राहुल गांधी – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 09 Aug 2023 06:40:28 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 पहले क्यों नहीं बोले राहुल गांधी? https://samacharpacheesa.com/?p=7754 Wed, 09 Aug 2023 06:40:28 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7754 कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता बहाल कर दी गई है। राहुल गांधी संसद पहुंचे जहां मानसून सत्र चल रहा है। परिसर में प्रवेश करते समय कई विपक्षी सांसदों ने उनका भव्य स्वागत किया। गांधी परिवार ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना की। संसद सदस्यता बहाल होने के बाद 12 बजे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का भाषण होने वाला था। लेकिन सदन में राहुल की जगह गौरव गोगोई बोले। जिस पर बीजेपी ने भी तंज कसा है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसको लेकर निशाना साधते हुए पूछा कि सत्ता पक्ष उनके भाषण का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने तो तंज कसते हुए कह दिया कि लगता है वो लेट से सोकर उठे होंगे। जिसके बाद संसद में हंगामा मच गया। बहरहाल, सियासी बवालों से इतर बताते हैं कि आपको आखिर कौन सी बड़ी वजह है जिसकी वजह से राहुल गांधी ने संसद में भाषण नहीं दिया। आज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई तो सदन में नरेंद्र मोदी मौजूद नहीं थे। दरअसल, कांग्रेस चाहती है कि सदन में जब नरेंद्र मोदी मौजूद हों। उसी वक्त राहुल गांधी का भाषण हो। इसका संदेश साफ है कि कांग्रेस मोदी के मुकाबले राहुल को पेश करना चाहती है। 2024 लोकसभा चुनाव नजदीक है। राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल हो चुकी है। कांग्रेस संसद में पहले से ज्यादा आक्रमक नजर आ रही है। संसद में राहुल गांधी ही पार्टी को लीड करते नजर आएंगे। कांग्रेस चाहती है कि सदन में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद हो तभी राहुल गांधी अपना भाषण दें। वहीं अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी के न बोलने की एक और बड़ी वजह है। दरअसल, अविश्वास प्रस्ताव पर पीएम मोदी सदन में अंतिम दिन यानी 10 अगस्त को बोलेंगे। कांग्रेस नहीं चाहती है कि पीएम मोदी महफिल लूट ले जाए। वहीं आज अगर राहुल गांधी भाषण दे देते तो उनका भाषण पुराना हो जाता है। ऐसे में कांग्रेस का प्लान है कि राहुल गांधी का भाषण पीएम मोदी के भाषण से ठीक पहले हो। जिससे राहुल का भाषण चर्चा में रहे और लोगों को याद भी रहे। कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव पर मोदी के भाषण के साथ राहुल के भाषण की तुलना कर नए सियासी समीकरण बनाने की कोशिश करेगी। लोगों को ये संदेश देने की कोशिश करेगी कि राहुल जननेता के तौर पर अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव के बहाने कांग्रेस को बोलने का मौका मिला है तो वो देश में ये संदेश देना चाहती है कि वो नॉर्थ ईस्ट को कितनी तवज्जो देती है। राहुल गांधी बोलते तो शायद मणिपुर के मुद्दे पर उतना असर नहीं पड़ता। गौरव असम से सांसद हैं उनके जरिए ये मैसेज देने की कोशिश की है। यही बात गौरव की स्पीच से भी झलकी।

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अब लोकतंत्र के सबसे बड़े मंच पर बुलंद होगी राहुल गांधी की आवाज: भूपेश https://samacharpacheesa.com/?p=7739 Tue, 08 Aug 2023 12:47:15 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7739 रायपुर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने पर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल खुशी जताई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि अब लोकतंत्र के सबसे बड़े मंच पर राहुल गांधी की आवाज बुलंद होगीा। लोग उन्हें सुनना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से वैसे तो कोई आशंका नहीं थी, लेकिन जिस तरह मोदी सरकार या लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी की सदस्यता खत्म कराने और उनका बंगला खाली करने में तत्परता दिखाई थी, वैसी तत्परता नहीं दिखाई गई। राहुल गांधी ने केंद्र से सवाल क्या पूछ लिया पूरी बीजेपी सरकार ने उन्हें फंसाने के लिए ताकत झोंक दी थी।
सीएम ने कहा कि उम्मीद की जा रही थी कि लेकिन जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां की कांटे आगे बढ़ रही थीं, वैसे-वैसे कांग्रेसियों की धड़कनें बढ़ती जा रही थी, लेकिन अब वह अध्याय खत्म हो गया है। राहुल गांधी की सदस्याता बहाल हो चुकी है। यह लोकतंत्र की जीत है। राहुल गांधी को ढेर सारी बधाइयां। देश के सबसे बड़े मंच पर वह अपनी बात रख सकेंगे। देश की जनता उन्हें सुनना चाहती है। राहुल गांधी ने केंद्र से सवाल क्या पूछ लिया पूरी बीजेपी सरकार ने ताकत झोंक दी थी। उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए पूरे गुजरात के जितने मामले हैं, वहां से लेकर बंगला खाली कराने और सदस्यता खत्म कराने तक हथकंडे अपनाए गए।
राहुल गांधी से डरी हुई है बीजेपी
उन्होंने कहा कि आखिर बीजेपी एक व्यक्ति से इतनी डरी हुई क्यों है? एक तरफ लगातार पीएम नरेंद्र मोदी वंदे मातरम भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर लगातार छत्तीसगढ़ में ट्रेनें रद्द और विलंब से चल रही हैं। समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं, इसकी वजह से यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। दूसरी तरफ जब कोई घटना होती है, तो रेल मंत्री जाते हैं। इसके विपरित उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ में विरल बसाहट और रेलवे के सस्ता-सुगम साधन को देखते हुए जितने भी रेलवे की सुविधाएं हैं, वह जनता को मिलनी चाहिए। ट्रेन स्टेशन पर रुके और यात्री अपने गंतव्य तक पहुंच सके, इसके लिए जरूरी है कि ट्रेन टाइम पर चले। मैंने पीएम नरेंद्र मोदी को इस संबंध में खत लिखा है।
भर्ती और एडमिशन में एक ही आरक्षण व्यवस्था
वहीं भर्तियों के शुरू करने के सवाल पर सीएम ने कहा कि भर्तियां तो शुरू हो चुकी थीं, लेकिन कॉलेज में जो एडमिशन की प्रक्रिया चल रही थी, उसमें कुछ विसंगति आ रही थी। भर्तियों में जो आरक्षण की व्यवस्था है, वही एडमिशन में भी होनी चाहिए। इसलिए कैबिननेट की बैठक में इस पर फैसला लिया गया है।

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पिछड़े वर्ग के लोगों को गाली देने वाले के समर्थन में मौन सत्याग्रह कर रही कांग्रेस : साव https://samacharpacheesa.com/?p=7282 Wed, 12 Jul 2023 08:57:03 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7282 रायपुर। पिछड़ा वर्ग को अपमानित करने वाले राहुल गांधी को न्यायालय द्वारा सजा मिलने के बाद राहुल गांधी के समर्थन में कांग्रेस के सत्याग्रह पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने पिछड़े वर्ग को गाली दी ,उसका उपहास उड़ाया अपमान किया, न्यायालय ने जिसे ना सिर्फ दोषी ठहराया बल्कि सजा भी दी एवं दोबारा याचिका लगाने पर भी उसे रद्द किया ऐसे व्यक्ति के लिए मौन धारण कर प्रदर्शन करना व उसे सत्याग्रह का नाम देना पिछड़े वर्ग के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा कृत्य है कांग्रेस को पिछड़ा वर्ग इसके लिए कभी माफ नहीं करेगा। कांग्रेस पिछड़े वर्ग के साथ नहीं पिछड़े वर्ग को गाली देने वाले व्यक्ति के साथ खड़ी है।
श्री साव ने कहा कांग्रेस का जो रवैया है उससे यह पूर्णत: स्पष्ट है कि आज अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार रहती तो वह राहुल गांधी की चाटुकारिता के लिए शायद आपातकाल लगाने से भी नहीं चूकती जैसा कि इंदिरा गांधी के लिए लगाया गया था।कांग्रेस देश के संविधान और न्यायपालिका में विश्वास नही रखती वह केवल एक परिवार को ही सब कुछ मानती है देश की जनता भी इनकी प्राथमिकता में नही है। श्री साव ने कहा न्यायपालिका जिस पर सभी का भरोसा होता है आज कांग्रेस उसके खिलाफ, उसके फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रही है यह देश के संविधान का मजाक उड़ाने जैसा है जनता अब यह मान रही है कि कांग्रेस गांधी परिवार के आगे देश के संविधान को भी नहीं मानती और न्यायपालिका की विश्वसनीयता को खंडित करने का कुंठित प्रयास करती है पूरे देश की जनता कांग्रेस का यह कृत्य देख रही है कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी।

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राहुल गांधी सजा के खिलाफ याचिका नहीं https://samacharpacheesa.com/?p=6786 Sat, 22 Apr 2023 08:38:14 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6786 ‘मोदी सरनेम वाले बयान से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक के बाद एक झटका लग रहा है। निचली अदालत से दोषी ठहराए जाने के खिलाफ राहुल ने सेशंस कोर्ट में याचिका दायर की थी, जो गुरुवार को खारिज हो गई। कहा जा रहा था कि इस फैसले के खिलाफ शुक्रवार को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी, लेकिन अब तक याचिका दायर नहीं की गई है। अब अगले दो दिन कोर्ट बंद रहेगा। इसी बीच, निचली अदालत की तरफ से दिया गया एक महीने का मोहलत भी खत्म हो जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब राहुल गांधी जेल जाएंगे? 23 मार्च को मानहानि केस में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाने के साथ ही 30 दिन की जमानत दी गई थी। इन्हीं 30 दिनों के अंदर राहुल को ऊपरी अदालत में अपील करना था। ये समय सीमा आज से दो दिन बाद यानी 23 अप्रैल को खत्म हो रही है। हालांकि, इसके पहले तीन अप्रैल को सूरत के सेशन कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ तीन अपील दायर की गई थी। मुख्य याचिका में ष्टछ्वरू कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। इस पर तीन मई को सुनवाई होगी। दूसरी याचिका में दो साल की सजा पर रोक की मांग की गई। तीन अप्रैल को कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए राहुल को अंतरिम जमानत दे दी थी। तीसरी याचिका में दोषी ठहराए जाने पर रोक यानी कन्विक्शन पर स्टे की मांग की गई थी। गुरुवार 20 अप्रैल को सूरत की सेशन कोर्ट ने ये याचिका खारिज कर दी। मतलब अभी तीन मई तक राहुल पर कोई खतरा नहीं है। इस बीच, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। सूरत की सीजेएम कोर्ट ने 23 मार्च को राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। इसके अगले ही दिन उनकी संसद सदस्यता चली गई। देशभर में कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों को एकजुट किया, लेकिन उस दौरान राहुल ने कोर्ट के फैसले को सेशंस कोर्ट में चुनौती नहीं दी। 11वें दिन वह सेशंस कोर्ट पहुंचे। तब उन्होंने तीन याचिकाएं दायर की। उसी दौरान उन्हें अंतरिम जमानत तो मिल गई, लेकिन दोषी ठहराए जाने के खिलाफ दायर याचिका को 20 अप्रैल को कोर्ट ने खारिज कर दिया। आज इसके खिलाफ राहुल हाईकोर्ट जाने वाले थे, लेकिन अब तक याचिका नहीं दायर हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस पार्टी में देश के बड़े-बड़े अधिवक्ता हैं, वो अपने नेता के बचाव में तुरंत क्यों नहीं ऊपरी अदालतों का रुख कर रही है? ये तो साफ दिख रहा है कि कांग्रेस इस मामले में धीमी गति से फैसले ले रही है। ऐसे में संभव है कि कांग्रेस खुद इस मामले को लंबा चलाना चाहती हो ताकि इसका फायदा उसे चुनावों में मिल सके। वह लोगों को यह बताना चाहती है कि चूंकि राहुल गांधी ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी, इसलिए उनके खिलाफ इस तरह का षडयंत्र चल रहा है। कांग्रेस को इसका फायदा हो या न हो, लेकिन विपक्ष जरूर इसके जरिए सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। इसी का हवाला देकर कांग्रेस 2024 के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश में जुटी हो।

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केंद्र के खिलाफ कांग्रेस सड़क पर https://samacharpacheesa.com/?p=6683 Fri, 31 Mar 2023 06:24:09 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6683 कांग्रेस पार्टी पिछले कुछ महीनों से केंद्र सरकार खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुखरता से सड़क की लड़ाई लड़ रही है। पार्टी के प्रमुख नेता राहुल गांधी के खिलाफ सूरत न्यायालय के फैसले के बाद उनकी लोकसभा की सदस्यता को समाप्त करने के निर्णय ने कांग्रेस पार्टी को झकझोर दिया है। दिल्ली से रायपुर तक केंद्र सरकार और संसद के निर्णय के खिलाफ मोर्चाबंदी करने की तैयारी है। रायपुर में भी आज से सत्याग्रह शुरु किया जाएगा। दूसरी ओर प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय के लगातार छापों ने भी प्रदेश सरकार और कांग्रेस पार्टी को परेशान कर रखा है। आज की स्थिति में कांग्रेस पार्टी को यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ आंदोलन करें या केंद्र की एजेंसी ईडी के खिलाफ। राजनीतिक पंडि़तों का मानना है कि राहुल गांधी प्रकरण से कांग्रेस पार्टी को फायदा मिलेगा। अभी कर्नाटक में चुनाव होने को है और इस परिस्थिति के फायदे नुकसान का परीक्षण वहां हो जाएगा। हालांकि कि कर्नाटक में लगातार दो बार सरकार नहीं बनती है, इसलिए जो परिणाम आएगा, उससे राहुल गांधी प्रकरण का असर पता लगाना मुश्किल होगा। अगर भारतीय जनता पार्टी दोबारा कर्नाटक में जीतकर आती है तब तो यह तय होगा कि कांग्रेस पार्टी के आंदोलन का और केंद्र सरकार के लोकतंत्र विरोधी होने के नारों का कोई असर नहीं पड़ा। यही हाल छत्तीसगढ़ का भी है छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार की स्थिति अच्छी मोटे तौर पर देखे तो प्रदेश में सरकार के खिलाफ कोई माहौल नहीं है। दूसरी ओर भूपेश सरकार छत्तीसगढिय़ा वाद के भावनात्मक मुद्दे पर सवार होकर किसानों को खुश करने का निर्णय ले रही है। उनसे कांग्रेस पार्टी को सत्ता में लौटने का विश्वास है इसलिए छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में कम से कम राहुल गांधी प्रकरण का कोई असर नहीं होगा। लेकिन ईडी की कार्रवाई जिस गति से चल रही है, वह कांग्रेस को फायदा भी पहुंचा सकती है और नुकसान भी। पिछले कुछ चुनावों में यह देखने में आया है कि भ्रष्टाचार और विकास चुनावी मुद्दे तो बनते है लेकिन यह चुनाव के परिणाम को प्रभावित नहीं कर रहे हैं। मतदाता पर भ्रष्टाचार और विकास जैसे मुद्दों के बजाए भावनात्मक मुद्दे ज्यादा असरकारी होते हैं। अगर ईडी की कार्रवाई से भूपेश सरकार के प्रति ग्रामीण लोगों की सहानुभूति बन गई तो इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। रही बात राहुल गांधी के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए कांग्रेस के आंदोलन का तो यह मामला न्यायालयीन प्रक्रिया से उपजा है, इसलिए इसका समाधान भी न्यायालयीन प्रक्रिया से होगा। एक महीने की मोहलत उच्च न्यायालय में अपील दायर करने के लिए मिली है, उस पर पार्टी को ज्यादा सोचना चाहिए।

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राहुल गांधी को सजा अदालत ने सुनाई है https://samacharpacheesa.com/?p=6634 Sat, 25 Mar 2023 05:50:37 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6634 राहुल गांधी को दोषी मानते हुए उनके संसद में सदस्यता खत्म कर दी गई है। क्या आपने कभी देखा है कि अदालत अगर किसी व्यक्ति को किसी मामले में दोषी पाते हुए उसे सजा सुना दे तो दोषी व्यक्ति या उसका समुदाय सड़कों पर हंगामा करने लगे, क्या आपने कभी देखा है कि यदि कोई जाँच एजेंसी या पुलिस किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाये या जाँच एजेंसी किसी के पास पूछताछ के लिए जाये तो वह व्यक्ति या उसका परिवार सड़क पर हंगामा करने लगता है? नहीं ना। जब देश का आम व्यक्ति कानून का पालन करता है। नोटिस मिलने पर जांच एजेंसी के समक्ष हाजिर होता है। सजा सुनाये जाने पर जेल जाता है या उस फैसले को चुनौती देता है तो वीआईपी व्यक्ति ऐसा क्यों नहीं करता? देश में दशकों तक राज करने वाले गांधी परिवार के राजनीतिक वारिस राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के मामले में अदालत ने सजा सुनाई तो कांग्रेस देशभर में सड़कों पर हंगामा कर रही है। कांग्रेस को समझ क्यों नहीं आ रहा है कि सजा मोदी सरकार ने नहीं सूरत की एक कोर्ट ने सुनाई है। यही नहीं, जब नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पटियाला हाउस कोर्ट जाना पड़ा था तब भी कांग्रेस ने ड्रामा कर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह समेत पार्टी के आला नेताओं का सड़कों पर मार्च करा दिया था। सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया तो कांग्रेसियों ने सड़कों पर जमकर हंगामा काटा। आज जिस तरह से कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेता मार्च निकालते हुए विजय चौक तक पहुँचे और राष्ट्रपति से मुलाकात तथा आगामी विरोध प्रदर्शन कार्यक्रमों का ऐलान करते हुए मोदी सरकार को कोसा उससे सवाल उठता है कि क्यों कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को देश के कानून से ऊपर मानते हैं। जब दो साल की सजा सुनाये जाने पर कई अन्य सांसदों और विधायकों को संबंधित सदनों की सदस्यता गंवानी पड़ी तो राहुल गांधी को क्यों छूट मिलनी चाहिए? दूसरी ओर, मोदी उपनाम के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को अदालत ने सजा सुनाई तो कांग्रेस ने कह दिया कि हमें पहले से पता था यही होगा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी की आवाज दबाने की साजिश हो रही है। क्या कांग्रेस को पता नहीं है कि अदालतों में साजिश नहीं होती बल्कि सुबूतों के आधार पर फैसला सुनाया जाता है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने अडाणी मामले में जो जांच कमेटी बनाई है वह क्लीन चिट कमेटी है। क्या कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट पर भी विश्वास नहीं है? कांग्रेस नेता जिस तरह भारत के लोकतंत्र, भारत की संसद, जांच एजेंसियों, न्यायपालिका, संवैधानिक संस्थानों और मीडिया पर सवाल उठा कर उन्हें संदेह के घेरे में लाना चाह रहे हैं वह गांधी परिवार की सत्ता लोलुपता को दर्शाता है। लोकसभा चुनाव महज एक साल दूर है इसलिए विपक्ष की बेसब्री बढ़ती जा रही है। कुछ विदेशी एजेंसियों की भारत विरोधी रिपोर्टों को हवा देकर भारत में भुखमरी या हालात खराब होने की बात को प्रचारित किया जा रहा है, विदेशी मीडिया में भारत विरोधी खबरें छपवाई जा रही हैं, विदेशी मंचों पर भारत विरोधी बातें की जा रही हैं।यही नहीं, अब तो विपक्ष एक बार फिर ईवीएम के खिलाफ आवाज बुलंद करने जा रहा है। इस क्रम में शरद पवार के घर पर विपक्ष की बैठक में आगे की रणनीति बनी। देखा जाये तो देश में एक चलन-सा बनता जा रहा है कि चुनाव हार जाओ तो ईवीएम पर ठीकरा फोड़ दो जबकि जो भी दल ईवीएम पर सवाल उठाते हैं वह ईवीएम के जरिये ही चुनाव जीतते रहे हैं। विपक्ष को चाहिए कि अपनी नाकामियों के लिए वह देश के तंत्र को दोषी ठहराने की बजाय अपनी कमियों को ईमानदारी से ढूँढ़े और आगे बढ़े। कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष को यह भी समझना होगा कि सत्ता के लिए शॉर्टकट रास्ता सफलता नहीं दिलायेगा बल्कि सत्ता से और दूर ले जायेगा।

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2024 का चुनावी मुद्दा तय होगा रायपुर में https://samacharpacheesa.com/?p=6441 Fri, 24 Feb 2023 05:56:33 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6441 पिछले लोकसभा चुनावों के बाद यूं तो हर साल देश में कहीं न कहीं चुनावी महाभारत होता रहा है, लेकिन अगले आम चुनाव से ठीक पहले का यह साल सियासी नजरिए से सबसे ज्यादा गरम साल साबित होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे की लोकप्रियता और राजनीतिक परिपक्वता के बल पर लोकसभा चुनावों में हैट्रिक की तैयारी कर रही है, तो वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भी राहुल गांधी की भारत जोड़ो पदयात्रा की सफलता से उत्साहित होकर भाजपा की हैट्रिक न बनने देने की तैयारियों में जुट गई है। जबकि भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दल अपने अपने इलाकों में अपनी ताकत बढ़ाकर अगले लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा को रोकने और कांग्रेस को दबाव में लेने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस चुनावी महाभारत में जहां भाजपा मोदी सरकार के दस सालों के कामकाज और भविष्य का भारत कैसा होगा अपने इस एजेंडे की पैकिंग में अपने सबसे बड़े और धारदार सियासी हथियार हिंदुत्व को फिर से आजमा कर कमंडल राजनीति को गरम करेगी, तो उसकी काट के लिए सामाजिक न्याय के योद्धा राजद, जद(यू) और समाजवादी पार्टी ने हिंदू ध्रुवीकरण की काट के लिए जातीय जनगणना और रामचरित मानस विवाद के जरिए पिछड़ों के ध्रुवीकरण की मंडल राजनीति का दांव खेलने में जुट गए हैं। उधर कमंडल और मंडल से इतर कांग्रेस ने भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दों का एक बंडल तैयार किया है, जिसमें महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्या, छोटे उद्योगों मझोले व्यापार और दुकानदारों की तकलीफ, मजदूरों की रोजमर्रा की दिक्कतों और सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना और कॉरपोरेट भ्रष्टाचार के जरिए अमीर गरीब की गहराती खाई जैसे मुद्दे शामिल हैं। लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर दिए गए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार के कामकाज और उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए इस साल होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अगले साल के लोकसभा चुनावों की राजनीतिक पिच तैयार कर दी। अपने भाषण में उन्होंने न सिर्फ विपक्ष को आईना दिखाया, बल्कि भाजपा नेताओँ और कार्यकर्ताओं को सियासी लाइन भी दे दी कि अब उन्हें राजनीतिक विमर्श में क्या करना है और क्या बोलना है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की लाइन ऐसी सियासी पैकेजिंग हैं, जिसमें विकास सुशासन और उपलब्धियों के चमकदार खोल के भीतर ठोस हिंदुत्व है जो आगे आने वाले सभी चुनावों में भाजपा का सबसे धारदार हथियार होगा।

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रायपुर में कांग्रेस पार्टी का महाधिवेशन https://samacharpacheesa.com/?p=6407 Thu, 23 Feb 2023 05:42:56 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6407 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में एक अंग्रेज अधिकारी एओह्युम के द्वारा की गई थी। कांग्रेस पार्टी ने उसके बाद अनेक परिवर्तन देखे। इन परिवर्तनों में महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का एक संगठनात्मक पार्टी के 1920 के नागपुर अधिवेशन में महत्वपूर्ण था। प्रतिवर्ष दिसम्बर माह के अंतिम सप्ताह में कांग्रेस पार्टी का नियमित अधिवेशन होता था जो स्वतंत्रता के बाद 1965 तक चलता रहा। पं. जवाहरलाल नेहरु के निधन के बाद कांग्रेस पार्टी का वार्षिक अधिवेशन नियमित नहीं रहा। इस वर्ष 24 से 26 फरवरी कांग्रेस पार्टी का एक अधिवेशन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हो रहा है। इसके पूर्व कोई भी अधिवेशन छत्तीसगढ़ की सीमा में नहीं हुआ था। सबसे नजदीक जबलपुर के पास त्रिपुरी और नागपुर में अधिवेशन हो चुके है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह अधिवेशन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। इस अधिवेशन में कांग्रेस पार्टी इस वर्ष के अंत में होने वाले छत्तीसगढ़ सहित कई महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 में लोकसभा चुनाव की दृष्टि से चर्चा होगी। लंबे समय के बाद कांग्रेस पार्टी को गांधी, नेहरु परिवार के बाहर राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है। मल्लिकार्जुन खडग़े की अध्यक्षता में इस अधिवेशन में संगठनात्मक चर्चा होगी। 2004 से 2014 दस वर्षों तक डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार केंद्र में रही। इसके बाद लगातार दो चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिली है। कांग्रेस पार्टी के इतिहास में लगभग 50 के आसपास तक सीटों पर जीत आपातकाल के बाद कांग्रेस के सबसे बुरे काल में भी नहीं मिली थी। 2019 में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को हार मिली। इसके बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। लगभग 3 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी का कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं था, इसलिए संगठन का ढांचा बिखर चुका है। हाल में केवल 3 ही राज्य ऐसे है हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस पार्टी देश में कमजोर हो गई है लेकिन नेतृत्व का अभाव और दिशाहीनता के कारण पार्टी की स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले 4 महीनों से राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा कर रहे थे जिसे देशभर में अच्छा प्रतिसाद मिला है। नए अध्यक्ष का नेतृत्व और भारत जोड़ो यात्रा की सफलता के बाद रायपुर में होने वाले महाधिवेशन में इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस पार्टी को फिर से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना जरुरी है। कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी का कमजोर रहना भारतीय लोकतंत्र के लिए भी अच्छा नहीं है।

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ये नई संसद है, मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं है, विपक्ष बोल नहीं सकता : अधीर रंजन चौधरी https://samacharpacheesa.com/?p=6208 Fri, 10 Feb 2023 08:08:47 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6208 नई दिल्ली। हिंडनबर्ग रिसर्च को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा सवाल किए जाने का बचाव करते हुए कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि हमें किसी से बदले की भावना नहीं है। राहुल गांधी ने भाषण में जो कहा वह उनके विचार से कुछ नहीं था, बल्कि उन्होंने अमेरिका स्थित हिंडनबर्ग शोध पत्र द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों के आधार पर अपनी टिप्पणी की है।
उन्होंने ये भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 105 के अनुसार, हम संसद में अपने विचार बिना फिल्टर किए रख सकते हैं। यह दुख की बात है कि राहुल गांधी के विचारों को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। राहुल गांधी के मन में किसी से बदले की भावना नहीं है। मुझे ऐसा लगता है कि यह नई संसद है, मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं है; विपक्ष बोल नहीं सकता। मुझे लग रहा है कि संसद भी काम करना बंद कर देगी।
बता दें कि इससे पहले कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को लोकसभा में कहा था कि राहुल गांधी ने सदन में अपनी बात रखकर सही जगह वार किया है जिससे पूरी भारतीय जनता पार्टी उनके खिलाफ खड़ी हो गई है। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि राहुल गांधी ने भाजपा को ‘पप्पू’ बना दिया है।
चौधरी ने कहा था, पहली बार ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि भाजपा ने आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बना दिया। क्या यह सियासी फसल उगाने के लिए हुआ? पहले राष्ट्रपति की जाति, धर्म की बात कभी नहीं हुई। हम तो प्रधानमंत्री को ओबीसी की बात नहीं करते, हम प्रधानमंत्री बोलते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ऐसा लगता है कि सब कुछ राहुल बनाम भाजपा हो गया है। प्रधानमंत्री से पहले सारे ब्रिगेडियर को तैनात किया गया। उससे लगता है कि राहुल गांधी ने सही जगह वार किया। उनका तीर सही जगह लगा है। राहुल गांधी ने आपको पप्पू बना दिया।

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भारत जोड़ो यात्रा के समापन के बाद ‘तपस्वी’ राहुल गांधी ने लिया माता खीर भवानी का आशीर्वाद https://samacharpacheesa.com/?p=5989 Tue, 31 Jan 2023 07:51:56 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5989 श्रीनगर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के समापन के एक दिन बाद अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ जम्मू-कश्मीर के गांदेरबल जिले में मंगलवार को प्रसिद्ध खीर भवानी मंदिर में दर्शन किए। अधिकारियों ने बताया कि राहुल-प्रियंका श्रीनगर से 28 किलोमीटर दूर मध्य कश्मीर में तुल्लामुला इलाके में स्थित मंदिर पहुंचे। दोनों भाई-बहन ने माता खीर भवानी के नाम से प्रसिद्ध राज्ञा देवी के मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस के अन्य नेता भी थे। हम आपको बता दें कि 2021 में भी अपने कश्मीर दौरे के दौरान राहुल गांधी ने खीर भवानी मंदिर में पूजा अर्चना की थी।
खीर भवानी मंदिर की कश्मीर पंडितों के बीच काफी मान्यता है। मध्य कश्मीर में गांदेरबल जिले के तुल्लामुला गांव में चिनार के पेड़ों के बीच स्थित इस मंदिर में लगने वाले वार्षिक खीर भवानी मेले के दौरान कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र से कश्मीरी पंडितों के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मेले के दौरान श्रद्धालु नंगे पांव गुलाब की पंखुड़ियां लेकर मंदिर पहुंचते हैं तथा उन्हें राज्ञा देवी को चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर में सदैव मंत्रोच्चारण चलता रहता है। श्रद्धालु यहां दूध और खीर भी चढ़ाते हैं। इस मंदिर से जुड़ी एक विशेष बात यह है कि यह कश्मीर के विभिन्न समुदायों के बीच सदियों पुरानी उदार संस्कृति और भाईचारे का भी प्रतीक है। यहाँ लगने वाला मेला भी सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है क्योंकि खीर भवानी मंदिर के इलाके में भक्तों के लिए फूलों और अन्य प्रसाद के स्टालों की स्थापना सहित अन्य सभी व्यवस्था मुसलमान ही करते हैं।
इस मंदिर के बारे में यह भी मान्यता है कि मंदिर के नीचे मौजूद कुंड के पानी का रंग घाटी में मौजूदा स्थिति का संकेत देता है। कुंड के पानी के अधिकतर रंग का कोई विशेष महत्व नहीं होता है लेकिन पानी का रंग काला या गहरा हो जाना कश्मीर के लिए बुरे समय का संकेत माना जाता है। कश्मीर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक खीर भवानी मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण एक बहती हुई धारा पर किया गया है। इस मंदिर के चारों ओर चिनार के पेड़ और नदियों की धाराएं हैं जो इस जगह की सुंदरता पर चार चांद लगाती हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1912 में महाराजा प्रताप सिंह द्वारा करवाया गया तथा बाद में महाराजा हरी सिंह ने इस मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण करवाया। खीर भवानी मंदिर से जुड़ी एक प्रमुख किवंदती यह है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के समय इस मंदिर में पूजा की थी। वनवास की अवधि समाप्त होने के बाद भगवान श्रीराम ने हनुमानजी द्वारा यहां माता की मूर्ति स्थापित करवाई थी।

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