गुलाम नबी आजाद – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Mon, 06 Feb 2023 06:42:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 सुरक्षाकर्मियों के बलिदान ने देश की अखंडता को अक्षुण्ण रखा : गुलाम नबी आजाद https://samacharpacheesa.com/?p=6106 Mon, 06 Feb 2023 06:42:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6106 जम्मू। डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (डीएपी) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने रविवार को कहा कि सेना और अन्य अर्धसैनिक बलों के जवानों के बलिदान ने देश की अखंडता को अक्षुण्ण रखा है। आजाद ने कहा कि देश की पूरी आबादी सुरक्षाबलों के जवानों द्वारा प्रदान की गई अथक सुरक्षा के कारण ही रात में चैन की नींद सो पाती है। उन्होंने कहा कि इन जवानों ने इसके लिए कभी-कभी अपने जीवन का बलिदान भी दिया है।
उन्होंने सांबा में ‘‘विष्णु महायज्ञ’’ भाग लेने के दौरान कहा, ‘‘हमें आज अपने देश पर गर्व है क्योंकि यह न केवल आर्थिक शक्ति के रूप में विकसित हुआ है बल्कि 1947 से दुश्मनों के खिलाफ लड़े गए लगभग सभी युद्धों में जीत हासिल की है। यह हमें भारत के नागरिकों के रूप में महान और गौरवान्वित महसूस कराता है।

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गुलाम नबी आजाद की पार्टी के नाम को मिली चुनाव आयोग से मंजूरी https://samacharpacheesa.com/?p=6084 Sat, 04 Feb 2023 07:34:21 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6084 जम्मू। अंतत: कांग्रेस से आजाद हुए पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की नवगठित पार्टी के प्रदेश में हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए पहचान का मामला सुलझ गया है। चुनाव आयोग ने उनकी पार्टी का नाम स्वीकृत कर लिया है और पंजीकरण भी जारी कर दिया है। लगातार तीन बार नाम भिजवाने के बाद अब पार्टी को डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी अर्थात डीपीएपी दिया गया है।
नवम्बर महीने में 13 दिनों में ही उन्हें तीसरी बार पार्टी का नाम बदलना पड़ा था। 26 नवंबर को जब डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के नाम से आवेदन किया गया था तो उसके प्रति दुआ की जा रही थी कि वह अब स्वीकृत हो जाए। वैसे पार्टी के भीतरी सूत्र बताते थे कि इस नाम से गुलाम नबी आजाद नाखुश हैं क्योंकि वे पार्टी के लिए छोटा नाम चाहते थे। मगर मजबूरी में उन्हें ऐसा करना पड़ा है।
वे चाहते थे कि जल्द से जल्द पार्टी का नाम स्वीकृत हो और चुनाव चिन्ह भी मिल जाए क्योंकि प्रदेश में विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट आरंभ हो चुकी है। फिलहाल पार्टी को चुनाव चिन्ह मिलना बाकी है।
24 नवम्बर को गुलाम नबी आजाद की पार्टी के महासचिव की ओर से अखबारों में दिए गए विज्ञापनों के अनुसार, उनकी पार्टी के नाम को पंजीकृत करने के लिए चुनाव आयोग को दिए गए आवेदन पर आपत्तियां मांगी गई थीं क्योंकि पार्टी का नाम डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के नाम से पंजीकरण पेश किया गया था।
हालांकि सितम्बर में जब गुलाम नबी आजाद ने पार्टी के गठन की घोषणा की थी तो इसका नाम डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी रखा गया था। तब उन्होंने सैंकड़ों समर्थकों की उपस्थिति में इसकी घोषणा करते हुए 26 सितम्बर को चुनाव आयोग को आवेदन भी किया। पर चुनाव आयोग ने उस नाम को अस्वीकृत कर दिया था ।नतीजतन पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अखबारों आदि में या सम्मेलनों में प्रतिदिन अपनी पार्टी का नाम बदलने को मजबूर हो रहे थे। इससे उनकी किरकिरी भी हो रही थी।
हालत यह है कि अब तीसरी बार पार्टी का नाम बदला गया है। नवम्बर महीने की 13 तारीख को प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के नाम को भी चुनाव आयोग द्वारा अस्वीकृत कर दिए जाने के कारण पार्टी नेता असमंजस में थे। अब उनकी जान में जान आई है।

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