केंद्र – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Mon, 18 Sep 2023 09:58:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 यूपीए से मोदी सरकार ने तीन गुना ज्यादा छत्तीसगढ़ को मनरेगा के तहत दिए फंड https://samacharpacheesa.com/?p=8034 Mon, 18 Sep 2023 09:58:17 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8034 रायपुर। केंद्र की मोदी सरकार दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगारपरक योजना मनरेगा पर पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल की तुलना में छत्तीसगढ़ को हर साल ज्यादा फंड दे रही है, जिससे रोजगार भी पहले से ज्यादा मिल रहा है। प्रदेश के कांग्रेस नेता केंद्र सरकार पर छत्तीसगढ़ के साथ भेदभाव करने और मनरेगा की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हैं। जबकि आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ को यूपीए सरकार की तुलना में मोदी गर्वमेंट से तीन गुना ज्यादा फंड दिए।
वर्ष 2004-05 में जब केंद्र में यूपीए यानि मनमोहन सिंह की सरकार थीं। इस वक्त 2007-08 में छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार थी, तब केंद्र से छत्तीसगढ़ को मनरेगा के तहत महज 1161 करोड़ रुपए मिले थे। एक साल बाद 2008-09 में केंद्र ने छत्तीसगढ़ को इस योजना के लिए ज्यादा फंड दिए, लेकिन अगले साल इसकी धनराशि आधी कर दी गई और 2009-10 में महज 814 करोड़ रुपए मिले। लेकिन 2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आ गई। फिर मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ में मनरेगा का बजट बढ़ाना शुरू कर दिया, जिससे रोजगार भी बढऩा शुरू हुआ और प्रदेश से पलायन भी कम हुए।
अब तीन गुना ज्यादा मिल रहे पैसे : आंकड़े बता दें कि छत्तीसगढ़ की सत्ता में बीजेपी हो या कांग्रेस केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद लगातार इस योजना की फंडिंग में बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ को 1505.70 करोड़ रुपए दिए थे। जबकि 2021-22 में 4031. 22 करोड़ रुपए दिए। यह योजना गरीबों के लिए मददगार साबित हो रही है। गांव में ही रोजगार मिलना गरीब मजदूरों को संजीवनी मिलना जैसा है। बता दें कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना देश भर के ग्रामीण परिवार को हर वित्तीय वर्ष में 100 दिनों का वेतन आधारित रोजगार प्रदान करती है। छत्तीसगढ़ के मनरेगा मजदूरी को 221 रुपए की दर से वर्तमान में भुगतान हो रहा है।
यूपीए और मोदी सरकार द्वारा छग को मनरेगा के तहत जारी फंड
वर्ष जारी फंड (करोड़ रुपए)
2007-2008 1161
2008-2009 1632
2009-10 814
2010-11 …..
2011-12 1638
2012-13 ……..
2013-14 1446
2014-15 1505.70
2015-16 1063.41
2016-17 2231.93
2017-18 2898.85
2018-19 3082.93
2019-20 2792.40
2020-21 4144.19
2021-22 4031.22

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फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य की चर्चा https://samacharpacheesa.com/?p=6169 Thu, 09 Feb 2023 06:02:21 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6169 प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए यूपीए के 9 साल और मोदी सरकार के 9 साल के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य की बढ़ोतरी की तुलना की। उन्होंने अपने ट्वीट में बताया कि यूपीए के 9 साल की सरकार में एमएसपी 134 प्रतिशत बढ़ा। जबकि मोदी सरकार के 9 साल में यह बढ़ोतरी मात्र 55 फीसदी है। वैसे तो आर्थिक विषयों को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। लेकिन पूरी दुनिया में आर्थिक विचारधारा के नाम पर ही राजनीति चल रही है। कई बार ऐसे आर्थिक विषयों पर भी राजनेता अपनी पीठ थपथपाते है जिनसे बड़ी संख्या में गरीबों का कोई भला नहीं होता लेकिन देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाती है। यह बात सही है कि मनमोहन सिंह सरकार के समय फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी। अभी प्रदेश सरकार किसानों के धान को 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है। इसका मतलब है केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य से 600 रुपए अधिक का मूल्य किसानों को मिल रहा है। लेकिन डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने जो न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया क्या उससे किसानों की समस्या समाप्त हो गई? अगर ऐसा होता तो उसी साल में देश के हजारों किसान आत्महत्या क्यों करते? दरअसल हमारे देश में सभी किसानों को एक परिभाषा से आंकलन करते है जबकि देश हो या छत्तीसगढ़ 60 फीसदी किसान ऐसे है जिनका औसत खेत का रकबा एकड़ के करीब है। इस एकड़ के रकबे में फसल उत्पादन करने की अपनी सीमा है। ऐसे में समर्थन मूल्य कितना भी बढ़ा लें छोटे किसानों की गरीबी दूर नहीं होने वाली। न्यूनतम समर्थन मूल्य के नाम पर अब तक की सरकारों ने जो किया है उससे बड़े किसानों को ही फायदा मिला है। छत्तीसगढ़ में भी राजीव गांधी न्याय योजना के तहत 9 हजार रुपए प्रति एकड़ सरकार दे रही है उससे 20-30 एकड़ से अधिक के किसानों को तो एक मुश्त फायदा हो रहा है। एक-दो एकड़ वाले किसान को इसमें कुछ मिलता नहीं और जो मिलता है वह फसल का मूल्य बढऩे के फलस्वरुप कृषि लागत में बढ़ोतरी होती है उसमें बराबर हो जाता है। अर्थशास्त्र का नियम है जब आप एक आवश्यक वस्तु का मूल्य बढ़ाएंगे तो अन्य वस्तुओं का मूल्य भी बढ़ जाता है। ऐसा होने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का लाभ महंगाई के कारण छोटे किसानों को नहीं मिलता। ऐसा ही डॉ मनमोहन सिंह की सरकार के समय हुआ। समर्थन मूल्य तो बढ़ा लेकिन बीज, खाद, कीटनाशक सहित साबुन, तेल, दाल, शक्कर की कीमत बढऩे से किसानों के पास कुछ बचा नहीं। राजनीतिक नारा देना अलग बात है और किसानों का कल्याण करना इससे अलग है।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले चिदंबरम, केंद्र की कलाई पर स्वागत योग्य तमाचा https://samacharpacheesa.com/?p=5590 Mon, 02 Jan 2023 10:29:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5590  नईदिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी के फैसले की बुद्धिमत्ता को बरकरार नहीं रखा है और न ही बहुमत ने यह निष्कर्ष निकाला है कि घोषित उद्देश्यों को प्राप्त किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 4:1 के फैसले में केंद्र के 2016 के विमुद्रीकरण के कदम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया और कहा कि 500 ​​रुपये और 1000 रुपये के मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों के विमुद्रीकरण की कवायद को आनुपातिकता के आधार पर नहीं माना जा सकता है।
चिदंबरम ने एक ट्वीट में कहा कि हालांकि, यह इंगित करना आवश्यक है कि बहुमत ने निर्णय के ज्ञान को बरकरार नहीं रखा है और न ही बहुमत ने यह निष्कर्ष निकाला है कि घोषित उद्देश्यों को प्राप्त किया गया था। वास्तव में, बहुमत ने स्पष्ट कदम उठाए हैं। सवाल है कि क्या उद्देश्यों को हासिल किया गया था। एक बार माननीय उच्चतम न्यायालय ने कानून घोषित कर दिया तो हम इसे स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं।” इस मामले में दो अलग-अलग निर्णय थे, जो जस्टिस बीआर गवई और वी नागरत्ना द्वारा सुनाए गए थे।
जस्टिस बीवी नागरत्ना की राय बाकी जजों से अलग रही। उन्होंने नोटबंदी के फैसले को गलत और गैरकानूनी बताते हुए कहा कि इसके लिए कानून बनना चाहिए था। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने नोटबंदी को “गैरकानूनी” कहा और कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय बोर्ड को स्वतंत्र रूप से नोटबंदी की सिफारिश करनी चाहिए थी। न्यायाधीश ने कहा कि यह सरकार की सलाह से नहीं किया जाना चाहिए था।

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राज्यों को केंद्र की नई कोविड एडवाइजरी https://samacharpacheesa.com/?p=5431 Sat, 24 Dec 2022 09:15:10 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5431 दिल्ली। चीन में एक ही दिन में रिकॉर्ड 3.7 करोड़ मामले सामने आने के बाद भारत भी फुल अलर्ट मोड पर आ गया है। तमाम एहतियाती कदम पहले से ही उठाए जाने लगे हैं वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से लगातार एडवाइजरी भी जारी की जा रही है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों को छह-सूत्रीय कोविड परामर्श जारी किया है। केंद्र ने भविष्य में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए राज्यों को कोविड गाइडलाइंस जारी की। कहा गया है कि भले ही देश में कोविड के मामले कम हैं और अभी तक बढ़ नहीं रहे हैं, लेकिन भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए, इन चिकित्सा बुनियादी ढांचे का संचालन और रखरखाव अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से अनुरोध किया कि वे सभी संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दें कि पीएसए संयंत्रों को पूरी तरह कार्यात्मक रखा जाए और उनकी जांच के लिए नियमित मॉक ड्रिल की जा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) की उपलब्धता और उनकी रिफिलिंग के लिए एक निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित की जानी चाहिए, स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया।
केंद्र द्वारा राज्यों को जारी किए गए अन्य दिशानिर्देश बैकअप स्टॉक के साथ-साथ ऑक्सीजन सिलेंडर की पर्याप्त सूची सुनिश्चित करने और मजबूत रिफिलिंग सिस्टम को बनाए रखने और वेंटिलेटर, बीआईपीएपी और एसपीओ2 सिस्टम जैसे कार्यात्मक जीवन समर्थन उपकरणों की उपलब्धता के साथ-साथ उनके उपभोग्य सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हैं।

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