रामचरितमानस – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 03 Oct 2023 12:54:52 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 कैसा हो सरल लेखन https://samacharpacheesa.com/?p=8121 Tue, 03 Oct 2023 12:54:51 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8121 गीत हो या के गजल हो दोस्तो
बात सीधी हो सरल हो दोस्तो
पिछले दिनों उज्जैन में एक सम्वाद शाला में मुझे सरल, रंजक लेखन विषय पर बोलना था। सीधी सरल रेखा खींचना बहुत कठिन है। उसके लिए बहुत एकाग्रता चाहिए । आड़ी तिरछी रेखा कैसे भी खींच सकते हैं। सरल रेखा खींचने के लिए हमें स्केल का सहारा लेना पड़ता है उसी तरह लिखने के लिए हमें स्किल का सहारा लेना पड़ता है। यानी कौशल ।अपना कौशल बनाना पड़ेगा । कौशल कब बढ़ेगा यह सोचकर तो नहीं बड़ेगा कि हमारा कौशल बढ़ानाहै । कौशल बढ़ जाए। उसके लिए हमें सतत अध्ययन करना पड़ेगा ।अपनी परंपरा का, अपनी संस्कृति का ,अपने प्राचीनतम सद्ग्रन्थों का। रामचरितमानस में तुलसीदास ने कहा है न बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिन सुलभ न सोई। करत करत अभ्यास के जड़मति हो सुजान ,रसरी आवत जात से सिल पर परत निशान। कोई भी रचना तब तक पठनीय नहीं बन सकती जब तक उसमें हम रंजकता का समावेश न करें। कहीं लोकोक्ति आ जाए कहीं कोई विनोद का प्रसंग आ जाए। जैसे हम छुआछूत जाति प्रथा पर लिख रहे हैं तो उससे संबंध में कुछ उदाहरण हो सकते हैं। छुआछूत का सबसे सुंदर उदाहरण हम भगत सिंह का दे सकते हैं । वे जब जेल में बंद थे तो उनके मल मूत्र की सफाई करने के लिए एक व्यक्ति आता था ।उसका नाम था बोधा। भगत सिंह उसे बेबे कह कर बुलाए करते थे । बेबे पंजाबी में मां को कहते हैँ। एक बार भगतसिंह ने उससे कहा कि बेबे मुझे अपने हाथ का बनी रोटी खिलाओ। बोधा परेशान। बोला, नहीं मैं तो अछूत हूं आप ऊंची जाति के हैं। मैं आपको कैसे खाना खिलाया सकता हूं। लेकिन भगत सिंह ने कहा नहीं तुमको मुझे खाना खिलाना ही होगा। तुमको मैं बेबे कहता हूं। मां तो बचपन में मेरा मल मूत्र साफ क्या करती थी । तुम हमारा मलमूत्र साफ कर रहे हो, तो तुम तो मां की तरह बड़ा काम कर रहे हो। तुम्हें मुझे खाना खिलाना ही होगा। भगत सिंह की जिद के आगे बोधा की कुछ न चली और उसने भगत सिंह को अपने हाथों से खाना खिलाया ।यह उदाहरण अपने आप में छुआछूत को दूर भगाने के लिए हमेशा दिया जाना चाहिए। सब इसे अपने-अपने तरीके से लिख सकते हैं। हम रैदास को याद कर सकते हैं। जिन्होंने अपनी कठौतिया में गंगाजल को आहूत किया और गंगा वहाँ पहुंच गई । तभी तो कहावत बनी है मन चंगा तो कठौती में गंगा। मेरी पंक्तियां है, जिसका मन निर्मल होता है जीवन गंगा जल होता है मेहनत का साथ होगा यारों सदा सुनहरा कल होता है। निर्मल हृदय सरल लिख सकता है। कबीर ने कहा है,साधो सहज समाधि भली..। सरल दिखाने के लिए आपका जीवन भी ऐसा सरल होना चाहिए जैसा एक बच्चे का होता है निर्मल । हमारे लेखन में तत्सम नहीं, तद्भव शब्द अधिक आने चाहिए। तत्सम यानी संस्कृत के शब्द हम जस का तस अपने लेखन में डाल देंगे तो वह दूरह हो जाएंगे अगर तद्भव शब्दों को हम डालेंगे तो लोगों को आसानी होगी। कई बार हमारे कुछ मित्र विद्वता दिखाने के लिए संस्कृत के कठिन शब्दों का प्रयोग करते हैं इस कारण उनका लेख अपठनीय हो जाता है। जैसे एतदर्थ शब्द है उसकी जगह हम कह सकते हैं कि इसके अनुसार। सरल लेखन पठनीय और प्रभावी होता है। वह स्मृति में भी बस जाता है।

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कमजोर का ग्रंथ रामचरितमानस नहीं बल्कि भारतीय संविधान है, मायावती का अखिलेश पर हमला https://samacharpacheesa.com/?p=6051 Fri, 03 Feb 2023 07:45:26 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6051 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में रामचरितमानस पर दिए गए बयान के बाद से विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने रामचरितमानस प्रकरण को लेकर हमला बोला है। मायावती भी अब इस मुद्दे पर प्रहार करने से पीछे नहीं हटी है। उन्होंने कहा कि देश में कमजोर और उपेक्षित वर्गों के लिए रामचरित मानस व मनुस्मृति ग्रंथ नहीं है। उनके लिए ग्रंथ भारतीय संविधान है।
उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनको शूद्रों की नहीं बल्कि एससी, एसटी व ओबीसी की संज्ञा दी है। अतः इन्हें शूद्र कहकर सपा इनका अपमान न करे तथा न ही संविधान की अवहेलना करे। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, देश के अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी दलितों, आदिवासियों व ओबीसी समाज के शोषण, अन्याय, नाइन्साफी तथा इन वर्गों में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों आदि की उपेक्षा एवं तिरस्कार के मामले में कांग्रेस, भाजपा व समाजवादी पार्टी भी कोई किसी से कम नहीं।
किया गेस्ट हाउस घटना का जिक्र
मायावती ने समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा इनकी वकालत करने से पहले उन्हें लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस के दिनांक 2 जून सन् 1995 की घटना को भी याद कर अपने गिरेबान में जरूर झाँककर देखना चाहिए, जब सीएम बनने जा रही एक दलित की बेटी पर सपा सरकार में जानलेवा हमला कराया गया था।
विपक्ष पर साधा निशाना
उन्होंने कहा कि यह जगज़ाहिर है कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान की क़द्र बीएसपी में ही हमेशा से निहित व सुरक्षित है, जबकि बाकी पार्टियाँ इनके वोटों के स्वार्थ की खातिर किस्म-किस्म की नाटकबाजी ही ज्यादा करती रहती हैं।
बता दें कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शूद्र विधानसभा में सीएम योगी से सवाल पूछने की बात कही थी। अखिलेश यादव ने कहा था कि हमारे सीएम एक ऐसी संस्था से आए हैं जिसका एक इतिहास रहा है। रामचरितमानस और शूद्र के बारे में वो सदन में बताएं। ये धार्मिक लोगों का सवाल है। उन्होंने कहा था कि हम तो भगवान विष्णु के सभी अवतारों को मानते है। जिस शब्द को लेकर बवाल मचा है उसे लेकर सभी को बोलना चाहिए। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी जवाब आया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जवाब उन्हें देना चाहिए जो जवाब को समझ सकें। जो अराजकता पैदा करना चाहते हैं उन्हें जवाब देना संभव नहीं है।

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रामचरितमानस पर बसपा प्रदेश अध्यक्ष की स्वामी प्रसाद मौर्य को नसीहत https://samacharpacheesa.com/?p=5965 Mon, 30 Jan 2023 07:31:54 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5965 लखनऊ। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल देर शाम को आगरा में कार्यकर्ताओं के साथ सेक्टर बैठक करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से वार्ता की और स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरितमानस को लेकर दिए गए बयान पर उन्हें सलाह देते हुए भी नजर आए।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनेता को धर्म के बारे में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि बसपा 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारी में पुरजोर तरीके से जुटी हुई है। और बताया कि बहन मायावती का काम करने का तरीका सपा और भाजपा से अलग है।
आगरा पहुंचे बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल
रविवार देर शाम को उत्तर प्रदेश बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल आगरा पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जोरदार तरीके से उनका स्वागत किया। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर आगरा में सेक्टर बैठक करने आए थे।
प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस को लेकर दिए गए बयान पर कहा कि किसी भी राजनीतिक दल और उनके किसी भी नेता को धर्म को लेकर कोई भी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। लोग जिस धर्म में आस्था रखते हैं उसे मानते हैं। ऐसे में राजनीतिक लोगों को धर्म के बारे में कोई भी बयान नहीं देना चाहिए।
अध्यक्ष विश्वनाथ पाल बोले- धर्म पर टिप्पणी अच्छा नहीं
लोग जिस धर्म में आस्था रखते हैं उसे मानते हैं। ऐसे में राजनीतिक लोगों को धर्म के बारे में कोई भी बयान नहीं देना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि राजनीतिक लोगों को देश कैसे अच्छा रहे, बेरोजगारी कैसे दूर होगी, किसान कैसे मजबूत होगा। इन सब मुद्दों पर बात करनी चाहिए। भारत में विभिन्न धर्म हैं और विभिन्न धर्मों के लोग अपने धर्म से आस्था रखते हैं। ऐसे में धर्म पर टिप्पणी कर उनकी आस्था को नहीं दुखाना चाहिए। स्वामी प्रसाद मौर्य ने क्या टिप्पणी की है यह बात वही जाने और उनसे ही इस बारे में पूछिए।
लोकसभा चुनाव को लेकर बसपा तैयार
लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर उन्होंने कहा कि बहन जी अपने तरीके से चुनाव की तैयारी करती हैं। बहन जी का काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है, और उसी पर वह काम कर रही हैं। बसपा लोकसभा चुनाव को लेकर जबरदस्त तैयारियों में जुटी हुई है।

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रामचरितमानस विवाद पर नीतीश ने तोड़ी चुप्पी, मंत्री को नसीहत देते हुए कहा- धर्म में हस्तक्षेप ठीक नहीं https://samacharpacheesa.com/?p=5756 Tue, 17 Jan 2023 10:04:08 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5756 पटना। बिहार के शिक्षा मंत्री डॉ चंद्रशेखर के रामचरितमानस को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर राज्य में राजनीतिक बवाल लगातार जारी है। डॉ चंद्रशेखर राजद कोटे से नीतीश कैबिनेट में शामिल हैं। हालांकि, उनके बयान को लेकर राजद भी बैकफुट पर नजर आ रही है। दूसरी ओर गठबंधन में शामिल जदयू लगातार चंद्रशेखर से माफी की मांग कर रही है। इन सब के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज पहली बार इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि किसी भी धर्म के बारे में इस तरह का बयान देना, उस पर टिप्पणी करना बिल्कुल गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए। इसका मतलब साफ है कि नीतीश कुमार कहीं ना कहीं अपने मंत्री के इस बयान से सहमत नहीं है।
दरअसल, नीतीश कुमार से चंद्रशेखर के बयान पर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि धर्म के मामले में किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सब अपने तरीके से धर्म का पालन करते हैं। सभी धर्मों को इज्जत मिलनी चाहिए। जिसको जिनकी पूजा करनी है, वह करें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब तो डिप्टी सीएम ने भी कह दिया है। आपको बता दें कि चंद्रशेखर के बयान को लेकर भाजपा जबरदस्त तरीके से राज्य और नीतीश सरकार पर हमलावर है। वहीं, दूसरी ओर जदयू का आरोप है कि चंद्रशेखर के इस बयान से भाजपा को फायदा होगा। यही कारण है कि ज्योति उन्हें भी चंद्रशेखर से उनके बयान पर माफी की मांग कर दी है।
हालांकि, चंद्रशेखर के बयान पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि संविधान देश की सबसे पवित्र किताब है। देश संविधान से चलता है। संविधान में क्या है? संविधान में हर धर्म का सम्मान करने के बारे में बताया गया है। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपनी पार्टी राजद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दल जदयू के नेताओं के बीच हाल में हुए वाकयुद्ध के बारे में पत्रकारों के सवालों पर भड़क गये। उन्होंने सोमवार को उल्टे पत्रकारों से ही पूछ लिया कि उनके संगठनों में संपादक चीजों को तय करते हैं या संवाददाता संपादकों को बताते हैं कि क्या करना है।

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रामचरित मानस पर कीचड़! https://samacharpacheesa.com/?p=5749 Tue, 17 Jan 2023 05:57:05 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5749 हमारे समय का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि गोस्वामी तुलसीदास जी की कृति रामचरितमानस पर भी कुछ निकृष्ट लोग कीचड़ उछालने से बाज नही आते। मानस की कुछ पंक्तियों को लेकर अर्थ का अनर्थ करते रहते हैं। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कभी श्री राम की प्रशंसा में यह पंक्तियां कही थीं,
राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है, कोई कवि हो जाए सहज संभाव्य है।
सचमुच राम का पूरा चरित्र हम देखते हैं तो हमारे सामने एक महामानव की तस्वीर उभरती है। विश्व कवि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखकर एक ऐसे महान चरित्र को विश्व पटल पर रखा, जिसके रास्ते पर चलकर हम आदमी से इनसान बन सकते हैं। राम के चरित्र को केंद्रित करके अन्य ग्रंथों की रचना की गई है। ये रामायण वो रामायण। तरह-तरह की रामायण। लेकिन जब उनको पढ़ते हैं तो अनेक नकारात्मक बातें वहां नजर आती हैं। लेकिन जब तुलसीकृत मानस को हम देखते हैं तो राम का मर्यादा पुरुषोत्तम वाला जो उदात्त रूप हमारे सामने आता है,वह अभिभूत कर देने वाला है। उसी चरित्र को गांधीजी ने आत्मसात किया और जीवन भर वे राम का नाम जपते रहे। रघुपति राघव राजा राम। भले ही उन्होंने उदारता दिखाते हुए उन्होंने यह पंक्ति भी जोड़ी, ईश्वर अल्लाह तेरे नाम सबको सन्मति दे भगवान। लेकिन रघुपति राजा राघव राजा राम भी उन्होंने कहा। और जब उन्हें अंत में गोली लगी तो उनके मुंह से हे राम ही निकला। इस तरह गांधी राममय थे। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेते हुए महात्मा गांधी ने जो सपना देखा था, उस के केंद्र में रामराज्य था। वे चाहते थे कि देश जब आजाद हो तो रामराज्य आए। यह और बात है कि गांधी का स्वप्न केवल ‘यूटोपिया’ साबित हुआ। वह स्वप्न अब तक अधूरा है। हो सकता है, आने वाले समय में साकार भी हो। सच कहा जाए तो महात्मा गांधी ने तुलसीदास जी के रामचरितमानस को हृदय से आत्मसात किया तो जगह-जगह अपने भाषणों में उन्होंने इस ग्रंथ का उल्लेख किया और इसके सार तत्व रामराज्य को इस देश में स्थापित करने के बाद की तुलसीदास जी ने जिस तरह मानस के माध्यम से समतामूलक समाज की स्थापना का सपना संजोया उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गांधी जी ने भी एक समन्वयवादी समाज की रचना का आदर्श हम सबके सामने उपस्थित किया। अपने एक भाषण में गांधी जी ने कहा था कि आजकल जो हुकूमत हम पर शासन कर रही है वह केवल राक्षसी है। मैं उसे रावण-राज्य कहता हूँ। जो बुरे हैं उनकी संगति क्योंकि जाए? उनका साथ छोड़ा जाए ।उनसे असहयोग किया जाए। यह तो एक यज्ञ है। उसमें जब हम अपना बलिदान करेंगे, तभी शुद्ध होंगे और रावण राज्य को मिटाकर राम राज्य की स्थापना करेंगे। यह रामराज्य ही स्वराज्य है। स्वराज स्थापित किए बिना हम इस राक्षसी राज्य से छूट नहीं सकते। गांधी जी ने रामचरितमानस में रावण का जो चरित्र देखा, उस चरित्र को उन्होंने अंग्रेजों से जोड़ा और भारतीय मानस में भी यह बात स्थापित हुई कि अंग्रेज रावण की तरह ही अत्याचारी हैं इसलिए हमें इन का खात्मा करना ही चाहिए।
तुलसीकृत रामचरितमानस ने भारतीय मेधा को बहुत हद तक प्रभावित किया। जब भारत से गिरमिटिया मजदूर मॉरीशस, सूरीनाम, गयाना, फीजी और वेस्टइंडीज आदि देशों में ले जाए गए, तो उनके पास कुछ भी नहीं था। बस एक ताकत उनके साथ विद्यमान थी, और वह ताकत थी रामचरितमानस और हनुमान चालीसा। इन दो महान कृतियों के सहारे हमारे गिरमिटिया मजदूर विदेश गए। वहां अपने पसीने से उस मुल्कों को सींचा। बाद में उनकी पीढिय़ां वहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक बनीं। रामचरितमानस ने उन्हें सतत संघर्ष की प्रेरणा दी। स्वतंत्रता आंदोलन में भी रामचरितमानस की भूमिका को जब हम रेखांकित करते हैं ,तो उसके मूल में यही भाव होता है कि जिस तरह प्रभु श्रीराम ने जंगल में उत्पात मचाने वाले राक्षसों का और अंत में रावण का संहार किया, उसी तरह गुलाम भारत के नागरिकों को अपने भीतर राम का आह्वान करके अंग्रेज रूपी रावण का संहार करना है। मेरे पिताजी (श्री कृष्णप्रसाद उपाध्याय) बताया करते थे कि बनारस में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान रामायण मंडलिया रामचरितमानस का सामूहिक पाठ करती थी और उसके परिपार्श्व में भावना यह भी रहती थी कि हमें इस देश को अंग्रेजों से मुक्त करना है। अपने भीतर रामत्व का संचार करना है। पिताजी उस समय किशोर थे और वे रामायण मंडली में शामिल होकर तुलसीदास द्वारा लिखित चौपाइयों और दोहों के मर्म को समझा करते थे, और अंग्रेजों के विरुद्ध भूमिगत हो कर आंदोलन भी करते थे। जैसे लेटर बॉक्स में बम डालकर धमाका करना, स्वतंत्रता से संबंधित साहित्य को फिरंगियों के कार्यालय तक गुप्त तरीके से पहुंचाना।
बचपन में मैंने पिताजी के साथ रामनगर की भव्य रामलीलाओं को अनेक बार देखा है। रामचरितमानस की पंक्तियां पढ़ते हुए मुगल काल में भी हमारे पूर्वज मुगल अत्याचारों को महसूस किया करते थे। तुलसीदास की पंक्तियां बार-बार मंत्र की तरह दोहराई जाती थी,
जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी।
यह भी कि परहित सरिस धर्म नहिं भाई पर पीड़ा सम नहीं अधमाई। और पराधीन सपनेहुँ सुख नाही। रामराज्य कैसा हो, उसको तुलसीदास स्पष्ट करते हैं, दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज काहू नहिं व्यापा। यह भी कहा कि, सब नर करहिं परसपर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत सुति नीती। तुलसीदास जी ने समाज को तोडऩे नहीं, जोडऩे का काम किया था।

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