अरुणाचल प्रदेश – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 03 Jan 2023 11:31:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 तवांग झड़प के बाद अपने पहले अरुणाचल दौरे से चीन को स्पष्ट संकेत दे गये रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह https://samacharpacheesa.com/?p=5617 Tue, 03 Jan 2023 11:31:31 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5617 ईटानगर। तवांग में भारत और चीन के सैनिकों के बीच दिसंबर महीने में हुई झड़प के बाद आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अरुणाचल प्रदेश पहुँचे और एलएसी के पास एक पुल का उद्घाटन कर भारत की रक्षा तैयारियों को बल प्रदान किया तथा अपने संबोधन के माध्यम से चीन को कड़ा संदेश भी दिया। राजनाथ सिंह ने अरुणाचल प्रदेश में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया जिनमें सबसे खास सिओम पुल है जोकि सियोम नदी पर बनाया गया है। यह पुल रणनीतिक रूप से भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वास्तविक नियंत्रण रेखा के दूरदराज के क्षेत्रों में सैनिकों को तैनात करने में सहायक होगा।
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर दिये अपने संबोधन में कहा कि सीमा सड़क संगठन BRO ने जिस भावना और गति के साथ विकास कार्यों को अंजाम दिया है वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ने की योजना सरकार की प्राथमिकता में है, ताकि वहां रहने वाले लोगों के विकास के साथ-साथ, उनमें व्यवस्था के प्रति विश्वास की भावना विकसित हो सके। रक्षा मंत्री ने सीमा सड़क संगठन द्वारा देश के सीमावर्ती इलाकों में निर्मित 28 मूल ढांचा परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा कि मुझे बड़ी खुशी और गौरव का अनुभव हो रहा है।
अरुणाचल प्रदेश के बोलेंग में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के पास देश की सीमा पर विरोधियों की चुनौतियों को विफल करने की पूरी क्षमता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत कभी भी युद्ध को बढ़ावा नहीं देता है और हमेशा अपने पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता है। रक्षा मंत्री ने बिना किसी देश का नाम लिये स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भारतीय सेना में सीमा पर किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है और वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत एक ऐसा देश है जो कभी भी युद्ध को बढ़ावा नहीं देता है और हमेशा अपने पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि यह संस्कृति और संस्कार हमें भगवान राम और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से विरासत में मिला है। हालांकि देश के पास उकसाने पर किसी भी तरह की स्थिति का सामना करने की क्षमता भी है।

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भारत-चीन झड़प को लेकर मोदी सरकार पर फिर हमलावर हुए खडग़े https://samacharpacheesa.com/?p=5248 Thu, 15 Dec 2022 08:34:09 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5248 नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीन के अतिक्रमण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अभी भी जारी है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने गुरुवार को मोदी सरकार पर एक बार फिर हमला बोला। खडग़े ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उपहास का अनुसरण करते हुए कहा, ऐसा लगता है कि मोदी सरकार की लाल आंख चीनी चश्मे से ढकी हुई है…क्या हम संसद में चीन के खिलाफ नहीं बोल सकते?
भारत-चीन सीमा मुद्दे पर सरकार पर बहस को रोकने का आरोप लगाने के बाद बुधवार को कांग्रेस और अन्य दलों ने संसद से बहिर्गमन किया। सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और तृणमूल के सांसद लोकसभा से बाहर चले गए और उन दो और जनता दल (यूनाइटेड), तेलुगु देशम पार्टी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना सहित 17 राज्यसभा से बाहर चले गए।
बताते चलें कि 9 दिसंबर को तवांग सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। इसपर के केंद्र सरकार ने कहा था कि भारत ने दृढ़ तरीके से जवाब दिया और चीन को पीछे हटने को मजबूर किया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जून 2020 में गालवान के विपरीत कोई घातक घटना नहीं हुई और भारतीय सैनिकों को कोई गंभीर चोट नहीं आई।

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भारतीय सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी https://samacharpacheesa.com/?p=5230 Thu, 15 Dec 2022 06:26:07 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5230 9 दिसम्बर की रात चीनी सैनिकों ने भारत के अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर की सीमा को पार कर भारत की सीमा में घुस आए। वैसे तो इस बात की जानकारी अगर सेना किसी को नहीं देती तो शायद किसी को पता ही नहीं चलता। लेकिन यह एक महत्वपूर्ण घटना थी इसलिए सेना ने इस संबंध में एक बयान जारी कर वस्तुस्थिति की जानकारी दी। जानकारी के अनुसार लगभग 200 चीनी सैनिक लाठी और कुछ नुकीले हथियारों के साथ भारतीय सेना में घुस आए थे। यह घुसपैठ अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर 1700 हजार फुट ऊंची चोटी पर पहुंचने के लिए किया था। यह चोटी सामरिक दृष्टि से भारत और चीन के लिए महत्वपूर्ण है। यह घटना लगभग उसी तरह की जिस प्रकार 1999 में पाकिस्तान ने चोरी छिपे कारगिल की पहाडिय़ों पर घुसपैठ कर कब्जा कर लिया था। अच्छी बात यह रही कि आधी रात को भारतीय सैनिकों को इस घुसपैठ की खबर मिल गयी और उन्होंने मुंहतोड़ जवाब देते हुए चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया। इस बात के लिए भारतीय सैनिकों की पीठ थपथपाई जाना चाहिए थी। लेकिन देश में जिस तरह के बयान आ रहे है या मीडिया में जिस तरह की रिपोर्टिंग हो रही है उससे लगता है कि देश के जिम्मेदार लोगों को अपनी सेना पर भरोसा नहीं रहा। संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। स्वाभाविक है चीन जैसे महत्वपूर्ण पड़ोसी देश की सीमा पर सेना के जवान आपस में भिड़ गए तो इस संबंध में सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए। यह संसदीय परिपाटी भी है और इसके तहत रक्षामंत्री को संसद में अपना बयान देना था। लेकिन विपक्ष सरकार पर इस तरह आक्रमण कर बैठी मानो भारत अपनी सीमा की रक्षा करने में फेल हो गया। प्रश्नकाल तक चलने नहीं दिया गया। कई बार समझ में नहीं आता कि भारत राष्ट्र की रक्षा करने की जिम्मेदारी क्या केवल केंद्र में शासन करने वाली सरकार की है या केवल सेना की या सभी नागरिकों की? यह समझ से परे है कि राष्ट्रहित के विषयों पर खासकर जिसमें सेना का कोई पक्ष हो और उसकी सफलता की कोई घटना हो उस पर विपक्ष सवाल क्यों उठाता है? बेहतर होता कि संसद में सरकार के साथ विपक्ष बैठकर चर्चा करती और चीनी सैनिकों की इस कार्यवाही की एक स्वर में निंदा करती। देश पर कोई संकट हो तो पूरे देश को एक हो जाना चाहिए। कई बार राजनीति में विरोधी का विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगते है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है डोकलाम हो, गलवान हो या सर्जिकल स्ट्राइक। सेना को कटघरे में खड़े करना एक विपक्ष की आदत बनती जा रही है।

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