मध्यप्रदेश – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 08 Jul 2023 07:07:36 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 राष्ट्रीय नेताओं ने बदले वातावरण https://samacharpacheesa.com/?p=7214 Sat, 08 Jul 2023 07:07:35 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7214 भारतीय जनता पार्टी लगातार चुनावी मोड में रहती है। एक चुनाव खत्म हुआ नहीं कि दूसरे की तैयारी शुरू हो जाती है, परिणाम चाहे जो भी हो। अभी कर्नाटक चुनाव में पराजय के इस साल के अंत में चार बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने को है, मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और छत्तीसगढ़। इनमें केवल मध्यप्रदेश में ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, लेकिन पार्टी की तैयारी पूरे जोश से शुरू हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय नेताओं का लगातार आगमन हो रहा है, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के बाद शुक्रवार को प्रधानमंत्री की आमसभा राजधानी रायपुर में हुई। कई घंटे की लगातार बारिश से लगा कि कार्यक्रम में लोग कैसे आएंगे? लेकिन प्रधानमंत्री को देखने और सुनने पार्टी कार्यकर्ता और आम जनों की ऐसी ऐतिहासिक भीड़ जुटी कि भाजपा के नेताओं में नया जोश भर गया। प्रधानमंत्री का रायपुर आना केन्द्र सरकार का अनेक निर्माण कार्यों का उद्घाटन और लोकार्पण करने के लिए भी था। इसके बाद आमसभा में श्री मोदी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। प्रदेश में लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कोई भ्रष्टाचारी बच नहीं पाएगा। उन्होंने अगले चुनाव के लिए नारा भी देकर गए, बदलबो, बदलबो, भ्रष्ट कांग्रेस सरकार ला ए बार बदलबो…। प्रदेश को दो दिन पहले ही गृह मंत्री अमित शाह चुनाव की योजना के संबंध में बैठक करने रायपुर आए थे, उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडवीय भी आए, हालांकि रायपुर एम्स में उनका कार्यक्रम था लेकिन वे गृहमंत्री के साथ भाजपा नेताओं की बैठक में भी रहे। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में भी रहे और उसके बाद यह घोषणा हो गई कि उन्हें केंद्र ने छत्तीसगढ़ में चुनाव का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। अब इस नियुक्ति के बाद प्रदेश में भाजपा के चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इधर कांग्रेस भी पीछे नहीं है। संगठन स्तर पर बूथ स्तर पर बैठकों का दौर जारी है। कुछ दिन पूर्व दिल्ली में संगठन की बैठक हुई जिसमें स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव को प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया है। राज्यपाल ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। अब तक भूपेश बघेल के नेतृत्व में सरकार चल रही थी, अब सिंहदेव के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या अधिकारों का भी बंटवारा हो पाएगा? टी एस सिंहदेव पार्टी से सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद से नाराज चल रहे थे, पार्टी के विधायकों ने उनका कई बार अपमान भी किया। नाराज सिंहदेव ने अपने एक विभाग से इस्तीफा भी दे दिया था। माना जा रहा है कि उनको मना लेने से कांग्रेस के लिए सरगुजा में स्थिति बेहतर होगी। वैसे चुनाव आते आते अभी समीकरण कई बार बदलेंगे। प्रधानमंत्री के प्रवास से उत्साहित पार्टी को अपना संवेग बनाए रखना होगा।

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मजबूर कंधा और भोथरी होती संवेदनाएं https://samacharpacheesa.com/?p=7007 Wed, 31 May 2023 07:59:10 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7007 मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल इलाके शहडोल से मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई। यहां एक पिता को अपनी बेटी का शव बाइक पर ले जाना पड़ा। क्योंकि, अस्पताल ने एंबुलेंस देने से इन्कार कर दिया था। कितना हृदयविदारक मंजर रहा होगा, उस पिता के लिए जिसने पहले 13 साल की बेटी की मौत का दर्द झेला, फिर उसके शव को घर ले जाने के लिए साधन भी नसीब नहीं हो सका।घटना शहडोल जिले के कोटा गांव की है। सिकल सेल एनीमिया से पीडि़त 13 साल की माधुरी गोंड की अस्पताल में मौत हो गई। बाइक पर शव ले जाते पिता की तस्वीर जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो प्रशासन की आंख खुली। घटना की जानकारी मिलने पर कलेक्टर वंदना वैद्य ने स्वयं वहां पहुंचकर शव वाहन की व्यवस्था कराई।सवाल उठता है, जब इस तरह का मंजर सोशल मीडिया पर वायरल होता है क्या तभी प्रशासन की नींद खुलती है। इससे पहले भी शहडोल में कई बार शवों को कभी खटिया पर, कभी लकड़ी के पटिए तो कभी साइकल पर ले जाने की दु:खद तस्वीरें सामने आती रहीं हैं। क्या सरकार गरीबों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कर सकती कि मजबूरी में उसे किसी का मुंह नहीं देखना पड़े। निश्चित रूप से इसे अस्पताल प्रबंधन की निष्ठुरता ही माना जाएगा, जो एक गरीब का दर्द नहीं समझ सका। जिस मध्यप्रदेश सरकार को जनता का हितैषी कहा जाता है, जब उसी प्रदेश में गरीब तबका अपने हक से महरूम रहे, तो शासन और प्रशासन पर उंगली उठना लाजमी है। चंद महीनों पहले की मध्यप्रदेश के मुरैना की वह घटना भला कौन भुला होगा, जब आठ साल के एक बच्चे की गोद में दो साल के भाई के शव का फोटो सामने आया था। मुरैना के अम्बाह का वीडियो भी वायरल हुआ। दरअसल, ये हमारी संवेदनाओं के भोथरा होने का चरमोत्कर्ष है। अब ऐसे दृश्य देखकर दिल नहीं कचोटता, पर सोचिए उस 8 साल के बच्चे के दिल पर क्या गुजरी होगी। जिसकी गोद में अपने छोटे भाई का शव था, जिसके साथ उसकी कई यादें जुड़ी होगी। अपनी उम्र से कहीं ज्यादा बोझ दिल पर लिए वो मासूम अपने पिता की लाचारी और दुनिया से मदद की उम्मीद लिए क्या देख और सोच रहा होगा। आज फिर इस घटना को देखकर उस लाचार पिता का दर्द आंखों में कचोट रहा है।मध्य प्रदेश को देश का दिल कहा जाता है। लेकिन, अब इस तरह के दर्द भरे दृश्यों पर हमारी मानवीय संवेदना भी निष्ठुर होती जा रही है। क्या हमारी संवेदनाएं सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट और कमेंट करने तक ही सीमित रह गई! क्या कोई दरियादिली दिखाकर उस पिता के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कर सकता था।यह देश की पहली और आखिरी द्रवित करने वाली तस्वीर नहीं है। लेकिन, कमजोर होते मानवीय मूल्य और शासन-सत्ता से उठते विश्वास पर सवाल उठने लाजिमी हैं। आज हम बड़ी-बड़ी इमारतों पर इतराते हैं। मानवीय सभ्यता अपने विकास के शीर्ष पर होने को लेकर इठलाती है, लेकिन इन बुलंदियों के बाद भी जब हम मानवीय स्तर और संवेदनाओं की बात करते हैं। फिर एक इंसान के रूप में अपने- आपको सबसे निचले स्तर पर पाते हैं। बड़े आदमी का कुत्ता भी बीमार हो जाए तो उसकी सुर्खियां बन जाती है। लेकिन, एक गरीब का दर्द किसी को नजर नहीं आता। आज मानव संवेदनाएं भी सरकारी तंत्र की तरह हो गई है। जिसे न कुछ दिखाई देता है न सुनाई देता है। बात रहनुमाई व्यवस्था की करें, तो उसके लिए यह घटना शायद मायने ही न रखती। क्योंकि, गरीब का दर्द सरकार को न तो सुनाई देता है और न दिखाई। उसके लिए तो मानो उनकी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर उन्हें कौन कहे कि ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावे किताबी है। ऐसे में जिस दिन हमारी रहनुमाई व्यवस्था गरीब का दर्द समझ जाएगी उस दिन सही मायनों में देश विकास की बुलंदियों को छू लेगा।

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मप्र में भाजपा के लिए राह आसान नहीं https://samacharpacheesa.com/?p=5632 Thu, 05 Jan 2023 06:24:47 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5632 मध्यप्रदेश में मिशन 2023 को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पांचवी बार राज्य में कमल खिलाने का सपना संजो रही भाजपा को एक सर्वे ने परेशानी में डाल दिया है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने आगामी चुनाव को देखते हुए अलग-अलग सर्वे कराए हैं। इनमें अधिकांश के नतीजे मिलते जुलते आए हैं। इस सर्वे में 50 से अधिक मौजूदा विधायकों की स्थिति खराब बताई जा रही है। वहीं करीब एक दर्जन से अधिक मंत्रियों में आधे से ज्यादा सिंधिया समर्थक मंत्रियों की स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है। संगठन के सर्वे के बाद आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की संभावना बढ़ गई है। सर्वे की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए यदि टिकट वितरण में गुजरात फॉर्मूला भी लागू किया गया, तो मौजूदा विधायकों में करीब 40-50 विधायकों के टिकट पर संकट खड़ा हो जाएगा। इससे पार्टी नए और युवा चेहरे को मौका देगी। इस रिपोर्ट में ग्वालियर चंबल संभाग के साथ विंध्य और महाकौशल अंचल में पार्टी को ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा मालवा बेल्ट की भी कुछ सीटों पर पार्टी की हालत ठीक नहीं बताई जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जिन 230 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। इस बार उस सूची में करीब 100 नाम बदलने के आसार नजर आ रहे हैं। पिछले चुनावों में पार्टी को आदिवासी सीटों पर भारी नुकसान हुआ था। इस बार पार्टी ने नए आदिवासी नेताओं को ज्यादा तवज्जो देने का मन बनाया है। विधानसभा चुनावों में नए चेहरे सामने आने की उम्मीद है। 2018 के चुनाव में भाजपा ने 109 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बाद राज्य में हुए उपचुनावों में भाजपा की सीटें बढ़कर 127 हो गई। जबकि कांग्रेस की सीटें 114 से घटकर 96 पर रह गई हैं। नए साल शुरू होते ही भाजपा ने 100 से अधिक हारी सीटों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। ऐसी सीटों पर बूथ अध्यक्ष, महामंत्री और बीएलए को पार्टी ने छह माह पहले प्रशिक्षण भी दिया था। अब उन्हें नए सिर से सक्रिय करने की कवायद संगठन ने शुरू कर दी है। भाजपा ने हर बूथ पर वोट शेयर बढाकर 51 फीसदी करने का टारगेट तय किया है। कई जिलों में निष्क्रिय पड़ी बूथ समितियों को भी संगठन और जनप्रतिनिधि एक्टिव करने में जुट गए हैं। संगठन को मिले फीडबैक में प्रभारी मंत्रियों की उदासीनता, जनप्रतिनिधियों और मैदानी कार्यकर्ताओं के बीच संवादहीनता की स्थिति सामने आई है। हारी हुई सभी सीटों के प्रभारी और संबंधित क्षेत्रों के नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों के फीडबैक संगठन के नेताओं को दे दिए हैं। इनमें ग्वालियर-चंबल, महाकौशल अंचल से लेकर विंध्य, बुंदेलखंड और मालवा-निमाड़ की सीटों पर पार्टी की स्थिति खराब बताई गई है। यहीं कारण है कि संगठन ने हारी हुई सीटों और आदिवासी सीटों पर जीत के लिए अलग से रणनीति बनाने का निर्णय लिया है।

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आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी https://samacharpacheesa.com/?p=5193 Wed, 14 Dec 2022 07:08:47 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5193 अगले साल होने वाले राजस्थान और मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों के चुनाव में भाजपा से लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपने-अपने दांव से चुनावी चौसर सजानी शुरू कर दी है। भाजपा जहां गुजरात में मिली एतिहासिक जीत के साथ उत्साह में हैं। वहीं कांग्रेस भी हिमाचल प्रदेश में भाजपा को सत्ता से बाहर कर अपनी जीत पर इतरा रही है। फिलहाल दोनों पार्टियों को मिली अलग-अलग राज्यों की जीत ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में नई ऊर्जा तो भर ही दी है। वहीं दोनों पार्टियां गुजरात और हिमाचल के अपने-अपने फॉर्मूले को अगले साल होने वाले चुनावों में इस्तेमाल करने वाली हैं। अगले साल होने वाले राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के चुनाव भाजपा और कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भाजपा ने गुजरात में जो इतिहास रचा उसके पीछे जबरदस्त रणनीति ही रही है। इसमें सबसे अहम रणनीति का हिस्सा एक चौथाई नेताओं को दोबारा टिकट न देने से लेकर जनता के बीच मोदी के चेहरे और विश्वास का भुनाना शामिल है। पार्टी ने अगले साल होने वाले अलग-अलग राज्यों के चुनावों को लेकर न सिर्फ नीतियां बनानी शुरू कर दी हैं, बल्कि बीते कई महीनों से संगठनात्मक स्तर पर पूरा ढांचा दुरुस्त कर उसका फीडबैक भी लेना शुरू किया जा चुका है। वह कहते हैं कि कर्नाटक और तेलंगाना समेत छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा ने बहुत प्रभावशाली तरीके से चुनाव की रणनीति और तैयारियां शुरू कर दी हैं। वह कहते हैं कि भाजपा को 2018 के चुनावों में कर्नाटक और मध्यप्रदेश में सत्ता तो नहीं मिली थी, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के चलते बाद में भाजपा की सरकार बनी। इसलिए भाजपा को इस बार इन चुनावों में अलग रणनीति के साथ ही मैदान में उतरना होगा। अगले साल होने वाले चुनावों के लिए सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस भी उसी तरीके की रणनीति बना रही है। कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश में जिस तरीके से ‘मुद्दों को आगेÓ करके और लोगों को सीधे तौर पर उनसे जोड़कर के चुनाव लड़ा गया, उसी पैटर्न पर अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव में उतरेंगे। हालांकि अगले साल जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, उसमें छत्तीसगढ़ और राजस्थान में तो कांग्रेस की सरकार भी है। जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार बनी थी। कर्नाटक में भी राजनीतिक समीकरणों के चलते कांग्रेस की सरकार बनी थी।

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