मुख्यमंत्री भूपेश बघेल – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 09 Aug 2023 09:14:22 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 सीएम भूपेश बघेल ने बस्तर को दी 637 करोड़ की सौगात https://samacharpacheesa.com/?p=7758 Wed, 09 Aug 2023 09:14:21 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7758 जगदलपुर। बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में बुधवार को विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिलेवासियों को 637 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 2300 विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें 486 करोड़ 70 लाख 76 हजार रुपये लागत के 1838 कार्यों का भूमिपूजन तथा 150 करोड़ 32 लाख रुपए लागत के 462 कार्यों का लोकार्पण शामिल हैं।
इन कार्यों में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 32 करोड़ 89 लाख रुपये लागत के 198 कार्य, नगर निगम जगदलपुर के 10 करोड़ 27 लाख 68 हजार रुपए लागत के 113 कार्य, लोक निर्माण संभाग जगदलपुर-1 के 12 करोड़ 48 लाख 27 हजार रुपए लागत के 18 कार्य, लोक निर्माण संभाग जगदलपुर-2 के 30 करोड़ 80 लाख 90 हजार रुपए लागत के 14 कार्य, जनपद पंचायत बकावण्ड के 1 करोड़ 79 लाख 50 हजार रुपए लागत के 49 कार्य, जनपद पंचायत लोहण्डीगुड़ा के 1 करोड़ 99 लाख 76 हजार रुपए लागत के 34 कार्य, क्रेडा विभाग के 29 करोड़ 83 लाख रुपए लागत के 190 कार्य और मुख्यमंत्री की घोषणाओं के तहत 24 करोड़ 56 लाख 29 हजार रुपये लागत के 4 कार्य व अन्य कई कार्यों का भूमिपूजन किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां लोक निर्माण संभाग जगदलपुर-1 के 64 करोड़ 71 लाख 11 हजार रुपए लागत के 20 कार्य, सीजीएमएसई के 1 करोड़ 67 लाख 60 हजार रुपए लागत के 8 कार्यों, लोक निर्माण संभाग जगदलपुर-2 के 9 करोड़ 44 लाख रुपये लागत के 4 कार्यों, मनरेगा अंतर्गत 5 करोड़ 77 लाख रुपये लागत के 12 कार्य, मुख्यमंत्री घोषणाओं के तहत 18 करोड़ 39 लाख 52 हजार रुपए लागत के 6 विकास कार्य व अन्य कई करोड़ों रुपये के कार्यों का लोकार्पण भी किया।

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मेरे चेहरे की चमक का राज छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की दुआ है : मुख्यमंत्री बघेल https://samacharpacheesa.com/?p=7634 Tue, 01 Aug 2023 10:03:00 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7634 बिलासपुर। रायगढ़ से आए युवा संग्राम ने मुख्यमंत्री से पूछा- आपकी चेहरे की चमक का राज क्या है ? इस पर हसंकर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की दुआ से है। रायगढ़ से आए नवीन दुबे ने कला संस्कृति पर अपने विचार रखे। नवीन ने कहा कि गुरु घासीदास, शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महान विभूति हुए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का नारा दिया। प्रदेश के मुखिया युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है। जहां मिलेट जैसे मोटे अनाज की फसल लहलहा रही है। उन्होंने शासन की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में हमारा छत्तीसगढ़ नया आयाम छू रहा है। छत्तीसगढिय़ा ओलंपिक के माध्यम से परंपरागत खेल आगे बढ़ रहा है। अपने सपनों का छत्तीसगढ़ प्राप्त करने के लिए हम युवा भी योगदान दें। उसने कहा- सभी मिलकर संकल्प करते हैं, बात है अभिमान के छत्तीसगढिय़ा स्वाभिमान के।
बहतराई इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के भेंट-मुलाकात युवाओं के साथ कार्यक्रम में सपनों का नया छत्तीसगढ़ कैसा हो ? विषय पर कोरबा जिले से आई युवा कविता शर्मा ने अपनी अभिव्यक्ति की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी के भूमि में मैंने जन्म लिया है। हम सुआ ददरिया आदि नृत्य करते हैं। हम बोरे बासी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का सेवन करते हैं। राज्य में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, महतारी जतन, राम वन गमन पथ के साथ ही साथ अनेक हितकारी योजनाएं संचालित किए जा रहे हैं। जिससे राज्य विकास के पथ में आगे बढ़ रहा है।
सारंगढ़ से आई युवती ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सर्व-धर्म, समभाव की भावना है। जो राष्ट्रीय एकता की महत्वपूर्ण कड़ी है। यहां अनेक महान विभूतियों ने जन्म लिया। छत्तीसगढ़ की संस्कृति को कका ने आगे बढ़ाया है। हम युवा छत्तीसगढ़ की आन-बान-शान हैं। हम युवा छत्तीसगढ़ का गौरव हैं। मुख्यमंत्री ने विभिन्न वर्गों के विकास के लिए बहुत सी योजनाएं बनाई हैं। हम युवाओं को इनके दिखाए रास्तों में चलना है, सपनों का राज्य बनाना है। साइंस कॉलेज बिलासपुर के छात्र प्रियांशु दुबे ने राज्य के विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा लाए गए योजनाओं को अपने भाषण के माध्यम से प्रस्तुत किया। युवा नवा छत्तीसगढ़ गढ़ सकते हैं। छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू राज्य को विश्व में अलग पहचान देती है। छत्तीसगढ़ के युवा हर समस्या का हल ढूंढ निकालेंगे। मुख्यमंत्री का साथ युवाओं के साथ है।

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छह हजार 31 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश करेंगे सीएम बघेल https://samacharpacheesa.com/?p=7417 Wed, 19 Jul 2023 07:49:43 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7417 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का समापन आज बुधवार को हो सकता है। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी कार्यसूची के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छह हजार 31 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश करेंगे। इस पर चर्चा के लिए तीन घंटे का समय तय किया गया है। इसी तरह भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव को भी कार्यसूची में शामिल किया गया है। उच्च प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो विधेयक और अन्य शासकीय कार्य पूरा करने के बाद सदन की कार्यवाही समाप्त हो सकती है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में मानसून सत्र दो दिन में खत्म हो गया था।

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बेरोजगारों को भत्ता और रोजगार https://samacharpacheesa.com/?p=5969 Tue, 31 Jan 2023 05:54:20 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5969 गणतंत्र दिवस के अवसर पर जगदलपुर में परेड की सलामी लेने के बाद जनता के नाम अपने संदेश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के बेरोजगारों युवकों को महंगाई भत्ता देने की घोषणा की। इधर मुख्यमंत्री ने अपनी घोषणा में 2 बातों का उल्लेख नहीं किया है। एक प्रत्येक माह बेरोजगारों को भत्ते के रुप में कितनी राशि दी जाएगी और दूसरी बात कि कितने बेरोजगारों को यह भत्ता दिया जाएगा। प्रदेश भर में जगह-जगह होर्डिंग लगे है जिसमें लिखा है कि प्रदेश में बेरोजगारी दर शून्य के करीब है। यह बात सही भी है क्योंकि एक निजी संस्था ने पिछले महीने प्रदेश में बेरोजगारी दर को 0.1 प्रतिशत बताया था। जबकि जिला रोजगार केंद्रों में जो पंजी में दर्ज रोजगार चाहने वालों की संख्या 2021-22 में लगभग 19 लाख थी। अब इस मामले में विरोधाभास है कि यह लगभग 19 लाख रोजगार चाहने वाले युवा कौन है? अगर ये बेरोजगार है तो प्रदेश में 18 वर्ष से 35 वर्ष की आयु के युवा लगभग 35 प्रतिशत के आधार पर लगभग 1 करोड़ होंगे। अब इन 1 करोड़ में लगभग 19 लाख रोजगार के इच्छुक है तो बेरोजगारी दर प्रदेश की 19 प्रतिशत हो जाती है। या तो सीएमआई का बेरोजगारी नापने की प्रक्रिया और इकाई गलत है या तो फिर प्रदेश के रोजगार केंद्रों में दर्ज रोजगार चाहने वालों की संख्या में कुछ गड़बड़ी है। अब सवाल यह उठता है कि अगर सरकार ढाई हजार रुपए प्रतिमाह की दर से युवाओं को देगी तो साल में प्रत्येक युवा 30 हजार बनते है। और 19 लाख युवाओं को साल में 30 हजार रुपए देने पड़े तो सरकार के खजाने पर 5 हजार 700 करोड़ रुपए का भार आएगा। अब मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी इस बात की मांग कर रही है कि सरकार को पिछले 4 साल के हिसाब से बेरोजगारों को भत्ता देना चाहिए। यह बात इसलिए हो रही है क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने चुनाव के पहले अपने संकल्प पत्र में यह वादा किया था कि अगर कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो 10 लाख बेरोजगार युवाओं को ढाई हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। हालांकि कांग्रेस पार्टी के नेता पिछले कुछ माह से यह कहते सुने जा रहे है कि संकल्प पत्र में बेरोजगार युवकों को ढाई हजार रुपए देने का वादा नहीं किया गया था। इसका मतलब है कि अब अगले कुछ महीने तक बेरोजगारी भत्ते को लेकर जमकर राजनीति होगी। चुनाव को देखते हुए सरकार ने घोषणा तो कर दी लेकिन इस घोषणा के बाद कितने युवा भत्ते के लिए आवेदन करते है और कितनों को यह भत्ता मिलेगा यह देखने वाली बात होगी। उम्मीद रखने वाला बेरोजगार युवक को अगर भत्ता नहीं मिला, तो वह नरााज होगा।

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मिलेट्स की ओर लौटना होगा https://samacharpacheesa.com/?p=5604 Tue, 03 Jan 2023 06:25:38 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5604 पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब दिल्ली में मिले तो मोदी जी ने बघेल जी से यही अनुरोध किया कि आप छत्तीसगढ़ में मिलेट (यानी मोटे अनाज) को प्रोत्साहित करें। मुख्यमंत्री ने भी इस बात के लिए सहमति जाहिर की। और अब लग रहा है कि छत्तीसगढ़ में धीरे धीरे मिलेट-संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। बहुत समय पहले इस शब्द से मेरा परिचय नहीं था। हालांकि बाजरा, वार, रागी, कोदो, कुटकी आदि मोटे अनाज को मैं जानता था। लेकिन इन्हें ही मिलेट कहा जाता है, बाद में पता चला। दुर्भाग्य की बात है कि इस तथाकथित नए दौर में मोटे अनाजों के प्रति हमारे समाज में उदासीनता ही नजऱ आती है। आज चमक-दमक का जमाना है। अनाज के जितने भी प्रकार हैं,यहां तक कि खाने के जो तेल आदि हैं, उनको भी रिफाइंड करके बाजार में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति पनप गई है। ये देखने में आकर्षक होते हैं लेकिन इनके गुणवत्ता बेहद न्यून होती है। इन सब चीजों का मीडिया के माध्यम से ऐसा प्रचार होता है कि लोग बरबस आकर्षित हो जाते हैं। मोटे अनाज की लोग उपेक्षा करते रहे हैं, जबकि हमारे बुजुर्ग मोटे अनाज ही खाते रहे हैं। ये अनाज ज्यादा शुद्ध होते हैं। पौष्टिक भी होते हैं। यह अच्छी बात है कि अब हमारे प्रधानमंत्री ने भी उस ओर ध्यान आकृष्ट किया है। संयुक्त राष्ट्र संघ को भी भारत ने ही प्रस्ताव दिया था कि 2023 को विश्व मिलेट्स वर्षके रूप में घोषित करें। भारत के इस प्रस्ताव को तमाम देशों ने समर्थन भी दिया और बाद में संयुक्त राष्ट्र ने घोषित किया कि 2023 को हम मिलेट वर्ष के रूप में मनाएंगे। लगे हाथ मैं यही कहना चाहता हूँ कि भारत के बाद को अब पूरी दुनिया सुन रही है। भारत सरकार ने ही जब कुछ वर्ष पहले कहा कि 21 मई को योग दिवस मनाना चाहिए तो संयुक्त राष्ट्र ने उस पर अपनी मुहर लगाई और आज पूरी दुनिया में योग दिवस मनाया जाता है। इसी कड़ी में भारत के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र ने स्वीकार किया और यह पूरा वर्ष मिलेट वर्ष होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत में मोटे अनाज के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ेगा और सब अपने खानपान में मिलेट्स को आत्मसात करेंगे। फिलहाल मंदिर हसौद के पास डिवाइन अर्थ नामक एक ऐसा केंद्र विकसित हो रहा है जिसे लोग मिलेट कैफे के रूप में जानने लगे हैं। यहां मिट्टी के बर्तन में खाना बनता है और तरह-तरह के व्यंजन बाजरा, वार, रागी,कोदो, कुटकी आदि के ही बनाकर परोसे जाते हैं। साहीवाल, गीर और खारपारकर जैसे उन्नत नस्ल ववालागोवंश भी यहां है। उनके उत्पाद लोगों तक पहुंचाए जाते हैं। रायगढ़ में भी इसी तरह का प्रयास शुरू हुआ है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य में सरकारी सहयोग से पूरे छत्तीसगढ़ में इस का प्रचार- प्रसार होगा । इससे किसानों को भी फायदा होगा। मिलेट्स की विशेषता यह है कि ये कम पानी में जैविक तरीक़े से उगाए जा सकते हैं। जमीन उर्वरक होनी चाहिए। मिलेट्स स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। कह सकते हैं कि ऐसे जैविक अनाज के सेवन करके हम अपने शरीर को आयरन, कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन आदि तत्वों से परिपूर्ण हो सकते हैं। निसन्देह ये एक तरह से सुपरफूड हैं। आज जब पिज़्ज़ा, बर्गर, चाऊमीन और स्पाइसी चीजों की ओर युवा पीढ़ी का यादा रुझान है, तब अगर पूरी दुनिया मोटे अनाज की ओर लौटने का संकल्प कर रही है, तो इसका मतलब यह है कि आने वाला समय न केवल स्वस्थ भारत का होगा,वरन स्वस्थ दुनिया का भी होगा। मोटा अनाज खाने के कारण हम सबका स्वास्थ्य ठीक रहता है। शरीर का वजन भी नहीं बढ़ता। जैसा कि मैंने पढ़ा है, अगर बाजरे के आटे का हमसब नियमित उपयोग करें तो हमारा स्वास्थ्य ठीक-ठाक रहेगा। ये अनाज रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करते हैं। हमारी पाचन प्रणाली को दुरुस्त करते हैं। हमारे लीवर, किडनी सब ठीक-ठाक काम करते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हम मिलेट्स की दुनिया में लौटे और जितना हो अधिक हो सके प्रकृति के नजदीक जाएं। जैविक उत्पादों को महत्व प्रदान करें। हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथों में भी इस तरह के अनाज के महत्व को बताया गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि 2023 मिलेट वर्ष तो होगा ही और पूरा देश मोटे अनाज के महत्व को समझेगा और अपने सेहत को सुधारने की दिशा में आगे बढ़ेगा। देश की सभी राय सरकारें इस ओर ध्यान देंगी।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन फिर मुरली बजाएंगे या …? https://samacharpacheesa.com/?p=5196 Wed, 14 Dec 2022 07:12:48 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5196 हिमांचल प्रदेश के चुनाव निपटने के पहले एक चर्चा हमारे प्रदेश में चली थी कि क्या मोहन मरकाम प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाएंगे या रहेंगें ? इसी बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हिमांचल प्रदेश में चुनाव ऑब्ज़र्वर के रूप में नियुक्त कर दिया गया वे वहां व्यस्त हो गए। छतीसगढ़ के इस भावी परिवर्तन की चर्चा लगभग बंद सी हो गई। संगठन में बदलाव का इंतजार कर रहे लोगों ने समझ लिया कि हिमांचल प्रदेश के परिणाम आने के बाद ही अब कुछ संभव है। जैसे ही हिमांचल के परिणाम आये और वहां कांग्रेस की सरकार बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ वैसे ही चर्चा चल पड़ी कि अब प्रदेश संगठन में बदलाव हो सकता है। हिमांचल में भूपेश बघेल के छतीसगढ़ मॉडल के प्रचार ने जादू कर दिया। राजनीति में कद व पद का बड़ा महत्व माना जाता है। पद तो पहले से ही बड़ा है ही, भूपेश बघेल को हिमांचल के चुनाव की सफलता ने और वहां मुख्यमंत्री के चयन करवाने में उनकी भूमि का के चलते उनका राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर में कद भी और बढ़ गया है, यह मानने वालों की बड़ी संख्या है। छतीसगढ़ में जीत के बाद 2018 में कौन बनेगा मुख्यमंत्री की कवायद में बाजी मारने वाले भूपेश बघेल ने फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। प्रदेश के बड़े बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए वे काफी आगे बढ़ गए। अनेक उतार चढ़ाव देखते हुए वे आज राष्ट्र व राज्य में अच्छी प्रतिष्ठा पा चुके हैं। आज की स्थिति में छतीसगढ़ का कोई भी निर्णय भूपेश बघेल को छोड़ कर करने की बात असंभव सी लगने लगी है। हर मायनों व प्रत्येक फ्रेम में कांग्रेस हाई कमान की नजर में भूपेश बघेल ने अपना अग्रणी स्थान बना लिया है। अब उन्हें पहले की तरह हाई कमान के पास तक पहुंचने के लिए किसी बिचौलिए या माध्यम की कोई जरूरत नहीं रहती है। वे जो बात हाई कमान तक पहुंचना चाहते हैं। जिस भाषा व मायनों में पहुंचना चाहते हैं, स्वयं पहुंचा सकते हैं। इस बदली राजनैतिक परिस्थितियों में प्रदेश का निर्णय एकतरफा हाई कमान कर ले, यह लगता नहीं है। यह भी सच है कि इन दिनों में मोहन मरकाम ने भी हाई कमान से अपनी नजदीकियां कायम की हैं। जिस तरह भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी ने उनको महत्व दिया वह भी बड़ा महत्वपूर्ण है। प्रदेश अध्यक्ष आदिवासी समाज से हैं। उन्हें हटाया गया तो आदिवासी समाज का सदस्य ही अध्यक्ष बनेगा यह राजनैतिक विश्लेषकों की राय है। मरकाम ने प्रदेश अध्यक्ष रहते बहुत काम किया है। खास कर बस्तर क्षेत्र में माहौल बनाने का काम किया है, मेहनत की है। यह माना जा रहा है कि इन बातों को भी प्रदेश अध्यक्ष का चयन करते समय विचार में रखना होगा। एक बात और कि दोनों दलों की प्रारम्भिक चुनावी कवायद देख कर यह लगभग दिखाई देने लगा है कि आने वाले चुनाव में ओबीसी व आदिवासी वर्ग पर दलों का मुख्य लक्ष्य केंद्रित होगा। भाजपा ने दो बड़े पदों पर प्रदेश में संबसे अधिक जनसंख्या होने के आधार पर ओबीसी कार्ड खेला है। दोनों पदों पर अरुण साव व नारायण चन्देल के रूप में ओबीसी नेताओं को तवज्जो दी है। दोनों ने मेहनत भी करना शुरू कर दिया है। अब कांग्रेस में उम्मीद की जा रही है कि संगठन में बदलाव होगा। यह भी साफ दिखाई दे रहा है कि किसी भी नियुक्ति के निर्णय में अबकी बार भूपेश बघेल की मर्जी का सबसे बड़ा रोल रहेगा। हाई कमान भी चुनावी वर्ष के पूर्व कोई जोखिम नहीं उठाना चाहेगी। दोनों ही बातें अपनी अपनी जगह प्रभाव डालेंगी। देखने वाली बात होगी कि मोहन मरकाम ही रिपीट होते है या भूपेश बघेल की पसंद का कोई नेता इस पद पर काबिज होगा। चुनावी टिकट वितरण के दौर में प्रदेश अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके मद्दे नजर मुख्य मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष का तालमेल बहुत महत्वपूर्ण तथ्य होता है। मुख्यमंत्री कभी नहीं चाहेंगे कि प्रदेश अध्यक्ष ऐसा हो जिसके बीच तालमेल का हो।

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