राज्यपाल – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 26 Jul 2023 07:56:54 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के कार्यो की समीक्षा कर रहे राज्यपाल https://samacharpacheesa.com/?p=7544 Wed, 26 Jul 2023 07:56:53 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7544 रायपुर। राज्यपाल और कुलाध्यक्ष श्री विश्वभूषण हरिचंदन आज राज्य के सभी निजी विश्वविद्यालयों और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान कार्य एवं अन्य कार्यो की समीक्षा कर रहे हैं।
बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ परदेसी ,राज्यपाल के सचिव श्री अमृत खलखो, सभी निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित हैं । बैठक प्रात: 11 बजे से राजभवन में शुरू हुई।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की स्थिति, नैक (नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन कौंसिल) द्वारा विश्वविद्यालयों एवं संबंद्ध महाविद्यालयों के मूल्यांकन की स्थिति, ग्रेडिंग और संस्थानों द्वारा नेक ग्रेडिंग सुधारने के लिए किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थाओं के मध्य हुए एम.ओ.यू., अकादमिक सत्र के पालन, परीक्षाओं एवं परिणाम के समय पर जारी करने के संबंध में एवं विश्वविद्यालयों द्वारा कराए गए विशेष अनुसंधान, नवाचार आदि की जानकारी ली जा रही है।

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राज्यपाल की आत्मकथा बैटल नॉट यटओवर का विमोचन; पुस्तक में आपातकाल और राजनीतिक संघर्षों को बया किया https://samacharpacheesa.com/?p=7366 Mon, 17 Jul 2023 09:20:14 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7366 रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन की ओर से लिखित आत्मकथा बैटल नॉट यटओवर का आज नई दिल्ली में विमोचन किया गया। इस बायोग्राफी में राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन के जीवन संघर्षों और उनसे मिली सीख को शेयर किया गया है। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि कहा कि मेरे रिश्तेदारों और शुभचिंतकों की प्रेरणा से यह पुस्तक इस रूप में सामने आई है।
उन्होंने कहा कि वह अपने पिता परशुराम हरिचंदन की देशभक्ति से प्रेरित थे। उन्होंने अन्याय के खिलाफ लडऩा सिखाया। राज्यपाल ने कहा कि वो जिस भी पद पर रहे। उन्होंने हमेशा न्याय के लिए काम किया और अन्याय के खिलाफ मुखर रहे। पुस्तक में उनके राजनीतिक संघर्षों, आपातकाल के दौरान संघर्ष, उस समय ओडिशा के राजनीतिक परिदृश्य, लोगों के कल्याण के लिए मंत्री के रूप में उनकी ओर से की गई पहल को प्रमुखता से बताया गया है। इस अवसर पर राज्यपाल हरिचंदन का स्वागत किया गया।
प्रोफेसर भगवान जय सिंह ने किया अंग्रेजी में अनुवाद
इस सेमिनार को डॉ. विजयानंद सिंह ने संबोधित किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से पुस्तक के बारे में दिए गए संदेश को पढ़ा। सेमिनार को ओडिशा के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश गोपाल गावड़े, राष्ट्रीय कानून आयोग के अध्यक्ष ऋतुराज अवस्थी, ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विश्वनाथ रथ, भगवान जय सिंह, और श्रीनिवास राव ने भी संबोधित किया। मूल रूप से उडिय़ा भाषा में लिखी गई इस आत्मकथा का अंग्रेजी में अनुवाद प्रसिद्ध लेखक और अकादमी पुरस्कार विजेता प्रोफेसर भगवान जय सिंह ने किया है। इस दौरान केन्द्रीय साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवास राव, प्रख्यात लेखक प्रो.डॉ.विजयानंद सिंह समेत कई मशहूर हस्तियां, मीडियाकर्मी और दिल्ली के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इंडियन कॉन्फ्रेंस आफ इंटेलेक्चुअल की से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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मोहन मरकाम ने ली मंत्री पद की शपथ https://samacharpacheesa.com/?p=7320 Fri, 14 Jul 2023 08:06:17 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7320 रायपुर। पीसीसी चीफ के पद से हटाए जाने के बाद कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम को भूपेश सरकार में मंत्री बनाया गया है। विधायक मोहन मरकाम को राजभवन में राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित मंत्री और विधायक मौजूद रहे। गुरुवार को राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम के इस्तीफे के बाद मोहन मरकाम को मंत्री बनाया गया है।
जानिए कौन हैं मरकाम-मोहन मरकाम वर्तमान में कोंडागांव विधायक हैं। उनका जन्म एक किसान परिवार में कोंडागांव जिले के टेंडमुण्डा गांव में 15 सितंबर 1967 को हुआ था। खास बात यह है कि मोहन मरकाम ने शासकीय सेवा के रूप में शिक्षाकर्मी वर्ग 1 और शिक्षाकर्मी वर्ग 2 के रूप में भी काम किया है। उन्होंने कुछ दिनों तक भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी और भारतीय स्टेट बैंक लाइफ में सीनियर एजेंन्सी मैनेजर के रूप में भी काम किया, लेकिन राजनीति में आने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
मोहन मरकाम का सियासी सफर- 1990 में महेंद्र कर्मा की मौजूदगी में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली थी। 1993, 1998, 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी से टिकट की दावेदारी की लेकिन टिकट नहीं मिली। साल 2008 में मरकाम को पहली बार कोंडागांव सीट से चुनावी मैदान में लता उसेंडी के सामने उतारा गया लेकिन उन्हें 2771 वोट से हार का सामना करना पड़ा था। 2013 के चुनाव में पार्टी ने उन्हें फिर चुनावी मैदान में उतारा। इस चुनाव में भी मरकाम हार गए। 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर मोहन मरकाम पर भरोसा जताया और इस बार उन्होंने भाजपा की लता उसेंडी को भारी मतों से हराया।
साल 2018 में बंपर जीत के बाद कांग्रेस ने पीसीसी के तत्कालीन अध्यक्ष भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया, और फिर मोहन मरकाम को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ के मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वह पहले आदिवासी अध्यक्ष बने। संवैधानिक प्रावधान के अनुसार छत्तीसगढ़ के मंत्रिमंडल की सदस्य संख्या मुख्यमंत्री सहित 13 से अधिक नहीं हो सकती। मोहन मरकाम को मिलाकर अब राज्य मंत्रिमंडल की वर्तमान सदस्य संख्या 13 हो गई है।

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विश्वभूषण हरिचंदन ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के रूप में शपथ ली https://samacharpacheesa.com/?p=6429 Thu, 23 Feb 2023 08:41:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6429 रायपुर। विश्वभूषण हरिचंदन ने बृहस्पतिवार को राजधानी रायपुर स्थित राजभवन में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ के नौवें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के रूप में नियुक्त होने से पहले हरिचंदन ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य किया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरूप कुमार गोस्वामी ने हरिचंदन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने अनुसुइया उइके की जगह ली है। उईके को मणिपुर का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता नारायण चंदेल, राज्य के मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाह उपस्थित थे। ओडिशा के निवासी 89 वर्षीय हरिचंदन ओडिशा से पांच बार विधायक और चार बार मंत्री रह चुके हैं। वह 1980 में ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष थे और अन्य तीन कार्यकालों के लिए अध्यक्ष के रूप में चुने गए। वह 1996 से 2009 तक तक ओडिशा राज्य विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता भी रहे।

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एस अब्दुल नजीर को राज्यपाल नियुक्त किये जाने पर भिड़े भाजपा और कांग्रेस https://samacharpacheesa.com/?p=6248 Mon, 13 Feb 2023 06:59:37 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6248 नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस अब्दुल नजीर को राज्यपाल नियुक्त किये जाने को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने सामने है। कांग्रेस ने इस तरह की नियुक्तियों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की और इसके खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिवंगत नेता अरूण जेटली की टिप्पणियों का जिक्र किया। साथ ही, इस कदम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए एक ”गंभीर खतरा करार दिया। वहीं, भाजपा ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियों के उदाहरण अतीत में भी देखने को मिले हैं और संविधान द्वारा इस पर पाबंदी नहीं लगायी है।
आपको बता दें कि सरकार ने रविवार को छह नये चेहरों को राज्यपाल नियुक्त किया, जिनमें नजीर भी शामिल हैं। वह राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में 2019 में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा रहे थे। नजीर, राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या भूमि विवाद, ‘तीन तलाक और ‘निजता के अधिकार को मूल अधिकार घोषित करने सहित कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाने वाली पीठ में शामिल रहे थे। उल्लेखनीय है कि सरकार ने सात राज्यों में राज्यपाल के पदों पर फेरबदल भी किया है।
जयराम रमेश ने ट्विटर पर क्या लिखा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्विटर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली का एक वीडियो संलग्न (टैग) किया, जिसमें भाजपा के दिवंगत नेता को 2012 में यह कहते सुना जा सकता है कि ”सेवानिवृत्ति से पूर्व के फैसले सेवानिवृत्ति के बाद पद पाने की आकांक्षा से प्रभावित होते हैं। रमेश ने वीडियो के साथ किये गये ट्वीट में कहा, ”इस बारे में पर्याप्त सबूत पिछले तीन-चार वर्षों में निश्चित रूप से मिला है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा
नजीर की नियुक्ति के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ”आपके(भाजपा के) एक कद्दावर (दिवंगत) नेता, अरूण जेटली ने पांच सितंबर 2013 को संसद में और कई बार इसके बाहर भी कहा था कि सेवानिवृत्ति के बाद पद पाने की आकांक्षा सेवानिवृत्ति से पूर्व के फैसलों को प्रभावित करती हैं। यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा है।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी ने क्या कहा
वहीं, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा कि हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देना कांग्रेस की आदत है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी पार्टी राज्यपालों की नियुक्ति पर भी ऐसा ही कर रही है। उन्होंने कहा, ”पूर्व न्यायाधीशों को अतीत में अनगिनत मौकों पर विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया है। हमारा संविधान भी कहता है कि न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति बाद नियुक्तियों में कुछ भी गलत नहीं है।ÓÓ

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राजभवन के सवाल सरकार के जवाब https://samacharpacheesa.com/?p=5500 Thu, 29 Dec 2022 06:16:08 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5500 प्रदेश में विभिन्न वर्गों को आरक्षण का कोटा बढ़ाने संबंधी विधेयक विधानसभा में पास होकर राजभवन में राज्यपाल के हस्ताक्षर के लिए अटका हुआ है। यह विधेयक उस विषय पर है जिसे उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का कोटा बढऩे के कारण आदिवासियों को दिया गया 32 प्रतिशत का आरक्षण अवैध है। स्वाभाविक है जब 58 प्रतिशत को कोर्ट ने खारिज कर दिया तो विधानसभा से पारित 76 प्रतिशत के आरक्षण कोटे को न्यायालय कैसे स्वीकृति देगा? यही सवाल राजभवन पैदा हुआ और इसका जवाब देने के लिए सरकार तक भेजा गया। राजभवन के द्वारा विधेयक पर सवाल किए जाने पर राजनीति शुरु हो गयी। सरकार की ओर से राजभवन के विरुद्ध टिप्पणियां होने लगी, यहां तक के उस विधि विशेषज्ञ पर सवाल भी सवाल दागे गए और इस प्रक्रिया को गैर संवैधानिक बताया गया। कांग्रेस पार्टी ने विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करने का विरोध करते हुए 3 जनवरी से पूरे प्रदेश में आंदोलन करने की भी घोषणा कर दी है। इसका मतलब है कि सरकार जिनके द्वारा बनाई गई है, उसी सरकार की पार्टी अपने मुखिया के विरुद्ध आंदोलन करेगी। यह भी हुआ कि सरकार 10 सवालों का जवाब दे देगी और मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि जवाब राजभवन को भेज दिए गए है। ऐसी जानकारी मिल रही है कि जवाब के नाम पर कोई तथ्यात्मक जानकारी सरकार की ओर से राजभवन को नहीं दिए गए है। यहां से कई सवाल खड़े होते है पहला तो यह कि किसी विधेयक पर हस्ताक्षर कब करेगी यह संविधान में नहीं लिखा है और राज्यपाल को दस्तखत करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। दूसरी बात यह है कि क्या राजभवन के पास किसी विधेयक से संबंधित सवाल पूछने का अधिकार है? एक बात तो तय है कि राज्यों में नियुक्त राज्यपाल के पास संवैधानिक विशेषाधिकार होते है। इस विशेषाधिकार के तहत वह अपनी सरकार से किसी भी विषय पर सवाल पूछ सकती है और सवाल पूछे भी है तो उस पर आपत्ति क्यों होना चाहिए। राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद की गरिमा को खंडित करना क्या सरकार के लिए उचित होगा? पूरे प्रकरण में एक बात तय है कि आरक्षण का विधेयक नौकरी और शैक्षणिक संस्थाओं में जनजाति और पिछड़े वर्ग को लाभ देने के लिए लाया गया है और संभावना यह है कि मामला न्यायालयीन प्रक्रियाओं में उलझेगा। कोशिश यही होगी जैसे-तैसे चुनाव तक मामले को लटकाया जाए।

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