चिंता – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 22 Dec 2022 07:32:39 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 राज्यसभा में टीटी, आरएनटी, आरएएमएल, डीडीयू पर जतायी गयी चिंता, महापुरुषों का पूरा नाम हो इस्तेमाल https://samacharpacheesa.com/?p=5383 Thu, 22 Dec 2022 07:32:39 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5383 नयी दिल्ली। राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी की एक सदस्य ने महापुरुषों के नाम पर रखे गए भवनों, संस्थानों, सड़कों आदि के नामों को संक्षिप्त रूप में बोलने के चलन पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे वह उद्देश्य बाधित हो रहा है जिसके लिए भवनों, संस्थानों, सड़कों आदि के नाम महापुरुषों के नाम पर रखे गए थे। शून्यकाल में भारतीय जनता पार्टी की कविता पाटीदार ने यह मुद्दा उठाया। कविता ने कहा कि आने वाली पीढ़ी महापुरुषों के कार्यों से प्रेरणा ले, इसके लिए कई भवनों, संस्थानों, सड़कों का नाम महापुरुषों के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा ‘‘लेकिन आज नामों को संक्षिप्त रूप में बोलने के चलन के कारण डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल को आरएमएल, देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय को डीएवीवी, रवींद्रनाथ टैगोर मार्ग को आरएनटी मार्ग, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग को डीडीयू मार्ग तथा तात्या टोपे नगर को टीटी नगर कहा जाता है।’’
उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि टैक्सी चालक को अगर जगह का पूर्ण नाम बताया जाए तो वह समझ ही नहीं पाता लेकिन संक्षिप्त नाम बताने पर वह उस जगह पर पहुंचा देता है। उन्होंने महापुरुषों के नाम को पूरा बोलने, पढ़ने और लिखने का अनुरोध किया ताकि इसके उद्देश्य को पूरा किया जा सके और युवा पीढ़ी इनसे प्रेरणा लेकर देश का बेहतर भविष्य बना सके। टीआरएस सदस्य के आर सुरेश रेड्डी ने शून्यकाल में कहा कि 2022-23 के अकादमिक वर्ष के मध्य में सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के अल्पसंख्यकों को दी जाने वाली प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति बंद किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे इन छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’’ की बात कहती है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि अन्य पिछड़ा वर्ग भी समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा ‘‘छात्रवृत्ति इस वर्ग के छात्रों को स्कूल लाने में, उन्हें पढ़ने तथा पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करने में मददगार थी और इसे जारी रखना चाहिए।’’ भाजपा के डॉ सिकंदर कुमार ने हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की पांगी घाटी की सड़कों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 40 बरस पहले वहां सड़कें बनाई गई थीं और आज तक वह वैसी ही हैं। उन्हें न तो पक्का किया गया, न चौड़ा किया गया।
उन्होंने कहा कि पांगी घाटी की सड़कों को पक्का और चौडा़ किया जाना चाहिए ताकि वहां के लोगों को आवागमन में दिक्कत न हो। भाजपा के समीर उरांव ने झारखंड में कथित धर्मांतरण को लेकर एक युवक की हत्या करने, उसके शव के टुकड़े टुकड़े किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य की सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां बांग्लादेशी घुसपैठिये भी रह रहे हैं। तमिल मनीला कांग्रेस के जी के वासन तथा माकपा सदस्य वी शिवदासन ने भी शून्यकाल के दौरान अपने अपने मुद्दे उठाए।

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अच्छे- बुरे आतंकी ! https://samacharpacheesa.com/?p=5174 Tue, 13 Dec 2022 05:57:48 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5174 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने आतंकवाद को लेकर अपनी गहरी चिंता जाहिर करने वाला है। 14-15 दिसंबर को भारत अपनी ओर से कुछ सुझाव प्रस्तुत करेगा कि आखिर आतंकवाद से कैसे निपटा जाए। भारत अपना जो पक्ष रखने वाला है, उसको लेकर उसने एक नोट भी परिषद को प्रेषित किया है, जिसमें उसने कहा है कि आतंकवाद को लेकर यह भेद नहीं किया जा सकता कि यह आतंकवाद बहुत अच्छा है या खराब है । आतंकवाद विशुद्ध रूप से आतंकवाद है और इस पर पूरी दुनिया को चिंता करनी चाहिए। भारत की इस बात में दम है और उम्मीद की जा सकती है कि सुरक्षा परिषद में शामिल देश इस मसले को गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे और पूरी दुनिया कैसे आतंकवाद से मुक्त हो, इस पर कुछ ठोस सुझाव भी आएंगे ।मेरा अपना और लाखों-करोड़ों लोगों का भी यही मानना है कि आतंकवाद को किसी धर्म,मजहब, रिलीजऩ या जात-पात से नहीं जोडऩा चाहिए । आतंकवादी किसी भी धर्म का हो सकता है। वह किसी भी देश में आतंकवाद पनप सकता है। पाकिस्तान जैसे देश में आतंकवादियों को पनाह मिलती रही है। यह गंभीर चिंता का विषय है। अमेरिका जैसे देश ने कभी आतंकवाद का अनुभव नहीं किया था, लेकिन जब वहां आतंकवादियों ने ट्विन टॉवर को को ध्वस्त किया, तब अमेरिका भी आतंकवाद को लेकर गंभीर हुआ। भारत देश तो आजादी के बाद से लगातार आतंकवाद का शिकार होता रहा है। दुर्भाग्य की बात है कि पाकिस्तान इस बात को स्वीकार नहीं करता कि उसके यहां आतंकवाद की जबरदस्त खेती हो रही है। और कैसी विसंगति है कि खुद पाकिस्तान अपने देश में आतंकवाद को झेल रहा है। अनेक अवसरों पर वहां विभिन्न स्थलों में आतंकवादी विस्फोट करके लोगों की जान लेते रहे हैं। फिर भी वह इस मामले में पूरी तरह गंभीर नहीं दिखता। कुख्यात आतंकवादी उसी के यहां शरण लिए हुए हैं। कुछ का तो खात्मा अमेरिका ने वहाँ घुस कर किया है।
आतंकवाद, उग्रवाद जैसे शब्द पूरी दुनिया में इन दिनों गूँज रहे हैं। इसके विरुद्ध मिलजुल कर के लड़ाई लडऩे की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर धर्म के नाम पर आतंकवाद फैला है तो अपने देश में विचारधारा के नाम पर नक्सलवाद जैसी बीमारी पनप चुकी है। इसके विरुद्ध भी एकजुट होकर लडऩे की जरूरत है। नक्सलवाद को लेकर भी दो तरह की विचारधारा सामने आती है। एक नक्सलवादियों को महिमामंडित करते हैं तो दूसरे इसकी निंदा करते हैं। नक्सलवाद के पक्ष में शहर के अनेक तथाकथित बुद्धिजीवी तर्क देते हैं ।यहां तक कि नक्सली अगर कोई बड़ी हिंसा करते हैं तो भी उसका महिमामंडन करने से फर्जी बुद्धिजीवी बाज़ नहीं आते। वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध इस चर्चा में मैंने नक्सलवाद को इसलिए भी शामिल किया है कि उसको हवा देने का काम कुछ विदेशी ताकतें भी कर रही हैं। यही कारण है कि नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के बाद जब कुछ हथियार बरामद होते हैं, तो वे दपाकिस्तान और चीन के भी निकलते हैं। इसका मतलब साफ है इनको बाहरी मदद भी मिल रही है। आतंकवाद केवल बुरा हो सकता है। उसे किसी भी सूरत में अच्छा नहीं ठहराया जा सकता।

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