छत्तीसगढ़ विधानसभा – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 18 Jul 2023 07:51:27 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 विधानसभा का मानसून सत्र आज से, 3 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट लाएगी सरकार https://samacharpacheesa.com/?p=7392 Tue, 18 Jul 2023 07:51:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7392 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। पांचवीं विधानसभा का आखिरी सत्र 18 से 21 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान विपक्ष सत्तापक्ष से सवाल कर उन्हें घेरने का काम करेगा। इस सत्र में राज्य सरकार 3 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट लाएगी। सदन के पहले पहले दिन बीजेपी विधायक विद्यारतन भसीन और अविभाजित मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री भानुप्रताप सिंह को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित रहेगी। इसके बाद तीन दिन हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही चलेगी।
सत्र के अंतिम दिन सरकार को विपक्ष के अविश्वास का सामना करना पड़ेगा। इस बार का सत्र काफी हंगामेदार होने वाला है। क्योंकि महालेखाकार की रिपोर्ट पेश किए जाने पर हंगामा होना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर टीएस सिंहदेव के डिप्टी सीएम और पूर्व पीसीसी चीफ मोहन मरकाम के मंत्री बनाए जाने से सदन में बैठक व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिलेगी। टीएस बाबा सीएम भूपेश बघेल के नजदीक ही बैठ सकते हैं। वहीं मरकाम को विधायक वाली बैठक व्यवस्था से अलग हटकर मंत्रियों के बीच दिखेंगे। बता दें कि पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम के इस्तीफे के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है, लेकिन उनकी बैठक व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिलेगा। वहीं बीजेपी विधायक विद्यारतन भसीन के निधन के बाद विपक्ष की बैठक व्यवस्था में भी बदलाव दिखेगा।
550 सवालों का सामना करेगा कैबिनेट
इस सत्र में विधायकों ने 550 सवाल लगाए हैं। इन सवालों का सामना कैबिनेट को करना पड़ेगा। वहीं सरकार की ओर से 2022-23 के लिए महालेखाकार की रिपोर्ट पेश किए जाने की जानकारी है। बात विधेयकों की करें, तो छत्तीसगढ़ मंडी शुल्क संशोधन, निजी विश्वविद्यालय स्थापना, भारतीय स्टाम्प अधिनियम संशोधन विधेयक और विधानसभा सदस्यता संशोधन विधेयक शामिल हैं। इसमें लाभ के दो पद संबंधी एक संशोधन का प्रस्ताव भी है, जिसमें राज्य योजना मंडल की जगह आयोग प्रतिस्थापित किया जाना है।
अविश्वास प्रस्ताव लाएगी बीजेपी
सत्र में विपक्ष की ओर से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना दी जाएगी। इस पर 21 जुलाई को आधी रात तक चर्चा चलने के संकेत हैं। पांचवीं विधानसभा के कार्यकाल में दूसरी बार ये प्रस्ताव लाया जाएगी। हालांकि बीजेपी के 13 विधायकों के होने से इसमें विपक्ष की हार तय मानी जा रही है, फिर भी बीजेपी राज्य सरकार की कमियों और घोटालों के आरोपों को लेकर घेरने का काम करेगी।

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विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष में तकरार https://samacharpacheesa.com/?p=6537 Sat, 04 Mar 2023 05:52:59 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6537 किसी शायर ने खूब लिखा है –
‘दुश्मनी जमकर करो, लेकिन यह गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा ना हो।Ó
यह बात संसदीय लोकतंत्र में बहुत फीट बैठती है। संसद या विधानसभा के भीतर हो या बाहर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंक-झोंक होती है विपक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह सत्तापक्ष को घेरे और उसे नियंत्रित करें। छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी राज्य बनने के बाद से सत्तापक्ष और विपक्ष एक दूसरे के खिलाफ सदन के भीतर बोलते हैं लेकिन सदन के बाहर वे अच्छे मित्र जैसा व्यवहार भी करते हैं। ऐसा व्यवहार होना भी चाहिए क्योंकि विधायक एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता की समस्याओं, देशहित और जनकल्याण के विषय को सदन में उठाता है, वह सरकार के खिलाफ में मुखर होता है, तो मुख्यमंत्री और मंत्री के प्रति दुराग्रह नहीं होता है, वह केवल जनता की भावना से सदन को अवगत कराता है। यही भारतीय लोकतंत्र की खूबी भी है। लोकसभा या राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता जमकर हमला करते हंैं लेकिन जब कोई दावत हो तो एक ही टेबल पर बैठकर हंसते-खिलखिलाते भोजन भी करते हैं। यह व्यवहार जब तक बना है, लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पिछले कुछ सत्रों के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच व्यवहार में जो तल्खी नजर आ रही है, वह स्वस्थ नजर नहीं आती। बजट सत्र विपक्ष के विधायकों के खिलाफ सत्तापक्ष के मंत्री और विधायक जिस प्रकार टीका-टिप्पणी करते हैं वह उचित नहीं है। चूंकि चुनाव के पहले यह आखिरी लंबा सत्र इसलिए मुख्य विपक्ष दल भारतीय जनता पार्टी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती, वहीं कांग्रेस पार्टी भी विपक्ष के इन दांवपेंच का मुकाबल जोर-शोर से करती है। इसके बावजूद सदन में पिछली बार हाथापाई की नौबत आ गई, अभी विपक्ष गर्भगृह में जाकर नारेबाजी करने लगा तो उस पर टिप्पणियां की गई। इसके बाद जो हंगामा देखने को मिल रहा है, उससे छत्तीसगढ़ की संसदीय परंपरा प्रभावित हो रही है।

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विधानसभा में कामकाज ठप https://samacharpacheesa.com/?p=5624 Wed, 04 Jan 2023 05:56:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5624 संसदीय लोकतंत्र में विधानसभा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र दो हिस्सों में बंट गया जिसका पहला हिस्सा विशेष सत्र के रुप में 2 दिसम्बर को आहूत किया गया। एक लंबे अवकाश के बाद सोमवार 2 जनवरी से पुन: प्रारंभ हुआ। 1 माह पूर्व विधानसभा में आरक्षण का विधेयक पारित किया गया था जिस पर राज्यपाल की अनुमति नहीं मिल पायी है। इस मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हो रहा है। पहले और दूसरे दिन बमुश्किल प्रश्नकाल ही संपन्न हो सका, जबकि विधानसभा की कार्य सूची में अनेक महत्वपूर्ण राजकीय कार्य का उल्लेख किया गया था। मंगलवार को 2 विधेयक सदन के पटल पर रखा जाना था जिसमें छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध विधेयक और अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण का संशोधन विधेयक था। आरक्षण विषय पर हंगामा होने के कारण विधेयक प्रस्तुत नहीं किए जा सके। ध्यानाकर्षण पर भी चर्चा नहीं हो सकी। प्रश्नोत्तरी शांतिपूर्ण आज संपन्न हुआ। विधानसभा में विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाती। राज्य में अनेक ऐसे मुद्दे है जिस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। धर्मान्तरण को लेकर बस्तर जल रहा है। अगर इस पर फौरी तौर पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इस विषय पर अगर विधानसभा में चर्चा हो तो इसके सुखद परिणाम निकल सकते है। वैसे तो विपक्ष ने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर स्थगन लेकर आए थे लेकिन उसकी अनुमति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नहीं दी गई। इस विषय पर अगर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा हो जाती तो समस्या की महत्वपूर्ण बिन्दु सामने आती। स्थगन पर जब चर्चा अस्वीकृत कर दी गई तब भाजपा के सदस्य गर्भगृह में आकर स्वमेव निलंबित हो गए। इन सब हंगामे के बीच में दिनभर के लिए सभा की कार्रवाई स्थगित कर दी गई। स्थगित तो इसलिए भी हो गयी क्योंकि कांग्रेस पार्टी का जन अधिकार रैली का आयोजन राजधानी में किया गया था, जिसमें कांग्रेस पार्टी के मंत्रियों और विधायकों को शामिल होना था। इस प्रकार जो चर्चा विधानसभा के सदन में हो सकती है उसे सार्वजनिक तौर पर रैली के माध्यम से करना विधानसभा के प्रति कम होती आस्था को दर्शाता है। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भी बार-बार विधानसभा अध्यक्ष की ओर से यह हिदायत मंत्रियों को दी जा रही है कि वे तैयारी कर सदन में आए। इसका मतलब है कि मंत्री विधानसभा की कार्रवाई को लेकर गंभीर नहीं है। संसदीय लोकतंत्र के मंदिर के प्रति निर्वाचित प्रतिनिधियों की आस्था कम होगी तो यह लोकतंत्र को कमजोर करेगा।

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