नॉलेज – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 13 Feb 2025 15:28:03 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 क्या होती है सेलेक्ट कमेटी, जिसे भेजा गया इनकम टैक्स बिल, कितनी पॉवरफुल होती है ये https://samacharpacheesa.com/?p=15173 https://samacharpacheesa.com/?p=15173#respond Thu, 13 Feb 2025 15:28:03 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=15173 केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आयकर विधेयक, 2025 पेश किया. बिल पेश करने के बाद उन्होंने इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव रखा. फिर इसे सेलेक्ट कमेटी या चयन समिति के पास भेज दिया गया. संसदीय चयन समिति क्या होती है. क्या हर बिल के लिए चुनी जाती है या पहले से तय होती है. इसका क्या काम होता है. वैसे अमेरिका और ब्रिटेन की संसद में सेलेक्ट कमेटी होती है, जो खास विशेषाधिकार हासिल कमेटी होती है.

इनकम टैक्स संबंधी जो बिल सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया है. वो अपनी रिपोर्ट संसद के अगले सत्र के पहले दिन सौंप सकती है.आप कह सकते हैं कि किस जटिल या महत्वपूर्ण बिल पर विचार-विमर्श और समीक्षा के लिए ऐसी खास कमेटी की जरूरत होती है. इसका गठन लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति द्वारा किया जाता है.

– भारतीय संसद में संसदीय सेलेक्ट कमेटी (Parliamentary Select Committee) एक विशेष समिति होती है जो किसी विशेष विधेयक (बिल) या मुद्दे की जांच और विस्तार से विचार-विमर्श के लिए गठित की जाती है. यह समिति संसद के सदस्यों से बनी होती है. इसका मुख्य उद्देश्य किसी विशेष मामले पर गहन अध्ययन करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना होता है.

जब कोई महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पेश किया जाता है, तो उसे और अधिक विस्तृत विचार-विमर्श के लिए सेलेक्ट कमेटी को भेजा जा सकता है. समिति विधेयक के प्रावधानों की जांच करती है. संभावित संशोधनों की सिफारिश कर सकती है. कभी-कभी किसी विशेष मुद्दे या समस्या पर गहन अध्ययन करने के लिए भी सेलेक्ट कमेटी का गठन किया जाता है.

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पृथ्वी पर आ जाएगी तबाही, खाना-पानी हो जाएगा खत्म… एस्टेरॉयड बेन्नू की टक्कर से क्या होगा, बड़ा खुलासा https://samacharpacheesa.com/?p=14957 https://samacharpacheesa.com/?p=14957#respond Sat, 08 Feb 2025 05:35:37 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14957 पृथ्वी के लिए सबसे बड़ा खतरा उल्कापिंड है. हजारों की संख्या में उल्कापिंड घूम रहे हैं. लेकिन यह सभी धरती पर तबाही नहीं ला सकते. लेकिन एक उल्कापिंड ऐसा है, जिसने वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा चिंतित किया है. इस उल्कापिंड का नाम बेन्नू है. इसकी चौड़ाई 500 मीटर है. वहीं नासा के पास इसका सैंपल है, जिसमें वैज्ञानिकों को जीवन के प्रमुख घटक मिले हैं. वैज्ञानिक गणना के हिसाब से यह साल 2182 में 2,700 में से 1 बार इसके पृथ्वी से टकराने की संभावना है. यह संभावना उतनी ही है कि एक सिक्के को 11 बार उछाला जाए और हर बार एक ही परिणाम मिले. यही कारण है कि यह टक्कर बेहद दुर्लभ मानी जाती है. लेकिन वैज्ञानिकों ने अब पता लगा लिया है कि अगर यह पृथ्वी से टकराया तो क्या परिणाम होंगे.

शोधकर्ताओं ने पाया है कि इसकी टक्कर से भूकंप और सुनामी पैदा हो जाएगी. इस टक्कर से अंतरिक्ष में लाखों टन धूल पहुंच जाएगी. यह धूल इतनी होगी कि पृथ्वी पर सूर्य की रोशनी का आना भी मुश्किल होगा. इस वजह से दो साल की ठंड ग्रह पर पड़ेगी. दुनिया ठंडी और शुष्क हो जाएगी. वैश्विक तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज होगी. इसके अलावा वैश्विक वर्षा में 15 फीसदी की कमी आएगी. दक्षिण कोरिया में पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने सुपर कंप्यूटर और अत्याधुनिक जलवायु सिमुलेशन का उपयोग किया. उत्तरी अमेरिका के कुछ इलाकों में वर्षा 30-60 फीसदी के बीच कम हो जाएगी. यानी कि फसलों की पैदावार लगभग असंभव होगी.

डायनासोर की तरह हो जाएगा खात्मा?
इस शोध के प्रमुख लेखक डॉ. लान दाई के मुताबिक दुनिया में इससे एक बड़ा खाद्य संकट पैदा हो सकता है. चिक्सुलब एस्टेरॉयड की टक्कर से पृथ्वी पर डायनासोर का सफाया हो गया था. लेकिन बेन्नू की टक्कर से बड़े पैमाने पर जीवों का खात्मा नहीं होगा. माना जाता है कि बेन्नू के आकार का एस्टेरॉयड हर 100,000-200,000 वर्षों में पृथ्वी से टकराते हैं. इसलिए संभावना है कि हमारे शुरुआती पूर्वज पहले ही इनमें से किसी अंतरिक्ष चट्टान में खत्म होने से बच गए हैं. लेकिन यह तय है कि बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन ट्रिगर होगा.

ओजोन परत को होगा नुकसान
बेन्नू की टक्कर से उसी तरह की तबाही मचेगी जैसा किसी परमाणु हमले के बाद होने की कल्पना की जाती है. डॉ. दाई और स्टडी के अन्य लेखकों का मानना है कि 100 से 400 मिलियन टन धूल लगभग दो वर्षों तक पृथ्वी के ऊपर बनी रहेगी. यूरेशिया और उत्तर अमेरिका में सबसे भयानक ठंड देखी जाएगी. इसके अतिरिक्त शोधकर्ताओं का अनुमान है कि महासागरों के ऊपर वाष्पीकरण के पैटर्न में व्यवधान के कारण दुनिया के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर सूखा होगा. इसके अलावा बेन्नू की टक्कर से निकली धूल ओजोन परत को नुकसान पहुंचाएगी. इससे ओजोन परत 32 फीसदी तक कमजोर होने का खतरा रहेगा.

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भूलकर भी इन कोर्सेस में न लें एडमिशन, बर्बाद हो जाएगी जिंदगी, कहीं नहीं मिलेगी नौकरी https://samacharpacheesa.com/?p=11242 Sun, 27 Oct 2024 07:57:03 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11242 12वीं पास करने के बाद हायर एजुकेशन के लिए सही कॉलेज या कोर्स में एडमिशन लेना आसान नहीं है. इसके लिए किसी करियर काउंसलर से गाइडेंस लेना ठीक रहता है. टेक्नोलॉजी बहुत तेजी के साथ बदल रही है. उसके साथ ही करियर ऑप्शन, कोर्सेस और जॉब मार्केट में भी बदलाव हो रहा है. कई कोर्सेस की डिमांड कम हो गई है. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सालों में ये पूरी तरह से खत्म ही हो जाएंगे.

12वीं के बाद सही कोर्स में एडमिशन लेना बहुत जरूरी है (Career Options after 12th). अगर आप किसी ऐसे कोर्स में एडमिशन ले लेते हैं, जिसका भविष्य में कोई काम नहीं है तो आपकी पूरी पढ़ाई बर्बाद हो जाएगी. इन दिनों पढ़ाई बहुत महंगी हो गई है. लोगों के लिए फीस भरना तक मुश्किल हो जाता है. ऐसे में गलत कोर्स में एडमिशन लेकर अपने फ्यूचर के साथ खिलवाड़ करने से बचना चाहिए. जानिए कुछ ऐसे कोर्सेस, जिनकी डिमांड पूरी तरह से खत्म होने वाली है.

Career Options after 12th Arts: आर्ट्स स्ट्रीम के इन कोर्स में न लें एडमिशन
इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र जैसे कोर्सेस पहले बहुत डिमांड में थे. आर्ट्स स्ट्रीम का नाम ही इन कोर्सेस से था. लेकिन बीते कुछ सालों में इन कोर्सेस में एडमिशन लेने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. ये थ्योरेटिकल विषय नॉलेज के हिसाब से सही हैं, लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ यानी असलियत में इनकी डिमांड कम होती है. आर्ट्स स्ट्रीम के इन कोर्सेस में तभी एडमिशन लें, जब आपको इनमें फ्यूचर की संभावनाएं नजर आएं.

Career Options after 12th Science and Math: विज्ञान और गणित के कुछ कोर्स भी हो गए बेकार
विज्ञान और गणित फॉरएवर ट्रेंडिंग स्ट्रीम्स हैं. इनमें नौकरी के बहुत ऑप्शन होते हैं. लेकिन इन स्ट्रीम्स के कुछ कोर्सेस भी अब अपनी पहचान खोते जा रहे हैं. जियोलॉजी या मैथमेटिकल स्टैटिस्टिक्स जैसे कोर्सेस में नौकरी मिलना आसान नहीं होता है. इन क्षेत्रों में काम कर रहे लोग रोजगार के लिए परेशान हो रहे हैं. अगर आपके पास इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता नहीं है या आगे इनमें रिसर्च नहीं करना चाहते हैं तो कॉलेज के किसी भी साल में इन्हें पढ़कर टाइम वेस्ट न करें.

Engineering Courses after 12th: इंजीनियरिंग के ये कोर्सेस हैं आउट ऑफ फोकस
इंजीनियरिंग में पढ़ाई और नौकरी, दोनों लिहाज से बहुत ऑप्शन हैं. लेकिन अब इस क्षेत्र में भी काफी डेवलपमेंट हो चुका है. टेक्नोलॉजी अपडेट होने से इंजीनियरिंग कोर्सेस में बदलाव देखा गया है. ऐसे में प्लास्टिक इंजीनियरिंग या पेपर टेक्नोलॉजी जैसे कुछ पुराने इंजीनियरिंग कोर्स की पढ़ाई करने के बाद नौकरी ढूंढना चैलेंजिंग साबित हो सकता है. प्रिंट टेक्नोलॉजी में भी प्रोफेशनल्स की डिमांड कम हो गई है. इससे बेहतर है कि आप एआई और एमएल में इंजीनियरिंग कर लें.

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मेडिकल कॉलेज में आसानी से नहीं मिलेगा एडमिशन, नीट यूजी परीक्षा में होने वाले हैं बड़े बदलाव https://samacharpacheesa.com/?p=11172 Sat, 26 Oct 2024 06:01:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11172 साल 2024 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की ज्यादातर परीक्षाएं चर्चा में रहीं. नीट यूजी पेपर लीक, नीट यूजी रिजल्ट, यूजीसी नेट पेपर लीक, फिर उसको पोस्टपोन किया जाना, सीयूईटी में नकल जैसी कई गड़बड़ियों की शिकायत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई. बीच में एनटीए अध्यक्ष को भी बदलना पड़ा. अब एनटीए ने 2025 की परीक्षाओं में बदलाव करने का फैसला लिया है. नीट यूजी 2025 परीक्षा पैटर्न को भी बदलने की तैयारी चल रही है (NEET UG 2025).

हर साल की तरह 2025 में भी लाखों 12वीं पास युवा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए नीट यूजी परीक्षा देंगे (Medical College Admission). नीट यूजी परीक्षा मई, 2025 में होने की संभावना है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की परीक्षाओं में सुधार के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है. इसकी रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक जारी होगी. नीट यूजी 2025 परीक्षा पैटर्न में संभावित बदलावों को लेकर हाल ही में एक आरटीआई फाइल की गई थी. एनटीए ने आरटीआई के जवाब में कुछ जरूरी बातें बताई हैं.

आरटीआई में क्या पूछा गया?
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. विवेक पांडेय ने यह आरटीआई फाइल की थी (Dr. Vivek Pandey RTI). इसमें उन्होंने जुलाई और अगस्त 2024 में नीट 2025 परीक्षा पैटर्न में बदलावों से जुड़ी जानकारी मांगी थी. इसका जवाब देते हुए एनटीए ने कहा है कि फिलहाल, नीट यूजी 2025 परीक्षा पैटर्न में संभावित बदलावों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. बता दें कि आरटीआई में नीट 2024 और नीट 2025 परीक्षा के संबंध में आयोजित बैठकों की डिटेल्स भी मांगी गई थीं.

लाखों स्टूडेंट्स पर पड़ेगा फर्क
आरटीआई के जवाब में बताया गया कि एक उच्च स्तरीय जांच समिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले को लेकर विचार कर रही है. इस समिति के अनुसार, नीट यूजी 2025 परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया जाएगा (NEET UG 2025 Exam Pattern). आरटीआई के जवाब में आई प्रतिक्रिया से नीट यूजी उम्मीदवार चिंतित हैं. मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम पैटर्न में जरा सा भी बदलाव लाखों स्टूडेंट्स को प्रभावित कर सकता है. इससे एग्जाम की तैयारी करने के पैटर्न पर भी फर्क पड़ सकता है.

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अनइन्स्टॉल ऐप भी चुराता है मोबाइल डाटा, तुरंत सेटिंग में जाकर करें ये काम, फिर नहीं रहेगा चोरी का डर https://samacharpacheesa.com/?p=10555 Wed, 09 Oct 2024 05:47:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10555

स्मार्टफोन से बेकार के मोबाइल ऐप डिलीट करने के बाद यूजर्स बेफ्रिक हो जाते हैं. लेकिन, अनइन्स्टॉल होने के बाद भी ये ऐप्स मोबाइल डाटा पर डाका डालते रहते हैं. ऐसे में इन्हें पूरी तरह से मोबाइल से बाहर करना जरूरी है.

स्मार्टफोन आज हर आदमी की जरूरत बन गई है. क्योंकि, वॉइस और वीडियो कॉलिंग के साथ-साथ इसमें इंटरनेट से जुड़ी तमाम सुविधाएं मिलती हैं. यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए मोबाइल में कई ऐप इन्स्टॉल किए जाते हैं.

ऐप इन्स्टॉलेशन के दौरान यूजर्स कई बातों का ध्यान रखते हैं लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ऐप को अनइन्स्टॉल करने के बाद भी सावधानी बरतनी जरूरी है, क्योंकि इनसे आपके मोबाइल डाटा का चोरी होने का डर बना रहता है.

ऐसा इसलिए क्योंकि, अनइन्स्टॉल करने पर मोबाइल ऐप, होम पेज से तो डिलीट हो जाते हैं लेकिन फोन की सेटिंग में छिपे होते हैं और हमारा डाटा जुटाते रहते हैं. ऐसे में आपकी गोपनीय जानकारी को लेकर खतरा बना रहता है. आइये आपको बताते हैं कि आखिर इस समस्या से कैसे निपटा जा सकता है.

मोबाइल फोन की सेटिंग में गूगल के ऑप्शन पर क्लिक करें. इसके बाद मैनेज योर गूगल अकाउंट पर जाएं.यहां मौजूद डेटा एंड प्राइवेस पर क्लिक करें. इस दौरान नीचे थर्ड पार्टी ऐप्स एंड सर्विस का ऑप्शन दिखेगा. इस ऑप्शन पर क्लिक करें, यहां फोन में मौजूद व डिलीट ऐप्स दिखाई देंगे. इस लिस्ट में अन-इन्स्टॉल ऐप पर क्लिक करें.
इसके बाद एक्सेस और कनेक्शन डिलीट पर क्लिक करें, फिर मोबाइल डेटा शेयर होना बंद हो जाएगा.
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कौन हैं फिजिक्स में नोबेल जीतने वाले साइंटिस्ट, जिन्होंने गूगल से दिया था इस्तीफा, फिर बताए AI के खतरे https://samacharpacheesa.com/?p=10551 Tue, 08 Oct 2024 13:50:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10551 नोबेल कमेटी ने साल 2024 के लिए भौतिकी यानी फिजिक्स के लिए  नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया है. यह पुरस्कार जॉन हॉपफील्ड और जेफ्री हिंटन को उनकी “आधारभूत खोजों” के लिए दिया गया है. ये खोजें जो आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क के साथ मशीन लर्निंग को काबिल बनाती हैं. नोबेल समिति ने अपने बयान में कहा, “हालांकि कंप्यूटर सोच नहीं सकते, लेकिन मशीनें अब मेमोरी और लर्निंग जैसे कार्यों की नकल कर सकती हैं. भौतिकी में इस साल के पुरस्कार विजेताओं ने इसे संभव बनाने में मदद की है.” इनमें से जेफ्री हिंटन को एआई का गॉडफादर कहा जाता है. आइए जानते हैं इस साइंटिस्ट के बारे में, जिन्होंने दुनिया को एआई के खतरे बताने के लिए गूगल से इस्तीफा दे दिया था.

कौन हैं हिंटन?
जेफ्री एवरेस्ट हिंटन एक ब्रिटिश-कनाडाई कंप्यूटर वैज्ञानिक और कॉग्नेनेटिव साइकोलॉजिस्ट हैं, जो आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क पर अपने काम के लिए सबसे ज़्यादा जाने जाते हैं. इसी के कारण उन्हें “AI के गॉडफ़ादर” की उपाधि मिली है. उन्हें नोबेल पुरस्कार एक ऐसी विधि के आविष्कार के लिए मिला जो डेटा में गुणों को अपने आप ही (ऑटोमैटिक रूप से) खोज सकती है, जिससे चित्रों में खास तत्वों की पहचान की जा सकती है.

एआई में PHD
हिंटन की शिक्षा ब्रिस्टल के क्लिफ्टन कॉलेज और किंग्स कॉलेज, कैम्ब्रिज, इंग्लैंड में हुई. प्राकृतिक विज्ञान, कला का इतिहास और दर्शन जैसे विभिन्न विषयों के बीच अपनी डिग्री को बार-बार बदलने के बाद, उन्होंने 1970 में प्रायोगिक मनोविज्ञान में आर्ट्स ग्रेजुएट की उपाधि हासिल की. उन्हें एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से 1978 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में पीएचडी से सम्मानित किया गया.

ब्रिटेन से अमेरिका
अपनी पीएचडी के बाद, हिंटन ने ससेक्स विश्वविद्यालय में काम किया और ब्रिटेन में फंडिंग पाने में कठिनाई के बाद, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो और कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय में काम किया. वे यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में गैट्सबी चैरिटेबल फाउंडेशन कम्प्यूटेशनल न्यूरोसाइंस यूनिट के संस्थापक निदेशक थे.

गूगल में काम और वहां से इस्तीफे का ऐलान
हिंटन ने 2013 से 2023 तक, अपना समय गूगल और टोरंटो विश्वविद्यालय के लिए काम करते हुए बिताया. मई 2023 में उन्होंने गूगल से अपने इस्तीफे का सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया. इस्तीफा देते समय  उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के जोखिमों के बारे में चिंता जताई. उन्होंने टोरंटो में वेक्टर इंस्टीट्यूट की सह-स्थापना की और उसके मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार बन गए. वे वर्तमान मेंटोरंटो विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं.

जीत चुके हैं कम्पूटिंग का नोबेल पुरस्कार
हिंटन को डीप लर्निंग पर उनके काम के लिए योशुआ बेंगियो और यान लेकन के साथ मिलकर 2018 ट्यूरिंग अवार्ड मिला, जिसे अक्सर “कंप्यूटिंग का नोबेल पुरस्कार” कहा जाता है. उन्हें कभी-कभी “डीप लर्निंग के गॉडफादर”  भी कहा जाता है.  नोबेल पुरस्कार पाने के बाद हिंटन ने कहा कि वे पुरस्कार पाकर “हैरान” हैं.

एआई का समाज पर असर
जब पत्रकारों ने उनके शोध से विकसित की गई तकनीक के संभावित महत्व के बारे में पूछा, उन्होंने कहा कि एआई का हमारे समाजों पर “बहुत बड़ा प्रभाव” होगा. उन्होंने घोषणा के बाद एक फ़ोन साक्षात्कार में कहा.”यह औद्योगिक क्रांति के बराबर होगा. लेकिन शारीरिक शक्ति में लोगों से आगे निकलने के बजाय, यह बौद्धिक क्षमता में लोगों से आगे निकलने वाला है. हमें इस बात का कोई अनुभव नहीं है कि हमसे ज़्यादा स्मार्ट चीजें होना कैसा होता है,”

भविष्यवाणी और चेतावनी
हिंटन ने भविष्यवाणी की कि यह तकनीक स्वास्थ्य सेवा जैसी चीज़ों में क्रांति लाएगी, जिससे “उत्पादकता में बहुत बड़ा सुधार होगा.” उन्होंने चेतावनी दी,”लेकिन हमें विशेष रूप से इन चीज़ों के नियंत्रण से बाहर हो जाने के ख़तरे के बारे में, कई संभावित बुरे परिणामों के बारे में भी चिंता करनी होगी. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI “प्रोग्राम करना जानता है, इसलिए यह हमारे द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से बचने के तरीके खोज लेगा. यह लोगों को अपने हिसाब से काम करने के लिए प्रेरित करने के तरीके खोज लेगा “

एआई के अग्रणी होने के साथ-साथ, हिंटन ने तकनीक के बारे में सावधानी बरतने का भी आग्रह किया है. मई 2023 में, उन्होंने इस बात की चिंता करने के बाद कि यह कितना स्मार्ट होता जा रहा है, Google में अपनी भूमिका छोड़ दी.  और “व्हिसिल ब्लोअर के रूप में मशहूर हो गए थे.”

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लवे की नौकरियों के लिए आ गई परीक्षा की डेट, लोको पायलट से जेई तक बनने का मौका https://samacharpacheesa.com/?p=10507 Tue, 08 Oct 2024 04:48:20 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10507 RRB JE Exam Date 2024: रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से हाल ही में सहायक लोको पायलट जेई समेत अलग अलग पदों पर वैकेंसी निकाली गई थी इन पदों पर होने वाली भर्तियों के लिए लिखित परीक्षाएं होनी हैं अभी तक इनकी परीक्षा तारीखें घोषित नहीं हुई थी जिसकी वजह से इन पदों पर आवेदन करने वाले अभ्‍यर्थी काफी परेशान थे अब रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से परीक्षा तारीखों की घोषणा कर दी गई है. जो भी उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होने वाले हैं, वे इन तारीखों को अच्‍छे से चेक कर लें. इसकी पूरी जानकारी आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्‍ध है.

RRB Exam Date 2024: कब होंगी परीक्षाएं?
रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से एएलपी (ALP), आरपीएफ एसआई (RPF SI), तकनीशियन, जेई (JE)समेत कई पदों पर होने वाली भर्तियों के लिए परीक्षाएं कराई जाएंगी. तय किए गए परीक्षा कार्यक्रम के मुताबिक आरआरबी सहायक लोको पायलट भर्ती परीक्षा 25 से 29 नवंबर के बीच आयोजित की जाएगी. इस परीक्षा के बारे में उम्‍मीदवारों को इसकी जानकारी 15 नवंबर को दी जाएगी कि उनकी परीक्षा किस शहर में होगी. बता दें कि इन परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड 22 नवंबर को जारी कर दिया जाएगा.

RRB ALP Exam Date 2024: एएलपी भर्ती परीक्षा का कार्यक्रम
आरआरबी सहायक लोको पायलट भर्ती परीक्षा 25 से 29 नवंबर के बीच आयोजित की जाएगी. उम्मीदवारों को इस बात की जानकारी 15 नवंबर को दे दी जाएगी कि उनकी परीक्षा किस शहर में होने वाली है. इसके लिए एडमिट कार्ड 22 नवंबर को जारी कर दिया जाएगा. इसी तरह आरपीएफ एसआई की परीक्षा दो से पांच दिसंबर के बीच होगी, जिसका एडमिट कार्ड 29 नवंबर को जारी होगा और एग्‍जाम सिटी स्‍लिप डेट 22 नवंबर को जारी होगा. टेक्‍निशियन की परीक्षा 16 से 26 दिसंबर के बीच होगी. एडमिट कार्ड 13 दिसंबर को जारी होगा. एग्‍जाम सिटी स्‍लिप 6 दिसंबर को आएगी. जेई की परीक्षा 6 से 13 दिसंबर तक होगी. एडमिट कार्ड 3 दिसंबर को जारी होगा. अभी पैरामेडिकल और एनटीपीसी परीक्षा की डेट घोषित नहीं हुई है.

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सबसे बड़े सरकारी बैंक में नौकरी का मौका, 10000 कर्मचारियों की जरूरत, PO और क्लर्क के अलावा इन पदों पर भी भर्ती https://samacharpacheesa.com/?p=10470 Mon, 07 Oct 2024 13:13:26 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10470 अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, खासकर बैंक में जॉब पाना चाहते हैं तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक में आपको काम करने का मौका मिलने जा रहा है. दरअसल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 10,000 नए कर्मचारियों को भर्ती करने की योजना बना रहा है. खास बात है कि पीओ और क्लर्क के अलावा कई अन्य पदों पर भी भर्ती होगी. बैंक यह नया रिक्रूटमेंट आम बैंकिंग जरूरतों और अपनी अपनी तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देने के लिए करेगा. बैंक ने निर्बाध ग्राहक सेवा प्रदान करने के साथ-साथ अपने डिजिटल चैनल को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण निवेश किया है.

एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, “हम अपने कार्यबल को प्रौद्योगिकी पक्ष के साथ-साथ सामान्य बैंकिंग पक्ष पर भी मजबूत कर रहे हैं. हमने हाल ही में प्रवेश स्तर और थोड़े उच्चस्तर पर लगभग 1,500 प्रौद्योगिकी लोगों की भर्ती की घोषणा की है.”

इन पदों पर भी भर्ती की योजना

उन्होंने कहा, “हमारी टेक्नोलॉजी रिक्रूटमेंट, डेटा साइंटिस्ट, डेटा आर्किटेक्ट्स, नेटवर्क ऑपरेटर्स आदि जैसी विशेष नौकरियों पर भी है. हम उन्हें प्रौद्योगिकी पक्ष में विभिन्न प्रकार की नौकरियों के लिए भर्ती कर रहे हैं… इसलिए, कुल मिलाकर, हमारी वर्तमान वर्ष की आवश्यकता लगभग 8,000 से 10,000 लोगों की होगी। लोगों को विशेष और सामान्य दोनों पक्षों में जोड़ा जाएगा.”

मार्च, 2024 तक बैंक के कुल कर्मचारियों की संख्या 2,32,296 थी. इसमें से पिछले वित्त वर्ष के अंत में 1,10,116 अधिकारी बैंक में कार्यरत थे. क्षमता निर्माण के बारे में पूछे जाने पर शेट्टी ने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है और बैंक ग्राहकों की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा कर्मचारियों को पुनः प्रशिक्षित और उन्नत बनाता है.

जरूरतों के हिसाब से तकनीक पर काम करना होगा

उन्होंने कहा, “ग्राहकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं, तकनीक बदल रही है, डिजिटलीकरण को व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है इसलिए, हम सभी स्तर पर अपने कर्मचारियों को लगातार नया कौशल प्रदान कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि बैंक ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और बेहतर बैंकिंग अनुभव प्रदान करने के लिए कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में विशेष कौशल विकास प्रदान करता है.

जहां तक ​​नेटवर्क विस्तार की बात है, शेट्टी ने कहा कि एसबीआई चालू वित्त वर्ष में देशभर में 600 शाखाएं खोलने की योजना बना रहा है. मार्च, 2024 तक एसबीआई के पास देशभर में 22,542 शाखाओं का नेटवर्क है.

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MBBS vs BDS: डॉक्टर बनने के लिए एमबीबीएस करें या बीडीएस…..दोनों के बीच का अंतर समझकर लें सही फैसला https://samacharpacheesa.com/?p=10444 Mon, 07 Oct 2024 06:15:58 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10444 12वीं के बाद टॉप मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हासिल करने के लिए नीट परीक्षा पास करना जरूरी है. भारत के साथ ही कई अन्य देश भी भारतीय स्टूडेंट्स को नीट स्कोर के आधार पर ही दाखिला देते हैं. कई स्टूडेंट्स एमबीबीएस और बीडीएस के बीच सही करियर ऑप्शन चुनने को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं. बता दें कि ये दोनों ही कोर्स एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, दोनों के लिए कॉलेज भी अलग हैं और इनका सिलेबस भी अलग है.

एमबीबीएस और बीडीएस, दोनों ही मेडिकल कोर्स हैं. ये दोनों ही अंडरग्रेजुएट कोर्स हैं. हालांकि बीडीएस और एमबीबीएस, दोनों ही कोर्स स्टूडेंट को डॉक्टर की डिग्री प्रदान करते हैं. अगर आप 12वीं के बाद डॉक्टरी की पढ़ाई करना चाहते हैं तो जानिए एमबीबीएस और बीडीएस में से किसमें लें एडमिशन, कौन सा कोर्स ज्यादा आसान है और किसकी फीस कम है. ये सभी फैक्टर्स जानकर एमबीबीएस और बीडीएस में से बेस्ट करियर ऑप्शन चुनना आसान हो जाएगा.

MBBS Full Form: एमबीबीएस कोर्स क्या है?
एमबीबीएस का फुल फॉर्म बैचलर ऑफ मेडिसिन, बैचलर ऑफ सर्जरी है. इस कोर्स की अवधि 5.5 साल (4.5 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप) है. इसकी फीस लाखों में है. एमबीबीएस सिलेबस में मानव शरीर की संरचना, पैथोलॉजी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी जैसे टॉपिक्स शामिल हैं. एमबीबीएस की पढ़ाई करके जनरल मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनोकोलॉजी आदि में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं. इसके बाद डॉक्टर, सर्जन, रिसर्चर, एकेडमिशियन बन सकते हैं.

BDS Full Form: बीडीएस कोर्स क्या है?
बीडीएस का फुल फॉर्म बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी है. बीडीएस कोर्स की अवधि 5 साल (4 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप) है. बीडीएस सिलेबस में डेंटल साइंस, डेंटल स्ट्रक्चर, डेंटल केयर, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स आदि शामिल हैं. बीडीएस की पढ़ाई करके दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स, प्रोस्थोडोंटिक्स में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं. बीडीएस करके डेंटिस्ट, डेंटल सर्जन, डेंटल रिसर्चर बन सकते हैं. इस कोर्स की फीस MBBS की तुलना में कम है.

Difference between MBBS and BDS: एमबीबीएस और बीडीएस में क्या अंतर है?
एमबीबीएस या बीडीएस (MBBS or BDS) में से किसी में भी एडमिशन लेने से पहले जानिए दोनों कोर्स के बीच 10 बड़े अंतर-

1. अवधि
एमबीबीएस: 5.5 साल (4.5 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप)
बीडीएस: 5 साल (4 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप)

2. पाठ्यक्रम
एमबीबीएस सिलेबस (MBBS Syllabus): मानव शरीर की संरचना, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, आदि.
बीडीएस सिलेबस (BDS Syllabus): दंत विज्ञान, दंत संरचना, दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स आदि.

3. विशेषज्ञता
एमबीबीएस: जनरल मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनोकोलॉजी, आदि.
बीडीएस: दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स, प्रोस्थोडोंटिक्स.

4. करियर ऑप्शन
एमबीबीएस (Career Options after MBBS): डॉक्टर, सर्जन, रिसर्चर, एकेडमिशियन
बीडीएस (Career Options after BDS): दंत चिकित्सक, दंत शल्य चिकित्सक, दंत अनुसंधानकर्ता

5. फीस
एमबीबीएस की फीस (MBBS Fees): उच्च (लाखों रुपये)
बीडीएस की फीस (BDS Fees): कम (लाखों रुपये से कम)

6. प्रवेश आवश्यकताएं
एमबीबीएस एंट्रेंस एग्जाम (MBBS Entrance Exam): नीट (NEET) परीक्षा
बीडीएस एंट्रेंस एग्जाम (BDS Entrance Exam): नीट (NEET) परीक्षा

7. काम का क्षेत्र
एमबीबीएस (MBBS Careers): हॉस्पिटल, क्लिनिक, रिसर्च सेंटर
बीडीएस (BDS Careers): डेंटल क्लिनिक, डेंटल अस्पताल

8. वेतन
एमबीबीएस सैलरी (MBBS Doctor Salary): उच्च (लाखों रुपये प्रति वर्ष)
बीडीएस सैलरी (Dentist Salary): मध्यम (लाखों रुपये प्रति वर्ष)

9. जिम्मेदारी
एमबीबीएस: मरीजों की सामान्य स्वास्थ्य देखभाल
बीडीएस: मरीजों की दंत स्वास्थ्य देखभाल

10. मान्यता
एमबीबीएस: मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI)
बीडीएस: डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI)

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बिल्‍डर के प्रोजेक्‍ट में खरीदा है फ्लैट, कब्‍जा लेने से पहले जांच लें यह डॉक्‍यूमेंट, वरना पैसे देकर भी फंस जाएंगे https://samacharpacheesa.com/?p=10440 Mon, 07 Oct 2024 06:05:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10440 कम दाम पर संपत्ति हासिल करने की चाह में एक बड़ा वर्ग बिल्डर और डेवलपर के प्रोजेक्ट्स में तभी निवेश कर देता है, जब उनका निर्माण कार्य शुरुआती दौर में होता है या फिर उनकी लांचिंग ही हुई होती है. प्रोजेक्ट की लांचिंग से लेकर उसके निर्माण और परियोजना के ग्राहकों को मकानों का कब्जा एक लंबी प्रक्रिया होती है जिसमें नि:संदेह कई साल लग जाते हैं. रियल एस्टेट सलाहकार प्रदीप मिश्रा का कहना है कि आपने भी अगर किसी बिल्डर के प्रोजेक्ट में निवेश किया है या फिर करने की सोच रहे हैं तो नियमित अंतराल पर आपको खुद लोकेशन पर जाकर प्रोजेक्ट की प्रगति का अवलोकन करते रहना चाहिये.

ऐसे प्रोजेक्‍ट में विशेष तौर पर स्ट्रक्चर पूरा होने के बाद जब उसकी फिनिशिंग की बारी आती है तो उस मौके पर यह और अधिक जरूरी हो जाता है. जब प्रोजेक्ट पूरा हो जाय और बिल्डर ग्राहकों को कब्जा यानी पजेशन की पेशकश शुरू कर दे तो उस समय आपको किन कागजात और दस्तावेजों की जांच परख करनी चाहिए? यह दस्तावेज क्या है और इनका महत्व क्या है, इसकी पूरी जानकारी आपको देते हैं.

कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टीफिकेट
इन दोनों ही शब्दों का अर्थ एक ही है, बस फर्क इतना है कि कुछ शहरों में इसे कम्प्लीशन तो कुछ जगहों पर इसे ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट कहा जाता है. यह सर्टिफिकेट बिल्डर उस शहर की लोकल अथॉरिटी या फिर डेवलपमेंट एजेंसी से प्राप्त करता है, जहां से उसने परियोजना के निर्माण का नक्शा पास कराया है. यह दस्तावेज इस बात को स्पष्ट करता है कि परियोजना पूरी हो गई है. साथ ही प्राधिकरण के समक्ष प्रोजेक्ट बनाने से पहले जो नक्शे ​बिल्डर ने जमा करवाये, थे उसी के अनुरूप उसका निर्माण किया गया है. इसके साथ ही बिल्डर का प्राधिकरण के प्रति कोई बकाया नहीं है. यह बात आप समझ लें कि कई बार इस कागज के न होने पर रजिस्ट्रार ऑफिस में आपके नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री भी नहीं हो पाती है.

करें. कम्प्लीशन सर्टीफिकेट से ही इसका भी पता चल जाएगा. यह बात तो आप लोग भी जानते ही होंगे कि उत्तरी भारत का एक बड़ा हिस्सा सेस्मिक जोन-4 में गिना जाता है जो भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है. ऐसे में यह भी देख लें कि बिल्डर ने इमारतों का जो स्ट्रक्चर तैयार किया है, वह भूकंपरोधी मानकों पर भी खरा उतरता हो. कई बार इमारतों में कुछ जगहों पर दरारें दिखने लगती हैं या फिर टूटफूट हो जाती है तो उस स्थिति में मकान की पजेशन से पहले ही आप बिल्डर से उसे दुरुस्त कराने के लिए कह सकते हैं.

फायर फाइटिंग अप्रूवल
बीते तीन दशकों से मल्टीस्टोरी रूप में रिहाइशी इमारतों का प्रचलन बढ़ा है. ऐसे में वक्त के साथ ही इन इमारतों में आग से निपटने के लिए पानी का टैंक हर टॉवर में पाइप की व्यवस्था, कॉमन एरिया के साथ मकानों के भीतर भी स्मोक डिटेक्टर, फायर एक्सटिंग्विशर आदि की व्यवस्थाएं अब जरूरी हो गई हैं. प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद बिल्डर को अग्निशमन विभाग से भी संबंधित स्वीकृति लेनी होती है. संबंधित विभाग प्रोजेक्ट का अवलोकन करता है और उपकरणों की परख करने के बाद स्वीकृति देता है. ऐसे में कब्जा लेने से पहले यह भी जरूर देख लें कि वहां आग बुझाने संबंधी उचित इंजताम किए गए हों.

बिजली-पानी सीवेज कनेक्शन
इन दस्तावेजों को परखने के बाद यह भी देखें कि परियोजना में बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू हो गई हो और सीवेज का कनेक्शन भी मिल गया हो. निश्चय ही किसी भी जगह रहने के लिए यह बुनियादी जरूरतें हैं. कई बार परियोजनाओं में तय समय पर कब्जा देने में देरी होने पर बिल्डरों की तरफ से ग्राहकों को कहा जाता है कि वह अपने मकानों का कब्जा ले लें और शेष सुविधाएं कुछ ही दिनों में शुरू करवा दी जाएंगी. बिल्डर की तरफ से यह कदम पजेशन में होने वाली देरी पर ग्राहक को चुकाई जाने वाली पेनाल्टी से बचने के लिए उठाया जाता है. लिहाजा समझदारी इसी में है कि जब तक बुनियादी सुविधाएं न मिलें आप भूलकर भी कब्जा न लें.

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