व्यापार – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 08 Feb 2025 05:29:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 लोन लेने वालों को पता होनी चाहिए RBI की ये गाइडलाइन, लोन देने वाले कभी नहीं बताएंगे आपको https://samacharpacheesa.com/?p=14953 https://samacharpacheesa.com/?p=14953#respond Sat, 08 Feb 2025 05:29:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14953 पर्सनल लोन लेते समय ब्याज दर का चुनाव एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है, जो आपके फाइनेंशियल्स से जुड़े भविष्य को प्रभावित कर सकता है. ब्याज दरें दो प्रकार की होती हैं: फिक्स्ड (Fixed) और फ्लोटिंग (Floating). इन दोनों के बीच के अंतर, उनके लाभ-हानि, और आपके लिए कौन-सा विकल्प उपयुक्त हो सकता है, इस बारे में लोगों में अक्सर कन्फ्यूजन रहता है. यदि आपको भी ऐसा कोई कन्फ्यूजन है तो उसे दूर कर देते हैं.

फिक्स्ड ब्याज दर वह होती है, जो लोन की पूरी अवधि के दौरान एक-समान रहती है. इसका मतलब है कि आपकी मासिक EMI (समान मासिक किस्त) लोन अवधि के अंत तक नहीं बदलेगी, चाहे बाजार में ब्याज दरें बढ़ें या घटें. यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो अपने मासिक बजट में स्थिरता चाहते हैं और भविष्य में ब्याज दरों में संभावित वृद्धि से बचना चाहते हैं. हालांकि, फिक्स्ड ब्याज दरें आमतौर पर फ्लोटिंग दरों की तुलना में 1.5 से 2 फीसदी तक अधिक होती हैं. इसके अलावा, यदि बाजार में ब्याज दरें घटती हैं, तो भी आपकी EMI में कोई कमी नहीं होगी.

फ्लोटिंग ब्याज दर?
दूसरी ओर, फ्लोटिंग ब्याज दरें बाजार की स्थितियों के अनुसार समय-समय पर बदलती रहती हैं. ये दरें किसी बेंचमार्क, जैसे कि बैंक के रेपो रेट या RBI की रेपो दर से जुड़ी होती हैं. यदि बेंचमार्क दर बढ़ती है तो आपकी ब्याज दर और EMI भी बढ़ेगी. और यदि घटती है, तो EMI कम हो सकती है. फ्लोटिंग दरों का मुख्य लाभ यह है कि ये फिक्स्ड दरों की तुलना में कम हो सकती हैं, जिससे आपको कुल ब्याज भुगतान में बचत हो सकती है. हालांकि, इनकी अनिश्चितता के कारण मासिक बजट की प्लानिंग करना ज़रा चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

आरबीआई ने कहा- स्विच कर पाएंगे लोन लेने वाले
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि लोन लेने वालों को ब्याज दर के प्रकार को बदलने का विकल्प मिलेगा. नए दिशानिर्देशों के तहत, बैंक और वित्तीय संस्थान लोन की शर्तों को रीसेट करते समय उधारकर्ताओं को फिक्स्ड और फ्लोटिंग दरों के बीच स्विच करने का विकल्प प्रदान करने के लिए बाध्य हैं. इस परिवर्तन से उपभोक्ताओँ को अपने लोन की शर्तों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी.

आपके लिए कौन-सी सही?
फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज दरों के बीच चयन करना आपके वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम सहनशीलता और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है. यदि आप स्थिरता और पूर्वानुमानित EMI चाहते हैं, तो फिक्स्ड ब्याज दर उपयुक्त हो सकती है. वहीं, यदि आप बाजार की स्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में संभावित कमी का लाभ उठाना चाहते हैं और जोखिम लेने के लिए तैयार हैं, तो फ्लोटिंग ब्याज दर एक बेहतर विकल्प हो सकता है. निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय स्थिति, जोखिम सहनशीलता और भविष्य की योजनाओं पर विचार करना महत्वपूर्ण है.

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रसोई का बजट बिगाड़ने वाले प्‍याज का कम होने लगा रेट, अभी और कितना गिरेगा भाव https://samacharpacheesa.com/?p=11887 Sat, 16 Nov 2024 05:11:39 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11887 प्‍याज पिछले काफी दिनों से आम आदमी की पहुंच से बाहर था. देश के कई शहरों में प्‍याज की खुदरा कीमत 80 रुपये किलो तक पहुंच गई. इस महीने देश की सबसे बड़ी प्‍याज मंडी, लासलगांव में प्‍याज की थोक कीमत पांच साल के उच्‍चतम स्‍तर पर जा पहुंची. लेकिन, अब राहत भरी खबर आई है. प्‍याज की कीमतें अब नीचे आने शुरू हो गई है. नई दिल्‍ली में सोमवार को जहां रिटेल में प्‍याज औसतन 67 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वहीं उसका भाव अब घटकर 63 रुपये किलो हो चुका है. सरकारी अधिकारियों और प्‍याज व्‍यापारियों का कहना है कि आगे प्‍याज के भाव में और कमी होगी.

सरकार का कहना है कि अगले 1-2 हफ्तों में कीमतों में और गिरावट आएगी, क्योंकि बिहार और झारखंड से मजदूर त्योहारी छुट्टियों के बाद प्याज उत्पादक केंद्रों पर लौटने लगे हैं. इसके अलावा, राजस्थान, विशेष रूप से अलवर से प्याज की आपूर्ति बढ़ने से भी कीमतों में कमी आएगी.

ट्रेन से दिल्‍ली आ रहा प्‍याज
सरकारी सहकारी संस्थाएं नैफेड और एनसीसीएफ ने देश की राजधानी दिल्‍ली में प्‍याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रेनों के जरिए प्‍याज मंगवा रही है. ट्रेनों के जरिए 3,170 टन प्याज दिल्ली-एनसीआर में पहुंचाया जाएगा. टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मामलों के विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “12 नवंबर को 730 टन प्याज लेकर एक ट्रेन दिल्ली पहुंची और शनिवार को 840 टन प्याज की एक और खेप राजधानी पहुंचेगी. यह नई आपूर्ति खुदरा बाजार में दखल के लिए इस्तेमाल की जाएगी. हमें उम्मीद है कि अगले 7-10 दिनों में कीमतों में और गिरावट आएगी.”

मजदूरों की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें
त्योहारी सीजन के दौरान, नासिक में प्याज की छंटाई के लिए मजदूरों की कमी के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी. प्याज की छंटाई मैन्युअल रूप से की जाती है, जिसमें आकार, गुणवत्ता और अन्य मापदंडों का ध्यान रखा जाता है. आजादपुर मंडी के प्याज व्यापार संघ के अध्यक्ष श्रीकांत मिश्रा ने कहा, “प्याज की कीमतों में स्थिरता आने में एक महीने का समय लग सकता है. इस साल कीमतें असामान्य रूप से ऊंची रही हैं. खरीफ फसल की आवक से कीमतों में कमी की उम्मीद है. अगले कुछ दिनों में आपूर्ति बढ़ने से स्थिति में सुधार होगा.

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रसोई का बजट बिगाड़ने वाले प्‍याज का कम होने लगा रेट, अभी और कितना गिरेगा भाव https://samacharpacheesa.com/?p=11902 Sat, 16 Nov 2024 05:11:39 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11902 प्‍याज पिछले काफी दिनों से आम आदमी की पहुंच से बाहर था. देश के कई शहरों में प्‍याज की खुदरा कीमत 80 रुपये किलो तक पहुंच गई. इस महीने देश की सबसे बड़ी प्‍याज मंडी, लासलगांव में प्‍याज की थोक कीमत पांच साल के उच्‍चतम स्‍तर पर जा पहुंची. लेकिन, अब राहत भरी खबर आई है. प्‍याज की कीमतें अब नीचे आने शुरू हो गई है. नई दिल्‍ली में सोमवार को जहां रिटेल में प्‍याज औसतन 67 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वहीं उसका भाव अब घटकर 63 रुपये किलो हो चुका है. सरकारी अधिकारियों और प्‍याज व्‍यापारियों का कहना है कि आगे प्‍याज के भाव में और कमी होगी.

सरकार का कहना है कि अगले 1-2 हफ्तों में कीमतों में और गिरावट आएगी, क्योंकि बिहार और झारखंड से मजदूर त्योहारी छुट्टियों के बाद प्याज उत्पादक केंद्रों पर लौटने लगे हैं. इसके अलावा, राजस्थान, विशेष रूप से अलवर से प्याज की आपूर्ति बढ़ने से भी कीमतों में कमी आएगी.

ट्रेन से दिल्‍ली आ रहा प्‍याज
सरकारी सहकारी संस्थाएं नैफेड और एनसीसीएफ ने देश की राजधानी दिल्‍ली में प्‍याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रेनों के जरिए प्‍याज मंगवा रही है. ट्रेनों के जरिए 3,170 टन प्याज दिल्ली-एनसीआर में पहुंचाया जाएगा. टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मामलों के विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “12 नवंबर को 730 टन प्याज लेकर एक ट्रेन दिल्ली पहुंची और शनिवार को 840 टन प्याज की एक और खेप राजधानी पहुंचेगी. यह नई आपूर्ति खुदरा बाजार में दखल के लिए इस्तेमाल की जाएगी. हमें उम्मीद है कि अगले 7-10 दिनों में कीमतों में और गिरावट आएगी.”

मजदूरों की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें
त्योहारी सीजन के दौरान, नासिक में प्याज की छंटाई के लिए मजदूरों की कमी के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी. प्याज की छंटाई मैन्युअल रूप से की जाती है, जिसमें आकार, गुणवत्ता और अन्य मापदंडों का ध्यान रखा जाता है. आजादपुर मंडी के प्याज व्यापार संघ के अध्यक्ष श्रीकांत मिश्रा ने कहा, “प्याज की कीमतों में स्थिरता आने में एक महीने का समय लग सकता है. इस साल कीमतें असामान्य रूप से ऊंची रही हैं. खरीफ फसल की आवक से कीमतों में कमी की उम्मीद है. अगले कुछ दिनों में आपूर्ति बढ़ने से स्थिति में सुधार होगा.

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1 नवंबर से नियमों में बड़ा बदलाव, LPG की कीमत से लेकर म्यूचुअल फंड तक सरकार का बड़ा फैसला https://samacharpacheesa.com/?p=11335 Tue, 29 Oct 2024 06:55:44 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11335 क्टूबर का महीना खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचा है. अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 नवंबर से आम आदमी से जुड़ी कई चीजों में बदलाव होने जा रहा है. इसमें एलपीजी की कीमतों से लेकर और म्यूचुअल फंड तक के नियम शामिल हैं. दरअसल, हर महीने की पहली तारीख को कई बदलाव होते हैं. सरकारी और गैर-सरकारी कंपनियां भी अपने नियमों में बदलाव करती हैं. आम आदमी को इन नियमों में बारे में पता होता जरूरी है. इन बदलावों का आम आदमी के जेब पर सीधा असर आम पड़ता है.

LPG सिलेंडर के दाम 
आमतौर हर महीने की एक तारीख को सरकार एलपीजी के दाम में बदलाव करती है. कमर्शियल गैस सिलेंडर से लेकर रसोई गैस के दाम में बदलाव देखा जाता है. ऐसे में इस बार भी एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव की उम्‍मीद की जा रही है. अक्टूबर में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दाम बढ़े थे, जबकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया. इस बार 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती होने की उम्मीद जताई जा रही है.

म्यूचुअल फंड्स में इनसाइडर ट्रेडिंग रोकने के लिए लागू होंगे नए नियम
अगर आप म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं या लगाने की सोच रहे हैं तो इसस जुड़ा एक नियम जान लें, जो 1 नवंबर से लागू होने जा रहा है. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI)  ने म्यूचुअल फंड्स में इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के लिए नए नियम जारी किए हैं. ये नियम 1 नवंबर से लागू होगा. सेबी ने म्यूचुअल फंड यूनिट्स को ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ नियमों के तहत शामिल किया है यानी अब म्यूचुअल फंड्स के यूनिट्स पर भी वैसे ही नियम लागू होंगे जैसे अन्य सिक्योरिटीज पर होते हैं.

SBI क्रेडिट कार्ड के नियम में बदलाव
एसबीआई के क्रेडिट कार्ड के जरिए एक स्टेटमेंट साइकिल में 50 हजार रुपये से ज्यादा के यूटिलिटी बिल पेमेंट पर 1 फीसदी एक्सट्रा चार्ज लिया जाएगा. एसबीआई ने शौर्य/डिफेंस क्रेडिट कार्ड को छोड़कर सभी अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड के फाइनेंस चार्ज में भी बदलाव किया है. अब एसबीआई के अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड पर 3.75 फीसदी फाइनेंस चार्ज लगेगा. ये नियम भी 1 नवंबर, 2024 से लागू होंगे.

1 नवंबर से कॉलिंग का बदलेगा ये नियम
1 नवंबर से मैसेज ट्रैसेबिलिटी लागू हो जाएगा. सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को मैसेज ट्रैसेबिलिटी लागू करने का निर्देश दिया है. मोबाइल पर आने वाले मैसेज की जांच की जा सकेगी. इससे फेक कॉल्स और स्पैम को रोकने के लिए कुछ कीवर्ड्स की पहचान की जाएगी.

13 दिनों तक बैंकों में कोई काम नहीं
भारतीय रिजर्व बैंक ने नवंबर के लिए बैंक हॉलिडे लिस्ट जारी कर दी है. इसके मुताबिक, नवंबर में कुल 13 दिन बैंकों में छु्ट्टी रहेगी. ऐसे में बेहतर होगा कि आप नवंबर के लिए छोड़े गए कामों के लिए ब्रांच जाने से पहले बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें.

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धड़ाधड़ पैसा निकाल रहे हैं विदेशी निवेशक, इस महीने की रिकार्ड निकासी, कब थमेगी यह भगदड़ https://samacharpacheesa.com/?p=11253 Sun, 27 Oct 2024 12:26:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11253 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का सिलसिला जारी है. इस महीने एफपीआई ने अबतक भारतीय बाजार से 85,790 करोड़ रुपये या 10.2 अरब डॉलर की निकासी की है. चीन के प्रोत्साहन उपायों, वहां शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन तथा घरेलू शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन की वजह से एफपीआई भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं.

विदेशी कोषों की निकासी के मामले में अक्टूबर का महीना सबसे खराब साबित हो रहा है. मार्च, 2020 में, एफपीआई ने शेयरों से 61,973 करोड़ रुपये निकाले थे. इससे पहले सितंबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 57,724 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो उनके निवेश का नौ माह का उच्चस्तर है. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, जून से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार लिवाल बने हुए थे. अप्रैल-मई में उन्होंने जरूर 34,252 करोड़ रुपये की निकासी की थी.

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एसोसिएट निदेशक, प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि भविष्य में एफपीआई का भारतीय बाजार में निवेश भू-राजनीतिक स्थिति और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव जैसे वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा कि घरेलू मोर्चे पर मुद्रास्फीति का रुख, कंपनियों के तिमाही नतीजे और त्योहारी सत्र की मांग पर एफपीआई की निगाह रहेगी.

आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने एक से 25 अक्टूबर के बीच भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से 85,790 करोड़ रुपये निकाले हैं. एफपीआई की निरंतर बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है, जिससे एनएसई का निफ्टी अपने शीर्ष स्तर से आठ प्रतिशत नीचे आ गया है.

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि एफपीआई की निरंतर बिकवाली के रुख में तत्काल बदलाव आने की संभावना नहीं है. चीन के प्रोत्साहन उपायों की वजह से एफपीआई वहां के बाजार का रुख कर रहे हैं. इसके अलावा भारत में मूल्यांकन ऊंचा होने की वजह से भी एफपीआई बिकवाल बने हुए हैं.

बॉन्‍ड बाजार से भी निकाले पैसे
आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने समीक्षाधीन अवधि के दौरान बॉन्ड से सामान्य सीमा के माध्यम से 5,008 करोड़ रुपये निकाले हैं और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) से 410 करोड़ रुपये का निवेश किया. इस साल अब तक एफपीआई ने शेयरों में 14,820 करोड़ रुपये और ऋण या बॉन्ड बाजार में 1.05 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है.

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बस 6 चीजों का रखें ध्‍यान, आपकी प्रॉपर्टी पर कोई और नहीं कर सकेगा दावा, पुख्‍ता करके ही खरीदें https://samacharpacheesa.com/?p=11249 Sun, 27 Oct 2024 12:11:12 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11249 अक्सर ऐसा होता है ​कि आप कोई संपत्ति खरीद लेते हैं, लेकिन उस पर दूसरे लोग भी दावा करने लगते हैं. खरीदने के बाद पता चलता है कि इसे किसी और ने पहले से ही खरीदा हुआ था. अक्‍सर यह स्थिति उन संपत्तियों की खरीद में होती है जिन्हें री-सेल पर लिया जाता है. साथ ही संपत्तियों के बाजार में पूर्व में एक या फिर उससे अधिक बार उनका सौदा हो चुका होता है. ऐसी संपत्ति आवासीय या कृषि या फिर व्यावसायिक किसी भी तरह के इस्तेमाल की हो सकती है. तो, ऐसी स्थिति से कैसे बचा जाए.

प्रॉपर्टी मामलों के जानकार प्रदीप मिश्रा का कहना है कि अगर आप प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं तो कुछ चीजों को बिना चेक किए सौदा न करें. खास बात ये है कि री-सेल पर कोई संपत्ति अगर खरीद रहे तो किन बातों का ध्‍यान रखना जरूरी होगा. अगर इन चीजों को कुछ परख के साथ खरीदा जाय तो मालिकाना हक को लेकर विवाद की स्थिति नहीं बनेगी. लिहाजा आप 5 चीजों को ध्‍यान में रखकर ही अपना सौदा पूरा करें.

प्रॉपर्टी का ओरिजनल डॉक्‍यूमेंट मांगें
री-सेल पर कोई संपत्ति खरीदते समय उसके मालिक से वास्तविक कागज की मांग करें. संपत्ति का कोई भी स्वामी, संपत्ति की बिक्री से पहले आपको ओरिजनल कागज नहीं सौंपेगा, लेकिन अपनी तसल्ली के लिए आप उन्हें दिखाने के लिए कह सकते हैं. साथ ही एक बार बयाना या टोकन मनी देने के बाद उससे उन कागजात की फोटो प्रति देने के लिए कह सकते हैं, जिससे उन कागजों की वास्तविकता का पता लगवाया जा सके. इन कागजात में सेल डीड, सेल की चेन अर्थात उस संपत्ति को पूर्व में कितनी बार बेचा गया और किसने खरीदा, टाइटल, लैंड यूज, पूर्व में की गई पेमेंट की मूल रसीदें, कब्जा यानी पजेशन सर्टीफिकेट आदि की जांच करा सकते हैं.

प्रॉपर्टी का टाइटल जरूर देखें
संपत्ति की खरीद-फरोख्त में टाइटल का अर्थ उसके स्वामी यानी मालिक से होता है. साथ ही उस संपत्ति को बेचने का अधिकार भी उसे मिलता है. यह देखने वाली बात है कि संपत्ति का मालिक जिस टाइटल पर अपना दावा कर रहा है या जिस संपत्ति पर अपना स्वामित्व बता रहा है, उसे उस संपत्ति का स्वामित्व किस तरह मिला है. क्या उस व्यक्ति ने वह संपत्ति अपने खुद के पैसों से खरीदी है? क्या वह उस संपत्ति का सह-स्वामित्व रखता है या फिर उसे वह संपत्ति अपने पूर्वजों के जरिये वसीयत, उपहार स्वरूप या फिर देश के अन्य प्रावधानों के जरिये प्राप्त हुई है. संपत्ति का टाइटल स्पष्ट हो जाने के बाद आप उस संपत्ति में निवेश के लिए कदम बढ़ा सकते हैं. टाइटल की जांच के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय जा सकते हैं.

बेचने वाले की भी पुष्टि करें
संपत्ति के टाइटल की जानकारी पुष्ट करने के बाद आप खरीदार के बारे में भी जानकारी जुटाना न भूलें. आप उससे सीधे पूछ सकते हैं कि कहीं उस संपत्ति में किसी तरह का सह-स्वामित्व तो नहीं है. इसका मतलब यह है कि क्या वह व्यक्ति अकेले ही उस संपत्ति को बेचने का अधिकार रखता है या फिर उसकी बिक्री में किसी अन्य व्यक्ति की सहमति की जरूरत है. किसी मानसिक तौर पर बीमार व्यक्ति से खरीदी गई संपत्ति भी आपको झंझटों में फंसा सकती है. इसलिए पहले ही यह जानकारी भी प्राप्त कर लें​ कि संपत्ति का विक्रेता मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है.

उपयोग और निर्माण की जांच
संपत्ति के स्वामी और स्वामित्व का निर्धारण हो जाने के बाद आप यह देखें कि आप उस संपत्ति पर किस तरह का निर्माण करवा सकते हैं और आप उसका कैसा इस्तेमाल कर सकते हैं? संभव है कि आपका मन कोई ऐसी संपत्ति लेने का हो जिसके भूतल पर आप दुकान बनवा लें और ऊपर के तलों पर मकान बनवाकर किराया लेना चाहते हों. इसी तरह आप कोई कृषि भूमि लेने पर विचार कर रहे हों जिसे आप फार्म हाउस के रूप में विकसित करवाना चाहते हों. इसका पता आपको लोकल एजेंसियों या जोनल प्लानिंग कार्यालयों से हो जाएगा कि आपकी प्रॉपर्टी पर क्‍या-क्‍या करने की इजाजत है.

सेल डीड और चेन भी जांचें
हर तरफ से निश्चिंत हो जाने के बाद सेल डीड की बारी आती है. यह वह दस्तावेज होता है जो यह बताता है कि विक्रेता के जरिये किन शर्तों और किस दाम पर क्रेता उस संपत्ति को खरीदेगा. इस दस्तावेज में संपत्ति के आकार और उपयोग जैसी चीजों का जिक्र भी किया जाता है. सेल डीड बनवाते समय यह ध्यान रखें कि यह दस्तावेज एक पक्षीय न हो साथ ही उसमें यह लिखवाना न भूलें कि संपत्ति खरीद लेने के बाद भी यदि संपत्ति खरीदे जाने के पहले किसी तरह का कोई बकाया होगा तो वह रकम विक्रेता द्वारा ही दी जाएगी. इसी तरह पूर्व में वह संपत्ति कितनी बार बिकी है और उसका स्वामित्व किन लोगों के पास कितने समय तक के लिए रहा है, यह सभी जानकारियां लेना न भूलें.

पजेशन सर्टीफिकेट और वेरीफिकेशन
संपत्ति की खरीद के लिए अंतिम रकम देने से पहले यह भी सुनिश्चित कर लें कि उस संपत्ति पर उसी व्यक्ति का पजेशन यानी कब्जा है जिससे आप उसे खरीद रहे हैं. यदि उस संपत्ति में कोई किरायेदार रह रहा हो तो अपने नाम पर रजिस्ट्री करवाने से पहले ही आप विक्रेता से संपत्ति खाली कराने को कहें. इसके बाद सुनिश्चित भी कर लें कि संपत्ति खाली हो चुकी है और विक्रेता के कब्जे में संपत्ति आ चुकी है. जैसे ही रजिस्ट्री हो जाय संपत्ति को आप अपने कब्जे में ले लें और अपना ताला भी उस पर लगा दें. इस बात को आप दो दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन के तौर पर प्रकाशित करवा सकते हैं कि आप वह संपत्ति खरीदने जा रहे हैं और यदि किसी व्यक्ति को आपत्ति हो या उसे लेकर उसका कोई दावा करना हो तो वह आपसे संपर्क कर सकता है.

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फॉरेक्स ट्रेडिंग करते हैं तो इन प्लेटफॉर्म से हो जाएं दूर, RBI ने अलर्ट लिस्ट में डाला https://samacharpacheesa.com/?p=11133 Thu, 24 Oct 2024 13:39:11 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11133 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फॉरेक्स ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन करने वाले 13 प्लेटफॉर्म्स पर सख्त कदम उठाए हैं. मंगलवार को आरबीआई ने अपनी अलर्ट लिस्ट को अपडेट किया, जिसमें इन अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स के नाम शामिल किए गए हैं. केंद्रीय बैंक ने इन प्लेटफॉर्म्स पर फॉरेक्स ट्रेडिंग में हिस्सा लेने और फॉरेन एक्सचेंज ट्रांजेक्शन की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पर भी रोक लगा दी है.

आरबीआई की नई अलर्ट लिस्ट में रेंजर कैपिटल, टीडीएफएक्स, इनेफेक्स, यॉर्करएफएक्स, ग्रोलाइन, थिंक मार्केट्स, स्मार्ट प्रॉप ट्रेडर, फंडेड नेक्स्ट, वेलट्रेड, फ्रेशफॉरेक्स, एफएक्स रोड, डीबीजी मार्केट्स और प्लसवन ट्रेड के नाम शामिल हैं. इन सभी इकाइयों पर फॉरेक्स ट्रेडिंग के लिए अधिकृत नहीं होने के आरोप लगे हैं.

लिस्ट में कुल 88 इकाइयां
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी इकाई का नाम इस लिस्ट में नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे फॉरेक्स ट्रेडिंग के लिए अधिकृत किया गया है. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह सूची पूर्ण नहीं है, और ट्रेडिंग शुरू करने से पहले सभी निवेशकों को प्लेटफॉर्म की वैधता के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए.

RBI की सख्त चेतावनी
इस साल अप्रैल में आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी अनधिकृत फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर चिंता व्यक्त की थी. इसके साथ ही बैंकों को निर्देश दिया गया था कि वे ऐसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाएं. इससे पहले 2022 में भी आरबीआई ने अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स के प्रमोशन के खिलाफ चेतावनी जारी की थी. आरबीआई का यह कदम उन सभी प्लेटफॉर्म्स पर शिकंजा कसने के लिए उठाया गया है, जो फॉरेक्स ट्रेडिंग के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे और भारतीय निवेशकों को जोखिम में डाल रहे थे.

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अभी सस्ता नहीं हो रहा लोन….RBI गवर्नर ने बताया क्यों ऐसा करना अभी मुमकिन नहीं https://samacharpacheesa.com/?p=10931 Sat, 19 Oct 2024 06:32:58 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10931 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान स्थिति में ब्याज दरों में कटौती “जल्दबाजी” और “बहुत जोखिम भरी” होगी क्योंकि खुदरा महंगाई अभी भी उच्च स्तर पर है. उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य की मौद्रिक नीतियों का निर्धारण आय और अन्य आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा. इस महीने की शुरुआत में, आरबीआई ने मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के कारण नीतिगत दरों (रेपो रेट) में कोई बदलाव नहीं किया था और मौद्रिक नीति का रुख न्यूट्रल कर दिया था. अगले द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा 6 दिसंबर को होगी.

गवर्नर दास ने ब्लूमबर्ग द्वारा आयोजित इंडिया क्रेडिट फोरम में कहा कि सितंबर में मुद्रास्फीति ऊंची रही थी और अगले माह भी इसमें बढ़ोतरी की संभावना है. इसीलिए, उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नीतिगत दरों में कटौती का निर्णय जोखिम भरा होगा. अगर नीतिगत दरों में कटौती नहीं होती है तो इसका मतलब है कि आम लोगों को मिलने वाले लोन पर भी ब्याज नीचे नहीं आएगा.

आरबीआई पुलिस नहीं
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक किसी पुलिसकर्मी की तरह काम नहीं करता, बल्कि वह वित्तीय बाजार पर कड़ी नजर रखता है और जरूरत पड़ने पर नियामकीय कदम उठाता है. आरबीआई गवर्नर की यह टिप्पणी आरबीआई की तरफ से नवी फिनसर्व और तीन अन्य गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) के खिलाफ बृहस्पतिवार को की गई नियामकीय कार्रवाई के एक दिन बाद आई है. आरबीआई ने सचिन बंसल की अगुवाई वाली नवी फिनसर्व एवं तीन अन्य एनबीएफसी को 21 अक्टूबर की कारोबार समाप्ति से कर्ज मंजूर करने और वितरण से रोकने का आदेश दिया है. यह कदम अत्यधिक मूल्य निर्धारण और सुपरविजन को लेकर उपजी चिंताओं के कारण उठाया गया है.

आरबीआई के गवर्नर ने कहा, “हम पुलिसकर्मी नहीं हैं. पर हम नजर रखे हुए हैं. हम बहुत बारीकी से निगाह रखे हुए हैं. हम कर्ज बाजारों पर निगरानी रखते हैं और जब आवश्यक हो जाता है तो हम कार्रवाई करते हैं.” दास ने मौजूदा समय को भारत का दौर बताते हुए कहा, “भारत की वृद्धि की गाथा अभी भी कायम है. मुद्रास्फीति अब काफी हद तक लक्ष्य सीमा के भीतर आ गई है. इसके कम होने की उम्मीद है.”

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हर रोज घटता रहेगा घर में रखा आपका पैसा, 1 करोड़ रह जाएगा केवल 17 लाख….. https://samacharpacheesa.com/?p=10929 Sat, 19 Oct 2024 06:30:55 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10929 महंगाई को अक्सर “मौन चोर” कहा जाता है, जो बिना किसी शोर के आपकी मेहनत की कमाई की ताकत को धीरे-धीरे कम कर देता है. अगर आपके पास आज 1 करोड़ रुपये हैं, तो 30 साल बाद इसकी वैल्यू केवल 17 लाख रुपये रह जाएगी. महंगाई की इस मार से बचने के लिए समझना होगा कि यह कैसे काम करती है और हमें अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए. आइए जानते हैं, कैसे महंगाई आपके पैसों की कीमत घटाती है और किन निवेश विकल्पों से आप अपनी संपत्ति को बढ़ा सकते हैं.

महंगाई वह प्रक्रिया है जिसमें समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि होती है. इसका मतलब है कि जितनी चीज़ें आज 1 करोड़ रुपये में खरीदी जा सकती हैं, कुछ सालों बाद उतनी ही चीज़ों को खरीदने के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत होगी. उदाहरण के लिए, अगर महंगाई की दर औसतन 6% सालाना है, तो आज जो चीजें 1 करोड़ रुपये में आती हैं, उनका मूल्य भविष्य में काफी बढ़ जाएगा. आपकी 1 करोड़ रुपये की राशि भले ही गिनती में वही रहेगी, लेकिन इसकी परचेसिंग पावर घट जाएगी.

1 करोड़ रुपये की घटती वैल्यू
महंगाई की 6% वार्षिक दर से 1 करोड़ रुपये पर पड़ने वाले प्रभाव को समझते हैं:
• 10 साल बाद: आपकी 1 करोड़ रुपये की वर्तमान मूल्य 55.87 लाख रुपये रह जाएगी, यानी उसकी लगभग आधी क्रय शक्ति खत्म हो जाएगी.
• 20 साल बाद: यह मूल्य और गिरकर 31.15 लाख रुपये रह जाएगी, जो आपकी प्रारंभिक क्रय शक्ति का एक-तिहाई से भी कम है.
• 30 साल बाद: यह केवल 17.42 लाख रुपये तक गिर जाएगी, यानी आपकी राशि का केवल छठवां हिस्सा ही बचेगा.

पैसा क्यों खो देता है अपनी वैल्यू?
जब चीज़ों की कीमतें बढ़ती हैं, तो आपका पैसा उन वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने की क्षमता खो देता है. जैसे कि कुछ साल पहले जो चाय का कप 5 रुपये का आता था, वह आज 10 रुपये का हो गया है. कहीं-कहीं तो 20 रुपये का चाय का कप भी मिलता है. इसी तरह, 1 करोड़ रुपये की क्रय शक्ति समय के साथ घटती जाएगी.

संपत्ति बढ़ाने की रणनीतियां
अच्छी बात ये है कि महंगाई के प्रभाव से निपटने के लिए कुछ तरीके हैं, जिनसे आप अपनी बचत को सुरक्षित और बढ़ा सकते हैं:
• शेयरों और म्यूचुअल फंड्स में निवेश करें: ऐतिहासिक रूप से शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स ने महंगाई से ज्यादा रिटर्न दिया है. अगर बाजार सालाना 10% की दर से बढ़ता है, तो आपके 1 करोड़ रुपये 10 साल में लगभग 2.59 करोड़ रुपये, 20 साल में 6.73 करोड़ रुपये और 30 साल में 17.45 करोड़ रुपये हो सकती है.
• रियल एस्टेट में निवेश करें: संपत्ति की कीमतें समय के साथ बढ़ती हैं और किराए से भी आय मिल सकती है. हालांकि, ध्यान रहे कि रियल एस्टेट बाजार में उतार-चढ़ाव भी आते हैं, जैसे कि शेयर बाजार में.
• सोना और अन्य वस्तुओं में निवेश करें: महंगाई के दौर में सोना एक सुरक्षित संपत्ति मानी जाती है. इसका मूल्य अक्सर महंगाई के साथ बढ़ता है, इसलिए यह महंगाई के खिलाफ एक पॉपुलर सुरक्षा उपाय है.
• महंगाई-संरक्षित निवेश चुनें: पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट और बॉन्ड्स महंगाई को हर बार मात नहीं दे पाते, लेकिन कुछ सरकारी बॉन्ड्स ऐसे होते हैं जो महंगाई से जुड़े रिटर्न देते हैं और बढ़ती कीमतों के प्रभाव को कम करते हैं.

भारत में महंगाई की स्थिति
भारत में वर्तमान में महंगाई की दर 6.4% के आसपास है, जो सरकार के 4-6% के लक्ष्य से ऊपर है. खासकर खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ावा दे रही हैं. ऐसे में समझदारी भरे निवेश निर्णय लेकर आप अपनी संपत्ति को महंगाई से सुरक्षित कर सकते हैं.

अगर आप अपनी 1 करोड़ रुपये की राशि को बस नकद में रखते हैं, तो यह महंगाई के हानिकारक प्रभावों का शिकार हो जाएगी. 10, 20 या 30 साल में इसकी क्रय शक्ति घट जाएगी. इसलिए, महंगाई को मात देने और अपनी संपत्ति को बढ़ाने के लिए स्टॉक, रियल एस्टेट या सोने जैसे विकल्पों में निवेश करने पर विचार करें. यह आपके वित्तीय भविष्य को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है.

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कम होंगी ब्‍याज दरें..आरबीआई गर्वनर ने कहा ऐसा….. https://samacharpacheesa.com/?p=10927 Sat, 19 Oct 2024 06:29:07 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10927 अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्‍याज दरों में कटौती करने के बाद भारत में भी रेपो रेट में कटौती होने के कयास लगाए जा रहे हैं. कुछ बाजार विश्‍लेषक दावा कर रहे हैं कि दिसंबर में भारतीय रिजर्व बैंक ब्‍याज दरों में कटौती करेगा. अब रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने स्थिति स्‍पष्‍ट कर दी है. दास ने कहा है कि फिलहाल ऐसा ब्‍याज दर में कटौती करना “समय से पहले और बेहद जोखिम भरा” हो सकता है. वर्तमान परिस्थितियों में, जब मुद्रास्फीति का स्तर ऊँचा है और आगे भी इसमें वृद्धि की संभावना बनी हुई है, ब्याज दरों में कटौती उचित नहीं होगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिसंबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में आरबीआई दरों में कटौती करने की कोई जल्दी में नहीं है.

दास ने एक ब्‍लूमबर्ग को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “जब मुद्रास्फीति 5.5% पर हो और अगले आंकड़ों में भी इसका ऊँचा बने रहने का अनुमान हो, तो दरों में कटौती करना संभव नहीं है. खासकर तब जब आर्थिक वृद्धि अच्छी गति से आगे बढ़ रही हो.” दास ने कहा कि रिजर्व बैंक का मुख्य उद्देश्य वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य के दायरे में रखना है.

मुद्रास्फीति पर नजर, विकास दर पर भरोसा
अक्टूबर में हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की पिछली बैठक में आरबीआई ने अपना रुख तटस्थ रखा था और रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर बनाए रखा. दास ने इस निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा कि “हम पीछे नहीं हैं, भारतीय विकास की कहानी बरकरार है और विकास दर में मजबूती है.” उन्होंने बताया कि RBI के अनुमान के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि 7.2% रहने की उम्मीद है. दास ने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति में गिरावट की संभावना है, लेकिन RBI किसी भी निर्णय से पहले ताजा आंकड़ों का इंतजार करेगा और समग्र मुद्रास्फीति के रुझान पर नजर रखेगा.

बाहरी कारकों पर निर्भर नहीं RBI की नीति
दास ने स्पष्ट किया कि RBI अपने फैसले घरेलू आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित करता है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व जैसे बाहरी कारकों से प्रभावित नहीं होता. उन्होंने कहा, “हमारे निर्णय मुख्य रूप से घरेलू मुद्रास्फीति, आर्थिक वृद्धि और व्यापक आर्थिक स्थिति पर निर्भर करते हैं.” दिसंबर में ब्याज दर कटौती की अटकलों पर दास ने कहा कि आरबीआई जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगा.
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