ईडी – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 05 Aug 2023 10:47:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 सूर्यकांत, समीर विश्नोई, सुनील अग्रवाल की न्यायिक रिमांड 23 अगस्त तक बढ़ी https://samacharpacheesa.com/?p=7710 Sat, 05 Aug 2023 10:47:15 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7710 रायपुर। रानू साहू के मामले में कल कोर्ट का समय पूरा होने के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो पाई थी आज पुन: सुनवाई हुई,उन्हे 18 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। शनिवार को कोल घोटाले मामले के अन्य आरोपितों की न्यायिक रिमांड खत्म होने पर कोर्ट में पेशी हुई। इसमें सूर्यकांत तिवारी, समीर विश्नोई, सुनील अग्रवाल सहित अन्य को कोर्ट में पेश किया गया। इन सभी की 23 अगस्त तक न्यायिक रिमांड बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही कोल कंपनियों को नोटिस जारी करने के लिए ईडी को कोर्ट ने पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनील अग्रवाल की दो और सूर्यकांत तिवारी की एक कंपनी को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

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रायपुर, कोरबा और अंबिकापुर में कारोबारियों के घर ईडी की दबिश, दस्तावेजों की जांच जारी https://samacharpacheesa.com/?p=7677 Thu, 03 Aug 2023 09:16:50 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7677 रायपुर। रायपुर, कोरबा और अंबिकापुर में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कारोबारियों के घर दबिश देकर दस्तावेजों की जांच कर रही है। ऐसा कहा जा रहा है जिन कारोबारियों के घर जांच चल रही है वे आईएएस रानू साहू के करीबी व परिचित हैं।
रायपुर के कचना इलाके में स्वर्णभूमि स्थित रोहित अग्रवाल के घर जांच जारी है। रोहित तेंदूपत्ता के कारोबार से जुड़े हैं। ईडी की टीम सुबह से दस्तावेजों की जांच कर रही है। कोरबा में स्टेशन रोड निवासी पूर्व पार्षद और व्यवसायी शिव अग्रवाल के यहां सुबह 5 बजे से ईडी की टीम ने दस्तक दी। घर के लोग कुछ समझ पाते तब तक टीम ने घर के सभी लोगों को एक कमरे में रखकर कर जांच करना शुरू किया। करीब 5 घंटे तक जांच के बाद ईडी की टीम खाली हाथ वापस लौट गई।सीतामढ़ी में नवीन टाइल्स और जमीन कारोबारी पवन अग्रवाल के ठिकानों पर भी दस्तावेजों की जांच जारी है। अभी तक कार्रवाई का अपडेट सामने नहीं आया है।
कोरबा में ही व्यवसायी रूड़ मल अग्रवाल के घर और दुकान में भी छापा मारा गया है। अधिकारियों के साथ सुरक्षाबल के जवान घर के बाहर निगरानी करते देखे गए। रुड़ मल अग्रवाल के घर कार्रवाई के दौरान अब तक क्या मिला है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। इससे पहले बुधवार को ईडी की टीम ने रायगढ़ में सुनील रामदास अग्रवाल के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। हालांकि टीम कल ही लौट गई थी।

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ईडी ने रानू साहू को किया गिरफ्तार, करोड़ों रुपयों के हेरफेर का आरोप https://samacharpacheesa.com/?p=7484 Sat, 22 Jul 2023 08:05:14 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7484 रायपुर। छत्तीसगढ़ की आईएएस रानू साहू को ईडी ने गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया है। शुक्रवार को ईडी ने छत्तीसगढ़ के अलग अलग जिलों में अधिकारियों और नेताओं के ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की थी। इसी दौरान आईएसएस रानू साहू के घर भी ईडी ने छापा मारा था। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने रानू साहू को विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की कोर्ट में पेश किया है। कोर्ट में सुनवाई जारी है।
शुक्रवार को ईडी ने दी थी दबिश- शुक्रवार को रानू साहू के देवेंद्र नगर स्थित सरकारी आवास में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने छापेमारी की थी। इस छापेमारी में ईडी को कई अलग अलग दस्तावेज मिले। जिनके आधार पर ईडी ने आईएएस रानू साहू को गिरफ्तार किया। ईडी ने रानू साहू पर करोड़ों रुपयों के हेरफेर का आरोप लगाया है।
ईडी की 80 सदस्यीय टीम की कार्रवाई- ईडी ने आईएएस रानू साहू से कोयला परिवहन से लेकर डीएमएफ और सार्वजनिक खाद्य वितरण (पीडीएस) में भ्रष्टाचार मामले में पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को ईडी ने रायपुर के अलावा कोरबा, अंबिकापुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़ में नेता, अधिकारियों और कारोबारियों के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। ईडी ने राजधानी रायपुर में जिन प्रमुख ठिकानों पर दबिश दी थी, उनमें प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के अनुपम नगर स्थित निवास और उनके बेटे के सिविल लाइन कार्यालय में दस्तावेजों की छानबीन की थी। देवेंद्र नगर ऑफिसर्स कॉलोनी में आइएएस रानू साहू, ठेकेदार सुनील रामदास अग्रवाल के जोरा कार्यालय और अनुपम नगर घर में कार्रवाई की गई। इसके अलावा कोरबा में नगर-निगम कमिश्नर प्रभाकर पांडेय के सरकारी आवास और कार्यालय से ईडी ने बड़ी मात्रा में दस्तावेज बरामद किए थे।
छत्तीसगढ़ की खदानों पर केंद्र की नजर- छत्तीसगढ़ में ईडी की कार्रवाई पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आरोप लगाया कि राज्य में ईडी और आईटी छापे इसलिए पड़ रहे हैं क्योंकि केंद्र सरकार राजस्थान की खदानें अपने दोस्तों को देना चाहती है। ‘छत्तीसगढ़ एक छोटा राज्य है और सबसे ज्यादा ईडी, आईटी के छापे छत्तीसगढ़ में पड़े हैं। इन छापों से मुझे जो समझ आया वह यह है कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ की खदानें अपने दोस्तों को देना चाहती हैं।
आईएएस समीर विश्नोई भी हो चुके हैं गिरफ्तार- रानू रानू साहू छत्तीसगढ़ की दूसरी आईएएस ऑफिसर हैं, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया, इससे पहले आईएएस समीर विश्नोई गिरफ्तार हो चुके हैं और फिलहाल रायपुर की सेंट्रल जेल में है। रानू साहू वर्तमान में कृषि विभाग में संचालक के पद पर पदस्थ थी। इससे पहले रानू साहू रायगढ़ जिले की कलेक्टर रह चुकी हैं। ईडी की छापामार कार्रवाई में पहले भी आईएएस रानू साहू का नाम सामने आया था हालांकि छापेमारी के बाद उनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी, लेकिन अब उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

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आईएएस रानू साहू और कई व्यवसायियों के घर ईडी की छापेमारी, प्रदेश में कई जगहों पर मारा छापा https://samacharpacheesa.com/?p=7459 Fri, 21 Jul 2023 08:27:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7459 अंबिकापुर। ईडी की टीम ने एक बार फिर राज्य के तीन शहरों में शुक्रवार सुबह एक साथ छापेमार कार्रवाई की है। रायपुर के अलावा बिलासपुर व कोरबा में टीम पड़ताल कर रही है। इनमें नेताओं,अफसरों व ठेकेदारों के निवास व आफिस में जांच की जा रही है। भारतीय प्रवर्तन निदेशालय की जांच संभाग मुख्यालय अंबिकापुर तक पहुंच गई है। ईडी की टीम ने शुक्रवार को ब्रम्हरोड के सेठ बसंतलाल गली स्थित व्यवसायी अशोक कुमार अग्रवाल के निवास पर दबिश दी। दो वाहनों में पहुंचे ईडी की टीम ने व्यवसायी के घर से पहुंचकर जांच शुरू की।
बताया जा रहा है कि व्यवसायी बड़े सप्लायर हैं और पूरे छत्तीसगढ़ में सप्लाई का काम करते हैं। ईडी की टीम ने आज आईएएस दंपती रानू साहू, जेपी मौर्य के साथ ही व्यवसायियों के दर्जनभर ठिकानों पर आज सुबह जांच शुरू की है। उधर, कोरबा के नगर निगम कमिश्नर प्रभाकर पांडे के घर पर भी ईडी ने छापेमारी की है। पांच सदस्यीय टीम ने शुक्रवार सुबह पांच बजे छापा मारा। टीम दस्तावेजों की छानबीन कर रही है। बताया जा रहा है कि ईडी की पांच सदस्यीय टीम के साथ सीआरपीएफ के जवान आए हुए हैं, जो घर के अंदर-बाहर तैनात हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय प्रवर्तन निदेशायल की टीम शुक्रवार सुबह अंबिकापुर पहुंची और सेठ बसंतलाल मार्ग में स्थित व्यवसायी अशोक अग्रवाल के घर पहुंची। इस टीम में महिलाएं भी हैं। ईडी की टीम ने अशोक अग्रवाल के घर पहुंचकर जांच शुरू की। वहां से टीम उनके सत्तीपारा कॉलोनी स्थित निवास पर पहुंची व दस्तावेज खंगाले।
बताया जा रहा है कि अशोक अग्रवाल प्रदेश में बड़े पैमाने पर सप्लाई का काम करते हैं। मुख्य रूप से इनके सप्लाई का काम शिक्षा विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग में हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सप्लाई का काम करने वाले अशोक अग्रवाल के घर छापे का कनेक्शन एकीकृत आदिवासी परियोजना व डीएमएफ मद से सप्लाई से जुड़ा बताया गया है। आशंका है कि यहां ईडी की टीम ने उनके निवास से कई दस्तावेज जब्त किए हैं। ईडी की टीम अशोक अग्रवाल के ठिकानों में छापेमारी के बाद अन्य व्यवसायियों के घर भी छापेमारी कर सकती है।

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राजनीति में शराब घोटाले की धमक https://samacharpacheesa.com/?p=6850 Tue, 09 May 2023 06:09:53 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6850 भारतीय जनता पार्टी पिछले एक साल से सत्तारुढ़ कांग्रेस सरकार पर ईडी और सीडी के आरोपों में फंसी होने के आरोप लगा रही है। इधर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी के प्रवक्ता प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के द्वारा पिछले दो वर्षों से की जा रही कार्यवाही को राजनीति से प्रेरित बता रहे है। एक बात समझने की है कि ईडी जांच करने वाली संस्था नहीं है। सीबीआई और आयकर विभाग छापा मारकर आर्थिक एवं अन्य अपराधों की जांच करते है और इस दौरान संबंधित दस्तावेज जप्त करते है। इन जप्त दस्तावेजों में विदेशों में धन के अवैध लेन-देन की कोई बात हो तब ईडी अपना काम शुरु करता है। प्रदेश में कोयला के परिवहन में अवैध कमाई और उस कमाई की अफरा-तफरी को लेकर ईडी ने उच्च अधिकारियों, कारोबारियों सहित बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार कर रखा है। अब पिछले कुछ दिनों से शराब के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर रहा है। इस सिलसिले में रायपुर नगर निगम के महापौर के भाई अनवर ढेबर को जब ईडी ने गिरफ्तार कर न्यायालय में 14 दिन की रिमांड मांगने के लिए जो आवेदन प्रस्तुत किया और उसके बाद विज्ञप्ति जारी की उससे शराब के अवैध धंधों से 2 हजार करोड़़ रुपए से अधिक की गड़बड़ी का दावा किया गया है। ईडी ने बकायदा किस प्रकार तीन तरह से शराब के कारोबार में अवैध वसूली और कारोबार का सिंडीकेट बनाकर पैसे की लूट की गई, इसकी जानकारी विज्ञप्ति में दी गई है। इस प्रकरण के बाद राजनीति गरमा गई है। भाजपा सरकार पर हमलावर है तो सरकार 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले को तथ्यहीन बता रही है। वैसे तो कांग्रेस की ओर से जो तर्क दिए जा रहे है वे ज्यादा गंभीर नहीं लगते। लेकिन इस बात के कयास लगने शुरु गए है कि ईडी की कार्यवाही से जो घोटाले सामने आ रहे है उनका चुनाव पर क्या असर होगा? एक बात देखने में आती है कि चुनाव में विकास और भ्रष्टाचार तब तक कोई मुद्दा नहीं बनते जब तक वह जनता के जीवन को प्रभावित न करें। इसलिए कोयला मामले में ईडी का कार्यवाही का उतना असर नहीं होगा लेकिन शराब के घोटाले को लेकर जो तथ्य सामने आए है वे चुनाव को अवश्य प्रभावित करेंगे। वह इसलिए क्योंकि मामला शराब से जुड़ा हुआ है और प्रदेश में शराबबंदी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में शराबबंदी का वादा किया था लेकिन अब तक शराबबंदी नहीं की जा सकी। सरकार यह निर्णय नहीं लेने के पीछे तर्क दे रही है कि अचानक शराबबंदी से लोगों को तकलीफ हो सकती है। इधर जो तथ्य ईडी के द्वारा सामने रखे गए है उससे लगता है कि जो कमाई शराब के कारोबार से हो रही थी उसे बनाए रखने के लिए शराबबंदी का निर्णय नहीं लिया गया। दूसरी ओर बिना आबकारी कर पटाए शराब के अवैध कारोबार से भी सैकड़ों करोड़ रुपए कमाए गए। इससे शराब पीने वाले और शराबबंदी की मांग करने वाले दोनों पक्ष नाराज होंगे। यह नाराजगी अगले चुनाव में कांग्रेस सरकार पर भारी पड़ सकती है।

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घोटाले के खिलाफ कार्रवाई पर उठते सवाल https://samacharpacheesa.com/?p=6402 Wed, 22 Feb 2023 08:13:04 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6402 भारतीय जनता पार्टी बार-बार प्रदेश की भूपेश सरकार पर आरोप लगाती है कि छत्तीसगढ़ को ईडी और सीडी मामले ने बदनाम कर दिया है। पिछले लगभग 3 वर्षों से प्रदेश के बड़े अधिकारियों, कारोबारियों और नेताओं पर छापा मारने का एक लंबा सिलसिला है। इसकी शुरुआत 2020 में हुई थी जब प्रदेश के उच्च अधिकारियों के घर पर आयकर विभाग ने दबिश देकर सर्वे किया था। इस कार्रवाई में कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल सहित बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त कर विभाग अपने साथ ले गया। उसके बाद प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एन्ट्री हुई। अभी जब अखिल भारतीय कांग्रेस का बड़ा अधिवेशन रायपुर में होने वाला है उसके ठीक पहले ईडी ने प्रदेश के 12 कांग्रेस नेताओं के ठिकानों पर छापा मारा है। इस घटना ने पूरे देश में एक राजनीतिक सनसनी पैदा कर दी है। दिल्ली से लेकर रायपुर तक कांग्रेस पार्टी ईडी की कार्यवाही को राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी के महाधिवेशन में व्यवधान उत्पन्न करने का षडय़ंत्र बताया। यह बात सही है जब किसी राष्ट्रीय पार्टी का एक अति महत्वपूर्ण महाधिवेशन होने जा रहा हो जिसमें पूरे देश से दिग्गज कांग्रेसी नेता आ रहे हों उसके ठीक पहले इस कार्यक्रम की तैयारी में जुटे नेताओं के ठिकानों पर छापा मारना समय की दृष्टि से सही नहीं है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अगर राजनीतिक निर्देश के आधार पर ईडी कार्रवाई कर रही है तो कम से कम किसी राजनीतिक पार्टी के कार्यक्रम के पहले छापेमारी नहीं की जाती। इससे ऐसा लगता है कि छापेमारी का निर्णय ईडी के अधिकारी ले रहे है जो राजनीति के महत्व को नहीं समझते। अगर ईडी के पास पुख्ता सबूत और जानकारियां है तो छापा मारने के लिए कांग्रेस पार्टी के महाधिवेशन के संपन्न हो जाने की प्रतीक्षा भी कर सकते थे। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस पार्टी भी आक्रमक मूड में आ गई है। पहले तो जिन नेताओं के ठिकानों पर छापेमारी की गई वहां कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंच कर विरोध जताने लगे तो दूसरी ओर मंगलवार को ईडी के कार्यालय का कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने घेराव किया। इधर मुख्यमंत्री सहित पार्टी के नेता ईडी की कार्रवाई के खिलाफ बयान भी दे रहे है। मुख्यमंत्री सवाल उठा रहे है कि ईडी की कार्यवाही कांग्रेस पार्टी और गैर भाजपाई दलों के नेताओं के खिलाफ ही क्यों हो रही है। उन्होंने भाजपा के नेताओं की काली कमाई की ओर भी उंगली उठाई है जिसके खिलाफ ईडी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। वैसे इस बात में दम तो है क्योंकि देशभर के भाजपा के नेताओं ने भी जब मौका मिला तो मोटी कमाई की है। लेकिन आंकड़े के मुताबिक पिछले 8 वर्षों में ईडी ने 5 हजार से अधिक छापामार की है जिसमें से 90 प्रतिशत गैर भाजपाई दल के नेता है। लेकिन प्रदेश में ईडी की कार्रवाई के बाद एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी और कारोबारी गिरफ्तार है और उनके खिलाफ में कोर्ट में चालान भी प्रस्तुत किया जा चुका है। इन दस्तावेजों में ईडी ने बहुत स्पष्टतौर पर अधिकारियों, कारोबारियों और नेताओं के बीच कोयले के कारोबार में कथित अवैध लेनदेन का साक्ष्य सहित विवरण किया है। इसी आधार पर गिरफ्तार किए गए अधिकारियों को कोर्ट से जमानत नहीं मिल रही है। इसका मतलब है कि कोयले के कारोबार में सैकड़ों करोड़ रुपए का अवैध लेनदेन तो हुआ है। अब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हों तो भ्रष्टाचार पर नकेल कैसे डाल सकेंगे? इसका मतलब है कि ईडी की कार्रवाई सही है और इस कार्रवाई में 540 करोड़ रुपए के घोटाले को भी कोई झूठला नहीं रहा है। बात केवल छापे के समय और चिन्हित राजनीतिक पार्टी और नेताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे है। ईडी की जांच अब उस स्तर तक पहुंच चुकी है जब कोयला सहित शराब और अन्य कारोबार में हुई गड़बडिय़ों का खुलासा होगा और कई अधिकारी, कारोबारी और प्रमुख नेता जांच के लपेटे में आएंगे। यह तो स्पष्ट हो गया है कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार और ईडी की कार्रवाई प्रमुख मुद्दा बनने जा रहा है। इसके साथ राजनीतिक कटुता भी बढ़ रही है जो बयान की मर्यादाओं को लांघ रही है।

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सत्येंद्र जैन पीएमएलए मामले में सह-आरोपी की जमानत याचिका पर ईडी को दिल्ली कोर्ट का नोटिस https://samacharpacheesa.com/?p=5158 Mon, 12 Dec 2022 07:58:56 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5158 दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन के सह-आरोपी वैभव जैन और अंकुश जैन द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया। तीनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की खंडपीठ ने ईडी से जवाब मांगा और मामले को सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका के साथ सूचीबद्ध किया, जिस पर 20 दिसंबर, 2022 को सुनवाई होनी है।
कुछ दिन पहले, सत्येंद्र जैन ने मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए जमानत याचिका के साथ उसी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को भी नोटिस जारी किया है और मामले की अगली तारीख 20 दिसंबर, 2022 तय की है। निचली अदालत ने सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका खारिज करते हुए वैभव जैन और अंकुश जैन की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
ट्रायल कोर्ट ने कहा था, यह प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड में आया है कि आवेदकों / अभियुक्त वैभव जैन और अंकुश जैन ने जानबूझकर सह-आरोपी सत्येंद्र कुमार जैन को अपराध की कार्यवाही को छिपाने और अपराध की कार्यवाही को बेदाग होने का दावा करके सहायता की। आईडीएस, 2016 के तहत अपराध की आय उनकी बेहिसाब आय है और इसलिए, पीएमएलए की धारा 3 में परिभाषित मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए प्रथम दृष्टया दोषी हैं। सत्येंद्र जैन को 30 मई, 2022 को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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