राजस्थान – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 10 Aug 2023 06:36:26 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 इधर वसुंधरा और उधर पायलट दरकिनार https://samacharpacheesa.com/?p=7773 Thu, 10 Aug 2023 06:36:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7773 वसुंधरा राजे प्रतीक्षा में हैं और सचिन पायलट शांत। दोनों धुरंधर, दोनों का जनाधार और दोनों ही दमदार। राजस्थान में चुनावी बिसात बिछ गई है, लेकिन फिर भी दोनों अपने अपने दलों में दरकिनार। विधानसभा चुनाव सर पर हैं और सबकी नजर इन्हीं दोनों नेताओं पर है। कांग्रेस में पायलट के रणनीतिक मौन के मायने तलाशे जा रहे हैं, और बीजेपी में राजे की राजनीतिक उम्मीदों के अवसान पर मंथन चल रहा है। जैसा कि साफ दिख रहा है, राजस्थान का विधानसभा चुनाव मोदी बनाम गहलोत होता जा रहा है, और बीजेपी में सभी नेताओं को भरोसा है कि उनकी सरकार हर हाल में बन जाएगी। शायद, इसीलिए बीजेपी की सबसे बड़ी नेता वसुंधरा राजे को कहीं कोई बहुत भाव मिलता नहीं लग रहा, तो कांग्रेस में भी पायलट के पलटवार करते करते तलवार को म्यान में धर देने के बाद लगभग दो महीने से मौन धारण करने से राजनीति में कई तरह की नई संभावनाओं की सुगबुगाहट होने लगी है। बीजेपी में वसुंधरा की अतिरिक्त सक्रियता और कांग्रेस में पायलट की परेशान कर देनेवाली निष्क्रियता राजस्थान की राजनीति को हैरान कर रही है। आलम यह है कि दोनों को अपनी अपनी पार्टियों में कोई खास महत्व नहीं मिल रहा। गहलोत को लग रहा है कि वे चुनाव जीत रहे हैं। इसके विपरीत, कांग्रेस में ही उनका विरोधी खेमा, पायलट समर्थक अपने ही मुख्यमंत्री गहलोत के हर दांव को खोखला बताते हुए पायलट की अगुवाई में चुनाव न होने के कारण कांग्रेस की बहुत बुरी हार का दावा कर रहा है। खुद पायलट भी निष्क्रिय बैठे हैं और आखिर कर क्या कर रहे हैं, कोई नहीं जानता। उधर, बीजेपी के लिए यह केवल विधानसभा का चुनाव नहीं, बल्कि अप्रैल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास भी है। फिलहाल राजस्थान की 25 में से 24 लोकसभा सीटें बीजेपी के खाते में हैं, और एक सीट उसके गठबंधन में हनुमान बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से जीती थी। इनके अलावा, राजस्थान में लगभग 7 से 8 प्रतिशत राजपूत वोटों पर कब्जा करने के लिए बीजेपी में विपक्ष के नेता राजेंद्र राठौड़, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और सांसद दीया कुमारी के अलावा कुछ और राजपूत नेता हैं। लेकिन राजस्थान की जनता इनमें से किसी को गहलोत या वसुंधरा की बराबरी का नेता मानती नहीं। इधर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और उसके इशारे पर प्रदेश नेतृत्व वसुंधरा राजे को किनारे करने में लगे हुए हैं। हाल ही में कांग्रेस सरकार के खिलाफ राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन हुआ, तो उसके प्रचार अभियान में भी वसुंधरा राजे पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स से भी गायब कर दी गईं। माना कि वसुंधरा राजे राजस्थान में बीजेपी की सबसे बड़ी नेता हैं, लेकिन पार्टी आलाकमान को उनकी स्वच्छंदता कतई पसंद नहीं और वसुंधरा को आलाकमान का अंकुश स्वीकार्य नहीं। फिर लगता है कि दोनों ही झुकने को तैयार नहीं।

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राजस्थान सियासत में लाल डायरी की कहानी https://samacharpacheesa.com/?p=7575 Fri, 28 Jul 2023 07:45:59 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7575 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा ने राजस्थान में सियासी हलचल तेज कर दी है। पीएम मोदी ने सार्वजनिक मंच से कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार और विपक्ष के गठबंधन पर जमकर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने एक लाल डायरी का जिक्र किया। कहा जा रहा है कि इस बार का राजस्थान विधानसभा चुनाव इस लाल डायरी के इर्द-गिर्द ही घूमने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘कांग्रेस ने राजस्थान में सरकार चलाने के नाम पर सिर्फ लूट की दुकान चलाई है और झूठ का बाजार चलाया है। झूठ की दुकान का सबसे ताजा प्रोडक्ट है, राजस्थान की ‘लाल डायरी’। कहते हैं इस लाल डायरी में कांग्रेस सरकार के काले कारनामे दर्ज हैं। लोग कह रहे हैं कि ‘लाल डायरी’ के पन्ने खुले तो अच्छे-अच्छे निपट जाएंगे। कांग्रेस के बड़े से बड़े नेताओं की इस लाल डायरी का नाम सुनते ही बोलती बंद हो रही है। ये लोग भले ही मुंह पर ताला लगा लें, लेकिन ये लाल डायरी इस चुनाव में कांग्रेस का डिब्बा गोल करने जा रही है। पिछले शुक्रवार को राजस्थान सरकार के मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेरना शुरू कर दिया। राजस्थान में न्यूनतम आय गारंटी विधेयक 2023 पर चर्चा हो रही थी। इस बीच, कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा पर निशाना साधते हुए मणिपुर हिंसा की तख्तियां लहराने लगे। मंत्री राजेंद्र गुढ़ा भी सदन में मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने अपनी ही सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, सच्चाई ये है कि हम महिलाओं की सुरक्षा में असफल हो गए और राजस्थान में जिस तरह से महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं, ऐसे में हमें मणिपुर की बजाय अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। गुढ़ा के तीखे हमलों से राजस्थान कांग्रेस की सरकार असहज हो गई। आनन-फानन में अशोक गहलोत ने गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया। मंत्री पद से हटाए जाने के बाद गुढ़ा रोते हुए मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा कि मुझे सच बोलने की सजा मिली है। महिलाओं के खिलाफ अपराध में राजस्थान नंबर वन है। मैंने क्या गलत कहा? जनता मेरे साथ रहेगी और मैं उनके लिए काम करता रहूंगा। चाहे वह मुझे कैबिनेट से हटाएं या जेल भेज दें। मैं जब तक जिंदा रहूंगा, बोलता रहूंगा। मैं अशोक गहलोत से इस मुद्दे पर कुछ कहना चाहता था। राज्य में पुलिस भ्रष्ट है। वे लोगों से रिश्वत लेने में व्यस्त हैं। राजेंद्र गुढ़ा ने मीडिया से इसके बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने दावा किया कि इस डायरी में कांग्रेस के नेताओं के काले कारनामे की पूरी जानकारी है। किस तरह से कौन सा नेता अपने ऊपर फिल्में बनवा रहा है? राज्यसभा में कांग्रेस ने विधायकों को क्या-क्या और कैसे दिया? क्रिकेट के चुनाव में अशोक गहलोत ने किस-किसको पैसे दिए? कहां-कहां से वसूली होती है? गुढ़ा के मुताबिक, डायरी का एक हिस्सा कांग्रेस के विधायकों और मंत्रियों ने सदन के अंदर छीन लिया। हालांकि, दूसरा हिस्सा अभी भी गुढ़ा के पास है।

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राष्ट्रीय नेताओं ने बदले वातावरण https://samacharpacheesa.com/?p=7214 Sat, 08 Jul 2023 07:07:35 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7214 भारतीय जनता पार्टी लगातार चुनावी मोड में रहती है। एक चुनाव खत्म हुआ नहीं कि दूसरे की तैयारी शुरू हो जाती है, परिणाम चाहे जो भी हो। अभी कर्नाटक चुनाव में पराजय के इस साल के अंत में चार बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने को है, मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और छत्तीसगढ़। इनमें केवल मध्यप्रदेश में ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, लेकिन पार्टी की तैयारी पूरे जोश से शुरू हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय नेताओं का लगातार आगमन हो रहा है, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के बाद शुक्रवार को प्रधानमंत्री की आमसभा राजधानी रायपुर में हुई। कई घंटे की लगातार बारिश से लगा कि कार्यक्रम में लोग कैसे आएंगे? लेकिन प्रधानमंत्री को देखने और सुनने पार्टी कार्यकर्ता और आम जनों की ऐसी ऐतिहासिक भीड़ जुटी कि भाजपा के नेताओं में नया जोश भर गया। प्रधानमंत्री का रायपुर आना केन्द्र सरकार का अनेक निर्माण कार्यों का उद्घाटन और लोकार्पण करने के लिए भी था। इसके बाद आमसभा में श्री मोदी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। प्रदेश में लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कोई भ्रष्टाचारी बच नहीं पाएगा। उन्होंने अगले चुनाव के लिए नारा भी देकर गए, बदलबो, बदलबो, भ्रष्ट कांग्रेस सरकार ला ए बार बदलबो…। प्रदेश को दो दिन पहले ही गृह मंत्री अमित शाह चुनाव की योजना के संबंध में बैठक करने रायपुर आए थे, उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडवीय भी आए, हालांकि रायपुर एम्स में उनका कार्यक्रम था लेकिन वे गृहमंत्री के साथ भाजपा नेताओं की बैठक में भी रहे। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में भी रहे और उसके बाद यह घोषणा हो गई कि उन्हें केंद्र ने छत्तीसगढ़ में चुनाव का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। अब इस नियुक्ति के बाद प्रदेश में भाजपा के चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इधर कांग्रेस भी पीछे नहीं है। संगठन स्तर पर बूथ स्तर पर बैठकों का दौर जारी है। कुछ दिन पूर्व दिल्ली में संगठन की बैठक हुई जिसमें स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव को प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया है। राज्यपाल ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। अब तक भूपेश बघेल के नेतृत्व में सरकार चल रही थी, अब सिंहदेव के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या अधिकारों का भी बंटवारा हो पाएगा? टी एस सिंहदेव पार्टी से सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद से नाराज चल रहे थे, पार्टी के विधायकों ने उनका कई बार अपमान भी किया। नाराज सिंहदेव ने अपने एक विभाग से इस्तीफा भी दे दिया था। माना जा रहा है कि उनको मना लेने से कांग्रेस के लिए सरगुजा में स्थिति बेहतर होगी। वैसे चुनाव आते आते अभी समीकरण कई बार बदलेंगे। प्रधानमंत्री के प्रवास से उत्साहित पार्टी को अपना संवेग बनाए रखना होगा।

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सचिन पायलट के सब्र का बाँध टूटा है https://samacharpacheesa.com/?p=6743 Thu, 13 Apr 2023 08:14:57 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6743 कांग्रेस ने पिछले साल उदयपुर में चिंतन किया, उसके बाद भारत जोड़ो यात्रा निकाली और इस साल रायपुर में महा अधिवेशन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में आमूल चूल सुधार को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कहीं, लेकिन नतीजा शून्य रहा। कांग्रेस नेताओं में उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक पार्टी छोडऩे की जो होड़ लगी है वह दर्शा रही है कि आजादी की लड़ाई लडऩे वाली यह पार्टी आजादी के अमृत काल में पतन की ओर बढ़ रही है।
दरअसल कांग्रेस को जिस तरीके से चलाया जा रहा है उससे खिन्न होकर सिर्फ अनुभवी और वरिष्ठ नेता ही नहीं बल्कि युवा भी पार्टी छोड़ रहे हैं। जो वरिष्ठ नेता और युवा अभी कांग्रेस में बचे हुए हैं वह पार्टी में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राजस्थान में कांग्रेस ने सचिन पायलट का जो हाल किया है उसको देखकर ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और हिमंत बिस्व सरमा आदि नेता शुक्र मना रहे होंगे कि सही समय पर कांग्रेस छोड़ दी वरना उन्हें भी ऐसे ही अनशन पर बैठना पड़ रहा होता। सचिन पायलट जो मुद्दे उठा रहे हैं वह सही हैं या गलत, इसकी विवेचना की बजाय यह देखना चाहिए कि कांग्रेस में कैसे युवाओं का हक मारा जाता है।
पिछले विधानसभा चुनावों के समय सचिन पायलट राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे जबकि अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर काम कर रहे थे। सचिन पायलट ने तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ जनमत तैयार कर कांग्रेस को जीत दिलाई लेकिन उनका हक मारकर गहलोत को दिल्ली से जयपुर भेजकर मुख्यमंत्री बना दिया गया। सचिन पायलट ने लगातार अपमानित किये जाने के चलते आवाज उठाई तो उन्हें गद्दार और निकम्मा बता दिया गया। उन्हें बार-बार धैर्य रखने के लिए समझाया जाता रहा लेकिन सब्र का बांध एक दिन टूटता ही है। अब राजस्थान में यह जो बाँध टूटा है उससे इस वर्ष होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बह कर सत्ता से बाहर जा सकती है।
वैसे बात सिर्फ राजस्थान तक ही सीमित नहीं है, जिस तरह छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच जंग छिड़ी हुई है वह भी चुनावी वर्ष में कांग्रेस के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है। यही नहीं, कर्नाटक में अपने को सत्ता के करीब देख रही कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद हासिल करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच की वो जंग भी ऐन चुनावों के समय जगजाहिर हो गयी है जिसे कांग्रेस अब तक दबाती आ रही थी। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को समझना होगा कि नेतृत्व की यह शिथिलता कांग्रेस को पूरी तरह ले डूबेगी।

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8 मिनट तक विधानसभा में पुराना बजट पढ़ते रहे गहलोत https://samacharpacheesa.com/?p=6199 Fri, 10 Feb 2023 07:53:02 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6199 जयपुर। राजस्थान में आज अशोक गहलोत सरकार की तरफ से बजट पेश किया गया लेकिन बजट  से ज्यादा अशोर गहलोत की भूल की चर्चा सुर्खियां बनी हुई है। दरअसल, सीएम गहलोत आठ मिनट तक विधानसभआ में पुराना बजट पढ़ते रहे। आखिरकार उन्हें कांग्रेस के मंत्री महेश जोशी ने टोका तो फिर सीएम को अपनी भूल का अहसास हुआ और इसके लिए माफी मांगी। लेकिन राजस्थान सीएम की इस भूल पर अब बीजेपी हमलावर हो गई है। बीजेपी की तरफ से कहा गया कि अगर सीएम इस तरह की बड़ी गलती करते हैं तो राजस्थान के लोगों का क्या होगा?
क्या है पूरा मामला
अशोक गहलोत ने आज विधानसभा में बजट पेश किया। उन्होंने बजट भाषण पढ़ना शुरू किया और यह महसूस करने से पहले कई मिनट तक चले कि वह जो बजट पेश कर रहे हैं वह पुराना है। ये कह जाना कि मैंने कोरोना में कितने लोगों को खाना खिलाया था। कितने लोगों का मुफ्त इलाज किया। फिर उन्होंने कहा कि मैंने मनरेगा की तर्ज पर शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू कर रहा हूं। लेकिन उन्हें तब भी ध्यान नहीं आया कि इस योजना को प्रदेश में लागू किया जा चुका है। लेकिन वो बस पुराने बजट को पढ़ते ही जा रहे थे। फिर गुलाब चंद कटारिया उठे उन्हें टोकने को लेकिन गहलोत ने उन्हें चुप करा दिया। फिर जब अधिकारियों में खलबली मची तो मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कान में जाकर सीएम को पुराना बजट पढ़े जाने की बात बताई। तब फिर अशोक गहलोत ने इसके लिए माफी मांगी। विधानसभा में पुराने बजट का कुछ अंश पढ़ने पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मानव त्रुटि से एक पेज लग गया था, उसी वक्त मैंने सॉरी महसूस किया जब मैंने अपने भाषण को रोका।
आई फिल सॉरी की राजस्थान का क्या होगा
वसुंधरा राजे ने कहा कि जो आपने किया है वो लापरवाही है। कोई भी मुख्यमंत्री इस तरह से बिना अपने बजट को पढ़े और अपने कागज को लेकर नहीं आता है। अगर इस तरह से होगा तो आई फिल सॉरी की राजस्थान का क्या होगा। उन्होंने कहा कि आठ मिनट तक सीएम पुराना बजट पढ़ते रहे। ये इतिहास में पहली बार ऐसी चीज हुई है। हम लोग भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मैं जब सीएम थी तो बजट को दो-दो बार पढ़कर उसे चेक करके लेती थी। जो मुख्यमंत्री अपने इतने बड़े डॉक्यूमेंट को बिना चेक किए पुराने बजट को पढ़ सकता है। आप समझ सकते हो कि उसके राज्य में कितना सुरक्षित है। मुद्दा ये है कि कोई सीएम बिना अपने बजट को पढ़े-देखे आता है। इतने लापरवाही के साथ पेश करने के लिए आए हैं तो आप अपने प्रदेश को किस तरीके से चला रहे हैं। वहीं भाजपा विधायक राजेंद्र राठौर ने कहा कि राजस्थान की विधानसभा आज कलंकित हुई है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जो बजट पढ़ा जाना था उसकी बजाय पूर्व के बजट का पठन करके विधानसभा को अपमानित किया गया।

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को पेश करेंगे बजट https://samacharpacheesa.com/?p=6173 Thu, 09 Feb 2023 06:43:43 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6173 जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को अगले वित्त वर्ष का बजट पेश करेंगे। चुनावी साल में आ रहा बचत, राहत एवं बढ़त थीम वाला यह बजट युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित होगा। गहलोत ने बृहस्पतिवार को ट्वीट किया,‘‘बचत, राहत, बढ़त.. आ रहा है। 10 फरवरी को पूर्वाह्न 11 बजे राजस्थान बजट पेश किया जाएगा।’’ उल्लेखनीय है कि गहलोत के पास वित्त विभाग भी है। उनका यह मौजूदा कार्यकाल का पांचवां एवं अंतिम बजट होगा। राज्य में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। गहलोत कह चुके हैं कि आगामी (वित्त वर्ष 2023-24) बजट युवाओं एवं महिलाओं पर केंद्रित होगा और राज्य के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा। जानकारों के अनुसार इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसा माना जा रहा है कि बजट में सरकार युवाओं और समाज कल्याण के लिए कई नई योजनाएं और कार्यक्रम पेश कर सकती है।
मुख्यमंत्री पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि राज्य सरकार महंगाई के असर को कम करने के लिए गरीब परिवारों को 500 रुपये प्रति सिलेंडर की दर से साल में 12 सिलेंडर देगी। इसके अलावा वह गरीब परिवारों को रसोई किट देने पर विचार करने की बात भी कह चुके हैं। मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि सरकार जल्द ही ओला, उबर, स्विगी जैसे ऐप के माध्यम से काम कर रहे गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा के लिए भी योजना बनाएगी, ताकि कंपनियां इनके साथ मनमानी ना कर सकें। उम्मीद है कि वे इस बारे में बजट में कोई घोषणा कर सकते हैं। स्विगी एवं ओला जैसी ऐप-आधारित सेवाओं के लिए काम करने वालों को गिग वर्कर्स कहा जाता है।

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गहलोत सरकार की लापरवाही से केंद्र का एक हजार करोड़ का बजट लैप्स https://samacharpacheesa.com/?p=5527 Thu, 29 Dec 2022 08:10:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5527 जयपुर। राजस्थान की गहलोत सरकार के बिजली विभाग और डिस्कॉम प्रबंधन की भारी लापरवाही से प्रदेश के 2.5 लाख से ज्यादा घरों में बिजली कनेक्शन के लिए केंद्र सरकार से मिला 1,022 करोड़ रुपये का बजट लैप्स हो गया। बीकानेर के नोखा से बीजेपी विधायक बिहारीलाल विश्नोई की शिकायत के बाद केंद्र सरकार की जांच में इसका खुलासा हुआ है।
विधायक विश्नोई ने कहा, राजस्थान सरकार ने गांव-ढाणी के किसानों के साथ बड़ा धोखा किया है, जबकि बिजली विभाग के मंत्री भंवर सिंह भाटी का कहना है, केंद्र सरकार से दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना सौभाग्य का समय एक साल और बढ़ाने की मांग की गई थी। लेकिन केंद्र ने करीब तीन महीने का ही समय बढ़ाया, जिस कारण काम शुरू नहीं हो सका और योजना का बजट लैप्स हो गया। चुनावी साल से ठीक पहले इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है।
केंद्र सरकार ने 1,022 करोड़ रुपये का बजट दिया…
केंद्र की मोदी सरकार ने गहलोत सरकार को प्रदेश की ढाणियां बिजली कनेक्शन से जोड़ने के लिए पंडित दीनयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना सौभाग्य में 26 जुलाई 2021 को 1,022 करोड़ रुपये का बजट दिया था। साथ ही दिसंबर 2021 तक काम पूरा करने की शर्त रखी गई थी। राजस्थान का बिजली विभाग तय टाइम पीरियड में इस बजट का न तो इस्तेमाल कर पाया और न ही गांव-ढाणियों के घरों को बिजली कनेक्शन से जोड़ पाया।
राजस्थान सरकार की बार-बार मांग पर दो बार समय बढ़ाकर आखिरी बार मार्च महीने तक काम पूरा करने को कहा गया। लेकिन काम शुरू ही नहीं हो सका। इस स्कीम में गांव-ढाणी में किसानों को फ्री बिजली कनेक्शन देने थे। 60 फीसदी पैसा केंद्र सरकार और 40 फीसदी पैसा राज्य सरकार को खर्च करना था। किसान को खुद के खर्च पर बिजली कनेक्शन कराने पर 70 हजार से एक लाख रुपये तक देने पड़ते हैं।
2.50 लाख घर बिजली कनेक्शन से रह गए…
राजस्थान में साल 2018 तक तो इस योजना के तहत घरेलू कनेक्शन जारी किए गए थे। लेकिन इसके बावजूद प्रदेश की ज्यादातर ढाणियों के करीब 2.50 लाख घर बिजली कनेक्शन से होने से बाकी रह गए। बीकानेर के नोखा से बीजेपी विधायक बिहारीलाल विश्नोई ने यह मामला राजस्थान विधानसभा में भी उठाया था। उन्होंने नोखा में आठ हजार लोग कनेक्शन से वंचित बताते हुए केंद्र में भी शिकायत की। शिकायत पर 2020 में केंद्र सरकार की टीम ने सर्वे कर जांच करवाई तो शिकायत सही पाई गई। सर्वे में पता चला कि प्रदेश भर में करीब 2.50 लाख घरों तक बिजली कनेक्शन नहीं पहुंच सका और ये घर आज तक अंधेरे में डूबे हैं।
ये है पूरा मामला…
26 जुलाई 2021 को केंद्र सरकार ने योजना के तहत राजस्थान सरकार को 1,022 करोड़ का बजट अलॉट करके दिया। इस पैसे से बिजली कनेक्शन से बाकी रहीं ढाणियों के वंचित घरों को कनेक्शन देने को कहा। इसमें से 433-433 करोड़ रुपये जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम कंपनियों को और बाकी 156 करोड़ रुपये की राशि जयपुर डिस्कॉम को दी गई। पांच महीने तक तत्कालीन ऊर्जा मंत्री रहे डॉ. बीडी कल्ला ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। दिसंबर 2021 में बिजली विभाग के नए मंत्री बनाए गए भंवर सिंह भाटी के पास जब यह डिपार्टमेंट आया तो टेंडर प्रोसेस चल रहा था। भाटी को जनवरी 2020 में इसके बारे में पता चला, तब केंद्र से समय सीमा बढ़ाने की मांग की गई। मार्च तक टाइम पीरियड भी बढ़ा। लेकिन काम शुरू होता, उससे पहले बजट ही लैप्स हो गया।
बाड़मेर में 46 हजार, बीकानेर में 28 हजार और नोखा में 8500 वंचित…
सीमावर्ती रेगिस्तानी जिले बाड़मेर में 46 हजार लोगों के घर बिजली से महरूम हैं। बीकानेर में 28 हजार घरों को बिजली का इंतजार है। खुद ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी के विधानसभा क्षेत्र कोलायत में 14 हजार लोग बिजली कनेक्शन से वंचित हैं। जबकि बीकानेर के नोखा में 8500 घरों में लाइट नहीं पहुंच सकी है। राजस्थान की तीनों बिजली कंपनियों जोधपुर डिस्कॉम, अजमेर डिस्कॉम और जयपुर डिस्कॉम में वंचित कनेक्शन वाले घर हैं।

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राजस्थान में 500 रुपये के गैस सिलेंडर की घोषणा हुई https://samacharpacheesa.com/?p=5328 Tue, 20 Dec 2022 07:55:12 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5328 नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि राजस्थान में उनकी पार्टी की सरकार ने 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर देने की घोषणा की है और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी ‘महंगाई से त्रस्त जनता की सेवा करनी चाहिए। इन दिनों ‘भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ”500 रुपये में गैस सिलेंडर देने का राजस्थान की कांग्रेस सरकार का बड़ा ऐलान। यह केंद्र सरकार कीमतों के मुकाबले आधे से भी कम है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री जी, ‘मित्रों को मेवा खिलाना बंद कीजिए, महंगाई से त्रस्त जनता की सेवा कीजिए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गत सोमवार को घोषणा की थी कि उनकी सरकार महंगाई की मार झेल रहे गरीब परिवारों को रसोई गैस का सिलेंडर 500 रुपये में उपलब्ध करवाएगी। गहलोत ने कहा था कि सरकार इस बारे में लाभान्वितों की श्रेणी का अध्ययन करवाकर इसे नए वित्त वर्ष यानी एक अप्रैल से लागू करेगी।

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आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी https://samacharpacheesa.com/?p=5193 Wed, 14 Dec 2022 07:08:47 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5193 अगले साल होने वाले राजस्थान और मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों के चुनाव में भाजपा से लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपने-अपने दांव से चुनावी चौसर सजानी शुरू कर दी है। भाजपा जहां गुजरात में मिली एतिहासिक जीत के साथ उत्साह में हैं। वहीं कांग्रेस भी हिमाचल प्रदेश में भाजपा को सत्ता से बाहर कर अपनी जीत पर इतरा रही है। फिलहाल दोनों पार्टियों को मिली अलग-अलग राज्यों की जीत ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में नई ऊर्जा तो भर ही दी है। वहीं दोनों पार्टियां गुजरात और हिमाचल के अपने-अपने फॉर्मूले को अगले साल होने वाले चुनावों में इस्तेमाल करने वाली हैं। अगले साल होने वाले राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के चुनाव भाजपा और कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भाजपा ने गुजरात में जो इतिहास रचा उसके पीछे जबरदस्त रणनीति ही रही है। इसमें सबसे अहम रणनीति का हिस्सा एक चौथाई नेताओं को दोबारा टिकट न देने से लेकर जनता के बीच मोदी के चेहरे और विश्वास का भुनाना शामिल है। पार्टी ने अगले साल होने वाले अलग-अलग राज्यों के चुनावों को लेकर न सिर्फ नीतियां बनानी शुरू कर दी हैं, बल्कि बीते कई महीनों से संगठनात्मक स्तर पर पूरा ढांचा दुरुस्त कर उसका फीडबैक भी लेना शुरू किया जा चुका है। वह कहते हैं कि कर्नाटक और तेलंगाना समेत छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा ने बहुत प्रभावशाली तरीके से चुनाव की रणनीति और तैयारियां शुरू कर दी हैं। वह कहते हैं कि भाजपा को 2018 के चुनावों में कर्नाटक और मध्यप्रदेश में सत्ता तो नहीं मिली थी, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के चलते बाद में भाजपा की सरकार बनी। इसलिए भाजपा को इस बार इन चुनावों में अलग रणनीति के साथ ही मैदान में उतरना होगा। अगले साल होने वाले चुनावों के लिए सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस भी उसी तरीके की रणनीति बना रही है। कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश में जिस तरीके से ‘मुद्दों को आगेÓ करके और लोगों को सीधे तौर पर उनसे जोड़कर के चुनाव लड़ा गया, उसी पैटर्न पर अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव में उतरेंगे। हालांकि अगले साल जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, उसमें छत्तीसगढ़ और राजस्थान में तो कांग्रेस की सरकार भी है। जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार बनी थी। कर्नाटक में भी राजनीतिक समीकरणों के चलते कांग्रेस की सरकार बनी थी।

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