महाराष्ट्र – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Fri, 07 Jul 2023 08:05:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 महाराष्ट्र में अकेली पड़ी कांग्रेस https://samacharpacheesa.com/?p=7208 Fri, 07 Jul 2023 08:05:14 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7208 शिवसेना, एनसीपी में चौंकाने वाली टूट के बाद अब अगली बड़ी टूट क्या कांग्रेस में होगी? इस सवाल का जवाब सकारात्मक है। बहुत संभव है कि अब महाराष्ट्र कांग्रेस में भी बिखराव आ जाए। महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता अजित पवार के पाला बदल कर सरकार में उपमुख्य़मंत्री बन जाने के अत्यंत आश्चर्यजनक राजनीतिक घटनाक्रम को कांग्रेस में काफी गंभीरता से लिया जा रहा है। पार्टी के बड़े नेता भी मान रहे हैं कि अजित पवार के बीजेपी के साथ चले जाने के बाद अगले साल होनेवाले चुनाव में हार-जीत का गणित बदल चुका है और इस कारण कांग्रेस विधायकों के लिए भी पालाबदल करके सत्ता के साथ जाने का रास्ता खुल गया है। सतर्कता यह बरती जा रही है कि किसी को खबर तक नहीं लगे कि किस पर नजर रखी जा रही है और सावधानी यह भी कि पार्टी को लगातार एकजुट बनाए रखना है। खास ध्यान इस पर है कि कांग्रेस का कौनसा विधायक बीजेपी के किस बड़े नेता के संपर्क में है, किस विधायक पर किस बीजेपी नेता का प्रभाव है तथा कौन कौन से विधायक हार के गणित से डर कर किसी दूसरे रास्ते पर अपने कदम बढ़ा सकते हैं, इसका गहन आकलन किया जा रहा है। जानकारी इस बात की भी जुटाई जा रही है कि अजित पवार किस कांग्रेस नेता को अपने साथ लाने में सक्षम साबित हो सकते हैं। कांग्रेस में हालात सावधानी के हैं। दिल्ली में बैठा आलाकमान सतर्क है, और महाराष्ट्र में कांग्रेस के विधायक सहमे हुए हैं क्योंकि सब के सब स्कैनर पर हैं। फोन पर किसी से खुलकर बात करना भी उनको नहीं सुहा रहा। महाराष्ट्र में कांग्रेस की नजर अब अपने ही विधायकों पर इसलिए है, क्योंकि आलाकमान को पता है कि पार्टी में प्रादेशिक नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर काफी खींचतान है। विधायकों में असंतोष भी है। कांग्रेस नेतृत्व इस तथ्य से भी बहुत ही अच्छी तरह से वाकिफ है कि एनसीपी में बड़ी टूट से प्रदेश के बदले हुए राजनीतिक हालात में कांग्रेस विधायकों को हार की चिंता सता रही है। बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों के लिए अगला चुनाव जीतना मुश्किल होगा। ऐसे में हर विधायक सुरक्षित रास्ता अपनाना चाहता हैं। कांग्रेस विधायकों के लिए अब भाजपा की हिंदुत्व की विचारधारा से दूरी बनाकर रखना कोई बड़ा कारण नहीं हैं। क्योंकि कांग्रेस पहले भी कट्टर हिंदुत्व की विचार रखने वाली शिवसेना के साथ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में सहभागी रही है। इस कारण से भी कांग्रेस के विधायकों के लिए शिवसेना, भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सामूहिक सरकार के साथ खड़े रहना ज्यादा आसान है। वैचारिक रूप से भी कांग्रेस सदा से राष्ट्रवादी कांग्रेस की सबसे करीबी पार्टी रही है। नई दिल्ली की नजर मुंबई पर इसी कारण है, क्योंकि उसे अपने विधायकों को साथ रखे रहना ज्यादा जरूरी हो गया है। हालात कांग्रेस में टूट के समर्थन में हैं और माहौल भी।

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कर्नाटक में महाराष्ट्र जैसा बदलाव https://samacharpacheesa.com/?p=7202 Thu, 06 Jul 2023 06:52:37 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7202 महाराष्ट्र में एनसीपी पर कब्जे को लेकर शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार की लड़ाई जारी है। इस बीच, कर्नाटक में भी सियासी उठापटक के दावे होने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने दावा किया है कि एक महीने के अंदर महाराष्ट्र की तरह ही कर्नाटक में भी बड़ा उलटफेर होगा। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने भी कहा है कि कर्नाटक में कुछ भी हो सकता है। इसमें अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। कुमारस्वामी और येदियुरप्पा के इस बयान ने सियासी गलियारे में खलबली मचा दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या सच में कर्नाटक में सरकार गिर सकती है? अगर हां तो ये कैसे होगा? 224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 113 का है। इस वक्त भाजपा के 66 और जेडीएस के 19 विधायक हैं। दोनों मिलकर भी कुल 85 के आंकड़े तक पहुंचेंगे। यह आंकड़ा 113 का काफी कम है। ऐसे में भाजपा और जेडीएस का गठबंधन होने कांग्रेस सरकार को कोई खास खतरा नहीं हैं। कुमारस्वामी और येदियुरप्पा दोनों ही महाराष्ट्र में एनसीपी की तरह कर्नाटक में कांग्रेस में फूट पडऩे का दावा कर रहे हैं। अगर ऐसा कुछ होता है तो सियासी उटलफेर संभव है। हालांकि, संख्याबल के लिहाज से ये महाराष्ट्र के मुकाबले कठिन होगा। कर्नाटक में कांग्रेस के पास 135 विधायक हैं। एक निर्दलीय विधायक ने भी अपना समर्थन दिया है। यहां सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी के पास 113 विधायकों का समर्थन चाहिए होता है। मतलब कांग्रेस के पास अभी बहुमत के आंकड़े से 23 सीटें अधिक हैं। महाराष्ट्र में जिस तरह का बिखराव शिवसेना के साथ हुआ वैसी टूट के लिए कम से कम 90 विधायकों को बागी खेमे में आना होगा। तभी बागी गुट के विधायक दल-बदल कानून से बच पाएंगे। 2018 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी थी। कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। एक साल बाद ही कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायकों ने बगावत कर दी। बागी विधायकों के इस्तीफे की वजह से कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद कुमारस्वामी को इस्तीफा देना पड़ा। और राज्य में भाजपा की सरकार बनी। बागियों ने बाद में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। ज्यादातर को जीत मिली। साथ ही राज्य में भाजपा की सरकार बरकार रही। इस बार ऐसा कुछ होने के लिए बहुमत के आंकड़े को कम से कम 89 तक आना होगा। क्योंकि कांग्रेस के अलावा अन्य सभी दलों के विधायकों की संख्या 89 है। ऐसा तभी संभव है जब कांग्रेस के कम से कम 58 विधायक अफनी विधायकी से इस्तीफा दे दें।

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नीतीश का नंबर भी आयेगा https://samacharpacheesa.com/?p=7195 Wed, 05 Jul 2023 07:00:28 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7195 महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अंदर मची उठापटक के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बिहार में जनता दल युनाइटेड और झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा को पार्टी में टूट का खतरा सताने लगा है। ऐसा ही डर कुछ और छोटी पार्टियों को भी है। लेकिन सबसे ज्यादा घबराहट जनता दल युनाइटेड खेमे में देखी जा रही है। जनता दल युनाइटेड की यह घबराहट स्वाभाविक भी है क्योंकि उसने भाजपा को जो धोखा दिया था उसका जवाब अब तक नहीं दिया है। दरअसल महाराष्ट्र में जो कुछ हुआ उसका एक बड़ा कारण यह भी है कि 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष रहे अमित शाह को चुनाव परिणाम बाद उद्धव ठाकरे ने धोखा दे दिया था। यही नहीं, हाल ही में शरद पवार भी यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि चुनाव परिणाम के बाद वह भाजपा के साथ सरकार बनाने को राजी हो गये थे हालांकि तीन-चार दिनों में ही उन्होंने पलटी मार ली थी। इस तरह से शरद पवार ने भी अमित शाह को धोखा दिया था। सही समय आने पर शरद पवार की पार्टी में बगावत हो गयी। स्थिति यह हो गयी है कि अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार भाजपा से लड़ाई लडऩे की बजाय अपनी पूरी शक्ति अपनी पार्टी पर कब्जा बनाये रखने में लगाते रहेंगे। इसलिए महाराष्ट्र के घटनाक्रम को देखते हुए अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लग रहा है कि उन्हें भी राजनीतिक सबक सिखाये जाने का समय आ चुका है। हम आपको याद दिला दें कि साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान जनता के बीच नीतीश कुमार के खिलाफ माहौल होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए वोट मांगा था। यही नहीं, प्रधानमंत्री की दी गयी जुबान की लाज रखते हुए ही भाजपा ने अपनी पार्टी के ज्यादा विधायक होने के बावजूद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बना दिया था। लेकिन नीतीश कुमार ने जब पिछले साल भाजपा को सरकार से बाहर कर विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल से हाथ मिला लिया था तबसे वह राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। देखा जाये तो नीतीश कुमार ने केंद्र की सत्ता से मोदी सरकार को हटाने के लिए पूरी जान लगा रखी है। हालांकि जबसे नीतीश साथ छोड़ कर गये हैं तबसे प्रधानमंत्री ने उनके खिलाफ कुछ नहीं कहा है। लेकिन अब माना जा रहा है कि भाजपा जदयू को कोई बड़ा राजनीतिक सबक सिखा सकती है। दरअसल इसका मौका खुद जदयू ही भाजपा को दे रही है। लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे पास आ रहे हैं, वैसे-वैसे मोदी के नाम पर पिछला चुनाव जीते जदयू सांसदों की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं और वह पाला बदलने की कोशिशों में लगे हैं। इसके साथ ही जिस तरह नीतीश ने पिछले दिनों तेजस्वी यादव को भविष्य का नेता बताया था उसको देखते हुए जदयू के कई विधायकों के मन में भी बेचैनी है। इसीलिए पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कह रहे हैं कि जदयू में बिखराव होने वाला है। हालांकि जदयू अध्यक्ष ललन सिंह कह रहे हैं कि हमारी पार्टी एकजुट है और बिहार में ऑपरेशन लोटस सफल नहीं हो सकता। देखना होगा कि बिहार में आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम क्या रहता है? यह भी देखना होगा कि क्या विपक्ष की अगली बैठक से पहले ही जनता दल युनाइटेड में बगावत का बिगुल बजता है। इस बात की आशंका इसलिए है क्योंकि विपक्ष की पिछली बैठक से पहले जीतन राम मांझी की पार्टी ने बिहार में सत्तारुढ़ महागठबंधन को झटका देते हुए सरकार से अलग होकर एनडीए का दामन थाम लिया था। बहरहाल, अब खबर है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की कवायद को गति देने के लिए प्रमुख विपक्षी पार्टियों की आगामी बैठक 17 और 18 जुलाई को बेंगलुरु में होगी। हम आपको याद दिला दें कि कांग्रेस समेत 15 से अधिक विपक्षी दलों ने गत 23 जून को पटना में बैठक की थी जिसमें उन्होंने भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लडऩे और आगे बढऩे को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी। विपक्षी दलों की अगली बैठक ऐसे समय होने जा रही है जब महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दो फाड़ हो गई है।

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चाचा-भतीजे की लड़ाई सामने आई https://samacharpacheesa.com/?p=7133 Fri, 23 Jun 2023 07:02:13 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7133 महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर नये मोड़ आते रहते हैं या नये घटनाक्रम होते रहते हैं। आज की रिपोर्ट में हम बात करेंगे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में मचे नये तूफान की और महाराष्ट्र सरकार में शामिल एक मंत्री के सनसनीखेज दावे की। सबसे पहले बात करते हैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की। अभी हाल ही में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सौंपी थी। पवार ने इसके साथ ही वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर उन्हें अन्य राज्यों की जिम्मेदारी दी थी। उस समय अजित पवार के बारे में कहा गया था कि वह महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर हैं इसलिए वह वही काम करते रहेंगे। पार्टी ने यह भी कहा था कि अजित पवार की राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी में कोई भूमिका निभाने की इच्छा नहीं है और वह महाराष्ट्र की राजनीति ही करना चाहते हैं इसलिए वह नेता प्रतिपक्ष जैसी महत्वपूर्ण भूमिका में बने रहेंगे। उस दौरान अजित पवार ने खामोश मन से जिस तरह शरद पवार का निर्णय स्वीकारा था उससे माना गया था कि राकांपा में उत्तराधिकार के मुद्दे को हल कर लिया गया है। लेकिन अब जिस तरह से अजित पवार ने अपने मन की बात सामने रखी है उससे स्पष्ट हो गया है कि भतीजे को यह कतई मंजूर नहीं है कि चाचा के साथ मिलकर उन्होंने जिस पार्टी को खड़ा किया था उसकी कमान वह अपनी बेटी को दे दें। यह कुछ वैसा ही है जैसा कि शिवसेना में बाला साहेब ठाकरे के जमाने में देखने को मिला था। उस समय उनके भतीजे राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को शिवसेना की कमान सौंपे जाने का विरोध करते हुए कहा था कि जिस पार्टी को खड़ा करने के लिए उन्होंने अपना पसीना बहाया उसकी कमान एकतरफा रूप से अपने पुत्र को सौंपा जाना गलत है। अजित पवार ने अब जो कुछ कहा है उससे महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफान आ गया है। अजित पवार ने पार्टी नेतृत्व से अपील की है कि वह उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी से मुक्त कर दें और उन्हें पार्टी संगठन में कोई भूमिका सौंपें। मुंबई में आयोजित, राकांपा के 24वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में अजित पवार ने यह मांग रखी। ताजा अटकलों को हवा देने वाली एक टिप्पणी में अजित पवार ने यह भी कहा है कि मुझे बताया गया है कि मैं नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सख्त व्यवहार नहीं करता हूं। पहले भी इस तरह की अटकलें लगती रही हैं कि अजित पवार पार्टी छोड़ सकते हैं। जब पिछले दिनों शरद पवार ने एकाएक राकांपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था तब अजित पवार ने उनके इस्तीफे का स्वागत भी किया था लेकिन बाद में पार्टीजनों के मनाये जाने पर शरद पवार ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था। अजित पवार पिछले विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा के साथ जाकर उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले चुके हैं। हालांकि वह सरकार चल नहीं पाई थी और फिर बाद में वह पार्टी में लौट आये थे और उद्धव ठाकरे की सरकार में राकांपा कोटे से कैबिनेट मंत्री बने थे।

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शिवसेना को तोडऩे के लिए करोड़ों रुपये हुए खर्च : संजय राउत https://samacharpacheesa.com/?p=6348 Mon, 20 Feb 2023 08:10:48 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6348 मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति जबरदस्त तरीके से गर्म है। पिछले साल शिवसेना के भीतर हुए विभाजन के बाद से सबसे बड़ा सवाल यही था कि असली शिवसेना किसके पास है? चुनाव आयोग ने इस बात का भी निर्णय कर दिया है। चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना और पार्टी का चुनाव चिन्ह सौंप दिया। इसके बाद से उद्धव ठाकरे और उनके करीबी जबरदस्त तरीके से भाजपा पर हमलावर है। इन सबके बीच संजय राउत ने साफ तौर पर दावा किया है कि शिवसेना को तोडऩे के लिए करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। उन्होंने अमित शाह को महाराष्ट्र और मराठों का दुश्मन नंबर एक भी बताया है।
इसके साथ ही संजय राउत ने यह भी कहा है कि शिवसेना महाराष्ट्र का स्वाभिमान और अस्मिता है। उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे ने महाराष्ट्र के स्वाभिमान के लिए शिवसेना बनाई थी। शिवसेना तोड़कर, खरीदकर आप लोग जिस प्रकार से विकट हास्य कर रहे हो उसका मतलब क्या होता है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि शिवसेना खत्म नहीं होगी। यह अंगारा है, अग्नि है, जो बुझेगी नहीं। इन सब के बीच उद्धव ठाकरे गुट ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना मानने और उसे चुनाव चिह्न ”धनुष एवं तीर आवंटित करने के निर्वाचन आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
इससे पहले संजय राउत ने दावा किया था कि शिवसेना पार्टी के नाम एवं निशान ‘तीर-धनुष को ”खरीदने के लिए अब तक ”2000 करोड़ रुपये का सौदा हुआ है। राउत ने एक ट्वीट में दावा किया कि 2000 करोड़ रुपये का शुरुआती आंकड़ा है और यह बात शत-प्रतिशत सच्ची है। उन्होंने संवाददाताओं से यह भी कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन के करीबी एक बिल्डर ने उन्हें यह बात बतायी है। राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा कि उनके दावे के पक्ष में सबूत हैं जिसे वह शीघ्र ही सामने लायेंगे।

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शिवसेना विवाद पर 21 फरवरी को फिर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई https://samacharpacheesa.com/?p=6318 Fri, 17 Feb 2023 10:18:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6318 नईदिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि इसे फिलहाल 7 जजों की पीठ के पास भेजने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख देते हुए कहा कि अब फरवरी में इस बात पर गुणदोष के आधार पर विचार किया जाएगा। 21 फरवरी को कोर्ट इसपर विचार करेगा कि क्या विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों पर 2016 के फैसले में संदर्भ की आवश्यकता है।
समीक्षा याचिकाओं को वृहद पीठ को भेजने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अयोग्यता याचिकाओं से निपटने के लिए विधानसभा अध्यक्षों की शक्तियों पर 2016 के नबाम रेबिया के फैसले पर पुनर्विचार के लिए महाराष्ट्र राजनीतिक संकट से संबंधित मामलों को फिलहाल सात-न्यायाधीशों की एक बड़ी बेंच के पास भेजने से इनकार कर दिया।
गुण दोष के आधार पर किया जाएगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि 21 फरवरी को इस बात पर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा कि विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों पर 2016 के फैसले में संदर्भ की आवश्यकता है या नहीं।
न्यायपालिका पर पूरा भरोसा- एकनाथ शिंदे
वहीं, महाराष्ट्र विधानसभा के राजनीतिक संकट मामले में महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा है कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। लोकतंत्र में बहुमत के साथ सत्ता में आना बहुत मायने रखता है। हम लोगों की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि न्यायपालिका योग्यता के आधार पर फैसला करे।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और एनके कौल ने इसे वृहद पीठ को भेजे जाने का विरोध किया था। महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इसका विरोध किया था। पांच सदस्यीय एक संविधान पीठ ने 2016 में अरुणाचल प्रदेश के नबाम रेबिया के मामले पर फैसला दिया था कि यदि विधानसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए नोटिस सदन में पहले से लंबित हो, तो वह विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए दी गई अर्जी पर कार्यवाही नहीं कर सकता।

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चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में विधानसभा उपचुनाव की तारीख बदली https://samacharpacheesa.com/?p=5907 Wed, 25 Jan 2023 08:06:41 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5907 नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने बुधवार को महाराष्ट्र में विधानसभा की दो सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव की तारीख को बदलने का एलान किया। ईसी ने 27 फरवरी को होने वाले मतदान की तारीख को एक दिन पहले यानी 26 फरवरी कर दिया है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में उपचुनाव पुणे जिले में आने वाली दो सीटों- चिंचवाड़ और कस्बा पेठ में होने हैं। निर्वाचन आयोग को जानकारी मिली थी कि जिले में 27 फरवरी को 12वीं और ग्रैजुएशन की परीक्षाएं हैं। इसी के चलते ईसी ने तारीखों को बदलने का एलान किया।
हालांकि, आयोग ने वोटों की गिनती की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया और यह दो मार्च को ही होगी। इसी दिन त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के विधानसभा नतीजों का भी एलान होना है।

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सत्ता के लालच में शिवसेना ने पीठ में घोंपा छुरा : जेपी नड्डा https://samacharpacheesa.com/?p=5577 Mon, 02 Jan 2023 10:13:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5577 मुंबई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा आज महाराष्ट्र दौरे पर हैं। उनकी इस यात्रा को आगामी चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। नड्डा ने चंद्रपुर में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान नड्डा ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। नड्डा ने कहा कि जब विश्व मुसीबत के दौर से गुजर रहा है और हर देश खुद को संकट में पा रहा है तब हम विपरीत परिस्थित में भी आगे बढ़ रहे हैं। ये केवल प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व के ही कारण है। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन जैसा देश, जिसने हम पर 200 साल तक राज किया…उसको पछाड़ कर हम पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप में कोरोना का टीकाकरण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है, चीन की हालत आप देख ही चुके हैं। लेकिन भारत में 220 करोड़ से अधिक टीके लगा कर… जनता को सुरक्षा कवच देने का काम आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने किया है।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि हमने 100 देशों को कोरोना वैक्सीन पहुंचाई और 48 देशों को तो मुफ्त उपलब्ध करवाई है। अब भारत विश्व से मांगने वाला देश नहीं बल्कि मोदी जी के नेतृत्व में देने वाला देश बन गया है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में यूं ही नहीं हमारी शान बनी है, मोदी जी की नीतियों के कारण दुनिया का नजरिया बदला है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी जी ने लाल किले से ‘स्वच्छ भारत’ की बात कही तो कांग्रेस के नेताओं ने मजाक बनाया। क्यों… क्योंकि वो जिन घरानों से आते हैं उनको भारत की पीड़ा का अनुमान ही नहीं था। इस पीड़ा का अनुमान किसी को था तो आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को था। इसीलिए हमारे प्रयासों से देश में 12 करोड़ से अधिक शौचालय बने, महिलाओं को सुविधा मिली।
उद्धव ठाकरे पर हमला करते हुए नड्डा ने कहा कि सत्ता के लालच में शिवसेना ने पीठ में छुरा घोंपने का काम किया और उन लोगों के साथ खड़े हो गए जिनके खिलाफ श्री बाला साहेब हमेशा लड़ते रहे। ऐसे लोगों को जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी सरकार आई जिसके मुखिया ने अपनी विचारधारा से ही समझौता कर लिया। पालघर में साधुओं के साथ जो बर्ताव हुआ… क्या दबाव था जो उद्धव सीबीआई जांच से पीछे हट गए? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं आज इस मंच से आंकड़ें गिनवा रहा हूं… कोई कांग्रेसी इस तरह से काम गिनवा सकता है क्या? ये मोदी जी की बनाई कार्यव्यवस्था है जिसमें हम अपना ‘रिपोर्ट कार्ड’ साथ लेकर चलते हैं। हमने जो कहा है… वो किया है, जो कह देंगे वो कर के देंगे। विकास का दूसरा नाम भारतीय जनता पार्टी है और विकास पुरुष की पहचान नरेन्द्र मोदी के रूप में है।

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सीमा विवाद पर महाराष्ट्र विधानसभा में प्रस्ताव पास https://samacharpacheesa.com/?p=5472 Tue, 27 Dec 2022 09:57:46 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5472 नागपुर। महाराष्ट्र व कर्नाटक के बीच जारी सीमा विवाद के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आज विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव को सदन में सर्वसम्मति से पास किया गया। उन्होंने कहा, किसी भी परिस्थिति में कर्नाटक के बेलगाम, कारवार, निपानी, भालकी, बीदर शहरों के 865 मराठी भाषी गांवों को शामिल करने के लिए सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी।
शिंदे ने कहा, केंद्र सरकार को केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बैठक में लिए गए निर्णय को लागू करने के लिए कर्नाटक सरकार से अपील करना चाहिए और सीमावर्ती क्षेत्रों में मराठी लोगों की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इससे पहले डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उम्मीद जताई थी कि यह प्रस्ताव बहुमत से पारित होगा। इसके साथ ही उन्होंने शिवसेना नेता व पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे पर पलटवार किया।
फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर नाम लिए बगैर पलटवार करते हुए कहा, ‘मैं हैरान हूं कि जो लोग कल बोल रहे थे, उन्होंने 2.5 साल सीएम रहते हुए क्यों कुछ नहीं किया। सीमा विवाद हमारी सरकार बनने के बाद पैदा नहीं हुआ है।’
फडणवीस ने कहा कि यह विवाद महाराष्ट्र के गठन और भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के समय शुरू हुआ था। यह सालों से चला आ रहा विवाद है। हम इस मामले में कभी राजनीति नहीं करते हैं और उम्मीद करते हैं कि कोई भी इस पर राजनीति न करे। फडणवीस ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को महसूस करना चाहिए कि समूचा महाराष्ट्र उनके साथ है।
बता दें, सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना बाला साहेब ठाकरे गुट के नेता उद्धव ठाकरे ने सीमा विवाद को लेकर शिंदे की चुप्पी पर सवाल उठाया था। इसके साथ ही उन्होंने यह विवाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा हल किए जाने तक कर्नाटक के विवादित क्षेत्रों को ‘कर्नाटक के कब्जे वाला महाराष्ट्र’ (्यह्ररू) करार देते हुए केंद्र सरकार से इस इलाके को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने मांग की कि यह मांग महाराष्ट्र सरकार द्वारा लाए जा रहे प्रस्ताव में शामिल की जाना चाहिए।
उद्धव की मांग पर अजित पवार ने कही यह बात
इस बीच, राकांपा नेता व महाराष्ट्र के विपक्षी नेता अजित पवार ने कहा कि हमें सीमा विवाद को लेकर लाए जा रहे प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए। हम हमारी राय रखेंगे। हम सीमावर्ती महाराष्ट्रीयन लोगों के साथ हैं। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो विवादित क्षेत्र को केंद्र सरकार संघ शासित घोषित कर सकती है या नहीं।
विपक्षी विधायकों ने मराठी लोक गीत गाकर किया प्रदर्शन
इस बीच, नागपुर विधान भवन की सीढिय़ों पर विपक्षी विधायकों ने आज अनूठा प्रदर्शन किया। उन्होंने परंपरागत मराठी लोकगीत गाते हुए राज्य सरकार की नीतियों, कथित धांधलियों और शिंदे सरकार के मंत्रियों के कथित भ्रष्टाचार का जिक्र किया।

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चीन की तरह हम कर्नाटक में प्रवेश करेंगे : संजय राउत https://samacharpacheesa.com/?p=5358 Wed, 21 Dec 2022 08:31:07 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5358 मुंबई। शिवसेना के नेता संजय राउत अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल में ही कर्नाटक और महाराष्ट्र का सीमा विवाद काफी सुर्खियों में रहा है। दोनों ही राज्यों के बीच तनाव बढ़ गया है। एक दूसरे राज्य के खिलाफ प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इन सब के बीच शिवसेना उद्धव बाला साहब ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने कुछ ऐसा बयान दे दिया है जिसके बाद बवाल बढ़ सकता है। दरअसल, अपने बयान में संजय राउत ने कहा कि हम कर्नाटक में उसी तरह से प्रवेश करेंगे, जैसे चीन देश में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस मुद्दे पर किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। हम चर्चा के जरिए इसे सुलझाना चाहते हैं। लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री इसमें आग लगा रहे हैं।
इतना ही नहीं, संजय राउत ने महाराष्ट्र की सरकार को कमजोर करा दिया और कहा कि राज्य की सरकार इस मुद्दे पर कोई स्टैंड नहीं ले रही है। आपको बता दें कि सीमा विवाद को लेकर एकनाथ शिंदे और उनकी सरकार को लगातार विपक्ष की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र के विधानसभा में भी विपक्ष सरकार को घेर रहा है। हाल में ही दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक भी संपन्न हुई थी। संजय राउत ने हालांकि यह भी कहा है कि यह देश एक है और मसले का हल बातचीत से होना चाहिए। वहीं, खबर यह भी है कि कर्नाटक विधानसभा के दोनों सदन महाराष्ट्र के साथ सीमा विवाद पर एक प्रस्ताव पारित करेंगे। विधानमंडल ने राज्य के रुख को दोहराया कि यह मुद्दा सुलझा हुआ है, और पड़ोसी राज्य को एक इंच भी जमीन नहीं दी जाएगी।

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