हेल्थ – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Fri, 31 Jan 2025 05:49:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 PM मोदी ने बताया मोटापे से बचने का तरीका, खाने में सिर्फ 10% कम डालें यह चीज, रहेंगे फिट और तंदुरुस्त https://samacharpacheesa.com/?p=14660 Fri, 31 Jan 2025 05:49:31 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14660 शरीर में जब एक्स्ट्रा फैट जमा हो जाता है, तब यह मोटापे का रूप ले लेता है. मोटापा एक गंभीर समस्या है, जो लोगों को कम उम्र में ही बीमारियों का मरीज बना देता है. आज के जमाने में मोटापा दुनियाभर में बड़ी समस्या बन गया है और इससे बचने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने देहरादून में राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन के मौके पर फिट इंडिया स्पीच में मोटापे को लेकर बड़ी बातें कहीं. प्रधानमंत्री ने युवाओं से मोटापे को कंट्रोल करने की अपील की. उन्होंने शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और डाइट में तेल कंट्रोल करने की भी बात कही.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. हर आयु वर्ग और यहां तक कि युवा भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. यह एक चिंता का विषय है, क्योंकि मोटापा डायबिटीज, दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है. पीएम ने देशवासियों से दो चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की. पहला हर दिन कुछ समय निकालकर व्यायाम करें, चाहे वह पैदल चलना हो या कोई और व्यायाम. दूसरा अपनी डाइट पर ध्यान दें. अनहेल्दी फैट और तेल को अपने आहार से कम करें. हर महीने हम जो तेल इस्तेमाल करते हैं, उसकी मात्रा 10 प्रतिशत तक घटा दें. ऐसे छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है और इसकी एक बड़ी वजह तेल का ज्यादा सेवन करना भी है. दिल्ली के साकेत मैक्स हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि तेल और फैट हमारी डाइट में जरूरी होते हैं, क्योंकि इनमें आवश्यक फैटी एसिड्स होते हैं, जो शरीर में सूजन कम करने में मदद करते हैं और ब्रेन हेल्थ को प्रोटेक्ट करते हैं. तेल शरीर में कई तरह के विटामिन्स को अब्जॉर्ब करने में मदद करते हैं. हालांकि ज्यादा तेल खाने से शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी जमा हो जाती है. अगर कोई व्यक्ति एक्सरसाइज नहीं करता है, तो शरीर में फैट जमा हो सकती है, जिससे दिल में ब्लॉकेज और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.

एक महीने में कितना तेल खाना चाहिए?

मैक्स हेल्थकेयर की क्लीनिकल न्यूट्रिशन और डाइटेटिक्स रितिका समद्दार के मुताबिक एक सामान्य व्यक्ति को दिन में 20 से 25 मिलीलीटर तेल की जरूरत होती है. यह करीब 4 से 5 चम्मच होता है. इस हिसाब से एक व्यक्ति के लिए महीने में करीब 750 से 900 मिलीलीटर तेल की आवश्यकता होती है. यह मात्रा सेहत के लिहाज से ठीक है. हालांकि अधिकतर भारतीय एक महीने में एक लीटर से ज्यादा तेल का सेवन करते हैं. जो लोग दिल की बीमारियों और डायबिटीज से पीड़ित हैं, उन्हें महीने में 500 मिलीलीटर तेल ही खाना चाहिए. इस हिसाब से रोज करीब 3 चम्मच से ज्यादा तेल नहीं खाना चाहिए.

कौन सा तेल मोटापा कर सकता है कंट्रोल?

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार कोई भी तेल दिल के लिए अच्छा नहीं हो सकता, जब उसे ज्यादा गर्म किया जाए या बार-बार गर्म किया जाए. ऐसा करने से इससे टॉक्सिक एलीमेंट्स, ट्रांस फैट्स और फ्री रेडिकल्स बनते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ाते हैं और दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं. डॉक्टर केवल मोनोअनसैचुरेटेड या पॉलीअनसैचुरेटेड फैट का सेवन करने की सलाह देते हैं. जैतून का तेल, कैनोला तेल, राइस ब्रान ऑयल, रैपसीड ऑयल और सरसों का तेल सावधानी के साथ डाइट में शामिल करें. घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं, जो सूजन कम करते हैं और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को घटाते हैं, लेकिन इसे केवल बहुत कम मात्रा में उपयोग करना चाहिए.

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सबसे अधिक रेड‍िएशन वाले स्मार्टफोन, ब्रेन को कर देते हैं डैमेज, सोच समझकर खर्च करें इन पर पैसा https://samacharpacheesa.com/?p=14375 Fri, 24 Jan 2025 13:01:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14375 फोन खरीदने से पहले हम सभी यही देखते हैं क‍ि फोन की बैटरी क‍ितनी मजबूत है, उसका कैमरा क‍ितने MP का है या प्रोसेसर कौन सा इस्‍तेमाल क‍िया गया है. आप में से शायद ही कोई ऐसा हो, जो फोन से न‍िकलने वाले रेड‍िएशन के बारे में भी चेक करता हो. फोन से न‍िकलने वाला रेड‍िएशन ब्रेन को नुकसान पहुंचाता है. यह बहरेपन का कारण भी बन सकता है. इसल‍िए नया हैंडसेट खरीदने से पहले ये जरूर चेक करें क‍ि ज‍िस फोन को आप खरीदने जा रहे हैं, वह ज्‍यादा रेड‍ि‍एशन तो नहीं देता.

जर्मन फेडरेशन ऑफ‍िस ने ऐसे स्‍मार्टफोन हैंडसेट की एक ल‍िस्‍ट जारी की है, ज‍िनमें सबसे ज्‍यादा रेड‍िएशन की श‍िकायत है. आपको ऐसे फोन से सावधान रहने की जरूरत है, ताकि इससे होने वाले रेडिएशन से शारीरिक नुकसान न होने पाए.

जर्मन फेडरेशन ऑफ‍िस ने क‍िया अलर्ट
जर्मन फेडरेशन ऑफ‍िस ने कहा है क‍ि डेली बेस‍िस पर हम ज‍िन ड‍िवाइस का इस्‍तेमाल करते हैं, उनके साथ हमारा लगातार बॉडी कॉन्‍टैक्‍ट होता है. इसल‍िए इनसे निकलने वाले रेड‍िएशन के कारण हेल्‍थ से जुड़ी समस्‍याएं हो सकती हैं. खासतौर से कान और ब्रेन को सबसे ज्‍यादा नुकसान होता है, क्‍योंक‍ि आप कान पर रखकर ही फोन से बात करते हैं. जर्मन फेडरेशन के विकिरण संरक्षण कार्यालय ने उन स्मार्टफोन पर डेटा इकट्ठा क‍िया है जो सबसे अधिक रेड‍िएशन देते हैं. रेड‍िएश के आंकड़े को शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम वाट में दिखाया गया है. इस ल‍िस्‍ट में शाम‍िल कई नाम आपको चौंका सकते हैं.

उन हैंडसेट की ल‍िस्‍ट ज‍िससे सबसे ज्‍यादा रेड‍ि‍एशन न‍िकलता है
1. सोनी एक्सपीरिया एक्सजेड प्रीमियम
सोनी के एक्सपीरिया एक्सजेड प्रीमियम की SAR दर 1.21 है.

2. हुआवेई नोवा 2
हुआवेई नोवा 2 की SAR 1.25 है.

.3. वनप्लस 9
इस ल‍िस्‍ट में वनप्लस मॉडल भी हैं, इस फोन की SAR 1.26 है.

4. हुआवेई पी स्मार्ट
चीनी कंपनी 1.27 की SAR दर के साथ इस सूची में शाम‍िल है.

5. ZTE AXON 7 मिनी
ZTE का यह छोटा मॉडल 1.29 वाट प्रति किलोग्राम के SAR के साथ उच्च स्थान पर है.

6. वनप्लस 6
इस ल‍िस्‍ट में वनप्लस का दूसरा मॉडल, इस स्मार्टफोन की SAR 1.33 है.

7. Google Pixel 3
इस ल‍िस्‍ट में Google की पहली उपस्थिति इसी मॉडल के साथ है, जिसकी SAR 1.33 है.

8. सोनी एक्सपीरिया XZ1 कॉम्पैक्ट
सोनी एक्सपीरिया XZ1 कॉम्पैक्ट की SAR 1.36 है.

9. ओप्पो रेनो5 5जी
चीनी कंपनी ओप्पो के इस मॉडल का SAR 1.37 वाट प्रति किलोग्राम है.

10. गूगल पिक्सल 4ए
एक और गूगल फोन, इस मॉडल का SAR 1.37 वाट प्रति किलोग्राम है.

11. गूगल पिक्सल 3 एक्सएल
फिर से गूगल. इस मॉडल की दर 1.39 वाट प्रति किलोग्राम है.

12. सोनी एक्सपीरिया एक्सए2 प्लस
जापानी कंपनी के पास 1.41 के SAR के साथ सबसे ज्‍यादा रेडिएशन उत्सर्जित करने वाले फोन में से एक है.

13. वनप्लस 6टी
चीनी कंपनी का यह मॉडल 1.55 वाट प्रति किलोग्राम का SAR उत्सर्जित करता है.

14. जेडटीई एक्सॉन 11 5जी
चीनी कंपनी फिर से सूची में है, इस मॉडल की दर 1.59 है.

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5 ड्रिंक्स थके हारे लिवर में भी ला देंगे नई जान, हर दिन करें 1 का सेवन, यकृत की क्षमता में होगी चौतरफा वृद्धि https://samacharpacheesa.com/?p=12974 Sun, 22 Dec 2024 05:02:38 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=12974 लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंदरुनी अंग है. यह हमारे लिए 500 से ज्यादा काम करता है लेकिन आजकल जिस तरह से हमारा खानपान खराब होता है जा रहा है और हम सिगरेट, शराब, प्रोसेस्ड फूड, पैकेटबंद चीजों के चंगुल में फंस रहे हैं उसमें हमारे लिवर पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है. यही कारण आज हर चार वयस्क व्यक्तियों में तीन को फैटी लिवर डिजीज है. ऐसे में लिवर का फंक्शन कमजोर होने लगता है जिसके कारण कई बीमारियां सामने आने लगती है. लिवर की क्षमता को बढ़ाने के लिए यहां कुछ शानदार ड्रिंक्स बताए जा रहे हैं. इनमें से रोज एक का भी सेवन करें तो लिवर फंक्शन में चौतफा वृद्धि हो सकती है.

ग्रीन टी-ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स कैटेचिन्स होता है. यह लिवर की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है. कैटेचिन्स लिवर में टॉक्सिन पदार्थों को निष्क्रिय करने वाले एंजाइमों को सक्रिय करता है जिससे लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया में सुधार होता है. ग्रीन टी लीवर की सूजन को कम करने और फैटी लिवर डिजीज जैसी समस्याओं को रोकने में भी सहायक होती है. इसके अलावा ग्रीन टी लिवर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाती है, जिससे लिवर का फंक्शन बढ़ जाता है.

आंवला जूस-आंवला जूस में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनॉइड्स होते हैं, जो लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. यह लिवर को डिटॉक्सिफाई करता है और शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. आंवला जूस लिवर की सूजन को कम करने और फैटी लिवर जैसी समस्याओं को रोकने में सहायक होता है.  इसके अलावा, यह लिवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है, जिससे लिवर की कार्यप्रणाली में सुधार होता है. आंवला जूस नियमित रूप से पीने से लिवर के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आते हैं.

बैरीज जूस-बैरीज जूस जैसे कि ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी, लिवर के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेष रूप से फ्लेवोनॉयड्स और विटामिन C भरपूर मात्रा में होते हैं. ये तत्व लिवर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करते हैं और लिवर की कोशिकाओं को हेल्दी बनाते हैं. बैरीज जूस लिवर की सूजन को कम करने, फैटी लिवर को नियंत्रित करने और लिवर के सामान्य कार्य को बढ़ाने में सहायक होता है. यह लिवर के एंजाइम्स के स्तर को स्थिर रखता है और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है.

धनिया का पानी-धनिया का पानी लिवर की हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो लिवर के फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. यह लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है और लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया को बढ़ाता है. धनिया का पानी लिवर की सूजन को कम करता है और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है. साथ ही यह लिवर में चर्बी को कम करने और फैटी लिवर से बचाव करने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से लिवर का स्वास्थ्य अच्छा रहता है.

अदरक,नींबू का पानी- अदरक और नींबू का पानी लिवर के लिए एक कुदरती टॉनिक है. अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो लिवर की क्लीनिंग और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करते हैं. नींबू में विटामिन C और साइट्रिक एसिड होता है जो लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है. यह लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और जिगर के एंजाइमों को सक्रिय करता है. साथ ही शरीर में हानिकारक तत्वों को नष्ट करने में मदद करता है. अदरक-नींबू का पानी नियमित सेवन से लिवर की सूजन को कम करता है और उसके स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है.

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5 ड्रिंक्स थके हारे लिवर में भी ला देंगे नई जान, हर दिन करें 1 का सेवन, यकृत की क्षमता में होगी चौतरफा वृद्धि https://samacharpacheesa.com/?p=12991 Sun, 22 Dec 2024 05:02:38 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=12991 लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंदरुनी अंग है. यह हमारे लिए 500 से ज्यादा काम करता है लेकिन आजकल जिस तरह से हमारा खानपान खराब होता है जा रहा है और हम सिगरेट, शराब, प्रोसेस्ड फूड, पैकेटबंद चीजों के चंगुल में फंस रहे हैं उसमें हमारे लिवर पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है. यही कारण आज हर चार वयस्क व्यक्तियों में तीन को फैटी लिवर डिजीज है. ऐसे में लिवर का फंक्शन कमजोर होने लगता है जिसके कारण कई बीमारियां सामने आने लगती है. लिवर की क्षमता को बढ़ाने के लिए यहां कुछ शानदार ड्रिंक्स बताए जा रहे हैं. इनमें से रोज एक का भी सेवन करें तो लिवर फंक्शन में चौतफा वृद्धि हो सकती है.

ग्रीन टी-ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स कैटेचिन्स होता है. यह लिवर की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है. कैटेचिन्स लिवर में टॉक्सिन पदार्थों को निष्क्रिय करने वाले एंजाइमों को सक्रिय करता है जिससे लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया में सुधार होता है. ग्रीन टी लीवर की सूजन को कम करने और फैटी लिवर डिजीज जैसी समस्याओं को रोकने में भी सहायक होती है. इसके अलावा ग्रीन टी लिवर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाती है, जिससे लिवर का फंक्शन बढ़ जाता है.

आंवला जूस-आंवला जूस में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनॉइड्स होते हैं, जो लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. यह लिवर को डिटॉक्सिफाई करता है और शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. आंवला जूस लिवर की सूजन को कम करने और फैटी लिवर जैसी समस्याओं को रोकने में सहायक होता है.  इसके अलावा, यह लिवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है, जिससे लिवर की कार्यप्रणाली में सुधार होता है. आंवला जूस नियमित रूप से पीने से लिवर के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आते हैं.

बैरीज जूस-बैरीज जूस जैसे कि ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी, लिवर के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेष रूप से फ्लेवोनॉयड्स और विटामिन C भरपूर मात्रा में होते हैं. ये तत्व लिवर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करते हैं और लिवर की कोशिकाओं को हेल्दी बनाते हैं. बैरीज जूस लिवर की सूजन को कम करने, फैटी लिवर को नियंत्रित करने और लिवर के सामान्य कार्य को बढ़ाने में सहायक होता है. यह लिवर के एंजाइम्स के स्तर को स्थिर रखता है और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है.

धनिया का पानी-धनिया का पानी लिवर की हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो लिवर के फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. यह लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है और लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया को बढ़ाता है. धनिया का पानी लिवर की सूजन को कम करता है और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है. साथ ही यह लिवर में चर्बी को कम करने और फैटी लिवर से बचाव करने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से लिवर का स्वास्थ्य अच्छा रहता है.

अदरक,नींबू का पानी- अदरक और नींबू का पानी लिवर के लिए एक कुदरती टॉनिक है. अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो लिवर की क्लीनिंग और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करते हैं. नींबू में विटामिन C और साइट्रिक एसिड होता है जो लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है. यह लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और जिगर के एंजाइमों को सक्रिय करता है. साथ ही शरीर में हानिकारक तत्वों को नष्ट करने में मदद करता है. अदरक-नींबू का पानी नियमित सेवन से लिवर की सूजन को कम करता है और उसके स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है.

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दिवाली पर जमकर खा बैठे हैं मिठाई-पकवान? अब फटाफट कर लें ये काम, चकाचक हो जाएगी सेहत https://samacharpacheesa.com/?p=11486 Tue, 05 Nov 2024 06:27:52 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11486 दिवाली के त्‍यौहार की खुशी और लोगों से मिलने-जुलने में अक्‍सर लोग जमकर पकवान और मिठाइयां खा तो लेते हैं लेकिन त्योहार के बाद शरीर पर इनका असर दिखना शुरू हो सकता है और बहुत सारे लोग इसके चलते अस्‍पतालों की ओर भागते हैं. दिवाली के इस 5 दिन के त्‍यौहार के दौरान ज्यादा तला-भुना और मीठा खाने से वजन बढ़ने, डायबिटीज, बीपी या कॉलेस्‍ट्रॉल बढ़ने, डायजेशन सिस्‍टम गड़बड़ाने से कब्‍ज या पाचन की समस्या और थकान जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं.हालांकि अगर आप यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी के एंडोक्रिनोलोजिस्ट डॉ. राहुल चौड़ा और न्यूट्रीशनिस्ट रुचि सहाय, अर्दीलिया के बताए हुए कुछ टिप्‍स फॉलो कर लें तो आप त्‍यौहार का पूरा लुत्‍फ उठाने के बाद भी स्‍वस्‍थ रह सकते हैं.

1. पानी की मात्रा बढ़ा दें
दिवाली के बाद शरीर में पकवान-मिठाई के असर को कम करने के लिए हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है.लिहाजा दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं. इसके अलावा, नींबू पानी, नारियल पानी, ग्रीन टी और हर्बल टी को भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं.

2. हल्का और पौष्टिक भोजन करें
त्‍यौहार के बाद कम से कम एक हफ्ते तक तले-भुने और मसालेदार खाने से बचें. अपने आहार में हल्का और पौष्टिक भोजन शामिल करें, जैसे दलिया, खिचड़ी, ओट्स, सब्जियों का सूप, और दही आदि. ये सभी पाचन को सुधारते हैं. साथ ही ज्‍यादा से ज्‍यादा फलों का सेवन करें खासतौर पर पपीता, अनार और सेब जो विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं.

3. फाइबर युक्त आहार लें
फाइबर से भरपूर आहार जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज न केवल पाचन को दुरुस्त रखते हैं, बल्कि शरीर को विषैले तत्वों से भी मुक्त करते हैं. सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियां और फल जैसे केला, सेब और संतरा खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस करता है. इससे भूख कम लगती है और वजन नियंत्रित रहता है.

4. मीठा और नमक एकदम घटा दें
त्योहार के दौरान मिठाई और नमकीन की अधिक मात्रा लेने के बाद अब इन्हें कम करना जरूरी है. ज्यादा मीठा खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है इसलिए गुड़, शहद या फलों का प्राकृतिक मीठापन चुनें. साथ ही नमक का सेवन भी खाने में कम कर दें. इससे शरीर खुद को बेलेंस कर लेगा.

5. प्राकृतिक ड्रिंक लें
दिवाली के बाद कु दिन तक गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पिएं. यह शरीर को साफ करने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है. हल्दी वाला दूध, अजवाइन का पानी और अदरक की चाय भी अच्छे विकल्प हैं जो शरीर को अंदर से शुद्ध करते हैं.

6. व्यायाम और योग का महत्व
त्‍यौहार के बाद नियमित रूप से व्यायाम, योग या कोई शारीरिक गतिविधि करना बहुत फायदेमंद होता है. यह न केवल वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी तेज करता है. सुबह के समय सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और हल्की दौड़ को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.

7. नींद पूरी करें
त्योहारों के दौरान कम नींद लेने से शरीर थका हुआ महसूस करता है. इसलिए दिवाली के बाद पूरी नींद लेना जरूरी है ताकि शरीर को ठीक से आराम मिल सके और ऊर्जा का स्तर फिर से बढ़ से रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें.

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आंखों का ऑपरेशन कर रहे थे डॉक्टर, ओटी में अचानक फैल गया वायरस https://samacharpacheesa.com/?p=11299 Mon, 28 Oct 2024 08:38:22 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11299 छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से चौंकाने वाले खबर है. यहां के जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में वायरस फैल गया. इस वजह से कई मरीजों की आंखों में इंफेक्शन हो गया है. दस मरीजों की आंखों की रोशनी पर खतरा मंडरा रहा है. इनमें से कई मरीजों को जगदलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है. जबकि, 9 लोगों को रायपुर भेजा गया है. इसकी जानकारी मिलते ही राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच दल का गठन कर दिया. आई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की स्पेशल टीम इन मरीजों की देखरेख कर रही है. इस घटना के बाद दंतेवाड़ा से लेकर रायपुर तक खलबली मची हुई है.

गौरतलब है कि, यह घटना 24 अक्टूबर को दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में घटी. यहां जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम मोतियाबिंद से जुड़े 30 मरीजों का ऑपरेशन कर रही थी. इस ऑपरेशन के कुछ देर बाद ही कई मरीजों आंखों में इंफेक्शन फैल गया. यह इंफेक्शन इतना फैल गया कि 25 अक्टूबर को इन मरीजों से जिला अस्पताल से जगदलपुर मेडिकल कॉलेज और रायपुर रेफर करना पड़ा. जानकारा के मुताबिक, 10 मरीजों की आंखों में ज्यादा इंफेक्शन हुआ है. एक मरीज को जगदलपुर भेजा गया है. जबकि, 9 मरीजों को रायपुर रेफर किया गया है.

जांट टीम कर रही पूछताछ
दूसरी ओर, अब स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया है. बताया जा रहा है ऑपेरशन थिएटर को स्टरलाइज नहीं किया गया था. इसी वजह से ऑपरेशन थिएटर में वायरस पनपा है. इधर स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यी जांच दल का गठन किया है. यह जांच दल ऑपरेशन थिएटर में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है. इस मामले की खबर रायपुर के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गई है. वहां से तीन आई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम दंतेवाड़ा पहुंची है. ये मरीजों को देख रहे हैं. मरीजों को देखने के बाद ऑपरेशन थिएटर की बारीकी से पड़ताल करेंगे.

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MBBS vs BDS: डॉक्टर बनने के लिए एमबीबीएस करें या बीडीएस…..दोनों के बीच का अंतर समझकर लें सही फैसला https://samacharpacheesa.com/?p=10444 Mon, 07 Oct 2024 06:15:58 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10444 12वीं के बाद टॉप मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हासिल करने के लिए नीट परीक्षा पास करना जरूरी है. भारत के साथ ही कई अन्य देश भी भारतीय स्टूडेंट्स को नीट स्कोर के आधार पर ही दाखिला देते हैं. कई स्टूडेंट्स एमबीबीएस और बीडीएस के बीच सही करियर ऑप्शन चुनने को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं. बता दें कि ये दोनों ही कोर्स एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, दोनों के लिए कॉलेज भी अलग हैं और इनका सिलेबस भी अलग है.

एमबीबीएस और बीडीएस, दोनों ही मेडिकल कोर्स हैं. ये दोनों ही अंडरग्रेजुएट कोर्स हैं. हालांकि बीडीएस और एमबीबीएस, दोनों ही कोर्स स्टूडेंट को डॉक्टर की डिग्री प्रदान करते हैं. अगर आप 12वीं के बाद डॉक्टरी की पढ़ाई करना चाहते हैं तो जानिए एमबीबीएस और बीडीएस में से किसमें लें एडमिशन, कौन सा कोर्स ज्यादा आसान है और किसकी फीस कम है. ये सभी फैक्टर्स जानकर एमबीबीएस और बीडीएस में से बेस्ट करियर ऑप्शन चुनना आसान हो जाएगा.

MBBS Full Form: एमबीबीएस कोर्स क्या है?
एमबीबीएस का फुल फॉर्म बैचलर ऑफ मेडिसिन, बैचलर ऑफ सर्जरी है. इस कोर्स की अवधि 5.5 साल (4.5 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप) है. इसकी फीस लाखों में है. एमबीबीएस सिलेबस में मानव शरीर की संरचना, पैथोलॉजी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी जैसे टॉपिक्स शामिल हैं. एमबीबीएस की पढ़ाई करके जनरल मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनोकोलॉजी आदि में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं. इसके बाद डॉक्टर, सर्जन, रिसर्चर, एकेडमिशियन बन सकते हैं.

BDS Full Form: बीडीएस कोर्स क्या है?
बीडीएस का फुल फॉर्म बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी है. बीडीएस कोर्स की अवधि 5 साल (4 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप) है. बीडीएस सिलेबस में डेंटल साइंस, डेंटल स्ट्रक्चर, डेंटल केयर, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स आदि शामिल हैं. बीडीएस की पढ़ाई करके दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स, प्रोस्थोडोंटिक्स में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं. बीडीएस करके डेंटिस्ट, डेंटल सर्जन, डेंटल रिसर्चर बन सकते हैं. इस कोर्स की फीस MBBS की तुलना में कम है.

Difference between MBBS and BDS: एमबीबीएस और बीडीएस में क्या अंतर है?
एमबीबीएस या बीडीएस (MBBS or BDS) में से किसी में भी एडमिशन लेने से पहले जानिए दोनों कोर्स के बीच 10 बड़े अंतर-

1. अवधि
एमबीबीएस: 5.5 साल (4.5 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप)
बीडीएस: 5 साल (4 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप)

2. पाठ्यक्रम
एमबीबीएस सिलेबस (MBBS Syllabus): मानव शरीर की संरचना, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, आदि.
बीडीएस सिलेबस (BDS Syllabus): दंत विज्ञान, दंत संरचना, दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स आदि.

3. विशेषज्ञता
एमबीबीएस: जनरल मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनोकोलॉजी, आदि.
बीडीएस: दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स, प्रोस्थोडोंटिक्स.

4. करियर ऑप्शन
एमबीबीएस (Career Options after MBBS): डॉक्टर, सर्जन, रिसर्चर, एकेडमिशियन
बीडीएस (Career Options after BDS): दंत चिकित्सक, दंत शल्य चिकित्सक, दंत अनुसंधानकर्ता

5. फीस
एमबीबीएस की फीस (MBBS Fees): उच्च (लाखों रुपये)
बीडीएस की फीस (BDS Fees): कम (लाखों रुपये से कम)

6. प्रवेश आवश्यकताएं
एमबीबीएस एंट्रेंस एग्जाम (MBBS Entrance Exam): नीट (NEET) परीक्षा
बीडीएस एंट्रेंस एग्जाम (BDS Entrance Exam): नीट (NEET) परीक्षा

7. काम का क्षेत्र
एमबीबीएस (MBBS Careers): हॉस्पिटल, क्लिनिक, रिसर्च सेंटर
बीडीएस (BDS Careers): डेंटल क्लिनिक, डेंटल अस्पताल

8. वेतन
एमबीबीएस सैलरी (MBBS Doctor Salary): उच्च (लाखों रुपये प्रति वर्ष)
बीडीएस सैलरी (Dentist Salary): मध्यम (लाखों रुपये प्रति वर्ष)

9. जिम्मेदारी
एमबीबीएस: मरीजों की सामान्य स्वास्थ्य देखभाल
बीडीएस: मरीजों की दंत स्वास्थ्य देखभाल

10. मान्यता
एमबीबीएस: मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI)
बीडीएस: डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI)

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