धर्मान्तरण – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 24 Jan 2023 05:54:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 जबरदस्ती न सही पर धर्मान्तरण तो हुआ https://samacharpacheesa.com/?p=5866 Tue, 24 Jan 2023 05:53:06 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5866 छत्तीसगढ़ प्रदेश में विगत कुछ माह से धर्मान्तरण को लेकर बवाल मचा हुआ है। जब भी प्रदेश में धर्मान्तरण की आवाज उठती है तो सरकार और कांग्रेस पार्टी की ओर से यह बयान आता है कि धर्मान्तरण का सबूत लाए। अभी राजधानी में आयोजित चर्चित बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र शास्त्री ने धर्मान्तरण का विषय उठाया तो प्रदेश के मंत्री कवासी लखमा ने उन्हें चुनौती दी कि एक भी धर्मान्तरण का मामला अगर मिला तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। इधर नारायणपुर में धर्मान्तरण को लेकर जो हिंसक झड़पें हुई उस विषय पर देश और दुनिया राजनीतिक दल, बुद्धिजीवी और संगठन अपना मत दे रहे है। वे इसाई समुदाय और संगठन पर हमला बताकर इसकी निंदा कर रहे है और प्रदेश सरकार के रवैये की आलोचना भी कर रहे है। अभी तक नारायणपुर घटना की शुरुआत में जब जनजातीय समुदाय के लोगों पर मतांतरित लोगों के द्वारा जो हमला हुआ, उसकी निंदा कोई नहीं कर रहा है। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात नारायणपुर, कोण्डागांव और कांकेर जाकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वहां पर जबरदस्ती कोई धर्मान्तरण नहीं हुआ है। इसका मतलब यह है कि धर्मान्तरण हुआ है लेकिन जबरदस्ती नहीं हुआ है। दूसरी ओर बागेश्वर धाम के आचार्य जब इसाई और मुस्लिम समुदाय के लोगों का हिन्दू धर्म में वापसी करवा रहे है तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बयान आया कि यह अच्छी बात लेकिन हिन्दू धर्म में वापस आए लोगों को किस वर्ण मे रखेंगे? सवाल यह है कि जब भारतीय संविधान वर्ण और जातीय व्यवस्था को खारिज कर देता है तो मुख्यमंत्री वर्ण व्यवस्था की बात क्यों कर रहे है? भारत में कर्म के आधार पर वर्ण व्यवस्था बनाई गई थी, लेकिन अब उसका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। धर्मान्तरण के मुद्दे पर राजधानी रायपुर में चल रहे धर्मेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम में चमत्कार और अंधविश्वास को लेकर भी राजनीति हो रही है। वे मंत्र और आस्था के दम पर पीडि़त, दुखी और बीमार लोगों की समस्या दूर करने का दावा कर रहे है जिसे चमत्कार कह कर अंध श्रद्धा निर्मूलन जैसी संस्थाएं विरोध कर रही हैं। रोचक बात यह है कि इसाई संगठन चंगाई उत्सव और प्रार्थना के नाम पर इसी तरह लोगों की बीमारी ठीक करने का चमत्कार दिखाकर धर्मान्तरण करते है। अंतर यह है कि धीरेन्द्र शास्त्री खुले आम ऐसा कर रहे जबकि दूसरे लोग बंद कमरे में यही काम कर रहे हैं। उनका चमत्कार अंध श्रद्धा निर्मूलन को दिखाई नहीं देता।

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धर्मान्तरण को लेकर एकतरफा कार्यवाही https://samacharpacheesa.com/?p=5675 Tue, 10 Jan 2023 06:06:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5675 छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में धर्मान्तर ण का मुद्दा उग्र रुप ले चुका है। ऐसा नहीं है कि यह अचानक प्रगट हुआ। पिछले 4 वर्षों से इसाई मिशनरियां के द्वारा धर्मान्तरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। समस्या तो तब हुई जब धर्मान्तरित हो चुके आदिवासी और मूल धर्म मानने वाले आदिवासियों के बीच में संस्कार को लेकर विवाद होने लगे। यह बात भी अचानक सामने नहीं आई, सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक ने तो 2019 की शुरुआत में ही ऐसी स्थिति निर्मित होने का आंकलन कर लिया था। भारतीय जनता पार्टी व अन्य संगठन भी बस्तर में हो रहे धर्मान्तरण और उसके जनजातीय समाज पर पडऩे वाले प्रभाव को लेकर सरकार से गुहार लगाई लेकिन इस मामले की गंभीरता को ताक पर रखकर सरकार ने राजनीतिक बयानबाजी शुरु कर दी। यह तर्क दिया गया कि भारतीय जनता पार्टी के 15 वर्ष के शासन में बड़ी संख्या में चर्च बने। अब इस तर्क का बस्तर में हो रहे विवाद से वैसे कोई संबंध नहीं है। यह भी सबको पता है कि संविधान में किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता है, इसलिए अगर इसाई मिशनरियां चर्च का निर्माण कर रही है तो संविधान के अनुसार उन्हें रोका नहीं जा सकता। भाजपा के शासनकाल में भी निर्माणाधीन चर्च को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए, तोडफ़ोड़ भी की गई लेकिन शासन ने त्वरित कार्यवाही करते हुए दोषियों पर कार्यवाही की। अब पिछले 3 वर्षों से पनप रहे विवाद को शांत करने के लिए कोई कदम उठाने के बजाय थाने में धर्मान्तरण के मामले में दर्ज अपराध के नाम पर इस मामले को टाला गया। सभी जानते है कि मिशनरियां किस प्रकार धर्मान्तरण का खेल खेलती है। अब सवाल इन बातों पर चर्चा करने का नहीं बल्कि अब तो जो बस्तर इस मामले में धधक रहा है उसे लेकर सरकार का क्या रुख है, यह महत्वपूर्ण है। नारायणपुर जिले के गुर्रा गांव में जनजातियों पर इसाई मिशनरियों की ओर से हमला किया गया और दूसरे दिन की घटना इसकी प्रतिक्रिया ही थी। लेकिन देशभर में माहौल क्या बनाया जा रहा है यह देखने वाली बात है। राष्ट्रीय मीडिया और खासकर कुछ चिन्हित समूह इसाई मिशनरी और चर्च पर हुए हमले को लेकर मुखर है और इसका दोष भाजपा और हिन्दूवादी संगठनों को दिया जा रहा है। सही बात कहीं नहीं आ रही कि इस पूरे प्रकरण में इसाई मिशनरियों का दोष कितना है? प्रशासन ही आदिवासियों के खिलाफ कार्यवाही कर रही है और इस घटना की आड़ में आदिवासियों के हक में खड़े होने वाले संगठनों के खिलाफ कार्यवाही करने की योजना बना रहा है। इससे बात बनेगी नहीं और बिगड़ेगी

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