जी-20 – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 25 Mar 2025 02:31:42 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 निर्गुट से जी-20 शिखर सम्मेलन तक भारत https://samacharpacheesa.com/?p=7981 Sat, 09 Sep 2023 07:07:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7981 भारत आगामी 9-10 सितंबर को होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है। जी-20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा भारत के निमंत्रण पर बांग्लादेश, नाइजीरिया, मॉरीशस वगैरह देशों के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री भी सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इससे पहले इतना भव्य आयोजन 1983 में राजधानी दिल्ली में हुआ था। तब दिल्ली में 7-12 मार्च, 1983 को निर्गुट सम्मेलन का आयोजन हुआ था। उसमें दर्जनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों समेत 140 देशों के नुमाइंदों ने भाग लिया था। इसके अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और मौरिस मिटर्रैंड वगैरह के संदेश भी सरकार को मिले। तब कहा गया था कि इतना विशाल सम्मेलन कभी कहीं नहीं हुआ। उसमें क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो, पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया उल हक, फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (पीएलओ) के नेता यासर अराफात भी पधारे थे। ये सब अशोक होटल में ठहरे थे। तब सुरक्षा कारणों के चलते कास्त्रो और अराफात के चेहरों से मिलते-जुलते तीन-तीन और व्यक्ति भी अशोक होटल और विज्ञान भवन में घूम रहे थे। यह सब इसलिए किया जा रहा था ताकि इन्हें किसी भी संभावित हमलों से बचाया जा सके। निर्गुट सम्मेलन का आयोजन विज्ञान भवन में हुआ था। बहरहाल, अब जी-20 सम्मेलन के दौरान विज्ञान भवन कहीं नहीं है। तब भी नई दिल्ली को एक तरह से सील कर दिया गया था। पर तब बैंक, सरकारी दफ्तर और स्कूल-कॉलेज खुले रहे थे। निर्गुट सम्मेलन में भाग लेने के लिए आने वाले राष्ट्राध्यक्षों की कारों के काफिले एयरपोर्ट से शांतिपथ, तीन मूर्ति, साउथ एवेन्यू, विजय चौक, मदर टेरेसा क्रिसेंट, सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग, सफदरजंग रोड और विज्ञान भवन के आसपास रहे थे। इस बार काफिले प्रगति मैदान तक जाएंगे क्योंकि वहां पर बने भारत मंडपम में ही जी-20 सम्मेलन का आयोजन होना है। बहरहाल, जी-20 सम्मेलन का आयोजन उस समय हो रहा है जब भारत संसार की आर्थिक महाशक्ति बन चुका है। 1983 से 2023 का भारत एकदम अलग है। कुछ समय पहले भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अब अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी की ही अर्थव्यवस्था आज के दिन भारत से बड़ी है। हमारी प्रगति की रफ्तार को देखकर यह कहा जा सकता है कि हम जल्दी ही जापान और जर्मनी को भी मात दे देंगे। हम दुनिया के आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत हैं। निश्चित रूप से जी-20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन से सारे संसार में भारत की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।

fake watches
replica watches
omega replica watches

]]>
इंडिया और भारत पर्यायवाची शब्द https://samacharpacheesa.com/?p=7959 Wed, 06 Sep 2023 07:02:36 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7959 राजनीतिक गलियारों में कहा यही जा रहा है कि आने वाले संसद के विशेष सत्र में देश को आधिकारिक तौर पर रिपब्लिक ऑफ भारत कहे जाने वाले प्रस्ताव को पास कराया जा सकता है। लेकिन संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि देश के संविधान में इंडिया, दैट इज भारत का पहले से ही जिक्र है। इसलिए इंडिया और भारत यह दोनों नाम संविधान में दर्ज हैं और एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर में बदलाव तकरीबन नामुमकिन जैसा ही है। वहीं देश के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा जोर पकडऩे लगी है कि इंडिया को आधिकारिक तौर पर भारत पुकारे जाने से क्या भारतीय जनता पार्टी को कोई बड़ा सियासी लाभ मिल सकता है या नहीं। दरअसल राष्ट्रपति की ओर से 9 सितंबर को जी-20 कार्यक्रम के दौरान भारत मंडपम में आयोजित होने वाले डिनर के निमंत्रण पत्र में द प्रेसिडेंट ऑफ भारत की ओर से न्योता भेजा गया है। इसी निमंत्रण पत्र पर छपे भारत शब्द को लेकर अब सियासत होने लगी है। राजनीतिक पार्टियों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश के नाम पर भी हमला कर रही है। कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने कहा कि जब संविधान के अनुच्छेद एक में कहा गया है भारत जो की इंडिया था वह राज्यों का संघ है, तो उसमें इंडिया शब्द को क्यों हटाया जा रहा है। हालांकि कांग्रेस के नेता शशि थरूर कहते हैं कि जब संविधान में इंडिया और भारत दोनों का जिक्र है, तो इसमें संवैधानिक तौर पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस नाम को लेकर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की ओर से भी बाकायदा भारत के समर्थन में ट्वीट और बयान दिए जा रहे हैं। हालांकि संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया और भारत के नाम को लेकर किसी तरीके का कोई संवैधानिक विवाद नहीं है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 कहता है, इंडिया जो कि भारत है, राज्यों का एक संघ होगा। यह पहला मौका नहीं है जब भारत का नाम इस तरह से इस्तेमाल किया गया। ऐसे पहले भी कई मौके आए जब इंडिया की जगह पर भारत के नाम का जिक्र हुआ। जब संविधान में इसका जिक्र है कि फिर इस तरीके के निमंत्रण पर होने वाले विवाद का मतलब महज सियासी ही माना जा सकता है। भारत और इंडिया एक दूसरे के पर्यायवाची ही हैं। इसलिए यह कहना कि इंडिया की जगह पर भारत का नाम इस्तेमाल किया गया, वह किसी बहुत बड़े फेरबदल के संकेत हैं, ऐसा कानूनी रूप से संभव नहीं नजर आ रहा है और सियासी रूप से भी इसकी संभावना न के तौर पर दिख रही है। पासपोर्ट पर भी रिपब्लिक ऑफ इंडिया अंग्रेजी में दर्ज होता है, जबकि हिंदी में भारत का गणराज्य लिखा होता है।

]]>
अब कांग्रेस जी-20 शिखर सम्मेलन से तकलीफ https://samacharpacheesa.com/?p=7880 Fri, 25 Aug 2023 07:04:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7880 भारत को जबसे जी-20 की अध्यक्षता मिली है तबसे विपक्ष के कुछ नेता बहुत परेशान हैं। खासकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश बहुत ज्यादा तकलीफ में नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर वक्तव्य, हर उपलब्धि, हर फैसले और हर नीति पर कटाक्ष करने से नहीं चूकने वाले जयराम रमेश मोदी विरोध में कभी कभी बहुत आगे निकल जाते हैं। जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर आजादी के अमृत काल को देश ने धूमधाम से मनाया लेकिन जयराम रमेश ने अमृत काल को अमरूद काल बता दिया। भारत को विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने की बात कही गयी तो जयराम रमेश ने कह दिया कि इसमें सरकार को क्या करना है, भारत अपने आप ही तीसरी अर्थव्यवस्था बन जायेगा। देखा जाये तो भारत की हर कामयाबी को कम करके आंकने और भारत की हर उपलब्धि का श्रेय गांधी परिवार को देने के लिए जयराम रमेश इतने आतुर रहते हैं कि उन्होंने कांग्रेस में बड़े से बड़े नेताओं को पीछे छोड़ दिया है। अब जयराम रमेश के निशाने पर जी-20 शिखर सम्मेलन है। शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आने वाले विश्व नेताओं की आवभगत के लिए जो प्रबंध किये जा रहे हैं उससे भारत के आतिथ्य सत्कार का ही गुणगान विश्व भर में होने वाला है। लेकिन जयराम रमेश इस सबसे बहुत चिंतित हैं क्योंकि उन्हें यह अच्छा नहीं लगेगा कि शानदार आयोजन के लिए विश्व नेता मोदी की पीठ थपथपाएं। जयराम रमेश को लग रहा है कि मोदी इस सबका फायदा चुनावों में ले लेंगे। जयराम रमेश को लगता है कि मोदी को चुनावों में जी-20 का फायदा मिला तो वह कहीं फिर से प्रधानमंत्री ना बन जायें। दरअसल जयराम रमेश के इस पूरे डर के पीछे कारण यह है कि उनका खुद का कॅरियर दांव पर लगा हुआ है। जयराम रमेश जानते हैं कि यदि 2024 में कांग्रेस फिर चुनाव हारी तो सबसे पहले पार्टी के नेता उन पर ही गाज गिरायेंगे इसलिए वह हर रोज कोई ना कोई मुद्दा निकाल कर लाते हैं और प्रयास करते हैं कि इससे मोदी विरोध को हवा दी जा सके। जहां तक जी-20 के आयोजन से चुनावी लाभ होने की बात है तो जयराम रमेश को अपनी चिंता दूर करनी चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि जी-20 के विभिन्न समूहों की बैठकें देशभर में आयोजित की गयीं। जिस भी शहर में यह बैठकें हुईं वहां की राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने मेहमानों की आवभगत में पलक-पांवड़े बिछा दिये और बैठक को हर मायने में सफल बनाया। जी-20 समूहों की बैठकों को सफल बनाने में कांग्रेस शासित राज्य भी पीछे नहीं रहे। इसलिए सवाल उठता है कि बैठक के सफल होने का फायदा वहां सत्ता में मौजूद पार्टी को मिला या देश को? कश्मीर में जी-20 पर्यटन समूह की सफल बैठक हुई। इसका फायदा कश्मीर को मिला या प्रधानमंत्री मोदी को?

]]>
जीवाश्म ईंधन पर भारत दिखा रहा सख्ती https://samacharpacheesa.com/?p=7875 Thu, 24 Aug 2023 10:24:42 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7875 जी-20 देशों ने यूक्रेन युद्ध के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों का मुकाबला करने और ऊर्जा भंडार को मजबूत करने के उद्देश्य से 2022 में जीवाश्म ईंधन का समर्थन करने के लिए अपने कोष से 1.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 116 लाख करोड़ रुपये) का पब्लिक फंड आवंटित किए हैं। एक नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। विन्निपेग (कनाडा) के स्वतंत्र थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) और साझेदारों द्वारा किया गया यह अध्ययन ऐसे समय में सामने आया है जब जी-20 नेता नई दिल्ली में नौ से 10 सितंबर को होने वाले शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं। वर्तमान में जी-20 अध्यक्ष भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के लिए समर्थन बढ़ाते हुए 2014 से 2022 के बीच जीवाश्म ईंधन रियायत में 76 प्रतिशत की कटौती की। अध्ययन में कहा गया है कि यह भारत को इस मुद्दे पर नेतृत्व करने के लिए मजबूत स्थिति में रखता है। अध्ययन के अनुसार, 14 सौ अरब अमेरिकी डॉलर की अप्रत्याशित राशि में जीवाश्म ईंधन सब्सिडी (एक हजार अरब अमेरिकी डॉलर), देश के स्वामित्व वाले उद्यम निवेश (322 अरब अमेरिकी डॉलर) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों द्वारा उधार दिया गया धन (50 अरब अमेरिकी डॉलर) शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि यह कुल राशि 2019 में कोविड-19 महामारी और ऊर्जा संकट से पहले की स्थिति की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। जीवाश्म ईंधन के लिए वित्तीय सहायता अत्यधिक गर्मी की स्थिति, जंगल की आग और भारी बारिश जैसे मानव निर्मित जलवायु संकट और इसके कठोर प्रभावों को और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि जीवाश्म ईंधन की कीमतों को कम करने के लिए सब्सिडी देना एक समस्या है क्योंकि यह इन हानिकारक ऊर्जा स्रोतों के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित करती है। अध्ययन में जीवाश्म ईंधन सब्सिडी से छुटकारा पाने के लिए एक बेहतर योजना का भी सुझाव दिया गया है। इसमें कहा गया है कि विकसित देशों को इसे 2025 तक बंद कर देना चाहिए और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को इसे 2030 तक समाप्त करना चाहिए। इसे लेकर शोधकर्ताओं ने एक समाधान का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, जी-20 देशों की आय के आधार पर प्रति मीट्रिक टन ष्टह्र2 समकक्ष पर 25 अमेरिकी डॉलर से लेकर 75 अमेरिकी डॉलर तक न्यूनतम कार्बन कर निर्धारित करके हर साल अतिरिक्त एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त कर सकते हैं। जी-20 में जीवाश्म ईंधन पर वर्तमान कर बहुत कम हैं, जो ष्टह्र2 समकक्ष के प्रति मीट्रिक टन औसतन केवल 3.2 अमेरिकी डॉलर है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह चिंताजनक है क्योंकि जीवाश्म ईंधन कंपनियों ने पिछले साल ऊर्जा संकट के दौरान भारी मुनाफा कमाया था।

]]>
जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है असम https://samacharpacheesa.com/?p=5986 Tue, 31 Jan 2023 07:47:44 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5986 गुवाहाटी। असम जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले के कार्यक्रमों की मेजबानी के लिए तैयार है और इस सप्ताह शुरू होने वाली एक बैठक के लिए प्रतिनिधि पूर्वोत्तर राज्य में पहुंच रहे हैं। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य भारत की एक साल की जी-20 की अध्यक्षता के तौर पर पहली सतत वित्तीय कार्यकारी समूह (एसएफडब्ल्यूजी) की बैठक तथा ‘यूथ- 20 इंसेप्शन’ कार्यक्रम की मेजबानी करेगा। राज्य मार्च और अप्रैल में भी एक-एक कार्यक्रम की मेजबानी करेगा। सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार, एसएफडब्ल्यूजी की पहली बैठक दो-तीन फरवरी को गुवाहाटी के एक होटल में होगी और इसमें जी-20 के सदस्य देशों, अतिथि देशों, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 94 प्रतिनिधि तथा केंद्र सरकार के अधिकारी शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने प्रतिनिधियों का स्वागत करने के लिए यहां लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक पारंपरिक संगीत प्रस्तुति की वीडियो ट्वीटर पर साझा की। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भारत में स्वागत है – अद्भुत विविधता, खूबसूरती और गौरवशाली इतिहास की भूमि। हमारी स्थानीय संस्कृति के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ गुवाहाटी हवाई अड्डे पर जी-20 प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आप असम की शानदार यात्रा का आनंद उठाएंगे।

]]>