गणतंत्र दिवस – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 31 Jan 2023 05:54:20 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 बेरोजगारों को भत्ता और रोजगार https://samacharpacheesa.com/?p=5969 Tue, 31 Jan 2023 05:54:20 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5969 गणतंत्र दिवस के अवसर पर जगदलपुर में परेड की सलामी लेने के बाद जनता के नाम अपने संदेश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के बेरोजगारों युवकों को महंगाई भत्ता देने की घोषणा की। इधर मुख्यमंत्री ने अपनी घोषणा में 2 बातों का उल्लेख नहीं किया है। एक प्रत्येक माह बेरोजगारों को भत्ते के रुप में कितनी राशि दी जाएगी और दूसरी बात कि कितने बेरोजगारों को यह भत्ता दिया जाएगा। प्रदेश भर में जगह-जगह होर्डिंग लगे है जिसमें लिखा है कि प्रदेश में बेरोजगारी दर शून्य के करीब है। यह बात सही भी है क्योंकि एक निजी संस्था ने पिछले महीने प्रदेश में बेरोजगारी दर को 0.1 प्रतिशत बताया था। जबकि जिला रोजगार केंद्रों में जो पंजी में दर्ज रोजगार चाहने वालों की संख्या 2021-22 में लगभग 19 लाख थी। अब इस मामले में विरोधाभास है कि यह लगभग 19 लाख रोजगार चाहने वाले युवा कौन है? अगर ये बेरोजगार है तो प्रदेश में 18 वर्ष से 35 वर्ष की आयु के युवा लगभग 35 प्रतिशत के आधार पर लगभग 1 करोड़ होंगे। अब इन 1 करोड़ में लगभग 19 लाख रोजगार के इच्छुक है तो बेरोजगारी दर प्रदेश की 19 प्रतिशत हो जाती है। या तो सीएमआई का बेरोजगारी नापने की प्रक्रिया और इकाई गलत है या तो फिर प्रदेश के रोजगार केंद्रों में दर्ज रोजगार चाहने वालों की संख्या में कुछ गड़बड़ी है। अब सवाल यह उठता है कि अगर सरकार ढाई हजार रुपए प्रतिमाह की दर से युवाओं को देगी तो साल में प्रत्येक युवा 30 हजार बनते है। और 19 लाख युवाओं को साल में 30 हजार रुपए देने पड़े तो सरकार के खजाने पर 5 हजार 700 करोड़ रुपए का भार आएगा। अब मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी इस बात की मांग कर रही है कि सरकार को पिछले 4 साल के हिसाब से बेरोजगारों को भत्ता देना चाहिए। यह बात इसलिए हो रही है क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने चुनाव के पहले अपने संकल्प पत्र में यह वादा किया था कि अगर कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो 10 लाख बेरोजगार युवाओं को ढाई हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। हालांकि कांग्रेस पार्टी के नेता पिछले कुछ माह से यह कहते सुने जा रहे है कि संकल्प पत्र में बेरोजगार युवकों को ढाई हजार रुपए देने का वादा नहीं किया गया था। इसका मतलब है कि अब अगले कुछ महीने तक बेरोजगारी भत्ते को लेकर जमकर राजनीति होगी। चुनाव को देखते हुए सरकार ने घोषणा तो कर दी लेकिन इस घोषणा के बाद कितने युवा भत्ते के लिए आवेदन करते है और कितनों को यह भत्ता मिलेगा यह देखने वाली बात होगी। उम्मीद रखने वाला बेरोजगार युवक को अगर भत्ता नहीं मिला, तो वह नरााज होगा।

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74वां गणतंत्र दिवस https://samacharpacheesa.com/?p=5913 Fri, 27 Jan 2023 05:32:48 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5913 भारत आज अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 के दिन संविधान को अंगीकृत किया था। देश-दुनिया में एक लिखित या अलिखित संविधान के मार्गदर्शन में देश की व्यवस्था को चलाने की संकल्पना 18-19वीं शताब्दी में आयी। इसे संविधानवाद कहा गया। भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ और अपना लिखित संविधान बनाया। जबकि ब्रिटेन का संविधान लिखित नहीं है। भारत में प्राचीनकाल से संविधान की व्यवस्था रही है, भले ही उस समय का संविधान लोकतांत्रिक गणराज्य न होकर राजतंत्रात्मक था। मौर्य वंश के राज्य का संचालन कौटिल्य द्वारा लिखित अर्थशास्त्र के आधार पर होता था। इसी तरह गुप्तकाल में राज व्यवस्था का संचालन कामंदक रचित नीति सार के आधार पर होता था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के महापुरुषों ने आधुनिक व्यवस्था और आवश्यकता की दृष्टि से एक लिखित संविधान का निर्माण करने का निर्णय लिया। भारत का संविधान जनता को मौलिक अधिकार देता है। यह मौलिक अधिकार उसके सर्वांगीण विकास के लिए सहयोग करता है। संविधान वैसे तो देश को राज्यों का संघ कहता है लेकिन संचालन में देश की व्यवस्था परिसंघात्मक है। इसमें केंद्र और राज्य दोनों स्वायत्त होकर संविधान द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर अपना-अपना काम करते है। राज्यों में राज्यपाल भी एक ऐसी संस्था है जो राज्य में संवैधानिक कार्यों का कुशल संचालन करती है। हाल के वर्षों में राज्य के निर्वाचित सरकार और राज्यपाल के बीच तनावपूर्ण संबंध देखे जा रहे है। पश्चिम बंगाल में, केरल, तमिलनाड और छत्तीसगढ़ में इस तरह की परिस्थिति बन रही है। छत्तीसगढ़ में आरक्षण का कोटा बढ़ाने के लिए पारित विधेयक पर राज्यपाल के हस्ताक्षर को लेकर मंत्रिपरिषद व राजभवन के बीच तनाव की स्थिति है। वैसे तो 1970 का दशक केंद्र-राज्य संबंध सबसे तनावपूर्ण रहे और बार-बार राज्यों की चुनी हुई सरकार को केंद्र में भंगकर राष्ट्रपति शासन लगाया। पिछले 2-3 दशकों में कम से कम वैसी स्थिति नहीं है। केंद्र और राज्य में अलग-अलग निर्वाचित सरकार होने के कारण यह स्थिति हाल-फिलहाल बन रही है। संविधान की दृष्टि से यह सही नहीं है। राज्यों की चुनी हुई सरकारें ऐसा मान सकती है कि जनता ने उन्हें अधिकार देकर सत्ता में बिठाया है। लेकिन संविधान राज्यपाल को भी एक विशेष अधिकार देकर जनता के अधिकारों के संरक्षक और उसके कल्याण के लिए राज्यों में नियुक्त करने की व्यवस्था की है। राज्यपाल जैसी संस्था पर आक्रमण संवैधानिक व्यवस्था पर आक्रमण है। भारतीय राजनीति से देश का विकास तभी होगा जब व्यवस्थाएं सुचारु रुप से चलेंगी और इसके लिए संविधान का सम्मान करना आवश्यक है।

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