जांच – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 03 Aug 2023 09:16:51 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 रायपुर, कोरबा और अंबिकापुर में कारोबारियों के घर ईडी की दबिश, दस्तावेजों की जांच जारी https://samacharpacheesa.com/?p=7677 Thu, 03 Aug 2023 09:16:50 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7677 रायपुर। रायपुर, कोरबा और अंबिकापुर में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कारोबारियों के घर दबिश देकर दस्तावेजों की जांच कर रही है। ऐसा कहा जा रहा है जिन कारोबारियों के घर जांच चल रही है वे आईएएस रानू साहू के करीबी व परिचित हैं।
रायपुर के कचना इलाके में स्वर्णभूमि स्थित रोहित अग्रवाल के घर जांच जारी है। रोहित तेंदूपत्ता के कारोबार से जुड़े हैं। ईडी की टीम सुबह से दस्तावेजों की जांच कर रही है। कोरबा में स्टेशन रोड निवासी पूर्व पार्षद और व्यवसायी शिव अग्रवाल के यहां सुबह 5 बजे से ईडी की टीम ने दस्तक दी। घर के लोग कुछ समझ पाते तब तक टीम ने घर के सभी लोगों को एक कमरे में रखकर कर जांच करना शुरू किया। करीब 5 घंटे तक जांच के बाद ईडी की टीम खाली हाथ वापस लौट गई।सीतामढ़ी में नवीन टाइल्स और जमीन कारोबारी पवन अग्रवाल के ठिकानों पर भी दस्तावेजों की जांच जारी है। अभी तक कार्रवाई का अपडेट सामने नहीं आया है।
कोरबा में ही व्यवसायी रूड़ मल अग्रवाल के घर और दुकान में भी छापा मारा गया है। अधिकारियों के साथ सुरक्षाबल के जवान घर के बाहर निगरानी करते देखे गए। रुड़ मल अग्रवाल के घर कार्रवाई के दौरान अब तक क्या मिला है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। इससे पहले बुधवार को ईडी की टीम ने रायगढ़ में सुनील रामदास अग्रवाल के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। हालांकि टीम कल ही लौट गई थी।

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बस्तर में हत्या की जांच एनआईए को https://samacharpacheesa.com/?p=6307 Fri, 17 Feb 2023 06:39:43 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6307 पिछले दो सप्ताह के भीतर भारतीय जनता पार्टी के 4 नेताओं की हत्या बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में हुई है। इन हत्याओं को लेकर भाजपा कांग्रेस की सरकार पर हमलावर रुख अपनाए हुए है। पार्टी के अध्यक्ष अरुण साव ने आरोप ने लगाया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं में दहशत फैलाने के लिए सरकार की शह पर टारगेट किलिंग याने भाजपाईयों को निशाना बनाकर हत्या कराई जा रही है। लोकतांत्रिक राजनीति में कोई पार्टी सत्ता पक्ष पर यह आरोप लगाए तो यह अत्यंत गंभीर है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी हिंसा और भय के दम पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त करने का पिछले 2-3 दशकों से देख रहे है। कांग्रेस पार्टी नक्सलवाद और माओवाद को लेकर शुरु से भ्रमित रही है। उनके अनेक नेता नक्सलियों और माओवादियों को सामाजिक आर्थिक मुद्दों को लेकर संघर्ष करने वाले क्रांतिकारी तक मानते है। पिछले चुनाव के पहले कांग्रेस पार्टी के तब नेता रहे राजबब्बर ने उन्हें क्रांतिकारी ही कहा था। लेकिन कांग्रेस पार्टी और भारत की राजनीति में झीरम घाटी हत्याकांड एक गंभीर जख्म है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भी माओवाद को देश का सबसे बड़ा आंतरिक समस्या माना था, तब छत्तीसगढ़ में शासन कर रही भाजपा की सरकार स्थानीय आदिवासियों के साथ माओवाद के खिलाफ में संघर्ष छेड़े हुई थी। यह बात सही है कि भाजपा सरकार के समय ही माओवाद को एक राष्ट्रीय समस्या के रुप में सामने लाने का कार्य किया गया था। कांग्रेस पार्टी भी विधानसभा चुनाव के पहले माओवाद की समस्या को सुलझाने का वादा की थी। लेकिन 4 वर्ष के बाद भी माओवादियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत के संकेत नहीं मिले है। इस बीच प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के बस्तर संभाग से एकमात्र विधायक भीमा मंडावी की हत्या हुई और उसके बाद लगातार भाजपा के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। इन घटनाओं के बाद भाजपा के आरोप के चलते अब प्रदेश सरकार ने मामले की जांच करने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को पत्र लिखा है। इसका मतलब है कि सरकार अब इन हत्याओं को आतंकी घटनाएं मान रही है। चुनाव जब करीब हो तो इस तरह की घटनाएं कई सवाल खड़े करती है। ऐसे मामले में सरकार और राजनीतिक दलों को गंभीर होना चाहिए। लेकिन प्रदेश में सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी और सरकार दोनों ने जिस प्रकार की बयानबाजी की है उससे गंभीरता नहीं झलकती है। मुख्यमंत्री यह कहें कि भाजपा इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी से करा ले तो यह काम प्रदेश सरकार का है, जैसा कि गुरुवार को किया गया है। कांग्रेस के प्रवक्ता भी इस प्रकरण में जिस प्रकार के बयान दे रहे हैं वह किसी दृष्टि से उचित नहीं है। माओवाद से निपटने के विषय में सभी दलों को एकमत होना चाहिए।

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जयराम रमेश ने अडानी समूह मामले की जांच के लिए आरबीआई-सेबी को लिखा पत्र https://samacharpacheesa.com/?p=6286 Wed, 15 Feb 2023 07:56:42 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6286 नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास और सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को दो अलग-अलग पत्र लिखकर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अडानी ग्रुप पर लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह पत्र ट्विटर पर साझा किए हैं। दास को लिखे पत्र में रमेश ने आग्रह किया कि रिजर्व बैंक को सुनिश्चित करना चाहिए कि अडानी समूह पर मौजूदा कर्ज और भविष्य में मिलने वाले कर्ज के चलते भारत की बैंकिंग प्रणाली अस्थिर न हो जाए। उन्होंने दोहराया कि अडानी समूह के खिलाफ लगाए गए कई आरोपों की एक पूर्ण स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए।
जयराम रमेश ने रिजर्व बैंक द्वारा दो पहलुओं की जांच कराए जाने का आग्रह किया है। पहला यह कि अडानी समूह का कुल कितना कर्ज भारतीय बैंकिंग प्रणाली से जुड़ा है और दूसरा यह कि अडानी समूह ने इसको लेकर क्या प्रत्यक्ष और परोक्ष गारंटी दी कि विदेशी कर्ज नहीं मिलने पर भारतीय बैंक उसे प्रोत्साहन देंगे। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विदेशी वित्त के स्थान पर कोई भारतीय बैंक पैसा नहीं लगाएं।
रमेश ने सेबी प्रमुख को लिखे पत्र में कहा कि अडानी समूह के खिलाफ लगे आरोपों से परेशान हैं। उनका कहना है कि कई भारतीय कानूनों के उल्लंघन की आशंका के साथ यह उन सब बातों के खिलाफ जाता है जिनके लिए सेबी है। उन्होंने कहा, हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप जांच कराएं और इसको लेकर पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करें कि अडानी समूह की कंपनियो में कौन निवेश कर रहा है।
कांग्रेस नेता ने पत्र में सवाल उठाया है कि भारतीय जीवन बीमा निगम और भारतीय स्टेट बैंक जैसे राष्ट्रीय महत्व के वित्तीय संस्थानों ने अडानी समूह की इक्विटी को भारी मात्रा में क्यों खरीदा है, जब अधिकांश निजी फंड गंभीर रूप से अंडरवेट थे।
जयराम रमेश ने पत्र में दावा किया कि एलआईसी, जिस पर 30 करोड़ भारतीय अपनी जीवन भर की बचत का भरोसा करते हैं, ने हाल के दिनों में अडानी समूह के शेयरों में हजारों करोड़ रुपये खो दिए हैं। बकौल जयराम, क्या हमें यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए कि ऐसे सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थान अपने निजी क्षेत्र के समकक्षों की तुलना में अपने निवेश में अधिक रूढि़वादी हैं और ऊपर से दबाव से मुक्त हैं?

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झीरम घाटी हत्याकांड की जांच पर जांच https://samacharpacheesa.com/?p=6193 Fri, 10 Feb 2023 07:44:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6193 देश की राजनीति में 25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस पार्टी के काफिले पर हुआ हमला अभूतपूर्व और ऐतिहासिक था। माओवादी के इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, महेन्द्र कर्मा सहित 28 नेता शहीद हो गए थे। इस घटना के तत्काल बाद डॉ रमन सरकार ने हाईकोर्ट के न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। इस बात को 10 वर्ष होने आए है लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी है और इसलिए इस हत्याकांड में शामिल हत्यारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। वैसे तो न्यायिक जांच के समानांतर तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एनआईए जांच भी शुरु कराई थी जिसने अपनी रिपोर्ट 2014 में दे दी थी। इस रिपोर्ट में घटना से संबंधित तथ्य और शामिल आरोपियों के नाम भी दर्ज है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने एनआईए की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया। उनका आरोप है कि एनआईए ने इस हत्याकांड की जांच में गंभीरता नहीं दिखाई और अनेक साक्ष्य और गवाहों पर गौर नहीं किया। दरअसल मामले की जांच तो एक विषय है लेकिन प्रदेश में झीरम घाटी कांड एक राजनीतिक विषय बनकर रह गया है। हत्याकांड के तत्काल बाद इसके पीछे की साजिशों को लेकर राजनेताओं पर भी उंगलियां उठीं। लेकिन कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हुआ। तब से लेकर अब तक कांग्रेस पार्टी तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी की सरकार को झीरम घाटी का दोषी मानती है। एनआईए की रिपोर्ट को खारिज करने के बाद न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा की रिपोर्ट भी नवम्बर 2021 में राजभवन को दे दी गई। आयोग ने 8 वर्षों तक सुनवाई करने साक्ष्य एकत्र करने के बाद 4,184 पृष्ठ की रिपोर्ट राज्यपाल अनुसुइया उइके को सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट पर भी कांग्रेस पार्टी की सरकार को आपत्ति थी और इस प्रक्रिया को परंपराओं के विरुद्ध बताते हुए नवम्बर 2021 को भूपेश सरकार ने एक नया जांच आयोग बिठा दिया जिसमें 2 न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया। 11 नवम्बर को जारी आदेश में नए जांच आयोग के द्वारा 6 माह के भीतर जांच पूरी कर शासन को रिपोर्ट सौंपने की बात की गई थी। अब आयोग के गठन के बाद 6-6 माह के तीन कार्यकाल पूरे होने के आए, ऐसी स्थिति में शासन ने एक बार फिर इस जांच आयोग के कार्यकाल को अगस्त 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। अब सवाल यह है कि कांग्रेस पार्टी झीरम घाटी के सच को बाहर लाने में क्या वाकई गंभीर है? कहीं ऐसा तो नहीं कि कांग्रेस और उनके नेता ऐसी रिपोर्ट चाहते है जो किसी दल या व्यक्ति के खिलाफ हो, ऐसा नहीं होने पर जांच पर जांच कराई जा रही है।

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विपक्षी दलों की बैठक में अडाणी समूह के मामले पर चर्चा और जांच की मांग पर दिया गया जोर https://samacharpacheesa.com/?p=6054 Fri, 03 Feb 2023 07:51:05 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6054 नयी दिल्ली। कांग्रेस और 15 अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने शुक्रवार को बैठक की जिसमें अडाणी समूह के खिलाफ ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े मामले पर चर्चा और जांच की मांग संसद के दोनों सदनों में उठाते रहने पर जोर दिया गया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संसद भवन स्थित कक्ष में हुई इस बैठक में कांग्रेस, द्रमुक, आम आदमी पार्टी, भारत राष्ट्र समिति, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए। सूत्रों ने बताया किविपक्षी दलों ने अडाणी समूह से जुड़े मामले पर चर्चा और आरोपों की जांच की मांग संसद के दोनों सदनों में उठाते रहने पर जोर दिया। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों की मांग है कि पूरे मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा या फिर उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच हो।
इस विषय पर चर्चा कराने तथा इसकी जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित किए जाने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को संसद के दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया था जिसके कारण कार्यवाही बाधित हुई और एक एक बार के स्थगन के बाद दोनों सदनों की बैठक दोपहर दो बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। गौरतलब है कि अडानी एंटरप्राइजेज़ ने बुधवार को अपने 20 हजार करोड़ रुपये के अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) को वापस लेने और निवेशकों का पैसा लौटाने की घोषणा की थी। हालांकि, कंपनी के एफपीओ को मंगलवार को पूर्ण अभिदान मिल गया था। समझा जाता है कि अडानी एंटरप्राइजेज ने यह कदम अमेरिका की शॉर्टसेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद उठाया है। अडाणी समूह ने रिपोर्ट को निराधार बताया था।

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बिहार की जहरीली शराब का मामला, एसआईटी से जांच कराने की मांग https://samacharpacheesa.com/?p=5263 Fri, 16 Dec 2022 07:56:06 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5263 नई दिल्ली। बिहार में सारण के मशरक के आधा दर्जन गांवों में जहरीली शराब की वजह से मचे हाहाकार के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। याचिका में मामले की जांच एसआईटी से करवाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मामले की स्वतंत्र जांच की जाए।
इसके साथ ही याचिका में अवैध शराब के निर्माण, व्यापार और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की मांग की गई है। जनहित याचिका में पीडि़तों के परिवार को मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
क्या है मामला?
दरअसल, सारण के मशरक के आधा दर्जन गांवों में मंगलवार से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार सुबह तक यहां जान गंवाने वालों का आंकड़ा 60 तक पहुंच गया है। इस बीच खबर है कि सीवान में भगवानपुर प्रखंड के सोधनी और ब्रह्मा स्थान गांव में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई है।
नीतीश कुमार ने कही थी यह बात
इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहरीली शराब से मौतों पर प्रतिक्रिया देते हुए गुरुवार को कहा था कि जो पीएगा वो मरेगा। बिहार में शराब के सेवन पर रोक है। लोगों को समझाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि जो गड़बड़ कर रहा, उसे पकडि़ए। उसे अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करिए। हम तो बापू और बिहार की महिलाओं की इच्छा से शराबबंदी लागू किए हैं।
भाजपा ने मांगा इस्तीफा
वहीं, केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने नीतीश पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से आज बिहार में जहरीली शराब से मौतें हो रही हैं, ये चिंता का विषय है। हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आपा खो कर जनता पर बरस रहे हैं और कह रहे हैं कि जो पिएगा वो तो मरेगा ही। ऐसे लोगों पर स्नढ्ढक्र होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार बेअसरदार है। कोई पीछे से सरकार चला रहा है। नीतीश कुमार का अब साया समाप्त हो गया। नीतीश बाबू आप इस्तीफा दो। शराबबंदी के पीछे पूरा भ्रष्टाचार का बाजार गर्म है। आपके आसपास शराबियों की भरमार है।

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