टेक्नोलॉजी – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 05 Feb 2025 10:41:12 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 ड्रोन से होगा फसलों की गुणवत्ता में सुधार : CM मोहन https://samacharpacheesa.com/?p=14840 Wed, 05 Feb 2025 10:41:12 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=14840 भोपाल :- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025 की स्वीकृति प्रदान की गई है। ड्रोन तकनीक से खेतों की सटीक स्थिति का मूल्यांकन हो सकेगा, जिससे फसलों के उत्पादन में वृद्धि होगी।

फसलों में बीमारी, कीट और पर्यावरणीय प्रभावों की शीघ्र पहचान की जा सकेगी। इससे जल का कुशल उपयोग, जल संरक्षण में वृद्धि और सिंचाई लागत में कमी आएगी। ड्रोन से कृषि उत्पादकता और फसलों की गुणवत्ता में सुधार होगा। किसानों को ड्रोन प्रौद्योगिकी से नई कृषि पद्धतियों का लाभ मिलेगा।

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गगनयान की तारीख हुई फिक्स, चांद पर इंसान कब भेजेगा भारत….ISRO चीफ https://samacharpacheesa.com/?p=11222 Sun, 27 Oct 2024 07:27:44 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=11222 भारतीय स्पेस एजेंसी (इसरो) पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई हैं. चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसरो चंद्रयान-4 और गगनयान मिशन पर द्रुत गति से काम कर रहा है. दरअसल, भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ इसी साल 2024 के आखिर या 2025 में लॉन्च की उम्मीद थी लेकिन, इसकी तारीख बदल चुकी है. इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ शनिवार को आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) में सरदार पटेल मेमोरियल लेक्चर में भारत के आगामी मिशन के साथ-साथ उन्होंने वैश्विक स्पेस इकॉनमी में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर भी बात की. उन्होंने गगनयान, चंद्रयान-4, चंद्रयान-5 और भारत के चांद पर मानव मिशन पर भी बात की.

ऑल इंडिया रेडियो के लेक्चर में उन्होंने बहु प्रतीक्षित भारत के गगनयान मिशन के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि मानवयुक्त स्पेस मिशन गगनयान संभवतः 2026 में लॉन्च होगा. वहीं, चंद्रयान-4 जो कि चांद की सतह से सैंपल लेकर आएगा, यह 2028 तक लॉन्च हो सकता है. वहीं, उन्होंने बताया कि भारत-अमेरिका का विलंबित मिशन निसार अगले साल तक संभव हो सकेगा. निसार मिशन, एक रडार मशीन है जो धरती की सतह पर पर्यावरणीय बदलावों और प्राकृतिक आपदाओं और प्राकृतिक घटनाओं की बेहतर जानकारी जुटाएगा.

JAXA के साथ ISRO का मून मिशन
इसरो के अध्यक्ष ने खुलासा किया कि जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जेएक्सए (JAXA) के साथ संयुक्त चंद्रमा-लैंडिंग मिशन, जिसे मूल रूप से ल्यूपेक्स या लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन (LUPEX) नाम दिया गया था. यह चंद्रयान-5 मिशन होगा. उन्होंने लॉन्च के लिए फिक्स समय सीमा का उल्लेख नहीं किया. पहले LUPEX मिशन को 2025 की समय-सीमा में लॉन्च किया जाना था, लेकिन अब इसे चंद्रयान-5 के रूप में वर्णित किया गया है, इसलिए इसकी उम्मीद 2028 के बाद ही की जा सकती है.

चंद्रयान-4 कब तक
सोमनाथ ने बताया, ‘चंद्रयान-4 एक बहुत भारी मिशन होगा, इसमें लैंडर भारत द्वारा प्रदान किया जाएगा, जबकि रोवर जापान से आएगा. चंद्रयान-3 पर रोवर का वजन केवल 27 किलोग्राम था. लेकिन, यह मिशन 350 किलोग्राम का रोवर ले जाएगा. यह मिशन भारत को चंद्रमा पर मानव को उतारने में एक कदम और करीब ले जाएगा. उन्होंने भारत ने 2040 तक चंद्रमा पर मानवयुक्त मिशन भेजने की योजना का अनावरण किया है.

इसरो में प्राइवेट सेक्टर
सोमनाथ ने शनिवार के लेक्चर में वैश्विक स्पेस इकॉनमी और स्पेस रिसर्च में प्राइवेट सेक्टर को शामिल करने को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि अगले 10 से 12 साल में इंटरनेशनल स्पेस इकॉनमी में भारत की भागीदारी 2 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक करने की कोशिश किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इसे इसरो अकेले दम पर हासिल नहीं कर सकता है. स्टार्ट-अप से लेकर बड़ी कंपनियों तक, सभी को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आकर भाग लेने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, “हम ऐसे सक्षम तंत्र बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए इसरो के साथ काम करना आसान हो जाएगा.”

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दिसंबर से जनरल टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को मिलेंगी सीटें…. https://samacharpacheesa.com/?p=10563 Wed, 09 Oct 2024 06:14:46 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=10563 जनरल कोचों से सफर करने वाले आम यात्रियों की बल्‍ले-बल्‍ले होने वाली है. उन्‍हें धक्‍का-मुक्‍की या लटककर यात्रा करने की जरूरत नहीं होगी. इसके लिए लंबा इंतजार भी नहीं करना होगा. दिसंबर से यात्री अपने गंतव्‍य तक सुविधाजनक तरीके से पहुंच सकेंगे. भारतीय रेल ने आम यात्रियों की सुविधा के लिए सभी मेल और एक्‍सप्रेस ट्रेनों में चार-चार जनरल कोच लगाने की डेडलाइन तय कर दी है.

मौजूदा सामय 10 हजार से अधिक ट्रेनें पूरे देश में चल रही हैं. इसमें वंदेभारत, शताब्‍दी, राजधानी से लेकर मेल एक्‍सप्रेस, पैसेंजर, लोकल, ईएमयू और डीएमयू शामिल हैं. मेल एक्‍सप्रेस की संख्‍या करीब 822 है. इन सभी ट्रेनों में चार-चार कोच जनरल के लगाए जा रहे हैं. दो आगे और दो पीछे कोच लगेंगे.

अभी तक संख्‍या तय नहीं थी

अभी तक-मेल एक्‍सप्रेस में जनरल कोचों की संख्‍य तय नहीं थी. किसी में एक, किसी में दो, किसी में तीन तो किसी में चार कोच लगते थे. यह कोचों की उपलब्‍धता पर निर्भर करता था. इसी वजह से जिस ट्रेनों में जनरल कोचों की संख्‍य कम होती है, उन ट्रेनों के जनरल कोचों में घुसने के लिए मारामारी होती थी. यात्रियों को लटकर यात्रा करनी पड़ती है. कोच में घुस न पाने की वजह से कई बार ये यात्री स्‍लीपर कोच में घुसकर मजबूरी में सफर करते थे.

1300 कोच लगाने की जरूरत

रेल मंत्रालय के अनुसार सभी मेल-एक्‍सप्रेस ट्रेनों में कुल मिलाकर 1300 कोचों की जरूरत पड़ेगी. इन कोचों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. जैसे-जैसे कोच बनते जा रहे हैं, ट्रेनों में लगाए जा रहे हैं. अभी तक 120 ट्रेनों में चार-चार कोच लगाए जा चुके हैं.

2000 कोचों का निर्माण मार्च तक

भारतीय रेलवे कुल 2000 जनरल कोचों का निर्माण मार्च 2024 तक करेगा. इनमें से 1300 कोच लगने के बाद के बाद बचे हुए 700 कोचों को पुराने कोचों से रिप्‍लेस किया जाएगा. इस तरह जनरल कोचों में लोगों को धक्‍का मुक्‍की करके सफर करने की जरूरत नहीं होगी.

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