मानसून सत्र – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 09 Aug 2023 06:40:28 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 पहले क्यों नहीं बोले राहुल गांधी? https://samacharpacheesa.com/?p=7754 Wed, 09 Aug 2023 06:40:28 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7754 कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता बहाल कर दी गई है। राहुल गांधी संसद पहुंचे जहां मानसून सत्र चल रहा है। परिसर में प्रवेश करते समय कई विपक्षी सांसदों ने उनका भव्य स्वागत किया। गांधी परिवार ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना की। संसद सदस्यता बहाल होने के बाद 12 बजे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का भाषण होने वाला था। लेकिन सदन में राहुल की जगह गौरव गोगोई बोले। जिस पर बीजेपी ने भी तंज कसा है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसको लेकर निशाना साधते हुए पूछा कि सत्ता पक्ष उनके भाषण का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने तो तंज कसते हुए कह दिया कि लगता है वो लेट से सोकर उठे होंगे। जिसके बाद संसद में हंगामा मच गया। बहरहाल, सियासी बवालों से इतर बताते हैं कि आपको आखिर कौन सी बड़ी वजह है जिसकी वजह से राहुल गांधी ने संसद में भाषण नहीं दिया। आज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई तो सदन में नरेंद्र मोदी मौजूद नहीं थे। दरअसल, कांग्रेस चाहती है कि सदन में जब नरेंद्र मोदी मौजूद हों। उसी वक्त राहुल गांधी का भाषण हो। इसका संदेश साफ है कि कांग्रेस मोदी के मुकाबले राहुल को पेश करना चाहती है। 2024 लोकसभा चुनाव नजदीक है। राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल हो चुकी है। कांग्रेस संसद में पहले से ज्यादा आक्रमक नजर आ रही है। संसद में राहुल गांधी ही पार्टी को लीड करते नजर आएंगे। कांग्रेस चाहती है कि सदन में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद हो तभी राहुल गांधी अपना भाषण दें। वहीं अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी के न बोलने की एक और बड़ी वजह है। दरअसल, अविश्वास प्रस्ताव पर पीएम मोदी सदन में अंतिम दिन यानी 10 अगस्त को बोलेंगे। कांग्रेस नहीं चाहती है कि पीएम मोदी महफिल लूट ले जाए। वहीं आज अगर राहुल गांधी भाषण दे देते तो उनका भाषण पुराना हो जाता है। ऐसे में कांग्रेस का प्लान है कि राहुल गांधी का भाषण पीएम मोदी के भाषण से ठीक पहले हो। जिससे राहुल का भाषण चर्चा में रहे और लोगों को याद भी रहे। कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव पर मोदी के भाषण के साथ राहुल के भाषण की तुलना कर नए सियासी समीकरण बनाने की कोशिश करेगी। लोगों को ये संदेश देने की कोशिश करेगी कि राहुल जननेता के तौर पर अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव के बहाने कांग्रेस को बोलने का मौका मिला है तो वो देश में ये संदेश देना चाहती है कि वो नॉर्थ ईस्ट को कितनी तवज्जो देती है। राहुल गांधी बोलते तो शायद मणिपुर के मुद्दे पर उतना असर नहीं पड़ता। गौरव असम से सांसद हैं उनके जरिए ये मैसेज देने की कोशिश की है। यही बात गौरव की स्पीच से भी झलकी।

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राजनीति का अखाड़ा नहीं संसद https://samacharpacheesa.com/?p=7699 Sat, 05 Aug 2023 06:43:49 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7699 भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर, पर लगता है कि उसकी गरिमा और महत्ता का ध्यान उन्हें ही नहीं है, जो उसके माननीय सदस्य हैं। विपक्ष के हंगामे या अनुपस्थिति में कुछ जरूरी सरकारी विधेयक पारित करने के अलावा देश हित में कोई महत्वपूर्ण चर्चा संसद अपने मानसून सत्र में अभी तक नहीं कर पाई है। स्वाभाविक सवाल होगा कि क्यों, पर जवाब उतना सरल नहीं है। संसदीय लोकतंत्र में दो ही पक्ष होते हैं : सत्तापक्ष और विपक्ष, और दोनों की सकारात्मक भूमिका से ही संसद चल सकती है, पर जब-जब संसदीय गतिरोध पर सवाल उठते हैं, दोनों एक-दूसरे पर उंगलियां उठाने लगते हैं। ग्रीष्मकाल से वर्षा ऋतु आ गई, लेकिन छोटा-सा खूबसूरत पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर मैतेई और कुकी जातीय हिंसा की आग में अभी भी जल रहा है। मणिपुर इस आग में जल तो मई से रहा है, पर सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों ही उस समय कर्नाटक की सत्ता के लिए चुनावी जंग में व्यस्त थे। दूसरे, संसद के बजट सत्र में एक-दूसरे पर निशाना साधने के लिए उनके तरकश में और तमाम राजनीतिक तीर थे। फिर अब मणिपुर को हिंसा की आग में जलते हुए अढ़ाई महीने से ज्यादा हो गया है, और उसकी तपिश अंतर्राष्ट्रीय मीडिया से लेकर दूसरे देशों की संसद तक में भारतीय छवि को झुलसा चुकी है। सो, इसी साल होने वाले 5 राज्यों के विधानसभा और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने का दोनों ही पक्षों को यह अनुकूल अवसर लगता है। इसीलिए विपक्ष मणिपुर हिंसा पर नियम 267 के तहत चर्चा और प्रधानमंत्री के बयान के लिए अड़ा रहा, जबकि पक्ष नियम 176 के तहत चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जवाब के लिए ही तैयार था। दोनों ही पक्षों के अपने-अपने तर्क हो सकते हैं, पर जब एक राज्य हिंसा की आग में जल रहा है, दो मणिपुरी महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और उनसे बलात्कार का वीडियो वायरल होकर देश को दुनिया में शर्मसार कर चुका है, तब संसद में चर्चा को नियम के विवाद में उलझा कर क्या संदेश देना चाहते थे? अगर संसद सीमावर्ती राज्य के ऐसे संवेदनशील हालात पर भी चर्चा नहीं करती और बजट समेत महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा ही पारित कर दिए जाते हैं, तब जन मानस में देर-सवेर यह स्वाभाविक सवाल उठेगा ही कि यह संसद किसकी खातिर है, किसके लिए है? अब विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के मास्टर स्ट्रोक के बाद संसद में चर्चा भी होगी और उसका जवाब भी प्रधानमंत्री को ही देना होगा। फिर इस संसदीय गतिरोध से क्या हासिल हुआ? मानसून सत्र में मणिपुर पर संसद के इस मौन से भी बड़े और प्रासंगिक सवाल उसके कामकाज को लेकर उठने लगे हैं।

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मानसून सत्र का आज आखिरी दिन, अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में होगी चर्चा https://samacharpacheesa.com/?p=7457 Fri, 21 Jul 2023 08:23:21 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7457 रायपुर। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार के वर्तमान कार्यकाल का आखिरी सत्र आज पूरा होगा। मानसून सत्र के अंतिम दिन सारे सरकारी काम-काज पूरे किए जाएंगे। सत्र के चौथे दिन शुक्रवार को विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होगी। इससे पहले तीसरे दिन विपक्षी भाजपा विधायकों की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर गुरुवार को चर्चा नहीं हो सकी। आज 32 ध्यानाकर्षण लगे हैं वहीं प्रश्नकाल के दौरान रेडी-टू-ईट फूड, आदिवासियों के रीति-रिवाजों के संरक्षण, गौठान और शिक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

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विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर आज चर्चा होगी https://samacharpacheesa.com/?p=7435 Thu, 20 Jul 2023 07:39:04 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7435 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 20 जुलाई को शासकीय कार्य खत्म होने के बाद शाम 5.30 बजे तक और 21 जुलाई को शासकीय कार्य खत्म होने के बाद शाम 5.30 बजे तक समय निर्धारित की है।
उन्होंने बताया कि सदन को मंत्रिमंडल के प्रति दो अविश्वास प्रस्ताव की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें पहली सूचना नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल व अन्य सदस्यों की है। दूसरी सूचना सदस्य धर्मजीत सिंह व प्रमोद कुमार शर्मा से प्राप्त हुई है। पहली सूचना में दशांश सदस्य खड़े होने की स्थित में दूसरी सूचना नहीं ली जाएगी।

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छह हजार 31 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश करेंगे सीएम बघेल https://samacharpacheesa.com/?p=7417 Wed, 19 Jul 2023 07:49:43 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7417 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का समापन आज बुधवार को हो सकता है। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी कार्यसूची के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छह हजार 31 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश करेंगे। इस पर चर्चा के लिए तीन घंटे का समय तय किया गया है। इसी तरह भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव को भी कार्यसूची में शामिल किया गया है। उच्च प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो विधेयक और अन्य शासकीय कार्य पूरा करने के बाद सदन की कार्यवाही समाप्त हो सकती है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में मानसून सत्र दो दिन में खत्म हो गया था।

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विधानसभा का मानसून सत्र आज से, 3 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट लाएगी सरकार https://samacharpacheesa.com/?p=7392 Tue, 18 Jul 2023 07:51:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7392 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। पांचवीं विधानसभा का आखिरी सत्र 18 से 21 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान विपक्ष सत्तापक्ष से सवाल कर उन्हें घेरने का काम करेगा। इस सत्र में राज्य सरकार 3 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट लाएगी। सदन के पहले पहले दिन बीजेपी विधायक विद्यारतन भसीन और अविभाजित मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री भानुप्रताप सिंह को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित रहेगी। इसके बाद तीन दिन हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही चलेगी।
सत्र के अंतिम दिन सरकार को विपक्ष के अविश्वास का सामना करना पड़ेगा। इस बार का सत्र काफी हंगामेदार होने वाला है। क्योंकि महालेखाकार की रिपोर्ट पेश किए जाने पर हंगामा होना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर टीएस सिंहदेव के डिप्टी सीएम और पूर्व पीसीसी चीफ मोहन मरकाम के मंत्री बनाए जाने से सदन में बैठक व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिलेगी। टीएस बाबा सीएम भूपेश बघेल के नजदीक ही बैठ सकते हैं। वहीं मरकाम को विधायक वाली बैठक व्यवस्था से अलग हटकर मंत्रियों के बीच दिखेंगे। बता दें कि पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम के इस्तीफे के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है, लेकिन उनकी बैठक व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिलेगा। वहीं बीजेपी विधायक विद्यारतन भसीन के निधन के बाद विपक्ष की बैठक व्यवस्था में भी बदलाव दिखेगा।
550 सवालों का सामना करेगा कैबिनेट
इस सत्र में विधायकों ने 550 सवाल लगाए हैं। इन सवालों का सामना कैबिनेट को करना पड़ेगा। वहीं सरकार की ओर से 2022-23 के लिए महालेखाकार की रिपोर्ट पेश किए जाने की जानकारी है। बात विधेयकों की करें, तो छत्तीसगढ़ मंडी शुल्क संशोधन, निजी विश्वविद्यालय स्थापना, भारतीय स्टाम्प अधिनियम संशोधन विधेयक और विधानसभा सदस्यता संशोधन विधेयक शामिल हैं। इसमें लाभ के दो पद संबंधी एक संशोधन का प्रस्ताव भी है, जिसमें राज्य योजना मंडल की जगह आयोग प्रतिस्थापित किया जाना है।
अविश्वास प्रस्ताव लाएगी बीजेपी
सत्र में विपक्ष की ओर से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना दी जाएगी। इस पर 21 जुलाई को आधी रात तक चर्चा चलने के संकेत हैं। पांचवीं विधानसभा के कार्यकाल में दूसरी बार ये प्रस्ताव लाया जाएगी। हालांकि बीजेपी के 13 विधायकों के होने से इसमें विपक्ष की हार तय मानी जा रही है, फिर भी बीजेपी राज्य सरकार की कमियों और घोटालों के आरोपों को लेकर घेरने का काम करेगी।

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