जदयू – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 09 Feb 2023 07:38:40 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 अमित शाह 25 को बिहार दौर पर रहेंगे https://samacharpacheesa.com/?p=6187 Thu, 09 Feb 2023 07:38:40 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6187 नईदिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 फरवरी को बिहार दौरे पर रहेंगे। इस बार अमित शाह एक ही दिन में दो अलग-अलग जिलों में सभा को संबोधित करेंगे। पटना में किसान मजदूर समागम तो पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। बिहार में बदले सियासी समीकरण के बाद अब भाजपा के निशाने पर जदयू की सीटें हैं। वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट पर दो दशक से अधिक एनडीए का कब्जा रहा है। अब भाजपा इस सीट को जदयू से छीनने के लिए पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है।
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी पार्टियां अब तैयारी तेज कर चुकी है। एक ओर जहां महागठबंधन अपनी तैयारी में है तो वहीं भाजपा अब आक्रमक होकर इस ओर जुट रही है। गृह मंत्री अमित शाह लगातार बिहार का दौरा कर रहे हैं। इस बार वो 25 फरवरी को वाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र पहुंच रहे हैं। इस सीट को जदयू से छीनने के प्रयास में भाजपा लगेगी। दरअसल, पिछले दो दशकों से ये सीट एनडीए के ही खाते में गयी लेकिन इसपर जदयू उम्मीदवार जीत दर्ज करते रहे।
वाल्मीकिनगर सीट 2008 में अस्तित्व में आया। इससे पहले यह बगहा संसदीय क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। करीब 17 लाख मतदाताओं वाली इस सीट के अंदर 6 विधानसभा है। 75 प्रतिशत से अधिक यहां हिंदू मतदाता हैं। यहां 1984 के बाद कांग्रेस को जीत नहीं नसीब हुई है। 1999 से लेकर 2019 तक के लोकसभा चुनाव में 4 बार जदयू तो एक बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। 20 साल से एनडीए को ही यहां समर्थन मिला।
बता दें कि जब पहली बार 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री उम्मीदवार बने तो ये सीट भाजपा की झोली में गयी और बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की। पहली बार यहां भाजपा को जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव 2019 में जदयू के बैजनाथ प्रसाद महतो यहां से जीते। साढ़े तीन लाख वोटों से अधिक के अंतर से वो जीते थे।
लेकिन 2020 में बैजनाथ प्रसाद महतो का निधन हो गया। इस सीट पर जब उपचुनाव हुआ तो जदयू के सुनील कुमार ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराया था। अब भाजपा इस सीट पर अपनी जीत तय करने के लिए मैदान सजाने में लगी है।

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ना जेडीयू कमजोर हुई, ना ही कोई भाजपा से संपर्क में: नीतीश कुमार https://samacharpacheesa.com/?p=5910 Wed, 25 Jan 2023 08:17:18 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5910 पटना। बिहार में जदयू के अंदर चल रहे घमासान से सियासी पारा चढ़ा हुआ है। पार्टी के संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस करके अपनी ही पार्टी के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। नीतीश कुमार को कमजोर करने की साजिश के साथ-साथ उन्होंने जदयू के कमजोर होने की बात कही। वहीं बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा के दावों पर खुलकर जवाब दिया।
नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा के आरोपों को खारिज किया
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा के दावों और आरोपों को खारिज कर दिया। सीएम ने कहा कि जदयू कहीं से कमजोर नहीं हुई है। बल्कि पहले से मजबूत ही हुई है। पहले की तुलना में सदस्य बढ़े हैं। पहले 43 से 44 लाख सदस्य थे और अब ये संख्या 75 लाख हो चुकी है। कहा कि जो लोग कहते हैं कि पार्टी कमजोर हुइ है वो खूब खुशियां मनाएं।
कोई नेता भाजपा से संपर्क में नहीं- नीतीश कुमार
नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा के उन दावों को भी खारिज किया कि जदयू के बड़े नेता भाजपा से संपर्क में हैं। सीएम ने कहा कि कुछ भी बोलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि आप नाम दीजिए कि कौन लोग भाजपा के संपर्क में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग खुद संपर्क में जाना चाहते हैं वही ऐसी बात करते हैं।
मंत्री जयंत राज भी बरसे
वहीं जदयू कोटे से मंत्री जयंत राज ने बड़ा बयान दिया है। कहा है कि उपेंद्र कुशवाहा की महत्वकांक्षा पूरा नहीं हो रही है इसलिए वह इस तरह का बयान दे रहे हैं। बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा ने आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार को कमजोर करने की साजिश चल रही है इसलिए उपेंद्र कुशवाहा को किनारे किया जा रहा है।

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मुझे कमजोर करने की हो रही साजिश : उपेंद्र कुशवाहा https://samacharpacheesa.com/?p=5878 Tue, 24 Jan 2023 09:18:31 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5878 पटना। बिहार की राजनीति एक बार फिर से करवट लेती हुई दिखाई दे रही है। बिहार में 2020 विधानसभा चुनाव के बाद उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार एक साथ हुए थे। इसको लेकर जातीय समीकरण को साधने की कोशिश हुई थी। लेकिन अब एक बार फिर से उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार के बीच दूरी साफ तौर पर दिखाई दे रही है। उपेंद्र कुशवाहा ने आज साफ तौर पर स्वीकार किया कि मुझे कमजोर करने की साजिश हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि नीतीश कुमार कमजोर हुए हैं। जदयू भी कमजोर हुई है। राजद के लोग आजकल डील की बात कर रहे हैं। मैं राजद के डील को समझना चाहता हूं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जदयू के कार्यक्रम से मुझे अलग करने की भी कोशिश हो रही है।
उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी कहा है कि नीतीश कुमार से में मुलाकात करूंगा और उसको सब कुछ बताऊंगा मेरा और नीतीश कुमार का दर्द एक ही है। दूसरी ओर इसको लेकर नीतीश कुमार से सवाल पूछा गया। नीतीश कुमार ने साफ तौर पर कहा कि उनको बोलने के लिए छोड़ दीजिए। कुशवाहा पर हमारी पार्टी से कोई भी कुछ नहीं बोलेगा। हालांकि, बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के बीच दूरी काफी गहरी हो गई है। पिछले दिनों उपेंद्र कुशवाहा के उप मुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी। हालांकि, नीतीश कुमार ने इसे पूरी तरीके से खारिज कर दिया था। अब खबर है कि उपेंद्र कुशवाहा अगले महीने तक जदयू का दामन छोड़ सकते हैं और अपनी पुरानी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को पुनर्जीवित करेंगे।
2021 में जदयू और आरएलएसपी का विलय हुआ था। माना जा रहा है कि रालोसपा को पुनर्जीवित करने के बाद कुशवाहा भाजपा के साथ गठबंधन कर आगे की रणनीति तय करेंगे। हाल में ही उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली आए हुए थे। दिल्ली एम्स में वह भर्ती भी रहे थे। हालांकि, इसी दौरान बिहार भाजपा के कई नेताओं से उनकी मुलाकात भी हुई है। इसको लेकर उपेंद्र कुशवाहा से जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर बहुत ज्यादा नहीं बोला। लेकिन कुशवाहा ने यह जरूर कहा कि मैं अकेले ही अपना फैसला ले सकता हूं।

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नीतीश कुमार को बनाने में शरद यादव की रही खास भूमिका https://samacharpacheesa.com/?p=5720 Fri, 13 Jan 2023 10:14:34 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5720 पटना। वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव का 75 साल की उम्र में गुरुवार देर रात निधन हो गया। शरद यादव का जन्म मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुआ। लेकिन राजनीति में उनकी कर्मस्थली बिहार बनी। शरद यादव के नाम एक और खास रिकॉर्ड दर्ज है। वह यह है कि वह ऐसे नेता रहे हैं जो 3 राज्यों से सांसद बने। बिहार के मधेपुरा सीट से वह 4 बार सांसद चुने गए। इमरजेंसी के दौरान राजनीति में कद्दावर नेता के तौर पर उभरने वाले शरद यादव अपनी बात को मजबूती से कहने के लिए जाने जाते रहे हैं। सड़क से लेकर संसद तक वह आम जनता की आवाज को उठाते रहे। बिहार की राजनीति में काफी लंबा समय देने वाले शरद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी भी खूब सुर्खियों में रही। हालांकि एक वक्त यह भी आया कि जब नीतीश कुमार और शरद यादव के रास्ते अलग-अलग हो गए। शरद यादव ने नीतीश कुमार का साथ छोड़कर लोकतांत्रिक जनता दल बना लिया था। लेकिन यह टकराव की स्थिति क्यों आई, यह हम आज आपको बताएंगे।
शरद यादव राजनीति में काफी लंबे समय तक सक्रिय रहे। सियासत की बुलंदियों तक पहुंचने वाले शरद यादव की लोकप्रियता इतनी थी कि कभी उनसे मिलने के लिए बड़े-बड़े नेताओं तक तो समय लेना पड़ता था। शरद यादव लोकदल और जनता पार्टी से अलग होकर बने पार्टियों में लंबे समय तक रहे। इन्हीं पार्टियों में से एक है जनता दल यूनाइटेड जो फिलहाल नीतीश कुमार की वजह से जानी जाती है। शरद यादव काफी लंबे समय तक जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। नीतीश कुमार के सियासी कामयाबी में शरद यादव का भी अहम योगदान रहा है। लालू के सामने नीतीश को खड़ा करने में भी शरद यादव की भूमिका अहम रही। शरद यादव ने तो 1999 में मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से लालू यादव को भी हराने में कामयाबी हासिल की थी। इतना ही नहीं, शरद यादव 2013 तक भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के संयोजक भी रहे।
लेकिन 2013 के बाद शरद यादव के लिए स्थितियां बदलने लगी। 2013 में नीतीश कुमार ने भाजपा से संबंध तोड़ने का फैसला लिया। उस वक्त शरद यादव नीतीश कुमार के फैसले से खुश नहीं थे। बाद में 2015 में शरद यादव और नीतीश कुमार ने लालू यादव के साथ महागठबंधन में हिस्सा बनना स्वीकार किया। यह वह वक्त था जब जदयू 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार चुकी थी। लेकिन 2017 में एक बार फिर से नीतीश कुमार भाजपा के साथ चले गए। तब नीतीश के इस फैसले का विरोध शरद यादव ने खुलकर किया। इसी के बाद शरद यादव को जदयू से अलग होना पड़ा। शरद यादव को राज्यसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके लिए खुद जदयू की ओर से पत्र लिखा गया था।
हालांकि इसके बाद एक 2 वर्षों तक वह विपक्षी दलों के मंच पर दिखाई देते रहें। लेकिन उनकी स्वास्थ्य लगातार खराब होते जा रही थी। उन्होंने लोकतांत्रिक जनता दल बनाई। लेकिन बिहार में इसे उतनी अच्छी सफलता नहीं मिल पाई। बाद में लालू यादव शरद यादव के साथ खड़े हुए। लोकतांत्रिक जनता दल का आरजेडी में विलय हुआ। आखिरी दौर में लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों ने ही शरद यादव का बखूबी सहयोग किया। लालू यादव फिलहाल सिंगापुर में इलाज रत हैं। बावजूद इसके उन्होंने एक वीडियो के जरिए शरद यादव को श्रद्धांजलि दी है।

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