तेलंगाना – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 28 Jan 2023 05:43:35 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 क्या चाहते हैं खम्मम में जुटे विपक्षी दल https://samacharpacheesa.com/?p=5930 Sat, 28 Jan 2023 05:43:35 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5930 मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा अब पूर्ण होने को है। ऐसे में पांच विपक्षी दलों के नेताओं के तेलंगाना में एकजुट होने से विपक्षी एकता पर जवाब मिलने से ज्यादा सवाल उठ खड़े हुए हैं। बेशक यह अप्रत्याशित नहीं था। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव लंबे समय से क्षेत्रीय दलों का संघीय मोर्चा बनाने की कवायद में जुटे हैं। अपने क्षेत्रीय दल तेलंगाना राष्ट्र समिति को भारत राष्ट्र समिति का नाम देकर वह अपनी राष्ट्रीय राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी स्पष्ट कर चुके हैं। 18 जनवरी को तेलंगाना के खम्मम में हुई रैली में तीन राज्यों के मुख्यमंत्री-अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान और पिनाराई विजयन – सहित पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सीपीआई नेता डी. राजा भी शामिल हुए। तमाम वर्गों की समस्याओं पर चिंता जताते हुए रैली में बताया गया कि तेलंगाना की कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा संबंधी नीतियां उनका सुनियोजित समाधान पेश करती हैं। आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती खम्मम में जुटे पांच विपक्षी नेताओं के मोदी और बीजेपी विरोध पर तो संदेह नहीं, पर उनकी क्षमता पर जरूर है। ये जिन राज्यों के क्षत्रप हैं, वहां से देश की 543 सदस्यीय लोकसभा में 120 सांसद आते हैं। इन दलों के पास मात्र 19 सांसद हैं। इसके मुकाबले कांग्रेस के पास इस बुरे वक्त में भी, 53 सांसद हैं, जिसे अलग-थलग करने का संकेत खम्मम रैली से गया है। बेशक इनमें से कोई भी नेता रैली में कांग्रेस के विरुद्ध नहीं बोला, पर जब-तब आते रहे उनके बयान और अब तक के व्यवहार से साफ है कि उनके निशाने पर कांग्रेस भी है, जिसके तेवर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा आगे बढऩे के साथ-साथ बदलते नजर आ रहे हैं। भारत जोड़ो यात्रा से जनमानस में राहुल की छवि में बदलाव और हताश कांग्रेस में नए उत्साह के संचार से विरोधी भी इनकार नहीं कर रहे। इससे बीजेपी का चिंतित होना स्वाभाविक है, पर विपक्षी नेता भी कम आशंकित नहीं हैं। बात तेलंगाना की करें तो केसीआर ने अपना राजनीतिक जीवन कांग्रेस से ही शुरू किया था। पृथक तेलंगाना के लिए लंबे संघर्ष से वह इस राज्य के स्वाभाविक नेता बने। लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए बिसात बिछा रहे केसीआर की पार्टी टीआरएस ने पिछले चुनाव में 120 सदस्यीय विधानसभा (एक सदस्य मनोनीत होता है) में 88 सीटें जीती थीं। दलबदल और उप चुनाव के जरिए बाद में यह आंकड़ा 100 पार कर गया। प्रेक्षकों का मानना है कि पिछला प्रदर्शन दोहराना तो कठिन है, पर सरकार बनाने में कोई मुश्किल नहीं होगी, क्योंकि हाशिए पर पड़ी कांग्रेस और बीजेपी ज्यादा चुनौती नहीं पेश कर पाएंगी। फिर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से लगभग 200 किमी दूर जिस खम्मम को विपक्षी रैली के लिए चुना गया, उसकी अपनी भी राजनीति है। खम्मम कभी वामपंथी गढ़ रहा, बाद में कांग्रेस को वहां अच्छी चुनावी सफलता मिली। पिछले चुनाव में टीआरएस वहां की 10 विधानसभा सीटों में से मात्र एक जीत पाई थी। यह अलग बात है कि बाद में कांगेस के 6 और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के 2 विधायक टीआरएस में शामिल हो गए। खम्मम रैली से केसीआर ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में आने के अपने इरादे भी जाहिर कर दिए हैं। महज 17 लोकसभा सीटों वाले तेलंगाना के बल पर केसीआर राष्ट्रीय राजनीति में लंबी छलांग नहीं लगा सकते। इनमें से भी टीआरएस के पास सिर्फ 9 हैं। बीआरएस के जरिए राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं पाल लेना आसान है, पर उन्हें पूरा करने के लिए पैरों तले जमीन चाहिए, जो तेलंगाना के बाहर आंध्र में अपेक्षाकृत आसानी से मिल सकती है। ऐसे में कांग्रेस की मजबूती उन्हें कैसे गवारा हो सकती है?
उत्तर पर पकड़
उत्तर प्रदेश लोकसभा में 80 सांसद भेजता है। अखिलेश एक बार और मुलायम सिंह तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, पर बीजेपी ने अब वहां जैसी पकड़ बना ली है, उसमें एसपी-बीएसपी जैसे दलों की सत्ता वापसी बहुत मुश्किल है। एसपी-बीएसपी, दोनों ने ही जनाधार कांग्रेस से छीना है। इसलिए उन्हें शायद बीजेपी से भी ज्यादा कांग्रेस की मजबूती अपने लिए खतरा लगती है। यही वजह है कि अखिलेश इतनी दूर खम्मम तो चले गए, पर उत्तर प्रदेश में ही भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया। लोकसभा में एसपी के मात्र 5 सांसद हैं। कांग्रेस के परंपरागत जनाधार पर अपनी राजनीतिक इमारत खड़ी करने वाले दलों में नया नाम आप का है। आप ने कांग्रेस से पहले दिल्ली की सत्ता छीनी और फिर पंजाब की। गुजरात में कांग्रेस की ऐतिहासिक दुर्गति में भी आप का योगदान रहा। जाहिर है, वह कांग्रेस का विपक्षी एकता की धुरी बनना बर्दाश्त नहीं कर सकती। पर अजीब विडंबना है कि दो राज्यों में सरकार है, पर लोकसभा में उसकी उपस्थिति शून्य है।
महत्वाकांक्षाओं की मोर्चाबंदी
राष्ट्रीय ही नहीं, क्षेत्रीय राजनीति में भी वामपंथ के लगातार सिकुड़ते जाने के लिए उसकी दिशाहीनता ज्यादा जिम्मेदार रही है। पश्चिम बंगाल में पिछला विधानसभा चुनाव वम दल ममता बनर्जी के विरुद्ध कांग्रेस के साथ मिल कर लड़े। अगले महीने होने वाले त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी उसी प्रयोग की संभावना है, पर केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ से मुकाबले के चलते केसीआर की कांग्रेस विरोधी मोर्चाबंदी का भी मोह नहीं छोड़ पाते। मराठा दिग्गज शरद पवार राहुल की प्रशंसा कर चुके हैं तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साफ कह चुके हैं कि कांग्रेस के बगैर बीजेपी विरोधी मोर्चा निरर्थक है। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और आंध्र के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी इस मुद्दे पर अकसर मौन ही रहते है। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपने पत्ते खोलने की जल्दी में नहीं लगतीं। ऐसे में खम्मम रैली विपक्षी एकता की कवायद कम, महत्वाकांक्षाओं की मोर्चाबंदी ज्यादा नजर आती है।

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तेलंगाना में कल बीआरएस की जनसभा में शामिल होंगे केजरीवाल, अखिलेश यादव, वाम नेता https://samacharpacheesa.com/?p=5753 Tue, 17 Jan 2023 10:00:42 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5753 हैदराबाद। तेलंगाना में सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) बुधवार को खम्मम शहर में एक जनसभा आयोजित करेगी जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के डी राजा शामिल होंगे। इस जनसभा को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि यह तेलंगाना राष्ट्र समिति द्वारा अपना नाम बदलकर बीआरएस करने के बाद उसकी पहली जनसभा है और साथ ही इसमें विभिन्न विपक्षी दलों बीआरएस, आम आदमी पार्टी (आप), समाजवादी पार्टी (सपा) और वाम दलों के नेता एक साथ दिखाई देंगे।
बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव तथा अन्य नेता बुधवार को खम्मम जाने से पहले हैदराबाद के समीप यदाद्री में भगवान लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर जाएंगे जिसका राव सरकार ने व्यापक स्तर पर पुनरुद्धार किया है। बीआरएस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बी विनोद कुमार ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि हैदराबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर खम्मम में ये नेता तेलंगाना सरकार के नेत्र जांच कार्यक्रम ‘कांति वेलुगु’ के दूसरे चरण के उद्घाटन में शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और उदारवाद समेत संविधान की आत्मा को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीआरएस देश में ‘‘वैकल्पिक राजनीति’’ लाने का प्रयास कर रही है।
यह पूछने पर कि क्या खम्मम जनसभा को 2024 में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी एकता की ओर एक कदम के तौर पर देखा जा सकता है, इस पर कुमार ने कहा कि यह केवल बार-बार दोहराए जाने वाले ‘मोर्चे’ का गठन नहीं है और बीआरएस देश के लोगों को ‘‘वैकल्पिक राजनीति’’ देना चाहेगी। इस बीच, भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और सांसद बंदी संजय कुमार ने अन्य राज्य के मुख्यमंत्रियों को यदाद्री मंदिर में ले जाने के लिए केसीआर के नाम से मशहूर मुख्यमंत्री राव पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘कल्वाकुंतला परिवार के लिए मंदिर उद्योग केंद्र बन गए हैं।

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केसीआर का बीजेपी पर सीधा हमला https://samacharpacheesa.com/?p=5717 Fri, 13 Jan 2023 10:06:30 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5717 हैदराबाद। सत्तारूढ़ बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि धार्मिक और जातिगत कट्टरता और समाज में विभाजन को बढ़ावा देने से तालिबान जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। केसीआर ने कहा कि यदि धार्मिक और जातिवादी कट्टरता को बढ़ावा दिया जाता है, लोगों को विभाजित किया जाता है और ऐसी नीतियों का पालन किया जाता है, तो यह नरक जैसा हो जाएगा। अफगानी तालिबान जैसा मामला बन जाएगा और एक भयानक स्थिति को जन्म दे सकता है। बीआरएस चीफ ने कहा कि इस घृणा के कारण ऐसे हालात पैदा होंगे जिनमें देश की जीवन रेखा ही जल जाएगी। इसलिए खासकर युवाओं को सतर्क रहना चाहिए।
महबूबाबाद और कोठागुडेम में एक एकीकृत जिला समाहरणालय का उद्घाटन करने के बाद जनसभाओं को संबोधित करते हुए केसीआर ने कहा कि देश और राज्य तभी प्रगति कर सकते हैं जब केंद्र में प्रगतिशील सोच वाली और “निष्पक्ष” सरकार हो। उन्होंने भविष्य की राजनीति में पूरे देश को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाते हुए तेलंगाना का पक्ष लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) नहीं बढ़ा। केंद्र की मौजूदा सरकार राज्य सरकार के बराबर प्रदर्शन करने में विफल रही। राव ने कहा कि तेलंगाना का जीएसडीपी 2014 में राज्य गठन के समय 5 लाख करोड़ रुपये था और आज बढ़कर 11.5 लाख करोड़ रुपये हो गया।
केंद्र की अक्षम नीतियों के कारण अकेले तेलंगाना को 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जीएसडीपी 14.50 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए था, लेकिन केंद्र की नीतियों के कारण यह 11.50 लाख करोड़ रुपये रहा। भद्राद्री-कोठागुडेम में बोलते हुए, राव ने कहा कि पार्टी और सरकार जो सभी नागरिकों की समान रूप से देखभाल करती है वह एक “महान” होगी और सांप्रदायिक और जातिवादी आधार पर लोगों के बीच नफरत से देश को नुकसान होगा। अगर देश में इस तरह की गड़बड़ी होती है, अगर हम तालिबान की तरह बन जाते हैं, तो क्या निवेश आएगा? क्या नौकरियां होंगी? क्या मौजूदा उद्योग बने रहेंगे? अशांति होगी और कर्फ्यू, लाठीचार्ज और फायरिंग का माहौल होगा तो समाज कैसा होगा?” आप सब देख रहे हैं कि आज क्या हो रहा है, देश को गलत रास्ते पर ले जाने की कितनी नापाक कोशिशें हो रही हैं।

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तेलंगाना कांग्रेस पर संकट के बादल, 12 सदस्यों ने दिया इस्तीफा https://samacharpacheesa.com/?p=5293 Mon, 19 Dec 2022 08:18:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5293 हैदराबाद। तेलंगाना के 12 नेताओं ने हाल ही में गठित प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) से इस्तीफा दे दिया है। यह विकास, जो सोमवार की सुबह हुआ, कथित रूप से “प्रवासी” नेताओं को पार्टी के वरिष्ठ वफादारों के आगे पद दिए जाने के जवाब में है। इसने तेलंगाना में पार्टी नेताओं के बीच अंतर्कलह पैदा कर दी है। नेताओं ने अपने त्यागपत्र में दावा किया कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव राज्य में तानाशाही शासन चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि केसीआर को सत्ता से हटाने के लिए कड़े संघर्ष की जरूरत है। इस्तीफा देने वालों में तेलंगाना विधायक सीतक्का भी शामिल हैं।
पत्र में आगे लिखा है कि लोकसभा सांसद उत्तम कुमार रेड्डी ने आरोप लगाया था कि नए पीसीसी सदस्यों में से 50 प्रतिशत से अधिक ऐसे नेता हैं जो हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी से पार्टी में शामिल हुए हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि इसने उन नेताओं को निराश किया है जिन्होंने पिछले छह वर्षों से कांग्रेस के लिए काम किया है। इस्तीफा देने वाले नेताओं की सूची में विजयरामन राव, वजरेश यादव, सीतक्का (विधायक) और प्रदेश कार्यकारी समिति (पीईसी) के सदस्य वेम नरेंद्र रेड्डी, दोम्मती संबैया, उपाध्यक्ष कवमपल्ली सत्यनारायण, डीसीसी अध्यक्ष, करीमनगर, सुभाष रेड्डी, चरकोंडा वेंकटेश, सत्तू मल्लेश, पटेल रमेश रेड्डी, शशिकला यादव और चिलुका मधुसूदन रेड्डी, महासचिव शामिल हैं।
पत्र में, इन नेताओं ने कहा कि वे कांग्रेस में शामिल होने का कारण सोनिया गांधी के प्रति श्रद्धा के कारण थे जिन्होंने तेलंगाना को जन्म दिया। पत्र में कहा गया है, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ नेताओं ने हमें और पार्टी को मजबूत करने के हमारे प्रयासों को निशाना बनाया है।

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भाजपा अध्यक्ष नड्डा करेंगे कर्नाटक और तेलंगाना का दौरा https://samacharpacheesa.com/?p=5214 Wed, 14 Dec 2022 08:25:33 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5214 नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा बृहस्पतिवार को कर्नाटक और तेलंगाना का एक दिवसीय दौरा करेंगे। आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा दक्षिणी राज्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है, इस लिहाज से उनके इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों ने कहा कि नड्डा कर्नाटक में संगठनात्मक बैठकों की अध्यक्षता करेंगे, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। वह तेलंगाना के करीमनगर में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
तेलंगाना में सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति के विकल्प के रूप में भाजपा खुद को पेश कर रही है। हाल के दिनों में हुए उपचुनावों में उसके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में भी उभरी है। पिछले दिनों तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति किया गया है। कर्नाटक में भाजपा सत्ता में है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस वहां भाजपा को सत्ता से बेदखल कर फिर से सत्ता में वापसी के लिए अभियान चला रहा है।

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आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी https://samacharpacheesa.com/?p=5193 Wed, 14 Dec 2022 07:08:47 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5193 अगले साल होने वाले राजस्थान और मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों के चुनाव में भाजपा से लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपने-अपने दांव से चुनावी चौसर सजानी शुरू कर दी है। भाजपा जहां गुजरात में मिली एतिहासिक जीत के साथ उत्साह में हैं। वहीं कांग्रेस भी हिमाचल प्रदेश में भाजपा को सत्ता से बाहर कर अपनी जीत पर इतरा रही है। फिलहाल दोनों पार्टियों को मिली अलग-अलग राज्यों की जीत ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में नई ऊर्जा तो भर ही दी है। वहीं दोनों पार्टियां गुजरात और हिमाचल के अपने-अपने फॉर्मूले को अगले साल होने वाले चुनावों में इस्तेमाल करने वाली हैं। अगले साल होने वाले राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के चुनाव भाजपा और कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भाजपा ने गुजरात में जो इतिहास रचा उसके पीछे जबरदस्त रणनीति ही रही है। इसमें सबसे अहम रणनीति का हिस्सा एक चौथाई नेताओं को दोबारा टिकट न देने से लेकर जनता के बीच मोदी के चेहरे और विश्वास का भुनाना शामिल है। पार्टी ने अगले साल होने वाले अलग-अलग राज्यों के चुनावों को लेकर न सिर्फ नीतियां बनानी शुरू कर दी हैं, बल्कि बीते कई महीनों से संगठनात्मक स्तर पर पूरा ढांचा दुरुस्त कर उसका फीडबैक भी लेना शुरू किया जा चुका है। वह कहते हैं कि कर्नाटक और तेलंगाना समेत छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा ने बहुत प्रभावशाली तरीके से चुनाव की रणनीति और तैयारियां शुरू कर दी हैं। वह कहते हैं कि भाजपा को 2018 के चुनावों में कर्नाटक और मध्यप्रदेश में सत्ता तो नहीं मिली थी, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के चलते बाद में भाजपा की सरकार बनी। इसलिए भाजपा को इस बार इन चुनावों में अलग रणनीति के साथ ही मैदान में उतरना होगा। अगले साल होने वाले चुनावों के लिए सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस भी उसी तरीके की रणनीति बना रही है। कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश में जिस तरीके से ‘मुद्दों को आगेÓ करके और लोगों को सीधे तौर पर उनसे जोड़कर के चुनाव लड़ा गया, उसी पैटर्न पर अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव में उतरेंगे। हालांकि अगले साल जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, उसमें छत्तीसगढ़ और राजस्थान में तो कांग्रेस की सरकार भी है। जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार बनी थी। कर्नाटक में भी राजनीतिक समीकरणों के चलते कांग्रेस की सरकार बनी थी।

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