चुनाव – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 31 Aug 2023 06:45:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 राजनीति चमकाने के लिए सौहार्द्र बिगाड़ रहे https://samacharpacheesa.com/?p=7923 Thu, 31 Aug 2023 06:45:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7923 कांग्रेस और उसके नेता लोकसभा एवं विधानसभाओं के चुनाव आने से पहले अपनी राजनीति चमकाने के लिए समाज को धर्म और जाति के नाम पर बांटने का काम शुरु कर दिया हैं। लेकिन धार्मिक व जातीय आधार पर की जा रही इस तरह की जहर उगलने वाली राजनीति के चलते धार्मिक सौहार्द बिगड़ा रहा है। पार्टी के ही एक बुर्जुग नेता और पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने विदिशा के एक जलसे में शिरकत करते हुए सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले कड़वे बोल बोले हैं। क्या उनका भाषण कांग्रेस की विचारधारा को पोषित करने वाला है या पार्टी की उम्मीदों को पलीता लगाने वाला भी साबित हो सकता है। कुरैशी ने कहा कि ‘हिन्दुस्तान में 22 करोड़ मुसलमान हैं और एक-दो करोड़ मर भी जाएं तो कोई बात नहीं…।Ó यह विडंबना ही है कि ऐसे वक्त पर, जब देश और समाज में सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों लोग सड़कों पर शांति-मार्च निकाल रहे हैं ऐसे वक्त में उनके नेता साम्प्रदायिक सौहार्द एवं सामाजिक ताने-बाने को गहरी चोट पहुंचा रहे हैं। एक तरफ कुरैशी उन्मादी भाषण दे रहे थे, तो दूसरी ओर उसी मध्य प्रदेश के सागर में अपनी चुनावी संभावनाओं को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े बड़े वादे व दावे कर रहे थे। क्या यह कांग्रेस का दोगला चरित्र नहीं है? लगता तो यही है कि कुरैशी कांग्रेस की परम्परा एवं सोच को ही आगे बढ़ा रहे हैं। वरना पार्टी में ऐसी संकीर्ण एवं राष्ट्र-विरोधी सोच पर सख्त पहरेदारी होती तो क्या कुरैशी ऐसा दुस्साहस कर पाते। निश्चित ही पार्टी ही साम्प्रदायिकता एवं जातीयता को बल देती है, तभी एक बुजुर्ग एवं जिम्मेदारी नेता कुरैशी का ‘मुसलमानों ने चूडिय़ां नहीं पहन रखींÓ जैसे बयानों पर पार्टी मौन रह जाती है। ऐसे एक समुदाय विशेष को उकसाने वाले बयान निश्चित ही राजनीतिक प्रेरित होते हैं। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आता जायेगा, समुदायों को भड़काने वाले बयानों में तीव्रता एवं उग्रता देखने को मिलेगी। चुनावी छाया में लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सामाजिक समरसता को धोने की कुचेष्टाएं बढ़-चढ़ कर देखने को मिलेगी। यह पहली बार बार नहीं है, जब अजीज कुरैशी ने कोई आपत्तिजनक बयान दिया है। गवर्नर पद पर रहते हुए भी वह भाषायी मर्यादाओं का उल्लंघन कर चुके हैं। लेकिन इस वक्त उनके बयान से उनकी ही पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। मध्य प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया भले न शुरू हुई हो, मगर दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टियां- भाजपा और कांग्रेस जोर-शोर से प्रचार में जुट गई हैं। ऐसे में, अपने बड़बोलेपन एवं उच्छृंखलता से कुरैशी ने विरोधी दल के हाथों में धार्मिक ध्रुवीकरण का एक मुद्दा तो थमा ही दिया है।

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चुनाव: भरोसा भूपेश पर या भाजपा के आरोपों पर https://samacharpacheesa.com/?p=7652 Wed, 02 Aug 2023 07:13:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7652 जन चर्चाओं में तो फिर कांग्रेस की सरकार बन रही है। भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह और बयान बाजी कुछ अलग ही चुनावी दृश्य पैदा कर रही है। कहा जा रहा है कि इस बार फिर से भाजपा सरकार। पूछा जा रहा है कि आधार क्या तो कुछ स्पष्ट नहीं , पर कहते हैं, चुनाव के पहले देखना भाजपा बड़ा धमाका करने जा रही है। धमाका क्या है पूछने पर कहा जाता है कि देखते जाओ। सवाल का जवाब देने के ढंग से साफ पता चल जाता है,कि इनको भी कुछ नहीं पता। बड़े किसी नेताओं से पूछो तो वे भी कहते हैं कि सरकार तो हमारी बनेगी बस देखते जाओ। अब क्या समझ जाएं यही किसी के समझ में नहीँ आ रहा है। ऐसा क्या चमत्कार होने वाला है कि उसके बाद वर्तमान सरकार की सारी योजनाएं व रणनीति धरी रह जायेगी। बस देखते जाइये कहने की शैली से लोग अनुमान के भंवरजाल में गोता लगाने लग रहे हैं। भाजपा के समर्थन के लिए यहां ईडी,आईटी,सीबीआई सब हैं ना तैयार यह अनुमान भी लगाया जाता है। भले ही इसका सर पैर हो या नहीं लेकिन अल्प शिक्षित ग्रामीण जनता इस बात को सच ही मानती है और केंद्र सरकार के साथ स्थानीय भाजपा नेताओं को कोसने भी लगती है।
कांग्रेस ने केंद्रीय एजेंसियों पर लगाए अपने आरोपों को धरातल पर प्रतिष्ठा दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। असर भी दिखाई दिया है। आंशिक ही सही गांव के लोगों के बीच बात पहुंची है। चर्चा चल पड़ी है कि वर्तमान सरकार तो हमको धान का बोनस देना चाहती थी। अड़ंगा तो केंद्र सरकार ने लगाया था कि अगर बोनस दिया तो समर्थन मूल्य में खरीदे धान का चावल हम नहीं खरीदेंगे। राज्य सरकार देना चाहती है, केन्द्र अड़ंगा लगा रही है। एक नजर में ग्रामीण जनता इस मामले में भूपेश बघेल के पक्ष में खड़ी दिखाई देती है। ग्रामीण जनता के बीच तो यही चर्चा है कि धान खरीदी के मामले में भूपेश बघेल ने जो कहा था वो किया है। कहा था 2500 दूंगा माने दूंगा, दिया , कैसे दिया किस तरह का रास्ता निकाला। अब सब सार्वजनिक तथ्य है। किसी से छुपा नहीं है। 2500 की जगह समर्थन मूल्य बढ़ा तो बिना प्रचार के उसे मिलाकर 2640 दिया। अब ग्रामीण जनता को भाजपा समझा रही है कि जो भी राज्य सरकार ने धान खरीदा वह हमारे पैसे से खरीदा है, सारा पैसा हम देते हैं। कहते हैं कि हम चावल खरीदने के लिए हामी सहमति नहीं देते तो राज्य धान इतनी मात्रा में खरीद पाते। ये सही भी है कि एक साल केंद्र ने कम मात्रा में चावल खरीदा तो धान हाथियों को खिलाना पड़ा था। बड़ी मात्रा में बर्बाद भी हुआ था। लोग प्रक्रिया पर चर्चा करते हैं कि धान खरीदने सरकार ऋ ण लेती है और धान खरीदती है। धान की मिलिंग करती है। चावल बनवाती है। मिलिंग का खर्चा उठाती है। उसके बाद केंद्र उस चावल को ही पैसा देकर खरीदती है। पैसा आने पर कर्ज पटाया जाता है। कुछ नुकसान भी उठाना पड़ता है। भरपाई सरकार के खजाने से होती है। पैसा केंद्र ने चावल खरीदी के एवज में दिया तो वह धान की खरीदी के लिए दिया कैसे कह सकती है? केंद्र सरकार यह जरूर कह सकती है कि हम अगर चावल नहीं खरीदें तो आप धान खरीद कर करोगे क्या? बुद्धिजीवियों के एक बड़े वर्ग का कहना कि यह कहना संघीय लोकतंत्र की तय व्यवस्थाओं के विरुद्ध होगा। बावजूद इसके केंद्र व राज्य के भाजपाई नेता ऐसा कहने से नहीं चूकते। किस गणित से कहते हैं किसी को बताते भी नहीं। कांग्रेस के किसान नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में कुछ चले या नहीं चले धान खरीदी का जादू सर चढ कर जरूर बोलेगा। यह भी कि लोगों की नजर चुनाव के पहले ईडी-आईटी-सीबीआई व अन्य केंद्रीय एजेंसियों की चाही -अनचाही कार्यवाहियों पर भी है। वो कौन सा चमत्कार करती हैं? राज्य व केंद्र के नेता कौन सा चमत्कार करने वाले हैं? प्रदेश के भाग्य खोलने के लिए किस तरह की भाजपाई घोषणाएं सामने आती हैं। अंतिम फैसला तो दोनों दलों का घोषणा पत्र ही करेगा। देखें भाजपा या कांग्रेस अथवा आप किसकी घोषणाओं पर जनता का भरोसा होगा? या फिर भूपेश है तो भरोसा है के नारे पर जनता भरोसा करती है। इसका सबको इंतजार है।

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भाजपा अजा मोर्चा की बैठक कल, छत्तीसगढ़ चुनाव को लेकर बनेगी रणनीति, जुटेंगे 35 मोर्चा प्रदेश प्रभारी https://samacharpacheesa.com/?p=7618 Mon, 31 Jul 2023 09:22:36 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7618 रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में है। इस क्रम में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की कल मंगलवार को बैठक होगी। इसमें शामिल होने के लिए बीजेपी संगठन के नेताओं का रायपुर में जमावड़ा लग रहा है। बड़ी संख्या में बीजेपी के नेता रायपुर आएंगे। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य 31 जुलाई को रात 8 बजे राजधानी रायपुर पहुंचेंगे। वहीं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय संगठक वी सतीश, भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री और मोर्चा प्रभारी सीटी रवि 1 अगस्त की सुबह में रायपुर आएंगे।
इसके अलावा इस बैठक में मोर्चा के राष्ट्रीय पदाधिकारी, 35 संगठन राज्यों के मोर्चा प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष भी शिरकत करेंगे। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक नवीन मार्कण्डेय ने बताया कि बैठक में संगठनात्मक विषयों के साथ ही महासंपर्क अभियान की रिपोर्ट पर भी चर्चा की जाएगी। बैठक में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से पिछले 9 वर्षों के शासनकाल में अजा वर्ग के कल्याण की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इसमें सामाजिक न्याय और राजनीतिक सहभागिता की दिशा में क्रांतिकारी पहल हुई है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से शुरू हुए कल्याणकारी कार्यक्रमों और योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की योजना पर बैठक में चर्चा की जाएगी। साथ ही छत्तीसगढ़ और राजस्थान में दलितों, विशेषकर दलित महिलाओं पर बढ़ी अत्याचार की घटनाओं को लेकर दोनों प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनमत जागृत करने की योजना बनाई जाएगी।

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क्या सरकारें भ्रष्टाचार करने के लिए ही बनती है ? https://samacharpacheesa.com/?p=6898 Wed, 17 May 2023 08:03:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6898 छतीसगढ़ के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। राजनैतिक घात प्रतिघात कांग्रेस भाजपा एक दूसरे पर करने लगे हैं। बयानों व एक्शन तथा रिएक्शन देख कर तो यही लग रहा है। राजनैतिक हमले दिनो दिन और घातक होंगे। शोध व खोजों के अनेकों माध्यम से अब मुद्दे बटोरे जायेंगें। वोटों को साधने किसी भी हद तक ऊपर – नीचे जाने से किसी भी दल को कोई गुरेज नहीं होगा। भाषा की मर्यादा भी शनै शनै ना सिर्फ क्षीण होती जाएगी बल्कि लगभग तोड़ दी जाएंगी। चुनाव पास आते ही खदान,धान,चावल से लेकर शराब और यहां तक कि गोबर में भी भ्रष्टाचार की बदबू आने लगी है। विपक्षी दल भाजपा तो खदान(कोयला), धान(चावल) , शराब तक पहुंच कर अब अब गाय के गोबर में भी भ्रष्टाचार खोजना शुरू कर चुकी है। एक ट्रेलर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के माध्यम से मंदिर हसौद के गोढी गांव में गोठान पहुंच कर टकराव की राजनीति खेल कर सत्ता को कल ही आईना दिखा दिया है। असली फि़ल्म दिखाने का काम 20 मई से भाजपाई नेतागण 10-10 गौठानों का दौरा करके करेंगें। कुल मिलाकर भाजपा की पूरी की पूरी टीम कांग्रेस सरकार को महा भ्रष्टाचारी सरकार बताने में भिड़ गई है। ऐसे ही आरोपों को दर्शा कर अभी हाल कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा सरकार को चुनाव में जोरदार पटकनी दी है। भाजपा इस फार्मूले को छतीसगढ़ चुनावों में आजमाने तैयारी करती दिख रही है। सफल होगी या नहीं होगी यह अभी कहा नहीं जा सकता। प्रयासों में कोई कमी नहीं रखी जा रही है। किसी ने पूछा था भाजपा चार साल मौन क्यों रही। शायद इसी रणनीति की तहत मौन रही होगी कि एक साथ चुनावी साल में चौतरफा हमला किया जाए। यह प्रयास अब शुरू हो भी गया है। संयोग है या सोची समझी रणनीति यह कहना मुश्किल है। ईडी के धुँवाधार सीरियल छापे पहले कोयला अब शराब को घेरे में लेकर किये जा रहे हैं। 2000 करोड़ के शराब घोटाले का खुलासा करना,प्रेस विज्ञप्ति जारी करना और कुछ लोगों का नाम लेने के साथ उनकी गिरफ्तारी कर लेना कुछ पर गिरफ्तारी की तलवार लटकाने की स्थिति बनना। तुरंत बाद भाजपा का कांग्रेस सरकार पर इसी मुद्दे पर हमलावर होने की बात व बयानबाजी तेज होने को ना सिर्फ कांग्रेस बल्कि जनता भी शक की नजर से देखने लगी है। इधर कांग्रेस ने पूछा कि ईडी भाजपा के कार्यकाल के भ्रष्टाचारों पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है। हजारों करोड़ का नान घोटाला,हजारों के नाम राशनकार्ड से काटने पर कहा कि उनका राशन का लंबे समय तक घोटाला किया,बलौदा बाजार का एक हजार करोड़ का धान घोटाला के साथ ,करोड़ों का शराब घोटाला व अन्य गड़बडिय़ों पर ईडी मौन क्यों है ? मुख्यमंत्री ने तो यह तक कह दिया है कि स्थानीय भाजपा नेताओं के पास हमारे कामों के सामने कहने को कुछ भी नहीं है। मुद्दा विहीन भाजपा ईडी के सहारे चुनाव में फतह चाहती है। इसलिए सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। जनता के बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि ईडी क्यों हमारे महाधिवेशन से लेकर अब तक पीछे पड़ी है।
आजकल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में सभी दलों के प्रवक्तागण आ गए हैं। आये दिन होने वाले टीवी डिबेट में एक दृश्य लगभग बार बार दोहराया जा रहा है। भाजपा के प्रवक्ता कहते हैं कांग्रेस सरकार व उसका मुख्यमंत्री भ्रष्टाचारी है। कांग्रेस के प्रवक्तागन कहते हैं 15 साल भाजपा की सरकार व उनके मुख्यमंत्री भयानक भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। ये कहते है कि उन्होने करोड़ों का घोटाला किया वे कहते हैं कि इन्होंने करोड़ों का घोटाला किया। अब टीवी डिबेट की श्रोता जनता बिचारी किसकी बात माने। कौन भ्रष्टाचारी है कौन नहीं। सोचने लगती है कि क्या हर साख पर ….. ही बैठे है क्या ? अब अंजामें गुलिशतां क्या होगा? भला हो इन प्रवक्ताओं का जिन्होंने हमारी आंखें खोल दी कि जिन्हें हम उम्मीदों के साथ चुनकर सरकार बनाने भेजते हैं। गद्दी पर बैठते ही वे घोटाले करने लगते हैं। चाहे ये हों या वो हों ,या कोई और? ये क्या तमाशा है ? अब हम भरोसा करें तो किस पर करें? जनता यह सोच कर ही परेशान है। सोचती है कि क्या हमारे टैक्स का पैसा खर्च करने का हम जो अधिकार इन नेताओं को उन्हें चुनाव में चुनकर दे देते हैं। क्या ये इनकी पैतृक संपत्ति है जो भ्रष्टाचार करने की हिम्मत इनमें आ जाती है। दूसरी बात यह कि हम अपने राज्य की ही बात करें तो छतीसगढ़ में 20 सालों से सभी सरकारों व उनके मुखियाओं पर लगे करोड़ों के घोटाले के आरोपों में हमने आजतक एक नेता को भी सजा पाते नहीं देखा। सभी कहते हैं कि हमारी जेब में सबूत है, समय आने पर उसका जनता के बीच खुलासा करेंगें आजतक खुलासा नहीं देखा है। वो समय भी आते नहीं देखा। जनता सोच रही है कि क्या हम सब मूर्ख समझे जा रहे हैं। सरकारें बनने के बाद अगर सभी एक राह पर अपने सिस्टम के दबाव में काम करने मजबूर हो जाते हैं,तो फिर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपों के मायने क्या हैं। शायद सिर्फ सत्ता पाने एक दूसरे को बदनाम करने का साधन मात्र हैं। सत्ता पाने के बाद आपको भी वही करना है ,जो वे कर रहे थे , तो आरोप प्रत्यऱोप करना व अपने ही राज्य सरकारों को बदनाम करना बंद करिए। सत्ता पाने के कोई और रास्ते ढूँढिय़े।

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चुनाव आते जाते रहेंगे, छत्तीसगढ़ी सद्भाव तो मत बिगाड़ो https://samacharpacheesa.com/?p=6797 Wed, 26 Apr 2023 07:34:09 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6797 उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब छतीसगढ़ में बुलडोजर के दम पर चुनाव वैतरणी पार लगाना चाहती है छतीसगढ़ भाजपा। आज तक देखा गया है कि छतीसगढ़ के भाजपा के राजनेता शांत स्वभाव के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। मगर यह देखने में आ रहे हैं कि ये शांत स्वाभाव के नेता 2023 व 2024 के आने वाले चुनाव के लिए बेहद आक्रामक व कड़े बयान देने लगे हैं। अभी तक इन्होंने जो भी मुद्दे उठाए उनमें देखा जाए तो धर्मांतरण का मुद्दा एक चर्चित अल्पसंख्यक कौम के विरुद्ध जहर भरने व समाज को दो भाग में बांटने का प्रयास माना गया। कवर्धा-बीरनगांव-नारायणपुर ऐसे कांड को हिन्दू पक्ष के साथ खड़े होकर अपने स्पष्ट हिदुत्व के एजेंडे को बल दिया गया। इसमें भी लोगों ने माना कि यह बांटने का प्रयास ही है। पहले कहा गया था कि हम स्थानीय 15 साल की भाजपा सरकार के विकास कार्यों पर चुनाव में जायेंगें। उसके बाद फिर कहा कि हम प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के देश व्यापी जनहित के मुद्दों व उनकी सरकार के द्वारा किये गए विकास कार्यो व सुधार कार्यक्रमों के आधार पर चुनाव में जायेंगें। अचानक पिछले तीन महीने से अभियान चला कर भूपेश सरकार की कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाना शुरू किया गया। एक माहौल बनाने में भाजपा जुट गई। कह सकते हैं कि एक एक घटनाओं पर माहौल बनाया गया। कुछ आरोप सफल कुछ असफल हुए, पर माहौल तो बन ही गया। अब अपनी इस आंशिक सफलता के बाद भाजपा के नेताओं ने इसी योजना के अगले चरण की रणनीति के तहत एक धमाकेदार बयान देकर प्रदेश में तहलका मचा दिया। अपनी 15 साल की सरकार के विकास,धर्म अधर्म की बात उठाने के बाद,मोदी के विकास की बात करते हुए ,मोदी पर अपना विश्वास जताया अब अचानक अपराधियों पर बुलडोजर चलवाने की घोषणा कर जनता को आंदोलित करने का महत्वपूर्ण व प्रभावशाली प्रयास किया गया है। यहां मुख्य मंत्री भूपेश बघेल को बोलने का अवसर प्रदान भी कर दिया। वे चूके भी नहीं। उन्होने कह भी दिया कि भाजपा को नरेंद्र मोदी चुनाव जिताऊ नहीं दिख रहे हैं। अब योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व स्वीकार किया जा रहा है। अपनी अपनी रणनीति अपना अपना एजेंडा लेकर दोनों ही प्रमुख दल चल रहे हैं। कांग्रेस गांव – गरीब- किसान व भेंट मुलाकात के माध्यम से अपने आपको सफल मान कर अपना प्रचार कर रही है। भाजपा अभी भी किस वास्तविक मुद्दे पर डटेगी, हिंदुत्व-धर्मांतरण-कानून व्यवस्था-15 साल की रमन सरकार की उपलब्धियों-मोदी सरकार की उपलब्धियों-योगी आदित्यनाथ की बुलडोजर संस्कृति अथवा अपने नए व कांग्रेस से कुछ आगे बढऩे के वायदे वाले घोषणापत्र,किस पर केंद्रित चुनाव लड़ेगी यह रणनीति कहीं भी स्पष्ट नहीं है। शायद यही भाजपा की असली रणनीति है। संभवत: इनसे अलग कोई बड़ा धमाका चुनाव के पहले वो कर देने के साथ पूरा पासा ही पलटने वाली है। प्रदेश में अभूतपूर्व रूप से लगातार ईडी व अन्य केंद्रीय एजेंसियों की मौजूदगी है। कोयले के बाद अब शराब पर उसकी कड़ी नजर व लगातार पूछताछ हो रही है। नेताओं व अधिकारियों पर शिकंजा कसने को भी चुनाव के नजरिये से देखा जा रहा है। कल ही कुछ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से भेंट कर ईडी द्वारा प्रताडि़त करने की जानकारी दी गई है।
अब हम ताजा बयान पर चर्चा करें तो सरकार आने पर माफियाओं पर बुलडोजर चलवाने की बड़ी बात कहने को कैसे देखा जाए ? उत्तर प्रदेश में तो नामी गिरामी माफियाओं का गढ़ माना जाता है। अपराधियों व माफियाओं को राजनैतिक संरक्षण व उन्हें महत्व देकर चुनाव जीतने की प्रक्रिया भी वहीं ज्यादा अपनाई जाती है। ऐसी खबरें अक्सर अखबारों की सुर्खियां बनती हैं। अभी हाल अतीक व उसके भाई और बेटे को गोली मारने की घटना हुई। इसके पहले भी अपराधियों को मुठभेड़ में मारने की घटना हुई। इसी स्तर के अनेक माफियाओं के घरों कार्यालयों पर बुलडोजर चला दिया गया। वहां अपराध एक बड़ा काम है। यही कारण है कि राजनैतिक दल भी इनसे मदद लेते व देते हैं। अब आप सोचें कि हमारे शांत छतीसगढ़ में कहां ऐसे माफिया हैं जो अपने द्वारा हत्या करवाए जाने को दर्शाते हैं। समाज पर दहशत फैला कर राज करने का प्रयास करते हैं। जिस तरह उत्तर प्रदेश में होता देखा जाता है। लेखक की नजर में तो ऐसा कोई माफिया इस छतीसगढ़ की धरती पर आज तक तो नहीं दिखा जो सरकारों को आंख दिखा सके। ऐसा कोई अपराधी विधायक या सांसद बना हो। अतीक अहमद जैसी गैंग बनाई हो,राजा भैया या उत्तर प्रदेश के अन्य माफियाओं की तरह की घटनाओं या हत्याओं को अंजाम दिया हो । आखिर किन पर चलेगा बुलडोजर। दरअसल मसला चुनाव जीतने का है। दोनों दल रामराज लाने की कोशिश कर रहे हैं। एक जय श्रीराम के नारे के साथ राम को आस्था का केंद्र मान कर और दूसरा दल जयसियाराम के नारे के साथ राम का मामा बन कर अपनी राजनितई कर रहे हैं। ऐसी चिंता किसी की भी नहीं दिखती की रामराज में सबको एक नजर से देखा जाता था। यहां भी संत घासीदास को सभी दल पूजते है उनका कहना था कि मनखे मनखे एक समान , कबीर दास जी को मानने वाले यहां बहुत हैं। घृणा को कहीं भी स्थान नहीं देने व प्रेम सद्भाव से रहने का उन्होंने संदेश दिया। चुनाव आते जाते रहेंगे सद्भाव बिगड़ा तो यह शांति का टापू कैसा रूप लेगा चिंता इस बात की होनी चाहिए।

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कोयला व शराब छत्तीसगढ़ चुनाव के लिए बने अभिशाप https://samacharpacheesa.com/?p=6413 Thu, 23 Feb 2023 05:50:05 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6413 कोयला और शराब छतीसगढ़ के लिए वरदान के साथ अभिशाप बन गए प्रतीत हो रहे हैं। वरदान इसलिए हैं, कि इनके माध्यम से राजस्व की बड़ी आय सरकार के खजाने में आती है। अभिशाप इन मायनों में कि इस माध्यम से राजस्व के साथ निजी राजस्व वसूली के सुराग प्रवर्तन निदेशालय को मिले हैं। कोयला की जांच में अब तक अनेक आईएएस व शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे अन्य अधिकारी जेल के सींखचों के पीछे पहुंचा दिए गए हैं। अनेकों पर नजर है। कल ही इनमें से छतीसगढ़ के 6 कांग्रेसी नेताओं पर ईडी ने हाथ डाला। पता चला है कि अब कोयला के साथ शराब की अवैध कमाई को भी ईडी ने लक्ष्य बना लिया है। छापा पडऩा कोई एतराज की बात नहीं है, क्योंकि माना जाता है कि ईडी देश की बेहद शक्तिशाली ,अधिकारों से सम्पन्न संस्था है। जब भी वह किसी पर हाथ डालेगी तो सबूत इक_े करने के बाद ही डालेगी। यह भी देखा गया है कि ईडी ने अब तक कि गई जांच या छापों में दो-तीन दिनों तक पूछताछ की है। कल के छापों कहें या जांच प्रक्रिया कहें तीन बजे रात तक सभी नेताओं के यहां सम्पन्न हो गई। पूछताछ के बाद फिलहाल तो सभी छोड़ दिये गए। छापों के दौरान कांग्रेस जनों ने सभी प्रताडि़त हो रहे नेताओं के निवास पर उपस्थिति देकर अपने तीखे तेवर भी दिखाए। ईडी पर उसका कुछ असर पड़ा हो ऐसा दिखाई तो नहीं दिया , लेकिन समझ में आया कि कांग्रेस जनों के तेवर व आक्रोश की तेजी देख कर भविष्य में कुछ अप्रिय घट जाए तो आश्चर्य की बात नहीं होगी। दरअसल कांग्रेस जनों के बीच तो यह सवाल पहले से है ही ,अब तो जनता के बीच भी यह चर्चा सुनी जाने लगी कि वाकई क्या बेईमानी सिर्फ कांग्रेसी ही कर रहे हैं ? क्या देश प्रदेश के सभी भाजपाई नेता दूध के धुले हुए हैं। कोई भी बेईमान नहीं हुआ ? क्या भाजपाई सरकारों वाले प्रदेशों में पूरी तरह रामराज्य वो भी 100 प्रतिशत ईमानदारी के साथ चल रहा है ? यह प्रश्न जनचर्चा में विचारों की ऊंचाई पर जरूर तैर रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने खुद सीधा आरोप लगाकर ईडी की कार्यवाही पर शंका पैदा कर दी है । आरोप लगा कर कहा है कि क्या ईडी को डॉ.रमनसिंह सरकार के दौर का नान घोटाला, हेलीकाप्टर मामला ,धान घोटाला की जांच नहीं करनी चाहिए ? आरोप यह भी लगाया कि यहां जो भी किया जा रहा है, सब भाजपा की केंद्र सरकार व भाजपा के स्थानीय नेताओं के इशारे पर हो रहा है ? प्रमाण के रूप में उन्होंने कहा कि रमन सिंह ने प्रेस को दिए बयान में पहले दिन जो जो कहा दूसरे दिन हूबहू वही बात ईडी के अधिकारियों ने कही,ये क्या दर्शाता है ? क्या यह नहीं लगता कि ईडी के लिए रमनसिंह प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे हैं। पहले ही उस बात को कह देते हैं, जो ईडी को कल कहना है। लोगों में इस बात की भी भरपूर चर्चा है कि कहीं यह कांग्रेस के महाधिवेशन को अनिश्चितता में डालने का भाजपा का प्रयास तो नहीं। ठीक तीन दिन पहले कोष पर नियंत्रण रखने वाले कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल पर हाथ डालने के प्रयास को इसी नजरिये से देखा जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं ने भी यही बात बार बार कही है। लोग इस दृष्टिकोण से सोच भी रहे हैं।
लोगों में यह भी चर्चा है कि ईडी को अपनी निष्पक्षता के लिए 2003 से अब तक के कार्यकाल में कोयले व शराब में किसने कितनी दलाली ली है। ? वे कौन लोग हैं? इस दिशा में काम करना चाहिए था तब कोई भी हल्ला होना संभव नहीं होता। ईडी को इस बात से क्या लेना देना है कि कोयला की दलाली या कमीशन खाने वाला भाजपा का है या कांग्रेस का? उसे सब पर हाथ डालना था। यह भी कि कोयले की दलाली व कमीशन का काम प्रदेश के गठन के दौर से लोग सुनते आ रहे हैं। चर्चा थी तो कुछ न कुछ सच्चाई भी होगी । किसी भी बात की यूं ही चर्चा नहीं होती। रमन सरकार के तीसरे कार्यकाल में रायगढ़ में हुए भाजपा के सम्मेलन में रमनसिंह ने भाजपाइयों से कथित रूप से कमीशन बंद करने की बात की थी। वो कौन से कमीशन की बात थी? यह भी सवाल उठ रहे हैं।
ईडी की कार्यवाही पर कोई कुछ नहीं कहना चाहता भ्रष्टाचार जिसने किया उसे सजा मिले,सब यही चाहते हैं। ईडी के तौर तरीके व एकतरफा दृष्टिकोण के कारण यह स्वाभाविक शंकाएं उभर रही हैं कि , यह केंद्र सरकार की कांग्रेस की प्रदेश सरकार से बदला लेने की अथवा आगामी चुनाव को मद्देनजर व महाधिवेशन को बाधा पहुंचने की कोशिश के सिवाय कुछ नहीं है। एक नेता के विरोध प्रदर्शन करने पर ईडी के अधिकारी ने कह भी दिया कि हम उपर के आदेश पर काम कर रहे हैं। अब यह ऊपर वाला कौन हैं ? उनके विभागीय आला अधिकरी या केंद्र सरकार के सम्बंधित मंत्रालय सम्हालने वाले केंद्रीय मंत्री ? जनता को जो समझना हो समझ ले।

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‘आप’ के विरोध के बावजूद पहले ली मनोनीत पार्षदों ने शपथ https://samacharpacheesa.com/?p=5881 Tue, 24 Jan 2023 09:28:08 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5881 नई दिल्ली। आप के पार्षदों के विरोध के बाद भी पहले मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाई गई। सबसे पहले मनोनीत पार्षद विनोद फिर लक्ष्मण ने शपथ ली। इसके बाद बाकी मनोनीत सदस्यों मुकेश मान, सुनील चौहान, राजकुमार भाटिया, संजय त्यागी ने शपथ ग्रहण किया। मनोज कुमार जैन, रोहताश कुमार, श्वेता कमल खत्री के बाद वार्ड संख्या एक से चुनाव जीतकर आए पार्षदों का शपथ ग्रहण शुरू हुआ।
बॉबी किन्नर ने शपथ लिया तो उन्हें सबसे ज्यादा अटेंशन मिला। दिल्ली में पहली बार कोई ट्रांसजेंडर चुनाव जीतकर सदन में पहुंचा है। बॉबी किन्नर ने सुल्तानपुरी वार्ड से चुनाव जीता है और आज पार्षद के रूप में शपथ ग्रहण किया है। इसके बाद भाजपा की मेयर प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने शपथ ग्रहण किया।
आम आदमी पार्टी व भाजपा में एमसीडी में पार्षद मनोनीत करने के मामले में चल रहे टकराव के बीच दिल्ली की मिनी सरकार को मंगलवार को ‘बिग बॉस’ मिल सकता है। आज नगर निगम के सदन में पार्षदों को शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद मेयर, डिप्टी मेयर व स्टैंडिंग काउंसिल के सदस्यों का चुनाव होगा।
वहीं सदन की कार्रवाई शुरू होने से पहले भारी मात्रा में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि पिछली बार जैसा हंगामा न हो। इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाए हैं। आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट किया है, भाजपा आज नगर निगम में कब्जा करने के लिए लाठी डंडों के साथ फोर्स लाई है । क्या किसी सदन में ये देखा है ?

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मप्र में भाजपा के लिए राह आसान नहीं https://samacharpacheesa.com/?p=5632 Thu, 05 Jan 2023 06:24:47 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5632 मध्यप्रदेश में मिशन 2023 को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पांचवी बार राज्य में कमल खिलाने का सपना संजो रही भाजपा को एक सर्वे ने परेशानी में डाल दिया है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने आगामी चुनाव को देखते हुए अलग-अलग सर्वे कराए हैं। इनमें अधिकांश के नतीजे मिलते जुलते आए हैं। इस सर्वे में 50 से अधिक मौजूदा विधायकों की स्थिति खराब बताई जा रही है। वहीं करीब एक दर्जन से अधिक मंत्रियों में आधे से ज्यादा सिंधिया समर्थक मंत्रियों की स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है। संगठन के सर्वे के बाद आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की संभावना बढ़ गई है। सर्वे की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए यदि टिकट वितरण में गुजरात फॉर्मूला भी लागू किया गया, तो मौजूदा विधायकों में करीब 40-50 विधायकों के टिकट पर संकट खड़ा हो जाएगा। इससे पार्टी नए और युवा चेहरे को मौका देगी। इस रिपोर्ट में ग्वालियर चंबल संभाग के साथ विंध्य और महाकौशल अंचल में पार्टी को ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा मालवा बेल्ट की भी कुछ सीटों पर पार्टी की हालत ठीक नहीं बताई जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जिन 230 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। इस बार उस सूची में करीब 100 नाम बदलने के आसार नजर आ रहे हैं। पिछले चुनावों में पार्टी को आदिवासी सीटों पर भारी नुकसान हुआ था। इस बार पार्टी ने नए आदिवासी नेताओं को ज्यादा तवज्जो देने का मन बनाया है। विधानसभा चुनावों में नए चेहरे सामने आने की उम्मीद है। 2018 के चुनाव में भाजपा ने 109 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बाद राज्य में हुए उपचुनावों में भाजपा की सीटें बढ़कर 127 हो गई। जबकि कांग्रेस की सीटें 114 से घटकर 96 पर रह गई हैं। नए साल शुरू होते ही भाजपा ने 100 से अधिक हारी सीटों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। ऐसी सीटों पर बूथ अध्यक्ष, महामंत्री और बीएलए को पार्टी ने छह माह पहले प्रशिक्षण भी दिया था। अब उन्हें नए सिर से सक्रिय करने की कवायद संगठन ने शुरू कर दी है। भाजपा ने हर बूथ पर वोट शेयर बढाकर 51 फीसदी करने का टारगेट तय किया है। कई जिलों में निष्क्रिय पड़ी बूथ समितियों को भी संगठन और जनप्रतिनिधि एक्टिव करने में जुट गए हैं। संगठन को मिले फीडबैक में प्रभारी मंत्रियों की उदासीनता, जनप्रतिनिधियों और मैदानी कार्यकर्ताओं के बीच संवादहीनता की स्थिति सामने आई है। हारी हुई सभी सीटों के प्रभारी और संबंधित क्षेत्रों के नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों के फीडबैक संगठन के नेताओं को दे दिए हैं। इनमें ग्वालियर-चंबल, महाकौशल अंचल से लेकर विंध्य, बुंदेलखंड और मालवा-निमाड़ की सीटों पर पार्टी की स्थिति खराब बताई गई है। यहीं कारण है कि संगठन ने हारी हुई सीटों और आदिवासी सीटों पर जीत के लिए अलग से रणनीति बनाने का निर्णय लिया है।

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धर्मांतरण-आरक्षण पर तनाव है, आगे चुनाव है ना https://samacharpacheesa.com/?p=5627 Wed, 04 Jan 2023 06:01:43 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5627 राहत इंदौरी के शेर की लाइन है ‘सरहदों पर तनाव है क्या ? जरा पता करो चुनाव है क्या? इसी तर्ज में 2023 के चुनाव का आगाज होना शुरू हो आया है। जैसे जैसे समय खिसकेगा वैसे वैसे यह तनाव बढ़ते बुखार की तरह बढऩे लगेगा।दोनों दल अपने अपने एजेंडे पर खेलना तेजी से प्रारंभ कर चुके हैं। धर्मांतरण का जिन्न कवर्धा के बाद अब फिर नारायणपुर की घटना के सहारे बोतल से बाहर निकल गया है। विधंसबह चल रही है। तनाव तो बढऩा ही था। आज सदन में बढा भी है। इसीलिए यह शेर याद भी आया और सटीक बैठ भी रहा है। विधानसभा आज़ दूसरे दिन भी आरक्षण व धर्मांतरण के मुद्दे पर गरम रही। 70 पर 14 भारी पड़ गए। या यूं भी कह सकते हैं कि 70 पे तीन याने बृजमोहन अग्रवाल-अजय चंद्राकर-शिवरतन की तिकड़ी ही भारी पड़ जाती है। विधान सभा में प्रचलित शब्द ध्वनि की बात करें तो 70 की ध्वनि पर 3 या कह लें कि 14 की ध्वनि तेज निकलती है। 70 की आवाज के बीच 14 की गूंज अधिक सुनाई पड़ती है। आज तो आरक्षण का साथ धर्मांतरण भी जुड़ गया यानी करेला वो भी नीम चढ़ा। लोग कहने लगे हैं कि लगता है अब भाजपा का चुनावी रथ अपने पहिये घुमाना शरू करने लगा है। कांग्रेस भी कोई कमी नहीं करना चाहती। सरकार के मुख्य मंत्री भूपेश बघेल आंदोलनों -प्रदर्शन-संघर्षशीलता का प्रतीक हैं। अपनी युवा अवस्था से आंदोलनों का बड़ा अनुभव रखते हैं। प्रदर्शन और उनकी राजनैतिक समझ को भी लोगों ने देख लिया है। सीडी कांड में जमानत नहीं ली, जेल जाने का निर्णय लिया। इसी संघर्ष के रास्ते सरकार में पहुंच गए। मुख्य मंत्री बन गए। सरकार में भी अब उन्हें आंदोलन का वो जुनून कभी कभी आ जाता है। आज आरक्षण के मामले में राज्यपाल को घेरने के साथ भाजपा को भी कठघरे में लाने का काम किया। राज्यपाल के पद को भी जनता के सामने खड़ा करने का प्रयास किया। संविधानिक पद की गरिमा खुद मुख्यमंत्री की मौजूदगी में धूमिल होता दिखा। हजारों की बड़ी संख्या में उपस्थिति कार्यकर्ताओं ने दी। इनमें आम आदमी की कितनी मौजूदगी थी यह तो प्रमाणित नहीं किया जा सकता। लोगों के बीच यह संदेश जरूर चला गया कि संवैधानिक पद को भी घेरे में लिया जा सकता है। इस पद पर आसीन व्यक्ति के अच्छे बुरे कामों की सार्वजनिक व्याख्या की जा सकती है। यह अलग बात है कि अच्छा क्या है और बुरा क्या है इसकी समीक्षा कौन और कैसे करेगा। प्रदेश में हुए इस विवाद से एक और संदेश भी जा रहा है कि राज्यपाल जैसे गरिमामयी पद की भूमिका तेजी से विवेक के निर्णय की ओर बढ़ रही है। कहीं राज्यों के हाल दिल्ली की सरकार की तरह तो नहीं हो जाएंगे। जिसे चुनती जनता है , पर अधिक अधिकार नियुक्त राज्यपाल का होता है। कहीं यह राज्यपालों की भूमिकाएं बदलने का समय तो नहीं आ गया ?

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केवल राजनीति से कुछ नहीं होता https://samacharpacheesa.com/?p=5475 Wed, 28 Dec 2022 05:56:35 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5475 भारत की संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव के समय राजनीतिक दलों के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप होता है। एक बार सरकार बन जाए तो फिर पक्ष और विपक्ष मिलकर राज्य के लिए कार्य करते। यही अवधारणा लोकतंत्र की है। समय के साथ लोकतांत्रिक प्रणाली में अनेक कमजोरी आईं, जिनमें से एक राजनीतिक दलों के बीच में परस्पर बैर-भाव की व्याप्ति है। अब राजनीति केवल चुनाव के समय नहीं होती बल्कि पूरे 5 साल सत्ता और विपक्ष राजनीति में लीन रहती है। अगर सरकार कुछ राज्य के हित में भी काम कर रही है तो विपक्ष केवल उसका विरोध करता है। विपक्ष ऐसा करे तो भी समझ में आता है लेकिन सरकार चलाने वाली पार्टी भी जनता के कल्याण और राज्य के विकास करने के स्थान पर राजनीति करने लग जाए तो क्या होगा? छत्तीसगढ़ की राजधानी में निर्माणाधीन (भूपेश सरकार के गठन के बाद आधे अधूरे पड़े) स्काईवॉक को लेकर राजनीति शुरु हो गयी है। वैसे तो चुनाव के पहले ही स्काईवॉक की उपयोगिता को लेकर सवाल खड़े होने लगे है। लेकिन फिर भी कुल बजट का लगभग आधा पैसा 36 करोड़ रुपए खर्च कर जयस्तंभ चौक से लेकर अंबेडकर अस्पताल तक एक ढांचा खड़ा हो चुका था। सरकार बदलने के बाद स्काईवॉक के निर्माण कार्य को रोक दिया गया। अब 4 साल बाद इसे पूरा करना भी चाहे तो एक ओर इसके निर्माण की लागत बढ़ गई है तो दूसरी ओर जो पहले बना था वह जर्जर हो गया है। इसका भविष्य क्या होगा इसकी एक समिति भी बनी थी। लोगों ने सुझाव भी दिए थे लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। अब अचानक कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने इसके निर्माण में अनियमितता के आंकड़े प्रस्तुत कर इसकी जांच करने की मांग कर दी है और सरकार ने इसे मान भी लिया है। अब सरकारी एजेंसियां भ्रष्टाचार की जांच कैसे करती है और इसमें देरी कितनी लगती है यह बताने की आवश्यकता नहीं है। स्काईवॉक को लेकर केवल राजनीति हो रही है। जनता की गाढ़ी कमाई से जो हिस्सा बनकर तैयार हुआ है उसके उपयोग की जवाबदेही किसी के पास नहीं है। इसी तरह की राजनीति प्रदेश में आरक्षण को लेकर हो रही है। प्रदेश का बेरोजगार युवा कई वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा हुआ है। कुछ परीक्षाएं स्थगित है तो कुछ परीक्षाओं के परिणाम की प्रतीक्षा है। आरक्षण विवाद को लेकर मामला अटका हुआ है। राज्य चलाने के लिए सरकार को रास्ता निकालना चाहिए। मामले को उलझाकर उस राजनीति करें यह ठीक नहीं है।

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