राजनीतिक – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Fri, 02 Jun 2023 07:28:04 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 भविष्य की राजनीतिक राह तय करेगा 2023 https://samacharpacheesa.com/?p=7022 Fri, 02 Jun 2023 07:28:03 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7022 नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 2014 में सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने हाल ही में अपने कार्यकाल के नौ साल पूरे किए। भाजपा सरकार के नौ साल की सफलता का इस साल होने वाले 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, ये देखना दिलचस्प होगा। इसके साथ 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव भी भाजपा के कार्यकाल का मूल्यांकन करेंगे। हाल ही में इन 9 राज्यों में से एक राज्य कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और पार्टी प्रमुख ने कई रैलियां की। अंतिम दिनों में तो पार्टी ने अपनी हिंदूवादी छवि को सामने रखकर जय बजरंगबली का नारा तक लगवाया। लेकिन, बात जमी नहीं और भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। 2018 में जिस निर्वाचित कांग्रेस सरकार को भाजपा ने ऑपरेशन लोटस के तहत हासिल किया था, वापस कांग्रेस को सौंपना पड़ी। गौर करने वाली बात है कि पिछले साल उत्तर प्रदेश में पार्टी ने अपनी हिंदू वादी छवि और भगवान श्रीराम के नाम पर सत्ता में वापसी की थी। लेकिन, कर्नाटक में बजरंगबली का नारा लगवाने के बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसका सीधा सा मतलब है, कि अब मतदाता हिंदुत्व की लहर पर सवार नहीं है। केंद्र की जगह राज्य के मुद्दे और वहां की परिस्थितियों और अपनी समस्याओं को देखकर ही वो वोट देता है। प्रधानमंत्री और पार्टी केंद्र में अपने 9 साल के राज्य शासन के दौरान किए गए तमाम कार्यों को जनता तक पहुंचाने में जुटे हैं। लेकिन, इस साल होने वाले 9 राज्यों के चुनाव, जिनमें कर्नाटक का परिणाम आ चुका है और शेष रहे मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय,नागालैंड और मिजोरम के चुनाव होना बाकी है। वहां के चुनाव नतीजे अगले लोकसभा चुनाव के लिए चुनौती बनेंगे या भाजपा का रास्ता साफ करेंगे, ये अभी देखना है। लेकिन, कर्नाटक से हुआ इसका आगाज भाजपा के लिए सुखद नहीं रहा। इससे पहले 2022 के अंत में हुए चुनावों में जहां भारतीय जनता पार्टी को अपने शासित एक राज्य हिमाचल प्रदेश से हाथ धोना पड़ा था। इस साल की शुरुआत में उसने अपने शासित एक राज्य कर्नाटक को भी खो दिया। जिन राज्यों में चुनाव होना है, उनमें छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है, तो तेलंगाना में टीआरएस की सरकार। इन्हीं तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी चुनौती है। यहां शासित सरकारों पर अपना कब्जा करने की। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में भी 2018 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को शिकस्त खानी पड़ी थी। लेकिन, कांग्रेस से बगावत करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के बल पर यहां शिवराज सिंह चौहान दोबारा सत्ता पर काबिज हो गए। कांग्रेसी यहां अपनी सरकार को पुन: हथियाने के लिए जोड़-तोड़ में जुटी है। वह भी उस समय, जब यहां शासित भारतीय जनता पार्टी सरकार में अंदरुनी कलह जोरों पर है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व कैलाश जोशी के पुत्र और सरकार में मंत्री रहे दीपक जोशी का भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल होना और कई भाजपाई नेताओं के पार्टी छोडऩे के कयासों के बीच कांग्रेस, गुटबाजी के बावजूद सरकार में आने को लालायित है। वहीं कर्नाटक के पड़ोसी राज्य तेलंगाना में भी जहां टीआरएस की सरकार है विधानसभा चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावनाएं है।

]]>
लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिशोध की गुंजाईश https://samacharpacheesa.com/?p=5799 Fri, 20 Jan 2023 05:58:09 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5799 संसदीय लोकतंत्र सत्ता परिवर्तन करने की एक मौन क्रांति है। हर पांच साल में चुनाव होते है और जनता सरकार के कामकाज पर जनप्रतिनिधियों की सक्रियता के आधार पर तय करती है कि अगला पांच साल सरकार को दोबारा मौका देना या सत्ता की बागडोर किसी दूसरी पार्टी के हाथों सौंपना है। इस लिहाज से लोकतांत्रिक चुनाव के बाद जो सरकार बनती है उसका ध्यान अगले पांच साल जनता के कल्याण देश-प्रदेश के विकास पर अधिक होगा तो जनता का मन और वोट जीतने में सरलता होती है। राज्य निर्माण के बाद भारतीय जनता पार्टी 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद लगातार 3 बार चुनाव जीतकर सरकार बनाई। जब पहला चुनाव हुआ और उसमें भाजपा को जीत मिली तो यह अजीत जोगी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनमत था। इसके बाद 2008 और 2013 में डॉ रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के समर्थन में जनमत बना जिसके कारण 15 साल लगातार भाजपा को सत्ता सुख मिला। अब 2023 में जो चुनाव होगा उसमें यह निर्णय होगा कि जनता इस सरकार के 5 साल के कार्यकाल से खुश होकर अगली पारी देती है या भारतीय जनता पार्टी को फिर से मौका देगी? इसका मतलब है कि किसी भी सरकार को आगे की सोचकर काम करना चाहिए। लेकिन राजनीति में जो विकृतियां आ रही है उसके कारण पिछली सरकार के दौरान राग-द्वेष से प्रभावित होकर राजनेता और अधिकारियों से बदला लेने की भावना प्रबल हो जाती है। 2018 में भूपेश बघेल सरकार जब सत्ता में आई उसके बाद के 3-4 महीनों में डॉ रमन सरकार के दौरान किए गए कार्यों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच बिठा दी गई। इसी तरह की जांच नागरिक आपूर्ति निगम में भ्रष्टाचार के उजागर होने के लिए बिठायी गई थी। 4 साल बीत गए, जांच समिति की न तो कोई रिपोर्ट आई है और न ही किसी दोषी के खिलाफ कार्रवाई हो पायी है। केवल राजनीतिक बयानबाजी हो रही है और बेसिर-पैर के आरोप लगाए जा रहे है। इधर नान घोटाले को लेकर केंद्रीय एजेंसियां सर्वोच्च न्यायालय में जो तथ्य प्रस्तुत कर रहे है उससे राजनीतिक साजिश की बू आती है। सरकार में रहते हुए जब मुख्यमंत्री और मंत्री किसी भ्रष्टाचार के मामले की बात करते है तो आश्चर्य होता है। जब सत्ता हाथ में तो फिर भ्रष्टाचार की जांच जल्द से जल्द कराकर दोषियों को सजा क्यों नहीं दिलाई जाती? इस तरह जब भूतकाल पर ध्यान ज्यादा होगा और प्रतिशोध की भावना होगी तो इससे संसदीय लोकतंत्र व्यवस्था को ठेस पहुंचेगी।

]]>