कार्रवाई – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 26 Sep 2023 06:57:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 क्रिया की प्रतिक्रिया होगी https://samacharpacheesa.com/?p=8083 Tue, 26 Sep 2023 06:57:30 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8083 कभी किसी आयोजन में किसी व्यक्ति द्वारा भारत माता की जय बोलने मात्र से बुरी तरह उखड़ जाने वाले बसपा सांसद दानिश अली इन दिनों फिर चर्चा में हैं। पिछले दिनों संसद में भाजपा के सांसद रमेश बिधूड़ी ने उनके विरुद्ध कुछ अपशब्द कह दिए। जैसे आतंकवादी, उग्रवादी आदि-आदि । उनके ये शब्द संसद की कार्रवाई से विलोपित हो गए हैं और उनको चेतावनी भी दी गई है कि दोबारा ऐसी गलती न करें। बेशक भाजपा सांसद को संसद की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और ऐसे कटु शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, लेकिन प्रश्न यह भी उठना है कि आखिर भाजपा सांसद बोलते-बोलते ऐसे उत्तेजित क्यों हो गए? तो मुझे जैसी जानकारी मिली है, उसके अनुसार जब भाजपा सांसद अपना भाषण दे रहे थे और चंद्रयान की सफलता के लिए वैज्ञानिकों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की विशेष तारीफ कर रहे थे, तब उनके पीछे बैठे हुए बसपा सांसद दानिश प्रधानमंत्री मोदी को नीच कह रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि नीच को क्या हम नीच नहीं कहेंगे। अगर यह बात सत्य है तो दुर्भाग्यजनक है । इस कृत्य के लिए बसपा सांसद पर भी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। मैं आश्चर्यचकित हो जाता हूं यह सोचकर कि कैसे हमारे देश के कुछ घटिया नेता प्रधानमंत्री के विरुद्ध आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं । कोई उन्हें गंदी नाली का कीड़ा कहता है, कोई कहता है कुत्ते की मौत मरेगा। बर्खास्त होने के बाद दोबारा बहाल हुए सांसद राहुल गांधी ने तो अपने एक भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साफ-साफ चोर ही कह दिया था। ऐसे तो जाने कितने नेता हैं, जिन्होंने मोदी से चिढ़ कर उनको भयंकर गालियां दी हैं। दानिश ने मोदी जी को नीच कहा तो भी बिधूड़ी इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए और उत्तेजित होकर संसद में बसपा सांसद के खिलाफ अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर दिया। बस बसपा सांसद को मौका मिल गया कि मेरा अपमान हो गया। मगर यह सांसद भूल गया कि उसने कभी भारत माता का भी अपमान किया था। आखिर क्या कारण था कि वह भारत माता की जय के नारे को सुनकर उत्तेजित हो गया और कहने लगा कि सरकारी आयोजन में भारतीय जनता पार्टी का नारा नहीं चलेगा । हद है। भारत माता की जय भाजपा का नारा नहीं है। यह से राष्ट्र के कोटि-कोटि लोगों का नारा है। और कोई शख्स अगर भारत माता की जयबसे परहेज करता है, इसका मतलब साफ है कि वह इस देश से प्यार नहीं करता । इस मिट्टी से उसका कोई लगाव नहीं है। अगर उसे हम देशद्रोही भी कहें तो मेरे ख्याल से यह गलत बात नहीं होगी। मैंने वह वीडियो देखा है, जिसमें एक सरकारी आयोजन में जब मंच पर खड़े सरदार जी ने भारत माता की जय का नारा लगाया, तब नीचे खड़े बसपा सांसद गुस्से में खड़े हो गए और कहने लगे कि यह भारतीय जनता पार्टी का कार्यक्रम नहीं है। यहां ऐसे नारे नहीं लगा सकते। गोया सरकारी आयोजन में भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद के नारे लग रहे थे। वहां भारत माता की जय का नारा लगाया गया था और यह नारा सरकारी या गैर सरकारी आयोजन में भी लग सकता है। कहीं भी,कभी भी लगाया जा सकता है। अगर किसी को इस नारे से दिक्कत है तो इसका मतलब साफ है कि वह इस देश का प्रेमी नहीं है। मैं आश्चर्य करता हूं कि कैसे ऐसे देशविरोधी भी सांसद बन जाते हैं। बेशक भाजपा सांसद को संसद के भीतर बसपा सांसद को उग्रवादी या आतंकवादी नहीं कहना चाहिए था। इसके लिए उन्हें खेद भी व्यक्त करना चाहिए। लेकिन उनकी उत्तेजना के कारण को भी हमें नहीं भूलना चाहिए कि बसपा संसद ने प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था।

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3 ग्राम पंचायत सचिवों पर कार्रवाई, सूचना आयोग ने ठोका 25-25 हजार रुपए का जुर्माना https://samacharpacheesa.com/?p=7713 Sat, 05 Aug 2023 10:50:51 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7713 रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने ग्राम पंचायतों के तीन सचिवों पर 25-25 हजार रुपय का जुर्माना लगाया है।आवेदकों को समय पर सूचना नहीं देने और कामों पर लापरवाही बरतने के कारण कार्रवाई की है। सूचना के अधिकार नियम का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया गया है।
राज्य सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने केशकाल जनपद पंचायत(जपं) के डुंडाबेडमा ग्राम पंचायत के सचिव दयानंद भारद्वाज, जपं बलौदा के ग्राम पंचायत करमा के सचिव सीलसर्जन खैरवार और जपं कोरबा के ग्राम पंचायत रजगामार के सचिव और तत्कालीन जन सूचना अधिकारी पर यह जुर्माना लगाया है। इसके बाद उन्होंने संबंधित जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को जुर्माने की राशि वसूल करने को कहा है। इस राशि को शासन के खाते में जमा को कहा है। आयोग को पालन प्रतिवेदन भेजने के भी निर्देश दिए हैं।
25-25 हजार का लगा जुर्माना
बता दें कि डुंडाबेडमा में आवेदक ने तत्कालीन जन सूचना अधिकारी से ग्राम पंचायत से संबंधित आय-व्यय और कैशबुक की फोटो कॉपी मांगा था। जन सूचना अधिकारी के देर से देने पर और आयोग के नोटिस का जवाब भी नहीं दिया था। दूसरी ओर करमा में आवेदक ने वार्षिक लेखा रिपोर्ट मांगी थी। इससे जन सूचना अधिकारी ने सूचना का अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में लापरवाही की है। वहीं रजगामार में आवेदक ने अनुमोदित वार्षिक लेखा की रिपोर्ट की कॉपी मांगी गई। अधिकारी ने 30 दिन में जानकारी नहीं दी। इसके साथ ही प्रथम अपीलीय अधिकारी के भी कोई औपचारिक आदेश पारित नहीं किया। इसलिए राज्य सूचना आयुक्त ने जनसूचना अधिकारियों और ग्राम पंचायत के सचिवों पर 25-25 हजार रुपए की जुर्माना लगाया है।

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घोटाले के खिलाफ कार्रवाई पर उठते सवाल https://samacharpacheesa.com/?p=6402 Wed, 22 Feb 2023 08:13:04 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6402 भारतीय जनता पार्टी बार-बार प्रदेश की भूपेश सरकार पर आरोप लगाती है कि छत्तीसगढ़ को ईडी और सीडी मामले ने बदनाम कर दिया है। पिछले लगभग 3 वर्षों से प्रदेश के बड़े अधिकारियों, कारोबारियों और नेताओं पर छापा मारने का एक लंबा सिलसिला है। इसकी शुरुआत 2020 में हुई थी जब प्रदेश के उच्च अधिकारियों के घर पर आयकर विभाग ने दबिश देकर सर्वे किया था। इस कार्रवाई में कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल सहित बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त कर विभाग अपने साथ ले गया। उसके बाद प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एन्ट्री हुई। अभी जब अखिल भारतीय कांग्रेस का बड़ा अधिवेशन रायपुर में होने वाला है उसके ठीक पहले ईडी ने प्रदेश के 12 कांग्रेस नेताओं के ठिकानों पर छापा मारा है। इस घटना ने पूरे देश में एक राजनीतिक सनसनी पैदा कर दी है। दिल्ली से लेकर रायपुर तक कांग्रेस पार्टी ईडी की कार्यवाही को राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी के महाधिवेशन में व्यवधान उत्पन्न करने का षडय़ंत्र बताया। यह बात सही है जब किसी राष्ट्रीय पार्टी का एक अति महत्वपूर्ण महाधिवेशन होने जा रहा हो जिसमें पूरे देश से दिग्गज कांग्रेसी नेता आ रहे हों उसके ठीक पहले इस कार्यक्रम की तैयारी में जुटे नेताओं के ठिकानों पर छापा मारना समय की दृष्टि से सही नहीं है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अगर राजनीतिक निर्देश के आधार पर ईडी कार्रवाई कर रही है तो कम से कम किसी राजनीतिक पार्टी के कार्यक्रम के पहले छापेमारी नहीं की जाती। इससे ऐसा लगता है कि छापेमारी का निर्णय ईडी के अधिकारी ले रहे है जो राजनीति के महत्व को नहीं समझते। अगर ईडी के पास पुख्ता सबूत और जानकारियां है तो छापा मारने के लिए कांग्रेस पार्टी के महाधिवेशन के संपन्न हो जाने की प्रतीक्षा भी कर सकते थे। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस पार्टी भी आक्रमक मूड में आ गई है। पहले तो जिन नेताओं के ठिकानों पर छापेमारी की गई वहां कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंच कर विरोध जताने लगे तो दूसरी ओर मंगलवार को ईडी के कार्यालय का कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने घेराव किया। इधर मुख्यमंत्री सहित पार्टी के नेता ईडी की कार्रवाई के खिलाफ बयान भी दे रहे है। मुख्यमंत्री सवाल उठा रहे है कि ईडी की कार्यवाही कांग्रेस पार्टी और गैर भाजपाई दलों के नेताओं के खिलाफ ही क्यों हो रही है। उन्होंने भाजपा के नेताओं की काली कमाई की ओर भी उंगली उठाई है जिसके खिलाफ ईडी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। वैसे इस बात में दम तो है क्योंकि देशभर के भाजपा के नेताओं ने भी जब मौका मिला तो मोटी कमाई की है। लेकिन आंकड़े के मुताबिक पिछले 8 वर्षों में ईडी ने 5 हजार से अधिक छापामार की है जिसमें से 90 प्रतिशत गैर भाजपाई दल के नेता है। लेकिन प्रदेश में ईडी की कार्रवाई के बाद एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी और कारोबारी गिरफ्तार है और उनके खिलाफ में कोर्ट में चालान भी प्रस्तुत किया जा चुका है। इन दस्तावेजों में ईडी ने बहुत स्पष्टतौर पर अधिकारियों, कारोबारियों और नेताओं के बीच कोयले के कारोबार में कथित अवैध लेनदेन का साक्ष्य सहित विवरण किया है। इसी आधार पर गिरफ्तार किए गए अधिकारियों को कोर्ट से जमानत नहीं मिल रही है। इसका मतलब है कि कोयले के कारोबार में सैकड़ों करोड़ रुपए का अवैध लेनदेन तो हुआ है। अब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हों तो भ्रष्टाचार पर नकेल कैसे डाल सकेंगे? इसका मतलब है कि ईडी की कार्रवाई सही है और इस कार्रवाई में 540 करोड़ रुपए के घोटाले को भी कोई झूठला नहीं रहा है। बात केवल छापे के समय और चिन्हित राजनीतिक पार्टी और नेताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे है। ईडी की जांच अब उस स्तर तक पहुंच चुकी है जब कोयला सहित शराब और अन्य कारोबार में हुई गड़बडिय़ों का खुलासा होगा और कई अधिकारी, कारोबारी और प्रमुख नेता जांच के लपेटे में आएंगे। यह तो स्पष्ट हो गया है कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार और ईडी की कार्रवाई प्रमुख मुद्दा बनने जा रहा है। इसके साथ राजनीतिक कटुता भी बढ़ रही है जो बयान की मर्यादाओं को लांघ रही है।

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