छत्तीसगढ़ सरकार – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Mon, 31 Jul 2023 09:15:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 छत्तीसगढ़ सरकार की पहल से एसटी में शामिल हुई 12 जातियां : मुख्यमंत्री बघेल https://samacharpacheesa.com/?p=7613 Mon, 31 Jul 2023 09:15:15 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7613 रायपुर । प्रदेश की 12 जातियों को जनजातियों की सूची में शामिल करने को लेकर एक बार फिर श्रेय की सियासत शुरू हो गई है। भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने अपनी पहल का दावा किया, तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा था, जिसके बाद यह सफलता हासिल हुई है।
पूर्ववर्ती रमन सरकार की पहल पर तंज कसते हुए सीएम बघेल ने कहा कि डबल इंजन की सरकार थी, लेकिन रमन सिंह की चलती नहीं थी। भाजपा के द्वारा पत्र लिखा गया था, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। हमने प्रयास किया तब जाकर सफलता मिली है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव बोल रहे हैं कि 10 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं, केंद्रीय मंत्री 72,000 लोगों को लाभ मिलने की बात कह रहे हैं। भाजपा केवल लाभ लेने का काम कर रही है, लेकिन हमने कई पत्र लिखे।
मुख्यमंत्री बघेल ने मीडिया से चर्चा में कहा कि यूपीए सरकार ने वर्ष 2008 में गारंटी दी थी, जिसमें पांच योजनाएं थी। इन गारंटियों के केंद्रांश को मोदी सरकार घटा रही है। पहले ही योजना में केंद्र की राशि ज्यादा थी, जिसे धीरे-धीरे कम करने का काम किया गया। गरीबों के आवास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अप्रैल से हमने आर्थिक सर्वेक्षण कराया है, जिसमें सबको लाभ मिलेगा।

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छत्तीसगढ़ में बीजेपी का जंगी प्रदर्शन, विधायकों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप https://samacharpacheesa.com/?p=7447 Thu, 20 Jul 2023 10:08:13 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7447 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकार के खिलाफ लगातार धरना और प्रदर्शन के बाद बुधवार की दोपहर को बीजेपी ने उत्तर विधानसभा में व्याप्त बदहाली को लेकर कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के उत्तर विधानसभा के विधायक कुलदीप जुनेजा के खिलाफ नारेबाजी भी की। बीजेपी नेताओं ने कानून व्यवस्था और घोटालों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच थोड़ी बहुत झूमाझटकी भी देखने को मिली।
17 बिंदुओं पर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन- बीजेपी नेताओं ने उत्तर विधायक कुलदीप जुनेजा के खिलाफ 17 बिंदुओं का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा है। जिसमें रायपुर उत्तर विधानसभा में सड़क डामरीकरण में हुए घोटालों की जांच, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल में 200 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप, लोकायुक्त की जांच पर कार्यवाही, विधानसभा के 5 वार्डों से निकलने वाले नाले में हुए अधूरे निर्माण कार्य, अमृत मिशन के अधूरे काम, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, अवैध शराब के साथ ही भू माफिया के द्वारा अतिक्रमण जैसे 17 बिंदुओं की जांच की मांग कलेक्टर से की गई है।
कोंडागांव में भी प्रदर्शन- बीजेपी के पांचों मंडलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं दोनों विधानसभा में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्रीनिवास राव मद्दी, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य लता उसेंडी, संजय पाण्डेय, जिला अध्यक्ष दीपेश अरोरा के सामूहिक नेतृत्व में बड़ी संख्या कार्यकर्ता विधायक निवास घेरने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में विधायक से विधानसभा के विकास के नाम पर आए पैसों के दुरुपयोग पर सवालों की तख्तियां और बैनर पोस्टर थे। इस दौरान प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए।
स्थानीय मुद्दों को लेकर किया प्रदर्शन- स्थानीय मुद्दों जिनमें मक्का प्रसंस्करण इकाई के नाम पर किसानों के साथ छलावा, सड़क बायपास के नाम पर राजनैतिक लाभ लेकर झूठ परोसना, स्टेडियम और अन्य अधूरे निर्माण कार्य, सुराजी ग्राम योजनांतर्गत नरवा, गरुआ, घुरूवा और बाड़ी सहित गौठान में हुए भ्रष्टाचार, महिला स्व सहायता समूहों, बेरोजगारों, उद्यमियों को पर्याप्त साधन, समाधान और मार्गदर्शन दिये बिना बेतरतीब कर्ज बांटकर झूठी वाहवाही बटोरना शामिल था।
रामविचार नेताम ने भी बृहस्पति सिंह के खिलाफ खोला मोर्चा- बलरामपुर के संयुक्त जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने कद्दावर बीजेपी नेता रामविचार नेताम के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता पहुंचे। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार पर कुशासन और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भीड़ कलेक्ट्रेट कार्यालय के पास जमा हो गई। रामविचार नेताम ने इस दौरान एसडीएम को ज्ञापन सौंपा ।पूर्व गृहमंत्री रामविचार नेताम ने प्रदेश कांग्रेस की सरकार और विधायक बृहस्पति सिंह पर आरोप लगाया। नेताम के मुताबिक विधायक फर्जी मुकदमे दर्ज कराते हैं जमीनों के फर्जी पट्टे बनवाते हैं।
बस्तर भी सरकार के खिलाफ हुआ एकजुट- वहीं जगदलपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र शुरू होते ही आदिवासियों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के विरोध में नग्न प्रदर्शन को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। बीजेपी नेता कमल भंजदेव समेत बीजेपी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय विधायक और कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। बीजेपी के मुताबिक कांग्रेस की सरकार ने 36 वादे किए थे। जिनमें किसान, स्व सहायता समूह, शराबबंदी जैसे गंभीर विषय शामिल थे।कांग्रेस सरकार को छत्तीसगढ़ में साढ़े 4 साल पूरे हो चुके हैं और कांग्रेस ने अपना वादा पूरा नहीं किया है। साथ ही जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र में भी काम नहीं हुए हैं। जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी ने कलेक्टर के माध्यम से गवर्नर को ज्ञापन सौंपा है।

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बरसते पानी में भाजपाइयों की दहाड़, कहा- उखाड़ फेंको कांग्रेस सरकार को, लुभावने वादे, पर सब विफल https://samacharpacheesa.com/?p=7369 Mon, 17 Jul 2023 09:23:55 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7369 कबीरधाम। छत्तीसगढ़ सरकार व क्षेत्रीय विधायक पर वादाखिलाफी का आरोप और भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा ने कबीरधाम में जमकर प्रदर्शन किया। सभा करने के बाद भाजपाइयों ने शहर में रैली निकाली। इस दौरान पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल ने कहा कि जिस लुभावने घोषणापत्र की बदौलत कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में सरकार प्राप्त की थी, उसके वादों को पूरा करने में विफल रही है। भाजपा पूरे प्रदेश में क्षेत्रीय विधायक के निवास और कार्यालय का घेराव कर उन्हें वादा पूरा करने प्रदर्शन कर रही है।
विधायक पर विद्वेषपूर्ण राजनीति का आरोप
भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गांधी मैदान में एकत्र हो गए। वहां हुई जनसभा में भाजपाइयों ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे ने कहा कि कवर्धा विधायक मो. अकबर के कार्यकाल में पूरे क्षेत्र में विद्वेषपूर्ण राजनीति की जा रही है। व्यापार करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रताडि़त किया जा रहा है। भाजपा समर्थित सरपंचों को धारा 40 के तहत बर्खास्तगी का डर दिखा कर कांग्रेस प्रवेश कराया जा रहा है। अब चुनाव को सिर्फ तीन ही माह बचे हैं।
भाजपा का मतलब विकास है
सांसद ने कहा कि, जनता भी चुनाव का इंतजार कर रही है। आगामी विधानसभा चुनाव में जनता फिर से भाजपा सरकार बनाएगी, क्योंकि भाजपा सरकार का मतलब विकास है। भाजपा के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष अशोक साहू ने कहा कि मो. अकबर के नेतृत्व में कवर्धा के शांत राजनीतिक माहौल को बिगाडऩे का काम हो रहा है। भाजपा कार्यकर्ता इस सरकार को उखाड़ फेंकने व कवर्धा विधायक को हराने दिन रात काम कर रहे हैं।
18 को पंडरिया में प्रदर्शन
जनसभा के बाद कार्यकर्ता रैली निकाल कर विधायक कार्यालय का घेराव करने के लिए चल दिए। इस दौरान पुलिस ने बैरिकेड लगाकर कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश भी की। काफी नारेबाजी के बाद भाजपा नेताओं ने सरकार और क्षेत्रीय विधायक की विभिन्न नाकामियों को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। अब इसी तहर18 जुलाई को पंडरिया में भी घेराव किया जाएगा।

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शंकराचार्य ने बताया समाधान शराबबंदी के लिए पीना छोड़ दो https://samacharpacheesa.com/?p=7017 Thu, 01 Jun 2023 08:06:22 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7017 छत्तीसगढ़ सरकार के लिए शराबबंदी का वायदा गले की फांस बना हुआ है।कहा जाता है कि वह राजा लोकप्रियता हासिल करता है जो जनता की दैनंदिनी दिनचर्या में कम से कम हस्तक्षेप करता है।जीवन को अपने ढंग से जीने की आजादी प्रदान करता है।प्रजातंत्र की मूल मंशा भी यही मानी गई है। इतिहास में दफन अनेक राजतांत्रिक राजा-महाराजाओं व बादशाहों के किस्से इस मामले में दर्ज हैं। जिन्होंने जनता के जीवन में उनकी इच्छा व उनकी धार्मिक आस्थाओं में चोट पहुंचाने की कोशिश की तो उनका हश्र क्या हुआ।चाहे वो औरंगजेब, मो.तुगलक, चंगेज खान, सिकन्दर से लेकर हिटलर, मुसोलिनी व कोई अन्य हों या अंग्रेजी शासनकाल का काला साम्राज्य हो। 1947 में आजादी के बाद भारतवर्ष में प्रजातंत्र को भारत की जनता ने अपनाया।लगा अब इन सबसे हट कर कुछ अलग ही आने लगा है।आया भी पर जैसे जैसे हम आजादी के वर्षों को भोगते हुए अपने प्रजातांत्रिक शासकों के साथ आगे बढ़े तो सत्ता(तख्ते-ताऊस) का नशा चढऩा शुरू हुआ।बिना सुरक्षा के जनता के बीच बिंदास विचरण करने वाले नेता अपने कर्मों के कारण अब 20-20 कमांडो के बीच अपनी सुरक्षा के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं। अपने जीवन की सुरक्षा के लिए चिंतित दिखाई दे रहे हैं।कोई दूसरा रास्ता नहीं मिल रहा तो प्रजातंत्र में राजाओं की तरह जनता पर अपनी मंशा थोपने का काम वोट पाने के चक्कर में शुरू कर रहे हैं। मुफ्त की रेवड़ी जिसे कहा जा रहा है वो राजनेताओं के घर के पैसे से नहीं बल्कि जनता के टैक्स के पैसे, उन्हें मदद के रूप में जनहित में लौटाने की प्रक्रिया मानी जानी चाहिए।यह जरूर कि मदद जरूरत मंदों को ही मिले यह तय होना चाहिए।कानून बनाने की शक्तियां होने के कारण सरकारें अब बंदिशों के सहारे भी वोट लेने की सोचने लगी है।जनता को सरकारों के बंदिशों के निर्णयों से अपनी प्रजातांत्रिक आजादी घुटती सी नजर आने लगी है। कभी कभी तो ऐसा भी सोचने लगी है कि क्या हम सच में अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुए हैं , या यह सिर्फ अहसास मात्र है ? इतनी बंदिशें इतने अवरोध और ऊपर से हर चीज मंहगाई के मार से ग्रस्त है। देश की जनता सोचती है कि अब आखिर विकल्प है क्या ? प.जवाहरलाल नेहरू से ,लाल बहादुर शास्त्री,गुलजारीलाल नंदा (दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री) इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, चौधरी चरणसिंह,राजीव गांधी,विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर,पी.व्ही.नरसिम्हाराव,अटल बिहारी बाजपेयी,एच.डी.देवेगौड़ा , इंद्र कुमार गुजराल, मनमोहन सिंह, और अब नरेंद्र मोदी के रास्ते पर चल रहा यह महान देश भारतवर्ष, कभी भी महंगाई से निजात नहीं पा सका, ना गरीबी से ऊपर ही उठ पाया। बल्कि इस नए दौर में तो महंगाई के समर्थन करने वाले अंध भक्त भी देखने को मिल रहे हैं , जो कभी नहीं थे। यह जरूर इस देश ने देखा कि अनेक प्रधानमंत्रियों ने अपना नाम पैदा करने करोड़ो का जनधन लुटाया। आज भी लुटा रहे हैं, लेकिन अपने कोष से धन के दुरुपयोग को जनता रोक नहीं पाती। बंदिशों की कितनी बात की जाए , कितनी नहीं? कौन दोषी-कौन नहीं? इसी पचड़े में देश की जनता को कोई और दूसरा विचार आ ही नहीं पाता। किसी एक घटना को जेहन में दबा देने के लिए अन्य घटनाओं की इतनी परतें एक के ऊपर एक ऐसे जमा दी जाती हैं कि मूल समस्या गहरे दफन हो जाती हैं। जनता के लिए बस एक ही शब्द कहने को बच जाता है। बस “भारत भाग्य विधाता” कहा जाए। यानी भारत की जनता का भाग्य विधाता के ही हाथ है, जो इसे चला रहें हैं। महंगाई,पेट्रोल के दाम,अनाज व तेल के दाम अनेक घटनाएं जनता को याद ना आये। उसके जेहन में सिर्फ अनेक दूसरे-दूसरे प्रश्न उठते रहें ,और वो इसमें ही उलझता रहे। मूल समस्या से उसका ध्यान बंटा रहे। इसके रास्ते सरकारों के नुमाइंदे आसानी से निकाल लेते हैं। देश में यही परिदृश्य लंबे समय से दिखाई दे रहा है। कोई कुछ कर सके, यह स्थिति भी नही है। सरकारें यह क्यों नहीं सोचती कि इसी जनता के दिये मतों से ही वे सरकार में हैं। जनता के जीवन के सफर में कम से कम बाधा व हस्तक्षेप रहे, इसका ख्याल क्यों नहीं रखतीं? जैसे ही सरकारें बन जाती हैं, बंदिशों का दौर शुरू हो जाता है। अरे भाई जनता को अपनी भलाई स्वयं निर्धारित करने दीजिए। देश की दो तीन सरकारों ने शराब बंदी की, क्या परिणाम हुआ? जाने समझे बगैर क्यों छतीसगढ़ में शराबबंदी को वायदे में शामिल किया गया। यह समझ कोई नहीं पाया। अब जाकर सरकार को इसका हर पक्ष समझ में आ रहा है। दिनों दिन बयान बदल रहे हैं। भाजपा हो या कांग्रेस या कोई अन्य सब जानते हैं ,शराबबंदी का सच क्या है। इस आदिवासी बाहुल्य राज्य में यह झटके में करना असंभव ही नहीं,नामुमकिन है। सच वो है जो कल ज्योतिष्पीठाधीश्वर शकराचार्य महाराज अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने कहा कि शराबबंदी के लिए कानून बनने की बाट क्यों जोह रहे हैं? उसका सीधा सा हल है कि जो शराबबंदी चाहते हैं वे शराब पीना स्वयं से ही छोड़ दें। कानून नहीं बना रहे , इसलिए सरकार से नाराज होने से हल नहीं है। खुद शराब पीना छोड़ दें तत्काल समाधान हो जाएगा। शंकराचार्य जी ने सच कह दिया मानना ना मानना आपका काम है। यानी आप शराबबंदी चाहते हैं तो तत्काल छोड़ दें। कानून से नहीं यह समस्या दृढ़ इच्छाशक्ति से सुलझेगी। शंकराचार्य जी की बात आप समझे कि नहीं? ना समझे वो………?

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आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश https://samacharpacheesa.com/?p=6822 Wed, 03 May 2023 08:50:00 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6822 प्रदेश में आरक्षण को लेकर भ्रम का वातावरण है, उस पर सुप्रीम कोर्ट के एक ऑर्डर को लेकर मीडिया से राजनीति तक जिस प्रकार से प्रचारित किया गया, उससे भ्रम और बढ़ गया है। सोमवार को इस तरह की खबर आई कि प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत आरक्षण को जारी रखने का फैसला दे दिया है। मतलब उच्च न्यायालय ने सितंबर में प्रदेश में लागू 58 प्रतिशत आरक्षण को खारिज कर दिया था उसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस खबर के बाद सरकार ने भी बैठक कर भर्ती परीक्षा कराने का निर्णय लिया ऐसी खबर आई। आज जब सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी मिली तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत को लेकर कोई आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने केवल प्रदेश में भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया को जारी रखने के लिए कहा है। इस आदेश में न तो उच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख है और न ही आरक्षण कोटा को लेकर कोई आंकड़ा। ऑर्डर में तो यह भी लिखा है कि प्रदेश में जो भी निर्णय लिया जाएगा वह कोर्ट के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगा। अब सवाल यह भाई कि जब सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत के बारे में कुछ कहा ही नहीं तो मीडिया से लेकर सरकार तक में इसकी चर्चा कैसे हुई? इसका दोषी कौन है? पहली बात तो सरकार के पक्ष रखने वाले वकीलों ने मीडिया और सरकार को जो बताया होगा वही बात सार्वजनिक हुई होगी, इसका मतलब इस भ्रम को फैलाने के दोषी वकील हैं? या मीडिया ने बिना जानकारी लिए आधे अधूरे तथ्य के आधार पर समाचार परोस दिया? अगर ऐसा है भी तो सरकार को तो आदेश की कॉपी मिलने तक इंतजार कर लेना था, इसका श्रेय लेने की हड़बड़ी में शासन ने भी लापरवाही की। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संकट और गहरा गया है। हालांकि सरकार की जिद है कि 76 प्रतिशत पर ही भार्ती करनी है वरना देश भर में 50 प्रतिशत आरक्षण कोटा के आधार पर भर्ती परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर सकती है और नई परीक्षाएं भी ले सकती है। जब निर्णय आएगा तब नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। सरकार को विषय की गंभीरता समझनी चाहिए, छात्र परेशान हैं, महाविद्यालयों में प्रवेश बाधित होंगी। पीढ़ी का नुकसान है, ऐसे में सरकार को युवाओं को समझते हुए आगे बढऩा चाहिए। लेकिन चुनाव करीब है और वोटबैंक का सवाल है इसलिए कुछ निर्णय होगा इसकी संभावना कम है। वैसे भी आरक्षण को लेकर पिछले 6-8 महीनों से केवल राजनीति हो रही, जिसका खामियाजा पढऩे वाले बेरोजगार युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश में आरक्षण का मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले से पेचीदा हुआ जब प्रदेश में 2012 से लागू 58 प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक करार दे दिया गया। इसके बाद प्रदेश में वापस 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू हो गई। इस निर्णय से सबसे अधिक नुकसान जनजातीय समाज को हुआ क्योंकि 2012 में जनजातीय वर्ग के आरक्षण का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत किया गया था वहीं अनुसूचित जाति की आबादी के अनुसार आरक्षण को 16 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया गया था। इस निर्णय से नाराज अनुसूचित जाति समाज के प्रतिनिधि उच्च न्यायालय गए थे। इधर प्रदेश सरकार ने जनजाति समाज के विरोध को देखता हुए विधानसभा में आरक्षण कोट में संशोधन करने एक और विधायक ले जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इसके अनुसार प्रदेश में 76 प्रतिशत आरक्षण कोटा दिया गया है जिसमें आदिवासियों को 32 प्रतिशत के साथ पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। इस विधेयक को राजभवन में लंबित रखा गया है क्योंकि उच्च न्यायालय के फैसले को शासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है। अब सवाल यह है कि जब 58 प्रतिशत आरक्षण कोटा असंवैधानिक है तो फिर 76 प्रतिशत कैसे स्वीकृत होगा? मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चलती रही और आरक्षण की व्यवस्था के भ्रम में प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश की परीक्षाएं लटक गई। इस कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से भर्ती के लिए अनुमति मांगने के प्रयास किए। इसी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी लेकिन उसमें कोई स्पष्टता नहीं है।

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आदिवासी क्षेत्र में शराबबंदी एक बड़ी चुनौती, सांसत में सरकार https://samacharpacheesa.com/?p=6554 Thu, 16 Mar 2023 06:01:09 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6554 शराबबंदी छत्तीसगढ़ सरकार की गले की फांस बन गई है। भाजपा-कांग्रेस के सदस्य अच्छी तरह जानते हैं कि आदिवासी बाहुल्य छतीसगढ़ प्रदेश में इसे लागू करना कोई खेल नहीं। यह बहुत ही पेचीदा मामला है। यदि बिना सोचे समझे ,नोटबन्दी की तरह शराबबंदी की गई तो उसके परिणाम जनता के साथ सरकार को भी भुगतने पड़ेंगें। आदिवासी क्षेत्र के लोग शराब बंदी को किस तरह लेंगें। इस बारे में व्यापक सर्वे की जरूरत है। आदिवासी जन के शादी ब्याह,धार्मिक कार्य में शराब का अपना महत्व होता है। यह मामला उनकी भावना व आस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसे हसीं में नहीं लिया जा सकता।शायद कांग्रेस के घोषणापत्र बनाने वाले लोगों को महिलाओं पर हुए सर्वे में शराब की सामाजिक बुराइयों का दर्द महसूस हुआ होगा। इसी कारण इस मुद्दे पर सभी भावना में बह गए होंगे। इसके सभी पहलुओं को जानते समझते भी 15 साल के राजनैतिक वनवास को समाप्त करना भी तो जरूरी था। इसीलिए ही वोट पॉलिटिक्स के दबाव में घोषणा पत्र में यह मुद्दा शामिल किया गया होगा। लगा होगा कि 4 साल में हम प्रदेश में इसका सकारात्मक सामूहिक विचार विमर्श करके कोई ना कोई हल निकाल लेंगें। पर ऐसा हो नहीं पाया। ये तो मानना ही पड़ेगा कि कोरोना व प्रारम्भिक दौर में ही अनेक स्थानीय निकायों व पंचायतों के चुनाव ने इस सरकार के हाथ पैर बांध दिये। दो से ढाई साल तो यूं ही समस्यायों का सामना करने में निकल गए। ढाई साल आते ही कुछ और समस्या खड़ी हुई जिसने एक बार तो लगा कि सुनामी का रूप ले लेगी। सुनामी चली भी लेकिन कुछ ऐसा उच्च स्तरीय राजनैतिक दांव खेला गया। अंतत: सब ठीक हो गया। ठीक होते होते भी एक साल गद्दी बचाने के इस ढाई -ढाई साल के संघर्ष ने एक साल बर्बाद कर दिया। साढे तीन साल यूं ही बीत गए। सभी वायदों पर विचार संभव नहीं हो पाया। अब शराबबंदी की बात फिर उठने लगी। भाजपाईयों ने इसे महत्वपूर्ण मुद्दा बना लिया है। शराबबंदी के लिए सरकार के खिलाफ बड़ी घेराबंदी करनी शुरू कर दी है। घेरने लायक मुद्दा है भी।
टीवी चैनलों में डिबेट चलने लगे,भाजपा प्रवक्तागण हमलावर हैं। कांग्रेस को सूझ नहीं रहा कि आखिर कहें तो क्या कहें ? अब सच को स्वीकार करना शुरू कर दिया गया। कहा जाने लगा है कि यह विषय बहुत गंभीर है। अति संवेदनशील मुद्दा है। यूं ही हड़बड़ी में मानव जीवन से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। यह भी जोर देकर कहा रहे हैं कि हम शराब बंदी करेंगें जरूर। इस राह में हम हल्के हल्के कदम रखते हुए शराबबंदी की ओर अग्रसर हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता अपनी अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन सरकार के बचाव के लिए कर रहे हैं। भाजपा के प्रवक्ता भी अपनी पूरी ताकत के साथ सरकार का झूठा वायदा या झूठ बोलने वाली सरकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने में जुट गए हैं। सरकार का कहना है हमने अधिकांश काम कर दिया है। शराबबंदी के वायदे को भी पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। भाजपा को कोई एक भी मुद्दा नहीं मिल रहा है। इसीलिए अपने कार्यकाल में शराब के व्यापार का सरकारीकरण करने वाली 15 साल की सरकार के सदस्यों को सिर्फ शराब सूझ रही है। इनकी पार्टी की सरकार ने शराब का व्यापार 5500 करोड़ तक पहुंचाने का काम किया था। चाहते तो इस व्यापार का राजस्व धीरे धीरे कम कर सकते थे,नहीं किया। हमने करने का संकल्प लिया है। हमें ये हताश कर रहे हैं। हम शराबबंदी में भविष्य में आने वाली सारी परेशानियों का अध्ययन कर लेना चाहते हैं। शराबबंदी के बाद जो सामने आ सकती हैं। इसलिए हमने कमेटी बनाई है वो पूरी गंभीरता से उन राज्यों में जाकर अध्ययन कर रही है, जहां शराबबंदी की गई है। देखा गया कि उन राज्यों में राजस्व भी गया और शराब अभी भी उपलब्ध हो जाती है। बहुत सी अन्य बातों का भी अध्ययन किया गया। सबक यह मिला है कि जल्दबाजी में इस गंभीर विषय पर निर्णय लेना ठीक नहीं। यह भी कि हम अपनी बात पर कायम हैं। हम जागरूकता पैदा करने कार्यक्रम चलाए जाने पर सोच रहे हैं। अंतत: हम शराबबंदी कर ही देंगें। इधर भाजपा का कहना है कांग्रेस ने घोषणा पत्र में पूर्ण शराबबंदी की बात की थी। अब किंतु- परंतु का क्या मतलब ? लगता है आने वाले चुनाव तक यह मुद्दा कई रूप बदलेगा। भाजपा धर्मांतरण,हिदुत्व,कानून व्यवस्था,हिन्दू-मुस्लिम, आवास योजना के बाद शराबबंदी को सबसे बड़ा मारक मुद्दा मान कर चल रही है।इन्ही मुद्दों के रास्ते सत्ता में लौटना चाहती है। देखना यह होगा कि प्रदेश की जनता इसे किस रूप में समझ रही है। पूरे परिदृश्य पर नजर डाले व बुद्धिजीवियों की माने तो कुछ बातें साफ दिखाई पड़ रहीं हैं। यह कि दबाव में आकर अगर जल्दबाजी में कुछ कर दिया गया तो सरकार को आदिवासियों का कोप भाजन बनना पड़ सकता है। प्रदेश की 44 विधानसभाओं में आधी आबादी आदिवासियों की है।वे शराबबंदी को किस रूप में लेंगें,इसे समझना जरूरी है। भाजपा इसका किस रूप में और कितना लाभ उठाती है यह तो समय बताएगा। यह तय होगया है कि भाजपा द्वारा चुनाव तक यह मुद्दा जिंदा रखा जाएगा। कांग्रेस इसका निदान का रास्ता किस तरह निकालेगी यह देखना दिलचस्प होगा।

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तकनीकी शिक्षा में गिरावट और रोजगार https://samacharpacheesa.com/?p=6273 Wed, 15 Feb 2023 05:37:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6273 विगत दो-ढाई वर्षों से छत्तीसगढ़ सरकार यह प्रचारित कर रही है कि प्रदेश में बेरोजगारी की दर देश भर में सबसे कम है। यहां तक कि पिछले कुछ माह से छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर शून्य के करीब है। दूसरी ओर 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के बेरोजगारों को ढाई हजार रुपए प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की है। अभी कितने बेरोजगारों को भत्ता मिलेगा, संख्या तय नहीं है। हालांकि रोजगार कार्यालयों में दर्ज बेरोजगारों की संख्या 19 लाख के करीब है। प्रदेश में 2 करोड़ 90 लाख के आसपास की जनसंख्या वाले राज्य में अगर 19 लाख रोजगार कार्यालय में दर्ज है तो प्रदेश में बेरोजगारी की दर लगभग शून्य कैसे है यह समझ से परे है। प्रदेश में एक और नई समस्या देखने को मिल रही है पिछले 5-6 वर्षों से प्रदेश में स्थापित इंजीनियरिंग महाविद्यालय बंद हो रहे है और जो चल रहे है वहां पर भी छात्र प्रवेश नहीं ले रहे है। इस शैक्षणिक वर्ष में प्रदेश में कुल 11 हजार 500 के करीब इंजीनियरिंग की सीट थी। जबकि केवल 35 सौ छात्रों ने प्रवेश लिया। 7 हजार 900 इंजीनियरिंग के डिग्री लेने वाली सीटें रिक्त रह गई। यही हाल प्रदेश में पॉलिटेक्निक संस्थाओं का है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ की कुल पॉलिटेक्निक की सीटें 8664 में केवल 19 सौ सीटें ही भर पाई। याने 75 प्रतिशत इंजीनियर और पॉलिटेक्निक की सीटें भर नहीं पा रही। इस कारण कॉलेज और संस्थाएं बंद हो रही है। सीटें नहीं भरने का कारण तो अनेक है जिसमें पहला महाविद्यालयों में रोजगारपरक गुणवत्तायुक्त शिक्षा का अभाव है, कुकुरमुत्ते की तरह खुले निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में न तो पढ़ाने वाले योग्य शिक्षक है और न ही प्रयोग करने की सुविधाएं। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रदेश में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक की डिग्री और डिप्लोमा करके निकले विद्यार्थियों को नौकरी नहीं मिल रही है। छत्तीसगढ़ के उद्योगों में लाखों रुपए खर्च कर डिग्री लेने वाले इंजीनियरों को 10-12 हजार की नौकरी मिलती है और मेहनत 12 घंटे की। 2017-18 के बाद देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था कभी यह असर रहा कि प्रदेश में बड़े उद्योग नहीं लग पा रहे है, जो है वह भी जैसे-तैसे चल रहा है। उद्योगों का विकास नहीं होने से इंजीनियरों की मांग कम हो गई है। शासन भले ही औद्योगिक नीति बना ले लेकिन उद्योगों को प्रदेश में आकर्षित करने के लिए स्वच्छ प्रशासन और सुविधापूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ाने के साथ औद्योगिक संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करना होगा। प्रदेश का विकास सही अर्थों में तभी होगा जब यहां उद्योग खुलेंगे, व्यवसाय बढ़ेगा और प्रदेश के युवाओं को अधिकाधिक नौकरी मिलेगी।

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