आदिवासियों – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 10 Aug 2023 09:34:06 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 रमन सरकार में आदिवासियों को लेकर दीपक बैज का बड़ा खुलासा https://samacharpacheesa.com/?p=7785 Thu, 10 Aug 2023 09:34:05 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7785 रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की जनसंख्या कुल आबादी के लगभग 32 फीसदी के आसपास है। ये वो वोटर्स है जिनका सरकार बनाने में बड़ा हाथ रहता है। यही वजह है कि चुनाव पास आते ही प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा, आदिवासियों के सबसे बड़ी हितैषी के रूप में खुद को साबित करने में लगी है। भाजपा का कहना है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक मानते हुए गुमराह करने में लगी है तो कांग्रेस भाजपा राज में आदिवासियों की नक्सली बनाकर हत्या करवाने का आरोप लगा रही है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और बस्तर सांसद दीपक बैज ने दावा किया कि पिछली भाजपा सरकार में आदिवासियों को पहले गोली मारकर हत्या की गई। उसके बाद उन्हें नक्सली वर्दी पहनाई गई। बैज ने कहा कि सिर्फ यही बात खत्म नहीं हुई। बस्तर में निर्दोष आदिवासियों के घरों में आग लगाई गई। दीपक बैज ने विश्व आदिवासी दिवस पर ये आरोप भाजपा पर लगाया।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमित साहू ने दीपक बैज के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने सभी बड़े नेताओं को नक्सली हमले में खत्म करवा दिया। आज भी झीरम हमले की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही है। भूपेश बघेल जब विपक्ष में थे तो वो कहते थे कि झीरम की रिपोर्ट उनकी जेब में है, लेकिन आज सरकार बनने के पौने 5 साल बाद भी रिपोर्ट उनकी जेब से नहीं निकली है।
अमित साहू ने कहा दीपक बैज बस्तर से नक्सली समस्या खत्म करने का दावा करते हैं लेकिन वहां की स्थिति कुछ और ही है। प्रदेश में अब कांग्रेस के ज्यादा दिन नहीं है। सरकार में रहते हुए ये उनका आखिरी बयान है।
दीपक बैज ने विश्व आदिवासी दिवस पर कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के आदिवासी पहले की तुलना में काफी सुरक्षित है। जब से कांग्रेस छत्तीसगढ़ में सत्ता में आई है, बस्तर और प्रदेश के दूसरे हिस्सों में रहने वाली आदिवासी निश्चिंत होकर अपना जीवन जी रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की है।बैज ने दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में पहली बार बस्तर में शांति लौट रही है। आदिवासी कांग्रेस की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
प्रदेश में लगभग 80 लाख आदिवासी आबादी है। इन 80 लाख में से लगभग 70 लाख लोग बस्तर और सरगुजा में रहते हैं। बाकी 10 लाख लोग मैदानी क्षेत्रों में हैं। इन 80 लाख आदिवासी आबादी में से लगभग 54 लाख मतदाता हैं। 2018 में 54 लाख में से लगभग 40 लाख वोटर्स ने अपना वोट दिया था। कांग्रेस ने इनमें से करीब 24 लाख वोट हासिल किए थे, भाजपा के खाते में सिर्फ 14 लाख वोट गए थे। जबकि 2 लाख आदिवासी वोट अजीत जोगी की जेसीसीजे पार्टी को मिले थे।

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आदिवासियों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩा हमारा मुख्य ध्येय: मुख्यमंत्री बघेल https://samacharpacheesa.com/?p=7597 Sat, 29 Jul 2023 09:53:26 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7597 रायपुर। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के जाति समुदायों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के उनके प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है।
गौरतलब है कि विगत दिवस 25 जुलाई को राज्यसभा ने संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक 2022 को मंजूरी दे दी। इसके पहले पिछले साल दिसम्बर में लोकसभा ने इस विधेयक को पारित किया था। इस अवसर पर खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से मिली इस सफलता पर प्रतिनिधिमंडल को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जनजाति समुदाय को उनके अधिकारों का लाभ दिलाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य ध्येय राज्य में आदिवासी समाज को आगे बढ़ाते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडऩा है। उन्होंने कहा कि राज्य में हमारी सरकार के बनते ही आदिवासियों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर आगे कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखकर मात्रात्मक त्रुटि के कारण आदिवासी समुदाय को हो रही दिक्कतों से अवगत कराया गया और उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का आग्रह किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जनजाति आयोग को विभिन्न समाजों के माध्यम से जो ज्ञापन मिले, आयोग द्वारा उनकी सुनवाई कर ट्राईबल रिसर्च इंस्टिट्यूट के माध्यम से अध्ययन के बाद प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजा गया। राज्य सरकार की इस पहल पर जाति समुदायों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने संबंधी विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से मंजूरी मिली है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में सर्वश्री बी.एल. ठाकुर, भारत सिंह, प्रेमलाल सिदार, रवि सिदार, मदनलाल, हीरालाल, श्रीमती वेद्वती, डॉ. शंकरलाल उईके सहित आदिवासी समाज के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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ननकीराम कंवर को भाजपा कार्यालय में नहीं घुसने देना आदिवासियों का अपमान: सीएम भूपेश बघेल https://samacharpacheesa.com/?p=7500 Mon, 24 Jul 2023 09:06:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7500 दुर्ग। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग में खूबचंद बघेल जयंती के कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया। भिलाई के सिविक सेंटर कला मंदिर में मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज की तरफ से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री समेत कांग्रेस के तमाम नेता, विधायक और कुर्मी समाज के तमाम पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन के बाद सीएम भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने शनिवार रात पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर को पार्टी कार्यालय में प्रवेश नहीं देने को लेकर भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। सीएम भूपेश ने इसे सीधे आदिवासियों का अपमान बताया है।
भूपेश बघेल ने कहा अमित शाह बार-बार छत्तीसगढ़ आ रहे है। इसका मतलब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व में ,बकुछ ठीक नहीं है। अमित शाह रात को आते हैं और डंडा चलाकर चले जाते हैं। कल जिस तरह से पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर को भाजपा पार्टी कार्यालय में भी नहीं घुसने दिया गया, उन्हें वापस भेज दिया गया। यह तो आदिवासियों का अपमान है।
भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के लिए किए संघर्षों के लिए खूबचंद बघेल को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि, समाज की जड़ता को सुधारने के लिए कोई न कोई सामने आता है। जो काम करता है, समाज में उसको याद किया जाता है। डॉ खूबचन्द बघेल भी ऐसे व्यक्तिव में से एक है। उन्होंने छत्तीसगढिय़ा स्वाभिमान को जगाने का काम किया। छत्तीसगढ़ राज्य की सोच भी इसमें शामिल रहा। आज छत्तीगसढिय़ों को सही मायने में राज्य बनने का अहसास हो रहा है।
विजय बघेल ने नशाखोरी को लेकर कसा तंज- कार्यक्रम में भाजपा नेता और दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि खूबचंद बघेल जैसे अनेक महापुरुष अलग प्रदेश के संघर्ष में साथ थे। उन्होंने सपना देखा था कि छत्तीसगढ़ में नशाखोरी, जुआखोरी, भ्रष्टाचार, अत्याचार ना हो। लेकिन आज छत्तीसगढ़ में यह सब होने लगा है। मनवा कुर्मी समाज के कार्यक्रम में नेत्र विशेषज्ञ और चिकित्सक डॉ लाखेशचंद्र मड़रिया को समाज की ओर से माटीपुत्र सम्मान से सम्मानित किया गया। साथ ही बीएसपी से सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारियों और समाज के प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित किया गया।

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धर्मान्तरण को लेकर एकतरफा कार्यवाही https://samacharpacheesa.com/?p=5675 Tue, 10 Jan 2023 06:06:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5675 छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में धर्मान्तर ण का मुद्दा उग्र रुप ले चुका है। ऐसा नहीं है कि यह अचानक प्रगट हुआ। पिछले 4 वर्षों से इसाई मिशनरियां के द्वारा धर्मान्तरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। समस्या तो तब हुई जब धर्मान्तरित हो चुके आदिवासी और मूल धर्म मानने वाले आदिवासियों के बीच में संस्कार को लेकर विवाद होने लगे। यह बात भी अचानक सामने नहीं आई, सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक ने तो 2019 की शुरुआत में ही ऐसी स्थिति निर्मित होने का आंकलन कर लिया था। भारतीय जनता पार्टी व अन्य संगठन भी बस्तर में हो रहे धर्मान्तरण और उसके जनजातीय समाज पर पडऩे वाले प्रभाव को लेकर सरकार से गुहार लगाई लेकिन इस मामले की गंभीरता को ताक पर रखकर सरकार ने राजनीतिक बयानबाजी शुरु कर दी। यह तर्क दिया गया कि भारतीय जनता पार्टी के 15 वर्ष के शासन में बड़ी संख्या में चर्च बने। अब इस तर्क का बस्तर में हो रहे विवाद से वैसे कोई संबंध नहीं है। यह भी सबको पता है कि संविधान में किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता है, इसलिए अगर इसाई मिशनरियां चर्च का निर्माण कर रही है तो संविधान के अनुसार उन्हें रोका नहीं जा सकता। भाजपा के शासनकाल में भी निर्माणाधीन चर्च को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए, तोडफ़ोड़ भी की गई लेकिन शासन ने त्वरित कार्यवाही करते हुए दोषियों पर कार्यवाही की। अब पिछले 3 वर्षों से पनप रहे विवाद को शांत करने के लिए कोई कदम उठाने के बजाय थाने में धर्मान्तरण के मामले में दर्ज अपराध के नाम पर इस मामले को टाला गया। सभी जानते है कि मिशनरियां किस प्रकार धर्मान्तरण का खेल खेलती है। अब सवाल इन बातों पर चर्चा करने का नहीं बल्कि अब तो जो बस्तर इस मामले में धधक रहा है उसे लेकर सरकार का क्या रुख है, यह महत्वपूर्ण है। नारायणपुर जिले के गुर्रा गांव में जनजातियों पर इसाई मिशनरियों की ओर से हमला किया गया और दूसरे दिन की घटना इसकी प्रतिक्रिया ही थी। लेकिन देशभर में माहौल क्या बनाया जा रहा है यह देखने वाली बात है। राष्ट्रीय मीडिया और खासकर कुछ चिन्हित समूह इसाई मिशनरी और चर्च पर हुए हमले को लेकर मुखर है और इसका दोष भाजपा और हिन्दूवादी संगठनों को दिया जा रहा है। सही बात कहीं नहीं आ रही कि इस पूरे प्रकरण में इसाई मिशनरियों का दोष कितना है? प्रशासन ही आदिवासियों के खिलाफ कार्यवाही कर रही है और इस घटना की आड़ में आदिवासियों के हक में खड़े होने वाले संगठनों के खिलाफ कार्यवाही करने की योजना बना रहा है। इससे बात बनेगी नहीं और बिगड़ेगी

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