महाधिवेशन – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 01 Mar 2023 05:43:15 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 रणनीतिकार के तौर पर उभरे बघेल https://samacharpacheesa.com/?p=6481 Wed, 01 Mar 2023 05:41:02 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6481 छत्तीसगढ़ की राजधानी में 24 से 26 फरवरी तक चला कांग्रेस का तीन दिवसीय महाधिवेशन खत्म हो गया हैं। प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सीएम बघेल ने पार्टी के भीतर अपना कद बढ़ाकर अगले चुनाव में कांग्रेस के सीएम फेस होने का दावा ठोक दिया है। अधिवेशन का सफल आयोजन कर बघेल न केवल पार्टी के पावरफुल नेताओं में शामिल हुए, बल्कि अपने सियासी विरोधियों पर भी भारी दिखे। सीएम ने जिस तरह से गुलाब की पंखुडिय़ों बिछाकर पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी का स्वागत करवाया, वह कई सियासी संदेश दे रहा हैं। भविष्य में दोनों नेताओं की पार्टी में भूमिका बढ़ सकती है। ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि इस अधिवेशन में प्रियंका और बघेल की जोड़ी को साथ आगे बढऩे का सिग्नल मिला है। क्योंकि दोनों नेताओं की जोड़ी इससे पहले हिमाचल प्रदेश में कमाल दिखा चुकी है। वहीं, यूपी चुनाव में भी प्रियंका बतौर प्रभारी और बघेल वरिष्ठ पर्यवेक्षक के नाते साथ काम कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में प्रियंका गांधी की भूमिका बढ़ सकती है। आगामी विधानसभा चुनाव से महज छह माह पहले हुआ कांग्रेस का 85वां राष्ट्रीय अधिवेशन सीएम भूपेश बघेल के लिए कई मायने में महत्वपूर्ण था। इस अधिवेशन का फायदा छत्तीसगढ़ कांग्रेस को भी मिलेगा। क्योंकि जब पार्टी सत्ता में होती है, तो उसके कार्यकर्ता सुस्त हो जाते हैं। वे ज्यादा सक्रिय नहीं होते हैं। लेकिन इस तरह के भव्य आयोजन होने के बाद कार्यकर्ता चार्ज हो जाते हैं। यह अधिवेशन एक प्रकार से प्रदेश में कांग्रेस के चुनावी अभियान की शुरुआत है। अधिवेशन के बाद से ये तय हो गया कि प्रदेश में कांग्रेस का एक मात्र बड़ा और सर्वमान्य चेहरा सीएम भूपेश बघेल ही हैं। अधिवेशन के सफल आयोजन के बाद उनके विरोधी भी इस बात को समझने लगे हैं। वे यह भी जानते हैं कि कांग्रेस हाईकमान के साथ उनका अच्छा तालमेल है। प्रदेश में जब ढाई-ढाई वर्ष के सत्ता परिवर्तन को लेकर बवाल हुआ था तब प्रियंका गांधी ने भूपेश बघेल का समर्थन किया। इसके बाद ही बघेल को यूपी, असम और हिमाचल प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर के सभी बड़े आंदोलनों में और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का चेहरा कांग्रेस सामने करती है। कई राज्यों में छत्तीसगढ़ मॉडल को आगे रख पार्टी ने चुनाव लड़ा।कांग्रेस के 85वें अधिवेशन की कमान खुद सीएम भूपेश बघेल ने अपने हाथों में ले रखी थी। वहीं कई महत्वपूर्ण कार्य उन्होंने अपनी कोर टीम के सदस्यों को सौंप रखे थे। इस अधिवेशन में करीब 15 हजार नेता शामिल हुए थे। 15 हजार सदस्यों के लिए 1500 से ज्यादा गाडिय़ों की व्यवस्था की गई थी। नागपुर से 300 इनोवा, दिल्ली से 100 लग्जरी कारें, इंदौर-नागपुर से लग्जरी बसें मंगवाई गई थीं। तीन दिन के अधिवेशन के लिए दर्जनभर वॉल्वो समेत सब मिलाकर 800 बड़ी-छोटी बसें रायपुर मंगवाई गई थीं।
नेताओं के भोजन के लिए कोलकाता, दिल्ली और केरल के विशेष रसोइए रायपुर आए थे। अधिवेशन में नेताओं को कॉन्टिनेंटल खाने के साथ छत्तीसगढ़ी पकवान भी परोसे गए। इसके अलावा अन्य राज्यों का पारंपरिक भोजन भी परोसा गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने आए नेताओं के लिए रायपुर और नया रायपुर गेस्ट हाउस रिसोर्ट, होटल, सर्किट हाउस और धर्मशालाओं को भी बुक किया गया था।

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कांग्रेस की आर्थिक नीति में बदलाव https://samacharpacheesa.com/?p=6446 Sat, 25 Feb 2023 05:37:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6446 रायपुर में कांग्रेस पार्टी के 85वें महाधिवेशन हो रहा है। इस अधिवेशन में मुख्य 6 विषयों पर चर्चा की जाएगी एवं प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। बैठक के पहले दिन देशभर के प्रदेश कांग्रेस की इकाई और राष्ट्रीय संगठन के पदाधिकारियों का जमावड़ा हुआ। पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी भी रायपुर पहुंचे। पहले दिन 6 विषय चिन्हित किए गए जिन पर अगले 2 दिनों तक चर्चा होगी और उन पर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। बैठक की जानकारी देते हुए प्रवक्ता जयराम रमेश ने बताया कि देश में कांग्रेस पार्टी अपने आर्थिक प्रस्ताव में निजीकरण का विरोध करेगी। खासकर सार्वजनिक उपक्रम को बेचने का विरोध किया जाएगा। आश्चर्य की बात है कि जिस कांग्रेस पार्टी ने आज से 32 साल पहले 1991 में नेहरुवादी आर्थिक नीति को पीछे छोड़ते हुए उदारीकरण और निजीकरण की नीति को आत्मसात किया था, अब वापस नेहरुवादी अर्थव्यवस्था की ओर लौट रही है। निजीकरण की शुरुआत 1993 में आज से 30 वर्ष पूर्व हुई थी। इसे विनिवेश की नीति कही गयी। 1993 से 2005 तक पहले कांग्रेस उसके बाद एनडीए की सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने का सिलसिला प्रारंभ किया। 1991 की औद्योगिक नीति में ऐसे उद्योग जो केवल सरकार लगा सकती थी या जिनके लिए लाइसेंस लेना पड़ता था उस सूची को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में अब कांग्रेस पार्टी अगर पब्लिक सेक्टर की निजीकरण की बात कर रही है तो क्या 1991 में उदारीकरण नीति के तहत और पूरे सेक्टर को बढ़ावा देने और उद्योगों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की नीति की ओर भी लौटेगी? 1951 में जब पंचवर्षीय योजना प्रारंभ की गई थी तब पं. नेहरु ने समाजवादी दृष्टिकोण को सामने रखते हुए मिश्रित अर्थव्यवस्था को देश की तरक्की का आधार बनाया था। 1951 से 1991 तक पंचवर्षीय योजना के माध्यम से ही देश के विकास का खाका खींचा गया। 1991 में उदारीकरण की नीति आ जाने के बाद पंचवर्षीय योजनाओं का ज्यादा महत्व रह नहीं गया था। योजना आयोग देश में परिसंघीय व्यवस्था और उदारीकरण नीति के तहत आर्थिक विकास के लिए बाधा रहा। यही कारण था कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जब एनडीए की सरकार बनी तो योजना आयोग को समाप्त कर उसके स्थान पर नीति आयोग का गठन किया गया। अब जब कांग्रेस पार्टी कॉर्पोरेट और निजीकरण का विरोध करने प्रस्ताव के माध्यम से करने जा रही है तो यह सवाल उठना जायज है कि क्या कांग्रेस भविष्य में पुन: योजना आयोग के गठन और पंचवर्षीय योजनाओं को प्रारंभ करेगी?

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रायपुर में कांग्रेस पार्टी का महाधिवेशन https://samacharpacheesa.com/?p=6407 Thu, 23 Feb 2023 05:42:56 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6407 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में एक अंग्रेज अधिकारी एओह्युम के द्वारा की गई थी। कांग्रेस पार्टी ने उसके बाद अनेक परिवर्तन देखे। इन परिवर्तनों में महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का एक संगठनात्मक पार्टी के 1920 के नागपुर अधिवेशन में महत्वपूर्ण था। प्रतिवर्ष दिसम्बर माह के अंतिम सप्ताह में कांग्रेस पार्टी का नियमित अधिवेशन होता था जो स्वतंत्रता के बाद 1965 तक चलता रहा। पं. जवाहरलाल नेहरु के निधन के बाद कांग्रेस पार्टी का वार्षिक अधिवेशन नियमित नहीं रहा। इस वर्ष 24 से 26 फरवरी कांग्रेस पार्टी का एक अधिवेशन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हो रहा है। इसके पूर्व कोई भी अधिवेशन छत्तीसगढ़ की सीमा में नहीं हुआ था। सबसे नजदीक जबलपुर के पास त्रिपुरी और नागपुर में अधिवेशन हो चुके है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह अधिवेशन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। इस अधिवेशन में कांग्रेस पार्टी इस वर्ष के अंत में होने वाले छत्तीसगढ़ सहित कई महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 में लोकसभा चुनाव की दृष्टि से चर्चा होगी। लंबे समय के बाद कांग्रेस पार्टी को गांधी, नेहरु परिवार के बाहर राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है। मल्लिकार्जुन खडग़े की अध्यक्षता में इस अधिवेशन में संगठनात्मक चर्चा होगी। 2004 से 2014 दस वर्षों तक डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार केंद्र में रही। इसके बाद लगातार दो चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिली है। कांग्रेस पार्टी के इतिहास में लगभग 50 के आसपास तक सीटों पर जीत आपातकाल के बाद कांग्रेस के सबसे बुरे काल में भी नहीं मिली थी। 2019 में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को हार मिली। इसके बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। लगभग 3 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी का कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं था, इसलिए संगठन का ढांचा बिखर चुका है। हाल में केवल 3 ही राज्य ऐसे है हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस पार्टी देश में कमजोर हो गई है लेकिन नेतृत्व का अभाव और दिशाहीनता के कारण पार्टी की स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले 4 महीनों से राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा कर रहे थे जिसे देशभर में अच्छा प्रतिसाद मिला है। नए अध्यक्ष का नेतृत्व और भारत जोड़ो यात्रा की सफलता के बाद रायपुर में होने वाले महाधिवेशन में इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस पार्टी को फिर से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना जरुरी है। कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी का कमजोर रहना भारतीय लोकतंत्र के लिए भी अच्छा नहीं है।

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