झटका – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 24 May 2023 07:47:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 नोटबंदी 2.0 से जमाखोरों को लगेगा झटका https://samacharpacheesa.com/?p=6974 Wed, 24 May 2023 07:47:31 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6974 भारतीय रिजर्व बैंक ने बीते दिनों घोषणा की कि वह दो हजार रुपये के सभी नोटों को प्रचलन से वापस ले रहा है और आगामी 30 सितंबर तक इसे बैंक से बदला जा सकता है। अभी जो दो हजार रुपये के 10.8 फीसदी नोट प्रचलन में हैं, वे किनके पास हैं? रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2023 तक 33.5 लाख करोड़ रुपये के नोट प्रचलन में थे। बैंकों द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, उनमें से 1.03 लाख करोड़ रुपये बैंकों के पास हैं। इसलिए बैंकों के पास प्रचलित नोटों का मात्र तीन फीसदी से थोड़ा ज्यादा हिस्सा है, बाकी करीब 97 फीसदी नोट आम लोगों के पास हैं। यानी जनता के पास 3.51 लाख करोड़ रुपये के बराबर दो हजार रुपये के बैंक नोट होंगे। रियल एस्टेट, निर्माण, थोक व्यापार और ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी नकदी का उपयोग प्रचलित है। इसलिए इनमें से अधिकांश दो हजार रुपये के नोट इन क्षेत्रों के कारोबारियों के पास होंगे। बड़ा सवाल यह है कि यह कदम क्यों उठाया गया और वह भी इस समय क्यों। मार्च, 2018 से बैंकों को 2,000 रुपये के नोट जारी न करने का निर्देश दिया गया था। जब इन नोटों को बैंकों में जमा किया गया, तो इन्हें चुपचाप रिजर्व बैंक को वापस भेज दिया गया और अर्थव्यवस्था में पुन: परिचालित नहीं किया गया। मार्च, 2018 के बाद 2,000 रुपये के नए नोट नहीं छापे गए। इस तरह दो हजार रुपये के नोटों का प्रचलन घट गया। रिजर्व बैंक ने इसके पीछे तीन कारण गिनाए हैं-पहला, इन नोटों का उपयोग दैनिक लेन-देन में नहीं किया जाता है। दूसरा, जरूरतें पूरी करने के लिए छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की उपलब्धता पर्याप्त है और तीसरा, नकदी के उपयोग को यूपीआई और डिजिटल भुगतान के व्यापक उपयोग द्वारा पूरा किया जा रहा है। नवंबर, 2016 में रातोंरात 86 फीसदी भारतीय मुद्रा के विमुद्रीकरण के बाद से अर्थव्यवस्था की प्रगति को देखें, तो 12 मई, 2023 तक नोटों का प्रचलन वास्तव में 17.74 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 34.58 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यानी ‘कैशलेस’ अर्थव्यवस्था की ओर बढऩे के बजाय, अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह पिछले साढ़े छह वर्षों में दोगुना हो गया है। भले ही छोटे लेन-देन यूपीआई और ई-कॉमर्स जैसे डिजिटल भुगतान नेटवर्क में स्थानांतरित हो गए हैं, पर अर्थव्यवस्था में नकदी में लगभग सौ फीसदी वृद्धि को देखते हुए यह स्पष्ट है कि काले धन के खिलाफ लड़ाई को और अधिक कठोर तथा नवीन बनाने की आवश्यकता होगी। यह रिजर्व बैंक का एक सुविचारित कदम है, जिससे दो हजार रुपये के नकदी जमाखोरों को झटका लगेगा। अर्थव्यवस्था में काले धन के खतरे को कम करने के लिए भ्रष्ट और आपराधिक तत्वों से सख्ती से निपटने की जरूरत है।

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यूपी विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने जीतीं 5 में से 4 सीटें, सपा को लगा बड़ा झटका https://samacharpacheesa.com/?p=6057 Fri, 03 Feb 2023 07:56:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6057 लखनऊ। यूपी एमएलसी चुनाव 2023 के नतीजे आ चुके हैं। सामने आए नतीजों मे जहां भाजपा का डंका बजा है वहीं समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। भाजपा के प्रत्याशियों ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गया है। उल्लेखनीय बात है कि समाजवादी पार्टी के खाते में एक भी सीट नहीं गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा प्रत्याशियों को जीत की बधाई दी है।
भाजपा ने स्नातक कोटे की गोरखपुर-फैजाबाद, बरेली-मुरादाबाद, कानपुर-उन्नाव सीट और शिक्षक कोटे की झांसी-इलाहाबाद सीट पर जीत दर्ज की है। जबकि कानपुर-उन्नाव शिक्षक कोटे की एमएलसी सीट पर निर्दलीय राज बहादुर सिंह चंदेल विजयी हुए। वहीं, इन चुनावों में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी का खाता भी नहीं खुला।
स्नातक कोटे की गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की है। बरेली-मुरादाबाद सीट भी भाजपा के कब्जे में आई। यहां पर जयपाल सिंह व्यस्त ने तीसरी बार जीत दर्ज की है। वहीं भाजपा ने यह सीट लगातार आठवीं बार जीती है। कानपुर-उन्नाव सीट पर भाजपा के अरुण पाठक ने जीत हासिल की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह तीनों एमएलसी सीटें पहले भी भाजपा के ही पास थीं।

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अनुराग ठाकुर ने पहलवानों का धरना समाप्त करवा कर सियासी अखाड़े पर दिया विपक्ष को झटका https://samacharpacheesa.com/?p=5846 Sat, 21 Jan 2023 10:06:07 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5846 नईदिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर दो दिन से प्रदर्शन कर रहे पहलवानों को मनाने में आखिरकार केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर सफल हो गये। वैसे भी पहलवान शुरू से ही कह रहे थे कि उनकी लड़ाई सरकार या किसी मंत्री के खिलाफ नहीं है। खिलाड़ी यह भी अपील कर रहे थे कि उनकी लड़ाई को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाये। खिलाड़ियों ने अपने धरना स्थल पर पहुँचे वामपंथी नेताओं को भगा भी दिया था। पहलवानों का धरना समाप्त करा कर खेल मंत्री ने सियासी अखाड़े पर विपक्ष को झटका भी दे दिया है। उधर, मोदी सरकार से अपनी शिकायतों का समाधान होने का आश्वासन मिलने के बाद शुक्रवार देर रात सभी पहलवानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। हम आपको बता दें कि पहलवानों की शिकायतों के समाधान के पहले कदम के तहत निशाने पर आए भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है। केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ दूसरे दौर की वार्ता में गतिरोध दूर होने पर विनेश फोगाट, बंजरग पुनिया, साक्षी मलिक और रवि दहिया सहित अन्य पहलवानों ने अपना धरना समाप्त करने का फैसला किया।
हम आपको यह भी बता दें कि भारतीय ओलंपिक संघ ने भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर चोटी के पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए शुक्रवार को सात सदस्यीय समिति गठित की है जिसमें एमसी मैरीकॉम और योगेश्वर दत्त जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। दिग्गज मुक्केबाज मैरीकॉम और पहलवान योगेश्वर के अलावा इस पैनल में तीरंदाज डोला बनर्जी और भारतीय भारोत्तोलन महासंघ के अध्यक्ष सहदेव यादव भी शामिल हैं। समिति में दो वकील तालिश रे और श्लोक चंद्रा और पूर्व शटलर अलकनंदा अशोक भी शामिल हैं। यह फैसला भारतीय ओलंपिक संघ की कार्यकारी परिषद की आपात बैठक में लिया गया। इस बैठक में भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और संयुक्त सचिव कल्याण चौबे के अलावा अभिनव बिंद्रा और योगेश्वर जैसे खिलाड़ियों ने भी भाग लिया। शिवा केशवन विशेष आमंत्रित के रूप में बैठक में शामिल हुए। भारतीय ओलंपिक संघ अध्यक्ष पीटी ऊषा ने आश्वासन दिया है कि न्याय सुनिश्चित करने के लिये पैनल द्वारा गहन जांच की जायेगी।
इससे पहले, भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे और भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह ने कहा था कि वह 22 जनवरी को महासंघ की वार्षिक आम सभा (एजीएम) के बाद अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष जारी करेंगे। महासंघ अध्यक्ष के पुत्र और गोंडा सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने यह जानकारी दी थी। बृजभूषण शरण सिंह ने शुक्रवार सुबह गोंडा स्थित अपने मूल निवास पर एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया था। हालांकि, संवाददाता सम्मेलन को टाले जाने के करीब सात घंटे बाद, उनके बेटे प्रतीक पत्रकारों से मुखातिब हुए। संवाददाताओं को संबोधित करते हुए प्रतीक भूषण ने कहा, “मैं अपने पिता की ओर से आया हूं और मैं आप सभी को सूचित करना चाहता हूं कि हम 22 जनवरी को डब्ल्यूएफआई की एजीएम के बाद लिखित बयान जारी करेंगे।’’ बहरहाल, अब उन्हें पद से हटा दिया गया है जिससे वह जांच में हस्तक्षेप नहीं कर पाएंगे।

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