नेताओं – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 08 Aug 2023 06:44:02 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 विपक्ष के नेताओं को खुद पर ही विश्वास नजर नहीं आ रहा है? https://samacharpacheesa.com/?p=7733 Tue, 08 Aug 2023 06:44:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7733 अब सबकी निगाहें 8 अगस्त को चर्चा की शुरुआत होने से ज्यादा इस बात पर टिकी होंगी कि सरकार के विरोध में सदन के अंदर तीखे भाषण देने वाले ये विपक्षी दल 10 अगस्त को सदन में अपने ही द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग करवा कर अपनी ताकत दिखाएंगे या नहीं ? केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में मंगलवार से चर्चा शुरू होनी है। मंगलवार यानी 8 अगस्त से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत होगी। मंगलवार, बुधवार और गुरुवार यानी 10 अगस्त तक लोकसभा में सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। 10 अगस्त को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का लोकसभा में जवाब देंगे। प्रधानमंत्री के जवाब के बाद अगर विपक्षी दल की तरफ से डिवीजन की मांग की जाएगी तो सदन में वोटिंग भी उसी दिन होगी। लोकसभा के सदस्य संख्या के आधार पर देखा जाए तो सरकार को विपक्ष द्वारा लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव के कारण फिलहाल कोई खतरा बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है। लोकसभा में बीजेपी के पास अपने दम पर बहुमत है। भाजपा के पास 301 सांसद हैं जो विपक्षी दलों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को गिराने के लिए काफी हैं। अगर इसमें एनडीए के सहयोगी दलों के सांसदों का आंकड़ा जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 331 को भी पार कर जाता है। जैसा कि आप जानते हैं कि बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस- इन दोनों राजनीतिक दलों ने भी विपक्षी द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मोदी सरकार का साथ देने का फैसला किया है। लोकसभा में बीजू जनता दल के फिलहाल 12 सांसद हैं वहीं वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों की संख्या 22 है। बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों की संख्या मिलाने के बाद सरकार के समर्थक सांसदों का आंकड़ा बढ़कर 365 तक पहुंच जाता है और यह विपक्षी दलों की गोलबंदी की तुलना में कहीं ज्यादा है। ऐसे में पहला सवाल तो यही खड़ा हो रहा है की आंकड़ा पक्ष में नहीं होने के बावजूद विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव क्यों लेकर आए हैं ? विपक्षी दल एकजुट होकर आईएनडीआईए नाम से गठबंधन तो बना चुके हैं लेकिन नंबर के आधार पर जब इस गठबंधन की ताकत को दिखाने का असली समय आया तो विपक्षी दलों ने वोटिंग करवाने की बजाय वॉकआउट करना ज्यादा बेहतर समझा। दिल्ली सरकार के अधिकार को लेकर लोक सभा में बिल पास होने के दौरान विपक्षी दल चाहते तो डिवीजऩ की मांग कर सदन में वोटिंग करवा कर अपनी ताकत दिखा सकते थे लेकिन उन्होंने उस समय ऐसा नहीं किया।

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देश में बढ़ता व्हीआईपी अभिमान https://samacharpacheesa.com/?p=5531 Fri, 30 Dec 2022 05:51:00 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5531 हमारे देश में जनता जिसे सिर पर चढ़ाती है उसके लिए सब कुछ न्यौछावर करने के लिए तैयार रहती है। ऐसे लोगों की एक झलक देखने के लिए लोगों का हुजूम निकल पड़ता है। राजनीति के क्षेत्र में महात्मा गांधी और पं. जवाहर लाल नेहरु कभी देश के हीरो हुआ करते थे। लेकिन धीरे-धीरे राजनीति में वह स्टारडम खत्म होने लगा। अब समाज के हीरो फिल्म अभिनेता और अभिनेत्रियां या तो क्रिकेट के सफल खिलाड़ी बन गए है। इसके बावजूद आजकल के नेता अपने आप को व्हीआईपी से कम नहीं समझते। किसी कार्यक्रम में अगर उन्हें मुख्यअतिथि न बनाए और सामान्य निमंत्रण भेज दें तो कार्यक्रम कितना ही महत्वपूर्ण क्यों न हो वहां जाना उन्हें अपमानजनक लगता है। वैसे कार्यक्रमों में व्हीआईपी बनाकर नेताओं को बुलाने की भी परंपरा हो गयी है। आजकल मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में भी व्हीआईपी के लिए अलग स्थान होता है। जिन्होंने जीवन में कुछ हासिल किया है उन्हें विशेष दर्जा देकर समाज सम्मानित करे तो समझ में भी आता है। लेकिन आजकल हर व्यक्ति अपने आप को व्हीआईपी समझकर विशेष रियायतें चाहता है। खासकर जहां सुरक्षाकर्मी तलाशी लेकर अपनी ड्यूटी निभाना चाहते है वहां लोगों का अभिमान आ जाता है, जबकि वह सुरक्षाकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहा होता है। राजमार्गों पर बने टोल नाकों पर से बिना टोल टैक्स दिए गुजरने को भी व्हीआईपी अभिमान से जोड़कर देखा जा सकता है। भले ही 20-25 रुपए टोल टैक्स देना पड़ता हो लेकिन लाखों रुपए की गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति चाहता है कि व्हीआईपी के लिए मिली छूट उसे हासिल हो जाए। अगर टोल प्लाजा के कर्मचारी उनसे पैसे मांग ले तो उनके अभिमान पर चोट लग जाती है। ऐसी कितनी ही घटनाएं पूरे देशभर में सामने आती है। ताजा घटना कोरबा जिले में 70 रुपए टोल टैक्स नहीं देने की जिद में टोल कर्मचारी के ऊपर अपनी मोटर गाड़ी चढ़ा देने की है। इस घटना में कर्मचारी घायल है और गाड़ी चलाने वाले युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। रायपुर-भिलाई रोड पर सांसद, मंत्री और विधायकों के समर्थकों ने टोल चार्ज नहीं पटाने की जिद पर कितनी बार तोडफ़ोड़ और मारपीट की है। ऐसा नहीं है कि टोल टैक्स देने के पैसे नहीं होते लेकिन व्हीआईपी होने का अभिमान उनको अपनी जेब से पैसे निकालने में रोकता है। इस तरह की घटनाएँ होती रहती है लेकिन जिन नेताओं के समर्थक ऐसी घटना को अंजाम देते है उनके खिलाफ न तो प्रशासन और न ही राजनीतिक पार्टियां कोई कार्रवाई।

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