नाम – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 17 Aug 2023 07:07:30 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 सरकार नें बदला नेहरू मेमोरियल का नाम https://samacharpacheesa.com/?p=7834 Thu, 17 Aug 2023 07:07:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7834 देश में स्थानों, स्मारकों और भवनों के नाम पर एक बार फिर सियासत शुरू हो गई है। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल का नाम बदल दिया है। अब नेहरू मेमोरियल को पीएम मेमोरियल के नाम से जाना जाएगा। नाम बदलने पर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी पार्टी ने मोदी सरकार पर नेहरू की विरासत को नष्ट करने का आरोप लगाया है। एडविन लुटियंस की इंपीरियल कैपिटल का हिस्सा रहा तीन मूर्ति भवन अंग्रेजी शासन में भारत के कमांडर इन चीफ का आधिकारिक आवास था। ब्रिटिश भारत के अंतिम कमांडर इन चीफ के जाने के बाद 1948 में तीन मूर्ति भवन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का आधिकारिक आवास बन गया। पंडित नेहरू 16 साल तक इस घर में रहे और यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद इस तीन मूर्ति भवन को पंडित नेहरू की याद में उन्हें समर्पित कर दिया गया और इसे पंडित नेहरू म्यूजियम एंड मेमोरियल के नाम से जाना जाने लगा। अब केंद्र सरकार ने इसका नाम नेहरू मेमोरियल से बदलकर पीएम म्यूजियम एंड सोसाइटी कर दिया है। वर्तमान में यहां व्याख्यान और सेमिनार नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं और विद्वानों के विचार-विमर्श प्रकाशित होते हैं। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र के नेहरू मेमोरियल के नाम बदलने वाले फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव और पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने कहा, एक प्रतिष्ठित संस्थान को एक नया नाम मिला है। विश्वभर में प्रसिद्ध नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी अब प्राइम मिनिस्टर्स मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के नाम से जाना जाएगा। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा नेहरू और उनकी विरासत को नकारना, बदनाम और नष्ट करना है। वह एन शब्द हटाकर उसके स्थान पर पी शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। जयराम ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और उदारवादी नींव रखने में नेहरू की योगदान को हम नहीं भूलने देंगे। नेहरू ने देश की आजादी के लिए अहम योगदान दिया है। तमाम आरोपों के बीच पीएमएमएल के कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश का बयान आया है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी को महसूस हुआ कि देश में पीएम का एक संग्रहालय होना चाहिए। फिर सवाल उठा कि यह कहां बनाया जा सकता है। इस पर फैसला लिया गया कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सही जगह है। साल 2016 में पीएम मोदी ने एक प्रस्ताव रखा था कि तीन मूर्ति परिसर में देश के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। उसी साल 25 नवंबर को हृरूरूरु की 162वीं बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बीते साल 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री संग्रहालय को जनता के लिए खोल दिया गया था।

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पार्टी बदली, गठबंधन बदला, नाम- नारा बदला https://samacharpacheesa.com/?p=7432 Thu, 20 Jul 2023 07:06:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7432 लोकसभा चुनाव 2024 के लिए तैयारियों का बिगुल बज गया है। नेताओं ने पार्टियां बदलना शुरू कर दिया है, पार्टियों ने गठबंधन बदलना शुरू कर दिया है और गठबंधनों ने नाम और नारे बदलना शुरू कर दिया है। हम आपको बता दें कि कांग्रेस ने 2004 में जिस संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानि यूपीए की स्थापना की थी उसका नाम बदल कर इंडिया कर दिया गया है। इस इंडिया नामक विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस विरोधी आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस भी शामिल हो गयी हैं। एक तरफ विपक्षी गठबंधन में शामिल दलों की संख्या 26 तक पहुँच गयी है तो दूसरी और देश में पहली बार गठबंधन सरकार के प्रयोग को सफल बनाने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल दलों की संख्या 39 तक पहुँच गयी है। अब, आगामी लोकसभा चुनावों को एनडीए बनाम इंडिया करार दिया जा रहा है। इंडिया गठबंधन वाले टैगलाइन दे रहे हैं- जीतेगा भारत तो दूसरी ओर एनडीए कह रहा है कि आजादी के शताब्दी वर्ष तक हमें विकसित, आत्मनिर्भर और मजबूत भारत बनाना है। यानि एक तरफ सिर्फ इंडिया है तो दूसरी ओर विकसित और आत्मनिर्भर भारत। आप जरा गौर करेंगे तो यह भी पाएंगे कि इस समय नेताओं, राजनीतिक पार्टियों और गठबंधनों की जोरदार तरीके से रि-ब्रांडिंग हो रही है, यानि आपको नये कलेवर में पुराना माल ही परोसा जा रहा है। जमाना बदला है तो राजनीतिक दलों ने भी अपना अंदाज बदला है इसीलिए आपको आजकल नेता बाइक ठीक करते, खेत में धान रोपते, गली के बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते, गरीब के बच्चों को गोद में उठाते, ढाबे पर खाना खाते और मेट्रो ट्रेन या अन्य सार्वजनिक परिवहन के साधनों में आम यात्रियों के साथ यात्रा करते हुए दिख जाएंगे। आलीशान जिंदगी जीने वाले सभी नेताओं का प्रयास है कि अपने को गरीब और वंचितों के बीच का ही दिखाया जाये ताकि चुनावों के समय मतदाता ध्यान रखे कि अमुक नेता तो हमारे जैसा ही है इसलिए यदि उसे सत्ता मिली तो वह हमारा ध्यान रखेगा। जरा बेंगलुरु में हुई विपक्ष की बैठक को देखिये। उस बैठक में देश के गरीबों, वंचितों और शोषितों के हित में मिलकर काम करने का निर्णय लिया गया। लेकिन गरीबों, वंचितों, शोषितों के बारे में चिंता करने के लिए बेंगलुरु आने के लिए सभी नेताओं ने चार्टर्ड प्लेन का इस्तेमाल किया। एनडीए की बैठक को देखेंगे तो यह भी राष्ट्रीय राजधानी के एक बड़े पांच सितारा होटल में हुई। इन बैठकों का खर्च भी लाखों रुपए में आया होगा। बात यदि पार्टियों और गठबंधनों के नये रंग-रूप की करें तो इससे भले इन नेताओं, पार्टियों और गठबंधनों को लाभ हो जाये लेकिन जनता के लिए कुछ नहीं बदलने वाला है। क्योंकि पार्टी या गठबंधन का नाम भले बदल जाये नेता तो वही रहेंगे। और जब नेता वही रहेंगे तो उनकी नीयत भी वही रहेगी। जब नीयत वही रहेगी तो देश की नियति भी वही रहेगी।

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