कांग्रेस – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 09 Nov 2023 06:40:37 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 भरोसे का संकट बनाम भरोसा बरकरार https://samacharpacheesa.com/?p=8816 Thu, 09 Nov 2023 06:40:35 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8816 एक दिन की आड़ में दोनों प्रमुख दलों का चुनावी घोषणा पत्र सामने आ गया है। कांग्रेस ने भरोसे का घोषणापत्र दिया तो घोषणा पत्र की जगह भाजपा ने मोदी की गारंटी का पत्र जारी किया। एक में पार्टी ने अपनी घोषणा की दूसरी तरफ पार्टी की जगह प्रधान मंत्री पद पर विराजमान नरेंद्र मोदी ने गारंटी दी। एक पार्टी और एक व्यक्ति , जनता सोच रही है किसकी मानें किस पर विश्वास व्यक्त करें ? पार्टी की घोषणा पर या व्यक्ति की गारंटी पर किस पर करें ? भारतीय जनता पार्टी के एक कट्टर समर्थक से किसी ने यह प्रश्न पूछ लिया तो फट से जवाब आया क्या बकवास बात कर रहे हो। इंडिया इज इंदिरा-इंदिरा इज इंडिया की तर्ज पर झट से कह दिया कि मोदी ही भाजपा है ,भाजपा ही मोदी है , अच्छी तरह समझ लो आगे कभी यह वाहियात सवाल दोबारा नहीं करना। अन्यथा फिर सोच लेना। मोदी की गारंटी का मतलब ही भाजपा की गारंटी है। पूछने वाले ने भक्त से डरते-डरते फिर दूसरा सवाल पूछ लिया , यार आप ही लोग तो कहते थे, कांग्रेस में व्यक्तिवाद है परिवार वाद है। आप लोग भी व्यक्तिवाद पर उतर आए हो। मोदी कैसे भाजपा हो जाएंगे वे तो स्वयं ही अपने आप को एक कार्यकर्ता मानते हैं। ऐसा इतने दिनों में क्या हो गया कि वे ही पार्टी हो गए। गारंटी देने लगे। लगता है सभी राज्यों का काम अब वे स्वयं ही सम्हालेंगे। ये उसी की शुरुवात है उद्घाटन उन्होनें छतीसगढ़ से कर दिया है। कह दिया हम ही सवारेंगें,यहां हमने ही बनाया का संवाद नहीं किया जा सकता था क्योंकि सभी जानते हैं कि अटलबिहारी बाजपेई ने छतीसगढ़ बनाया था,अन्यथा …? अगर मेहनत रंग लाई और भाजपा की सरकार बन गई और गारंटी पूरी नहीं हुई तो गुहार लगाने मोदी जी के पास जाना होगा। शायद ऐसा ना हो तो भी स्थानीय सरकार जवाबदेही से मुकर जाए तो क्या किया जा सकेगा। गारंटी देने वाले दिल्ली में और राज्य चलेगा छतीसगढ़ में कैसे होगा यह आम जनता सोच रही है। वैसे गारंटियों में दम तो है,पूरी हो जाये तो छतीसगढ़ तो स्वर्ग बन जायेगा लोग खुशहाल होंगें। पर विश्वाश का संकट पर बात हो रही है,कैसे विश्वास करें 15 लाख आज तक आये नहीं, दो करोड़ नौकरियों का पता नहीँ,महंगाई खत्म जुमला साबित हो गया है। अब राज्य में विश्वास कैसे करें। लोगों में इस बात की भी चर्चा है। उधर कांग्रेस स्वयं ही अपने आप के लिए घोषित कर रही है कि हम भरोसे की सरकार हैं। इसीलिए हम दे रहे हैं भरोसे का घोषणापत्र। जनता क्या कह रही है यह जाने बगैर कहा जा रहा है कि जनता हम पर भरोसा करती है। सरकार व पार्टी कह रही है , पर जनता ने कहीं कहा हो यह रिकॉर्ड में नहीं है। अप्रमाणित भ्रष्टाचार के भारी भरकम आरोपों के बाद भी जनता की भरोसे की सरकार ? प्रमाण देने के प्रयास में कहा कि हमने किसानों का कर्ज दो घंटें में माफ किया, बिजली बिल हाफ किया ,2500 में रास्ता निकाल कर धान खरीदा, तेंदूपत्ता में 4000 दिया ,बोनस भी दिया। बिना मांगें आत्मानंद स्कूल खोले,गांव गौठान की योजना दी , और तो और हमने लोहंडीगुड़ा में किसानों की जमीन भाजपा सरकार ने उद्योगपति को दे दी थी उसे मुक्त करवा कर किसानों को वापस की। यहां तक कि बेकार समझे जाने वाला गोबर को धन में परिवर्तित कर जेब में पैसा डाला। इन कारणों से हमारे घोषणा पर जनता भरोसा करेगी। तर्क में दम तो है। अब यह भी कह दिया कि कर्ज फिर माफ कर देंगे हमारी सरकार फिर बनवा दो। अपील में भी दम है,पहले भी दो घंटे में किया तो था,शायद फिर कर ही देंगें। 16 और भी वायदे इसी दम पर किये हैं कि हम पर जनता भरोसा करेंगी भाजपा पर नहीं करेगी। दोनों दलों के वायदे लोक लुभावन हैं इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है। मामला सिर्फ विश्वास का है। राज्यों के चुनावों में जनता जनार्दन किस पर विश्वास जताती है यह महत्वपूर्ण है। कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र पर या मोदी की गारंटी पर यह भविष्य के गर्भ में है। फैसला मतदानों के रुझानों से समझ में आने लगेगा। अंतिम मोहर तीन दिसम्बर को लग ही जाएगी।

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महापौर ढेबर को रायपुर दक्षिण से टिकट देने की मांग, हजारों की तादात में सड़क पर बैठे समर्थक https://samacharpacheesa.com/?p=8182 Fri, 20 Oct 2023 01:07:22 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8182

छत्तीसगढ़ में चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद से राजनितिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने 86 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। तो वहीँ कांग्रेस ने 83 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है।

वहीँ नामों के ऐलान के बाद से ही दोनों ही पार्टियों में विरोध भी देखने को मिल रहा है, रायपुर दक्षिण से महंत राम सुंदर दास टिकट मिला है, जिसके बाद से महापौर एजाज ढेबर को रायपुर दक्षिण से टिकट नहीं मिलने पर उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है, हजारों की संख्या में समर्थक सुभाष स्टेडियम में एकत्रित हुए है।

उसके बाद समर्थक आकाशवाणी चौक में सड़क पर बैठकर विरोध जता रहे है और महापौर ढेबर को रायपुर दक्षिण से टिकट देने की मांग को लेकर अड़े हुए है।

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चुनौती खड़ी करती भाजपा, सतर्क कांग्रेस https://samacharpacheesa.com/?p=8149 Wed, 11 Oct 2023 06:41:57 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8149 चुनावी प्रचार प्रसार के बीच आचार संहिता अब लागू हो गई।राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में चुनाव तिथियों की घोषणा की औपचारिकता पूरी कर दी है। छतीसगढ़ में 7 व 17 नवंबर को मतदान होगा। 11 नवम्बर से 20 नवम्बर नामांकन भरे जाएंगे। भाजपा ने अब तक दो चरणों में प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। दूसरी सूची वही आई जो लीक हुई थी। इसे लेकर अरुण साव से लेकर छोटे बड़े नेता साफ झूठ बोल रहे थे कि कोई सूची बनी ही नहीं है तो लीक का क्या सवाल ? आखिर बगैर एक शब्द इधर उधर हुए वही की वही लिस्ट फिर से अखबारों में इस तरह छपी मानों कोई नई सूची आ गई हो। दूसरी सूची 64 प्रत्याशियों की निकली जिसमें पूरी ईमानदारी से 23 नए नाम सामने आए हैं। पहली सूची 21 प्रत्याशियों की आई थी उसमें 19 नए चेहरे होने का दावा था। यानी कुल 85 सीटों में 42 नए नामों को जगह दी गई है। इनमें वे कोई भी चेहरे नहीं हैं जिनकी हवा में चर्चा हो रही थी। जिन्हें लोग बड़े प्यार से दूसरी लाइन के नेता कहते थे। उनकी जगह दरी उठाने वाले कार्यकर्ताओं को तवज्जो दी गई है। कहते हैं जीतने वाले प्रत्याशी को टिकट दी गई है। यह कैसे पहचान की गई कि ये लोग जीताऊ प्रत्याशी साबित होंगे ? यह कोई भी समझ नहीं पा रहा है। शायद यही नाराजी सूची लीक होने का कारण भी बनी होगी ,सबको यही आशंका है। लोग कहते हैं कि भाजपा कब से इतनी कमजोर पड़ गई है कि सूची लीक के दोषियों पर कुछ भी कर पाने में अक्षम दिखाई दे रही है।
खैर यह तो एक बात हुई कि अनेक लोग इस सूची से भीतर ही भीतर अब भी उबल रहे है यह उबाल बाहर आ पायेगा या हमेशा की तरह सब शांत जाएगा। यह देखना होगा। दूसरी बात यह भी है कि सूची देख कर कांग्रेस सकते में है जो सोचा था वह नहीं हुआ। 42 नए अनजान चेहरे ने उनके लिए नई तरह की चुनौती खड़ी कर दी है। लगभग सारी सूची में नाम तय होने के बाद फिर से कवायद करनी पड़ेगी कि कौन किसके सामने कमजोर पड़ सकता है ? कौन मजबूत होगा ? कांग्रेस के सामने यह चुनौती तो भाजपा ने खड़ी कर ही दी। अब कांग्रेस कवायद करने में जुट गई है। पहले तो मन बना था कि पितृपक्ष के बाद सूची दी जाए लेकिन वर्तमान स्थिति में एक दो दिन में सूची जारी करने की मजबूरी बन गई है। वह भी संशोधनों के साथ। सुना गया था कि इस बार अपने वर्तमान 71 विधायकों में से 63 विधायकों को पुन: टिकट दिया जाए वही चेहरे रीपीट किये जायें,यह विचार किया गया था। 71 सीटों की गिनती में यह 85 प्रतिशत हो रहा है। यानी मौजूद विधायकों में 85 प्रतिशत को फिर रीपीट किया जाए। अब भाजपा की दूसरी सूची के बाद कुछ फिर से विचार की स्थिति बन गई है। आज मंथन भी शुरू हो गया। लाभ हानि का आंकलन हो रहा है। चुन लिए गए नामों में फेर बदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस की सूची में किसको बदल दिया गया यह खबर तो पता नहीं चल पायेगी। क्योंकि अब तक सूची आंतरिक रूप से बनी हुई थी। अब बाहर आएगी वही सही नाम माने जायेंगें। यह हल्ला नहीं हो सकेगा कि मेरा नाम था काट दिया गया। फिर भी सूची आने के बाद डैमेज कंट्रोल की जरूरत जरूर पड़ेगी,यह तय माना जा रहा है। जहां भाजपा में दूसरी लाइन के नामधारी नेता मायूस हुए हैं , वैसे ही जिन लोगों को टिकट की पूरी आशा बन गई है वे कांग्रेसी क्या रंग दिखाएंगें , यह देखने वाली बात होगी। विरोध दोनों ही दलों में होगा । यह है भी स्वाभाविक प्रक्रिया। लोगों को बड़ी बेसब्री से कांग्रेस की लिस्ट का इंतजार है। यह मान रहे हैं कि 8-9 मौजूदा विधायकों का टिकट कटना तय माना जा रहा था। अब की परिस्तिथि में कितने बदलते हैं या 63 मौजूद विधायक टिकट पा लेंगे। कटती है तो किसकी कटती है। यह जानने लोग उत्सुक हैं। जिन पांच विधानसभाओं की टिकट भाजपा ने रोकी हैं, उनमें जिन लोगों को टिकट का वायदा देकर भाजपा में लाया गया है उनका सपना पूरा होता है या नहीं ? यह देखना भी अभी बाकी है।

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छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त : अरूण साव https://samacharpacheesa.com/?p=8037 Mon, 18 Sep 2023 10:02:05 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8037 रायपुर। प्रदेश की चारों दिशाओं से बीजेपी की परिवर्तन यात्राएं निकल रही हैं। इन परिवर्तन यात्राओं के दौरान सभाओं में भीड़ भी उमड़ रही है। इस भीड़ को देखकर बीजेपी नेता भरपूर गदगद हैं। भीड़ के आधार पर ही कहा जा रहा है कि यह सत्ता परिवर्तन का आगाज है। इसी कड़ी में बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के पहला चरण का आज सोमवार को सातवां दिन है। यात्रा राजनांंदगांव पहुंची है। यहां बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष अरूण साव ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त है। प्रदेश में परिवर्तन चाहती है और जनता को भाजपा से उम्मीदें हैं। भारतीय जनता पार्टी विश्वास दिलाती है कि वह जनता की इन उम्मीदों पर खरा उतरेगी।

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राजनीति चमकाने के लिए सौहार्द्र बिगाड़ रहे https://samacharpacheesa.com/?p=7923 Thu, 31 Aug 2023 06:45:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7923 कांग्रेस और उसके नेता लोकसभा एवं विधानसभाओं के चुनाव आने से पहले अपनी राजनीति चमकाने के लिए समाज को धर्म और जाति के नाम पर बांटने का काम शुरु कर दिया हैं। लेकिन धार्मिक व जातीय आधार पर की जा रही इस तरह की जहर उगलने वाली राजनीति के चलते धार्मिक सौहार्द बिगड़ा रहा है। पार्टी के ही एक बुर्जुग नेता और पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने विदिशा के एक जलसे में शिरकत करते हुए सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले कड़वे बोल बोले हैं। क्या उनका भाषण कांग्रेस की विचारधारा को पोषित करने वाला है या पार्टी की उम्मीदों को पलीता लगाने वाला भी साबित हो सकता है। कुरैशी ने कहा कि ‘हिन्दुस्तान में 22 करोड़ मुसलमान हैं और एक-दो करोड़ मर भी जाएं तो कोई बात नहीं…।Ó यह विडंबना ही है कि ऐसे वक्त पर, जब देश और समाज में सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों लोग सड़कों पर शांति-मार्च निकाल रहे हैं ऐसे वक्त में उनके नेता साम्प्रदायिक सौहार्द एवं सामाजिक ताने-बाने को गहरी चोट पहुंचा रहे हैं। एक तरफ कुरैशी उन्मादी भाषण दे रहे थे, तो दूसरी ओर उसी मध्य प्रदेश के सागर में अपनी चुनावी संभावनाओं को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े बड़े वादे व दावे कर रहे थे। क्या यह कांग्रेस का दोगला चरित्र नहीं है? लगता तो यही है कि कुरैशी कांग्रेस की परम्परा एवं सोच को ही आगे बढ़ा रहे हैं। वरना पार्टी में ऐसी संकीर्ण एवं राष्ट्र-विरोधी सोच पर सख्त पहरेदारी होती तो क्या कुरैशी ऐसा दुस्साहस कर पाते। निश्चित ही पार्टी ही साम्प्रदायिकता एवं जातीयता को बल देती है, तभी एक बुजुर्ग एवं जिम्मेदारी नेता कुरैशी का ‘मुसलमानों ने चूडिय़ां नहीं पहन रखींÓ जैसे बयानों पर पार्टी मौन रह जाती है। ऐसे एक समुदाय विशेष को उकसाने वाले बयान निश्चित ही राजनीतिक प्रेरित होते हैं। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आता जायेगा, समुदायों को भड़काने वाले बयानों में तीव्रता एवं उग्रता देखने को मिलेगी। चुनावी छाया में लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सामाजिक समरसता को धोने की कुचेष्टाएं बढ़-चढ़ कर देखने को मिलेगी। यह पहली बार बार नहीं है, जब अजीज कुरैशी ने कोई आपत्तिजनक बयान दिया है। गवर्नर पद पर रहते हुए भी वह भाषायी मर्यादाओं का उल्लंघन कर चुके हैं। लेकिन इस वक्त उनके बयान से उनकी ही पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। मध्य प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया भले न शुरू हुई हो, मगर दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टियां- भाजपा और कांग्रेस जोर-शोर से प्रचार में जुट गई हैं। ऐसे में, अपने बड़बोलेपन एवं उच्छृंखलता से कुरैशी ने विरोधी दल के हाथों में धार्मिक ध्रुवीकरण का एक मुद्दा तो थमा ही दिया है।

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कांग्रेस के विधायकों के टिकट पर निर्भर नतीजे https://samacharpacheesa.com/?p=7887 Sat, 26 Aug 2023 06:55:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7887 अभी हाल ही में सी वोटर और एबीपी न्यूज की सर्वे रिपोर्ट आई है इसके बाद कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता थोड़े नर्वस हैं और यह कहते नजर आ रहे हैं कि कहीं 2013 वाली स्थिति न हो जाए। 2013 में कांग्रेस की सरकार आते-आते रह गई थी जबकि उस समय तमाम परिस्थितियां कांग्रेस के बिलकुल अनुकूल थी। मतगणना के दौरान एक समय लगने लगा था कि कांग्रेस की सरकार बन ही जायेगी लेकिन अति आत्मविश्वास के कारण कांग्रेस सत्ता में आते आते रह गई। पुराने और जमीनी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि उस समय सर्वे रिपोर्ट को अनदेखा किया गया था। जिन विधायकों के खिलाफ माहौल था और जिनका टिकट काटा जाना चाहिए था उनका टिकट नहीं काटा गया और अंतत: उनके कारण कांग्रेस प्रदेश में पिछड़ गई। बताया जाता है कि उस समय 17 विधायकों के खिलाफ एंटी इनकैंबम्सी की बात सर्वे रिपोर्ट में आई थी और इनके चेहरे बदलने का सुझाव दिया गया था लेकिन तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष इस बात पर अड़ गए थे कि सिटिंग विधायकों की टिकट नहीं कटना चाहिए। नतीजतन तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष समेत कई विधायकों की हार हो गई थी और तमाम अनुकूल परिस्थितियां भी कांग्रेस की सत्ता वापसी नहीं करा पाई थी। फिलहाल 2023 का दृश्य भी ऐसा ही दिख रहा है। प्रदेश में सरकार के खिलाफ कोई माहौल नहीं, गांव से लेकर शहर तक चुनाव को लेकर कोई उत्साह भी नहीं क्योंकि बदलाव की बात होती नहीं दिख रही है। प्रदेश में हो रहे अब तक के तमाम सर्वे रिपोर्ट भी यही बताते हैं कि फिर से कांग्रेस की सरकार आ सकती है लेकिन सीटें कम हो रही है। हालिया एक सर्वे में भी यह कहा गया कि सरकार की वापसी ज्यादा लोग चाहते हैं लेकिन काम से कम 36 विधायकों से नाराजगी है। कांग्रेस के आंतरिक सर्वे में भी 33 विधायकों के परफॉर्मेंस पर सवाल उठाया गया था और उनको क्षेत्र में स्थिति ठीक करने की हिदायत भी दी गई थी। बताया जाता है कि अभी भी 22 विधायक ऐसे हैं जिनपर हार का खतरा है, इसलिए यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि इनकी टिकट काटी जा सकती है। प्रदेश में 23 ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां हर 5 साल के बाद स्थानीय लोगों ने विधायक बदल दिया है। इनमे से 17 विधानसभा क्षेत्र में 2003 से ही यह स्थिति है जबकि 6 विधानसभा क्षेत्र, जिनका निर्माण 2008 में हुआ है उनकी भी यही प्रवृति दिखाई देती है। किसी भी सिटिंग एमएलए का टिकट काटना किसी पार्टी के लिए आसान नहीं होता खासकर यदि वह पार्टी कांग्रेस हो। पार्टी को डर होता है कि कहीं वह बागी न बन जाए या चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी को डैमेज न कर दे। अब कांग्रेस नेतृत्व 20 सिटिंग एमएलए का टिकट काटने का साहस कर पाएगी या नहीं यह तो समय बताएगा।

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अब कांग्रेस जी-20 शिखर सम्मेलन से तकलीफ https://samacharpacheesa.com/?p=7880 Fri, 25 Aug 2023 07:04:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7880 भारत को जबसे जी-20 की अध्यक्षता मिली है तबसे विपक्ष के कुछ नेता बहुत परेशान हैं। खासकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश बहुत ज्यादा तकलीफ में नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर वक्तव्य, हर उपलब्धि, हर फैसले और हर नीति पर कटाक्ष करने से नहीं चूकने वाले जयराम रमेश मोदी विरोध में कभी कभी बहुत आगे निकल जाते हैं। जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर आजादी के अमृत काल को देश ने धूमधाम से मनाया लेकिन जयराम रमेश ने अमृत काल को अमरूद काल बता दिया। भारत को विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने की बात कही गयी तो जयराम रमेश ने कह दिया कि इसमें सरकार को क्या करना है, भारत अपने आप ही तीसरी अर्थव्यवस्था बन जायेगा। देखा जाये तो भारत की हर कामयाबी को कम करके आंकने और भारत की हर उपलब्धि का श्रेय गांधी परिवार को देने के लिए जयराम रमेश इतने आतुर रहते हैं कि उन्होंने कांग्रेस में बड़े से बड़े नेताओं को पीछे छोड़ दिया है। अब जयराम रमेश के निशाने पर जी-20 शिखर सम्मेलन है। शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आने वाले विश्व नेताओं की आवभगत के लिए जो प्रबंध किये जा रहे हैं उससे भारत के आतिथ्य सत्कार का ही गुणगान विश्व भर में होने वाला है। लेकिन जयराम रमेश इस सबसे बहुत चिंतित हैं क्योंकि उन्हें यह अच्छा नहीं लगेगा कि शानदार आयोजन के लिए विश्व नेता मोदी की पीठ थपथपाएं। जयराम रमेश को लग रहा है कि मोदी इस सबका फायदा चुनावों में ले लेंगे। जयराम रमेश को लगता है कि मोदी को चुनावों में जी-20 का फायदा मिला तो वह कहीं फिर से प्रधानमंत्री ना बन जायें। दरअसल जयराम रमेश के इस पूरे डर के पीछे कारण यह है कि उनका खुद का कॅरियर दांव पर लगा हुआ है। जयराम रमेश जानते हैं कि यदि 2024 में कांग्रेस फिर चुनाव हारी तो सबसे पहले पार्टी के नेता उन पर ही गाज गिरायेंगे इसलिए वह हर रोज कोई ना कोई मुद्दा निकाल कर लाते हैं और प्रयास करते हैं कि इससे मोदी विरोध को हवा दी जा सके। जहां तक जी-20 के आयोजन से चुनावी लाभ होने की बात है तो जयराम रमेश को अपनी चिंता दूर करनी चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि जी-20 के विभिन्न समूहों की बैठकें देशभर में आयोजित की गयीं। जिस भी शहर में यह बैठकें हुईं वहां की राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने मेहमानों की आवभगत में पलक-पांवड़े बिछा दिये और बैठक को हर मायने में सफल बनाया। जी-20 समूहों की बैठकों को सफल बनाने में कांग्रेस शासित राज्य भी पीछे नहीं रहे। इसलिए सवाल उठता है कि बैठक के सफल होने का फायदा वहां सत्ता में मौजूद पार्टी को मिला या देश को? कश्मीर में जी-20 पर्यटन समूह की सफल बैठक हुई। इसका फायदा कश्मीर को मिला या प्रधानमंत्री मोदी को?

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सचिन पायलट कांग्रेस वर्किंग कमेटी में https://samacharpacheesa.com/?p=7856 Tue, 22 Aug 2023 06:56:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7856 जुलाई 2020 में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ सचिन पायलट को गहलोत सरकार के खिलाफ उनके बगावती तेवरों और मानेसर में 19 विधायकों संग कैंप करने के चलते उपमुख्यमंत्री पद के साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया था। अब तीन साल बाद चुनाव से पहले सुलह हुई और पायलट को संगठन में फिर से पद देते हुए उनका सियासी कद बढ़ा दिया गया है। वर्किंग कमेटी मेम्बर के तौर पर पायलट अब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं यानी टॉप लीडरशिप के साथ बैठेंगे। सचिन पायलट के साथ ही वर्किंग कमेटी कोर टीम में राजस्थान से पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह और राज्य के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र से आने वाले जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय को भी जगह मिली है। राजस्थान से ही आने वाले अभिषेक मनु सिंह सिंघवी, मोहन प्रकाश, हरीश चौधरी, पवन खेड़ा भी वर्किंग कमेटी में शामिल हैं। ये सात सदस्य राजस्थान से हैं। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सुखजिंदर सिंह रंधावा और चुनाव स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन गौरव गोगोई भी सीडब्ल्यूसी में शामिल हैं। गहलोत और पायलट में सुलह कराने वाले राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी ष्टङ्खष्ट सदस्य हैं। वेणुगोपाल राजस्थान से राज्यसभा सांसद भी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक भी राजस्थान से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं। राजस्थान के पूर्व प्रदेश प्रभारी अजय माकन और अविनाश पांडे भी इसमें शामिल हैं। आनंद कुमार भी राजस्थान से पूर्व राज्यसभा सांसद रहे हैं। कुमारी शैलजा पिछले विधानसभा चुनाव (2018) में टिकट तय करने के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष थीं। इससे पहले वे राजस्थान प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। एक बात समझनी होगी कि सचिन पायलट पर कांग्रेस हाईकमान ने फिर से भरोसा जताया है और उन्हें उस वर्किंग कमेटी का सदस्य बनाया है, जहां कांग्रेस पार्टी के सारे टॉप लेवल पर निर्णय होते हैं और इसमें पार्टी स्ट्रेटजी और प्लानिंग की सीक्रेसी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। इससे राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भी उनका दखल बढ़ेगा। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी के अलावा मल्लिकार्जुन खरगे की भूमिका उनकी इस नियुक्ति में अहम रही है। राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव में सीएम अशोक गहलोत के साथ ही सचिन पायलट भी स्टार प्रचारक के रूप में दौरे करेंगे। पार्टी ने स्ट्रेटजी के तहत सचिन पायलट को ष्टङ्खष्ट में लिया है। इसके जरिए पायलट समर्थक नेताओं, उनके फॉलोअर्स युवाओं और गुर्जर समाज में एक सियासी मैसेज देने की कोशिश की गई है। राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत के फेस पर और उनकी योजनाओं पर ही चुनाव हो रहे हैं, लेकिन चुनाव में जीतने के लिए सचिन पायलट का साथ होना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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सरकार नें बदला नेहरू मेमोरियल का नाम https://samacharpacheesa.com/?p=7834 Thu, 17 Aug 2023 07:07:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7834 देश में स्थानों, स्मारकों और भवनों के नाम पर एक बार फिर सियासत शुरू हो गई है। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल का नाम बदल दिया है। अब नेहरू मेमोरियल को पीएम मेमोरियल के नाम से जाना जाएगा। नाम बदलने पर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी पार्टी ने मोदी सरकार पर नेहरू की विरासत को नष्ट करने का आरोप लगाया है। एडविन लुटियंस की इंपीरियल कैपिटल का हिस्सा रहा तीन मूर्ति भवन अंग्रेजी शासन में भारत के कमांडर इन चीफ का आधिकारिक आवास था। ब्रिटिश भारत के अंतिम कमांडर इन चीफ के जाने के बाद 1948 में तीन मूर्ति भवन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का आधिकारिक आवास बन गया। पंडित नेहरू 16 साल तक इस घर में रहे और यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद इस तीन मूर्ति भवन को पंडित नेहरू की याद में उन्हें समर्पित कर दिया गया और इसे पंडित नेहरू म्यूजियम एंड मेमोरियल के नाम से जाना जाने लगा। अब केंद्र सरकार ने इसका नाम नेहरू मेमोरियल से बदलकर पीएम म्यूजियम एंड सोसाइटी कर दिया है। वर्तमान में यहां व्याख्यान और सेमिनार नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं और विद्वानों के विचार-विमर्श प्रकाशित होते हैं। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र के नेहरू मेमोरियल के नाम बदलने वाले फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव और पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने कहा, एक प्रतिष्ठित संस्थान को एक नया नाम मिला है। विश्वभर में प्रसिद्ध नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी अब प्राइम मिनिस्टर्स मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के नाम से जाना जाएगा। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा नेहरू और उनकी विरासत को नकारना, बदनाम और नष्ट करना है। वह एन शब्द हटाकर उसके स्थान पर पी शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। जयराम ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और उदारवादी नींव रखने में नेहरू की योगदान को हम नहीं भूलने देंगे। नेहरू ने देश की आजादी के लिए अहम योगदान दिया है। तमाम आरोपों के बीच पीएमएमएल के कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश का बयान आया है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी को महसूस हुआ कि देश में पीएम का एक संग्रहालय होना चाहिए। फिर सवाल उठा कि यह कहां बनाया जा सकता है। इस पर फैसला लिया गया कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सही जगह है। साल 2016 में पीएम मोदी ने एक प्रस्ताव रखा था कि तीन मूर्ति परिसर में देश के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। उसी साल 25 नवंबर को हृरूरूरु की 162वीं बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बीते साल 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री संग्रहालय को जनता के लिए खोल दिया गया था।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा https://samacharpacheesa.com/?p=7777 Thu, 10 Aug 2023 09:23:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7777 रायपुर। छत्तीसगढ़ से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को भेज दिया है। उन्होंने 9 अगस्त को ही अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और पीसीसी चीफ दीपक बैज को भेजा दिया था।
एआईसीसी को भेजे इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि ”मैं कांग्रेस पार्टी का क्रियाशील सदस्य हूं। 5 वर्ष पूर्व तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस में वापस आकर अपने अनुभव से पार्टी को मजबूती प्रदान करने का हमेशा प्रयास किया, लेकिन प्रदेश नेतृत्व के असहयोग पूर्ण रवैये के कारण मुझे निराशा हुई। प्रदेश सरकार राज्य में आदिवासी समाज के लिए बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के द्वारा प्रदान संवैधानिक अधिकारों के विपरीत काम कर रही है।
उन्होंने लिखा कि कांग्रेस सरकार ने पेसा कानून 1996 में आदिवासी समाज को जल, जंगल, जमीन पर ग्रामसभा के अधिकारों को समाप्त कर दिया है। इस तरह से ये आदिवासी विरोधी सरकार है, इसलिए मैं विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे रहा हूं। केन्द्रीय नेतृत्व से मुझे हमेशा मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिलता रहा है, उसके लिए पार्टी का आभार व्यक्त करता हूं।
अरविंद नेताम सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक हैं। वो इंदिरा गांधी और नरसिम्हा राव की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वो इंदिरा गांधी की सरकार में कृषि राज्य मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं। पहली बार 1996 में उन्हें कांग्रेस से निकाला गया था। फिलहाल, वो रायपुर में हैं।

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