भ्रष्टाचार – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Mon, 18 Sep 2023 10:02:06 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त : अरूण साव https://samacharpacheesa.com/?p=8037 Mon, 18 Sep 2023 10:02:05 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8037 रायपुर। प्रदेश की चारों दिशाओं से बीजेपी की परिवर्तन यात्राएं निकल रही हैं। इन परिवर्तन यात्राओं के दौरान सभाओं में भीड़ भी उमड़ रही है। इस भीड़ को देखकर बीजेपी नेता भरपूर गदगद हैं। भीड़ के आधार पर ही कहा जा रहा है कि यह सत्ता परिवर्तन का आगाज है। इसी कड़ी में बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के पहला चरण का आज सोमवार को सातवां दिन है। यात्रा राजनांंदगांव पहुंची है। यहां बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष अरूण साव ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त है। प्रदेश में परिवर्तन चाहती है और जनता को भाजपा से उम्मीदें हैं। भारतीय जनता पार्टी विश्वास दिलाती है कि वह जनता की इन उम्मीदों पर खरा उतरेगी।

]]>
छत्तीसगढ़ में बीजेपी का जंगी प्रदर्शन, विधायकों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप https://samacharpacheesa.com/?p=7447 Thu, 20 Jul 2023 10:08:13 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7447 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकार के खिलाफ लगातार धरना और प्रदर्शन के बाद बुधवार की दोपहर को बीजेपी ने उत्तर विधानसभा में व्याप्त बदहाली को लेकर कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के उत्तर विधानसभा के विधायक कुलदीप जुनेजा के खिलाफ नारेबाजी भी की। बीजेपी नेताओं ने कानून व्यवस्था और घोटालों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच थोड़ी बहुत झूमाझटकी भी देखने को मिली।
17 बिंदुओं पर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन- बीजेपी नेताओं ने उत्तर विधायक कुलदीप जुनेजा के खिलाफ 17 बिंदुओं का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा है। जिसमें रायपुर उत्तर विधानसभा में सड़क डामरीकरण में हुए घोटालों की जांच, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल में 200 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप, लोकायुक्त की जांच पर कार्यवाही, विधानसभा के 5 वार्डों से निकलने वाले नाले में हुए अधूरे निर्माण कार्य, अमृत मिशन के अधूरे काम, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, अवैध शराब के साथ ही भू माफिया के द्वारा अतिक्रमण जैसे 17 बिंदुओं की जांच की मांग कलेक्टर से की गई है।
कोंडागांव में भी प्रदर्शन- बीजेपी के पांचों मंडलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं दोनों विधानसभा में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्रीनिवास राव मद्दी, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य लता उसेंडी, संजय पाण्डेय, जिला अध्यक्ष दीपेश अरोरा के सामूहिक नेतृत्व में बड़ी संख्या कार्यकर्ता विधायक निवास घेरने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में विधायक से विधानसभा के विकास के नाम पर आए पैसों के दुरुपयोग पर सवालों की तख्तियां और बैनर पोस्टर थे। इस दौरान प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए।
स्थानीय मुद्दों को लेकर किया प्रदर्शन- स्थानीय मुद्दों जिनमें मक्का प्रसंस्करण इकाई के नाम पर किसानों के साथ छलावा, सड़क बायपास के नाम पर राजनैतिक लाभ लेकर झूठ परोसना, स्टेडियम और अन्य अधूरे निर्माण कार्य, सुराजी ग्राम योजनांतर्गत नरवा, गरुआ, घुरूवा और बाड़ी सहित गौठान में हुए भ्रष्टाचार, महिला स्व सहायता समूहों, बेरोजगारों, उद्यमियों को पर्याप्त साधन, समाधान और मार्गदर्शन दिये बिना बेतरतीब कर्ज बांटकर झूठी वाहवाही बटोरना शामिल था।
रामविचार नेताम ने भी बृहस्पति सिंह के खिलाफ खोला मोर्चा- बलरामपुर के संयुक्त जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने कद्दावर बीजेपी नेता रामविचार नेताम के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता पहुंचे। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार पर कुशासन और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भीड़ कलेक्ट्रेट कार्यालय के पास जमा हो गई। रामविचार नेताम ने इस दौरान एसडीएम को ज्ञापन सौंपा ।पूर्व गृहमंत्री रामविचार नेताम ने प्रदेश कांग्रेस की सरकार और विधायक बृहस्पति सिंह पर आरोप लगाया। नेताम के मुताबिक विधायक फर्जी मुकदमे दर्ज कराते हैं जमीनों के फर्जी पट्टे बनवाते हैं।
बस्तर भी सरकार के खिलाफ हुआ एकजुट- वहीं जगदलपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र शुरू होते ही आदिवासियों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के विरोध में नग्न प्रदर्शन को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। बीजेपी नेता कमल भंजदेव समेत बीजेपी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय विधायक और कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। बीजेपी के मुताबिक कांग्रेस की सरकार ने 36 वादे किए थे। जिनमें किसान, स्व सहायता समूह, शराबबंदी जैसे गंभीर विषय शामिल थे।कांग्रेस सरकार को छत्तीसगढ़ में साढ़े 4 साल पूरे हो चुके हैं और कांग्रेस ने अपना वादा पूरा नहीं किया है। साथ ही जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र में भी काम नहीं हुए हैं। जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी ने कलेक्टर के माध्यम से गवर्नर को ज्ञापन सौंपा है।

]]>
बरसते पानी में भाजपाइयों की दहाड़, कहा- उखाड़ फेंको कांग्रेस सरकार को, लुभावने वादे, पर सब विफल https://samacharpacheesa.com/?p=7369 Mon, 17 Jul 2023 09:23:55 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7369 कबीरधाम। छत्तीसगढ़ सरकार व क्षेत्रीय विधायक पर वादाखिलाफी का आरोप और भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा ने कबीरधाम में जमकर प्रदर्शन किया। सभा करने के बाद भाजपाइयों ने शहर में रैली निकाली। इस दौरान पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल ने कहा कि जिस लुभावने घोषणापत्र की बदौलत कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में सरकार प्राप्त की थी, उसके वादों को पूरा करने में विफल रही है। भाजपा पूरे प्रदेश में क्षेत्रीय विधायक के निवास और कार्यालय का घेराव कर उन्हें वादा पूरा करने प्रदर्शन कर रही है।
विधायक पर विद्वेषपूर्ण राजनीति का आरोप
भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गांधी मैदान में एकत्र हो गए। वहां हुई जनसभा में भाजपाइयों ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे ने कहा कि कवर्धा विधायक मो. अकबर के कार्यकाल में पूरे क्षेत्र में विद्वेषपूर्ण राजनीति की जा रही है। व्यापार करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रताडि़त किया जा रहा है। भाजपा समर्थित सरपंचों को धारा 40 के तहत बर्खास्तगी का डर दिखा कर कांग्रेस प्रवेश कराया जा रहा है। अब चुनाव को सिर्फ तीन ही माह बचे हैं।
भाजपा का मतलब विकास है
सांसद ने कहा कि, जनता भी चुनाव का इंतजार कर रही है। आगामी विधानसभा चुनाव में जनता फिर से भाजपा सरकार बनाएगी, क्योंकि भाजपा सरकार का मतलब विकास है। भाजपा के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष अशोक साहू ने कहा कि मो. अकबर के नेतृत्व में कवर्धा के शांत राजनीतिक माहौल को बिगाडऩे का काम हो रहा है। भाजपा कार्यकर्ता इस सरकार को उखाड़ फेंकने व कवर्धा विधायक को हराने दिन रात काम कर रहे हैं।
18 को पंडरिया में प्रदर्शन
जनसभा के बाद कार्यकर्ता रैली निकाल कर विधायक कार्यालय का घेराव करने के लिए चल दिए। इस दौरान पुलिस ने बैरिकेड लगाकर कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश भी की। काफी नारेबाजी के बाद भाजपा नेताओं ने सरकार और क्षेत्रीय विधायक की विभिन्न नाकामियों को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। अब इसी तहर18 जुलाई को पंडरिया में भी घेराव किया जाएगा।

]]>
भ्रष्टाचार पर आमने सामने की राजनीति https://samacharpacheesa.com/?p=7341 Sat, 15 Jul 2023 07:02:47 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7341 छत्तीसगढ़ में चुनाव निकट है, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। केंद्र में स्थिति अलग है, भाजपा आज भी कांग्रेस के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार को 9 साल बाद भी मुद्दा बनाए हुए हैं। शुक्रवार को एनडीए सरकार के कार्यकाल में हुए कोयला घोटाले के आरोपी कांग्रेस पार्टी के सांसद और उनके पुत्र को कोर्ट ने दोषी ठहराया है। लेकिन विपक्ष के पास अभी केंद्र सरकार के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं है। छत्तीसगढ़ में विचित्र स्थिति है, कांग्रेस पार्टी की सरकार है और डॉ. रमन सिंह सरकार पर अभी भी कांग्रेस के नेता भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है। यह समझ से परे है कि सरकार की ताकत कांग्रेस के पास है। प्रशासनिक अमला है, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करने वाली व्यवस्था है, कोर्ट है, सब कुछ है लेकिन सरकार कारवाई नहीं कर पा रही है। ऐसी बात नहीं है कि भूपेश सरकार कुछ करना नहीं चाहती, 2018 दिसंबर में सरकार बनने के बाद एक के बाद एक जांच टीम एसआईटी का गठन किया है। लेकिन पौने पांच साल के बाद भी एसआईटी की टीम किसी आरोप को साबित नहीं कर पाई है। दूसरी ओर प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, कोयला में परिवहन परमिट के नाम पर अवैध वसूली का घोटाला 500 करोड़ से ऊपर का है। शराब घोटाला तो अपने आप में अनोखा है। कोई सरकार पर अपने खजाने में आने वाले राजस्व की चोरी करने जा आरोप तो निराला ही है। ये आरोप कोई हवा में नहीं हैं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने बकायदा जांच करके कोर्ट में जो चलन प्रतीत किया है उसमें पूरा विवरण दिया है। जब भी इस प्रकार के भ्रष्टाचार का उल्लेख भाजपा करती है तो कांग्रेस पार्टी के नेता भाजपा सरकार के समय भ्रष्टाचार की दुहाई देने लगते हैं मानो पिछली सरकार पर आरोप लगाने से वर्तमान सरकार को घोटाले करने का परमिट मिल जाता है। अपने घोषणा पत्र में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने कांग्रेस पार्टी ने मजबूत लोक आयोग बनाने का संकल्प लिया था जिसकी सीमा में मुख्यमंत्री भी आते हैं लेकिन सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना तो दूर जो आरोप खुद कांग्रेस लगाती थी, उन पर कार्यवाही करने में सरकार अक्षम है। लगता है छत्तीसगढ़ की राजनीति में भ्रष्टाचार का मुद्दा केवल आरोप प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा। इन्हीं कारणों से जनता के मन में राजनेताओं के बारे में धारणा बनती जा रही है कि सभी भ्रष्ट होते हैं। ऐसा विचार फिर समाज में भ्रष्टाचार को मान्यता दे देता है जैसे कि प्रशासन में अधिकायिों और कर्मचारियों को मान्यता मिली हुई है। नेता भी अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं लड़ेगा तो इस नासूर का ईलाज कौन करेगा?

]]>
गोल गोल रानी इत्ता इत्ता पानी https://samacharpacheesa.com/?p=6949 Sat, 20 May 2023 07:40:54 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6949 बच्चों का खेल है, जिसमें एक पंक्ति दोहराई जाती है, गोल गोल रानी इत्ता इत्ता पानी। दरअसल इस खेल में बच्चे एक दूसरे का हाथ पकड़कर गोल घेरा बना कर ले में गाते हुए घूमते हैं, बीच में दाम देने वाला खिलाड़ी हाथ की बेदी तोड़कर भागने की कोशिश करता है। एक मजेदार खेल है। लेकिन रायपुर के महापौर एजाज धेबर ने गोल गोल रानी पंक्ति का प्रयोग नगर निगम रायपुर में यूनीपोल घोटाले की जानकारी देने में अधिकारियों के घुमाए जाने को लेकर दिया है। वैसे सही भी है, जब से कांग्रेस की सरकार बनी है तब से गोल गोल रानी इत्ता इत्ता पानी, का खेल चल रहा है। भाजपा की सरकार की हार के बाद भ्रष्टाचार के दोषियों। को कटघरे में खड़ा करने कई एसआईटी का गठन किया गया। चार साल से ज्यादा का समय बीत गया लेकिन किसी एसआईटी की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। कुल मिलाकर गोल गोल रानी इत्ता इत्ता पानी वाला मामला है। राजधानी में पैदल चलने वालों के लिए स्काईवॉक बनाने का काम शुरू हुआ था, कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए इसका विरोध किया, कहा इसकी शहर को जरूरत नहीं है। सरकार बनी तो स्काईवॉक के काम को रुकवा दिया गया। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। एक समिति बना दी गई थी, जो चार साल तक गोल गोल रानी करती रही और आखिर में निर्णय दिया कि स्काईवॉक का निर्माण होना चाहिए। अब जो निर्माण हुआ ढांचा था वह धूप और बरसात में बिना उपयोग के जर्जर हो चुका है। ऊपर से निर्माण की लागत भी बढ़ गई है। इसका मतलब है अब न तो स्काईवॉक बनेगा और न ही टूटेगा। करोड़ों रुपए में गोल गोल रानी इत्ता इत्ता पानी का खेल हो गया। यही हाल डी के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल को लेकर हुआ, जांच के लिए समिति बनी लेकिन गोल गोल चलती रही। अभी ईडी के मामले में यही हाल है। यूनीपोल लगाने में गड़बड़ी से निगम को 50 करोड़ की चपत लगी है, महापौर कह रहे कि इसकी उनको जानकारी नहीं थी मतलब अधिकारियों ने नियम बदल कर 50 करोड़ रुपए की बंदरबांट कर लिया। अभी पीएससी का मामला उछला है, पिछले चार बरस से लगातार प्रतियोगी परीक्षा के उम्मीदवार आयोग के नियम में गड़बड़ी के चलते न्यायालय की शरण में जाते रहे हैं। अब तो परिणाम में ही गोलमाल है। कुल मिलाकर हर जगह गोल गोल रानी इत्ता इत्ता पानी का खेल चल रहा है। ज्यादा गोल गोल घुमाने से चक्कर भी आता है। इस घनचक्कर का असर जनता पर होंगया तो चुनाव वे अपना चक्कर चलाएंगे।

]]>
क्या सरकारें भ्रष्टाचार करने के लिए ही बनती है ? https://samacharpacheesa.com/?p=6898 Wed, 17 May 2023 08:03:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6898 छतीसगढ़ के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। राजनैतिक घात प्रतिघात कांग्रेस भाजपा एक दूसरे पर करने लगे हैं। बयानों व एक्शन तथा रिएक्शन देख कर तो यही लग रहा है। राजनैतिक हमले दिनो दिन और घातक होंगे। शोध व खोजों के अनेकों माध्यम से अब मुद्दे बटोरे जायेंगें। वोटों को साधने किसी भी हद तक ऊपर – नीचे जाने से किसी भी दल को कोई गुरेज नहीं होगा। भाषा की मर्यादा भी शनै शनै ना सिर्फ क्षीण होती जाएगी बल्कि लगभग तोड़ दी जाएंगी। चुनाव पास आते ही खदान,धान,चावल से लेकर शराब और यहां तक कि गोबर में भी भ्रष्टाचार की बदबू आने लगी है। विपक्षी दल भाजपा तो खदान(कोयला), धान(चावल) , शराब तक पहुंच कर अब अब गाय के गोबर में भी भ्रष्टाचार खोजना शुरू कर चुकी है। एक ट्रेलर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के माध्यम से मंदिर हसौद के गोढी गांव में गोठान पहुंच कर टकराव की राजनीति खेल कर सत्ता को कल ही आईना दिखा दिया है। असली फि़ल्म दिखाने का काम 20 मई से भाजपाई नेतागण 10-10 गौठानों का दौरा करके करेंगें। कुल मिलाकर भाजपा की पूरी की पूरी टीम कांग्रेस सरकार को महा भ्रष्टाचारी सरकार बताने में भिड़ गई है। ऐसे ही आरोपों को दर्शा कर अभी हाल कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा सरकार को चुनाव में जोरदार पटकनी दी है। भाजपा इस फार्मूले को छतीसगढ़ चुनावों में आजमाने तैयारी करती दिख रही है। सफल होगी या नहीं होगी यह अभी कहा नहीं जा सकता। प्रयासों में कोई कमी नहीं रखी जा रही है। किसी ने पूछा था भाजपा चार साल मौन क्यों रही। शायद इसी रणनीति की तहत मौन रही होगी कि एक साथ चुनावी साल में चौतरफा हमला किया जाए। यह प्रयास अब शुरू हो भी गया है। संयोग है या सोची समझी रणनीति यह कहना मुश्किल है। ईडी के धुँवाधार सीरियल छापे पहले कोयला अब शराब को घेरे में लेकर किये जा रहे हैं। 2000 करोड़ के शराब घोटाले का खुलासा करना,प्रेस विज्ञप्ति जारी करना और कुछ लोगों का नाम लेने के साथ उनकी गिरफ्तारी कर लेना कुछ पर गिरफ्तारी की तलवार लटकाने की स्थिति बनना। तुरंत बाद भाजपा का कांग्रेस सरकार पर इसी मुद्दे पर हमलावर होने की बात व बयानबाजी तेज होने को ना सिर्फ कांग्रेस बल्कि जनता भी शक की नजर से देखने लगी है। इधर कांग्रेस ने पूछा कि ईडी भाजपा के कार्यकाल के भ्रष्टाचारों पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है। हजारों करोड़ का नान घोटाला,हजारों के नाम राशनकार्ड से काटने पर कहा कि उनका राशन का लंबे समय तक घोटाला किया,बलौदा बाजार का एक हजार करोड़ का धान घोटाला के साथ ,करोड़ों का शराब घोटाला व अन्य गड़बडिय़ों पर ईडी मौन क्यों है ? मुख्यमंत्री ने तो यह तक कह दिया है कि स्थानीय भाजपा नेताओं के पास हमारे कामों के सामने कहने को कुछ भी नहीं है। मुद्दा विहीन भाजपा ईडी के सहारे चुनाव में फतह चाहती है। इसलिए सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। जनता के बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि ईडी क्यों हमारे महाधिवेशन से लेकर अब तक पीछे पड़ी है।
आजकल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में सभी दलों के प्रवक्तागण आ गए हैं। आये दिन होने वाले टीवी डिबेट में एक दृश्य लगभग बार बार दोहराया जा रहा है। भाजपा के प्रवक्ता कहते हैं कांग्रेस सरकार व उसका मुख्यमंत्री भ्रष्टाचारी है। कांग्रेस के प्रवक्तागन कहते हैं 15 साल भाजपा की सरकार व उनके मुख्यमंत्री भयानक भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। ये कहते है कि उन्होने करोड़ों का घोटाला किया वे कहते हैं कि इन्होंने करोड़ों का घोटाला किया। अब टीवी डिबेट की श्रोता जनता बिचारी किसकी बात माने। कौन भ्रष्टाचारी है कौन नहीं। सोचने लगती है कि क्या हर साख पर ….. ही बैठे है क्या ? अब अंजामें गुलिशतां क्या होगा? भला हो इन प्रवक्ताओं का जिन्होंने हमारी आंखें खोल दी कि जिन्हें हम उम्मीदों के साथ चुनकर सरकार बनाने भेजते हैं। गद्दी पर बैठते ही वे घोटाले करने लगते हैं। चाहे ये हों या वो हों ,या कोई और? ये क्या तमाशा है ? अब हम भरोसा करें तो किस पर करें? जनता यह सोच कर ही परेशान है। सोचती है कि क्या हमारे टैक्स का पैसा खर्च करने का हम जो अधिकार इन नेताओं को उन्हें चुनाव में चुनकर दे देते हैं। क्या ये इनकी पैतृक संपत्ति है जो भ्रष्टाचार करने की हिम्मत इनमें आ जाती है। दूसरी बात यह कि हम अपने राज्य की ही बात करें तो छतीसगढ़ में 20 सालों से सभी सरकारों व उनके मुखियाओं पर लगे करोड़ों के घोटाले के आरोपों में हमने आजतक एक नेता को भी सजा पाते नहीं देखा। सभी कहते हैं कि हमारी जेब में सबूत है, समय आने पर उसका जनता के बीच खुलासा करेंगें आजतक खुलासा नहीं देखा है। वो समय भी आते नहीं देखा। जनता सोच रही है कि क्या हम सब मूर्ख समझे जा रहे हैं। सरकारें बनने के बाद अगर सभी एक राह पर अपने सिस्टम के दबाव में काम करने मजबूर हो जाते हैं,तो फिर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपों के मायने क्या हैं। शायद सिर्फ सत्ता पाने एक दूसरे को बदनाम करने का साधन मात्र हैं। सत्ता पाने के बाद आपको भी वही करना है ,जो वे कर रहे थे , तो आरोप प्रत्यऱोप करना व अपने ही राज्य सरकारों को बदनाम करना बंद करिए। सत्ता पाने के कोई और रास्ते ढूँढिय़े।

]]>
लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिशोध की गुंजाईश https://samacharpacheesa.com/?p=5799 Fri, 20 Jan 2023 05:58:09 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5799 संसदीय लोकतंत्र सत्ता परिवर्तन करने की एक मौन क्रांति है। हर पांच साल में चुनाव होते है और जनता सरकार के कामकाज पर जनप्रतिनिधियों की सक्रियता के आधार पर तय करती है कि अगला पांच साल सरकार को दोबारा मौका देना या सत्ता की बागडोर किसी दूसरी पार्टी के हाथों सौंपना है। इस लिहाज से लोकतांत्रिक चुनाव के बाद जो सरकार बनती है उसका ध्यान अगले पांच साल जनता के कल्याण देश-प्रदेश के विकास पर अधिक होगा तो जनता का मन और वोट जीतने में सरलता होती है। राज्य निर्माण के बाद भारतीय जनता पार्टी 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद लगातार 3 बार चुनाव जीतकर सरकार बनाई। जब पहला चुनाव हुआ और उसमें भाजपा को जीत मिली तो यह अजीत जोगी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनमत था। इसके बाद 2008 और 2013 में डॉ रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के समर्थन में जनमत बना जिसके कारण 15 साल लगातार भाजपा को सत्ता सुख मिला। अब 2023 में जो चुनाव होगा उसमें यह निर्णय होगा कि जनता इस सरकार के 5 साल के कार्यकाल से खुश होकर अगली पारी देती है या भारतीय जनता पार्टी को फिर से मौका देगी? इसका मतलब है कि किसी भी सरकार को आगे की सोचकर काम करना चाहिए। लेकिन राजनीति में जो विकृतियां आ रही है उसके कारण पिछली सरकार के दौरान राग-द्वेष से प्रभावित होकर राजनेता और अधिकारियों से बदला लेने की भावना प्रबल हो जाती है। 2018 में भूपेश बघेल सरकार जब सत्ता में आई उसके बाद के 3-4 महीनों में डॉ रमन सरकार के दौरान किए गए कार्यों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच बिठा दी गई। इसी तरह की जांच नागरिक आपूर्ति निगम में भ्रष्टाचार के उजागर होने के लिए बिठायी गई थी। 4 साल बीत गए, जांच समिति की न तो कोई रिपोर्ट आई है और न ही किसी दोषी के खिलाफ कार्रवाई हो पायी है। केवल राजनीतिक बयानबाजी हो रही है और बेसिर-पैर के आरोप लगाए जा रहे है। इधर नान घोटाले को लेकर केंद्रीय एजेंसियां सर्वोच्च न्यायालय में जो तथ्य प्रस्तुत कर रहे है उससे राजनीतिक साजिश की बू आती है। सरकार में रहते हुए जब मुख्यमंत्री और मंत्री किसी भ्रष्टाचार के मामले की बात करते है तो आश्चर्य होता है। जब सत्ता हाथ में तो फिर भ्रष्टाचार की जांच जल्द से जल्द कराकर दोषियों को सजा क्यों नहीं दिलाई जाती? इस तरह जब भूतकाल पर ध्यान ज्यादा होगा और प्रतिशोध की भावना होगी तो इससे संसदीय लोकतंत्र व्यवस्था को ठेस पहुंचेगी।

]]>
विकास में भ्रष्टाचार की रुकावट https://samacharpacheesa.com/?p=5344 Wed, 21 Dec 2022 05:46:17 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5344 देश में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है। इस पर काबू पाने के लिए स्वतंत्रता के बाद लगातार कोशिश होती रही है लेकिन यह भी सच है कि जैसे-जैसे देश प्रगति के पथ पर है। देश और राज्यों के बजट का आकार जैसे-जैसे बढ़ रहा है भ्रष्टाचार की मात्रा भी बढ़ रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार के बजट का एक बड़ा अनुपात भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था तब इस राज्य के विकास के लिए एक उम्मीद जगी थी। महज 9 हजार करोड़ रुपए के बजट से राज्य का काम-काज शुरु हुआ और आज बजट का आकार एक लाख करोड़ को पार कर गया है। अगर साल दर साल इतनी मात्रा में धन जनता के हित कल्याण और विकास में लग रहा है तो फिर प्रदेश में आज भी गरीबी और बेरोजगारी एक गंभीर समस्या क्यों है? भ्रष्टाचार से प्रदेश का विकास और जनता का कल्याण प्रभावित होता है। एक सड़क बनती है तो उसे एक निश्चित समय के लिए मजबूती से काम करना चाहिए। लेकिन जब सड़क बनाने के लिए निविदा से लेकर निर्माण कार्य पूरा होने तक कमीशनखोरी होती है तो सड़क की क्वालिटी प्रभावित होती है। इसका मतलब है जो सड़क 10 साल की आयु तक अच्छी रहनी चाहिए वह 3-4 साल में ही जर्जर हो जाती है। अब उस सड़क पर चलने की आदी जनता तो फिर वही सड़क बनाने के लिए सरकार पर दबाव बनाना पड़ता है। अब फिर निविदा बुलाई जाती है और फिर उसके निर्माण का चक्र शुरु हो जाता है। केवल इस उदाहरण से समझे तो ईमानदारी से बनी सड़क के बाद अगले 10 साल तक जो पैसे उस पर खर्च होने थे वे किसी अन्य कल्याणकारी योजना में खर्च हो सकते है। एक कद्दावर नेता का कथन स्मरण हो रहा है, वे कहते थे यदि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक जनजाति क्षेत्रों में विकास के नाम पर जो पैसे खर्च हुए है अगर उन्हें सभी जनजाति परिवारों में बराबर-बराबर बांट दिए जाते तो बस्तर संभाग का हर व्यक्ति करोड़पति होता है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद विकास की जितनी गति बढ़ी उससे ज्यादा गति से भ्रष्टाचार बढ़ा है। मंत्री, नेता, अधिकारी जिनको मौका मिला सब दोनों हाथों से लूटे है। कुछ मामले का पर्दाफाश हो गया और बहुत से भ्रष्टाचार के मामले ऐसे भी है जिनके दोषी अनैतिक रुप से कमाए गए पैसे से मौज उड़ा रहे है। प्रदेश का भला चाहने वाली कोई भी सरकार अगर भ्रष्टाचार पर लगाम कसने में सफल हो जाए तो इस देश की बुनियादी समस्याएं खत्म हो जाएंगी लेकिन समस्याओं को खत्म करना ही कौन चाहता है क्योंकि इन्हीं समस्याओं के नाम पर बजट बनता है और भ्रष्टाचार होता है।

]]>