प्रदर्शन – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 02 Aug 2023 10:00:02 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 आप ने विधायक विकास उपाध्याय के आवास के बाहर हवन कर किया प्रदर्शन, जमकर की नारेबाजी https://samacharpacheesa.com/?p=7662 Wed, 02 Aug 2023 10:00:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7662 रायपुर। छत्तीसगढ़ आम आदमी पार्टी ने स्थानीय मुद्दों को लेकर प्रदेश के विधायकों के आवासों का घेराव कर रही है। अगस्त महीने के शुरू होते ही आप ने रायपुर पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय के निवास का घेराव कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आप ने इस दौरान हवन अनोखे अंदाज में अपना आक्रोश जताया।
इस दौरान आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष नंद कुमार सिंह ने भाजपा और कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों पार्टी के नेता कंबल ओढ़ कर घी पीने में लगे हुए हैं। उन्हें जनता की समस्या नहीं दिखती है। शहर में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। 300 घरों के लोगों को एनडीआरएफ की मदद से बोट से रेस्क्यू करना पड़ा। उन्होंने कहा कि शहर के निचले हिस्सों में जलभराव होने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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छत्तीसगढ़ यूथ कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन: टमाटर के लिए लोन लेने पहुंचे बैंक https://samacharpacheesa.com/?p=7326 Fri, 14 Jul 2023 08:16:07 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7326 रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश युवा कांग्रेस ने टमाटर के दाम में भारी वृद्धि होने पर अनोखा प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेसियों ने भारतीय स्टेट बैंक पहुंचकर टमाटर खरीदने के लिए लोन की मांग की। साथी अलग-अलग शाखाओं में जाकर भारतीय स्टेट बैंक से टमाटर खरीदने के लिए लोन मांगा। युवा कांग्रेस के अभिषेक कसार ने कहा कि 100 दिनों में महंगाई कम करने का दावा कर सत्ता में आई नरेंद्र मोदी सरकार पिछले 9 सालों में महंगाई नियंत्रित करने में असफल साबित रही है, जो टमाटर 5-10 रुपये प्रतिकिलो बिकता था आज उसके दाम 140 रुपये प्रतिकिलो पार हो गये है। डॉलर से भी दोगुना टमाटर हो गया हैं। अच्छे दिनों का ख़्वाब दिखाकर नरेंद्र मोदी ने आम जनता की पहुंच से टमाटर को दूर कर दिया इसीलिए आज हम रायपुर शहर के भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में आकर टमाटर खरीदने के लिए लोन मांगने ब्रांच मैनेजर के पास आए।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को जो 9 वर्षों से नींद में है और जनता की तकलीफों को नजरअंदाज कर रही है। महंगाई अपनी चरम सीमा पार कर चुकी है। मोदी सरकार को जगाने के लिए आज हम भारतीय स्टेट बैंक पहुंचकर टमाटर के लिए लोन की मांग की आने वाले समय में महंगाई पर यदि रोक नहीं लगती, आम सब्जियों के दाम कम नहीं होते, तो हम केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे।
कार्यक्रम में महासचिव शदाद खान, रायपुर उत्तर विधानसभा उपाध्यक्ष नवाज खान, प्रदेश प्रवक्ता अर्जुन श्रीवास्तव, रायपुर उत्तर विधानसभा उपाध्यक्ष हैदर अली, रायपुर पश्चिम विधानसभा महासचिव पंकज सिंह, रायपुर दक्षिण विधानसभा महासचिव प्रवाह नासरे, रायपुर उत्तर विधानसभा महासचिव अब्दुल मलिक, हर्ष भास्कर, रिंकु उपस्थित रहे।

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भारतीय दंड संहिता को लोकतांत्रिक करने की जरूरत https://samacharpacheesa.com/?p=7119 Tue, 20 Jun 2023 07:53:10 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7119 18 जून को श्री सुदर्शन प्रेरणा नामक संस्था ने रायपुर में सर्वोच्च न्यायालय के लोकप्रिय अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का व्याख्यान रखा था.ये आजकल काफी चर्चित हो गए है. ख़ास के अपनी जनहित याचिकाओं को लेकर। चाहे बाबा विश्वनाथ के मामले में हो या धर्मांतरण को लेकर। टीवी चैनलों में इनको सुनते हुए संतोष होता है कि कोई तो है, जो सनातन मुद्दों को लेकर लड़ रहा है. रायपुर में इनके व्याख्यान का विषय था, रामराज्य और भारतीय संविधान . इनके व्याख्यान को सुनते हुए मेरी तरह शायद सभी ने महसूस किया होगा कि हम बेशक आजदी का अमृत महोत्सव मना चुके है, लेकिन सही मायने में भारत का अपना संविधान कहाँ लागू कर सके हैं? आज भी हम दुनिया के कुछ देशो के संविधान की जूठन ही तो चाट रहे हैं. मैकाले नामक अंग्रेज ने अपनी शिक्षा नीति इस देश पर थोप कर इस देश को बर्बाद किया, हम आज़ादी के बाद उस नीति पर ही चलते रहे यानी अँग्रेज़ी हमारे जीवन का हिस्सा बनी रही। मैकाले ने भारतीय दंड संहिता (सन 1860 ) बनाई, यह देश आज़ादी के बाद से उसी संहिता को आत्मसात करके चल रहा है. एक भी धारा न कम हुई, न बढ़ी। सोचिए, हम ऐसे देश में रह रहे हैं जो गुलाम होकर आज़ाद होने के बावजूद उन्ही धाराओं के आधार पर चल रहा है, जो धाराएं आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे क्रांतिकारियों के दमन के लिए बनाई गई थी. उसी का तो दुष्परिणाम है कि आज भी आज़ाद भारत में जब प्रदर्शनकारियों का दमन करना होता है, तो मैकाले की धाराओं का इस्तेमाल करके आंदोलनकारियों को जेल भेज दिया जाता है। धारा 144 क्या है पांच लोग एक साथ एकत्र नहीं हो सकते, वरना कड़ी कारऱ्वाई की जाएगी। पहले भी की जाती रही और आज भी की जाती रही। आज़ाद भारत में लोग प्रदर्शन नहीं कर सकते। किसी मुख्यमंत्री या मंत्री के घर का घेराव नहीं कर सकते , सड़क जाम कर दी जाती है। जुलूस नि निकालने वालो पर लाठी चार्ज होता है. आज़ाद देश में कभी-कभी गोली भी दागी जाती है। यह सब देख कर मेरे जैसा व्यक्ति सोचने पर बाध्य होता है कि यह कैसे आज़ादी ? और कहाँ है रामराज्य ? यह तो केवल एक आदर्श कल्पना भर है, जो कभी साकार नहीं हो सकती इसलिए कि हमारे जनप्रतिनिधि खुद नहीं चाहते कि रामराज्य आए. सरकार किसी भी दल की हो, सबका चरित्र एक जैसा है। सब चोर चोर मौसेरे भाई की तरह है। ऐसा लगता है, हमारी राजनीतिक पार्टियों का आपस में मौन अनुबंध है की पाँच साल तुम जीमो और उसके बाद हम जीमेंगे। देश की जनता को अच्छे से ठग सकेगा, वह राज करेगा, चाहे केंद्र में या राज्यों में. यही कारण है की जो भी सरकार विराजमान होती है वह मैकाले की दंड संहिता नहीं बदलती, उसे लोकतांत्रिक नहीं करती। लोग आखिर सड़कों पर उत्तर कर प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते? इसके लिए पुलिस की अनुमति की ज़रूरत क्यों? पुलिस को केवल सूचना देनी चाहिए, अनुमति किस बात की? उसके बाद उसका काम है कि वह कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जुलूस के साथ रहे. इसलिए यह आवश्यक है कि आज़ाद देश के हिसाब से धारा 144 में परिवर्तन हो और उसमे अनुमति की जगह सूचना मात्र देने का प्रावधान किया जाए. जितने भी लोग चाहें, प्रदर्शन कर सकते है. लेकिन शर्त यही रहे कि वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन करे। प्रदर्शन जनता का बुनियादी अधिकार है, लेकिन उनका कर्तव्य है कि वह शांतिपूर्ण भी रहे. अधिकार और कर्तव्य में संतुलन बना रहेगा, तभी कहा जाएगा कि यह रामराज्य है. अब समय आ गया है हम अपने संविधान का भारतीयकरण करें। हमारे प्राचीन ग्रंथों में अनेक महत्वपूर्ण व्यवस्थाएँ दी गई हैं. उसके अनुरूप व्यवस्था बने. नई शिक्षा नीति में भारतीयता की झलक दिखती है, लेकिन उसमे भी अभी काफी गुंजाइश है। यह विषय बहुत विस्तार की मांग करता है. भविष्य में इस पर और लिखूंगा। फिलहाल तो इतना ही

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पहलवानों का आंदोलन हुआ हाईजैक https://samacharpacheesa.com/?p=7014 Thu, 01 Jun 2023 08:03:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7014 भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे पहलवानों की लड़ाई जंतर-मंतर से गंगा (हरिद्वार) तक पहुंच गई। किसान नेता नरेश टिकैत ने गंगा में मेडल बहाने से पहलवानों को रोक दिया। अब आगे क्या करना है, ये सब पांच दिन में तय होगा। जंतर मंतर पर कई दिनों से पहलवानों का प्रदर्शन जारी था, दिल्ली पुलिस किसी को वहां आने-जाने से रोक नहीं रही थी। इस आंदोलन में शामिल लोगों के बीच मनभेद भी हुआ और मतभेद भी रहा। जाट बनाम ठाकुर हुआ तो वहीं राजनीतिक दलों द्वारा इस आंदोलन को हाईजैक करने का प्रयास भी हुआ। 28 मई को नए संसद भवन के बाहर पहलवानों के प्रदर्शन को लेकर वहां मौजूद लोगों में जबरदस्त मतभेद रहा। इस बाबत दो समूह बन गए। एक का कहना था कि नए संसद भवन का उद्घाटन एक एतिहासिक दिन है, इसमें बाधा डालना ठीक नहीं है। इसके बावजूद पहलवानों ने संसद भवन की ओर जाने का प्रयास किया। पहलवानों के आंदोलन के दो चरण रहे हैं। पहला चरण जनवरी में शुरू हुआ था। उस वक्त पहलवानों ने राजनीतिक दलों को अपने मंच पर नहीं आने दिया। पहलवान बबीता फोगाट, जो भाजपा नेता हैं, उन्होंने जंतर मंतर पर पहुंचकर पहलवानों को न्याय दिलाने की बात कही। तभी बृजभूषण शरण सिंह खेमे की ओर से कहा गया कि ये आंदोलन हरियाणा के एक अखाड़े और एक परिवार का है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सांसद पुत्र दीपेंद्र हुड्डा पर पहलवानों को उकसाने का आरोप लगा। इसके बाद सोशल मीडिया पर जाट बनाम ठाकुर की पोस्टों की भरमार हो गई। पहलवानों के आंदोलन को एक जाति से जोडऩे का प्रयास किया गया। बृजभूषण शरण के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद पहलवान, जंतर मंतर से उठ गए। जब तीन माह तक कुछ नहीं हुआ, तो वे दोबारा से यहां पहुंच गए। इस बार पहलवानों ने राजनीतिक दलों, किसान नेताओं, सामाजिक संगठनों और खाप पंचायतों से आग्रह किया कि वे उनका साथ दें। इसके बाद प्रियंका गांधी, भूपेंद्र हुड्डा, अरविंद केजरीवाल, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, पूर्व सीएम ओपी चौटाला और दूसरे कई नेता पहलवानों को अपना समर्थन देने पहुंच गए। दूसरे चरण के शुरू में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली पुलिस को बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर करने का आदेश दिया। मामला दर्ज हो गया और पहलवानों के बयान भी हो गए। बृजभूषण शरण सिंह पर पॉक्सो एक्ट की धारा भी लगी। अब पहलवानों ने कहा, पुलिस बृजभूषण सिंह को गिरफ्तार करे। अब यह आंदोलन पूरी तरह से दो जातियों के बीच बंट चुका था। किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह भी मानते हैं कि पहलवानों को एक जाति विशेष से जोड़कर देखा गया। इस वजह से भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद जंतर मंतर पर आए। कांग्रेस के पूर्व सांसद एवं दलित नेता उदित राज भी नियमित तौर पर पहलवानों के आंदोलन में पहुंचते रहे। राजस्थान से गुर्जर समुदाय को साथ लाने की कोशिश हुई। बतौर पुष्पेंद्र सिंह, इस आंदोलन की दिशा को भटकाने का प्रयास हुआ है। आंदोलन को जाति विशेष से जोड़ दिया गया। गुरुवार को सोरम (मुजफ्फरनगर) में खाप पंचायत होगी। उसमें कोई बड़ा निर्णय लिया जाएगा। पहलवान भी खाप पंचायत में मौजूद रहेंगे।

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पहलवानों का दमन https://samacharpacheesa.com/?p=7004 Tue, 30 May 2023 08:27:36 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7004 कल एक तरफ जब नए संसद भवन का उद्घाटन हो रहा था और प्रधानमंत्री भारत को मदर ऑफ डिमॉक्रेसी यानीलोकतंत्र की मां बता रहे थे, उसी समय प्रदर्शन कारियों के लिए निर्धारित स्थल जंतर मंतर में प्रदर्शन कर रहे पहलवानों का पुलिस दमन कर रही थी। पहलवानो के तंबू आदि हटा दिए गए। पहलवान जब संसद भवन की ओर मार्च निकाल रहे थे, तब पुलिस ने उनको बल पूर्वक रोका और गिरफ्तार किया। बाद में कुछ पहलवानों पर एफआईआर भी दर्ज कर लिया गया। पहलवान हाथों में तिरंगा ध्वज लेकर प्रदर्शन कर रहे थे । ध्वज नीचे गिर रहा था, यह कितने शर्म की बात है। यह वही तिरंगा ध्वज है, जो कभी अंतरराष्ट्रीय में खेलों में इन्हीं खिलाडिय़ों ने शान से थामा था। आज वही ध्वज नीचे गिर जाए, और उसकी पुलिस परवाह न करे, यह असहनीय है। जब कभी ऐसी नौबत आए तो पुलिस का दायित्व है कि वह सबसे पहले राष्ट्रध्वज के सम्मान की चिंता करे। वह किसी भी स्थिति में भूमि पर न गिरे। दुख की बात यह है कि प्रदर्शन में (गली मोहल्ले वाले पहलवान नहीं) ऐसे पहलवान शामिल हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत कर देश का गौरव बढ़ाया। इसमें महिला पहलवान भी हैं, जो न्याय के लिए संघर्ष करते हुए पुलिस के हाथों पीटी जा रही हैं। आश्चर्य है कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई,जब कि वह आए दिन महिलाओं के खिलाफ असम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करता रहता है। कोई व्यक्ति कितना पॉवरफुल हो सकता है, उसे देखना हो तो हम बृजभूषण सिंह के रूप में देख सकते हैं। इसको कुश्ती संघ से न हटाकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी छवि काफी धूमिल की है। पहलवान कल शांतिपूर्ण तरीके से अपना मार्च निकाल रहे थे। और जैसा कि अकसर देश भर में होता है, पुलिस प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक रूप से रोक कर परेशान करती है तो वे उत्तेजित होकर आगे बढऩा चाहते है। बस पुलिस मौका मिलता है और वह उन पर टूट पड़ती है। अगर खिलाडी संसद भवन के पास तक जाकर प्रदर्शन करना चाहते थे, तो उनको प्रदर्शन करने देना चाहिए। ये किसी दूसरे देश के लोग नहीं हैं। अपने ही देश के सम्मानित खिलाड़ी हैं।वे अपनी पीड़ा को बताने के लिए अपने ही संसद भवन के पास जा कर प्रदर्शन करना चाहते थे, तो इस में कोई बुराई नहीं। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए खिलाडिय़ों को प्रदर्शन करने का अधिकार मिलना ही चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य की बात है एक तरफ हम लोकतंत्र की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ लोक का ही दमन करते हैं। जंतर मंतर सरकार द्वारा निर्धारित धरना स्थल है। वहां से खिलाडिय़ों का तंबू हटा देना, तो दमन की पराकाष्ठा है। आखिर खिलाडी कहां जाकर प्रदर्शन करे? क्या सोशल मीडिया में अपनी भड़ास निकलता रहे? बयानबाज़ी करता रहे? जब इतने उग्र प्रदर्शन के बावजूद कुश्ती संघ के अध्यक्ष का बाल बांका नहीं हो रहा, तो क्या सिर्फ बयानबाजी से समस्या का हल होगा? उधर पुलिस की एक मुखिया शर्मनाक बयान दे रही थी कि हम ऐसे मामले से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमारे पास अतिरिक्त सुरक्षा बल है। कुल मिला कर जो कुछ भी हुआ, वह अलोकतांत्रिक हुआ। मामले का पटाक्षेप होना चाहिए । और जल्द से जल्द कुश्ती संघ के तथाकथित बाहुबली अध्यक्ष को हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए।

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सीएम केजरीवाल के घर के बाहर भाजपा का प्रदर्शन https://samacharpacheesa.com/?p=6184 Thu, 09 Feb 2023 07:21:22 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6184 नई दिल्ली। फीडबैक यूनिट (एफबीयू) को लेकर भाजपा गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन कर रही है। प्रदर्शन के दौरान भाजपा ने दिल्ली सरकार पर जमकर निशाना साधा। प्रदेश भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दिल्ली सरकार राजनीतिक विरोधियों के प्रति दुर्भावना से काम करती है, उनके दमन में विश्वास करती है।
दमन के उद्देश्य से ही 1 फरवरी 2016 को केजरीवाल सरकार ने एफबीयू का गठन किया, ताकि राजनीतिक विरोधियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, उपराज्यपाल कार्यालय, मीडिया हाउस, प्रमुख व्यापारियों ही नहीं न्यायाधीशों तक पर नजर रखी जा सके। उपराज्यपाल अविलंब इस संदर्भ में सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दें।
सचदेवा ने कहा कि अराजक परिपाटी के कारण केजरीवाल सरकार ने एफबीयू की स्थापना अपने कैबिनेट की स्वीकृति के आधार पर कर दी जिसमें बिहार पुलिस से लाए गए 17 पुलिसकर्मी व अन्य कर्मचारी रखे गए।
इनका मुखिया सेवानिवृत्त सीआईएसएफ के डीआईजी को बनाया गया। एफबीयू को एक करोड़ रुपये का स्थापना फंड दिया गया, जिसे सीक्रेट सर्विस फंड का नाम दिया गया। करोड़ों का फंड निजी जांच एजेंसियों को देकर मुखबिर खड़े किए गए।

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