वसुंधरा राजे – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Thu, 10 Aug 2023 06:36:26 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 इधर वसुंधरा और उधर पायलट दरकिनार https://samacharpacheesa.com/?p=7773 Thu, 10 Aug 2023 06:36:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7773 वसुंधरा राजे प्रतीक्षा में हैं और सचिन पायलट शांत। दोनों धुरंधर, दोनों का जनाधार और दोनों ही दमदार। राजस्थान में चुनावी बिसात बिछ गई है, लेकिन फिर भी दोनों अपने अपने दलों में दरकिनार। विधानसभा चुनाव सर पर हैं और सबकी नजर इन्हीं दोनों नेताओं पर है। कांग्रेस में पायलट के रणनीतिक मौन के मायने तलाशे जा रहे हैं, और बीजेपी में राजे की राजनीतिक उम्मीदों के अवसान पर मंथन चल रहा है। जैसा कि साफ दिख रहा है, राजस्थान का विधानसभा चुनाव मोदी बनाम गहलोत होता जा रहा है, और बीजेपी में सभी नेताओं को भरोसा है कि उनकी सरकार हर हाल में बन जाएगी। शायद, इसीलिए बीजेपी की सबसे बड़ी नेता वसुंधरा राजे को कहीं कोई बहुत भाव मिलता नहीं लग रहा, तो कांग्रेस में भी पायलट के पलटवार करते करते तलवार को म्यान में धर देने के बाद लगभग दो महीने से मौन धारण करने से राजनीति में कई तरह की नई संभावनाओं की सुगबुगाहट होने लगी है। बीजेपी में वसुंधरा की अतिरिक्त सक्रियता और कांग्रेस में पायलट की परेशान कर देनेवाली निष्क्रियता राजस्थान की राजनीति को हैरान कर रही है। आलम यह है कि दोनों को अपनी अपनी पार्टियों में कोई खास महत्व नहीं मिल रहा। गहलोत को लग रहा है कि वे चुनाव जीत रहे हैं। इसके विपरीत, कांग्रेस में ही उनका विरोधी खेमा, पायलट समर्थक अपने ही मुख्यमंत्री गहलोत के हर दांव को खोखला बताते हुए पायलट की अगुवाई में चुनाव न होने के कारण कांग्रेस की बहुत बुरी हार का दावा कर रहा है। खुद पायलट भी निष्क्रिय बैठे हैं और आखिर कर क्या कर रहे हैं, कोई नहीं जानता। उधर, बीजेपी के लिए यह केवल विधानसभा का चुनाव नहीं, बल्कि अप्रैल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास भी है। फिलहाल राजस्थान की 25 में से 24 लोकसभा सीटें बीजेपी के खाते में हैं, और एक सीट उसके गठबंधन में हनुमान बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से जीती थी। इनके अलावा, राजस्थान में लगभग 7 से 8 प्रतिशत राजपूत वोटों पर कब्जा करने के लिए बीजेपी में विपक्ष के नेता राजेंद्र राठौड़, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और सांसद दीया कुमारी के अलावा कुछ और राजपूत नेता हैं। लेकिन राजस्थान की जनता इनमें से किसी को गहलोत या वसुंधरा की बराबरी का नेता मानती नहीं। इधर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और उसके इशारे पर प्रदेश नेतृत्व वसुंधरा राजे को किनारे करने में लगे हुए हैं। हाल ही में कांग्रेस सरकार के खिलाफ राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन हुआ, तो उसके प्रचार अभियान में भी वसुंधरा राजे पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स से भी गायब कर दी गईं। माना कि वसुंधरा राजे राजस्थान में बीजेपी की सबसे बड़ी नेता हैं, लेकिन पार्टी आलाकमान को उनकी स्वच्छंदता कतई पसंद नहीं और वसुंधरा को आलाकमान का अंकुश स्वीकार्य नहीं। फिर लगता है कि दोनों ही झुकने को तैयार नहीं।

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सचिन पायलट के सब्र का बाँध टूटा है https://samacharpacheesa.com/?p=6743 Thu, 13 Apr 2023 08:14:57 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6743 कांग्रेस ने पिछले साल उदयपुर में चिंतन किया, उसके बाद भारत जोड़ो यात्रा निकाली और इस साल रायपुर में महा अधिवेशन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में आमूल चूल सुधार को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कहीं, लेकिन नतीजा शून्य रहा। कांग्रेस नेताओं में उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक पार्टी छोडऩे की जो होड़ लगी है वह दर्शा रही है कि आजादी की लड़ाई लडऩे वाली यह पार्टी आजादी के अमृत काल में पतन की ओर बढ़ रही है।
दरअसल कांग्रेस को जिस तरीके से चलाया जा रहा है उससे खिन्न होकर सिर्फ अनुभवी और वरिष्ठ नेता ही नहीं बल्कि युवा भी पार्टी छोड़ रहे हैं। जो वरिष्ठ नेता और युवा अभी कांग्रेस में बचे हुए हैं वह पार्टी में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राजस्थान में कांग्रेस ने सचिन पायलट का जो हाल किया है उसको देखकर ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और हिमंत बिस्व सरमा आदि नेता शुक्र मना रहे होंगे कि सही समय पर कांग्रेस छोड़ दी वरना उन्हें भी ऐसे ही अनशन पर बैठना पड़ रहा होता। सचिन पायलट जो मुद्दे उठा रहे हैं वह सही हैं या गलत, इसकी विवेचना की बजाय यह देखना चाहिए कि कांग्रेस में कैसे युवाओं का हक मारा जाता है।
पिछले विधानसभा चुनावों के समय सचिन पायलट राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे जबकि अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर काम कर रहे थे। सचिन पायलट ने तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ जनमत तैयार कर कांग्रेस को जीत दिलाई लेकिन उनका हक मारकर गहलोत को दिल्ली से जयपुर भेजकर मुख्यमंत्री बना दिया गया। सचिन पायलट ने लगातार अपमानित किये जाने के चलते आवाज उठाई तो उन्हें गद्दार और निकम्मा बता दिया गया। उन्हें बार-बार धैर्य रखने के लिए समझाया जाता रहा लेकिन सब्र का बांध एक दिन टूटता ही है। अब राजस्थान में यह जो बाँध टूटा है उससे इस वर्ष होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बह कर सत्ता से बाहर जा सकती है।
वैसे बात सिर्फ राजस्थान तक ही सीमित नहीं है, जिस तरह छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच जंग छिड़ी हुई है वह भी चुनावी वर्ष में कांग्रेस के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है। यही नहीं, कर्नाटक में अपने को सत्ता के करीब देख रही कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद हासिल करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच की वो जंग भी ऐन चुनावों के समय जगजाहिर हो गयी है जिसे कांग्रेस अब तक दबाती आ रही थी। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को समझना होगा कि नेतृत्व की यह शिथिलता कांग्रेस को पूरी तरह ले डूबेगी।

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8 मिनट तक विधानसभा में पुराना बजट पढ़ते रहे गहलोत https://samacharpacheesa.com/?p=6199 Fri, 10 Feb 2023 07:53:02 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6199 जयपुर। राजस्थान में आज अशोक गहलोत सरकार की तरफ से बजट पेश किया गया लेकिन बजट  से ज्यादा अशोर गहलोत की भूल की चर्चा सुर्खियां बनी हुई है। दरअसल, सीएम गहलोत आठ मिनट तक विधानसभआ में पुराना बजट पढ़ते रहे। आखिरकार उन्हें कांग्रेस के मंत्री महेश जोशी ने टोका तो फिर सीएम को अपनी भूल का अहसास हुआ और इसके लिए माफी मांगी। लेकिन राजस्थान सीएम की इस भूल पर अब बीजेपी हमलावर हो गई है। बीजेपी की तरफ से कहा गया कि अगर सीएम इस तरह की बड़ी गलती करते हैं तो राजस्थान के लोगों का क्या होगा?
क्या है पूरा मामला
अशोक गहलोत ने आज विधानसभा में बजट पेश किया। उन्होंने बजट भाषण पढ़ना शुरू किया और यह महसूस करने से पहले कई मिनट तक चले कि वह जो बजट पेश कर रहे हैं वह पुराना है। ये कह जाना कि मैंने कोरोना में कितने लोगों को खाना खिलाया था। कितने लोगों का मुफ्त इलाज किया। फिर उन्होंने कहा कि मैंने मनरेगा की तर्ज पर शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू कर रहा हूं। लेकिन उन्हें तब भी ध्यान नहीं आया कि इस योजना को प्रदेश में लागू किया जा चुका है। लेकिन वो बस पुराने बजट को पढ़ते ही जा रहे थे। फिर गुलाब चंद कटारिया उठे उन्हें टोकने को लेकिन गहलोत ने उन्हें चुप करा दिया। फिर जब अधिकारियों में खलबली मची तो मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कान में जाकर सीएम को पुराना बजट पढ़े जाने की बात बताई। तब फिर अशोक गहलोत ने इसके लिए माफी मांगी। विधानसभा में पुराने बजट का कुछ अंश पढ़ने पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मानव त्रुटि से एक पेज लग गया था, उसी वक्त मैंने सॉरी महसूस किया जब मैंने अपने भाषण को रोका।
आई फिल सॉरी की राजस्थान का क्या होगा
वसुंधरा राजे ने कहा कि जो आपने किया है वो लापरवाही है। कोई भी मुख्यमंत्री इस तरह से बिना अपने बजट को पढ़े और अपने कागज को लेकर नहीं आता है। अगर इस तरह से होगा तो आई फिल सॉरी की राजस्थान का क्या होगा। उन्होंने कहा कि आठ मिनट तक सीएम पुराना बजट पढ़ते रहे। ये इतिहास में पहली बार ऐसी चीज हुई है। हम लोग भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मैं जब सीएम थी तो बजट को दो-दो बार पढ़कर उसे चेक करके लेती थी। जो मुख्यमंत्री अपने इतने बड़े डॉक्यूमेंट को बिना चेक किए पुराने बजट को पढ़ सकता है। आप समझ सकते हो कि उसके राज्य में कितना सुरक्षित है। मुद्दा ये है कि कोई सीएम बिना अपने बजट को पढ़े-देखे आता है। इतने लापरवाही के साथ पेश करने के लिए आए हैं तो आप अपने प्रदेश को किस तरीके से चला रहे हैं। वहीं भाजपा विधायक राजेंद्र राठौर ने कहा कि राजस्थान की विधानसभा आज कलंकित हुई है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जो बजट पढ़ा जाना था उसकी बजाय पूर्व के बजट का पठन करके विधानसभा को अपमानित किया गया।

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