केंद्र सरकार – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 02 Sep 2023 07:24:01 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 एक देश-एक चुनाव के लिए बदलाव https://samacharpacheesa.com/?p=7939 Sat, 02 Sep 2023 07:24:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7939 केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार इस विशेष सत्र में एक देश एक चुनाव पर विधेयक ला सकती है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक देश एक चुनाव के अपने विचार को आगे बढ़ाया था। तब से अब तक कई मौकों पर भाजपा की ओर एक देश एक चुनाव की बात की जाती रही है। ये विचार इस पर आधारित है कि देश में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों। अभी लोकसभा यानी आम चुनाव और विधानसभा चुनाव पांच साल के अंतराल में होते हैं। इसकी व्यवस्था भारतीय संविधान में की गई है। अलग-अलग राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग समय पर पूरा होता है, उसी के हिसाब से उस राज्य में विधानसभा चुनाव होते हैं। हालांकि, कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ होते हैं। इनमें अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम जैसे राज्य शामिल हैं। वहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम जैसे राज्यों के चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव से ऐन पहले होंगे। दरअसल, एक देश एक चुनाव की बहस 2018 में विधि आयोग के एक मसौदा रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी। उस रिपोर्ट में आर्थिक वजहों को गिनाया गया था। आयोग का कहना था कि 2014 में लोकसभा चुनावों का खर्च और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों का खर्च लगभग समान रहा है। वहीं, साथ-साथ चुनाव होने पर यह खर्च 50:50 के अनुपात में बंट जाएगा। सरकार को सौंपी अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में विधि आयोग का कहना था कि साल 1967 के बाद एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया बाधित हो गई। आयोग का कहना था कि आजादी के शुरुआती सालों में देश में एक पार्टी का राज था और क्षेत्रीय दल कमजोर थे। धीरे-धीरे अन्य दल मजबूत हुए कई राज्यों की सत्ता में आए। वहीं, संविधान की धारा 356 के प्रयोग ने भी एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया को बाधित किया। अब देश की राजनीति में बदलाव आ चुका है। कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों की संख्या काफी बढ़ी है। वहीं, कई राज्यों में इनकी सरकार भी है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि 2019 में एक साथ चुनाव कराते हैं, तो तकरीबन 10 लाख पोलिंग बूथ बनाने होंगे और तकरीबन 13 लाख बैलेट यूनिट्स, 9.4 लाख कंट्रोल यूनिट्स और तकरीबन 12.3 लाख वीवीपैट मशीनों की जरूरत होगी। एक इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन की कीमत 33 हजार 200 रुपए पड़ती है। चुनाव आयोग का कहना था कि साथ चुनाव होते हैं तो अकेले ईवीएम पर ही 4 हजार 555 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर बरसी आप , राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग https://samacharpacheesa.com/?p=7531 Tue, 25 Jul 2023 08:46:59 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7531 रायपुर। मणिपुर की घटना को लेकर छत्तीसगढ़ आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को रायपुर में नलघर चौक के पास विरोध प्रदर्शन किया। इसमें केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इसमें शामिल होने के लिए प्रदेशभर से आप पदाधिकारी-कार्यकर्ता बड़ी संख्या में रायपुर पहुंचे। मणिपुर में हुई अमानवीय घटना का विरोध किया।
आप प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की गई। वहीं राष्ट्रपति से मणिपुर की क्चछ्वक्क सरकार को बर्खास्त करने की भी मांग की गई।
दूसरी ओर मणिपुर मामले में आप के संगठन महामंत्री और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि रूशस्रद्ब जी के पास फ्रांस, यूएसए समेत पूरी दुनिया घूमने का समय है, लेकिन मणिपुर में हो रही हिंसा पर कोई एक्शन लेने का समय नहीं है। मोदी अगर मजबूत नेता हैं तो इस तरह से छुप क्यों रहे हैं? सदन में आकर बयान दे दें, वरना पूरे विपक्ष का विरोध चलते रहेगा।

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केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रदेश में हाल बुरा https://samacharpacheesa.com/?p=6296 Thu, 16 Feb 2023 06:55:58 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6296 केंद्र में भाजपा की सरकार ने और राज्य में कांग्रेस पार्टी की, दोनों सरकारों को बनाने में जनता के मतों का योगदान है। लोकसभा हो या विधानसभा जनता अपनी सरकार को देश-प्रदेश के विकास और जनता के कल्याण करने के लिए चुनती है। प्रदेश में भूपेश बघेल की सरकार ने पिछले 4 वर्षों में गांव, गरीब, किसान के लिए अनेक योजनाएं संचालित की है। इसी प्रकार केंद्र सरकार भी राज्यों के लिए अनेक योजनाएं बनाती है जिसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य की होती है। ज्यादातर केंद्र सरकार की योजनाओं में जो खर्च होता है उसका बड़ा हिस्सा केंद्र की ओर से मिलता है और राज्य को भी एक हिस्सा का योगदान करना पड़ता है। नरेन्द्र मोदी की सरकार का लक्ष्य है आगामी कुछ वर्षों में देश के हर व्यक्ति का अपना घर हो और उसके घर तक नल की पाइप लाईन बिछ जाए जिससे उसे पानी मिल सके। प्रधानमंत्री ग्रामीण एवं शहरी आवास योजना और जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार ने जो लक्ष्य निर्धारित किए है उसे पाने में छत्तीसगढ़ प्रदेश बहुत पीछे नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर पिछले 2 वर्षों से विधानसभा के भीतर और बाहर प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। अभी प्रदेश में सभी विधायकों के निवास को घेरने का अभियान चल रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार की बनी है तब से प्रधानमंत्री आवास योजना का काम ठप्प पड़ा है। भाजपा के शासनकाल में 2016-17 से लेकर 2018-19 तक साढ़े सात लाख से अधिक आवास का निर्माण किया गया और लोगों को मिल भी गया। 2020-21 में केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए डेढ़ लाख आवास स्वीकृत किए थे जो अभी तक बन नहीं पाए है, इसके बाद के 2 साल तक प्रदेश सरकार के द्वारा निर्धारित हिस्सा जमा नहीं करने पर कोई आवास निर्माण स्वीकृत नहीं किया गया है। भाजपा का आरोप है कि प्रदेश में 16 लाख आवास का निर्माण भूपेश सरकार की लापरवाही के कारण नहीं हो सका है। यही हाल जल जीवन मिशन का भी है। जब से मिशन शुरु हुआ है उसके बाद से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने इस मिशन को लेकर केवल गड़बडिय़ां ही सामने आ रही है। 2021-22 में देश में जल जीवन मिशन का लाभ पहुंचाने में छत्तीसगढ़ देश के 31वें पायदान पर था। इस साल भी लक्ष्य से बहुत दूर है। जगह-जगह से पाइप लाईन खरीदी से लेकर टंकी निर्माण तक भ्रष्टाचार और प्रक्रिया में बड़ी-बड़ी गड़बड़ी करने की खबरें आती रहती है। सवाल है कि केंद्र सरकार की योजनाओं के काम जनता के लिए आवश्यक है वे पूरे क्यों नहीं हो रहे है? क्या राज्य सरकार के पास पैसे की कमी है, लापरवाही है या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता? जो भी है नुकसान जनता का है।

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तवांग में हुई झड़प को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण, सदन से किया वॉकआउट https://samacharpacheesa.com/?p=5181 Tue, 13 Dec 2022 09:15:11 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5181 नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में हुई भारत-चीन की झड़प को लेकर विपक्ष ने मंगलवार को केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सदन से वॉक आउट भी किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा, हमें सदन के नेता और राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि हमें स्पष्टीकरण का एक मौका दिया जाएगा लेकिन उन्होंने नहीं दिया और हमारी बात सुनने को तैयार नहीं थे। यह देश के लिए अच्छा नहीं है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, जब उन्होंने हमें स्पष्टीकरण नहीं दिया तो विपक्षी दलों के सभी नेताओं ने वॉकआउट करने का फैसला किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, हम अपने देश की एकता और अखंडता के लिए एक साथ खड़े हैं, हम अपने सैनिकों के साथ हैं। खडग़े ने कहा, उन्होंने (रक्षा मंत्री) अपना बयान पढ़ा और बाहर चले गए। वह किसी स्पष्टीकरण या चर्चा के लिए तैयार नहीं थे। इसका (राजीव गांधी फाउंडेशन एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने का मुद्दा) कोई संबंध नहीं है।
वहीं इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) पार्टी के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल किया। उन्होंने कहा, पीएम राजनीतिक नेतृत्व दिखाने में नाकाम रहे हैं। झड़प 9 दिसंबर को हुई थी और आप आज बयान दे रहे हैं। अगर मीडिया ने रिपोर्ट नहीं की होती, तो आप नहीं बोलते। सभी पक्षों को संघर्ष स्थल पर ले जाएं। एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा, पीएम चीन का नाम लेने से डर रहे हैं, उनकी सरकार चीन के बारे में बोलने से डर रही है।
इससे पहले तवांग क्षेत्र में हुए भारतीय सेना और पीएलए के बीच झड़प को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारतीय सैनिकों के साथ आमना-सामना के दौरान चीन द्वारा भारत की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं किया गया है। भारतीय सैनिकों ने झड़प के दौरान अपार बहादुरी दिखाई और कुछ ही देर में चीनी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

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