गिरावट – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 15 Apr 2023 08:51:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 छत्तीसगढ़ में जल-जीवन मिशन https://samacharpacheesa.com/?p=6749 Sat, 15 Apr 2023 08:51:13 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6749 सामान्य तौर पर माना जाता है कि शासन का मुख्य कार्य जनता को सुरक्षा के साथ सड़क, बिजली-पानी देना है। देश ने हर क्षेत्र में तरक्की की है, गांव-गांव स्कूल और अस्पताले जरूरत पडऩे पर उन्हे एम्बुलेंस शहर भी लाया जा सकता है। सड़क,पुल-पुलिया ने पुरे देश को जोड़ दिया है। बिजली,इंटरनेट जैसी सुविधाएं बस्तर के दुरस्त अंचल तक पहुंच चुकी है,लेकिन स्वच्छ पेयजल अभी भी देश के प्रत्येक व्यक्ति को मुहैया नहीं हो पा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य भारत के हृदय स्थल पर है, यहां मानसून से 13 सौ मिलीमीटर बारिश होती है। इसके बावजूद ऐसी खबरंे मिलती है कि एक बड़ी आबादी जमीन खोदकर झिरीया का पानी पी रही है। माना जाता है कि प्रदूषित जल पीने से बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ में लोग बीमार हो रहे है और मृत्यु भी हो रही है। इसका मुख्य कारण प्रदेश में सालभर बहने वाली नदी का अभाव है। प्रदेश की सबसे बड़ी नदी महानदी है। जिसमें शिवनाथ हसदेव जैसी नदियां आकर मिलती है, फिर वह ओडिशा चली जाती है। प्रदेश में एक समय के बाद नदिया सूख जाती है जिसके अनेक कारणों में मुख्य नदियों पर बने हुए बांध भी है। बांध भी इसलिए बनाये गए है कि आवश्यकता पडऩे पर सिंचाई, निस्तारी और उद्योग के लिए पानी उपलब्ध हो सके। वर्षा का पानी नदियों से मिलकर समुद्र में बह जाता है इसलिए इसे रोकने के लिए प्रदेश में 6 सौ से अधिक एनीकट और बैराज का निर्माण किया गया है। प्रदेश की जनता को जल मिल सके इसके लिए नदियों पर किए गए निर्माण को लेकर ओडिशा को आपत्ति है। उनकी शिकायत है कि महानदी का पानी रोक लेने से ओडिशा राज्य की कृषि एवं अन्य लोग प्रभावित है। छत्तीसगढ़ में पुराने समय से तालाब आधारित जल व्यवस्था का इतिहास रहा है। कोई ऐसा गांव नहीं जहां आधा दर्जन से अधिक तालाब न हो, राजधानी रायपुर में ही एक समय 140 से अधिक तालाब हुआ करते थे धीरे-धीरे इन तालाबों का महत्व कम होता गया जबकि गांव में इन्हीं तालाब के पानी से लोग अपना आवश्यक कार्य करते थे। प्रदेश में भूमिगत जल की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। जहां पर तालाब है वहा पर पानी रिचार्ज होता है और कुंए से पानी मिल जाता है। जहां भूमिगत जल है वहा पर किसान और उद्योगपति अत्यधिक दोहन भी कर रहे है। यही कारण है कि भू-जल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। इन परिस्थितियों के बीच में केन्द्र सरकार का जल-जीवन मिशन महत्वपूर्ण है। इस मिशन के तहत प्रदेश के हर गांव में पाइप बिछाकर नल का पानी पहुंचाने की योजना है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने पैसे भी दिए है और यह काम तेजी से चल रहा है। 2024 तक मिशन का काम पूरा करना है, इस सीमा में छत्तीसगढ़ में काम हो पाएगा इसको लेकर संदेह है। एक तो जल-जीवन मिशन में अनियमितता की शिकायतें आ रही है। वहीं पाइप लाइन बिछा देने और नल की टोटी लगाने के बावजूद अभी तक गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा है। इसका एक बड़ा कारण पाइप लाइन में पानी पहुंचाने के स्त्रोतों का अभाव है। समन्वय नहीं होने के कारण यह कठिनाई आ रही है। मिशन का काम सफलता पूर्वक हो जाए तो गांव से लेकर शहर तक लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा।

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नेता बताएं अप्रिय बयानबाजी से जनता का क्या भला ? https://samacharpacheesa.com/?p=5349 Wed, 21 Dec 2022 06:05:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5349 राजनीतिक बयानबाजी में निरंतर गिरावट दर्ज हो रही है। ऊंचे पद व प्रतिष्ठा में बैठे बड़े नेता भी घटिया बयान से अपने आप को नहीं बचा पाए रहे हैं। कुत्ता,कुकुर,बघुवा,थूक दो तो बह जाए सरकार, गुंडा ,ऐसे ना जाने कितने गिरे गए बयान सामने आते हैं। जिसे सुनकर आम जनता भी अपमान महसूस करती है। प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए भाजपा के बड़े नेता ने कुकुर जैसा संबोधन करके अपनी अजीबो गरीब राजनीति का परिचय दिया था। प्रदेश ही नहीं देश के नेताओं के बीच भी इसी तरह की बयानबाजी आये दिन आने लगी है। मुद्दे व देश की बात से हट कर व्यक्तिगत भौडें आरोप व संबोधन दिए जाने लगे हैं। यही राजनीति की धारा देश के नेताओं की वर्तमान सोच को दर्शाती है। उनकी अपनी राजनैतिक समझ को जनता के सामने लाती है। जनता उनके बारे में अपने विचार बनाती है। यह उस नेता को क्यों नहीं समझ में आता कि उसके बयानों का असर जनता पर क्या पड़ेगा ? गैर जिम्मेदाराना बयानों में सिर्फ एक पार्टी या व्यक्ति का दोष नहीं है। सभी दलों के नेतागण आजकल कुछ भी बोले चले जा रहे हैं। देश की समस्याएं एक तरफ रह जाती हैं। देश की जनता इन लापरवाह बयानों में ही उलझ कर अपने भविष्य के बारे में सोचने लगती है। हमारे भाग्य विधाताओं को आखिर ये हो क्या गया है ? समस्याओं को सुलझाने की जगह उल जलूल बयानों के कारण बेवजह कटुता का माहौल बनाने में लगे हैं। एक बयान गलत आता है तो बयान के जवाब में दूसरा बयान सामने से उससे बुरा आ जाता है। आरोप प्रत्यारोपों के इन बयानों से ना प्रदेश का भला होता ना देश का ही भला होता है। देश के सामने महंगाई ,बेरोजगारी,पेट्रोल -डीजल, देश की सीमा की रक्षा, देश की गंगा जमुनी तहजीब व आपसी भाईचारे की रक्षा, गरीबी, भूखमरी, किसान की तकलीफ, शराबखोरी की बढ़ती आदतें, आतंकवाद,नक्सल समस्या, ऐसी ना जाने कितनी समस्याएं देश व राज्य में मौजूद हैं। इन समस्याओं से देश की जनता त्राहि त्राहि कर रही है। उसकी चर्चा से बच कर व्यक्तिगत आरोपों में जनता को भटकाने का प्रयास क्या जनहित की राजनीति कहला सकती है। कुत्ता- गुंडा-बघुवा-थूक- इन बातों से किसी को क्या मिलने जुलने वाला है। आजादी के बाद जिन भी नेताओं ने देश चलाया या देश को आगे बढऩे में मदद की उन लोगों ने इस तरह कभी मर्यादा छोड़ी हो यह उदाहरण देखने में नहीं आया। अधिकांशत: देश हित में पक्ष विपक्ष ,जाति- भेदभाव ,वर्ग भावना से दूर देशहित सर्वोपरि रहा है। नेहरू से लेकर इंदिरा युग आने के पहले तक कभी ऐसे भौंडी भाषा कभी सुनाई नहीं देते थे। पक्ष विपक्ष के नेता एक दूसरे का सम्मान करते थे। जरूरत पडऩे पर विपक्ष के साथियों का भी देशहित में उपयोग किया करते थे। किसी के अच्छे कामों की सराहना भी की जाती थी। देश पर संकट के समय एक स्वर व एक मंच पर सब बात करते थे। इसके एक नहीं अनेक उदाहरण तब की राजनीति में मौजूद हैं। आज स्थिति उसके विपरीत जाती दिखाई दे रही है। इंदिरा गांधी -राजीव गांधी-मोरारजी देसाई-नरसिम्हाराव-अटलबिहारी बाजपेयी-बीपी सिंह- गुजराल-चंद्रशेखर-देवेगौड़ा-मनमोहन सिंह-चरणसिंह के कार्यकाल को भी देखें तो राजनैतिक कटुताएँ भले ही दिखाई देती रहीं हैं। ऊलजलूल बयानबाजी अपवाद स्वरूप ही दिखाई पड़ती थी कुछ तो भाषा की मर्यादाएं थी। प्रदेश की बात करें तो हमारे प्रदेश में प्रारम्भिक उदयकाल में ही कड़े शब्दों वाली राजनीति शुरू हो गई उस परम्परा में शनै:शनै: इजाफा होता दिखाई दे रहा है। यह नहीं होना चाहिए। सभी को यह सोचना ही होगा कि इन भद्दे आरोपों व बयानों से जनता का आखिर क्या भला होगा। और यह भी कि जनता का भला होगा तो किस माध्यम से होगा और उसी राह पर अपने कदम बढ़ाना चाहिए। गंदे व निचले स्तर की भाषा का त्याग करना चाहिए। वर्तमान राजनीति की मांग भी यही है।

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