपने एलआईसी पॉलिसी ली है, तो यह सुनिश्चित करें कि आप अपनी पॉलिसी की स्थिति को समय-समय पर जांचते रहें. इससे न केवल आप अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख पाएंगे, बल्कि जरूरत के समय इसे उपयोग में भी ला सकेंगे.

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लावारिस पड़े हैं 880 करोड़, कहीं आप भी तो नहीं भूल गए क्‍लेम करना https://samacharpacheesa.com/?p=12994 Sun, 22 Dec 2024 05:15:12 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=12994 बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल 880.93 करोड़ रुपये की परिपक्वता राशि बिना दावा किए पड़ी थी. कुल 3,72,282 पॉलिसीधारकों ने बीमा पॉलिसियां ली, उनका प्रीमियम भी भरा पर मैच्‍योरिटी पर पैसे निकलवाए नहीं. यदि पॉलिसीधारक तीन साल या उससे अधिक समय तक एलआईसी से कोई लाभ प्राप्त नहीं करता है, तो उस राशि को बिना दावा की गई माना जाता है. यदि पैसा 10 साल से अधिक समय तक बिना दावा के रहता है, तो पूरी राशि सरकार के सीनियर सिटिजन वेलफेयर फंड में स्थानांतरित कर दी जाती है. अगर आपको भी लगता है कि आपकी भी कोई एलआईसी पॉलिसी अनक्‍लेम्‍ड पड़ी हो सकती है तो आप ऑनलाइन इस बारे में पता लगा सकते हैं.

अनक्लेम्ड राशि होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि कानूनी विवाद (Litigation), प्रतिस्पर्धी दावे (Rival Claims), पॉलिसीधारकों का संपर्क में न होना, विदेश में निवास करना या पेंशन या वार्षिकी (Annuity) के दावों में देरी होना. एलआईसी लगातार अपने पॉलिसीधारकों तक पहुंचने और अनक्लेम्ड राशियों का निपटारा करने के लिए प्रयास कर रही है. इसके लिए वह जागरूकता अभियानों और डिजिटल माध्यमों का सहारा ले रही है.

ऐसे चेक करें पॉलिसी स्‍टेटस

  • एलआईसी की वेबसाइट https://licindia.in/home पर जाएं.
  • होमपेज पर, ग्राहक सेवा (Customer Service) पर क्लिक करें.
  • पॉलिसीधारकों की बिना दावा राशि (Unclaimed Amounts of Policyholders) का विकल्प चुनें.
  • आवश्यक विवरण दर्ज करें जैसे पॉलिसी नंबर, नाम, जन्म तिथि और पैन कार्ड नंबर.
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ऐसे करें दावा

  • दावा फॉर्म प्राप्त करें: क्‍लेम फार्म किसी भी एलआईसी कार्यालय से लें या आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करें.
  • आवश्यक दस्तावेज इकट्ठा करें: जैसे पॉलिसी दस्तावेज, प्रीमियम रसीदें, और यदि लागू हो, तो मृत्यु प्रमाण पत्र.
  • फार्म जमा कराएं : भरे हुए फॉर्म और दस्तावेजों को एलआईसी कार्यालय में जमा करें.
  • समीक्षा के बाद मिलेगी राशि : एलआईसी आपके दावे की समीक्षा करेगा और यदि स्वीकृत हुआ, तो बिना दावा राशि आपको जारी कर दी जाएगी.

समय-समय पर जांचते रहें स्थित
अगर आपने एलआईसी पॉलिसी ली है, तो यह सुनिश्चित करें कि आप अपनी पॉलिसी की स्थिति को समय-समय पर जांचते रहें. इससे न केवल आप अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख पाएंगे, बल्कि जरूरत के समय इसे उपयोग में भी ला सकेंगे.

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रास नहीं आ रहा शेयर बाजार तो गौर कीजिए इन तरीकों पर, बिना टेंशन आसानी से बनता है पैसा https://samacharpacheesa.com/?p=11692 Mon, 11 Nov 2024 05:23:14 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11692 जब शेयर बाजार में गिरावट होती है तो अक्सर रिटेल निवेशक अपने निवेश को लेकर चिंतित हो जाते हैं. यह चिंता स्वाभाविक है, क्योंकि बाजार की अस्थिरता से उनके निवेश पर असर पड़ सकता है. लेकिन गिरावट का एक सकारात्मक पहलू भी है कि यह समय अपने पैसे से जुड़ी रणनीतियों को फिर से देखने-परखने का मौका देते हैं. यदि आप भी इस अस्थिर बाजार में पैसा कमा पाने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं तो दूसरे विकल्पों की तरफ भी देख सकते हैं. कुछ वैकल्पिक निवेश ऐसे भी हैं, जो छोटे निवेशकों को अस्थिर बाजार में भी आरामदायक रिटर्न बनाकर दे सकते हैं.

1. फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FD) – सुरक्षा के लिए सही विकल्प
फिक्स्ड डिपॉजिट्स, जिसे सावधि जमा भी कहा जाता है, एक सुरक्षित निवेश विकल्प है. इसमें आप अपनी राशि को एक निश्चित अवधि के लिए बैंक में जमा करते हैं और इसके बदले आपको एक निश्चित ब्याज मिलता है. यह निवेश शेयर बाजार की उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता. इसलिए जब बाजार गिरता है, तो FD एक सुरक्षित विकल्प बन जाती है. वर्तमान में, भारत में बढ़ती ब्याज दरों के कारण बैंक और वित्तीय संस्थान उच्च FD दरें दे रहे हैं, जो सालाना 8% तक हो सकती हैं. यह विकल्प उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो रिटायरमेंट के नजदीक हैं, या अपनी पूंजी को सिक्योर करने के प्राथमिकता देते हैं.

ये भी पढ़ें – 5 सालों में दोगुनी हो गई प्रॉपर्टी की कीमत, दिल्ली के एकदम जड़ में है ये एरिया

2. डेट म्यूचुअल फंड्स – स्थिर रिटर्न के लिए
डेट म्यूचुअल फंड्स बांड, सरकारी प्रतिभूतियों और कॉर्पोरेट डेट में निवेश करते हैं. ये फंड सुरक्षा और रिटर्न का संतुलन प्रदान करते हैं. हालांकि ये पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं होते, लेकिन इनकी अस्थिरता इक्विटी के मुकाबले कम होती है. लिक्विड फंड्स और शॉर्ट-टर्म बांड फंड्स ऐसे निवेशकों के लिए उपयुक्त होते हैं जो बिना लंबी लॉक-इन अवधि के रिटर्न चाहते हैं. इनकी औसत यील्ड 5% से 7% तक होती है.

3. सरकारी छोटी बचत योजनाएं
पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) जैसी योजनाएं टैक्स-फ्री आकर्षक रिटर्न प्रदान करती हैं. उदाहरण के लिए, PPF लगभग 7.1% का ब्याज देता है, जिसमें 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है. लेकिन इसकी मेच्योरिटी राशि टैक्स फ्री होती है. यदि आप वरिष्ठ नागरिक हैं, तो सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS) पर विचार करें, जो 8% तक रिटर्न देती है.

4. रियल एस्टेट निवेश के अवसर
कुछ जगहों पर प्रॉपर्टी की कीमतें स्थिर हो गई हैं, जिससे रियल एस्टेट में लॉन्ग टर्म निवेश के लिए अनुकूल परिस्थिति बनी हुई है. किराए से नियमित आय का स्रोत मिलता है. रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) संपत्ति में कम राशि के निवेश का विकल्प प्रदान करते हैं, जिनका औसत रिटर्न 6% से 8% तक होता है.

5. सोने में निवेश – बाजार की अस्थिरता से बचने का यंत्र
आर्थिक मंदी के दौरान सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है और मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव करता है. बाजार में भारी-भरकम पूंजी के साथ निवेश करने वाले भी संकटकाल में सोने में निवेश करने को दौड़ते हैं. आप भी गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) में निवेश करके बिना भौतिक रूप से सोना रखे भी निवेश कर सकते हैं. पिछले दशक में सोने ने 8% से 10% तक का औसत रिटर्न दिया है.

6. डिविडेंड स्टॉक्स – आय की स्थिरता के लिए
डिविडेंड देने वाले स्टॉक्स अन्य विकास स्टॉक्स की तुलना में कम अस्थिर होते हैं और मंदी के दौरान भी आय प्रदान करते हैं. ऐसे बड़े कंपनियों का चयन करें जिनके डिविडेंड देने का इतिहास हो. यूटिलिटी, कंज्यूमर गुड्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में ऐसी कंपनियां अधिक होती हैं.

7. म्यूचुअल फंड में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs)
इक्विटी म्यूचुअल फंड में एसआईपी के माध्यम से नियमित रूप से निवेश करके, आप बाजार की गिरावट के दौरान कम कीमतों पर यूनिट्स खरीद सकते हैं. एसआईपी के माध्यम से आपको रूपये की लागत औसत का लाभ मिलता है, जिससे आप बाजार की उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम कर सकते हैं.

8. कॉर्पोरेट बांड्स – फिक्स्ड इनकम के लिए
AAA रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बांड्स फिक्स्ड ब्याज दर प्रदान करते हैं और अपेक्षाकृत सुरक्षित होते हैं. वर्तमान यील्ड्स कॉर्पोरेट बांड्स 7% से 9% तक का रिटर्न दे सकती हैं. बांड रेटिंग्स की जांच करें ताकि जारीकर्ता की साख की पुष्टि हो सके.

9. हाइब्रिड म्यूचुअल फंड्स – संतुलित दृष्टिकोण
हाइब्रिड फंड्स का एक हिस्सा इक्विटी में और दूसरा हिस्सा डेट में होता है, जिससे वृद्धि की संभावना के साथ पूंजी की सुरक्षा भी मिलती है. बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स (BAFs) अपने इक्विटी और डेट आवंटन को बाजार की स्थिति के अनुसार समायोजित करते हैं.

10. वैकल्पिक निवेश – पीयर-टू-पीयर लेंडिंग
पीयर-टू-पीयर (P2P) लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स निवेशकों को उच्च रिटर्न का अवसर देते हैं, हालांकि इसमें कुछ जोखिम भी शामिल होता है. P2P लेंडिंग में रिटर्न 10% से 15% तक हो सकता है, लेकिन निवेश करने से पहले पूरी तरह रिसर्च करना जरूरी होता है. इन सभी विकल्पों पर विचार करके खुदरा निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और अस्थिर बाजार में भी सुरक्षित रह सकते हैं.

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छठ से पहले सोने-चांदी के भाव में आई गिरावट https://samacharpacheesa.com/?p=11533 Wed, 06 Nov 2024 04:50:51 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11533 सूर्य उपासना के महापर्व छठ से पहले सोना खरीदारों के लिए गुड न्यूज है. यूपी के वाराणसी में बुधवार को सोने की कीमत में फिर कमी आई. वहीं, बात चांदी की करें, तो उसकी कीमत में भी गिरावट देखी गई है. बता दें कि सोने-चांदी की कीमतें हर दिन टैक्स और उत्पाद शुल्क के कारण घटती बढ़ती रहती है.

वाराणसी सर्राफा बाजार में बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 110 रुपए लुढ़कर 80390 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. इसके पहले 5 नवंबर को इसका भाव 80500 रुपए था. वहीं, बात 22 कैरेट सोने के कीमत की करें, तो बुधवार को उसकी कीमत में 100 रुपए की गिरावट आई है. जिसके बाद उसका भाव 73700 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया. इसके पहले 5 नवंबर को इसकी कीमत 73700 रुपए थी.

80 रुपए लुढ़का 18 कैरेट का भाव

इन सब के अलावा बात 18 कैरेट सोने की करें तो बुधवार को उसकी कीमत 80 रुपए टूटकर 60300 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. इसके पहले 5 नवंबर को इसका भाव 60380 रुपए था. बता दें कि सोने की खरीदारी से पहले उसकी शुद्धता जरूर जांचनी चाहिए. 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है. इसके खरीदते समय हॉलमार्क भी देखना चाहिए. यह सोने के शुद्धता की गारंटी का प्रमाण होता है.

चांदी के भाव में आई कमी

सोने के अलावा बात चांदी के कीमत की करें, तो बुधवार को उसकी कीमत में गिरावट आई है. बाजार खुलने के साथ चांदी 1000 रुपए टूटकर 96000 रुपए प्रति किलो हो गया. इसके पहले 5 नवंबर को इसकी कीमत 97000 रुपए थी.

खरीदारी का अच्छा मौका
वाराणसी के सर्राफा कारोबारी सुमित वर्मा उर्फ चंदू ने बताया कि नवंबर महीने की शुरुआत से सोने और चांदी की कीमत में गिरावट देखी जा रही है. आने वाले समय में वेडिंग सीजन के दौर है. ऐसे में उम्मीद है कि अगले सप्ताह से दोबारा इसके भाव में उतार चढ़ाव का दौर देखा जा सकता है.

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सोने की महंगाई ने बढ़ाई व्यापारियों की चिंता, त्योहारों के बीच नदारद है भीड़, 20% कम बिक्री का अनुमान https://samacharpacheesa.com/?p=11327 Tue, 29 Oct 2024 06:37:36 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11327 सोने की बढ़ती कीमतों ने सोना व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. आलम ये है कि धनतेरस और दीवाली जैसै त्योहारों के बीच ग्राहकों की भीड़ उम्मीद से कम है. व्यापारियों को इस सीजन सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ने का डर सता रहा है. बता दें, पिछले धनतेरस से अब तक सोने की कीमतों में 25-30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह कीमती धातु अपने उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है.

23 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2,759 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिसके बाद से यह 2,700 डॉलर से ऊपर ही कारोबार कर रहा है. मुंबई के स्पॉट मार्केट में सोना लगभग 79,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जबकि पिछले धनतेरस के दौरान यह कीमत करीब 62,000 रुपये के आसपास थी.

सोना व्यापारियों की बढ़ी टेंशन
हालांकि, पिछले सप्ताह के रिकॉर्ड के बाद सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन मौजूदा ऊंची कीमतों ने ज्वेलर्स को इस साल 2023 की तुलना में बिक्री में कमी की चिंता में डाल दिया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के निदेशक, अविनाश गुप्ता ने बताया कि सोने की कीमतों में हुई अभूतपूर्व वृद्धि का असर इस बार के त्योहारी सीजन में मांग पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि हर साल धनतेरस के पहले के दिनों में ग्राहकों की भीड़ देखी जाती थी, लेकिन इस बार यह भीड़ नदारद है.

मांग बढ़ाने के लिए ब्रांड्स दे रहे ऑफर
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार सोने के छोटे आकार वाली ज्वेलरी, यानी एक लाख रुपये से कम की कीमत वाली ज्वेलरी की मांग ज्यादा है. गुप्ता ने कहा, “हम इस धनतेरस और दिवाली पर प्रतीकात्मक खरीदारी की उम्मीद कर रहे हैं, और बिक्री में करीब 20% तक की गिरावट हो सकती है.” ऊंची कीमतों को देखते हुए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज्वेलरी ब्रांड्स ने विभिन्न ऑफर्स और योजनाएं पेश की हैं, ताकि लोग शोरूम तक आएं और खरीदारी करें.

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क्रिप्टोकरेंसी से अर्थव्यस्था और आम आदमी को क्या नुकसान, RBI ने बताया ये बड़ा जोखिम, बैंकों के लिए भी खतरा https://samacharpacheesa.com/?p=11301 Mon, 28 Oct 2024 08:39:48 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11301 शॉर्टकट तरीके से पैसा कमाने और निवेश पर भारी रिटर्न पाने के लिए दुनियाभर में लोग क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट कर रहे हैं, लेकिन इसमें निवेश आम आदमी और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा घातक साबित हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने क्रिप्टोकरेंसी को वित्तीय स्थिरता और मौद्रिक स्थिरता के लिए बहुत बड़ा जोखिम है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, जहां केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण खो देगा. दास ने कहा, ”मेरा मानना है कि यह ऐसी चीज है, जिसे वित्तीय प्रणाली पर हावी होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. इसमें वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत बड़ा जोखिम है. इसमें मौद्रिक स्थिरता के लिए बहुत बड़ा जोखिम है. यह बैंकिंग प्रणाली के लिए भी जोखिम पैदा करता है.”

उन्होंने प्रमुख थिंक-टैंक पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में कहा कि यह ऐसी स्थिति भी पैदा कर सकता है, जहां केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण खो देगा. दास ने कहा कि यदि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण खो देगा है, तो प्रणाली में उपलब्ध नकदी की जांच कैसे होगी.

‘क्रिप्टोकरेंसी पर अंतरराष्ट्रीय समझ बनना जरूरी’

उन्होंने आगे कहा कि संकट के समय मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित कर केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करता है इसलिए, हम क्रिप्टो को एक बड़े जोखिम के रूप में देखते हैं. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि इस पर अंतरराष्ट्रीय समझ बननी चाहिए, क्योंकि इसका सीमापार लेनदेन होता है.

आरबीआई गवर्नर ने कहा, ”क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े बड़े जोखिमों के बारे में पूरी तरह सचेत रहना चाहिए. मुझे लगता है कि इसे प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। यह राय बहुत लोकप्रिय नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि वित्तीय स्थिरता के संरक्षक के रूप में यह दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है.” दास ने कहा कि सरकारें भी क्रिप्टोकरेंसी में संभावित नकारात्मक जोखिमों के बारे में तेजी से जागरूक हो रही हैं.

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सबसे ज्‍यादा टैक्‍स देता है यह राज्‍य, उत्‍तर प्रदेश और बिहार है इससे बहुत पीछे https://samacharpacheesa.com/?p=10971 Sun, 20 Oct 2024 07:11:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10971 उत्‍तर प्रदेश आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्‍य है. बिहार का नंबर इस मामले में यूपी के बाद आता है. लेकिन, प्रत्‍यक्ष कर संग्रहण में ये दोनों ही बड़े राज्‍य बहुत पीछे हैं. देश में सबसे ज्‍यादा डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन महाराष्‍ट्र में होता है. वहीं, यूपी टैक्‍स कलेक्‍शन के मामले में देश में नौंवे पायदान पर है और पहले स्‍थान पर काबिज महाराष्‍ट्र से करीब 15 गुना कम टैक्‍स संग्रहण यहां होता है.

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) शामिल होते हैं. इन तीनों माध्यमों से देशभर में टैक्स की वसूली की जाती है और राज्यों का योगदान सीधे सरकार के खजाने में जाता है.

महाराष्‍ट्र का हिस्‍सा 39 फीसदी
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने प्रत्‍यक्ष कर संग्रहण के जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में देशभर से 19.62 लाख करोड़ रुपये डायरेक्ट टैक्स वसूला गया. डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन में महाराष्‍ट्र एक नंबर पर है. पिछले वित्‍त वर्ष में महाराष्ट्र से 7.62 लाख करोड़ रुपये (7,61,716.30 करोड़ रुपये) डायरेक्ट टैक्स आया. महाराष्ट्र का योगदान देश के कुल डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्शन 39% है.

वित्त वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश में डायरेक्‍ट टैक्‍स के रूप में 48,333.44 करोड़ रुपये आए. यह टैक्‍स कलेक्‍शन महाराष्‍ट्र से करीब 15 गुना कम है. वहीं, आबादी के लिहाज से देश के दूसरे सबसे बड़े राज्‍य बिहार से केवल 6692.73 करोड़ रुपये का टैक्स संग्रहण हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष 2022-23 के 6845.32 करोड़ रुपये से भी कम है.

दूसरे नंबर पर है कर्नाटक
डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन में महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक दूसरे स्‍थान पर है. पिछले वित्‍त वर्ष में राज्‍य में 2.35 लाख करोड़ रुपये का कर संग्रहण हुआ. दिल्ली 2.03 लाख करोड़ रुपये के टैक्‍स कलेक्‍शन के साथ तीसरे स्थान पर रहा. चौथे स्थान पर तमिलनाडु है जिसने 1.27 लाख करोड़ रुपये का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन किया है. गुजरात 93,300 करोड़ रुपये के साथ पांचवें स्थान पर है.

प्रत्‍यक्ष कर संग्रहण में तेलंगाना छठे स्‍थान पर है. वित्‍त वर्ष 2023-24 में राज्‍य से 84,439 करोड़ रुपये कर जमा हुआ. हरियाणा 70,947.31 करोड़ रुपये के साथ सातवें और पश्चिम बंगाल 60,374.64 करोड़ रुपये के साथ आठवें स्थान पर है. उत्तर प्रदेश, 48,333.44 करोड़ रुपये के कलेक्शन के साथ नौवें स्थान पर आता है.

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