बजट सत्र – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 04 Mar 2023 05:52:59 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष में तकरार https://samacharpacheesa.com/?p=6537 Sat, 04 Mar 2023 05:52:59 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6537 किसी शायर ने खूब लिखा है –
‘दुश्मनी जमकर करो, लेकिन यह गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा ना हो।Ó
यह बात संसदीय लोकतंत्र में बहुत फीट बैठती है। संसद या विधानसभा के भीतर हो या बाहर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंक-झोंक होती है विपक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह सत्तापक्ष को घेरे और उसे नियंत्रित करें। छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी राज्य बनने के बाद से सत्तापक्ष और विपक्ष एक दूसरे के खिलाफ सदन के भीतर बोलते हैं लेकिन सदन के बाहर वे अच्छे मित्र जैसा व्यवहार भी करते हैं। ऐसा व्यवहार होना भी चाहिए क्योंकि विधायक एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता की समस्याओं, देशहित और जनकल्याण के विषय को सदन में उठाता है, वह सरकार के खिलाफ में मुखर होता है, तो मुख्यमंत्री और मंत्री के प्रति दुराग्रह नहीं होता है, वह केवल जनता की भावना से सदन को अवगत कराता है। यही भारतीय लोकतंत्र की खूबी भी है। लोकसभा या राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता जमकर हमला करते हंैं लेकिन जब कोई दावत हो तो एक ही टेबल पर बैठकर हंसते-खिलखिलाते भोजन भी करते हैं। यह व्यवहार जब तक बना है, लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पिछले कुछ सत्रों के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच व्यवहार में जो तल्खी नजर आ रही है, वह स्वस्थ नजर नहीं आती। बजट सत्र विपक्ष के विधायकों के खिलाफ सत्तापक्ष के मंत्री और विधायक जिस प्रकार टीका-टिप्पणी करते हैं वह उचित नहीं है। चूंकि चुनाव के पहले यह आखिरी लंबा सत्र इसलिए मुख्य विपक्ष दल भारतीय जनता पार्टी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती, वहीं कांग्रेस पार्टी भी विपक्ष के इन दांवपेंच का मुकाबल जोर-शोर से करती है। इसके बावजूद सदन में पिछली बार हाथापाई की नौबत आ गई, अभी विपक्ष गर्भगृह में जाकर नारेबाजी करने लगा तो उस पर टिप्पणियां की गई। इसके बाद जो हंगामा देखने को मिल रहा है, उससे छत्तीसगढ़ की संसदीय परंपरा प्रभावित हो रही है।

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विधानसभा का बजट सत्र एक मार्च से https://samacharpacheesa.com/?p=6139 Tue, 07 Feb 2023 06:00:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6139 छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 1 मार्च से प्रारंभ होगा और 24 मार्च तक चलेगा। इस दौरान कुल 14 बैठकें होंगी, इसकी अधिसूचना जारी हो गई है। भूपेश बघेल सरकार के लिए चुनाव से पहले का आखिरी बजट इस सत्र में पेश किया जाएगा। बजट को पारित कराना सरकार का मुख्य कार्य होगा। लेकिन चुनाव का माहौल जिस तरह बन रहा है उससे विपक्ष इस सत्र में सरकार को घेरने का भरपूर प्रयास करेगा और सरकार भी आगामी चुनाव को देखते हुए लोक-लुभावना बजट प्रस्तुत करेगी। वैसे तो विधानसभा के 3 प्रमुख सत्र होते है और संविधान में कार्यवाही की एक प्रक्रिया है जिसमें प्रश्नकाल, शून्यकाल के बाद ध्यानाकर्षण के माध्यम से प्रदेश के महत्वपूर्ण विषयों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षक करना होता है। समय के साथ विधानसभा के सत्र की अवधि छोटी होती जा रही है और निर्धारित समय से पहले ही सत्र समाप्त हो रहे है। सदन की कार्यवाही भी आधे दिन से ज्यादा समय स्थगित हो रहे है। बजट सत्र में सरकार की मजबूरी है कि उसे आगामी वित्त वर्ष के लिए बजट पारित कराना पड़ता है। इस लिहाज से आगामी सत्र की बैठकें मात्र 14 दिन की होंगी तो इसमें बजट पर चर्चा और विभागों की मांगों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाएगी। ऐसा लगता है कि आगामी सत्र की गरमाहट का आभास सरकार को हो गया है। आगामी सत्र में विपक्ष जहां आरक्षण, धर्मान्तरण, कानून व्यवस्था की बदहाली और प्रदेश में अवरुद्ध विकास कार्य के साथ भ्रष्टाचार के मामलों पर सरकार को घेरेगा। वहीं विधानसभा द्वारा पारित आरक्षण विधेयक पर राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए जाने के मामले पर सत्ता पक्ष भी आक्रमक रहेगा। जैसे भी हो सदन में प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य अवश्य होने चाहिए जिससे जनता की समस्या की चर्चा विधानसभा में हो सके। विपक्ष को भी चाहिए कि सत्र को अधिकाधिक चलाकर विभिन्न माध्यमों से चर्चा के द्वारा सरकार को घेरे। पिछले 3 सत्रों के दौरान यह देखा जा रहा है कि सत्ता पक्ष भी विपक्ष पर टिप्पणी करके माहौल को गरमाता है और उकसा कर उन्हें गर्भगृह में आने पर मजबूर करता है। छत्तीसगढ़ विधानसभा की विगत 22 वर्षों से यह विशेषता रही है कि विपक्ष गर्भगृह में आकर कम प्रदर्शन करता है। ऐसा करने पर नियमानुसार स्वमेव निलंबित हो जाते है। यही कारण है कि प्रदेश की विधानसभा में संसदीय कार्य सुचारु रुप से होते रहे है। भारतीय जनता पार्टी के केवल 14 विधायक ही सदन में प्रतिनिधित्व करते है और सत्ता पक्ष के 71 विधायक है। ऐसी स्थिति में भी सत्ता पक्ष को घेरने और जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने में विपक्ष भी सक्रिय रहता है, यही संसदीय प्रणाली की विशेषता है।

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भारत को 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य : राष्ट्रपति मुर्मू https://samacharpacheesa.com/?p=5976 Tue, 31 Jan 2023 06:52:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5976 नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को 2047 तक देश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखते हुए कहा कि तब तक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है जो अतीत के गौरव से जुड़ा हो और जिसमें आधुनिकता का हर स्वर्णिम अध्याय हो। राष्ट्रपति ने यह बात आज बजट सत्र के पहले दिन ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अपने पारंपरिक अभिभाषण में कही। उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसा भारत बनाना है जो आत्मनिर्भर हो और जो अपने मानवीय दायित्वों को पूरा करने में समर्थ हो। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें 2047 तक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है जो अतीत के गौरव से जुड़ा हो और जिसमें आधुनिकता का हर स्वर्णिम अध्याय हो।’’ उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के करीब नौ वर्षों के शासनकाल में भारत के लोगों ने कई सकारात्मक बदलाव पहली बार देखे हैं। उन्होंने कहा कि अमृत काल की 25 साल की अवधि आजादी का स्वर्णिम काल और विकसित भारत के निर्माण का समय है। मुर्मू ने कहा कि आज सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि हर भारतीय का आत्मविश्वास शीर्ष पर है एवं भारत के प्रति विश्व का नजरिया बदला है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान संसद के केंद्रीय कक्ष में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल के विभिन्न मंत्री, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, राज्यसभा में नेता सदन पीयूष गोयल और विभिन्न पार्टियों के नेता एवं सांसद मौजूद थे। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी एवं पार्टी के कुछ अन्य नेता श्रीनगर में खराब मौसम के कारण उड़ानों में विलंब के चलते राष्ट्रपति अभिभाषण शुरू होने के समय केंद्रीय कक्ष में नहीं पहुंच पाये।

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