जी20 – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 25 Mar 2025 02:31:26 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 मोदी की अंतरराष्ट्रीय नीति में 3 सूत्रीय कॉकटेल https://samacharpacheesa.com/?p=8016 Thu, 14 Sep 2023 06:46:14 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8016 जी20 की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारत का डंका दुनियाभर की चौपालों पर बज रहा है। जी0 समिट में सभी देशों की सहमति से घोषणापत्र भी जारी किया गया। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक और राजनयिक जीत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आम सहमति की संभावना जब न के बराबर लग रही थी तब भारत की कोशिशें रंग अफ्रीका का आना लाई। यह भारत के बढ़ते कद को दिखाता है। यह दिखाता है कि विश्व को साथ लाने में भारत की भूमिका काफी अहम है। विदेश सेवा के भारतीय राजनयिकों, सदस्य देशों के साथ कई महीनों की कड़ी मेहनत और 3 सितंबर से रात भर जागने वाले पांच लोगों की कड़ी मेहनत का ही परिणाम था कि सहमति बनाने में कामयाबी हासिल हो पाई। टीम मोदी ने चाणक्य नीति को चरितार्थ कर दिया। युद्ध और शांति काल में विदेश नीति का पुराना और आजमाया हुआ ग्रंथ चाणक्य का अर्थशास्त्र है। चाणक्य की साम, दाम, दंड, भेद वाली नीति से तो आप सभी वाकिफ हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सिद्धांत भी बड़े काम के हैं। इसमें जो रणनीतियाँ शामिल हैं उनमें शामिल हां, संधि (ट्रीटी), विग्रह (संधि तोडऩा और युद्ध शुरू करना), आसन (तटस्थता), यना (युद्ध के लिए मार्च की तैयारी), सामश्रय (समान लक्ष्य रखने वालों के साथ हाथ मिलाना) और अंत में द्वैदभाव (दोहरी नीति यानी एक दुश्मन से कुछ समय के लिए दोस्ती और दूसरे से दुश्मनी)। संधि (शांति स्थापित करना) की नीति इस नियम पर आधारित है कि जब किसी राज्य को अधिक शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ता है, तो उसे जीवित रहने के लिए शांतिपूर्ण समझौते पर बातचीत करने का प्रयास करना चाहिए। यदि शांति स्थापित करने के सिद्धांत का विश्लेषण किया जाए तो इसे कई ऐतिहासिक शांति संधियों के संदर्भ में समझा जा सकता है। कौटिल्य संधि के अन्य रूपों, काल संधि (अस्थायी गठबंधन) या स्थावर संधि (स्थायी गठबंधन) की भी बात करते हैं, जिसमें एक छोटा राज्य अधिक शक्तिशाली सहयोगी को सेवा प्रदान करके और शक्तिशाली लोगों के साथ गठबंधन में रहकर रहने का सौदा कर सकता है। कौटिल्य कहते हैं कि अगर राजा को लगे कि दुश्मन की सेना की ताकत समान है और जंग लडऩे का मतलब है दोनों तरफ तबाही का खुला निमंत्रण को ऐसी परिस्थिति में समझौता यानी तटस्थ रहकर शांति का प्रयास आवश्यक है। जवाहर लाल नेहरू ने कौटिल्य की आसन नीति अपनाई जिसका परिणाम ती गुटनिरपेक्षता और मोदी ने कौटिल्य की संधि, आसन और सामरस्य नीति का कॉकटेल तैयार किया। नई दिल्ली ने अपने घोषणापत्र के जरिए चीन को भी अपरोक्ष रूप से साधा। लेकिन इसमें कहीं भी लद्दाख या एलएसी का जिक्र नहीं था और न ही अरुणाचल प्रदेश में उसकी हरकतों का उल्लेख था। लेकिन इस घोषणापत्र में परोक्ष रूप से वो सब था जो भारत चाहता था।

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आर्थिक कॉरिडोर से गरीबों को क्या मिलेगा? https://samacharpacheesa.com/?p=8006 Wed, 13 Sep 2023 07:28:36 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8006 भारत ने जी20 का सफल आयोजन कर पूरी दुनिया में अपनी धाक जमा दी है। इंडिया, मिडिल ईस्ट से लेकर यूरोप तक जाने वाले रेल-समुद्री यातायात कॉरिडोर के निर्माण पर सदस्य देशों की सहमति को इस बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न है कि इस कॉरिडोर के बनने से यूपी-बिहार या तमिलनाडु और केरल के सुदूर इलाकों में काम करने वाले किसानों-गरीबों को इससे क्या लाभ मिलेगा? एपीडा के आंकड़ों के अनुसार भारत ने वर्ष 2022-23 में 13,185 करोड़ रुपये मूल्य की फल-सब्जियों का निर्यात किया था। इसमें 6219 करोड़ रुपये से ज्यादा के फल और 6965 करोड़ रुपये से अधिक की सब्जियां शामिल थीं। प्रोसेस्ड फूड और दालों को मिलाकर यह आंकड़ा 18 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा था। भारत आम, केला और पपीता जैसे फलों के उत्पादन में दुनिया में नंबर एक पर है, लेकिन इसके बाद भी हमारी फलों-सब्जियों के निर्यात में वैश्विक हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है। इसका बड़ा कारण यह है कि हमारे देश में फलों-सब्जियों को रखने और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए अच्छी गुणवत्ता की और सस्ती दरों पर उपलब्ध कोल्ड स्टोरेज चेनों की भारी कमी है। वैश्विक व्यापार के लिए यह कमी और ज्यादा हो जाती है। फलों-सब्जियों के देरी से बाजार में पहुंचने से व्यापारियों को भारी नुकसान होने की संभावना लगातार बनी रहती है। चूंकि, कहा जा रहा है कि इस कॉरिडोर के निर्माण से यूरोपीय बाजारों में पहुंचने वाले फलों-सब्जियों के पहुंचने में 40 फीसदी का समय कम लगेगा, इससे भारतीय उत्पादों के यूरोपीय बाजार तक पहुंचने में इनके न खराब होने की दर बढ़ जाएगी। इसका सीधा लाभ भारतीय किसानों को मिलेगा। यूरोप भारत के कुल कारोबार का तीसरा सबसे बड़ा साझीदार है। वर्ष 2021 में भारत के कुल व्यापार का लगभग 10.8 फीसदी व्यापार यूरोपियन यूनियन के साथ हुआ था। अमेरिका के 11.6 फीसदी और चीन के 11.4 फीसदी की व्यापारिक हिस्सेदारी होने के बाद भी यूरोप भारत के लिए अधिक महत्त्वपूर्ण है। इसका बड़ा कारण है कि भारत यूरोपीय देशों को कृषि उत्पादों, फलों-सब्जियों, कपड़ों और दवाओं का निर्यात करता है, जिसके कारण उसका निर्यात पक्ष यूरोप में बहुत संतुलित है, जबकि चीन से भारत ज्यादातर वस्तुएं आयात करता है और व्यापारिक असंतुलन बुरी तरह चीन के पक्ष में झुका हुआ है। भारतीय उत्पादकों से यूरोप के बाजारों तक पहुंचने में अलग-अलग देशों की भौगोलिक स्थिति के अनुसार अभी 30 से 45 दिन तक का समय लगता है। जबकि अनुमान है कि मुंबई से शुरू होने वाले 6000 किलोमीटर लंबे इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से यह समय 12 से 15 दिन तक कम हो जाएगा। समय के साथ खराब होने वाले कृषि, फल-सब्जी और डेयरी उत्पादों के संदर्भ में यह समय बहुत महत्त्वपूर्ण है।

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जी20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को रखेगा : जयशंकर https://samacharpacheesa.com/?p=6067 Fri, 03 Feb 2023 09:01:54 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6067 नयी दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि जी20 समूह की अध्यक्षता के दौरान यह उम्मीद की जाती है कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को सामने रखेगा और समकालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण के मुद्दे पर आम-सहमति बनाने में सहयोग करेगा। लोकसभा में टी आर बालू के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जी20 समूह की भारत की अध्यक्षता के दौरान देशभर में 50 से अधिक शहरों में लगभग 200 बैठकें आयोजित होंगी। उन्होंने कहा कि इसमें 30 विभिन्न कार्यसमूह वार्ता सत्र आयोजित करेंगे जिनमें शेरपा ट्रैक कार्य समूह, फाइनांस ट्रैक कार्य समूह, और सहभागिता समूह के सत्र समेत मंत्रालयी बैठकें शामिल हैं।
जयशंकर ने बताया, ‘‘जी20 समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन का आयोजन 9-10 सितंबर, 2023 को नई दिल्ली में करना निर्धारित किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि जी20 की अध्यक्षता भारत की उपलब्धियों, क्षमताओं और विविधता को प्रदर्शित करने का एक विशेष अवसर है। विदेश मंत्री ने कहा कि इस गौरवपूर्ण अवसर को एक राष्ट्रीय अवसर के रूप में मनाया जा रहा है, स्वाभाविक रूप से इन्हें विभिन्न राज्य सरकारों के परामर्श से आयोजित किया जा रहा है और विभिन्न राजनीतिक दलों को भी तैयारी की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। जयशंकर ने कहा, ‘‘यह समग्र प्रयास सहकारी संघवाद के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’
उन्होंने कहा कि हमारी जी20 समूह की अध्यक्षता के दौरान उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण विचार विमर्श में, समावेशी और अनुकूल विकास, टिकाऊ विकास लक्ष्य (एसडीजी) संबंधी प्रगति, हरित विकास एवं पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली (मिशन लाइफ), प्रौद्योगिकी परिवर्तन और सार्वजनिक डिजिटल आधारभूत ढांचा, बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार, महिलाओं के नेतृत्व में विकास एवं अंतरराष्ट्रीय शांति और सद्भाव शामिल हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि जी20 की हमारी अध्यक्षता के दौरान होने वाले विचार-विमर्श के फलस्वरूप इन क्षेत्रों से संबंधित परिणाम सामने आयेंगे।

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