बस्तर – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Fri, 17 Feb 2023 06:39:43 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 बस्तर में हत्या की जांच एनआईए को https://samacharpacheesa.com/?p=6307 Fri, 17 Feb 2023 06:39:43 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6307 पिछले दो सप्ताह के भीतर भारतीय जनता पार्टी के 4 नेताओं की हत्या बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में हुई है। इन हत्याओं को लेकर भाजपा कांग्रेस की सरकार पर हमलावर रुख अपनाए हुए है। पार्टी के अध्यक्ष अरुण साव ने आरोप ने लगाया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं में दहशत फैलाने के लिए सरकार की शह पर टारगेट किलिंग याने भाजपाईयों को निशाना बनाकर हत्या कराई जा रही है। लोकतांत्रिक राजनीति में कोई पार्टी सत्ता पक्ष पर यह आरोप लगाए तो यह अत्यंत गंभीर है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी हिंसा और भय के दम पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त करने का पिछले 2-3 दशकों से देख रहे है। कांग्रेस पार्टी नक्सलवाद और माओवाद को लेकर शुरु से भ्रमित रही है। उनके अनेक नेता नक्सलियों और माओवादियों को सामाजिक आर्थिक मुद्दों को लेकर संघर्ष करने वाले क्रांतिकारी तक मानते है। पिछले चुनाव के पहले कांग्रेस पार्टी के तब नेता रहे राजबब्बर ने उन्हें क्रांतिकारी ही कहा था। लेकिन कांग्रेस पार्टी और भारत की राजनीति में झीरम घाटी हत्याकांड एक गंभीर जख्म है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भी माओवाद को देश का सबसे बड़ा आंतरिक समस्या माना था, तब छत्तीसगढ़ में शासन कर रही भाजपा की सरकार स्थानीय आदिवासियों के साथ माओवाद के खिलाफ में संघर्ष छेड़े हुई थी। यह बात सही है कि भाजपा सरकार के समय ही माओवाद को एक राष्ट्रीय समस्या के रुप में सामने लाने का कार्य किया गया था। कांग्रेस पार्टी भी विधानसभा चुनाव के पहले माओवाद की समस्या को सुलझाने का वादा की थी। लेकिन 4 वर्ष के बाद भी माओवादियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत के संकेत नहीं मिले है। इस बीच प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के बस्तर संभाग से एकमात्र विधायक भीमा मंडावी की हत्या हुई और उसके बाद लगातार भाजपा के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। इन घटनाओं के बाद भाजपा के आरोप के चलते अब प्रदेश सरकार ने मामले की जांच करने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को पत्र लिखा है। इसका मतलब है कि सरकार अब इन हत्याओं को आतंकी घटनाएं मान रही है। चुनाव जब करीब हो तो इस तरह की घटनाएं कई सवाल खड़े करती है। ऐसे मामले में सरकार और राजनीतिक दलों को गंभीर होना चाहिए। लेकिन प्रदेश में सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी और सरकार दोनों ने जिस प्रकार की बयानबाजी की है उससे गंभीरता नहीं झलकती है। मुख्यमंत्री यह कहें कि भाजपा इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी से करा ले तो यह काम प्रदेश सरकार का है, जैसा कि गुरुवार को किया गया है। कांग्रेस के प्रवक्ता भी इस प्रकरण में जिस प्रकार के बयान दे रहे हैं वह किसी दृष्टि से उचित नहीं है। माओवाद से निपटने के विषय में सभी दलों को एकमत होना चाहिए।

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धर्मान्तरण को लेकर एकतरफा कार्यवाही https://samacharpacheesa.com/?p=5675 Tue, 10 Jan 2023 06:06:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5675 छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में धर्मान्तर ण का मुद्दा उग्र रुप ले चुका है। ऐसा नहीं है कि यह अचानक प्रगट हुआ। पिछले 4 वर्षों से इसाई मिशनरियां के द्वारा धर्मान्तरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। समस्या तो तब हुई जब धर्मान्तरित हो चुके आदिवासी और मूल धर्म मानने वाले आदिवासियों के बीच में संस्कार को लेकर विवाद होने लगे। यह बात भी अचानक सामने नहीं आई, सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक ने तो 2019 की शुरुआत में ही ऐसी स्थिति निर्मित होने का आंकलन कर लिया था। भारतीय जनता पार्टी व अन्य संगठन भी बस्तर में हो रहे धर्मान्तरण और उसके जनजातीय समाज पर पडऩे वाले प्रभाव को लेकर सरकार से गुहार लगाई लेकिन इस मामले की गंभीरता को ताक पर रखकर सरकार ने राजनीतिक बयानबाजी शुरु कर दी। यह तर्क दिया गया कि भारतीय जनता पार्टी के 15 वर्ष के शासन में बड़ी संख्या में चर्च बने। अब इस तर्क का बस्तर में हो रहे विवाद से वैसे कोई संबंध नहीं है। यह भी सबको पता है कि संविधान में किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता है, इसलिए अगर इसाई मिशनरियां चर्च का निर्माण कर रही है तो संविधान के अनुसार उन्हें रोका नहीं जा सकता। भाजपा के शासनकाल में भी निर्माणाधीन चर्च को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए, तोडफ़ोड़ भी की गई लेकिन शासन ने त्वरित कार्यवाही करते हुए दोषियों पर कार्यवाही की। अब पिछले 3 वर्षों से पनप रहे विवाद को शांत करने के लिए कोई कदम उठाने के बजाय थाने में धर्मान्तरण के मामले में दर्ज अपराध के नाम पर इस मामले को टाला गया। सभी जानते है कि मिशनरियां किस प्रकार धर्मान्तरण का खेल खेलती है। अब सवाल इन बातों पर चर्चा करने का नहीं बल्कि अब तो जो बस्तर इस मामले में धधक रहा है उसे लेकर सरकार का क्या रुख है, यह महत्वपूर्ण है। नारायणपुर जिले के गुर्रा गांव में जनजातियों पर इसाई मिशनरियों की ओर से हमला किया गया और दूसरे दिन की घटना इसकी प्रतिक्रिया ही थी। लेकिन देशभर में माहौल क्या बनाया जा रहा है यह देखने वाली बात है। राष्ट्रीय मीडिया और खासकर कुछ चिन्हित समूह इसाई मिशनरी और चर्च पर हुए हमले को लेकर मुखर है और इसका दोष भाजपा और हिन्दूवादी संगठनों को दिया जा रहा है। सही बात कहीं नहीं आ रही कि इस पूरे प्रकरण में इसाई मिशनरियों का दोष कितना है? प्रशासन ही आदिवासियों के खिलाफ कार्यवाही कर रही है और इस घटना की आड़ में आदिवासियों के हक में खड़े होने वाले संगठनों के खिलाफ कार्यवाही करने की योजना बना रहा है। इससे बात बनेगी नहीं और बिगड़ेगी

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