मोदी सरकार – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 19 Sep 2023 09:22:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए एक रुपया भी नहीं देती मोदी सरकार – रविंद्र चौबे https://samacharpacheesa.com/?p=8054 Tue, 19 Sep 2023 09:22:37 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8054 बेमेतरा। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने दावा किया कि पूरे हिंदुस्तान में शासकीय रूप से धान की खरीदी सिर्फ छत्तीसगढ़ में की जाती है। प्रदेश में सरकार एजेंसी बनाकर किसानों का धान खरीदती है।
चौबे ने कहा कि पंजाब में भी धान खरीदी होती है, लेकिन मिडिल मैन के जरिए वहां धान की खरीदी होती है। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ना सिर्फ खुद किसानों से धान खरीदती है बल्कि राजीव गांधी न्याय योजना के अंतर्गत प्रति एकड़ 9 हजार रुपये भी किसानों को देती है। इसे जोड़ लिया जाए तो किसानों को एमएसपी के अलावा इनपुट सब्सिडी की जो राशि छत्तीसगढ़ में मिलती है उतनी पूरे देश में कहीं नहीं मिलती।
रविन्द्र चौबे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार धान खरीदी के लिए केंद्र सरकार से 1 रुपया भी नहीं लेती है। यदि केंद्र की सरकार छत्तीसगढ़ सरकार को धान खरीदी के लिए पैसे देती तो प्रदेश सरकार बैंकों से कर्ज ही क्यों लेती?
रविंद्र चौबे ने कहा हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि पिछले वर्ष के चावल जमा की राशि 6 हजार करोड़ रुपये लेना बकाया है। कोयले की रॉयल्टी, माइनिंग का शेष, जीएसटी की अधूरी राशि इन सभी को जोड़कर केंद्र सरकार की जो छत्तीसगढ़ सरकार को देय राशि है वो 36 हजार करोड़ से ज्यादा है। हमारी खनिज की जो राशि केंद्र को जाती है उस राशि को पॉपुलेशन के हिसाब से केंद्र सरकार दे दें। केंद्र आखिर वह राशि नहीं दे रही, इसीलिए प्रश्न चिन्ह लगता है।

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यूपीए से मोदी सरकार ने तीन गुना ज्यादा छत्तीसगढ़ को मनरेगा के तहत दिए फंड https://samacharpacheesa.com/?p=8034 Mon, 18 Sep 2023 09:58:17 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8034 रायपुर। केंद्र की मोदी सरकार दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगारपरक योजना मनरेगा पर पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल की तुलना में छत्तीसगढ़ को हर साल ज्यादा फंड दे रही है, जिससे रोजगार भी पहले से ज्यादा मिल रहा है। प्रदेश के कांग्रेस नेता केंद्र सरकार पर छत्तीसगढ़ के साथ भेदभाव करने और मनरेगा की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हैं। जबकि आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ को यूपीए सरकार की तुलना में मोदी गर्वमेंट से तीन गुना ज्यादा फंड दिए।
वर्ष 2004-05 में जब केंद्र में यूपीए यानि मनमोहन सिंह की सरकार थीं। इस वक्त 2007-08 में छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार थी, तब केंद्र से छत्तीसगढ़ को मनरेगा के तहत महज 1161 करोड़ रुपए मिले थे। एक साल बाद 2008-09 में केंद्र ने छत्तीसगढ़ को इस योजना के लिए ज्यादा फंड दिए, लेकिन अगले साल इसकी धनराशि आधी कर दी गई और 2009-10 में महज 814 करोड़ रुपए मिले। लेकिन 2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आ गई। फिर मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ में मनरेगा का बजट बढ़ाना शुरू कर दिया, जिससे रोजगार भी बढऩा शुरू हुआ और प्रदेश से पलायन भी कम हुए।
अब तीन गुना ज्यादा मिल रहे पैसे : आंकड़े बता दें कि छत्तीसगढ़ की सत्ता में बीजेपी हो या कांग्रेस केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद लगातार इस योजना की फंडिंग में बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ को 1505.70 करोड़ रुपए दिए थे। जबकि 2021-22 में 4031. 22 करोड़ रुपए दिए। यह योजना गरीबों के लिए मददगार साबित हो रही है। गांव में ही रोजगार मिलना गरीब मजदूरों को संजीवनी मिलना जैसा है। बता दें कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना देश भर के ग्रामीण परिवार को हर वित्तीय वर्ष में 100 दिनों का वेतन आधारित रोजगार प्रदान करती है। छत्तीसगढ़ के मनरेगा मजदूरी को 221 रुपए की दर से वर्तमान में भुगतान हो रहा है।
यूपीए और मोदी सरकार द्वारा छग को मनरेगा के तहत जारी फंड
वर्ष जारी फंड (करोड़ रुपए)
2007-2008 1161
2008-2009 1632
2009-10 814
2010-11 …..
2011-12 1638
2012-13 ……..
2013-14 1446
2014-15 1505.70
2015-16 1063.41
2016-17 2231.93
2017-18 2898.85
2018-19 3082.93
2019-20 2792.40
2020-21 4144.19
2021-22 4031.22

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फिर सक्रिय हैं एंटी इंडिया लॉबी https://samacharpacheesa.com/?p=7900 Tue, 29 Aug 2023 06:52:15 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7900 भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हिन्द का डंका बज रहा है। चंद्रयान चांद के साउथ पोल पर पहुंच गया। लेकिन एंटी इंडिया लॉबी और मोदी सरकार से घृणा करने वाले लोग फिर बेचैन हो उठे हैं। भारत के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने वाली एक खबर सामने आई। खबर ये है कि हिन्दुस्तान के फाइनेंशियल सेक्टर पर दूसरा सर्जिकल स्ट्राइक होने वाला है। हिंडनबर्ग जैसी फिर कोई रिपोर्ट आने वाली है, जिससे स्टॉक मार्केट से लेकर कॉरपोरेट हाहाकार मच सकता है। ये रिपोर्ट कहां से आ रही है और कौन इसे ला रहा है तफ्सील से आपको इस रिपोर्ट में बताएंगे। एक नाम जो पिछले कुछ समय पहले चर्चा में खूब रहा, वो नाम जॉर्ज सोरोस का है। आपमें से कई लोगों ने तो इनका नाम इससे पहले तक ज्यादा नहीं सुना होगा। ये अमेरिका के ऐसे बिजनेसमैन हैं जो पारंपरिक रूप से मोदी सरकार के विरोधी हैं। यानी उनका काम मोदी का विरोध करना है। अब खबर है कि भारत के खिलाफ ये साजिश 82 साल के बूढ़े जॉर्ज सोरोस द्वारा रचा जा रहा है। लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष रह गए हैं। वहीं जी20 समिट और विदेशी मेहमानों के आगमन में करीब हफ्ते भर का समय शेष है। ऐसे में अब जॉर्ज सोरोस द्वारा समर्थित समूह एक और रिपोर्ट जारी करने की योजना बना रहा है जिसे ‘हिंडनबर्ग 2.0’ कहा जा रहा है। आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी-संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट) देश के कुछ औद्योगिक घरानों के बारे में ‘कुछ खुलासाÓ कर सकता है। इस संगठन को जॉर्ज सोरोस और रॉकफेलर ब्रदर्स फंड जैसी इकाइयां वित्तपोषित करती हैं। मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने कहा कि स्वयं को एक खोजी रिपोर्टिंग मंच कहने वाला ओसीसीआरपी औद्योगिक घराने के बारे में रिपोर्ट या लेखों की एक श्रृंखला प्रकाशित कर सकता है। इसका गठन यूरोप, अफ्रीका, एशिया और लातिनी अमेरिका में फैले 24 गैर-लाभकारी जांच केंद्रों ने किया है। हिंडनबर्ग रिसर्च की इस साल 24 जनवरी की रिपोर्ट में अडाणी समूह पर ऑडिट में धोखाधड़ी, शेयर मूल्य में गड़बड़ी करने और कर चोरों के पनाहगाह क्षेत्रों के अनुचित उपयोग का आरोप लगाया गया था। इससे समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। हालांकि अडाणी समूह ने सभी आरोपों को आधारहीन बताते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया था। सेबी 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दे। मई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त छह सदस्यीय विशेष समिति ने कहा था कि अडानी ग्रुप के शेयरों पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट के जारी होने से संदिग्ध ट्रेडिंग हुई थी।

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सरकार नें बदला नेहरू मेमोरियल का नाम https://samacharpacheesa.com/?p=7834 Thu, 17 Aug 2023 07:07:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7834 देश में स्थानों, स्मारकों और भवनों के नाम पर एक बार फिर सियासत शुरू हो गई है। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल का नाम बदल दिया है। अब नेहरू मेमोरियल को पीएम मेमोरियल के नाम से जाना जाएगा। नाम बदलने पर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी पार्टी ने मोदी सरकार पर नेहरू की विरासत को नष्ट करने का आरोप लगाया है। एडविन लुटियंस की इंपीरियल कैपिटल का हिस्सा रहा तीन मूर्ति भवन अंग्रेजी शासन में भारत के कमांडर इन चीफ का आधिकारिक आवास था। ब्रिटिश भारत के अंतिम कमांडर इन चीफ के जाने के बाद 1948 में तीन मूर्ति भवन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का आधिकारिक आवास बन गया। पंडित नेहरू 16 साल तक इस घर में रहे और यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद इस तीन मूर्ति भवन को पंडित नेहरू की याद में उन्हें समर्पित कर दिया गया और इसे पंडित नेहरू म्यूजियम एंड मेमोरियल के नाम से जाना जाने लगा। अब केंद्र सरकार ने इसका नाम नेहरू मेमोरियल से बदलकर पीएम म्यूजियम एंड सोसाइटी कर दिया है। वर्तमान में यहां व्याख्यान और सेमिनार नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं और विद्वानों के विचार-विमर्श प्रकाशित होते हैं। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र के नेहरू मेमोरियल के नाम बदलने वाले फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव और पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने कहा, एक प्रतिष्ठित संस्थान को एक नया नाम मिला है। विश्वभर में प्रसिद्ध नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी अब प्राइम मिनिस्टर्स मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के नाम से जाना जाएगा। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा नेहरू और उनकी विरासत को नकारना, बदनाम और नष्ट करना है। वह एन शब्द हटाकर उसके स्थान पर पी शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। जयराम ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और उदारवादी नींव रखने में नेहरू की योगदान को हम नहीं भूलने देंगे। नेहरू ने देश की आजादी के लिए अहम योगदान दिया है। तमाम आरोपों के बीच पीएमएमएल के कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश का बयान आया है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी को महसूस हुआ कि देश में पीएम का एक संग्रहालय होना चाहिए। फिर सवाल उठा कि यह कहां बनाया जा सकता है। इस पर फैसला लिया गया कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सही जगह है। साल 2016 में पीएम मोदी ने एक प्रस्ताव रखा था कि तीन मूर्ति परिसर में देश के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। उसी साल 25 नवंबर को हृरूरूरु की 162वीं बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बीते साल 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री संग्रहालय को जनता के लिए खोल दिया गया था।

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केसी वेणुगोपाल ने विपक्षी एकता पर दिया जोर https://samacharpacheesa.com/?p=6345 Mon, 20 Feb 2023 08:08:38 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6345 नईदिल्ली। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोमवार को विपक्षी एकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी सरकार से अकेले नहीं लड़ सकती। दरअसल, 2024 चुनाव को लेकर अब राजनीतिक दल अपनी अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। 2024 में भाजपा पहले ही दावा कर चुकी है कि उसके प्रधानमंत्री पद के चेहरा नरेंद्र मोदी ही होंगे। लेकिन विपक्ष की ओर से चेहरा कौन होगा, इसको लेकर अभी भी सब के अलग-अलग दावे हैं। वहीं, केसी वेणुगोपाल से भारत जोड़ो यात्रा में कुछ विपक्षी दलों के नहीं आने पर सवाल पूछा गया था। इसी सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस अकेले इस सरकार से नहीं लड़ सकती।
केसी वेणुगोपाल ने अपने बयान में कहा कि विपक्षी एकता के लिए हमारा प्रयास बहुत ईमानदार है। उन्होंने कहा कि भले ही हमारे पास इतने सारे अनुभव हैं जो हमें चोट पहुँचाते हैं, पर हम इस तानाशाही सरकार को हटाने के लिए सब कुछ भूलने को तैयार हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हम पूरी तरह से विपक्ष में एकता के लिए हैं। केसी वेणुगोपाल ने आगे कहा कि कांग्रेस भी विपक्षी एकता को लेकर उतनी ही चिंतित है। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कई मौकों पर ठीक ही कहा है कि वर्तमान स्थिति में, कांग्रेस अकेले इस सरकार से नहीं लड़ सकती।
पार्टी महासचिव ने कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर लड़ेगी लेकिन हमें इस अलोकतांत्रिक, तानाशाही सरकार के खिलाफ लडऩे के लिए विपक्षी एकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से वे मीडिया समेत एजेंसियों को मिस कर रहे हैं। इसलिए इन ताकतों से लडऩे के लिए विपक्षी एकता की जरूरत है। पिछले संसद सत्र में, हमारे राष्ट्रपति ने अडानी मुद्दे के खिलाफ सभी समान विचारधारा वाले दलों को बुलाने और संसद में एक आवाज उठाने की पहल की थी। हम मोटे तौर पर सोच रहे हैं कि हमें बीजेपी के खिलाफ जाना चाहिए और बीजेपी विरोधी वोटों को विभाजित करने का मौका नहीं देना चाहिए।

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नोटबंदी को सुप्रीम कोर्ट ने ‘सही फैसला’ बताकर मोदी सरकार को दी बड़ी राहत https://samacharpacheesa.com/?p=5585 Mon, 02 Jan 2023 10:21:33 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5585  नईदिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने साल 2016 में 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोटों को बंद करने संबंधी सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं को खारिज करते हुए नोटबंदी के फैसले को सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि सरकार का फैसला एकदम सही था। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति एस.ए. नजीर की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि नोटबंदी के दौरान सभी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया। सुप्रीम कोर्ट इस बात से भी संतुष्ट नजर आया कि नोटबंदी को लेकर सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच छह महीने तक बातचीत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी से पहले केंद्र और आरबीआई के बीच सलाह-मशविरा हुआ था और इस तरह के फैसले को लाने के लिए एक उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।
देखा जाये तो सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को नोटबंदी मामले में पूरी तरह क्लीन चिट देते हुए बड़ी राहत प्रदान की है। अभी तक विपक्ष की ओर से नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार को घेरा जाता था और आरोप लगाया जाता था कि नोटबंदी कर मोदी सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस बात से सहमत हुआ कि आतंकवाद के वित्त पोषण पर रोक लगाने और काले धन पर कुठाराघात के लिए सरकार का नोटबंदी का फैसला सही था।
हम आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को सात दिसंबर को निर्देश दिया था कि वे सरकार के 2016 में 1000 रुपये और 500 रुपये के नोट को बंद करने के फैसले से संबंधित प्रासंगिक रिकॉर्ड पेश करें। पीठ ने केंद्र के 2016 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, आरबीआई के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदम्बरम तथा श्याम दीवान समेत याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनी थीं और अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
एक हजार और 500 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले को ‘गंभीर रूप से दोषपूर्ण’ बताते हुए चिदंबरम ने दलील दी थी कि केंद्र सरकार कानूनी निविदा से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को अपने दम पर शुरू नहीं कर सकती है और यह केवल आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर किया जा सकता है। वहीं, वर्ष 2016 की नोटबंदी की कवायद पर फिर से विचार करने के सर्वोच्च न्यायालय के प्रयास का विरोध करते हुए सरकार ने कहा था कि अदालत ऐसे मामले का फैसला नहीं कर सकती है, जब ‘बीते वक्त में लौट कर’ कोई ठोस राहत नहीं दी जा सकती है।
हम आपको बता दें कि नोटबंदी और जीएसटी लागू करना मोदी सरकार के बड़े आर्थिक फैसलों में शुमार किये जाते हैं। जब नोटबंदी लागू की गयी थी तब स्वर्गीय अरुण जेटली वित्त मंत्री थे और आरबीआई गवर्नर के रूप में उर्जित पटेल काम संभाल रहे थे। नोटबंदी के बाद सभी बैंकों के बाहर लाइनें लग गयी थीं क्योंकि लोग पुराने नोट जमा कराने और 2000 तथा 500 रुपए के नये नोट निकालना चाहते थे। उस समय से भारत में डिजिटल पेमेंट को जो बढ़ावा मिला यह उसी का परिणाम है कि डिजिटल भुगतान के मामले में आज भारत कई विकसित देशों को भी पीछे छोड़ चुका है।

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भारत-चीन झड़प को लेकर मोदी सरकार पर फिर हमलावर हुए खडग़े https://samacharpacheesa.com/?p=5248 Thu, 15 Dec 2022 08:34:09 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5248 नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीन के अतिक्रमण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अभी भी जारी है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने गुरुवार को मोदी सरकार पर एक बार फिर हमला बोला। खडग़े ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उपहास का अनुसरण करते हुए कहा, ऐसा लगता है कि मोदी सरकार की लाल आंख चीनी चश्मे से ढकी हुई है…क्या हम संसद में चीन के खिलाफ नहीं बोल सकते?
भारत-चीन सीमा मुद्दे पर सरकार पर बहस को रोकने का आरोप लगाने के बाद बुधवार को कांग्रेस और अन्य दलों ने संसद से बहिर्गमन किया। सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और तृणमूल के सांसद लोकसभा से बाहर चले गए और उन दो और जनता दल (यूनाइटेड), तेलुगु देशम पार्टी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना सहित 17 राज्यसभा से बाहर चले गए।
बताते चलें कि 9 दिसंबर को तवांग सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। इसपर के केंद्र सरकार ने कहा था कि भारत ने दृढ़ तरीके से जवाब दिया और चीन को पीछे हटने को मजबूर किया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जून 2020 में गालवान के विपरीत कोई घातक घटना नहीं हुई और भारतीय सैनिकों को कोई गंभीर चोट नहीं आई।

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