प्रधानमंत्री – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 05 Aug 2023 10:43:55 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 प्रधानमंत्री कल देश भर में 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखेंगे https://samacharpacheesa.com/?p=7707 Sat, 05 Aug 2023 10:43:54 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7707 रायपुर। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी 6 अगस्त को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश भर में 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखेंगे।यह जानकारी पत्रकार वार्ता में रेल महाप्रबंधक ने दी।
उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर अत्याधुनिक सार्वजनिक परिवहन के प्रावधान पर जोर देते रहे हैं । यह देखते हुए कि रेलवे देश भर में लोगों के परिवहन का पसंदीदा साधन है, उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के महत्व पर जोर दिया है । इस दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, देश भर में 1309 स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना शुरू की गई थी ।
इस योजना के तहत प्रधानमंत्री द्वारा 508 स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी जा रही है. 24,470 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इन स्टेशनों का पुनर्विकास किया जाएगा । इस कार्यक्रम में दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के 9 स्टेशन इन योजना में सम्मिलित हैं । जिनमें बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग के साथ साथ अकलतरा, भिलाई पावर हाउस , तिल्दा-नेवरा, गोंदिया, वडसा एवं चांदाफोर्ट स्टेशनों में व्यापक प्रस्तावित विकास कार्यों का शिलान्यास किया जाएगा ।
स्टेशनों के पुनर्विकास से जुड़े कामों के पूरा होने के बाद यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं मिला करेंगी । अभी इन स्टेशनों पर सभी मूलभूत सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन इस योजना के बाद बाद में स्टेशनों में व्यापक यात्री सुविधाओं का विस्तार हो जाएगा ।
पुनर्विकास के बाद बिलासपुर ,रायपुर और दुर्ग स्टेशन हाईटेक यात्री सुविधाओं के साथ टेक्नोलॉजी, स्थानीय संस्कृति और समृद्ध विरासत का आकर्षक केंद्र बनेंगे . यात्रियों की संख्या बढऩे के साथ-साथ रोजगार बढऩे की व्यापक संभावना विकसित होगी जिसका लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा ।
शहर के दोनों किनारों के उचित एकीकरण के साथ इन स्टेशनों को ‘सिटी सेंटरÓ के रूप में विकसित करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं । यह एकीकृत दृष्टिकोण रेलवे स्टेशन के आसपास केंद्रित शहर के समग्र शहरी विकास की समग्र दृष्टि से प्रेरित है ।
ये 508 स्टेशन 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ में 07, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 55-55, बिहार में 49, महाराष्ट्र में 44, पश्चिम बंगाल में 37, मध्य प्रदेश में 34, असम में 32, ओडिशा में 25, पंजाब में 22 स्टेशन शामिल हैं । , गुजरात और तेलंगाना में 21-21, झारखंड में 20, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 18-18, हरियाणा में 15, कर्नाटक में 13 और अन्य सम्मिलित हैं ।इस योजना में आधुनिक यात्री सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ अच्छी तरह से डिजाइन किए गए यातायात परिसंचरण, अंतर-मॉडल एकीकरण और यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए अच्छी तरह से डिजाइन किए गए साइनेज को सुनिश्चित करेगा । स्टेशन भवनों का डिज़ाइन स्थानीय संस्कृति, विरासत और वास्तुकला से प्रेरित होगा ।

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मोदी के बयान के लिए विपक्ष का हंगामा https://samacharpacheesa.com/?p=7630 Tue, 01 Aug 2023 07:20:36 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7630 मणिपुर में बीते कुछ समय से मैतेई और कुकी समुदाय के बीच एक भीषण हिंसक संघर्ष चल रहा है। यहाँ से हाल ही में दो महिलाओं के साथ यौन उत्पीडऩ का एक वीडियो हमारे सामने आया, जिसने पूरे देश का सिर शर्म से झुका दिया। इस वीडियो ने हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी व्यथित कर दिया और उन्होंने इस घटना को 140 करोड़ भारतवासियों को शर्मसार करने वाला बताया। साथ ही, यह भी आश्वस्त किया कि इस घटना के आरोपियों को किसी भी सूरत में बख़्शा नहीं जाएगा। आज यह एक जगजाहिर तथ्य है कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में मणिपुर, असम से लेकर त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी राज्यों ने विकास, शांति और समृद्धि के नये आयामों को हासिल किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने केन्द्रीय सत्ता में आते ही ‘एक्ट ईस्टÓ नीति को हमारे सामने लाया, जिसके माध्यम से उनका प्रयास भारत-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ बेहतर राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को विकसित करना है। उनके इस प्रयास से कभी शेष भारत से बिल्कुल कटा हुआ महसूस करने वाले पूर्वोत्तर के राज्य आज हमारे विकास के ‘प्रवेश द्वारÓ और ‘अष्ट लक्ष्मीÓ के रूप में अपनी एक विशेष पहचान स्थापित कर चुके हैं। लेकिन, मणिपुर हिंसा जैसी घटनाओं से पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक विकास को लेकर हो रहे सभी प्रयासों पर निश्चित रूप से बेहद नकारात्मक असर पड़ेगा और ऐसी घटनाएं दोबारा न हो हमें यह सुनिश्चित करना होगा। हालांकि, इतने संवेदनशील मुद्दे को लेकर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने जिस प्रकार का रवैया दिखाया है। वह वास्तव में बेहद दु:खद और खतरनाक है। उन्हें यह समझना होगा कि यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है और इस पर किसी प्रकार की राजनीति कतई नहीं होनी चाहिए। विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री मोदी पर लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं, कि उन्होंने आखऱि ढाई महीने से चल रहे मणिपुर हिंसा को लेकर कुछ कहा क्यों नहीं? वे क्षेत्र का दौरा करने क्यों नहीं गये? विपक्ष के ये सवाल वास्तव में उनकी अज्ञानता और राष्ट्र के प्रति उनकी अनिष्ठा को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर की स्थिति पर लगातार नजऱ बनाए हुए हैं और उनके दिशानिर्देशों पर शांति स्थापित करने के तमाम प्रयास किये जा रहे हैं। और, सवाल जहाँ तक प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी का है, तो आलोचक जरा स्वयं सोचें कि ऐसे समय में, जब भारत जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है और हमारे सामने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते हैं, तो ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के एक बयान से भारत को लेकर दुनिया में क्या संदेश जाएगा? विपक्ष को यह यथाशीघ्र समझने की आवश्यकता है कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और इससे निपटने में हम सक्षम हैं। उन्हें दुनिया के सामने अपने ही देश को छोटा दिखाने का प्रयास बंद कर देना चाहिए।

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कांग्रेस नेता ने क्यों की अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाने की मांग? https://samacharpacheesa.com/?p=7561 Thu, 27 Jul 2023 09:57:59 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7561 रायपुर। इस समय मणिपुर में हिंसा और वहां महिलाओं से हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। मणिपुर की परिस्थियों को लेकर पार्टियां एक दूसरे को कसूरवार ठहरा रही है। इन सब के बीच एक अजीब बयान छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का आया है। वो कहते हैं कि देश का पीएम अमित शाह को बना देना चाहिए। ऐसा वो क्यों बोले ? इसके पीछे भी राजनीति है। हांलाकि इस पर छत्तीसगढ़ बीजेपी का बयान सामने नहीं आया है।
दरअसल सिंहदेव रायपुर में मणिपुर के हालातों पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। पीएम मोदी के मणिपुर की घटना पर जिम्मेदारी नहीं लेने पर नाराजगी जताते हुए, वो बोले, कांग्रेस समेत विपक्ष इस मुद्दे पर गृह मंत्री के बजाय प्रधानमंत्री से जवाब चाहता है। मणिपुर में कई लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। महिलाओं के साथ क्रूर और अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। अगर एफआईआर होने के 77 दिन बाद कार्रवाई शुरू की जाती है, तो जवाबदेह कौन है ? पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों को इसके बारे में पता होगा। देश प्रधानमंत्री से जवाब चाहता है और हर कोई मणिपुर की वास्तविक स्थिति जानना चाहता है। सिंहदेव की नाराजगी यहीं नहीं रूकी। उन्होंने कहा अगर प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर घटना की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हैं, तो अमित शाह को प्रधानमंत्री बना दें। फिर अमित शाह देश को जवाब दे सकते हैं।
सिंह देव के इस बयान ने बीजेपी क्या? कांग्रेस के नेताओं को भी चौंका दिया है। अपनी बात आगे बढाते हुए सिंह देव ने कहा कि मणिपुर की घटना बेहद संवेदनशील है। अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और अन्य नेताओं को पत्र लिखा है। मणिपुर घटना पर संसद में चर्चा के लिए सहयोग मांगा है। कांग्रेस इस मुद्दे पर सहयोग कर रही है। मणिपुर अत्यधिक संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र में से एक है। जहां तनाव की स्थिति बनी हुई है।
पीएम मोदी ने मणिपुर हिंसा पर बयान दिया था। उन्होंने अपने बयान में छत्तीसगढ़ और राजस्थान का नाम लिया था। संसद में चर्चा के दौरान मंत्री पीयूष गोयल ने फिर छत्तीसगढ़ का नाम लिया। इसके बाद से ही छत्तीसगढ़ के नेता मोदी सरकार पर हमलावर हैं। सीएम भूपेश बघेल भी मणिपुर हिंसा पर केन्द्र सरकार को घेर चुके हैं।

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महिलाओं से बलात्कार राजस्थान और छत्तीसगढ़ https://samacharpacheesa.com/?p=7474 Sat, 22 Jul 2023 06:43:11 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7474 प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों से महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध के प्रति कठोर कदम उठाने की अपील करते हुए कहा, घटना चाहे राजस्थान की हो, छत्तीसगढ़ की हो या फिर मणिपुर की हो, कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। प्रधानमंत्री का यह बयान मणिपुर में यौन हिंसा का वीडियो वायरल होने के बाद आया जिसमें उन्होंने कहा था, मेरा हृदय आज पीड़ा से भरा है, क्रोध से भरा है। मणिपुर की घटना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली घटना है। पाप करने वाले कितने हैं और कौन हैं, ये अपनी जगह है। ये बेइज्जती पूरे देश की हो रही है। 140 करोड़ भारतीयों को शर्मसार होना पड़ा एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान में 2021 के दौरान 6337 रेप के मामले दर्ज हुए थे। रेप का यह आंकड़ा, किसी भी राज्य में सर्वाधिक रहा है। छत्तीसगढ़ में रेप की 1093 घटनाएं हुई थीं। मध्यप्रदेश में 2947, यूपी में 2845 और महाराष्ट्र में यह संख्या 2496 रही है। देश में पांच वर्ष यानी 1825 दिनों में डेढ़ लाख महिलाओं से बलात्कार हुआ है। यानी रोजाना 87 महिलाओं की इज्जत लूटी जा रही है। एनसीआरबी की रिपोर्ट 2021 के मुताबिक, बलात्कार की घटना वाले टॉप-10 राज्यों में छत्तीसगढ़ शामिल नहीं है। साल 2020 की रिपोर्ट में भी छत्तीसगढ़, टॉप-10 स्टेट में शामिल नहीं है। हालांकि राजस्थान, 2021 और 2020 में रेप की घटनाओं में टॉप पर रहा है। 2019 के दौरान भी राजस्थान में ही बलात्कार के सर्वाधिक 5997 मामले सामने आए थे। साल 2018 में राजस्थान, टॉप पर नहीं था। उस वक्त मध्यप्रदेश, बलात्कार के 5433 मामलों के साथ टॉप पर था। राजस्थान का नंबर दूसरा था। साल 2017 में भी मध्यप्रदेश बलात्कार के मामलों में टॉप पर रहा। दूसरा नंबर उत्तर प्रदेश का था। तीसरे स्थान पर राजस्थान था। साल 2021 में देश में रेप के कुल 31677 मामले सामने आए थे। वर्ष 2020 में बलात्कार की 28046 घटनाएं हुई थीं। अगर पीडि़तों की संख्या देखें, तो वह आंकड़ा 28153 रहा है। साल 2019 में रेप के 32033 मामले देखने को मिले थे। इनमें पीडि़त महिलाओं की संख्या 32260 रही है। वर्ष 2018 में रेप के कुल 33356 मामले सामने आए थे। पीडि़तों की संख्या 33977 रही है। साल 2017 के दौरान बलात्कार के 32559 केस देखने को मिले थे। इन मामलों में पीडि़तों की संख्या 33658 रही है। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पांच साल के दौरान 159048 से अधिक रेप के मामले सामने आए हैं। राजस्थान के मंत्री ने स्वीकार किया है कि प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे अपराध की स्थिति खराब है। कानून व्यवस्था की स्थिति क्या छत्तीसगढ़ में खराब नहीं है। प्रधानमंत्री के बयान पर राजनीति करने बजाय समस्या का समाधाम करने में ध्यान दें तो देश में महिलाओं के प्रति हो रहे अपराध पर अंकुश लग सकेगा।

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ये सवाल इतिहास हमेशा पूछेगा… https://samacharpacheesa.com/?p=6990 Fri, 26 May 2023 07:09:42 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6990 इसमें दो राय नहीं कि 28 मई 2023 को नवनिर्मित संसद भवन का उद्घाटन प्रसंग एक साथ कई इतिहास बनाने वाला है। ये इतिहास वैचारिक संकल्पबद्धता का, उसे दरकिनार करने का, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का, क्षुद्र और दीर्घकालीन राजनीति का, श्रेय न लेने-देने का और ऐसा करने न देने का श्रेय लेने का, हिंदुत्व की परिभाषा में सभी समुदायों के फिट होने का, स्वतंत्र भारत के एक और अनूठे वास्तुशिल्प के लोकार्पित होने का और इस बात को पुनर्परिभाषित करने का कि लोकतंत्र का वास्तुशिल्पीय स्वरूप क्या हो तथा यह भी क्या नई वास्तु भारत के डेढ़ सौ करोड़ नागरिकों के मनोभाव को प्रतिबिंबित करने में सक्षम है? बेशक सवाल कई हैं। नए संसद भवन का उद्घाटन महज एक रस्म अदायगी नहीं है, जिसे किसी ने भी निभा दिया। यह भावी पीढ़ी को सौंपी जाने वाली लोकतांत्रिक विरासत है, जिसके राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं को लेकर आने वाली नस्लें सवाल करती रहेंगी। यह उन चुनिंदा वास्तु शिल्पों में से है, जिसे हमने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अंगीकार करने के बाद बनाया है। अब यह लगभग तय है कि लोकतंत्र में निहित असहमति के सम्मान के मूल्य के बरखिलाफ नए संसद भवन के लोकार्पण समारोह में कांग्रेस और उसके नेतृत्व में 20 विपक्षी दल इस ऐतिहासिक आयोजन का बहिष्कार करेंगे। हालांकि नए संसद भवन के औचित्य, आवश्यकता वास्तुशिल्प को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन फिलहाल जिस बात को विरोध का मुद्दा बनाया जा रहा है, वो है देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों इसका लोकार्पण कराना। नए संसद भवन के लोकार्पण का बहिष्कार प्राथमिक तौर पर क्षुद्र राजनीति लगती है, लेकिन इसका संदेश गहरा और दूरगामी होगा। इसे केवल विपक्षी एकता की एक और कोशिश अथवा कर्नाटक चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की बढ़ती आक्रामकता के तौर पर ही देखना सही नहीं होगा। जहां तक तकनीकी तौर पर संसद भवन के उद्घाटन की बात है तो प्रधानमंत्री को उतना ही अधिकार है। वैसे भी जब मोदीजी हर वंदे मातरम् ट्रेन को हरी झंडी दिखा रहे हैं तो ये तो संसद भवन का मामला है, उस संसद भवन का, जिसके वो नेता हैं और करोड़ों हिंदुओं के आदर्श हैं। लिहाजा यह उद्घाटन इस मायने में भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह भव्य भवन एक हिंदू राजपुरुष द्वारा देखे गए सपने, एक हिंदू वास्तुशिल्पकार द्वारा डिजाइनीकृत, हिंदुत्व विचारधारा के पुरोधा की जयंती पर उद्घाटित, हजारों हिंदू श्रमिकों (जिनमें कुछ दूसरे धर्मों के भी हो सकते हैं) के हाथों निर्मित व भारत के विश्व गुरू बनने के मंगलाचरण का महाघोष करता स्थापत्य है। ऐसे स्थापत्य के लोकार्पण के लिए मोदी से बेहतर कोई हो ही नहीं सकता। जहां तक कांग्रेस की बात है तो संसद भवन के लोकार्पण के बहाने वो जो मोदी विरोध का नरेटिव खड़ा करना चाहती थी, उसमें उसे आंशिक सफलता ही मिली है। क्योंकि 17 ऐसे विरोधी दल इस समारोह में शामिल हो रहे हैं, जिनके लिए मोदी समर्थन से ज्यादा कांग्रेस विरोध महत्वपूर्ण है तथा जो लोकतंत्र के इस नए मंदिर के उद्घाटन को दलीय दुराग्रहों से ऊपर उठकर देख रहे हैं। यानी विपक्ष भी पूरी तरह एक नहीं है।

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राजनीति का गालीवाद! https://samacharpacheesa.com/?p=6813 Tue, 02 May 2023 08:45:37 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6813 आजादी के तुरंत बाद कम-से-कम एक दशक की राजनीति कुछ-कुछ मानवीय मूल्यों से भरी हुई थी। लेकिन धीरे-धीरे वैचारिक मतभेद मनभेद में बदलते चले गए। और आज तो हालत यह है कि मनभेद जहरीली मानसिकता में बदल चुका है। उसका चरम हमें उस वक्त दिखाई देता है, जब विपक्ष मैं बैठे लोग प्रधानमंत्री को जहरीला सांप, गंदी नाली का कीड़ा, या मोदी तेरी कब्र खुदेगी जैसे अनेक घृणास्पद वाक्य बोलकर अपनी कुंठा का इजहार करते हैं। एक सज्जन तो आंकड़ा पेश किया कि प्रधानमंत्री को अब तक इक्यानवे बार गालियां दी गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री को जहरीला सांप कहा। यह शायद इनक्यावनवीं गाली थी। जब इस बयान का व्यापक विरोध होने लगा तो उन्होंने आत्म-मंथन किया और अपने इस कथन के लिए खेद भी व्यक्त करते हुए कहा कि मैंने ऐसा मोदी के लिए नहीं, भाजपा के लिए कहा था। अगर खेद व्यक्त नहीं करते तो इनको भी मानहानि का मुकदमा झेलना ही पड़ता। वैसे देखा जाए तो भाजपा में भी जवाबी हमला करके घृणास्पद बोल बोलने वाले कम नहीं हैं। भाजपा के एक विधायक ने सोनिया गांधी को विष-कन्या कह दिया। हालांकि उन्होंने जहरीले सांप के ज़वाब में ऐसा कहा, लेकिन नहीं कहना चाहिए था। सोनिया गांधी को कांग्रेस की विधवा भी कहा गया। राजनीति में अगर भाषा का संयम न रखा गया, तो वह खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाती है, और इस समय ऐसे ही दुखद स्थितियां सामने नजर आ रही हैं। राजनीति में जो विपक्ष में है, वह दरअसल इस आशंका से बौखला यह हुआ है कि पता नहीं कल उसे सत्ता मिलेगी या नहीं। इसलिए वह सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की छवि खराब करने की पूरी कोशिश कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों से यही सिलसिला चल रहा है राजनीति की भाषा इतनी विकृत होगी, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी। अब लोग विचारों के सहारे नहीं, गालियों के सहारे आरोप-प्रत्यारोप का खेल कर रहे हैं ।जैसे राहुल गांधी ने कह दिया कि सारी मोदी चोर क्यों होते हैं। भगोड़े ललित मोदी,नीरव मोदी के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी का नाम ले लिया। उस का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। सांसदी से हाथ धो बैठे। अब अदालत की चक्कर लगा रहे। अगर एक मोदी चोर है, तो सारे मोदी को आप कैसे अपमानित कर सकते हैं ? नीरव-ललित मोदी का नाम ले कर आप उनको सौ बार चोर कहें, भगोड़ा कहें, कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन आप उसी केटेगरी में देश के प्रधानमंत्री को भी घसीट लेंगे, तो मानहानि का मामला तो बनता-ही-बनता है। फिर आप कहें कि मैं माफी नहीं मागूंगा, यह अनुचित बात है। अगर अति उत्साह में मुँह से कोई गलत बात निकल गई है, तो उसके लिए खेद व्यक्त करने में कोई बुराई नहीं। आखिर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने जहरीले सांप वाले अपने बयान पर खेद व्यक्त किया ही न! वैसे राजनीति में यह चरित्र भी पनप रहा है कि पहले आप किसी की मानहानि करें, फिर बाद में माफी भी मांग लें। आप किसी के विरुद्ध कुछ बोलना चाहते हैं तो प्रवृत्तियों पर प्रहार करें। प्रतीकों में बात करें, जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। यह उचित नहीं कि आप सीधे-सीधे किसी व्यक्ति का नाम ले कर उस पर गंभीर आरोप लगा दें। आज हालत यह है कि देश के अनेक नेता मानहानि का मुकदमा झेल रहे हैं। अंत में ये लोग जान छुड़ाने के लिए अदालत में माफी भी मांग लेते हैं। प्रश्न यह है कि ऐसी नोबत आए ही क्यों? इसलिए वाक-संयम ज़रूरी है। अगर राजनीति में लंबे समय तक टिके रहना है तो भाषा का संयम, शालीनता, शुचिता का होना बहुत जरूरी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि धीरे-धीरे राजनीति का चल पड़ा गालीवाद खत्म होगा।

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विधायकों की दिल्ली यात्रा बनाम भूपेश का बयान https://samacharpacheesa.com/?p=6711 Wed, 05 Apr 2023 07:48:56 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6711 भाजपा के 14 विधायक की प्रधानमंत्री से दिल्ली में मुलाकात के विषय पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का टोटका काम कर गया ? विधायक किस लिए जा रहे थे। यह तो उन्हीं सब को मालूम होगा ,लेकिन तरह तरह के कयास लगने शुरू हो गये थे। राजनीति के बड़े धुरंधर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अंदाज लग गया कि भाजपा के विधायकों की यह राजनैतिक यात्रा किसी हाल में उनके पक्ष में नहीं है। उन्होंने अपनी आला कमान के पक्ष समर्थन में अपनी सूरत जाने की राजनैतिक यात्रा से पहले रायपुर में राष्ट्रीय प्रभाव वाला एक धांसू बयान देकर अपनी चाल चल दी। उन्होंने कह दिया कि यह हमारे द्वारा अगले वित्तीय वर्ष में किसानों की मदद करने के लिए प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान खरीदने की घोषणा पर रोडा अटकाने जा रहे हैं। अगर प्रदेश के भले के लिए जाते तो साढ़े चार साल क्या कर रहे थे। बताया कि केंद्र ने हमारी एथेनाल बनाने के कारखाना लगाने की अनुमति नहीं देकर अड़ंगा लगाते हुए कहा था कि आप को अनुमति देंगे पर आपको हमारे एफसीआई से चावल लेकर बनाना होगा। हमारा प्रदेश धान का कटोरा वाला क्षेत्र है। हम चाहते हैं कि हमारे किसानों का शेष बचत धान का भी उपयोग हम करें। लाभ हमारे किसानों को हो। केंद्र सरकार ऐसा नहीं चाहती। प्रदेश के विकास को बाधित करते हुए, हमारे हक का पैसा जो हमें मिलना चाहिए वो भी नहीं दे रहे। पुरानी पेंशन योजना के लिए कर्मचारियों की जमा राशि लौटाने से इनकार कर दिया। और भी बहुत सी योजनाओं का हमारा हक का पैसा केंद्र सरकार रोक कर बैठी है। प्रदेश में जब से हमारी सरकार बैठी है ,तब से केंद्र की भाजपा सरकार छतीसगढ़ से असहयोग कर रही है। तब ये विधायक व भाजपा सांसदगण क्यों पीएम से प्रदेशहित की बात करने हमारे साथ दिल्ली चलने को तैयार क्यों नहीं हुए। कोई रुचि नहीं दिखाई। हमेशा प्रदेश में हमारी उप्लब्धियों का विरोध किया। प्रदेश की किसान हितैषी हमारी गंभीर योजनाओं का मखौल उड़ाया। हम पहले से 2500 से ज्यादा में धान खरीद कर किसान व ग्रामीणों की जेब में पैसा दे रहे हैं। हम उससे आगे जाकर और लाभ किसानों को देने के लिए प्रति एकड़ 20 क्विंटल खरीदने की घोषणा करते हैं तो ये परेशान होकर प्रधानमंत्री से गुहार करने जा रहे है कि इसे कैसे भी रोका जाए। ये आरक्षण को और कितना अटकाया जा सकता हैं। यह पूछने और सलाह लेने चुनावी वर्ष में दिल्ली जा रहे है। किसान का 20 क्विंटल ना ले सकें इसके लिए ये दिल्ली जाने तत्पर हैं। मुख्यमंत्री का यह राजनैतिक बयान साफ इशारा करता है कि ये विधायक किसानों के लाभ को रोकने का काम करने प्रधानमंत्री के पास जा रहे हैं। इन आरोपों में सच्चाई कितनी है, ये तो हम नहीं बता सकते, लेकिन राजनैतिक रूप से इसे राजनैतिक बयानबाजी का मास्टर स्ट्रोक कहा जा सकता है। वो इस मायने में कि मुख्य मंत्री के इस बयान का स्वरूप राष्ट्रीय था। सूरत जाने के समय के बयान को राष्ट्रीय न्यूज़ बनना ही था। यह बयान भी साथ में प्रमुखता से शामिल हो गया। असर पीएमओ पर भी पड़ा होगा। विधायक गण कह रहे थे कि उन्होंने सत्र के समय भेंट की इच्छा जताई थी। अब प्रधान मंत्री के बुलावे पर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का बुलावा कहने से ही पीएमओ ने विचार किया हो कि यह भेंट कहीं किसानों पर विपरीत असर ना डाल दे। कहीं यह प्रचार ना कर दिया जावे कि पीएमओ प्रदेश की किसान हितैषी योजनाओं में कहीं अड़ंगा डाल रही है ? नफा नुकसान के आंकलन के साथ ही संभवत: प्रधान मंत्री कार्यालय ने कर्नाटक चुनाव की व्यस्तता की बात कह कर खुद के बुलावे के बाद भी इस मुलाकात को रोकना ही ठीक समझा हो। चुनावी वर्ष में किसी प्रकार का रिस्क लेने से बचना चाहिए। इसी सोच ने शायद इस मुलाकात पर पानी फेर दिया हो। हालांकि भाजपा नेताओं के पास इसका जवाब जरूर होगा। सियासत में जो पहले बाजी मार ले वही सिकंदर होता है। राजनैतिक बयान की दौड़ में प्रदेश के मुख्यमंत्री बाजी मार ले गए ,यह कहा जा सकता है। अब भाजपा कौन सा कदम उठाती है जिसे वह जनता की नजर में खासकर किसानों की नजर में वर्तमान सरकार की ग्रामीण आधारित योजनाओं से आगे जाती दिखे, यह देखने वाली बात है। अभी तक तो ऐसा नजर नहीं आ रहा है सिर्फ भष्ट्राचार के आरोप लगाने से चुनावी वैतरणी पार लगाना मुश्किल लगता है। कोई ठोस मुद्दा ढूंढना होगा जो अब तक हासिल नही हुआ है।

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युवाओं के लिए यह अद्भुत संभावनाओं का अमृतकाल है : प्रधानमंत्री https://samacharpacheesa.com/?p=6356 Mon, 20 Feb 2023 08:18:07 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6356 नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तराखंड रोजगार मेले को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अपने सेवा भाव से आपको, राज्य और राष्ट्र में विकास और विश्वास के प्रयासों में अपना भरपूर योगदान देना है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारत के युवाओं को नई सदी के लिए तैयार करने का संकल्प आज देश ने लिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड में इस संकल्प को जमीन पर उतारने का दायित्व आप जैसे मेरे युवा साथियों के कंधे पर है। उन्होंने कहा कि हमारा यह निरंतर प्रयास है कि हर युवा को उसकी रूचि और योग्यता के अनुसार नए अवसर मिलें, सभी को आगे बढऩे का उचित माध्यम मिले।
मोदी ने कहा कि सरकारी सेवाओं में भर्ती का यह अभियान भी इसी दिशा में आगे बढऩे के लिए उठाया गया कदम है। बीते कुछ ही महीनों में केंद्र सरकार ने देश के लाखों युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए हैं। उन्होंने कहा कि हमें उस पुरानी धारणा को बदलना है कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नहीं आती। इसलिए हमारा निरंतर यह प्रयास रहा है कि पहाड़ में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बनाए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आज उत्तराखंड में इंफ्रास्ट्रक्चर पर इतना निवेश हो रहा है कि दूर-सुदूर तक आना-जाना तो आसान हो ही रहा है, रोजगार के भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जैसे जैसे उत्तराखण्ड के दूर सुदूर के इलाके रोड, रेल और इंटरनेट से जुड़ रहे हैं… वैसे वैसे पर्यटन का भी विस्तार हो रहा है। नए पर्यटन स्थल पर्यटन के मानचित्र पर आ रहे हैं। इससे उत्तराखंड के युवाओं को वही रोजगार मिल रहे हैं जिसके लिए वो पहले बड़े शहरों का रुख करते थे। उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना भी रोजगार व स्वरोजगार में बड़ी मदद कर रही है। पूरे देश में 38 करोड़ मुद्रा ऋण दिए जा चुके हैं। उत्तराखंड के हमारे हजारों साथी भी इसका लाभ ले चुके हैं। भारत के युवाओं के लिए यह अद्भुत संभावनाओं का अमृतकाल है, आपको इसे अपनी सेवाओं के माध्यम से निरंतर गति देनी है।

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एरो इंडिया 2023 का शानदार आगाज़, यह भारत की नई ताकत का प्रदर्शन : प्रधानमंत्री https://samacharpacheesa.com/?p=6244 Mon, 13 Feb 2023 06:34:12 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6244 बेंगलरू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत की सबसे बड़ी एरोस्पेस और रक्षा प्रदर्शनी, ‘एरो इंडिया के 14वें संस्करण का आज उद्घाटन किया। इस भव्य आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग पहुँचे हैं। आयोजन के दौरान जब वायुसेना के विमानों ने आकाश में अपनी शक्ति और प्रतिभा का प्रदर्शन किया तो लोग देखते ही रह गये। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि ‘एरो इंडिया भारत की नई ताकत व क्षमताओं को परिलक्षित करता है। उन्होंने कहा, ‘एरो इंडिय आज सिर्फ एक शो नहीं है, बल्कि भारत के आत्मविश्वास का प्रतिबिम्ब भी है। उन्होंने कहा कि भारत आज न केवल एक बाजार है बल्कि कई देशों के लिए संभावित रक्षा साझेदार भी है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का ‘नया भारत न तो कोई अवसर गंवाएगा और न ही उसकी मेहनत में कोई कमी आएगी।
हम आपको बता दें कि इस शो से मेक इन इंडिया अभियान को बल मिलने के साथ ही घरेलू विमानन क्षेत्र को एक नया प्रोत्साहन मिलेगा। इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में एरोस्पेस और रक्षा कंपनियों की एक बड़ी प्रदर्शनी और व्यापार मेले के साथ-साथ विमान एवं हेलीकाप्टरों द्वारा हवाई प्रदर्शन भी किया जाएगा। हम आपको बता दें कि बेंगलुरु के बाहरी इलाके में वायुसेना के यालहंका सैन्य अड्डे के परिसर में पांच-दिवसीय इस प्रदर्शनी में 809 रक्षा कंपनियों के अलावा 98 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
यह आयोजन सैन्य विमानों, हेलीकाप्टरों, रक्षा उपकरणों और नये युग के एवियोनिक्स के निर्माण के लिए भारत को एक उभरते हुए केंद्र के रूप में प्रदर्शित करेगा। एयरो इंडिया में लगभग 250 बिजनेस-टू-बिजनेस समझौते होने की उम्मीद है, जिससे लगभग 75,000 करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त होने का अनुमान है। एयरो इंडिया के 14वें संस्करण का विषय द रनवे टू ए बिलियन अपॉर्चुनिटीज है। इसका उद्देश्य एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में देश की क्षमताओं में वृद्धि को प्रदर्शित कर एक मजबूत और आत्मनिर्भर नये भारत के उदय का प्रचार करना है। प्रदर्शनी में सरकार के मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड विजन के अनुरूप स्वदेशी उपकरणों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने और विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि एयरो इंडिया- 2023 देश की विनिर्माण क्षमता और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा परिकल्पित आत्मनिर्भर भारत को साकार करने की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करेगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन एयरोस्पेस और विमानन क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि एयरो इंडिया भारत में एयरोस्पेस क्षेत्र के विस्तृत विकास में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा और रक्षा निर्माण में देश के आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगा। रक्षा मंत्री ने कहा, ”मुझे विश्वास है कि बेंगलुरु एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा। हमारा उद्देश्य एक जीवंत रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन, वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत के बजट पर दुनिया की नजर https://samacharpacheesa.com/?p=5979 Tue, 31 Jan 2023 06:58:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5979 नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच दुनिया की नजर भारत के बजट पर है। पीएम मोदी इस साल के बजट सत्र से पहले मीडिया को संबोधित कर रहे थे। पीएम ने कहा, ‘आज के वैश्विक हालात में भारत ही नहीं, पूरी दुनिया भारत के बजट की ओर देख रही है। हमारी वित्त मंत्री भी एक महिला हैं। वह कल देश के सामने एक और बजट पेश करेंगी। आज की वैश्विक परिस्थितियों में भारत ही नहीं पूरी दुनिया की नजर भारत के बजट पर है।
संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पहले संबोधन से कुछ समय पहले पीएम ने मीडिया को संबोधित करके हुए अपना बड़ान दिया है। इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह सर्वे हर साल बजट से ठीक एक दिन पहले पेश किया जाता है। इस वर्ष, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन की देखरेख में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा सर्वेक्षण तैयार किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा Budget Session आज शुरू हो रहा है। अर्थव्यवस्था की दुनिया से विश्वसनीय आवाज़ें, एक सकारात्मक संदेश, आशा की किरण और उत्साह की शुरुआत लेकर आई हैं। आज का दिन अहम, पहली बार संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे राष्ट्रपति। संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति का पहला अभिभाषण हमारे संविधान और विशेषकर महिलाओं के सम्मान के लिए गर्व का विषय है। पूरी दुनिया की नजर भारत पर है।
संसद सत्र की शुरु होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि ‘भारत पहले, नागरिक पहले’ की सोच को लेकर हम संसद के इस बजट सत्र को आगे बढ़ाएंगे। मुझे उम्मीद है कि विपक्षी नेता संसद के समक्ष अपने विचार रखेंगे। अस्थिर वैश्विक आर्थिक स्थिति के बीच, भारत का बजट आम नागरिकों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करेगा, दुनिया को जो आशा की किरण दिख रही है, वह और तेज होगी- इसके लिए मुझे दृढ़ विश्वास है कि निर्मला सीतारमण उन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी प्रयास करेंगी।

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