महाराष्ट्र और नागालैंड – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 12 Apr 2023 08:17:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने के बाद पवार https://samacharpacheesa.com/?p=6737 Wed, 12 Apr 2023 08:17:33 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6737 राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने भले ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो दिया हो, लेकिन इसेस उसके गढ़ महाराष्ट्र में चुनावी रूप से कोई फर्क पडऩे की संभावना नहीं है, जहां एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार सभी को स्वीकार्य हैं। एनसीपी का गठन 1999 में हुआ था। 2000 में इसने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के नियमों के अनुरूप राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल किया। ईसीआई ने 2014 और 2019 में अपने चुनावी प्रदर्शन के आधार पर एनसीपी की राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा रद्द कर दिया और पार्टी को अब केवल महाराष्ट्र और नागालैंड में राज्य पार्टी का दर्जा प्राप्त होगा। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि हम चुनाव आयोग के फैसले को स्वीकार करते हैं। हम चुनाव आयोग के आदेश का अध्ययन करेंगे और फिर विस्तार से जवाब देंगे। महाराष्ट्र में एनसीपी की राजनीतिक गठजोड़ और सरकार बनाने या तोडऩे की क्षमता हमेशा से रही है। 82 वर्षीय शरद पवार के नेतृत्व में एनसीपी ने अभूतपूर्व राजनीतिक प्रयोग किए हैं। एनसीपी राज्य के नेताओं ने 2024 के विधानसभा चुनाव में 288 सीटों में से 100 सीटों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। पार्टी समान विचारधारा वाली कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) को महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के बैनर तले एक साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। 1999 के बाद से इसकी संख्या के चुनावों के बावजूद केंद्र और राज्य दोनों में पवार का प्रभाव कम नहीं हुआ है। नतीजतन, न तो सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) और न ही विपक्षी दल कांग्रेस और शिवसेना राकांपा को खारिज कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस और भाजपा राष्ट्रीय स्वीकारिता के साथ दो मुख्यधारा के राजनीतिक दल हैं, लेकिन जब विधानसभा चुनावों की बात आती है तो महाराष्ट्र में एनसीपी का चुनावी आधार अभी भी कायम है। 1999 में एनसीपी ने अपने गठन के बाद पहले विधानसभा चुनावों का सामना किया और 22.60 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 58 सीटें जीतीं। कांग्रेस 75 सीटों और 27.20 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। शिवसेना ने 69 सीटें (17.33 फीसदी वोट शेयर) और बीजेपी ने 56 सीटें (14.54 फीसदी वोट शेयर) जीतीं। पांच साल बाद एनसीपी ने 18.75 प्रतिशत के वोट शेयर के साथ 71 सीटों पर जीत हासिल करते हुए कांग्रेस पार्टी के रूप में पछाड़ दिया। प्रमुख पार्टी होने के बावजूद, पवार ने मुख्यमंत्री पद कांग्रेस को सौंप दिया। महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार 1999 से 2014 तक चली। 2014 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस और एनसीपी के लिए एक झटका था। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में, भाजपा 288 में से 122 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। अपने वैचारिक मतभेदों के बावजूद, राकांपा ने महाराष्ट्र में भाजपा को समर्थन देने का वादा किया। यह एक ओर एनसीपी के भीतर फूट से बचने की रणनीति थी। दूसरे, बड़ा उद्देश्य शिवसेना को भाजपा से दूर रखना था। हालाँकि भाजपा और शिवसेना ने एकजुट होकर गठबंधन सरकार बनाई, लेकिन इस कदम ने दोनों के बीच कलह के बीज बो दिए। पांच साल बाद, 2019 में, यह उद्धव ठाकरे के भाजपा से नाता तोडऩे और एमवीए सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और एनसीपी में शामिल होने के रूप में सामने आया। चाहे 1999 का कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन हो या 2019 का कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना गठबंधन राज्य की राजनीति में नए राजनीतिक क्रमपरिवर्तन और संयोजन को विकसित करने में पवार फैक्टर हमेशा से प्रभावी रहा है।

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