ममता बनर्जी – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 27 Jun 2023 09:12:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 दोराहे पर खड़ी ममता https://samacharpacheesa.com/?p=7151 Tue, 27 Jun 2023 09:12:15 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7151 पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी इन दिनों सियासत के दोराहे पर खड़ी हैं। एक तरफ बंगाल को कांग्रेस और भाजपा मुक्त बनाने की उनकी जिद है तो दूसरी तरफ कांग्रेस की अगुवाई में बनने वाले मोर्चा में शामिल होने की ख्वाहिश, बेहतर होगा इसे मजबूरी भी कह लें, भी है। अब यह देखना होगा कि ममता बनर्जी कांग्रेस के कितना पास और कितना दूर हैं? कर्नाटक चुनाव का परिणाम आने से पहले के परिदृश्य पर अगर गौर करें तो इस नतीजे पर पहुंचते हैं कि कांग्रेस और ममता बनर्जी के बीच फासला बहुत ज्यादा था। राहुल गांधी पर फिकरा कसते हुए उन्होंने कहा था कि भाजपा के लिए सबसे बड़ी टीआरपी तो राहुल गांधी ही हैं। कर्नाटक चुनाव का नतीजा आने के बाद परिदृश्य बहुत बदल गया। पहले तो ममता बनर्जी सवाल करते हुए कहती थीं कांग्रेस, कहां है कांग्रेस? उन्होंने गोवा के लुई फेलेरियो, त्रिपुरा के पीजुसी कांति विश्वास और मेघालय के मुकुल संगमा जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को तोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल कर लिया था। ये अपने साथ काफी समर्थक भी ले आए थे। तृणमूल कांग्रेस ने इन राज्यों के विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार भी खड़े किए थे। मजे की बात यह है विधानसभा चुनाव के बाद ये वापस भी चले गए थे। राहुल गांधी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ममता बनर्जी ने भाजपा को फायदा पहुंचाया था। इसकी सफाई देते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि राष्ट्रीय दल की हैसियत बनाए रखने के लिए उन्होंने ऐसा किया था। पर हाल ही में एक उपचुनाव में जीत कर आए एकमात्र कांग्रेसी विधायक बायरन विश्वास को उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में शामिल कर लिया और कांग्रेस विधानसभा में फिर शून्य हो गई। कांग्रेस के प्रवक्ता जयराम रमेश ने इसकी तीखी निंदा की थी। जाहिर है कि ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस इन जख्मों को भुला पाएगी, जब कांग्रेस सहित विपक्षी सांसद मोदी सरकार का विरोध कर रहे थे तो तृणमूल कांग्रेस के सांसद दूरी बना कर रखते थे। यह सच है की राजनीति में कोई स्थाई शत्रु या मित्र नहीं होता है। पर यह भी सच है कौन कितना फायदेमंद है इसे तो राजनीति की तराजू पर ही तौल कर देखा जाएगा। इस नजरिए से अगर गौर करते हैं तो साफ दिखता है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस एवं वाम मोर्चा और तृणमूल के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। क्या 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और वाम मोर्चा के नेता तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी के साथ मंच साझा कर पाएंगे? क्या कांग्रेस, वाम मोर्चा के नेताओं का साथ गंवाने का जोखिम उठा सकती है? क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी उन संसदीय सीटों को छोडऩे के लिए तैयार हो जाएंगी जिन-जिन पर भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है? बायरन विश्वास के हश्र के बाद यह उम्मीद नामुमकिन ही लगती है। पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक हालत के मद्देनजर अगर कांग्रेस को वाममोर्चा और तृणमूल में से किसी एक को चुनना है तो कांग्रेस क्या फैसला लेगी? जाहिर है कि उनके लिए 2024 के पहले सेमीफाइनल में कौन कितना फायदा दे सकता है इस पर गौर किया जाएगा।


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ममता-स्वामी के बीच पकती खिचड़ी https://samacharpacheesa.com/?p=6857 Thu, 11 May 2023 07:20:07 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6857 इसमें कोई दो राय नहीं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी एक विद्वान राजनेता और चिंतक हैं। उनकी कई जनहित याचिकाओं पर आये निर्णयों ने भी देश और समाज को लाभ पहुँचाया है। लेकिन यह बात भी सही है कि सुब्रमण्यम स्वामी एक अस्थिर राजनेता भी हैं। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि स्वामी किसी दल के साथ ज्यादा समय टिकते नहीं, यही नहीं वह अपने खुद के दल में भी ज्यादा समय नहीं टिके थे। स्वामी का हालिया राजनीतिक इतिहास देखें तो कांग्रेस विरोध से अपनी राजनीतिक शुरुआत करने वाले सुब्रमण्यम स्वामी ने 1999 में कांग्रेस से हाथ मिला लिया था और सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने के चक्कर में स्वामी ने जयललिता से समर्थन वापस करवा कर अटलजी की सरकार तक गिरवा दी थी। लेकिन मध्यावधि चुनावों में देश की जनता ने अटलजी को दोबारा देश की कमान सौंप दी थी। स्वामी की योजना कामयाब नहीं होते देख जयललिता ने उनसे दूरी बना ली और कुछ दिनों बाद स्वामी के जयललिता से राजनीतिक रिश्ते बिगड़ गये थे और बात कोर्ट कचहरी तक गयी थी। कुछ समय बाद स्वामी ने अपनी जनता पार्टी का एनडीए के साथ गठबंधन कर लिया और फिर बाद में अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया। स्वामी मोदी-मोदी के नारे लगाने लगे और खुद को सबसे बड़े हिंदूवादी नेता के रूप में देखने लगे। स्वामी को मोदी इतने भाये कि वह उनके पक्ष में वह हर मंच से दलीलें देने लगे। केंद्र में मोदी सरकार बनने पर स्वामी को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया और दिल्ली के लुटियंस जोन में बड़ा बंगला भी दे दिया गया लेकिन जैसे ही उन्हें भनक लगी कि उनको राज्यसभा में दोबारा नहीं भेजा जायेगा वैसे ही वह सरकार के आलोचक बन गये। अब वह हर मंच से भाजपा और मोदी की बुराई करते नजर आते हैं। स्वामी की नजर में अब प्रधानमंत्री पद के लिए ममता बनर्जी सबसे उपयुक्त शख्सियत हैं। लेकिन सवाल उठता है कि जिन मुख्यमंत्री के कार्यकाल में मानवाधिकारों के हनन के सबसे ज्यादा आरोप लगते हैं, जिन मुख्यमंत्री का राज्य राजनीतिक हिंसा की घटनाओं, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और प्रशासनिक नाकामियों के मामले में शीर्ष पर है और जिन्हें अदालत से लगातार फटकार सुनने को मिलती है, वह मुख्यमंत्री आखिर किस लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करने लायक हैं? हम आपको बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले ‘मोदी हटाओ’ अभियान को विपक्ष के नेता तो आगे बढ़ा ही रहे हैं साथ ही स्वामी जैसे कुछ भाजपा नेता भी इस मिशन की सफलता के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। इसी कड़ी में स्वामी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की और उन्हें एक ऐसा व्यक्ति करार दिया जिसे ब्लैकमेल नहीं किया जा सकता। यही नहीं स्वामी यह भी कह गये कि ममता बनर्जी को भारत का प्रधानमंत्री होना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने विपक्ष को भी सलाह देते हुए कहा कि देश को एक सच्चे विपक्ष की जरूरत है जो सत्तारुढ़ पार्टी से डरे नहीं।

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त्रिपुरा विधानसभा चुनाव: शाह और ममता आज रहेंगे राज्य के दौरे पर https://samacharpacheesa.com/?p=6114 Mon, 06 Feb 2023 07:11:07 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6114 अगरतला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो चुनावी रैलियों को संबोधित करने के लिए आज यानी सोमवार को त्रिपुरा पहुंचेंगे और राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अभियान को गति देने के लिए एक रोड शो में शामिल होंगे। पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी। त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए 16 फरवरी को मतदान होगा। मतगणना दो मार्च को होगी। उन्होंने कहा, ‘‘दौरे पर अमित शाह जी दक्षिण त्रिपुरा संतिरबाजार तथा खोवाई में ‘विजय संकल्प’ रैली को संबोधित करेंगे और अगरतला के बनामलीपुर निर्वाचन क्षेत्र में एक रोड शो में हिस्सा लेंगे।’’ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि केंद्रीय मंत्री के दौरे के मद्देनजर पूर्वोत्तर राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
शाह ने विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के अभियान की शुरुआत करते हुए पिछले महीने त्रिपुरा में दो रथ यात्राओं में हिस्सा लिया था। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सोमवार को राज्य में पहुंच रही हैं। उनका मंगलवार को एक रोड शो करने और एक जनसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम है। तृणमूल के राज्य प्रभारी राजीब बनर्जी ने कहा, ‘‘ वह सोमवार शाम को पहुंचेंगी और उदयपुर में त्रिपुरेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। बनर्जी मंगलवार को अगरतला में रोड शो करेंगी और रवींद्र भवन में एक रैली को संबोधित करेंगी।’’ ममता बनर्जी के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहेंगे।

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चाहे जितनी एजेंसियां ​​हमारे पीछे लगा दो लेकिन देश को एक रहने दो : ममता बनर्जी https://samacharpacheesa.com/?p=5856 Mon, 23 Jan 2023 11:14:43 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5856 कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर से केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कई लोग हैं जो एजेंसियों के डर से भाग जाते हैं। लेकिन हम नहीं। उन्होंने कहा कि जो कुछ कर सकते हो करो, हमारा सब कुछ ले लो लेकिन देश को मत बेचो। तृणमूल प्रमुख ने साफ तौर पर कहा कि चाहे जितनी एजेंसी हमारे पीछे लगा दो लेकिन देश को एक ही रहने दो। ममता बनर्जी ने कहा कि संविधान का उल्लंघन करने वालों का मतलब लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करना है।
कोलकाता में एक कार्यक्रम में ममता ने कहा कि कुछ लोगों ने अंडमान में द्वीपों के नाम बदले हैं, लेकिन वह नेताजी थे जिन्होंने शहीद और स्वराज द्वीप का नाम रखा था। उन्होंने कहा कि केंद्र ने नेताजी द्वारा परिकल्पित योजना आयोग को खत्म कर दिया है। आपको बता दें कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्‍मदिन 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस अवसर पर अण्‍डमान और निकोबार द्वीप समूह के 21 सबसे बड़े द्वीपों का नामकरण परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर करने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि आजादी के बाद देश के स्वाधीनता आंदोलन के इतने बड़े नायक को भुला देने का प्रयास हुआ।

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भाजपा के दो चेहरे, चुनाव के दौरान कहती कुछ है और बाद में करती कुछ और है : ममता बनर्जी https://samacharpacheesa.com/?p=5783 Wed, 18 Jan 2023 11:09:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5783 शिलांग। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख ममता बनर्जी आज मेघालय पहुंची थीं। मेघालय में इस साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। मेघालय में तृणमूल कांग्रेस अपनी संभावनाओं को तलाशने की कोशिश में लगी हुई है। इसी कड़ी में ममता बनर्जी के आज के दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन सबके बीच ममता बनर्जी ने भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि भाजपा दो चेहरे वाली पार्टी है जो चुनाव के दौरान कहती कुछ है और बाद में करते कुछ और है।
दरअसल, ममता बनर्जी मेघालय के गोरा हिल्स जिले में एक जनसभा को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि तृणमूल कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जो पूर्वोत्तर राज्य में बेहतर शासन प्रदान कर सकती है क्योंकि यह लोगों के सपनों को पूरा करते हैं। ममता ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार सिर्फ उसकी पार्टी के शासन वाले राज्यों को ही धन मुहैया कराती है। उन्होंने कहा कि हम मेघालय में जनता के लिए, जनता द्वारा और जनता की सरकार चाहते हैं। आपको बता दें कि मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी की सरकार है। मेघालय में भाजपा के पास सिर्फ 2 विधायक हैं। वह कोनराड संगमा के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा भी है।
मेघालय में भाजपा इस बार अपने दम पर चुनाव लड़ रही है। यही कारण है कि ममता बनर्जी ने भाजपा पर अपना निशाना साधा है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के मुताबिक मेघालय में 27 फरवरी को मतदान होगा और मतगणना दो मार्च को होगी। वहीं, मेघालय के लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (पीएचई) मंत्री रेनिक्टन तोंगखर और राज्य के चार अन्य मौजूदा विधायकों ने निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान की तारीख की घोषणा से कुछ घंटे पहले बुधवार को विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। तोंगखर के अलावा इस्तीफा देने वालों में तृणमूल कांग्रेस के विधायक शीतलंग पाले, कांग्रेस के निलंबित विधायक मायरालबॉर्न सिएम और पीटी सावक्मी तथा निर्दलीय विधायक लम्बोर मालनगियांग शामिल हैं।

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