गोठान – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 23 May 2023 08:10:54 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 गौ और गोठान पर राजनीति https://samacharpacheesa.com/?p=6960 Tue, 23 May 2023 08:10:53 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6960 भारत को स्वतंत्र हुए 75 साल बीत गए, अब लग रहा है कि जिन आदर्शोँ को लेकर स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सब कुछ न्यौछावर कर किया था, उनके साकार होने का समय आ रहा है। महात्मा गांधी गौ और गोठान को अहमियत देते थे, आज छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में गाय, गोबर और गोठान की चर्चा हो रही है। देश में रामराज्य की चर्चा हो रही है, गौहत्या रोकने की बात मुख्यमंत्री कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद नरवा-गरवा-घूरवा-बारी का नारा दिया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कार्यक्रम संचालित किए गए। इसके तहत प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में गोठान बनाने का निर्णय लिया, इसके पीछे उद्देश्य तो सड़कों पर घूमने वाले मवेशियोंं को एक जगह इका करने का था। उद्देश्य के पूरा नहीं होने के बाद इस योजना में गोबर खरीदने का निर्णय लिया गया। तब से अबतक यह योजना चल रही है। खरीदे गए गोबर से स्व सहायता समूह के माध्यम से वर्मी कंपोस्ट और अन्य उत्पाद बनाने का निर्णय शामिल किया। लेकिन सरकार के इस योजना को अधिकारियों ने ठीक से अमल नहीं किया और कई गोठान समिति के अध्यक्ष और सरपंचों ने मिलीभगत कर भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया। वैसे तो सरकार के इस फ्लैगशिप योजना के लिए बजट में कोई का प्रावधान नहीं किया गया फिर भी डीएमएफ, पंचायतों की राशि, सीएसआर के पैसे सहित अनेक योजनाओं के फंड का उपयोग किया गया। सरकार दावा करती है कि लगभग 11 हजार गोठान बनाए गए हैं, लेकिन कई तो आकार तक नहीं ले पाए। कुछ जगह गोबर की पर्याप्त खरीदी हो रही है, वहां स्व सहायता समूह भी अच्छा काम कर रहे लेकिन ज्यादातर गोठनों में सब सन्नाटा है। शासन के अनुसार अब तक गोबर खरीदने वाले लोगों को करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है इसी तरह स्व सहायता समूह को भी करोड़ों रूपए की राशि मिल चुकी है लेकिन 11 हजार गोठान बनाने में 1500 करोड़ रूपए से अधिक का खर्च हो चुका है। ऐसे में गोठान बनाने के पैसे को गौपालकों में बांट देते तो प्रत्येक की हिस्से में ज्यादा राशि मिलती। गौपालन को बढ़ावा मिलता और रही बात गोबर बेचने वालों की तो उसे गोठान में बेचने के बजाय पंचायत खरीदकर वर्मा कंपोस्ट बनाकर बेचे तो अच्छी आमदनी हो सकती है। मवेशी को इका रखने का उपयोग तो गोठान आ नहीं रहे। फिर भी गोठान की योजना गलत नहीं थी, इसके क्रियान्वयन में गड़बड़ी हुई है। इसमें भ्रष्टाचार भले ही ना हो लेकिन सरकार के पैसे का दुरुपयोग तो हुआ है।

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क्या सरकारें भ्रष्टाचार करने के लिए ही बनती है ? https://samacharpacheesa.com/?p=6898 Wed, 17 May 2023 08:03:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6898 छतीसगढ़ के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। राजनैतिक घात प्रतिघात कांग्रेस भाजपा एक दूसरे पर करने लगे हैं। बयानों व एक्शन तथा रिएक्शन देख कर तो यही लग रहा है। राजनैतिक हमले दिनो दिन और घातक होंगे। शोध व खोजों के अनेकों माध्यम से अब मुद्दे बटोरे जायेंगें। वोटों को साधने किसी भी हद तक ऊपर – नीचे जाने से किसी भी दल को कोई गुरेज नहीं होगा। भाषा की मर्यादा भी शनै शनै ना सिर्फ क्षीण होती जाएगी बल्कि लगभग तोड़ दी जाएंगी। चुनाव पास आते ही खदान,धान,चावल से लेकर शराब और यहां तक कि गोबर में भी भ्रष्टाचार की बदबू आने लगी है। विपक्षी दल भाजपा तो खदान(कोयला), धान(चावल) , शराब तक पहुंच कर अब अब गाय के गोबर में भी भ्रष्टाचार खोजना शुरू कर चुकी है। एक ट्रेलर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के माध्यम से मंदिर हसौद के गोढी गांव में गोठान पहुंच कर टकराव की राजनीति खेल कर सत्ता को कल ही आईना दिखा दिया है। असली फि़ल्म दिखाने का काम 20 मई से भाजपाई नेतागण 10-10 गौठानों का दौरा करके करेंगें। कुल मिलाकर भाजपा की पूरी की पूरी टीम कांग्रेस सरकार को महा भ्रष्टाचारी सरकार बताने में भिड़ गई है। ऐसे ही आरोपों को दर्शा कर अभी हाल कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा सरकार को चुनाव में जोरदार पटकनी दी है। भाजपा इस फार्मूले को छतीसगढ़ चुनावों में आजमाने तैयारी करती दिख रही है। सफल होगी या नहीं होगी यह अभी कहा नहीं जा सकता। प्रयासों में कोई कमी नहीं रखी जा रही है। किसी ने पूछा था भाजपा चार साल मौन क्यों रही। शायद इसी रणनीति की तहत मौन रही होगी कि एक साथ चुनावी साल में चौतरफा हमला किया जाए। यह प्रयास अब शुरू हो भी गया है। संयोग है या सोची समझी रणनीति यह कहना मुश्किल है। ईडी के धुँवाधार सीरियल छापे पहले कोयला अब शराब को घेरे में लेकर किये जा रहे हैं। 2000 करोड़ के शराब घोटाले का खुलासा करना,प्रेस विज्ञप्ति जारी करना और कुछ लोगों का नाम लेने के साथ उनकी गिरफ्तारी कर लेना कुछ पर गिरफ्तारी की तलवार लटकाने की स्थिति बनना। तुरंत बाद भाजपा का कांग्रेस सरकार पर इसी मुद्दे पर हमलावर होने की बात व बयानबाजी तेज होने को ना सिर्फ कांग्रेस बल्कि जनता भी शक की नजर से देखने लगी है। इधर कांग्रेस ने पूछा कि ईडी भाजपा के कार्यकाल के भ्रष्टाचारों पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है। हजारों करोड़ का नान घोटाला,हजारों के नाम राशनकार्ड से काटने पर कहा कि उनका राशन का लंबे समय तक घोटाला किया,बलौदा बाजार का एक हजार करोड़ का धान घोटाला के साथ ,करोड़ों का शराब घोटाला व अन्य गड़बडिय़ों पर ईडी मौन क्यों है ? मुख्यमंत्री ने तो यह तक कह दिया है कि स्थानीय भाजपा नेताओं के पास हमारे कामों के सामने कहने को कुछ भी नहीं है। मुद्दा विहीन भाजपा ईडी के सहारे चुनाव में फतह चाहती है। इसलिए सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। जनता के बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि ईडी क्यों हमारे महाधिवेशन से लेकर अब तक पीछे पड़ी है।
आजकल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में सभी दलों के प्रवक्तागण आ गए हैं। आये दिन होने वाले टीवी डिबेट में एक दृश्य लगभग बार बार दोहराया जा रहा है। भाजपा के प्रवक्ता कहते हैं कांग्रेस सरकार व उसका मुख्यमंत्री भ्रष्टाचारी है। कांग्रेस के प्रवक्तागन कहते हैं 15 साल भाजपा की सरकार व उनके मुख्यमंत्री भयानक भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। ये कहते है कि उन्होने करोड़ों का घोटाला किया वे कहते हैं कि इन्होंने करोड़ों का घोटाला किया। अब टीवी डिबेट की श्रोता जनता बिचारी किसकी बात माने। कौन भ्रष्टाचारी है कौन नहीं। सोचने लगती है कि क्या हर साख पर ….. ही बैठे है क्या ? अब अंजामें गुलिशतां क्या होगा? भला हो इन प्रवक्ताओं का जिन्होंने हमारी आंखें खोल दी कि जिन्हें हम उम्मीदों के साथ चुनकर सरकार बनाने भेजते हैं। गद्दी पर बैठते ही वे घोटाले करने लगते हैं। चाहे ये हों या वो हों ,या कोई और? ये क्या तमाशा है ? अब हम भरोसा करें तो किस पर करें? जनता यह सोच कर ही परेशान है। सोचती है कि क्या हमारे टैक्स का पैसा खर्च करने का हम जो अधिकार इन नेताओं को उन्हें चुनाव में चुनकर दे देते हैं। क्या ये इनकी पैतृक संपत्ति है जो भ्रष्टाचार करने की हिम्मत इनमें आ जाती है। दूसरी बात यह कि हम अपने राज्य की ही बात करें तो छतीसगढ़ में 20 सालों से सभी सरकारों व उनके मुखियाओं पर लगे करोड़ों के घोटाले के आरोपों में हमने आजतक एक नेता को भी सजा पाते नहीं देखा। सभी कहते हैं कि हमारी जेब में सबूत है, समय आने पर उसका जनता के बीच खुलासा करेंगें आजतक खुलासा नहीं देखा है। वो समय भी आते नहीं देखा। जनता सोच रही है कि क्या हम सब मूर्ख समझे जा रहे हैं। सरकारें बनने के बाद अगर सभी एक राह पर अपने सिस्टम के दबाव में काम करने मजबूर हो जाते हैं,तो फिर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपों के मायने क्या हैं। शायद सिर्फ सत्ता पाने एक दूसरे को बदनाम करने का साधन मात्र हैं। सत्ता पाने के बाद आपको भी वही करना है ,जो वे कर रहे थे , तो आरोप प्रत्यऱोप करना व अपने ही राज्य सरकारों को बदनाम करना बंद करिए। सत्ता पाने के कोई और रास्ते ढूँढिय़े।

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