एस जयशंकर – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Fri, 03 Feb 2023 09:01:54 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 जी20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को रखेगा : जयशंकर https://samacharpacheesa.com/?p=6067 Fri, 03 Feb 2023 09:01:54 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6067 नयी दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि जी20 समूह की अध्यक्षता के दौरान यह उम्मीद की जाती है कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को सामने रखेगा और समकालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण के मुद्दे पर आम-सहमति बनाने में सहयोग करेगा। लोकसभा में टी आर बालू के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जी20 समूह की भारत की अध्यक्षता के दौरान देशभर में 50 से अधिक शहरों में लगभग 200 बैठकें आयोजित होंगी। उन्होंने कहा कि इसमें 30 विभिन्न कार्यसमूह वार्ता सत्र आयोजित करेंगे जिनमें शेरपा ट्रैक कार्य समूह, फाइनांस ट्रैक कार्य समूह, और सहभागिता समूह के सत्र समेत मंत्रालयी बैठकें शामिल हैं।
जयशंकर ने बताया, ‘‘जी20 समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन का आयोजन 9-10 सितंबर, 2023 को नई दिल्ली में करना निर्धारित किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि जी20 की अध्यक्षता भारत की उपलब्धियों, क्षमताओं और विविधता को प्रदर्शित करने का एक विशेष अवसर है। विदेश मंत्री ने कहा कि इस गौरवपूर्ण अवसर को एक राष्ट्रीय अवसर के रूप में मनाया जा रहा है, स्वाभाविक रूप से इन्हें विभिन्न राज्य सरकारों के परामर्श से आयोजित किया जा रहा है और विभिन्न राजनीतिक दलों को भी तैयारी की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। जयशंकर ने कहा, ‘‘यह समग्र प्रयास सहकारी संघवाद के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’
उन्होंने कहा कि हमारी जी20 समूह की अध्यक्षता के दौरान उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण विचार विमर्श में, समावेशी और अनुकूल विकास, टिकाऊ विकास लक्ष्य (एसडीजी) संबंधी प्रगति, हरित विकास एवं पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली (मिशन लाइफ), प्रौद्योगिकी परिवर्तन और सार्वजनिक डिजिटल आधारभूत ढांचा, बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार, महिलाओं के नेतृत्व में विकास एवं अंतरराष्ट्रीय शांति और सद्भाव शामिल हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि जी20 की हमारी अध्यक्षता के दौरान होने वाले विचार-विमर्श के फलस्वरूप इन क्षेत्रों से संबंधित परिणाम सामने आयेंगे।

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राजनीतिक आलोचना से कोई समस्या नहीं, हमारे जवानों का होना चाहिए सम्मान : एस. जयशंकर https://samacharpacheesa.com/?p=5310 Mon, 19 Dec 2022 11:35:20 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5310 नईदिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत और चीन के बीच 9 दिसंबर को झड़प की खबर आई थी। इस मामले को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बयान दे दिया था। लेकिन विपक्ष जबरदस्त तरीके से केंद्र के मोदी सरकार पर हमलावर है। इन सबके बीच राहुल गांधी ने एक बयान देते हुए कहा था कि सीमा पर हमारे जवान पीट रहे हैं और चीन युद्ध की तैयारी कर चुका है। पर हमारी सरकार सो रही है। इसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि हमें राजनीतिक आलोचना से कोई समस्या नहीं है। लेकिन हमें अपने जवानों का अपमान नहीं करना चाहिए। वह विषम परिस्थितियों में भी बॉर्डर पर खड़े रहकर हमारी रखवाली करते हैं। इसलिए उनकी सराहना और उनका सम्मान सर्वोच्च होना चाहिए।
राहुल गांधी के बयान पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि हमें राजनीतिक आलोचना से कोई समस्या नहीं है लेकिन हमें अपने जवानों का अपमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने सुना है कि मेरी अपनी समझ को और गहरा करने की जरूरत है। जब मैं देखता हूं कि कौन सलाह दे रहा है तो मैं केवल झुक सकता हूं और सम्मान कर सकता हूं। उन्होंने साफ कहा कि हमारे जवानों के लिए ‘पिटाई’ शब्द का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष के सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर हम चीन के प्रति उदासीन थे तो भारतीय सेना को सीमा पर किसने भेजा। अगर हम चीन के प्रति उदासीन थे तो आज चीन पर डी-एस्केलेशन और डिसइंगेजमेंट के लिए दबाव क्यों बना रहे हैं? हम सार्वजनिक रूप से क्यों कह रहे हैं कि हमारे संबंध सामान्य नहीं हैं?
एस जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि हमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपने जवानों की आलोचना नहीं करनी चाहिए। हमारे जवान यांग्त्से में 13 हजार फीट की ऊंचाई पर खड़े होकर हमारी सीमा की रखवाली कर रहे हैं। उनका सम्मान और सराहना की जानी चाहिए। श्रीलंका के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से श्रीलंका से रिहा किए गए भारतीय मछुआरों की संख्या 2,835 और मछुआरों की संख्या है। पीएम मोदी ने तमिल मछुआरों की समस्याओं पर ध्यान दिया है। विदेश मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने बार-बार श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से बात की है। अगर श्रीलंका में पकड़े गए मछुआरों को आज रिहा किया जाता है, तो इसलिए नहीं कि कोई चेन्नई में पत्र लिख रहा है, बल्कि इसलिए कि दिल्ली में कोई इस मामले को उठा रहा है।

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